How to deal with a bully at home: Mindful Matters with Ishan Shivanand

Ishan Shivanand shares a story about a hostile clerk to explore how bullying works at home. Bullies use gaslighting and intermittent reinforcement to create confusion and dependency. He draws on Hindu epics and mindfulness to argue that self-respect and firm boundaries, not external validation, neutralize toxic people.
Chapters
आप सब को, आप सब के भीतर के भगवान को मेरा प्रणाम और 1 बार फिर मैं आप सबका स्वागत करता हूँ। माइनफुलमाटविदशान शिवानंद में आज 1 बहुत मजेदार घटना घटित हुई, मेरे सा मैं 1 गवर्नमेंट ऑफिस में काम करने गया और जब मैं काम कर रहा था तो सामने जो महिला क्लर्क बैठी थी वो होता है न कुछ लोगों को देख के पता चल जाता है कि काम ढंग से नहीं होने वाला तो जैसे ही मैं उसके सामने जाकर बैठा वो अकड़ गई। और कुछ लोग होते हैं ऐसे जो अपनी शक्ति का गलत इस्तेमाल करते हैं दूसरे लोगों को तंग करने में उनको अच्छा ही तभी लगता है जब सामने वाले को दबा सको आप को ऐसा सोचो आपकी गाड़ी को पेट्रोल चाहिए तो या तो आपके देश में पेट्रोल होगा तो आप अपनी गाड़ी चलाओगे और अगर आपके पास पेट्रोल नहीं तो आप दूसरे के देश पर आक्रमण करोगे उससे पेट्रोल छीन कर के लाओगे। उसी प्रकार से कुछ लोगों में सेल्फ रिस्पेक्ट नहीं होती है और उनको रिस्पेक्ट अगर चाहिए। तो दूसरों की इज्जत उतारते हैं। तो फील रिस्पेक्ट, फुल, टू, बी, इक्वल, टू, फील इंटेलिजेंट। तो जैसे ही मैं बैठा वो औरत शुरू हो गयी कि क्या है क्या नई हैं ऐसा वैसा बुलिंग बिहेवियर गलत व्यवहार में चुपचाप बैठा रहा क्यों? क्योंकि मैंने रामायण पढ़ी है और मैं हनुमान भगत हूँ और भगवान हनुमान ने मुझे सिखाया कि जब आप उड़ते हुए जा रहे हो लंका तक तो रास्ते में सुरसा आ सकती है, असुर आ सकती है और हर सुरसा, हर असुर से तुम्हें लड़ने की जरूरत नहीं कभी कबार असुर के सामने झुक जाओ, छोटे हो जाओ और निकल जाओ क्योंकि तुम्हारा लक्ष्य सीता है। मैं अगर उस गवर्नमेंट ऑफिस गया था, मेरा भी 1 लक्ष्य था और मेरे सामने यह सुरसा खड़ी हो गयी और जोर जोर से चिल्लाने लगी, मुझसे लड़ मुझसे लड़ लेकिन मेरे दिमाग में मेरा लक्ष्य था और मेरा लक्ष्य था मुझे अपना काम निकलवाना है और देखो जब कोई बुलि सामने आता है तो अगर आपके पास लक्ष्य है आप बच सकते हो अगर लक्ष्य नहीं तो देखो जिस किसी से भी लड़ोगे उस व्यक्ति जैसे बन जाओगे, सुअर से अगर लड़ना है टीचर में कूदना पड़ेगा खुद सुअर बन जाओगे। तो मेर को तो सुरसा से लड़ना था ही नहीं, मैं चुप चाप गया, उसने जो सुनाना था सुनाया, मैंने कहा मैडम जी आपको जो करना है करो, आप मेरा काम कर डाला, शान्ति से मैंने अपना काम कराया। और मैं उठ के वहाँ से आ गया और किसी व्यक्ति ने मुझसे पूछा आप इतने शांत कैसे थे? मैंने कहा क्यूँ की मुझे कभी इस महिला की शकल फिर कभी देखने नहीं, मैं कौन सा इसके साथ रिश्ता उत्पन कर रहा हूँ या उत्पन्न करना चाहता हूँ। मेरा 1 लक्ष्य था मेरे लक्ष्य की पूर्ति हो गई और मैं जानता था मुझे इस महिला के साथ मेरा कोई लेना देना नहीं और फिर उस व्यक्ति ने 1 बहुत मजेदार सवाल पूछा कि यहाँ पर आप क्रोधित नहीं हुए? क्योंकि आपको इस व्यक्ति से नहीं मिलना, इस बोली से फिर कभी नहीं मिलना। या आपके रास्ते में कभी नहीं आएगा। लेकिन हम तब क्या करें जब हमारे घर में बुली बैठा है। जब हमारे घर के अंदर हमारे रिश्तेदार ही ऐसे बुली हैं जो हमें दबा देते हैं। जिनकी खुद की इज्जत हमारी इज्जत उतारने में है, जिनका सुख क्या किया जाए। हाऊ डू यू हैंडल। अबुली तो आज माइंडफुल मैटर्स में मैं आपसे यही बात करना चाहता हूं। हाऊ टू हैंडल, बुली एट होम, हाऊ टू हैंडल। दर इस टॉक्सिक पर्सनैलिटी जो आप ही के घर में बैठी है, जो आप ही को तंग कर रही है। क्योंकि अगर घर में ही 1 सुरसा बैठी हो तब बड़ा मुश्किल हो जाएगा। भगवान हनुमान ना होगा कि किस प्रकार से हम इन घटनाओं में पड़ जाते हैं। तो सबसे पहले तो मैं बात करना चाहता हूँ। आपसे जो बुली हो रहा है। सबसे पहली चीज जो आपको समझनी होगी कि यू विल हैव, टू लर्न। तो ट्रस्ट यो आपको अपने पे सबसे पहले विश्वास कायम करना होगा। यह इसलिए क्योंकि अंग्रेजी मनोविज्ञान में 1 शब्द है जिसको कहा जाता है गैस लाइटिंग। 1 बुली की ताकत तुम पर तब है। 1 बुली का प्रभाव तुम पर तब है। असुर का प्रभाव तुम पर तब है। अगर तुम कमजोर हो और तुम कमजोर तब पढ़ते हो जब तुम्हें अपने आप में विश्वास नहीं। और गैस लाइटिंग का मतलब 1 तरीका जिससे हम किसी को इमोशनली मेन्युप्लेट कर सकते हैं, उसको यह विश्वास करा के कि उसके जितने भी विचार है, उसके जितने भी सोच है, वो गलत है। तो सबसे पहले जो तुम्हारे घर में बुली बैठा है, उसका यही काम होगा। तो प्रूफ दैट, यू आर रॉंग की तुम्हारी सोच सही नहीं, तुम्हारे भाव सही नहीं, तुम्हारी इमेजिनेशन सही नहीं, तुम कुछ भी बोलोगे। तो सबसे पहले तुम को दबा देगा। अगर तुम उसके सामने दब गए, फिर भी ठीक, लेकिन अगर तुम अपने मन में अपने लिए दब गए तो बहुत खराब है। क्यूंकि आप देखो। जब मुज़ात कुछ करना चाह रहा था तो वो प्रकृति से भिन्न था, लेकिन उसके मन में वो सही था। तो वो अपने पैशन के पीछे गया। जब आइंस्टाइन कुछ करना चाह रहा था, तो हो सकता है कि जिस क्वांटम फिजिक्स की वो बात कर रहा था, आइंस्टाइन से पहले शायद वो थी ही नहीं। तो अपने मन में अपने लिए 11 रिस्पेक्ट थी। जिस रिस्पेक्ट को उसने नहीं छोड़ा दे, नेवर डाउटे देयर। ओन सेल्फ कोई आपको गैसलाइट तभी कर सकता है जब आप अपने आप को डाउट करो। जब आपके प्रति अपने लिए सेल्फ रिस्पेक्ट न हो, तो सबसे पहले तो जो आपको समझना होगा कि जो बुली है ही इज नौट द, जज अगर वो आपको कहता है, आप बुरे हो तो आप बुरे नहीं हो, हो सकता है उसका मन बुरा है, हो सकता है उसके विचार बुरे हैं। इसलिए उसको हर चीज बुरी दिखती है। लेकिन किसी के कहने से ना तो आप बुरे हो, किसी के कहने से आप न गलत हो। अगर सबकी आपने सुननी शुरू कर दी और सबके लिए अपने आप को एडिट करना शुरू कर दिया। तो बेचारे आप भटक जाओगे। 12 साल की उम्र तक मैं आश्रम में पला पढ़ा। फिर न जाने क्यों मेरे माँ के भीतर 1 इच्छा आई कि मैं वेस्टन स्कूल में जाऊँ। अब जब मैं वेस्टन स्कूल में गया, मेरे गले में श्रीयंत्र है, मेरको था खाना खाने से पहले पूजा करो। मुझे था भगवान का धन्यवाद करो। मुझे था। हर 1 टीचर को हाथ जोड़ कर नमस्कार करो, यही मेरको आचरण दिए गए। यही मुझे शिक्षा दी गई। जब यही शिक्षा मैं वेस्टन स्कूल में लेकर गया, बच्चे मुझे चिढ़ाते थे, आस्ता चैनल आस्था चैनल में, जब 1 कमरे में चलता हुआ जाता, बच्चे कहते देखो आस्ता चैनल चला आ रहा है। 34 महीने तक उन्होंने मेरा मजाक उड़ाया। मैंने भी कहा ठीक है उड़ा लो। लेकिन आई नेवर डाउटे माई ओन सेल्फ फिर कॉम्पिटिशन होने शुरू हुए। जब कॉम्पिटिशन हुआ डिबेट का मैं फर्स्ट, जब मार्शल ट्स का हुआ, तब मैं फर्स्ट क्यूँ क्यूंकी। वो तो सिर्फ ऐसा हॉबी कर रहे हैं। लेकिन जब मैं छोटा था आश्रम में मुझे तो ये सभी कलाएं सिखाई गयी थी। मेरा मेरी जिंदगी थी हॉबी, जब पढाई की बारी आई, मुझे कोई स्ट्रेस नहीं तो पढाई में भी मैं अपने आप सबसे आगे। तो जब फुटबॉल टीम में था, फुटबॉल में मैंने अपनी टीम के लिए 23 गोल मारने शुरू कर दिए। तो मजे की बात, जब कोई बच्चा कहता आस्था चैनल चलता आ रहा है, तो मेरे टीम के बाकी 10 प्लेयर कुछ बच्चे को चुप करा देते। मैंने कभी किसी को कुछ कहा नहीं। आई नेवर डाउटे माई सेल्फ और मजे की बात जो फिर मेरी टीम थी, जो मेरी फुटबॉल टीम थी, उसने भी मेरे आचरण करने शुरू कर दिए, बटोरने शुरू कर दिए। क्योंकि उनको भी लगा कि तुम इतने गोल कैसे मारते हो, तुम इतने अच्छे कैसे हो अपने काम में, अपनी प्रक्रिया में, तो उनको लगा की हाँ ये आचरण उठाने लायक है। अगर हर बुली की गलत बात सुनके आप भी बिखर जाते हो तो बुली की जीत है। लेकिन अगर आप अपने कर्म, अपने विचार, अपने आचरण, अपनी संस्कृति को नहीं छोड़ते तो बोली अपने आप फिर दबे पाँव, अपने रास्ते चला जाएगा और दुनिया को समझने का वक्त मिलेगा की आप सही हो। you are a passion creater and that is how fassion is mad fassion is made by smon, who says i will do, because i feel it is right, since is made by someone, because they think they feel it is right। यू मस्त अलॉव योर सेल्फ टू फील ं यू मस नेवर क्वेश्चन योर फीलिंग सो ट्रस्ट ट्रस्ट योर गोट डोंट लेट एनीवन गैस लाइट यू बुली की जीत ही इस चीज में है। तुम्हें बार बार सिखा के बोल के कि तुम गलत हो, तुम गलत हो, तुम गलत हो, उसके सामने है जरूर बोल देना, सुरसा के सामने झुकना पड़े झुक जाओ, लेकिन कभी अपने सामने मत झुकना, अपने आप को कभी मत सिख। ये तो है पहली बात, दूसरी बात जो समझने लायक है के जो बोली है, वो 1 ऐसी प्रक्रिया का इस्तेमाल करेगा जिसको स्किनर ने कहा है। इंटरमिटेंट रिवार्ड। स्किनर ने 3 चूहे लिए, he was a behaverialsycologist, who did a lot of research and what makes stick and the effect of the invirment on a being। तो स्किनर ने 3 चूहे लिए, 1 चूहे के सामने उसने 1 ट्यूब रखी। जब ट्यूब का वो बटन दबाता था चूहा, तो ट्यूब से। हर बार जब बटन दबाएगा खाना मुंह में आएगा, तो मजे की बात। चूहे को उस ट्यूब से कोई प्रलोभन नहीं था। जब उसको भूख लगती, बटन दबाता खाना खाता, अपने काम से आगे बढ़ जाता। दूसरे चूहे के सामने उसने पाइप रखी पाइप में बटन रखा। बटन दबाने से कभी खाना बाहर नहीं आता। ऐसे चूहे ने भी बटन दबाया। खाना नहीं आया, तो चूहे ने मुह ही छोड़ दिया बटन दबाने से। और चूहा आगे बढ़ गया। तीसरे चूहे के सामने। स्किनर ने पाइप रखी और मजे की बात। जब उस पाइप में बटन चूहा दबाता था, तो कभी कबार खाना आता था, और कभी कबार खाना नहीं आता था। रैंडम ली, कभी खाना आता था, कभी खाना आता ही नहीं था। तो चूहा पागल हो गया। चूहा असेस हो गया। चूहा दबाता रहता था कि अभी शायद मिल जाए, अभी शायद मिल जाए, अभी शायद मिल जाए, अभी शायद मिल जाए। और इस पागल पन में चूहा 1 ही काम करता था, बटन दबाता रहता था। स्किनर के चूहे की तरह। हम लोग हैं, हमारे भी कुछ प्रियजन है जो हमेशा हमसे प्यार करते हैं। शायद हमारी माँ और उस माँ पर हम ज्यादा ध्यान नहीं देते। जब कभी भी प्यार चाहिए, जाते हैं, बटन दबाते हैं, और अपने काम में आगे बढ़ जाते है। वो माँ हमें ताकत देती है। जहाँ कहीं भी दुनिया में बैठिये ताकत देती है। कुछ हमारे प्रियजन हैं जो हमें प्यार कभी देते ही नहीं। उनके साथ भी हमारा कोई लगाव नहीं। ठीक है। हम आगे बढ़ जाते हैं, मैचोर हो जाते हैं, लेकिन कुछ प्रियजन हैं जो हमें समझ नहीं आता। जो कभी तो हमें तार के पेड़ पर चढ़ा देंगे, जो कभी बिना बात के हमें जूता मार देंगे। ऐसे प्रियजनों के साथ हम अपसेस्टहैक्यूँकि जो बोली है, वो मेन्युप्लेट करने की कोशिश करता है। बिना बात के कभी सुख दे देगा, बिना बात के कभी दुख दे देगा। और तुम बहुत आस्था के साथ उसके सामने बैठे रहोगे, उस चूहे की तरह जो बटन दबाता रहता है। कि आज इससे सुख मिल जाए। और अगर सुख नहीं मिलेगा। तुम अपने आप को कोसोगे, कि शायद मैंने ही कुछ गलत किया था। और अगर सुख मिला, तो फिर तुम खुश हो जाओगे। बटन दबाते रहोगे। तो दूसरी चीज जो यहाँ पे समझने लायक है, अपना सुख कभी किसी के हाथ में न। 2 तुम्हारा सुख, तुम्हारे लिए तुम्हारे भीतर से निकलना चाहिए। और अगर कुछ और भारी सुख चाहते हो। शायद इसलिए संतो ने भगवान का निर्माण किया, वेदों का निर्माण किया, शास्त्रों का निर्माण किया, या तो स्वयं से, स्वयं के लिए प्रेम, मांगो सेल्फ लव और या उस अनंत से प्रेम मांगो अपने लिए। और तब ये मत समझना की सेल्फ लव कोई छोटी चीज है जिम में? बैठा बॉडी बिल्डर जो अपनी मसल्स बनाता रहता है, वो खुद से बहुत प्रेम करता है। खुद से प्रेम नहीं होगा। तो वो बैठ के छोले बटूरे खा रहा होगा। लाइबरेरी में। बैठा स्कॉलर किताबें पढ़ता रहता है क्यूंकि वो खुद से प्रेम करता है, वो खुद को अपने काम के शिखर पर पहुँचाना चाहता है। और अगर खुद से प्रेम नहीं होगा तो बैठा होगा कहीं पर फूक रहा होगा। खुद से प्रेम करता हुआ एक्टर भी अपने डांस स्टेप को प्रैक्टिस करता रहता है, करता रहता है। क्यों ताकि जब वो सिनेमा में बड़े पर्दे पर आये, तो उसका डांस स्टेप इतना बखूबी हो कि पूरा देश नाच पड़े। अगर खुद से प्यार नहीं होगा तो ड्रग के साथ नाडी शोधन करता। मिलेगा किसी कोने में खुद से प्रेम बहुत कीमती है। जिस व्यक्ति ने खुद से प्रेम किया, वो आगे बढ़ जाएगा। और जिसने दुसरो से प्रेम मांगा, वो बुलियों का आधीन हो जाएगा। तो इसलिए अगर प्रेम चाहिए। खुद से मांगो और या उस अनंत से। और ये इंटरमिटेंट रिवार्ड वाले इनको तुम छोड़ ही देना, क्योंकि तुम कुछ भी कर लो, इनका भला नहीं कर पाओगे। भगवान कृष्ण भी आये थे, इतने ज्ञानी थे, लेकिन जब तक दुर्योधन नहीं बदलना चाहता हो, भगवान कृष्ण से ही लड़ जाएगा। ईवन गोड, हेल्प दोज हू वान्ट टू, हेल्प देम सेल्फ तीसरी चीज। इसको मनोविज्ञान कहता है? संग कोस्ट फैलेसी, इसके प्रलोभन में मत पड़ जाना। संग कोस्ट फेलिसी का मतलब हमें डर लगता है। अ नॉन डेविल इस बेटर तो उस दैन अननोन ट्रुथ, हमे उठ के जाने में डर लगता है। 1 जुआरी है, वो बैठा होगा, उससे जुआ छोड़ा नहीं जाएगा, उसको डर लगता है। उठ के चले गए। तो 1 पत्नी है एब्यूसिव रिलेशनशिप के अन्दर। और उसका पति उसी को मारता पीटता है, उसी के बच्चों को मारता पीटता है। लेकिन पत्नी डरती है की मैं कहाँ जाऊँगी, क्या होगा। हमें डर लगता है, छोड़ने में डर लगता है। और अगर तुम पाते हो कि तुम भी डर चुके हो। और तुम्हें है कि ये ये जो गलत हो रहा है, यही सही, क्योंकि दुनिया शायद और भी गलत है। तुम यह मत समझना हल्की, हार जीत नहीं होती, हल्की, हार भी हार है। तुम घर आए। और तुमने देखा, गाली पड़ी थप्पड़ तो नहीं पढाना, हम जीत गए, ये जीत नहीं है, ये भी हार है। तुम घर आये, किसी ने धक्का दिया, मुक्का नहीं मारा। तुम्हे लगा हम जीत गए। बस ठीक है, पिताजी को तो इतना गुस्सा आ ही जाता है, ये ले लो, ठीक है। अगर ऐसा है। फिर तुम फंस कर। और हम क्यों डरते हैं छोड़ने से, क्योंकि शायद हमारे भीतर अस्तय का भाव नहीं, अस्तय का भाव केवल इतना है कि जो मेरा नहीं मैं, उसके प्रति लोभ रखूं ही क्यों। और जो मेरा है, वो मेरे पास आ जाएगा। जो व्यक्ति मेरे साथ रहना चाहता ही नहीं, उसके साथ बैठ कर, मैं उसका भी जीवन खराब करूँ, अपना भी जीवन खराब करूँ। हमारे भीतर अस्तय का भाव कब आएगा कि जो मेरा है नहीं, उसके प्रति मोह किस बात का? और जो मेरा है, वो प्रकृति बार बार मेरे सामने आ कर के रख देगी। अगर संग कॉस्ट फैलेसी हुई तो हम कुछ छोड़ेंगे नहीं, हम पकड़े रहेंगे, हम रिश्तों को पकड़े रहेंगे। ऐसे रिश्ते जो हमें 1 दिन मार देंगे। उठ के खड़े होने में कभी कबार भलाई है? जुए में अगर हार रहे हो, बैठे रहे तो युधिष्टर वाला हाल होगा। सब कुछ गंवा बैठोगे नंगे हो कर सड़क पर आ जाओगे। कभी कबार उस टेबल से उठ के आगे बढ़ने में ही भलाई है कि छोड़ो बहुत हार गए, जरूरी नहीं, उससे कुछ मिल जाएगा। पत्थर से नींबू का रस नहीं निकाला जाता। पत्थर को कितना भी निचोड़, 2 अमृत नहीं आएगा। पत्थर को निचोड़ोगे, तुम्हारे हाथ ही जख्मी हो जाएंगे। और अगर सामने वाला पत्थर है, निचोड़ना बंद कर 2 आगे बढ़ जाओ। जो तुम्हारा है, तुम्हारे पास आ जाएगा। और जो तुम्हारा नहीं, उसके पीछे क्यों भागना है। सौ चीजें हैं दुनिया में जो तुम्हारे लिए बनी हैं, अगर गलत के पीछे भागोगे तो तुम भूल जाओगे। तुम देख नहीं पाओगे कि दुनिया में कितनी खूबसूरती है। और जब तुम देखोगे अपने आपको यमराज के साथ खड़ा तो तुम सोचोगे काश मैंने अपने जीवन में थोड़ा, वक्त थोड़ा सा वक्त दे दिया होता। सुख की और शांति की, तो शायद मैं कहीं और आगे पहुँच चुका होता। तीसरी और सबसे आखिरी और सबसे कीमती चीज, इट इज नोट नार्मल मजे की बात। हम अपने घर में 1 नौकर को भी लाकर रखते हैं। तो हम नौकर की रेफ्रेंसेज लेते हैं कि तूने किसके क्या बनाया, कितने कांदे काटे, कितनी सब्जी बनाई। हम 1 धोबी के पास भी जाते हैं और पूछते हैं तुझे सिल्क धोना आता है, नहीं आता, वह तो हमारे लिए धोबी नहीं, न जाने क्यों भगवान ने इतना भद्दा मजाक किया हमारे साथ कि जो सबसे कीमती नौकरी है, उस नौकरी के लिए तुम्हे कोई क्वालिफिकेशन की जरूरत नहीं। और वो नौकरी है। माता पिता बनना, सबसे कीमती नौकरी। माता पिता बनना, वो कोई भी बन सकता है। धोबी बनने के लिए तुम्हें रेफ्रेंस देनी पड़ेगी, नौकर बनने के लिए तुम्हें पोर्टफोलियो करना पड़ेगा। और माता पिता बनने की जब बारी आती है तो कोई भी गत 14 फरवरी को शुरुआत होगा, नवम्बर, दिसम्बर तक। माता पिता तैयार। इसलिए समस्या भी होती है। और समस्या ये होती है कि जैसे माता पिता है, बच्चों को लगना शुरू हो जाता है की वही चीजें नॉर्मल है। अगर पिता शराबी है, बच्चों को लगता है की शराब तो नार्मल है, अगर पिता अहंकारी है तो बच्चों को लगता है की ये तो नार्मल है। अगर पिता अपनी पत्नी को गालियाँ देता है तो नौजवान को लगता है की हाँ मैं भी कभी अपनी बीवी को खूब दबा कर गालियाँ दे सकता हूँ। अगर माता पिता ने बच्चों को खूब पीटा, खूब बुरा किया तो वो बच्चा भी दुनिया में जाएगा, दुनिया जहान की हरकतें करेगा। और कोई उससे पूछेगा तुम ऐसा कैसे कर सकते हो। वो बोलेगा की ये तो नॉर्मल है, आज की तारीख में अगर आप देखो इंटरनेट पर खास कर भारत में बहुत इंटोलरेंस है, जिसकी जो आइडियोलॉजी है वो अपनी आइडियोलॉजी छोड़ने को तैयार नहीं है। और उस से बोलो की तुम अपना दिमाग लगाओ। तुम सोचो तुम समझो तुम तर्क, वितर्क कुतर्क का इस्तेमाल तो करो। भगवान ने तुम्हें मनुष्य बनाया, तुम बंदर तो हो, नहीं कुत्ते तो हो नहीं कि किसी ने 2 रोटी दे दी उसके पीछे जिंदगी भर के लिए दुम हिलाते हिलाते निकल गये। तुम मनुष्य हो, तुम इंसान हो, ऐसे आदमी से तुम बात करने की कोशिश करो। वो काटने को आयेगा, क्यूँ काटने को आयेगा क्योंकि वो भी कभी गया होगा अपने पिताजी के पास की पिताजी साइंस तो समझ आती नहीं कॉमर्स ले लो पिता जी ने चमाट वैसे वो आदमी इन्टरनेट पर भी कहता होगा। मुझे तेरा पॉलिटिशन समझ नहीं आता, किसी और ने कहा मुझे तेरा नहीं आता, जमात बात ही नहीं है, तर्क है ही नहीं, 1 मॉब मेंटालिटी है और मॉब मेंटालिटी क्यों है? क्योंकि वहीं देखा सबसे कीमती चीज, ये आवाज उठाना हाथ उठाना गालियां देना दिस इज नो नॉर्मल बिहेवि अगर तुम्हें लगना शुरू हो गया है की लोगों को दबाना, लोगों को मैन्युपलेट करना, घर में बैठ के बड़ो की गालियां तो आशीर्वाद अरे नहीं होती। मैं बता रहा हूँ, मैं लोगों को प्रति प्रसव साधना करता हूँ। और जितने ट्रा में है, जितने ट्रामें है बचपन के है। जब माता पिता अपने आप को न सुझा। बुझा के सारा का सारा अपनी तामसिकता अपने बच्चों पर निकाल देते है। तुम कभी सोचो मनोवैज्ञानिक तौर तरीको से सोचो की भारत में क्यूँ इतने गुरु हैं। कहीं ऐसा तो नहीं कि आज की तारीख में कोई गुरु के पास ज्ञान लेने नहीं जाता, बल्कि उस प्रेम को लेने जाता है जो माता पिता से मिला ही नहीं। क्यूँकि उस बालक को लगता है। मैं अनाथ हूँ, मेरे माता पिता ने तो कभी मुझे प्रेम नहीं किया। फिर गुरु को स्टेज पर बैठा देखता। और गुरु कहता है? मैं तुमसे बहुत प्रेम करता हूँ। और ज्ञान तो छोड़ो, हमें बस कोई इतना ही बोल दे। मैं तुम्हें स्वीकार करता हूँ, मैं तुमसे प्रेम करता हूँ, उसको गुरु बना लेते हैं। आज की तारीख में। भारत में कोई ज्ञान से गुरु नहीं बनता, हर कोई वस्त्रों से गुरु बन जाता है, बालों से गुरु बन जाता है। देखो साधारण सी बात है, वस्त्रों से तो पहचान हीरोइन की होनी चाहिए, हीरो की होनी चाहिए, गुरु के ज्ञान से पहचान होनी चाहिए। और जो वस्त्रों से करता है वो बेचारा मैं क्या बोलू नादान है, बच्चा है और अगर भीड़ की भीड़ चली जा रही है। गुरुओं की ओर। हो सकता है, ज्ञान के लिए नहीं जा रहे है। क्यूंकि प्रकृति इतनी ज्ञानी दिख तो रही नहीं, अभी हो सकता है। केवल प्रेम के लिए जा रही है, केवल 11 सेंस ऑफ़ सेफ्टी एंड सिक्योरिटी के लिए जा रही है और सेंस ऑफ कनेक्शन के लिए जा रही है। कि देखो जीवन भर अपनी फैमिली में बहुत एलियनेटेड फील हुआ। अब 1 गुरु के पास जाऊंगा तो शायद 12 लोग मिल जाएंगे जो मुझ से प्रेम कर ले, मुझे देख के मुस्कुरा ले। अगर ऐसा तुम्हारा हाल हो गया है तो तुम्हें अपना नॉर्मल बदलने की जरूरत है। देखो मुझे बचपन में सिखाया गया था, तुम्हे माता चपिता तुम्हें वो तुम्हें वो बंदूक सखा, तुम्हें गलत आदमी। मतलब निकालता है कि गुरु ही मेरा पिता है, गुरु ही मेरी मां है। स सही बात तो ये है सही मायने में तो ऐसा होना चाहिए जो हमारे सनातन में लिखा है कि तुम्हारे पहले गुरु, तुम्हारे माता पिता होने चाहिए और तुम्हारे माता पिता गुरु तब बनेंगे जब माता पिता अपने आप पर काम करेंगे। और अगर माता पिता गुरु नहीं बन पाये त तुम तो अपने बच्चों के लिए गुरु बन जाओ। और अगर तुम्हें गुरु बनना है तो सबसे पहले तुम्हें बाउंडरीज बनानी होंगी और बाउंडरीज का केवल 1 ही मतलब है। आवाज उठाना नोट, नार्मल, गाली देना, नोट नॉर्मल, it is क्रिमिनल बिहेवियर तो एब्यूज सम्मान अगेंस्ट देयर विल वाट, एवर योर इंटेंशन डजंटमैटरइस क्रिमिनल बिहेवियर किसी को धकेलना, किसी को पीटना, चाहे कुछ भी तुम सोच के कर रहे हो। इट इज रॉन्ग, बिहेवियर तुम्हे। 1 नए नार्मल का निर्माण करना, 1 ऐसा नार्मल जहाँ पे सब शांत हों, सब सौम्य हो, सब ज्ञानी हो, जहाँ बच्चे ने कभी सोचा ही न हो की घर में तो मैं जब स्कूल से आता हूँ, सब चीख रहे होते है, चिल्ला रहे होते, वही बच्चा स्कूल में जाकर सबसे ज्यादा उद्धम काटेगा, तुम्हारे घर में ऐसा होना ही नहीं चाहिए कि हल्की पुल की हाथा पाई तो चलती है, हल्की पुल की गाली गलौज तो चलती है, बिल्कुल भी नहीं देखो। आम के पेड़ से आम ही निकलता है, आम के पेड़ से संतरा निकालता है, नहीं। 1 नई चौथाई नहीं, आधा भी नहीं, कुछ भी नहीं, निकाल ही नहीं सकता। तो तुम अगर कहते हो कि तुम भगवान से आये हो, तुम अगर कहते हो, तुम अनंत के बीच हो, तो तुम आम के पेड़ तुम्हारे अन्दर से निम्बू कैसे निकाल सकता है? अपने भीतर से प्रेम निकालना सीखो, अपने भीतर से सुख निकालना सीखो, अपने भीतर से दिव्यता निकालना सीखो, तभी तुम इस बुली के काल चक्कर से निकल जाओगे। लर्न टू, मेक, अ, न्यू नार्मल। और अच्छा ये न फिर अपने गुरु के पास प्रेम लेने, नहीं जाओगे, ज्ञान लेने जाओगे। जिस ज्ञान से तुम कलयुग से 1 बार फिर सतयुग की ओर बढ़ सकते हो। और तब तुम्हें भी समझ आ जाएगा कि तुम्हारे गुरु सही है या नहीं, या सिर्फ बात ही करते हैं। इसलिए आज से 1 मुहिम छेड़ना सेल्फ, रिस्पेक्ट सेल, respect nobody has the right to blitelyouनoबody has the राइट टू डmीnयouमेकयोर सेल्फ स्ट्रॉंग, अपने आप को ताकतवर बनाओ, अपने आप को दिव्य बनाओ, और हो सकता है सामने वाला मछले, हो सकता है सामने वाला थोड़ा औ क्रूर हो जाए, तुम चिंता मत करना, अस्तय का भाव रखना, या तो सामने वाला तुम्हें प्रेम करना शुरू कर दे, और या जैसे एयरहोस्टेस कहती हैं, एग्जिट आर देयर देर anter योर लाइफ इज नौट आलू कि तुम नेगोशिएट करो कि आलू 5 रुपए, नई 6 नई चाह, नई 3, नई 2 नई फ्री में दे दे तुम्हारी जिंदगी इज नॉट नेगोसिएशन सेल्फ रिस्पेक्ट इस नोट a नेगोसिएशन it is a फंडामेंटल राइट अपने आप को बोलो और ये तुम्हारा मंत्र होना चाहिए आई डिजर्व लव, आई डिजर्व रिस्पेक्ट, आई डिजर्व बिस, आई डिजर्व pic सामने चाहे जो कोई भी क्यों न आ जाए, आई डिजर्व the best अगर यही सोच होगी तो तुम्हारे बच्चे भी दिव्य निकालेंगे अगर अपने आप की इज्जत करोगे, अपने बच्चों की इज्जत करोगे, कल को तुम्हारे बच्चे भी प्रकृति की इज्जत करेंगे और 1 बार फिर हम प्रकृति को उतना ही दिव्य, उतना ही खूबसूरत बना पाएंगे जितनी खूबसूरत। ये प्रकृति हमारे भगवान ने हमें प्रदान की थी। चिंता मत करना हर किसी के जीवन में बुलिया आता है। अगर भगवान राम के जीवन में रावण आ सकते हैं, भगवान कृष्ण के जीवन में दुर्योधन आ सकता है तो तुम्हारे जीवन में भी 1 ना 1 बुली आएगा ही तुम चिंता मत करना। तुम बढ़ना तुम इवॉल्व होना, जहाँ झुक के आगे बढ़ सकते हो, झुक जाना जहाँ तन के खड़े हो सकते हो तन जाना, लेकिन याद रखना saro इज नो नor्मl happines इज नॉर्मल बहुत बहुत धन्यवाद आप सबका 1 बार फिर आपने मेरी बात को सुना, 1 बार फिर आप मेरे साथ इतनी देर, बैठे आप सबको आप सबके भीतर के भगवान को मेरा प्रणाम ब्लेस यू मश्वा।










