ईशान शिवानंद shares his guru's teaching: work with full dedication, but give your family undivided attention. Constantly checking your phone while ignoring your spouse and children creates distance that turns them into strangers. Set boundaries between work and family time.
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मेरे गुरु ने मुझे सिखाया बेटा इतनी मेहनत करो। ताकि वैन्यू एंड र डे यू एंड लाइक यू। मिनट अगर दिन में मेहनत नहीं करोगे तो वही काम चलता रहेगा, सेल्फ फोन चलता रहेगा, ईमेल चलता रहेगा। मेरे गुरु ने कहा बेटा, मैं तुझे ये ब्लेसिंग देता हूँ कि जब तू कुछ भी करे, यू डू इट लाइक यू। मिनट तुम अपने परिवार को सर्व श्रेष्ठ क्या दे सकते हो। मैंने भी सोचा क्या दे सकता हूँ। मेरे गुरु ने बताया तुम 1 ही चीज देख सकते हो। और वो है अनडिवाइडेड। अटेंशन अपना समय। कहीं ऐसा तो नहीं अपने फ़ोन को देखते रहते हो, काम को ही देखते रहते हो, पत्नी को देखा नहीं, 10 साल बाद जब देखोगे डरोगे घबराओगे की यह बुढ़िया कौन है, फिर उसकी भी गलती नहीं क्यूँकी? तुमने तो देखा ही नहीं। कहीं ऐसा तो नहीं। तुम्हारे बच्चे तुम्हारी शकल भूल गए। केवल तुम्हारे स्तर को घूरते रहते है। तुम्हारी आँखें तो नीचे कहीं? ऐसा तो नहीं कि अपने साथ भी तुमने समय व्यतीत ही नहीं किया। नियम बांधना होगा, तब करना होगा।