Knock out all fears with DEVOTION and WISDOM | भक्ति और ज्ञान से सभी भय मुक्त हो जाते हैं

Fear is the root of anger and unhappiness, manifesting as phobias with physical symptoms like racing heart and breath changes. Devotion and knowledge, guided by a guru, can eliminate fear entirely, as shown when a mother's love overrides phobias or chanting the Hanuman Chalisa dispels terror on a dark road.
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अगर कोई मुझसे पूछे कि संसार में आज की तारीख में सबसे बड़ी समस्या क्या है? तो मैं बोलूंगा भय। अगर भय है तो क्रोध है? अगर भय है तो आक्रामक प्रकृति है। अगर भय है तो सुख है ही नहीं। क्यों? क्योंकि हम कल की चिंता कर रहे हैं, हम चिंता कर रहे हैं। सामने वाला क्या करेगा? हम अपने इतिहास को, पकड़ के, अपने जीवन को जी रहे हैं। और भय का कोई सरपैर नहीं होता। कभी तुम अगर साइकिल पड़ो, तो तुम पाओगे। ऐसे अजीब, अजीब भय हैं। कुछ लोगों को क्रॉस हो गया है। कमरा बंद कर 2 वो चिल्ला उठेंगे। उसी कमरे में बैठे थे, खुश थे, शांत थे, जब तक खिड़की खुली थी, दरवाजा खुला था। शन भर के लिए। खिड़की बंद कर दोगे, दरवाजा बंद कर दोगे। वो बेचारे, हताश, चीक, उठेंगे, डर के मारे और इतना डर। ऐसा नहीं की केवल मन में है। शरीर में इतना डर, हृदय की गति बढ़ जाएगी। कुछ लोगों को डर है, क्लस्टर फोबिया, कुछ को है। अराकनोफोबिया मकड़ी से डर। उनके सामने कोई भी मकड़ी रखो, चाहे जहरीली हो, चाहे बिना जहर के हो, एंडोक्राइन ग्लैंड्स, ऊपर, नीचे, सांस, ऊपर, नीचे। उनके लिए बहुत सच्चा है। और इस बात को समझो भाई कभी भी सामने वाली वस्तु से नहीं होता। भाई भीतर से निकलता है, अगर कर्म भारी है, विकार भारी है, तो जो भीतर होगा, वहीं बाहर आएगा। और बिना सिरपैर का भय बिना सरपेरका जीवन हमको प्रदान कर देगा। कुछ लोगों को हाइड्रो हो गया है। पानी से डर, बड़ी मुश्किल से वो पानी पीते हैं। नहाने का तो तुम पूछना ही मत। और कोई उनसे बोले किस बात का डर है, तो मैं उनके लिए वो डर। बहुत सच्चा है। हर आदमी जो अपने जीवन को कपट से जुड़कर जी रहा है, छल से जुड़कर जी रहा है, अंदर से, वह बहुत भयभीत है, बेचारा बीमार है। और अगर अपने जीवन से भय को मिटाना चाहते हो तो याद रखना। भय का विलोम है भक्ति, भक्ति और ज्ञान और गुरु कौन, जो ये दोनों चीजें हमें प्रदान करता है। पहला भक्ति, पहला प्रेम, डिवोशन, डेडिकेशन, अगर डिवोशन होगी, डेडिकेशन होगी, अपने आप न जाने काम भाग गायब हो जाएगा। 1 माँ को कितना भी एरो फोबिया हो, क्लास्टोफोबिया हो, अगर उसका बच्चा एरोप्लेन में जा रहा है। वो अपना भाई न जाने कहाँ खत्म करके प्लेन में घुसेगी क्यों? क्योंकि उसका बच्चा जा रहा है। क्यों बच्चे के प्रति डिवोशन है, प्रेम है, डेडिकेशन है, कितनी माओं को में देखता है। अगर उनको छिपकली से डर भी लगता है। और बच्चा चिल्ला रहा है। शन भर के लिए। अपना डर। भूल के वो बच्चे को बचाने कूद, पड़ेगी उस सिचुएशन में। अगर भक्ति है, तो भाई हो ही नहीं सकता। इतने में ऐसे नौजवानों को जानता हूँ गाड़ी चला रहे हैं। डर लग रहा है, घुप अंधेरा है, खाली सड़क है, सुनसान रास्ता है। न जाने कहाँ से हनुमान चालीसा पढ़नी शुरू कर दी। अपने भगवान के प्रति भक्ति उत्पन की। अभी भी वही सुनसान सड़क है। वहीं खाली सड़क है, वही अंधेरा रास्ता है। लेकिन हृदय से भय खत्म हो गया। जब तक भय सफलता आ ही नहीं सकती। और केवल अगर तुम्हारे भीतर भक्ति है, तो भय जाएगा। पहला भक्ति, दूसरा ज्ञान इन्फॉर्मेशन कितने ऐसे लोग जो शिविर में आते हैं, जो दुखी थे, बीमार थे, क्यों बीमार थे? क्योंकि उनको लगता था यह बीमारी इकलौता रास्ता है, यह दुख इकलौता रास्ता है। किसी ने कभी उनको ज्ञान दिया ही नहीं। बताया ही नहीं कि 1 और रास्ता है जो तुम ले सकते थे, गुरु कौन, जो तुम्हे बताता है, उस रास्ते के बारे में जो तुमने देखा नहीं, जो तुम भूल गए, जिस रास्ते पे अगर चले होते, तो जिस सुख को खोज रहे हो, जिस प्रेम को खोज रहे हो, जिस दिव्यता को खोज रहे हो, तुम्हें मिल चुकी होती।










