Give purpose to your life. Purpose of Sewa | Prati Prasav Sadhna @IshanShivanand

Ishan Shivanand teaches that true purpose comes from self-realization and selfless service, not positive thinking. He argues that Shiv Yoga transforms you at the cellular level, naturally awakening a compulsion to serve others and share what you've gained.
Chapters
हमारे गुरु, हमको ट्रस्ट करते हैं, ज्ञान दे रहे हैं। तुम कितनी भी किताबें पढ़ना चाहो पढ़ लो, पिछले 200 साल में जितने भी संत हुए, चाहे कितने भी चमत्कारी क्यूँ नहीं थे, आये चमत्कार किए गए, कभी। ये नहीं बताया, कैसे ब्लेसिंग दी और गए। सनातन। 1 विद्या है, सनातन साधना है, सनातन शिव योग है। और वही मेरे गुरु फिर सिखा भी रहे हैं। ताकि जब तुम्हारा बेटा, किसी दिन तुमसे पूछे, बाबूजी, ये क्या है? ये हम टीवी चैनलों में देखते हैं। ये विश्वामित्र बैठ कर क्या कर रहा है? ये बैठक और तुम बोलो सीखना चाहता है। मैं तुझे बताता हूँ। मेरे गुरु ने मुझे बताया था, पता तो होना चाहिए। और 1 शिवयोगी जब देखता है कि विकास हो रहा है। अपने आप सेल्स बदल जाती है, बायो केमिस्ट्री बदल जाती है, अपने आप भीतर प्लसबो जागरत होना शुरू हो जाता है, अपने आप पोडेनियसरेमिशन चालू हो जाता है, अपने आप एस एन पी बदल जाती है, सिंगल नुक्लटाइटपोलिमाफिज्म होना शुरू हो जाता है। हर सेल के भीतर जो स्वास्थ की जीन से जाग्रत होती है। और अपने आप जो विचित्र जीन, तुम जागृत किए बैठे थे, तुम उन्हें डारमेंट कर सकते हो। लेकिन अगर इंसान खुद का विकास नहीं करेगा, विकास करेगा, जरूर फिर वस्तुओं का विकास करेगा। और वस्तुओं के विकास में फिर मोमबत्ती के समान है। प्रकाश तो देगा, लेकिन खुद खत्म हो जाएगा। विकास तो हृदय का होना चाहिए, मन का होना चाहिए, शरीर का होना चाहिए, प्रेम का होना चाहिए। क्वालिटेट न क्वांटिटेटिव और वो केवल साधना से होता है। अगर भीतर विकास है, तो सुख है, स्वास्थ्य सफलता है। और आखिरी चीज जो पाई इन वैज्ञानिकों ने की, कैसे वो शिव योगी स्वस्थ होता है। जब उन्होंने शोध किया, इन सब शिवयोगियों को ऊपर जिनके, जीवन में चमत्कार उत्पन हुए, तो ये चौथी चीज कॉमन थी? इन सब के भीतर चौथी ध्यान से सुनना, समझना समझोगे तो शायद जीवन बदल जाएगा। और वो थी परपस और परपस का। मतलब ये नहीं कि तुम क्या चाहते हो, परपस का मतलब ये कि तुम प्रकृति को क्या लौटना चाहते हो। परपस का मतलब सेवा। मजे की बात। तो ये 1 बार मेरे बेटे ने मुझसे पूछा, पापा, आपने और मम्मी में फर्क क्या है? मैंने कहा बेटा सिम्पल, पापा और मम्मी में फर्क यह होता है की अगर स्वादिष्ट खाना है, पापा और जल्दी खाता है। और अगर स्वादिष्ट खाना है तो मम्मी फटाफट खाने को बटोर कर अपने बच्चे के पास लेकर जाती है। और कहती है बेटा, थोड़ा तू भी खा कर देख, बहुत स्वादिष्ट है। माँ का प्रेम हमेशा बाटता है। और जिस व्यक्ति के भीतर सच्चा प्रेम है, अगर उसको कुछ दिव्य मिलता है, वो बाटना चाहता है। बोलो हाँ जी, ना जी, जो व्यक्ति शिवयोग में आता है, उसके जीवन में उसका इतना भला होता है कि अपने आप 1 सेवा का भाव उत्पन होना शुरू हो जाता है। कि जहाँ मुझे प्रकृति ने इतना दिया, मैं भी उसको बात अगर शिवयोग से मेरा जीवन बदला तो यह ज्ञान आगे फैलना चाहिए। अगर भगवान ने मुझे सफलता दी, तो ये सफलता भी आगे फैलनी चाहिए। अगर मुझे खुशी मिली तो यह खुशी फैलनी चाहिए। और 1 शिवयोगी के भीतर अपने आप 1 भाव आता है कि हे शिव, शिवा नदियाँ बहती रहे, वृक्ष फलों से लदे हो, भरपूर फसले हो, हर माँ अपने बच्चे को खाना दे, सके और तुम देखना जितने शिवयोगी है, सेवा कर रहे हैं। और जब तुम सेवा करोगे, जब तुम दुनिया का भला करोगे तो दुनिया बहुत ब्लेसिंग देगी, जब ब्लेसिंग देगी, अच्छा लगेगा, जब किसी के लिए कुछ करते हो और उसका जीवन बदलता है तो अच्छा लगता है, जब अच्छा लगता है तो अपने आप भीतर से ही लिंग जाग्रत होती है। तो ऐसा नहीं है कि 1 शिवयोगी को केवल शिविर में साधना मिल रही है, उसको बिलोंगिंग मिल रही है, परिवार मिल रहा है 1 बड़ा परिवार, जिसके पिता इतने अच्छे 1 शिवयोगी को 1 पर्पस मिल रहा है सेवा करने का मौका 1 शिवयोगी को विकास विकसित होने का मौका मिल रहा है, 1 शिवयोगी को नरेटिव पर्पस मिल रहा है कि अगर जीवन मिला है तो उस जीवन का करना क्या है? लक्ष्य, साधना और जब इतना सब कुछ मिल जाता है तो अपने आप नेगेटिव को छोड़ना नहीं पड़ता, नेगेटिव छुट जाता है। अगर छोड़ने की कोशिश करोगे। हार जाओगे सोचो 363 सोच सकते हो 363 हाँ जी ना जी 363-363-363 बहुत अच्छे भूल जाओ, इसी समय भूल जाओ क्या भूलने को कहा मैंने न जाने क्यों लोग किताब पढ़ते है। पॉजिटिव थिंकिंग के ऊपर काम नहीं करती, क्योंकि वो यही कह रही है मत सोचो 363 क्या नहीं सोचो 363 क्या नहीं सोचना 363 है, तू भी मत सोच 3333 खराब 363 नहीं सोचना इतनी बार अगर तुमने रख लिया 363 फिर तो तुम रात को भी सोओगे। तो 33 और सुबह तुम्हें मैं पूछूंगा तुम्हे क्या भूलना था तुम बोलोगे 36 दिन भूलना था, देखो मैं तो भूल गया 363 मुझे नहीं पता पॉजिटिव थिंकिंग छोड़ने से नहीं छोड़ा जाता, लेकिन जब कुछ और पकड़ते हो तो अपने आप छूट जाता है। पोस्टिव थिंकिंग नेगेटिविटी छोड़ने से नहीं आती, शिवयोग तुम्हें दिव्यता पकड़ा देती है और नेगेटिविटी छुट जाती है, क्योंकि अब तुम व्यस्त हो उस दिव्यता को बटोरने में, तो कहाँ पकड़ोगे इन छोटी व्यर्थ चीजों को taeoatute।










