Ishan Shivanand guides a mental worship practice called Shiv Manas Puja, where you visualize offerings to Lord Shiva's Linga without physical rituals. Internal devotion and emotional feeling are far more powerful than external ceremonies, and the practice aims to purify and detoxify the mind through deep visualization and intention.
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शिव, मानस पूजा, भाव से पूजन होना चाहिए। इसमें आदि शंकराचार्य बोलते हैं कि आंख बंद करके मैं शिवलिंग का ध्यान करता हूँ और आँख बंद करके मैं समस्त पवित्र नदियों का जल लेकर आता हूँ। मैं भगवान के ऊपर जल का अभिषेक करता हूँ। पृथ्वी पर जितने भी पवित्र से पवित्र बिल्व के वृक्ष हैं वहाँ से मैं वो पवित्रतम बिल्व पत्र लाकर के भगवान के ऊपर अपना भाव इंटेंशन मैं सोच रहा हूँ की मैं उनके ऊपर बिल्वपत्र चढ़ा रहा। मानसिक रूप से चन्दन घिसो, चन्दन का लेप लगा, मानसिक रूप से भगवान को पंच द्रव्य उनका स्नान कराओ। मानसिक रूप से भगवान को नाना प्रकार के व्यंजन चढ़ाओ। मानसिक रूप से भगवान को वस्त्र चढ़ाओ। ये जो मानस पूजा है यह आपकी वास्तविक पूजा से कई गुना ज्यादा शक्तिशाली होती है।
कल्पित महसनममजलसनाननचुद रमहान धदाकेतमछजातीचंपक पत्र तम कुशपंचतूपमतथा bनdएतकलदमदिहहता
शिव योग कहता है कि भगवान भाव से प्रसन्न होते भगवान भाव से मिलते है। भाव के साथ पूजन होता है। भावना जितनी प्रबल करोगे उतना ही अद्वैत साधना होती है।
सब भक्ष्य पंचधपधयुतरमबा फल बहन कम शाका नाम यूतम जलम रुचि करम कर पुर खंडों जलम तहमबुलमनसारचि भक्त्या प्रभु सकरछटमछामरयोयुँकम जन कम छादरशकमनेरमन bnahamrdngkahltm, chttkaशाश्टांगमा प्रणति स्त र बहु वेदात समस्त मय संकलन समर
वास्तव में मनुष्य का जो सुक्ष्म शरीर है शास्त्रों में उसको लिखा है लिंग शरीर तो मैं आँख बंद कर के ध्यान करता हूँ और अपना लिंग शरीर और वो शिवलिंग दोनो को 1 कर देता हूँ और मैं ही लिंग हो गया और मैं ही उसकी पूजा करने वाला हो और मैं ही जब शिव लिंग हो गया तो मैं ही शिव मंत्र का जप कर रहा हूँ।
atmatzamatishcararana sharirmbrhabojaते गरजना इंद्रा समातिथीसंचारवपदयो प्रक्षण विदीजोत्राणी सर वह रो यदयतकरमकरोम जमगोतवानहधतरचरण तम वाकय जम कर मजमबाशमनननजमबा नान सम व धम तम विहितमवासर smaswajajcronab
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crnajmhaदbश जहकश्िमहादेबशमम
हे महादेव मैं आपको प्रणाम करता हूँ मैं आपकी दिव्य शक्तियों को जागृत करता हूँ। हे देवा दी देव आपने तो पूरे संसार का विश हरा था मैं आपको क्या दे सकता हूँ केवल अपने भाव, हे देवा दी देव मेरे भाव को आज स्वीकार कर मैं अपना मन, अपने विचार आपको समर्पित करता हूँ। हे महादेव जितने भी लोग मेरे इन शब्दों को सुन रहे है उन्हें मुक्त करना, हे देवादि देव इन सभी के हृदय में अपनी शक्तियों को भरते
हे
देवादि देव पूरे संसार का विषहरा आज इन सब का विश कर लेना मैं इशान शिवानंद शिवियों की प्रार्थना करता हूँ इन सभी को मुक्त कर