Life is a Penance | Prati Prasav Sadhna @IshanShivanand

Ishan Shivanand explains why battles driven by ego fail while those guided by vidya, or true knowledge, succeed. Love rooted in knowledge empowers you; love without it becomes bondage. Real spiritual practice means waking each day committed to winning over yourself, not just performing rituals.
Chapters
युद्ध करने से पहले खुद से सोचना जरूर की मैं जीत के प्राप्त क्या करूँगा? और अगर प्राप्त कुछ हो नहीं रहा है और केवल अहंकार का युद्ध है तो याद रखना विद्या प्रबल हो रही है। तुम अपने गुब्बारे बचा रहे हो, कहीं अपने गुब्बारे बचाने के चक्कर में अपने खुद के प्राण गवा बैठो और अगर जानते हो की तुम चाहते क्या हो? भीतर विद्या है, भीतर गुरु का ज्ञान है, ज्ञान के प्रति कमिटमेंट, तो अपने आप भीतर से आवाज आएगी। युद्ध किसी काम का नहीं छोड़ो इसको यहाँ पर मेरा प्रेम है, यहाँ पे मेरा सुख है, यहाँ पर मेरी खुशी है। इन लोगो को मैं पास देता हूँ, जैसे बचपन में खेलते थे, न पकड़ पाई और पकड़म पकड़ाई में फिर 23 बच्चे होते थे, जिनकी कच्ची मिट्टी होती थी। कच्ची मिट्टी का मतलब जानते हो? कच्ची मिट्टी का मतलब की अगर तुम्हे छू दे या तुम इन्हें छू? 2 कोई फर्क नहीं पड़ता, गेम चलता रहेगा, अगर खुशी चाहते, अपने माँ बाप की कच्ची मिट्टी कर। 2 और कच्ची मिट्टी का मतलब कि तुम सुबह उठे, इन्होंने तुम्हें कुछ कह दिया, टिप्पणी ठीक है, कच्ची मिट्टी है इनकी ब्लेस यू की। तुम्हारी बात का क्या बुरा मानना, क्या मिल जाएगा। मुझे मेरे बाबा ने मुझको ये चीज सिखाई थी, जो केवल विद्या से आ सकती है, विद्या वाले को समझ नहीं आएगी। मेरे बाबा ने मेरे को बताया था कि भारत में गुलामी डेढ़ सौ साल पहले खत्म हो चुकी है। और गुलाम का मतलब है कि मैं तुम्हें खरीद के ले आया। इसलिए तुम करो जो मैं तुम्हें करने को कह रहा हूँ। अगर तुम्हारे घर में तुम्हारा स्पाउस है तो तुम्हारे स्पाउस का मतलब तुम्हारा गुलाम नहीं है। और गुलाम का मतलब क्या। मैं तुम्हारी इज्जत नहीं करूँगा, तुम मेरी करो, मैं तुम्हें प्रेम नहीं करूँगा, लेकिन तुम मुझे करो, मैं तुम्हारे लिए कुछ भी नहीं करूँगा। लेकिन तुम मेरे लिए खाना भी बनाओ। प्रेम इवॉल्व करता है, प्रेम मजेदार है, प्रेम विद्या से आता है। अविद्या गुलामी मांगेगी कि मैं अपने बच्चों को गुलाम बना दूं, अपनी पत्नी को गुलाम बना दूं, अपने घर वालों को गुलाम मांगो। अविद्या गुलामी मांगती है, विद्या प्रेम माँगती है और प्रेम में मेहनत है। शिव योगी हो तो प्रेम होना चाहिए। क्या प्रेम और माना कठिन है? बकायदा कठिन है? तुम मेरे भगवान शिव को देखो, न, विद्या से प्रेम है, अविद्या से गुलामी है। अविद्या बोलेगी तुम ये करो, विद्या बोलेगी, मैं जीत कर दिखाऊंगा। और विद्या होनी भी चाहिए, सच्चाई होनी भी चाहिए। तुम खुद सोचो साधना। और तप केवल मंदिर में नहीं होती, जीवन तुम्हारा तप हैं। शिव योगी के लिए जीवन तप है। हम इसको कलयुग क्यों कहते है? कलयुग इसलिए है क्योंकि जिसके साथ 2 पल तुम्हे बिताने है, उसके लिए तुम खूब अच्छे कपड़े पहनते हो, खूब मेहनत करते हो। वो दिखावे का है। जिसके साथ तुम्हें जिंदगी भर रहना है, उसके साथ तुम राक्षस और जिसके साथ 2 पल के हो, उसके सामने इतना दिखावा। इसलिए ये कलयुग है, उलटा न चाहिए। सामने वाले की तुम्हें कोई परवाह नहीं होनी चाहिए। जिसके साथ तुम्हें हर सन रहना है उसके लिए तुम्हें रोज सुबह उठ के 1 अदा अपने भीतर उत्पन करनी होगी और कुछ नहीं होता। शेकसपियर ने कहा है आल द वर्ल्ड स्टेज 1 शिव होगी जब रोज सुबह उठता है। वो अपने आप से पूछता है कि आज किस प्रकार से मैं अपने घर वालों को जीतूंगा, किस प्रकार से मैं, आज दिन को जीतूंगा, किस प्रकार से मैं, साधना को जीतूंगा और ये सब विद्या से आता है जाऊंगा की मेरे गुब्बारे बचने चाहिए, कोई मेरे फोड़ ना दे इससे पहले कोई मेरे थोड़े में उसके तोड़ फोड़ पारी में लगा है और शिवयोगी सुबह उठते ही अपने आप से पूछता है मैं कैसे जीतूंगा? इस दिन को अपने परिवार को वो मुस्कराता हुआ कमरे में आयेगा और जब अपने प्रियजनों को सामने देखेगा उनको मुस्कुरा के खूब सारी ब्लेसिंग्स देगा, खूब धन्यवाद करेगा।










