Mindful Matters Sadhna with Ishan Shivanand

Ishan Shivanand guides a meditation on mortality and spiritual practice, using the metaphor of clinging to a movie seat after the film ends. He teaches the Soham mantra and breath awareness, warns that AI will become a new form of religion, and urges listeners to study texts like the Tripura Rahasya and prepare for collective sadhana sessions.
Chapters
namsiaआसbकोआप, सबके भीतर के भगवान को मेरा प्रणाम, मैं बहुत प्रेम और सम्मान से आप सबका हार्दिक स्वागत करता हूँ। आज के इस माइंडफुल मैटर्स में ap sbko अच्छे से awaz he ha, bless you it is so nice to, once again, talk to all of you with this mediam, it has been such a long time, but i m very happy that i m here with all of you today talking to you। कितना अच्छा लगता है। ऐसा लगता है मैं सिर्फ आपसे बात कर रहा हूँ और इससे पहले हम शुरू करें। share this video as many of you। हैज। यू कैन ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग हमारे साथ जुड़े और जिस हिसाब से आपका फायदा हो रहा है, सबका फायदा। अभी। 1 मार्वल की मूवी रिलीज हुई, गाrdिnsऑफgalेxी और मार्वल्स ने 11 नया कल्चर स्टार्ट किया। पहले जब पिक्चर खत्म हो जाती थी तो लोग उठ के चले जाते थे, अब जब पिक्चर खत्म होती है मार्वल्स की, लोग फिर भी बैठे रहते क्यों? क्योंकि 1 पोस्ट क्रेडिट सीन आएगा और अभी सुनने में आया है कि गार्डियंस ऑफ गैलेक्सी में, क्योंकि पहली गार्डियन्स में 4 पोस्ट क्रेडिट सीन थे तो इस वाले में न जाने कितने और पोस्ट क्रेडिट सीन है। तो सारे के सारे बच्चे जब पिक्चर देखने जाएंगे, वो बैठे रहेंगे, इंतेजार में, पिक्चर खत्म हो गई, लेकिन फिर भी बैठे रहेंगे के पोस्ट क्रेडिट सीन देखना है कुछ और कुछ और मसाला मिल जाए नींबू अब तुमने निचोड़ दिया। अब निम्बू में 1 बूंद रस का नहीं बचा, लेकिन फिर भी इंतजार में कि शायद कुछ और मुझे मिल जाए। और जो मार्वल ने बच्चों का हाल किया वही हाल हर मनुष्य का है, सोचो अगर जैसे वो बच्चा पिक्चर के बाद भी सिनेमा में बैठा रहता है। पोस्ट क्रेडिट की राह में। सोचो अगर 1 मनुष्य भी मृत्यु के बाद शरीर और घर में मंडराता रहे, परिवार के आसपास मंडराते रहे कि मुझे भी कुछ और मिल जाए, चाहे थोड़ा ही मिले, क्योंकि जितना रस उस नौजवान को पिक्चर में मिला था। पोस्ट क्रेडिट कितनी देर का होगा, शन भर का होगा, सेकेंड का होगा, 2 सेकेंड का होगा, फिर बात खत्म, लेकिन फिर भी बच्चा इंतेजार में और उसी प्रकार से मनुष्य शरीर छोड़ने के बाद अब उसको कुछ नहीं मिल सकता, अपने परिवार से, अपने घर से, अपनी संपत्ति से ल, लेकिन फिर भी वह बैठा है। पकड़े हुए, कस के पकड़े हुए कि बस थोड़ी देर और थोड़ी देर और कुछ और मुझे मिल जाए। और तुम्हें लगेगा कि यह बहुत कम होता है। लेकिन मैं तुम्हें बताना चाहता हूँ कि बहुत कम लोग हैं जो कुर्सी छोड़ सिनेमा से बाहर आने के लिए तैयार है। बाकि सब सिनेमा की कुरसी को पकड़ कर। बैठे। कुछ साल पहले पैलेटिफकेयर में मैंने काम करना शुरू किया। ओपेरेटिव केर का मतलब होता है कि अब आपका समय आ चुका है, आप बुरे हो गए हैं और अब आप बस मृत्यु का इंतजार कर रहे हैं। अब चिकित्सक कुछ नहीं कर सकता, डॉक्टर कुछ नहीं कर सकते। बहुत उम्र हो गई है, अब मृत्यु के सिवाय हमारे सामने और कोई रास्ता नहीं। अब पूरी जिंदगी पीठ पीछे है, और सामने है मृत्यु, और हमें बस। उस द्वार के पार जाना है। और मैं बहुत सारे ऐसे लोगों से मिला जो उस द्वार पर खड़े है, लेकिन वो सिनेमा की कुर्सी को छोड़ने के लिए तैयार नहीं। there is a lot of talk about end of life, dignity and end life preperation, but what about those people that are there and i saw that they are not prepared? उनका वही हाल है जो 1 बच्चे का है। एग्जामिनेशन से पहले, जिस एग्जाम के बारे में उसने पढाई ही नहीं की, सोचो जोग्राफी का एग्जाम है। और वो हिंदी पढ के पहुंच गया, फिर क्या होगा? एग्जाम में? बाकायदा वो फेल ही होगा। और उसी प्रकार से मनुष्य मृत्यु के सामने खड़ा है। और उसने केवल पढ़ाई अपने जिंदगी की की है, केवल काम। क्रोध लोग? मोह पूर्ति की की है, केवल व्यसन की की है। उसने कभी वैराग्य की तो पढ़ाई की ही नहीं, उसने कभी शिव की, महाकाल की तो पढ़ाई की ही नहीं। और अब वो मृत्यु के सामने खड़ा है। हिंदी पढ़ के जोग्राफी एग्जाम के देने की तैयारी में और क्या होगा? वही होगा जो तुम्हें लगता है मृत्यु में, वो फेल हो जाएगा। और जब 1 मनुष्य मृत्यु में फैल हो जाता है। फिर क्या होता है? पुनरपि जननम पुनरपि, मरन, वापस घूम, फिर के वो भूलोक, पे, अपने आप को पायेगा, या यातना शरीर में अपने आप को? पायेगा? और मजे की बात? ये एग्जाम हम सबके जीवन में आने वाला है। यह 1 ऐसा एग्जाम है जो पक्का है। इसलिए हर मनुष्य को कभी न कभी महादेव की, महाकाल की पढाई करनी शुरू, pdेगीwe cannot proकas्iniट क्यों? क्योंकि जब तुम महादेव की पढ़ाई करते हो, तो तुम अपने आप को समेटना शुरू करोगे, जो तुमने अपने मन का फैलावड़ा बना रखा है। न? जो तुम फैले हुए हो, आकर्षण की ओर फैले हुए हो, इस चीज की ओर, उस चीज की ओर फैले हुए हो। तुम ये फैलावड़ा कम करना शुरू करोगे। और तुम पाओगे कि तुम धीरे धीरे अपने मन में वापस लौट रहे हो, अपने भीतर लौट रहे हो। और 1 जमाना था जब ये पढ़ाई लोग सन्यास आश्रम में शुरू करते थे। 1 समय था जब मृत्यु से पहले लोग पढ़ाई शुरू करते थे, लेकिन आज जो समय आ रहा है न, हर 1 व्यक्ति को यह पढ़ाई शुरू करनी चाहिए। त्रिपुरा रहस्य में 1 कथन है कि परशुराम ने जब सब शत्रियों का अवध कर दिया, उसके बाद भी उन्हें शांति नहीं मिली, सब फैलावड़े कर दिए, सब मेहनत कर दी, लेकिन शांति नहीं मिलेगी। क्यों? क्योंकि शांति इकलौती चीज है जो भीतर से ही आ सकती है, खुशी सुख भीतर से ही आ सकता है। फेलावड़े करके न तो शांति मिलेगी, न सुख। मिलेगा तुम हर उस व्यक्ति से पूछ लो जो फैला हुआ है। परशुराम के साथ भी हुआ सोचा था। that, after engins, i will feel good, i will feel, amazing, i will feel nice, but i did not he felt pathetic तो जंगल में चलता हुआ गया और 1 सिद्ध को पाया और वो सिद्ध शांति से बैठा है और उसकी शांति को देख प और शुराम को बहुत चिढ़ मची होता है। संसार में तुम देखो कितनी बार मैं भी सोशल मीडिया पर आता मैं, मैं तुमसे बात कर रहा हूँ, अपने परिवार से बात कर रहा हूँ। और हम लोग बड़े खुश हैं, हम लोग शांत हैं, हम लोग 1 दूसरे को प्यार से कर रहे हैं और किसी व्यक्ति को हमारी खुशी समझ नहीं आती, वो चिढ़ के न जाने अंटशंट कमेंट मारना शुरू कर देता है। और जो जुड़ा हुआ है उससे किसी और की शांति झेल नहीं जाएगी और शुराम के साथ भी ऐसा हुआ। वो सिद्ध शांति से बैठा था और राम और जुड़ गया कि तू कैसे शर्त है, तूने तो कोई फैलावड़ा किया भी नहीं, मैंने तो इतना फैलावड़ा किया। 21 बार छतरिया मारती है और खूब उसको बुरा भला, बोला खूब अनाब शनाब बोला सिद्ध मुस्कुराता रहा और अंत में परशुराम का अहंकार टूटा और उसने सिद्ध के पैर पकड़ लिए कि तुम्हारी खुशी का रहस्य क्या है, तुम्हारी शांति का रहस्य क्या है? और सिद ने कहा, अगर तुम्हें ये रहस्य जानना है तो जाओ दत्तातरे से दिखा लो, गुरु के पास जाओ गुरु, तुम्हें वो साधना देगा वो भगवती की वो शिव की साधना जिस साधना से अब तुम भीतर जा सकते हो, 21 बार तुम बाहर गए, तुम्हे कुछ नहीं मिला, अब तुम्हें भीतर जाके इस शांति को खोजना होगा। और फिर परशुराम गए भगवान दत्तात्रेय के पास और उन्होंने तृपुरारहस्य की साधना ली, जिस साधना से वह भीतर प्रवेश कर सके। और मैं तुम्हें इसलिए कह रहा हूँ कि अब तुम्हे भी इस साधना की ओर बढ़ना है, साक्षात्कार की साधना की ओर, भीतर की साधना की ओर, क्योंकि अब समय बदल रहा है ना, हाव, वी आर एंटिंग, द रेल ऑफ ए आई और जो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस है, वो दुनिया को बहुत जल्द बदल देगी। अगला धर्म, क्योंकि हर बार आदमी बात करता है कि अगला धर्म, सनातन धर्म होगा, अगला धर्म, इसाई धर्म होगा, अगला धर्म, कोई और धर्म होगा, दिस सेंचुरी बिलongsटोदeम, दिस सेंचुरी बिलॉngs। to them the coming century belongs to a new religion and that religi। रिलिजन ऑफ आरटिफिcिaल इंटेलिजेंस, क्योंकि रिलीजन का काम क्या है, अगर तुम देखो, मोटा, मोटा, रिलीजन के 2 काम होते हैं, पहला काम होता है to find meaning in लाइफ, व, cause, लाइफ is random, लाइफ इज, वेरी, रैंडम कभी भी कुछ भी हो जाता है, अच्छे लोगों के साथ बुरी चीज हो जाती है, तुम चल रहे हो, चलते चलते कुछ भी हो जाता है। मैंने अपनी गाड़ी पार्क की और कोई खड़ी गाड़ी को मार के चला गया, मैंने कुछ किया भी नहीं और कोई खड़ी गाड़ी को मार के चला गया। मैं बहुत अच्छा हूँ, मैं अपना जीवन जी रहा हूँ, मेरा बच्चा भी मार पड गया, रैंडम ली और इस रैंडमनेस में तो 1 व्यक्ति पागल हो जाएगा, तो उसको मतलब चाहिए, कारण चाहिए और वो कारण उसको गरम से मिलता है कि जी ठीक है, कभी कोई कर्म किया होगा, कभी कोई पाप होगा। भगवान टेस्ट कर रहे हैं। ऐसा है वै सा है। और दूसरा पर्पस ऑफ रिलिजन, पहला है टू फाइंड मीनिंग, दूसरा है ग्रिफ काउंसिल सबसे बड़ा कारण ग्रीफ काउंसिल, कि जब हम हम किसी को खो देते हैं, हमारे माँ बाप को खो देते हैं, हमारे बच्चों को खोज देते हैं, वो शरीर छोड़ देते हैं। और यह हम खुद अपना शरीर छोड़ेंगे, तो हमें हमे जानना है कि हमारे साथ क्या होगा या फिर हमारे माँ बाप कहाँ गए, क्या हुआ? अगर यह ग्रीफ काउंसलिंग नहीं होगी धर्म के माध्यम से, तो 1 आदमी बदला जाएगा, 1 आदमी डरा रहेगा, 1 आदमी के भीतर एन आर की आ जाएगी, अगर मरना ही है। तुम्हें क्यों इस जीवन को सही मायने से जी, फिर तो मैं भी जानवर बन जाता हूँ क्यों? क्योंकि कोई कारण नहीं है, मृत्यु अगर होनी है। तो मैं क्यों सात्विक जीवन जी मैं क्यों सच बोलू। तो फिर ऋषि मुनियों ने धर्म का इजाद किया, ताकि हर आदमी 11 सही रास्ते पर चल सके। तो 2 कारण, 1 मृत्यु के बाद ग्रीफ काउंसिलिंग और पहला जीवन के दौरान मतलब और अब ए आई आ चुकी हैं और अब एआई से क्या होगा? तुम करके देखना तुम जाओ एआई टूल्स के पास और उसके पास जा करके बोलो कि तुम मुझसे ऐसे बात करो जैसे तुम एल्बर्ट आइंस्टाइन हो और एआई तुमसे ऐसे बात करना शुरू कर देगी और अगर आज एआई तुमसे ऐसे बात कर सकती है कि ए आई तुम एलबर्ट आइंस्टाइन हो एंड लेट्स हैव। अ कन्वर्सेशन तो कल को जब 1 व्यक्ति अ अपने पिता को खो देगा तो क्या वो कनवर्सेशन नहीं होगी कि टॉक टू मी लाइक माई, फादर टॉक टू मी लाइक माई चाइल्ड फिर तो कोई मरेगा ही नहीं और फिर हम हे आय की दुनिया में और खो जाएंगे क्यों? क्योंकि हम लेट गो करने के लिए तैयार नहीं और तुम वो छोड़ो लोगों को अपने गुरु से लगाव हो जाता है। फिर किसी दिन गुरु समाधि ले लेगा, हम बोलेंगे ना, हम तो नहीं मानते। फिर हम एआई के पास जायेंगे और हम बोलेंगे टॉक टू मी लाइक माई गुरु और आज तो एआई बस चैट कर रही है, कल को एआई के विजुअल फीचर्स भी होंगे। फिर तुम चेहरा देख सकते हो, क्या पता अभी तुम्हें लग रहा है ये शान शिवानंद शान शिवानंद नहीं है, वहाँ पर आई बैठी हो और फिर और हम एआई की दुनिया में चले जायेंगे। और दूसरा मतलब हम धर्म से मतलब कुछ ते। फिर हम एआई से पूछेंगे कि जीवन का मतलब क्या है? मेरे जीवन में यह घटना क्यों घटित हुई तेरे आई तुम्हें बताएगा जो कुछ भी प्रोग्रा होगी, जैसा भी सिस्टम होगा, जैसे जैसे उसकी एवोलूशन होगी तुम्हें वो जवाब मिलेंगे तो तुम्हारी ग्रीफ काउंसिल भी एआई से होगी, तुम्हारे मतलब भी एआई से ह। अगला धर्म ए आई का है। क्यूंकि कहा तुम्हारे पास समय होगा कि जाओ तुम सनातन के पोते पड़ो, फिर तुम जाओगे की हे ए आई टॉक टू मी लाइक कृष्णा। और फिर तुम्हें लगेगा कि अरे वाह, मैं तो अर्जुन हूं और ए आई मेरी कृष्ण हो गयी क्यों? क्योंकि ए आई के पास तो पूरी भगवत गीता रही है। और जिस प्रकार से आज 1 मनुष्य, 1 गुरु और 1 ढोंगी के बीच मतलब नहीं समझ पाता, तुम्हे क्या लगता है एआई और परम ज्ञान के बीच 1 आदमी मतलब समझ पाएगा। और अगर ऐसा समय आने वाला है, तो इसका केवल यही मतलब है कि इस कलयुग में अब हम सब को स्वयं को समेटना शुरू करना होगा। क्योंकि देखो 11 समय था कि हम कह रहे हैं, हम साधना करेंगे। क्यों ताकि हम अपना फैलावड़ा और बढ़ा सके? हे महादेव, हमें थोड़ा और पैसा दे। 2 हे महादेव, हमें थोड़ा और बिजनेस दे। 2 हे महादेव थोड़ा और हम फैल जाए, थोड़ा और फैल जाए, फिर किसी दिन शांति की ओर बढ़ेंगे। lekin realization that we have procastinated not just in this life, but in all our previous, live। i think the time has come that we all start to walk that pat of realization na mere guru kehte he sohmhmsashiवa। अब हमें इस मंत्र से जुड़ना होगा, सो हम, हमसा शिवा सो, हम का मतलब, आई म that i am not this body, i am not this situations, i am that। अब तुम्हे भी सोहम की साधना करनी, शुरू, पड़ेगी, सांस लो, सो सांस बाहर निकालो हम। क्योंकि अगर तुम इस सोहम मंत्र से जुड़ जाओगे, तो तुम्हारी प्रार्थना और साधना दोनों बदल जाएगी। अभी क्या है ये महादेव मेरा शरीर ठीक कर। 2 क्यों तुम्हे लगता है तुम शरीर हो? और अगर तुम्हें लगेगा तुम शरीर हो, तो फिर तुम इस शरीर की गुलामी जिंदगी भर करते रहो। अभी तुम क्या कहते हो? हे महादेव, मुझे, ये भी मिल रहा है, मुझे, वो भी मिल जाए। क्यों? क्योंकि अभी तुम हसल कल्चर की पैदाइश हो, हसल कल्चर का क्या मतलब है, इंस्टाग्राम पर जाते हो, देखते हो, लोग हसल कर रहे हैं, ये भी कर रहे है, वो भी कर रहे। तुम योगियों को देखते हो। योगी भी मोटर साइकिल चला रहा है, योगी भी खूब स्काइडाइविंग कर रहा है, खूब गल्पिंग कर रहा है, ये कर रहा है, वो कर रहा है। सब हसल कल्चर की पैदाइश है। क्यों तुम्हें प्रलोबनआताहै। और फिर तुम्हें लगता है कि अच्छा जीवन का शायद यही मतलब है कि मैं थोड़ा और मजाक करूँ, मैं थोड़ा और एडरीनलिन के पीछे भागूं, मैं थोड़ा और व्यसन के पीछे भाग, तो फिर महादेव से भी तुम्हारी यही प्रार्थना होगी। लेकिन अब हम क्या कर रहे हैं? सो हम की बस नाव, i m नोट दिस आई सो मच मोर। जब तुम थिएटर में जाते हो, तो थियेटर के बाहर लिखा होता है। चुप बैठना फोन मत उठाना प्लीज मेंटेन the illusion और so hm का mtlb, he im ready to break the usion, i m रेडी टू बेक this lusin ठीक है, अभी मेरको इस जीवन में कुछ धर्म करने हैं, बढ़िया है, लेकिन आई एम नोट जस्ट डिफाइंड बाई बीइंग मदर by being a father by being a child by being whatever profession। because the प्रोफेशंस आर गोइंग टू बिकम रिडंडंट, तुम आज ए आई के पास जाओ। बोलो ए आई यह किताब लिख 23 सेकेंड में वो किताब लिख देगा सारे। कंटेंट राइटर अब से लेट हो गए। और अगर तुम्हारी वही पहचान है त, तुम तो खत्म हो सो हम i m that आई, अब तुम्हे भी सोहम की साधना करनी है। यू वांट टू फाइंड पीस सो हम लर्न to go बीन। अपनी चेतना को ऊपर खींचो, अपना ध्यान अपनी रीढ़ की हड्डी की ओर लेकर के जाओ। जब शो सांस लेते हो तो डुबकी मारो, सुषुम्ना नाडी के भीतर कुंडलनी का दर्शन करो। और फिर जब सास निकालते हो, हम अपनी प्राण शक्ति को, अपनी चेतना को ऊपर खींचो। शस्त्र र तक और शस्त्र र में क्या है तुम्हारा शस्त्र कमल, thousand petl lotus। और इस थाउजनपेटललोटस में अपनी प्राण शक्ति को विज्वलाइज करो। और ये तुम्हारी प्राणशक्ति जो बैठी है तुम्हारे कपाल पर, वो प्राणशक्ति है हमसा और हमसा क्या होता है हंस और क्यों? शिव योगी कहते है हमसा, क्योंकि तुम कभी ध्यान से हंस को देखो, हंस पानी में रहता है, लेकिन हंस कभी गीला नहीं होता, तुम्हें भी पानी में रहना है। और तुम कभी गीले नहीं हो सकते। क्यों? क्योंकि अगर हंस गीला हो गया तो हंस भारी हो जाएगा। और अगर हंस भारी हो गया, वो उड़ नहीं पाएगा। और अगर हंस उड़ नहीं पाया तो मगर्मचउसको खा जाएगा। तुम्हे भी हंस की तरह। bnनाहगाswanirewold in such a man, it lives in the water, but it s wings are such that it cannot get wet। तुम भी यही साधना करो। hms, तुम्हारे घर वाले आयेंगे, पानी का ग्लास लेकर, तुम्हारे मुह पर मारेंगे। और अगर तुम हंस नहीं तो तुम गीले जाओगे। मुझे क्या बोल दिया, कैसे बोल दिया, क यू बोल दिया। तो दुनिया ऐसी है, तुम्हें जज करने के लिए तैयार है, तुम माहौल देखो दुनिया का। everybody wants to be an ideology if you आर नोट दैट, इडियोलॉजी, तुम पे पानी मारेंगे, टाप करके तुमसे पूछेंगे, तुम किस पार्टी को सपोर्ट करते हो, किस पॉलिटिशन को सपोर्ट करते हो, अगर नहीं करते। अगर तुम्हें पता ही नहीं तो पानी मारेंगे, ढप करके तो तुम भी डर के मारे। जहां कहीं भीड़ चल रही है, तुम पीछे पीछे खड़े हो जाते हो। फिर तुम हंस कहाँ हो? मछली बन गए। और मछली। तुम्हे लगता है कभी अपने इस बांड से ऊपर उठ सकती है, अपने तालाब से ऊपर उठ सकती है। वो तो रह जाएगी, हमको उड़ना सीखना होगा इस इस पानी में, इस दलदल में तुम्हे लोग नीचे खींचेंगे। फिर। दुनिया जहान की पॉलिटिक्स है, हर कोई तुम पर डालने के लिए तैयार है। मेरे पास भी लोग आते कहते कि तुम शिव की साधना करते हो। अच्छा तो तुम्हारे मन में कृष्ण बड़े नहीं छपा, उनकी आइडियोलॉजी है। उनको लगता है कि अगर मैं महादेव की साधना करता तो मैं फिर भगवान कृष्ण को कुछ नहीं मानता। उन्हें क्या पता की भगवान कृष्ण से बड़ा कोई और शिव योगी था ही नहीं। लेकिन कौन उनको समझाए? वो तो खुद गीले बैठे हंसियोनी में मछली बने हुए हैं। तो या तो अब तुम दुनिया से लड़ो और या फिर शिवयोगी बन देख। तमाशे दुनिया के हमसा और तैरो, तुम, तैरना, तुम हमारा धर्म है, तुम पैदा हुए हो तैरो, तुम इस तालाब में, तैरो, तुम इस नदी में, तैरो, तुम इस समुद्र में, लेकिन कभी गीले मत होना रहो देखो। और जब समय आएगा तो तुम्हारे गुरु की आवाज तुम्हें सुनाई पड़ेगी शिवा और शिवा का मतलब क्या। अब उड़ मेरे हंस प्यारे अब उड़ने का समय है। और फिर इस कपाल से वो हंस उड़ेगा और महादेव मिली सो, हम चेतना को उठाओ, हम सा, शिवा और सही मायने में। जीवन का और कोई मतलब नहीं, कोई और गुरु। तुम्हें कुछ और नहीं सिखा सकता। विद्या को बड़ा है, बड़े नाम मिल जायेंगे, कुछ और सीखने लायक है ही नहीं। इसलिए शिव योग में मैं तुम्हे बस या तो प्रति प्रसव कराता हो। प्रति प्रसव का क्या मतलब है? खुद की सफाई दुनिया जहान के जो तुम कर्म बना कर बैठे हो, उन्हें त्यागो, क्योंकि वही कर्म, फिर रुकावट बनते हैं, वही कर्म। तुम्हारे इस हंस को गीला कर देते हैं। और फिर अंस उड़ नहीं पा रहा। तुम शांत हो नहीं पा रहे, तुम शेर से जुड़ नहीं पा रहे। तो मैं तुम्हे प्रतिप्रसव की साधना करता हूँ। और अब प्रति प्रसव के बाद मैं तुम्हें ललिता रूदरतरशतiश्रीविद्या, त्रिपुरा रहस्य की साधना कर रहा, ताकि समय आने पर ये हंस ऊपर उठ सके। और ये जितनी भी साधनाएं हैं। ये साधनाएं अब खुद को समेटने की। तुम्हें लगेगा कि अरे अब मैं श्री विद्या साधना कर। कुछ और, पालूं, कुछ और बना लो कितने और जाल तुम बनोगे कितना और देखोगे। कभी न कभी तो भीतर डुबकी मारनी होगी नारद मुनी। और भगवान विष्णु का कथन है कि नारद मुनि गए और भगवान विष्णु से कहा कि हे भगवान, तुम तो जगन्नाथ हो, तुमने इस सृष्टि का निर्माण किया। तुम्हारा वक्त जो भी मांगता है तुम उसे देख क्यों नहीं देते। भगवान विष्णु मुस्कुराये और कहा चल ना पृथ्वी पर। मैं तुझे दिखाता और देखा कि तपती धूप में 1 किसान काम कर रहा था। भगवान विष्णु उसके पास गए और कहा कि बोल तुझे क्या चाहिए? बच्चा किसान कहता है मुझे जमीन चाहिए जमीन। तो भगवान विष्णु ने कहा ठीक 1 काम कर, तू भाग जितनी दूर भाग सकता है तू भाग। और जहां तक तू भाग के पहुँचेगा वो सारी जमीन त तेरी तो तू भाग, जब तक तेरा जी न भर जाए। और जब तेरा जी भर जाए तो तू मुझे आके बता देना देखो। भगवान मैं वहां तक भागा और उतनी जमीन में मेरा हो जाएगा, वो जमीन मुझे दे। 2 तो भागना जितनी दूर भाग सकते हो, जब जी भर जाए। आके मुझे बता देना कि मैं वहां तक भागा किसान सुनकर बड़ा खुश हुआ भागा मजे की बात कहते हैं कि नारद मुनि और भगवान विष्णु आज तक इंतजार कर रहे है किसान लौटाई नहीं भागता रहा। देखो धर्म का काम यह नहीं है कि हे भगवान, ये मन्नत पूरी कर। 2 फलानी चीज दे। 2 अगर भगवान का तुम्हें लगता है, ये काम है, तो तुम भगवान के पीछे नहीं, तुम सुपरस्टीशन के पीछे भाग रहे, फिर तुम कह रहे, हे भगवान, मैं भागना शुरू हुआ था, थोड़ा, और मैं भाग सकता हूँ, क्या गाड़ी दे। 2 ताकि मैं और दूर भाग जाऊं तुमसे। 1 प्लेन दे। 2 ताकि और तेज गती में, तुमसे तुमसे विपरीत भागू पकड़ा धर्म का काम में, भाग के जहाँ पहुँच गए हो न। अब वापस आओ, कम बैक, कम बैक होम, कम बैक शो हम, हमसा शिवा इसलिए शिव होगी इस पूरे पूरे हफ्ते में, और तुम तुम्हारी सास। अब सो हमसे जुड़ी होगी, ध्यान कपाल की ओर, सो डुबकी, मारो भीतर रुप की मारो। जैसे 1 व्यक्ति सोता है, शो का सपना देखता है, तो तुम भी डुबकी, मारो भीतर देखो, जो कुछ भी बना कर के बैठे हो, लेकिन जब सांस निकालते हो, तो मानो आखिरी सांस हम जब सांस भीतर लेते हो, सो तो ऐसे लेना जैसे पहली सांस ले रहे हो। और हम से आखिरी सांस निकाल रहे हो। अब उठने का समय है, जागने का समय और प्राण शक्ति को खींचो कपाल तक। और यहाँ पर वो हंस बैठा है सस्ता के ऊपर on the tousanpetleflowr, सो हम। और फिर जब साधना में बैठते हो, भगवान के सामने बैठते ह, दिन भर की मेहनत के बाद भगवान का धन्यवाद करते हो, तो फिर इस हंस को बोलो शिवा। flaiowaगोingटo the लाइट बिकम वान। यही तुम्हारा सत्य है। और हर बार जब तुम 1 ऐसा भाव उत्पन करोगे तुम तैयारी कर रहे हो किस चीज की ताकि जब सिनेमा खत्म हो, तुम कुर्सी छोड़ जा। सको क्यों? क्योंकि मार्वल ने तुम्हें ऐसा बना दिया है कि अब तुम सिनेमा के बाद भी कुर्सी से चिपके बैठे हो। और तुम्हें पता है कि कुछ ज्यादा नहीं मिलने वाला। 1 बूंद मिलेगी और उस बूँद के लिए तुम इतने प्यासे, इतने गरीब, इतने फकीरी, आ रखी है। तुम्हारे अन्दर उस, उस, उस छोटे के लिए तुम खुद को दुख दे रहे हो। बरवल की इस बूंद के लिए शिव के उस समुद्र को तुम नकार रहे हो। और हर बार जब तुम ये भाव उत्पन्न करोगे सोहम, हमसा शिवा तुम तैयार हो पाओगे। ताकि जब समय आये, तुम ऊपर उठो और मजे की बात, जब तुम इस वैराग्य भाव से अपने जीवन को जियोगे, तो तुम मुक्त हो। तब तुम पाओगे स्वास्थ्य भी तुम्हारे साथ चल रहा है, सफलता भी तुम्हारे साथ चल रही है। तुम पाओगे शिव स्वयं तुम्हारे साथ चल रहे। क्यों? क्योंकि अब तुम दूर नहीं दौड़ रहे। अब तुम शिव की ओर दौड़ रहे हो। और जब तुमने शिव को पा लिया तो तुमने सब कुछ पा लिया, फिर तुम शक्तिशाली हो, फिर तुम, ताकतवर एंड दिस, इस द, मोस्ट, इम्पोर्ट थिंग द। and i try to teach the uth, when you find god, you find mental health, and when you have mental health, then you have the capacity, the ability to achieve so much more in life your mind is very powerful, everything, that you see comes from the mind, but if we are trying to live it a broken mind, then how helpless are we imagine trying to drive with a broken car to imagine trying to fly in a broken plain and your trying to live with the broken mind, your mental, health comes, first shiva comes, f it। and you have shiva, you have a hely mind, and when you have a helly mind, o my god like become so, easy so beautiful। and that is why the siddha, shiva yog samadilेकिउस। समाधि की बात हम बात में करेंगे, आज बस तुमसे यही बात करनी थी सो हम हमसा शिवा कोशिश करो कि अब इस साधना की ओर बढ़ो, इस वैराग्य भाव की ओर बढ़ो और तुम पाओगे लोगों को माफ करना आसान हो जाएगा, शिव से जुड़ना आसान हो जाएगा। and you will find, you will value more than anything। the love of the divine that loves you unconditionaly akirycheas he ma, tumhe batana chahta won the whole love, you shiveshivaloves, you you are the child of the lite, you are the child of the universe try to meditate and accept this reality tak bahut। अच्छे bless you बिफोर you go जाने से पहले जरूर से जरूर इस वीडियो को शेयर करना 1 बढ़िया सी कमेंट, सबके लिए डालना और ये जो इमोजीज उड़ते हुए आ रहे हैं, 1 या 2 अपने भी डाल देना बहुत अच्छा लगा आप सब से मिलके अगले हफ्ते, फिर मिलूंगा और आपको बताना था जून के पूरे महीने में इम गोइंग टू डू, द प्रतिप्रश्, साधना, स फॉर आल द ग्लोबल सादक्स एंड देन। आफ्टर ग्रुप पूर्णिमा देखते हैं कि हम हिंदी में भी यह साधना भारत के लिए कर सके। साथ ही साथ जून के महीने में मैं इस माध्यम से या किसी और माध्यम से आप सब के लिए शिव महापुराण भी कराना चाहता है। क्यों? क्योंकि अगर 1 शिव योगी के मुंह से तुम शिव महापुराण सुनोगे, तुम्हारे जीवन में 1 दिव्य बदलाव उत्पन होगा, तुम्हे महादेव का अहसास होगा। सो ब्लेस यू lv you थैंक यू आप सब को, आप सब के भीतर के भगवान को, मेरा प्रणाम नम शिवाय।










