In this Hindi devotional monologue, the speaker emphasizes that culture and regular spiritual practice (sadhana) are essential for creating a lasting legacy within a family. He argues that without sadhana, any material success is fleeting, whereas sustained practice empowers future generations to generate their own success. The speaker stresses the duty of a disciple to spread divine knowledge received from the guru, likening it to a religious obligation. He shares a vivid anecdote of a farmer who, after embracing Shiv Yog teachings, experienced abundant harvests and prosperity, and then sponsored 25 fellow farmers to attend a spiritual camp, illustrating the principle of sharing blessings. The talk then shifts to a sociological observation: humans have an innate tendency to form groups or tribes, seeking identity and belonging, which influences behavior in both spiritual and secular contexts. The speaker warns against negative energy dominating society and encourages proactive, positive action to ignite the inner light in oneself and others.
Chapters
कल्चर बहुत जरूरी है। तुम पैसा अगर छोड़ के जाओगे, विदाउट कल्चर पीडी उड़ा देगी, अगर ज्ञान नहीं। दोगे, मैंने कहा न सफलता बिना साधना तो वो सफलता जाहिर है। अगर साधना छोड़ कर के जाओगे तो आने वाली पीड़ी अपने आप सफलता उत्पन करने के लिए सक्षम हो जाएगी। इसलिए जरूर से जरूर, अपने घर में साधना लेकर के आना, शिवयोग लेकर के आना जरूरी है। तुम्हे जब जब मौका मिले कोशिश करो दिव्यता, फैलाने की मैंने उस दिन आपको बताया था, ऐसा नहीं है, नेगेटिविटी बढ़ गई है, केवल ऐसा है कि जो सकारात्मक है वो चुप बैठा है। तुम्हारा धर्म बनता है की अगर तुमने दिव्यता से कुछ भी प्राप्त किया तो तुम सौ लेगो, लोगो को प्रेरित करो दिव्यता की ओर बढ़ने के लिए तुम्हारा धर्म बनता है। अगर तुमने अपने गुरु से कुछ भी प्राप्त किया तो। परम गुरु दक्षिणा ये है जोत से जोत जगाओ, अगर तुम्हारी जोत जगी तो तुमसे दुसरो की जोत भी जगनी चाहिए। और इस मामले में मुझे मुझे किसान सबसे अच्छे लगते हैं। क्योंकि वो इस बात को जानते हैं किसान जानते हैं कि अगर प्रकृति से कुछ चाहिए, पहले बीच फेकना होगा। मैंने किसी और मनुष्य में, दुनिया के किसी और व्यक्ति में यह चीज नहीं देखी जो मैंने किसान में देखी। गोआ शिविर की बात है। 1 किसान आया और अपने साथ उसने 25 लोगों को शिविर में बिठाया। मैंने कहा ये क्या है? तो किसान कहता है कि देखो। जब मैं पहली बार शिवयोग में आया था, मेरे पास कुछ नहीं था, बैल गाड़ी थी, फसल होती नहीं थी। और जब बाबाजी ने ज्ञान दिया, शिवयोग कृषि का, शिव योग सनातन का, इस विज्ञान का, जो की हमारा है, तो इस विज्ञान को प्राप्त कर। मेरी फसल इतनी बढ़ गयी, मेरे मुनाफे इतने बढ़ गए, मेरी जमीन बढ़ गई, मेरे यहाँ खुशी बढ़ गयी। आज मैं बड़ी गाड़ी में आया हूँ। और जो सुख मैंने प्राप्त किया, मैं अपने 10 और किसान मित्रों को लाया हूँ, उनकी भी फीस मैंने दी है की मेरे को है कि जो मुझे मिला इनको भी तो मिले, और तुम मानोगे नहीं, वो खुद बैठा है। अपने बगल में 25 लोगों को स्पांसर कर के बैठा और खुशी से अपना शिविर कर। हा और कह रह है। अभी तुम देखना, अभी तुम देखना क्या होगा तुम्हारे साथ, वो बहुत एक्साइटेड हैं। हर साधना के बाद उनको देख के लगा लगा नहीं, कुछ हीले तुम और ही गए, हिल गए, मजा आ गया। अगर तुमने कुछ प्राप्त किया तो तुम्हारा धर्म बनता है कि तुम उस ज्ञान को आगे बढ़ा। नियोटे। इंजीनियरिंग इंस्टिट्यूट में मैं ये बात बता रहा था कि हमारे मनुष्य प्रजाति में 1 इनेट टेंडेंसी है, हमारी सेलुलर बिहेवियर है, वो सेलुलर बिहेवियर क्या है हर्डमेंटैलिटीभेरचाल की हम हमेशा 1 समूह बनाने की कोशिश करते हैं। ट्राइव तुम देखना, अगर परिवार में 1 बेवड़ा है, वो हमेशा दुसरे व्यक्ति को भी बेवड़ा बनाने की कोशिश करेगा। क्यूँ क्यूँकि साथी मिल जाएगा। अगर 1 जुआरी है तो वो अपना जुआ बेचेगा। 5 लोगो को क्यूँ क्यूँकि मित्र मिल जायेंगे। वो अपना अपना ग्रुप बड़ा करना चाहता है, अपनी ट्राइव बड़ी करना ही चाहता है और हर हर व्यक्ति जिससे तुम मिलते हो वो तुम्हे 1 ट्राइब की मेम्बरशिप दे रहा है साबुन वाला कहता है की तुम हमारे साबुन का इस्तेमाल करो, हमारी ट्राइब को ज्वाइन करो जो हमारा साबुन को इस्तेमाल करता है वो बढ़िया फ़ोन वाला कह रहा है आई ओ एस छोड़ो तुम एंड्रायड की ट्राइप ज्वाइन करो, एंड्रायड वाला कह रहा है मेरे पास आओ आई ओ एस वाला कह रहा है मेरे पास हर चीज में ट्राइब है और जिस भी ट्राइब का हिस्सा बन जाते हैं वो ट्राइब हम पर प्रभाव डालती है उस ट्राइब की हम रक्षा करना चाहते हैं। वो ट्राइब हमारी आइडेंटिटी हमारे पर्सनल डेफिनेशन के लिए बहुत जरूरी हो जाती है।