Ishan Shivanand argues that helicopter parenting and constant logical control turn children into robots instead of independent thinkers. He calls for caregivers to step back, let kids explore and make mistakes, and respect their natural development rather than treating them as finished products to be managed.
Chapters
और agar tumhare intension अपने बचों shita krna try to bring son methi यू must reliजe कि जो तुम देख रहे हो it इज नौट आ फाइनल प्रोडक्ट it is a प्रोसेस अगर तुम दुखी हो जाते हो अपने बच्चों को देख के, तो तुमने स्वीकार कर लिया इस फाइनल प्रोडक्ट जहाँ तुमने छाती पीटी और कहा आय आय तो तुमने कह दिया दिस इस द फाइनल प्रोडक्ट इट इज नौट फाइनल प्रोडक्ट प्रोसेस अगर तुम अपने बच्चों की सहायता करना चाहते हो। दैन यू मस्ट गो बियोंड पशुभाव मनुष्य भाव का मतलब ठीक है जो मैं देख सकता हूं, ठीक है, लेकिन और भी नियम हैं, कायदे कानून है जिनको मैं सीख के अपने वर्तमान को बदल सकता है। लॉजिकल पेरेंटिंग किसी न किसी तरीके से मैं अपने बच्चे को स्कूल में डाल 2 किसी न किसी तरीके से मैं अपने बच्चे को ये सिखा दूं वो सिखा 2 लॉजिकल पेरेंटिंग को आज की तारीख में भी कहते हेलिकॉप्टर पेरेंट, हर समय अपने बच्चे के सर पर बैठा हूँ और उसको सोचने का मौका भी न दूं क्यों क्यूँकि मुझे पता है लॉजिकल में मैं मनुष्य हूँ, मैं जानता हूँ उसके लिए क्या सही है मुझे पता है मुझे पता है तो मैं उसके लिए सोच बहुत अच्छी बात है। हेलिकॉप्टर पेरेंटिंग लॉजिकल पेरेंटिंग मनुष्य भाव वाली पेंटिंग, लेकिन समस्या क्या है की जब आप भी अपने बच्चों के लिए सोचोगे हर कण हर समय और जब आपका बच्चा सोचेगा आप उसको बोलोगे चुप मुझे पता है तो धीरे धीरे धीरे धीरे वी आर नोट रेजिंग चाय वी आर रेजिंग रोबाट।