In this Hindi monologue, Ishan Shivanand addresses young Indians, urging them to learn self‑love as the single most crucial change needed for the nation. He argues that self‑destructive habits—excessive drinking, relentless work without rest, and avoidance of spiritual practice—are evidence of a deep self‑hatred. He links modern consumerism, pervasive advertising, and plastic consumption to this inner hostility, suggesting that if people truly loved themselves they would reject harmful products and behaviors. Shivanand promotes Shivayoga and disciplined spiritual practice as the pathway to rediscovering self‑respect, cultural heritage, and a sense of purpose. He emphasizes that genuine self‑love will naturally extend to love for one’s history, country, and community, making external mockery ineffective. While criticizing the media’s role in fostering self‑loathing, he also acknowledges that social media can be a positive tool if used to seek spiritual knowledge. The talk culminates in a call to internal reflection, disciplined living, and embracing one’s ancestral legacy as a means to transform India’s collective mindset.
Chapters
अगर कोई नौजवान मुझसे पूछता है कि आज की तारीख में ऐसा क्या है जो आप बदलना चाहते हो? भारत के बारे में केवल 1 ही चीज है। मैं चाहता हूँ, लोग खुद को प्रेम करना सीखे, जो आदमी रात भर बैठ कर दारू पीता है। तुम्हे क्या लगता है वो खुद को प्रेम करता है? नहीं करता। अगर खुद को प्रेम करता होता, अपनी लीवर का अचार नहीं बनाता। तुम्हे क्या लगता है जो आदमी काम करता रहता और घर नहीं आता? क्या वो खुद को प्रेम करता है, बिल्कुल नहीं करता, अगर करता होता तो उसको अपना जीवन जीने लायक लगता। वो अपना जीवन जीता, अपने काम में खुद को बेहोश नहीं करता। जीवन के लिए। तुम्हें क्या लगता है जो आदमी साधना से दूर भागता है? क्या वो अपने आप को प्रेम करता है? कतई नहीं जो आदमी अपने आप को प्रेम करता है, वो खुद साधना के कारण ढूंढेगा? न जाने कहाँ हमारे भीतर खुद के प्रति इतनी गहरी नफरत उत्पन हो गई कि हम अपने धर्म से बातते हैं, हम अपने कर्तव्य से भागते हैं, हम अपने शरीर से भागते हैं। और कहाँ हर उस वस्तु की और हर उस पदार्थ की ओर जो हमें खत्म करे, हमें हमारे परिवार को खत्म करे, हमारे पर्यावरण को खत्म करें। अगर खुद से प्रेम होगा तो हम अपने आप नकार देंगे। उस वस्तु को, हर उस वस्तु को जो हमारी प्रकृति को खत्म करती है, जो भगवान ने हमें दी, मैं देखता हूँ। जिन शहरों में प्लास्टिक बैन हुआ, लोग सब्जी खरीदने जा रहे हैं, सब्जी खरीदते समय सामने वाला कह रहा है, लोग पेपर बैग, हम उससे लड़ रहे है। भाई प्लास्टिक की थैली नहीं है, खुद से प्रेम नहीं है, प्रेम है न। खुद से प्रेम होता तो हम प्लास्टिक के लिए नहीं लड़ते। खुद से प्रेम अगर होगा तो हम अपना भला, अपने परिवार, अपने देश का भला सहज सरल ही कर देंगे। और अगर खुद से प्रेम नहीं होगा, तो हम केवल छन भर के सुख के बारे में सोचेंगे। तो अगर कोई मुझसे पूछता है, तुम तुम भारतीयों को क्या देना चाहते हो? मैं कहता हूँ, मेरा तो 1 ही उद्देश्य है कि तुम खुद से प्रेम करना सीखो, अगर खुद से प्रेम करना सीखोगे। तो जब कोई तुम्हारे पास आएगा, तुम्हारा मजाक उड़ाने, तुम्हारी खिल्ली उड़ाने, तुम अपने आप बोलोगे लर्न, टू से नो विद, कॉन्फिडेंस, तुम्हारे भीतर से अपने आप आवाज आएगी रुक जाओ। यहाँ पर अगर खुद से प्रेम होगा, खुद के इतिहास से प्रेम होगा, खुद के देश से प्रेम होगा, तब कोई तुम्हारा मजाक नहीं उड़ा सकता। नो बडी, कैन, टेक, यू, फॉर, रैन सम। और अगर तुम देखो तो आधे से ज्यादा विज्ञापन में देखता हूँ, जो तुम्हें खुद से नफ़रत करना सिखाते हैं। गहरी नफरत सिखाई जा रही है, हमको अपने प्रति गलत है। ये 1 लड़की जिसको सिखाया जा रहा है, तुम्हारा रंग खराब है, फलाना चीज इस्तेमाल करो, गोरा हो जायेगा। 1 नौजवान जिसको सिखाया जा रहा है कि तुम बेकार हो, जब तक तुम्हारी जेब में यह फोन नहीं, तुम बेकार हो, जब तक ये गाड़ी नहीं, तुम बेकार हो, जब तक ये कपड़े नहीं, दिन में 10 बार हम क्या सीखते हैं कि हम बेकार है तुम वो छोड़ो मैंने। ऐसे ऐसे ऐड देखे, तुम बेकार हो। अगर दीवारों पे, फलानी वाल पुट्टी नहीं है। वाल पुट्टी के होने, न होने से तुम बेकार या सही हो जाओगे। इतनी गहरी नफरत और अगर खुद से नफरत हो गई तो हम मोमबत्ती के समान हो जायेंगे के आस पास प्रकाश तो दे रहे हैं, लेकिन खुद खत्म होते चले जा रहे हैं। कहीं ऐसा तो नहीं कि भारत मोमबत्ती बन चूका है की नासा आधा भारतीयों से भरा है, गूगल आधा भारतीयों से बड़ा है, फेसबुक आदा भारतीयों से बड़ा है, दुनिया के सारे बैंकों में भारतीय है। भारत। दुनिया जहान में चिकित्सकों के नाम से जाना जाता है। हर अस्पताल में 11 भारतीय डॉक्टर तो मिल ही जाएगा भारत। कहीं ऐसा तो नहीं मुमबी हो गया कि हर जगह प्रकाश तो दे रहा है, लेकिन भारत में आकर देखो, साल भर साल बूंद बूंद कर कम होता जा रहा है। शायद इसलिए मेरे बाबा को लगा शिवयोग फैलाना जरूरी है। तुम्हे मुमबत्तीऐसीहालोजन में परिवर्तित करना जरूरी है की तुम्हे याद तो आये, तुम किसकी संतान हो, कोई तुम्हें बोले और तुम्हें बताने की कोशिश करे, तुम अधूरे हो, तुम कमजोर हो याद करा देना। उसको तुम्हारे पूर्वज सप्तरिशी है, तुम्हारी विरासत शिवयोग है और तुम्हारे पिता शिव, अनंत शिव कृपा। अनंता इसकी वाल पुट्टी से तुम्हारे अनंत में कोई परिवर्तन नहीं होगा। और ये खुद के प्रति गहरा प्रेम है। 1 व्यक्ति को सही जीवन जीने का मौका देगा। अगर खुद के प्रति प्रेम है तो तुम अपने आप जब तुम्हारे सामने 4 गुलाब जामुन रखे जाएंगे, तुम खुद सोचोगे की ये यह मेरे लिए सही है ही नहीं छोड़ो 1 पकोड़े के बाद खुद के भीतर से आवाज आएगी, ये चीज गलत है। छोडो अगर खुद से प्रेम है तो 6 बजे खुद जाक। तुम्हारी खुलेगी और खुद तुम साधना और स्वास्थ की ओर बढोगे। अगर खुद के प्रति प्रेम है तो यू ट्यूब पर तुम जाओगे, लेकिन उस यू ट्यूब पे। तुम ढिंचक न देखने के बजाय शिव की विडियो सर्च कर के, अपने गुरु के ज्ञान को अनुभव करोगे। सोशल मीडिया बुरी नहीं, सोशल मीडिया का इस्तेमाल गलत या सही हो सकता है।