In this Hindi monologue, Ishan Shivanand reflects on how his early life was shaped by the Shiv Yoga Sanatan tradition and his guru’s teachings. He recounts the historical lineage of Sanatan saints, highlighting the king‑scholar Lalitaditya of Kashmir who renounced his throne to become a Shiv‑Yogi saint, illustrating the power of spiritual role models. Shivanand emphasizes the principle that individuals become what their heroes are, noting that repeated actions in one area translate to broader life habits. He then turns to parenting, arguing that while providing material comforts is important, parents must also instill moral and spiritual principles—specifically Shiv Yoga and Sanatan values—to prevent children from becoming overly soft or weak. He cites the adage “tough times create tough people, tough people create good times, good times create soft people, soft people create tough times” to illustrate societal cycles. The talk concludes with a call for parents to work hard, serve as principled models, and embed Shiv Yoga teachings in their children’s upbringing.
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देखो जब मैं छोटा था, मेरा बहुत अच्छा भाग्य था कि मुझे मेरी प्रेरणा, मेरे गुरु से मिली, शिवयोग सनातन परंपरा से मिली और शिवयोग सनातन परम्परा बहुत कीमती है क्योंकि शिव योग सनातन में मैंने सीखा कि सनातन गुरुओं के कौन कौन शिष्य थे। इतिहास में कभी भी उन शिष्यों के बारे में नहीं लिखा होगा मैंने ज्यादा पढाई लिखाई तो नहीं की लेकिन जब जितना मैं स्कूल गया तो बहुत 1 छोटी हिस्ट्री दिखाई पड़ती थी लेकिन जब मैंने सनातन परंपरा पड़ी तो मैंने पढ़ा कि सनातन परंपरा में सिद्धुओं के शिव गुरुओं के ऐसे ऐसे शिष्य थे जैसे परमवीर ललितादित्य ललितादित्य जो कश्मीर के राजा थे, जिनको वेस्ट में अलेग्जेंडर और कश्मीर भी कहा जाता है जिन्होंने इतना बड़ा राजपाट बनाया था और वो कभी हारे ही नहीं युद्ध में और जब उन्होंने इतना बड़ा राजपाट बना दिया फिर 1 समय के बाद उन्होंने सन्यास ले लिया, राजपाट छोड़ के वो शिवयोगी परंपरा के सिद्धों के पास आ गए और अपने समय में वो भी 1 बहुत बड़े संत बने तो ऐसे इतिहास से, सनातन के सिद्धों से मैं प्रेरणा लेता था और फिर जब मैं अपने गुरु को देखता था तो बाबाजी भी मुझे देख कर कहते थे मैं हूँ हीरो tera and you become what your heros are as simple as that और मैंने 1 चीज अपने जीवन में सीखी हाव यू डू वन थिंग यू विल डू रीथिंग, तुम जैसे 1 चीज करते हो वैसे तुम अपने जीवन में हर चीज करते हो तो अगर हमारे जीवन में हमारे ही रोज़ जो हमें प्रेरणा देते हैं वो अनाब शनाब अलूल जरूर हरकतें करेंगे तो हम उनसे ऐसी हरकतें सीखेंगे और फिर जैसे हम 1 चीज करते है वैसे हम सब कुछ करना शुरू कर देंगे और अगर हम जीवन के किसी भी 1 स्थान पर अलूल जलूल हो जाते हैं फिर पूरा जीवन ही अलूल जलूल होना शुरू हो जाता है धन्य है वो माता पिता जो किसी न किसी तरीके से अपने बच्चों के जीवन में शिवयोग लेकर के आते हैं क्योंकि ज्यादातर क्या होता है माता पिता अपने बच्चे के लिए कुछ करना है तो हम अपने बच्चे के लिए कमाएंगे और माता पिता नही सोचते की देखो पूत कपूत धन क्यूं संचय पूत सपूत धन संचय बहुत अच्छी बात है अपने बच्चों के लिए कमाना चाहते हो बहुत अच्छी बात है आप बच्चों को बहुत सारी सुविधाएं दे रहे हो लेकिन बहुत बार ऐसा होता है कि उन सुविधाओं में बच्चा बहुत नरम हो जाता है, बहुत वीक हो जाता है और फिर गलतिया करता है वो कहावत है न टफ टाइम्स क्रिएट टफ पीपल टफ पीपल क्रिएट गुड टाइम्स गुड टाइम क्रिएट सॉफ्ट पीपल एंड सॉफ्ट पीपल क्रिएट टफ टाइम्स इसलिए मैं तो कहता हूँ माँ बाप को अच्छा है अपने बच्चों के लिए मेहनत करो लेकिन अगर अपने बच्चों से सही मायने में प्रेम करते हो तो आपको अपने बच्चों को प्रिंसिपल्स देना है, आपको अपने बच्चों को मॉडल्स देना है, आपको अपने बच्चों को शिव योग, सनातन देना है odeo।