MINDFUL MATTERS | SHIV SADHNA | SHIVYOG MEDITATION #withIshanShivanand

The video is a live guided meditation session led by a Shiv yogi (Speaker A) with occasional prompts from a participant (Speaker B). The practice centers on synchronizing the breath with the mantra “Om Namah Shivaya,” using deep inhalations, breath‑holds, and exhalations while mentally chanting the mantra. The instructor repeatedly directs attention to different body parts (feet, palms, chest, abdomen, spine, eyes, nostrils) and describes the breath as being taken not only by the lungs but by every “particle” of the body, creating a sense of the whole body becoming “Shiv‑filled.” The meditation weaves in a vivid visualization of Lord Shiva (Mahadev) in various forms (Mahakaleshwar, Bhairava, etc.), encouraging participants to imagine Shiva smiling and radiating energy that is inhaled with each breath. The instructor explains that this practice awakens “jagruti” (consciousness) and dissolves “maya” (illusion), using the story of Narada Muni as an allegorical illustration of how attachment to sensory experience keeps one in a dream‑like state. Throughout, the teacher references the live audience (about 570 participants), urges repeated practice throughout the week, and gives practical advice about age, time left in life, and the importance of sharing the video with others who need Shiva’s presence. The tone is devotional, instructional, and motivational, with occasional humor about hyper‑oxygenation. The session ends with blessings, a request to like, comment, and share, and a promise to return next week.
Chapters
आप सब को, आप सबके भीतर के भगवान को मेरा प्रणाम। मैं बहुत प्रेम व सम्मान से आप सबका हार्दिक स्वागत करता हूँ आज के स माइंडफुल मैटर्स में और इससे पहले हम शुरू करें शंभर के लिए अपना ध्यान अपनी सांस की ओर लेकर जाओ, गहरी सांस भीतर गहरी सांस बाहर हो सके तो अपनी सांस को मंत्र के साथ जोड़ो और मंत्र बहुत साधारण है। ओम नमा शिवा है आपको मेरी आवाज आ रही है, सब लोगों को हाँ जी नाची आवाज आ रही है। आपको टाइप करके बताना पड़ेगा तभी तो मैं समझ पाऊँगा बहुत अच्छे मंत्र है। ओम नम शिवाय, ओम मंत्र के साथ सांस लेने की कोशिश करो, मनि मन मंत्र, ओम सांस भीतर नम सांस रोको शंभर के लिए और शिवाय सांस बाहर देखो। 1 शिवयोगी आपसे बात कर रहा है और अगर 1 शिवयोगी की सुनोगे तुम महादेव से जुड़ सकते हो, महादेव तक पहुँच सकते हो। इसलिए सुनना और केवल सुनना मत इस बात को गहरा उतरने देना। मंत्र है ओम, ओम मतलब उंकार ध्वनी, जिस ध्वनी से यह पूरा संसार उत्पन हुआ, तुम्हारे हर एटम से 1 ही आवाज आती है। और इसी ओम से उत्पन हुए namsiwaयaपांचभूत, पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु, आकाश। और जब तुम इस मंत्र का स्मरण करते हो, तुम उस शिव से जुड़ रहे हो जिस शिव से यह पूरा भ्रह्मा उत्पन हुआ, जिसमें यह पूरा भ्रह्माणलीन हो जाएगा। और तुम्हारी सास बहुत कीमती है सास को हमेशा मंत्र से हमें जोड़ना है। यह बहुत सरल विधि है ध्यान की, स्मरण की। तुम्हारी सांस तुम्हारे हाथ में भी है और तुम्हारी सांस भगवान के भी हाथ में है। अगर तुम इस डोर को पकड़ लेते हो तो तुम अपने शुभ तक जुड़ सकते हो। तो मनि मन ओम सांस भीतर नम रोको शिवाय साँस निकालो।
तो मैं अगर बोलूं ओम नम शिवाय,
तो तुम्हारी सांस और लम्बा खींचना ऐसे नहीं ओम नम शिवा, ओम नम शिवा, ओम नम वा। फिर तो हाइपर ऑक्सिडेशन से तुम मर जाओगे,
धीरे लंबा खींचो ओम नम शेवान।
और साथ ही साथ तुम 1 जागृति उत्पन्न करो। 1 स्मरण करो और स्मरण क्या है कि सांस केवल तुम नासिका से नहीं ले रहे है, केवल फेफडों से नहीं ले रहे, बल्कि तुम्हारा 11 सेल सांस ले रहा है, तुम्हारा 11 सेल गुब्बारे की तरह फूल रहा है, सिकुड़ रहा है। सो द होल, बॉडी ज ब्रीथिंग लेट देयर। बी the थॉट शन भर के लिए तुम जागृत हो जाओ अपने पूरे शरीर के प्रति तुम्हारा ध्यान पैरों के तलवों पर, तुम्हारा ध्यान हाथों की हथेलियों पर, छाती पर, पेट पर, पीठ पर, गर्दन पर, तुम्हारी आँखों पर, तुम्हारी नासिका पर 1 ही साथ 1 ही साथ कोशिश करो। द। अवेयरनेस, गो, थ्रू आउट द बॉडी तुम पूरे शरीर के प्रति जागरत हो और पूरे शरीर के 11 कण से ध्वनी, ओम नम शिवाय और शरीर का 11 कण सांस लेता हुआ, फूलता हुआ, सिकुड़ता
हुआ, ओम नम शिवाय।
सभी लोग कोशिश करो। अभी 570 लोग मेरे साथ सांस भीतर होम।
नाम शिवा,
तुम्हें मंत्र बोलना नहीं, तुम्हें बस सोचना है, तो तुम ऐसा भाव रखो कि मेरा मंत्र जैसे चल रहा है, वैसे का वैसे अब तुम्हारे दिमाग में तुम्हारे मन में डाउनलोड हो गया और जब तुम्हारे मन में ये मंत्र चलेगा, ये मेरी आवाज में चलेगा, ओम नम शिवाय और इसी मंत्र के साथ मारी सांस चलती रहेगी, ओम के साथ भीतर नम से रोको और शिवाय पर निकाल लो और साथ ही साथ जागृति की मेरा कण कंड सांस ले रहा है, मेरा कण खंड फूल रहा है, मेरा कण खंड से गोल रहा है। और अब 1 और बात का स्मरण कि जब मैं सांस ले रहा हूँ, मैं केवल वायु भीतर नहीं ले रहा, मैं महादेव की ऊर्जा को भीतर ले रहा तो तुम अपना ध्यान शिव शिवा की ओर लेकर के जाओ, भगवान शिव मुस्कुराते हुए, भगवान शिव मानो, तुम्हारे सामने बैठे तो तुम कैसे स्मरण करोगे महादेव और तुम्हारे ऊपर महादेव तो महादेव महामृत्युंजय, तुम मृत्युंजय महाकाल। तो महा काल भेरव। तो भैरव मेरे महादेव के बहुत स्वरूप है, तुम कोई भी 1 स्वरूप चुन लो और वो तुम्हारे सामने और बहुत प्रेम से महादेव तुम्हारे सामने मुस्कुराते हुए ध्यान कर रहे हैं और भाव उत्पन करो कि अगर महादेव सामने होंगे तो क्या भाव होगा और फिर तुम बोलोगे मुझे दिख तो वो रहे ही नहीं तो तुम ऐसा भाव उत्पन करो जैसे 1 बालक का है जो मां के गर्भ में है, जो अपनी मां से जुड़ा है लेकिन उसने कभी अपनी मां को देखा नहीं, उसी प्रकार से तुम इस पृथ्वी पर हो तो महादेव से जुड़े हो, शायद इन आँखों ने नहीं देखा। लेकिन 1 दिन जब उस बालक का जन्म होगा, तब उसकी मां उसी बालक को अपने हाथों में उठा कर बहुत प्रेम से गले लगाएगी और उसी प्रकार से जिस दिन तुम साधना में सफल होगे, तुम्हें उस महादेव का भी स्मरण जरूर से जरूर होगा, इसलिए तुम बस भाव उत्पन्न करो कि अगर दिख भी नहीं रहे। मेरे महादेव मेरे सामने है और जब मैं सांस लेता हूँ, मैं वायु नहीं, मैं अपने महादेव की ऊर्जा को अपने कणकण में भर रहा हूँ और फिर मैं शंभर के लिए सांस रोकता हूँ और मैं उस ऊर्जा को एब्जॉर्ब कर
रहा हूँ
और शिवाय जब मैं सांस बाहर निकालता हूं तो मैं जो हूं, जितना हूँ, मैं शिव शिवा को पूर्ण समर्पण कर रहा हूँ। तो 1 बार फिर ओम सांस खींचो,
ओम रोको नम निकालो सेवा
बस 5
बार और ओम नम सेवा 4 बार
और मने मन मंत्र चलता रहे,
ओम नम सेवा।
मेरा कण कण सांस ले रहा है, मेरा कण कण शिवमय हो रहा है,
ओम नम सेवा
जागरत हो, इस विचार के प्रति मेरा हर कण शिवमय हो रहा है, मेरा हर कण शिवमय हो रहा है, मेरे मंत्र के साथ, मेरी सास के साथ, मेरे भाव के साथ, मेरी जागृति के साथ, मेरा कण कण शिवमय हो रहा है। आखिरी बार ओ
nama शेवा,
बहुत अच्छे, अब इस पूरा हफ्ता, आप सबको कोशिश करने कि आप सांस मंत्र और इस भाव के प्रति जाग्रत रहे, तो आपकी सांस कैसी होगी, क्या जाग्रती है कि मेरी सांस गहरी, साथ ही साथ मंत्र के प्रति मंत्र अजपा जप चलता रहेगा। ओम नम शिवाय और अपनी सांस को मंत्र के साथ जोड़ना है। साथ ही साथ भाव और भाव क्या है कि मैं केवल अपने फेफड़ों से सांस ही नहीं ले रहा, मेरा शरीर का कण कण सांस ले रहा है। the हolbodyisbrीत और सिर्फ सांस तुम्हें ले ही नहीं रहा। मैं महादेव की शक्ति को अपने भीतर लेकर के जा रहा हूँ। और मेरा पूरा शरीर फूलता हुआ महादेव की ऊर्जा से। और जब मैं सास निकालता हूँ तो समर्पण तो क्या हो रहा है? my body, my pet माई इमोशंस एंड माई अवeरनes आर इन अलाइनमेंट। क्योंकि देखो मुझे तुम्हें तैयार करना होगा। जून में आप सबको मुझे शिव महापुराण का रानी तो बहुत जरूरी है कि आप सब तैयार हो। और हां, मोनाजी मन में मंत्र करना है। बोलना थोड़ी ना बोल, मैं आपके लिए रात ताकि आप इसी ध्वनि में, इसी बेस पर, अपने मन में मंत्र को चला सके। और ये मैं आपको इसलिए बता रहा हूँ क्योंकि मैं चाहता हूँ आप अपने शिव के प्रति जाग्रत हूँ। 1 बार की बात है, नारद मुनि भगवान विष्णु के पास गए और उन्होंने कहा, हे भगवान, माया क्या होती। और उस समय भगवान ने नारदमुनि को देखा और कहा कि देखो, मैं समझा नहीं पाऊँगा, बहुत कठिन है, पर मैं कोशिश करता हूँ। तो भगवान नारद मुनि को ले गये। पृथ्वी के चक्कर काटने लगे चलते चलते, 1 रेगिस्तान में पहुंचे और समझाते हुए। उन्होंने नारद मुनि को कहा, नारद मुझे प्यास लग रही है। पानी लेकर आओ। भगवान बैठ गए, नारदमुनी गये, पानी की खोज में, 1 कुए पर पहुंचे और जब नारदमुनी 1 कुएं पर पहुंचे। नारदमुनि ने 1 बहुत सुंदर स्त्री को देखा, इतनी सुंदर कि तुम सोच भी नहीं सकते। नारदमुनि मंत्र मुग्ध हो गए और उस स्त्री के पीछे पीछे चलना शुरू कर दिया। जैसे जैसे स्त्री के पीछे चलते गए, उन्हें प्रेम हो गया। स्त्री अपने घर पहुंची। नारद मुनी सीधा ही उसके पिता के पास गए और कहा कि मुझे इससे शादी करनी है। पिता ने कहा देखो, मैं तो मुखिया हूं, मेरा बेटा नहीं, अगर तुम शादी करोगे तो तुम्हे इस गाँव का मुखिया होना होगा। नारद मुनी ने कहा ठीक है, सब सब चलेगा। नारदमुनि की शादी करवा दी गई। थोड़े समय बाद ससुर का देहांत हो गया। नारदमुनी मुखिया बन गए, सब अच्छा चल रहा था। नारद मुनि के 3 बच्चे भी हो गए। पत्नी के साथ, 1 सुखी पारिवारिक, जीवन, 3 बच्चे, मुखिया, गांव, सब अच्छा और फिर 1 दिन बारिश आई, बारिश बढती चली गई। 10 दिन तक बारिश चलती रही, बिल्कुल नहीं रुकी और फिर बाढ़ आ गई। जब बाढ़ आई, गांव बह गया। नारदमुनि ने पूरी कोशिश की। घर का दरवाजा तोड़ा दरवाजे पर पत्नी को बिठाया, 3 बच्चों को बिठाया, लेकिन बाहर तीव्र होती चली गई। 1 लहर लहर ने दरवाजे को पलट दिया। नारदमुनी तैरते जा रहे थे। 1 हाथ से बच्चों को पकड़ने की कोशिश, 1 हाथ से पत्नी को पत्नी बह गई। बच्चों को पकड़ने की कोशिश, सबसे बड़ा बहा, फिर छोटी और फिर सबसे छोटी हाथ से निकल गई। फिर 1 लहर आई और उस लहर में पटक के नारद मुनि को किसी घर की छत पर फेंक दिया और वहाँ पर बैठे बैठे नारदमुनी रोते रहे, चिल्लाते रहे, चीखते रहे। भगवान को देख कर हे भगवान, ये तूने क्या किया? मेरा पानी कहाँ है? मैं अभी भी प्यासा हूँ। एकदम से नारद मुनी ने आँखें खोली कहीं कोई बार नहीं थी, कहीं कोई छत नहीं थी। और नारद मुनि भगवान के पैरों पर बैठे थे। और भगवान ने कहा नारद यही माया है। माया 1 स्वप्न के समान है जिससे हम जुड़ जाते। और अगर तुम इस स्वप्न से उठना चाहते हो तो तुम्हे जागरत होना सीखना पड़ेगा और जागरत होने का मतलब ही ध्यान है और ध्यान का मतलब ही जागरी। जो लोग जागरत नहीं वो माया में और डूबते चले जाते। अभी जो हमने ध्यान किया मैंने आपको ध्यान कराया, हमने क्या किया? मंत्र के प्रति जाग्रत थी क्यों? क्योंकि मन में बहुत विचार चल रहे हैं, हर विचार माया के समान है। ये होगा नहीं होगा, क्या होगा, क्या नहीं होगा। यह सब माया है, जो होगा वो तो होगा लेकिन हमारा मन सोचता है। और सब के बीच क्या शास्वत है किसको हम पकड़ सकते हैं और वो शिव है। इसलिए पहली जागृती क्या? मन को किस प्रकार से जागृत करें? मंत्र से जुड़े ओम नम शिवाय, फिर दूसरी जाग्रति सांस क्यों? क्योंकि सास के प्रति जागरत होगे तो तुम अपने भाव को पकड़ सकते हो। वरना भाव भी माया में बह जाएंगे। और भाव कुछ भी हो सकता है, चिंता हो सकती है, भय हो सकता है। लेकिन जब सांस के प्रति जागरत हो जाओगे तो तुम्हारे भाव सम्यक होंगे। तीसरा मैंने क्या बताया शरीर, शरीर के प्रति जागरत, पूरा शरीर सांस ले रहा है। और शिव की शक्ति भीतर मेरा कण, कण शिवमय हो रहा है। और अगर शरीर के प्रति जागरत नहीं होगे। फिर फिर माया में डूबते चले जाओगे। साधना हमें जागरत होना सिखाती साधना इस स्वप्न को तोड़ेगी माया को तोड़ेगी, जो शिव योगी है वो जागरत है। और अगर तुम जागरत हो तो तुम पाओगे प्रेम करना सरल है, माफ़ करना सरल है, शिव से जुड़ना सरल है। क्योंकि अगर तुम देखो जो महाकाल से जुड़ा है, जो जागरत है उसको पता है, उसको पता है, सत्य क्या है और सत्य क्या है। जितने लोग अभी मुझे सुन रहे हैं कितने साल के हो, आप शायद 25 के होंगे, 20 से 30 के बीच में ज्यादातर लोग हैं। और अगर आप 30 साल के हो और मुझे सुन रहे हो तो आप खुद सोचो। शायद 20 और साल है। उसके बाद आप बुढ़ापे की ओर बढ़ जाओगे और अगर आपके पास 20 और साल है तो यह 20 ही साल है। साधना के लिए बचे 20 साल हैं। खुशी के लिए आपके पास बस 20 गर्मी के मौसम में 20 सर्दी के मौसम है। ओनली ट्वेंटी more tem that is it। और उसके बाद 50 के बाद तो पता नहीं क्या होगा, शायद आपका मन सठियाना शुरू हो जाए, शरीर के हाथ पैर पड़ जाए, और सोचो, जो लोग मुझे सुन रहे हैं और जो पहले 50 के हैं, उनके पास कितना समय बचा है? सिंगल यर दैट वी हैव हर साल, जो हमारा है, दार इस वन, अटेम्ट, वन अटempट, तो, woर्डsshiवa वन अटेम्प्ट, तो वर्ड्स रिलाइजेशन, अटेम, गें और अटेmthatiजlus। और जो व्यक्ति स्वप्न में है, वो इस बात का ध्यान ही नहीं रखता कि उसके पास कितना समय है, उसके पास कितनी शक्ति है उसके पास, और जो व्यक्ति जागृत है, वो महादेव को भी समझता है, महामृत्युंजय को भी समझता है, और महाकाल को भी समझता है। और वो क्या समझता है कि मेरे पास इस प्रथ्वी पर, इस योनी पर, इस शरीर पर बस कुछ इतना ही समय है। और अगर इतना ही समय है, मैं इस समय को स्वप्न अवस्था में व्यर्थ नहीं गवा सकत, मुझे जागृत होना होगा और चाहे जागृति किसी भी चीज के लिए है, चाहे वो जागृति, इसलिए ताकि मैं अपने परिवार के लिए कुछ बना सकूं, चाहे वो जागरत, इसलिए कि मैं अपने लिए कुछ बना सकूँ, चाहे वो जागृति, इसलिए कि मैं अपने शिव तक पहुँच सकूं। और ये सब कुछ जागृत होकर ही हो सकता है। स्वप्न अवस्था में कुछ नहीं हो सक। और अगर तुम अभी पीडित हो, दुख है, मानसिक अशांति है, तो यह 1 स्वप्न है। मैं शिव योगी तुम्हें बस इतना ही कहना चाहता हूँ, जागने का समय आ चुका है, गुरु की आवाज अलार्म का काम करती है। और वो यही बार बार तुम्हे बोलेगी, हे नारद, मैं प्यासा हूँ, पानी का है। और अगर तुम अपने गुरु की आवाज सुन लोगे, तो पहुँच जाओगे जहाँ तुम्हें पहुंचना है। और हाँ, हो सकता है जब गुरु की आवाज सुनाई दे और गुरु बार बार तुम्हे जगाने की कोशिश करे, तो जैसे 1 बच्चा अपनी माँ से चिढ़ जाता है कि तुम चले क्यों नहीं जाते, यहाँ से तुम बात क्यों नहीं हो सकता है, गुरु के प्रति भी तुम्हें चिढ़ और गुस्सा आएगा, लेकिन याद रखना, वो कहीं नहीं जाएगा, उसकी आवाज बार बार तुम्हें आती ही रहेगी, और वो बार बार यही बोलेगा। अब जागने का समय आ चुका है और इसलिए इस पूरे हफ़्ते त तुम्हें मेरी आवाज़ सुनाई देगी, तुम इस वीडियो पर बार बार लौटना, जब तुम्हे लगे कि तुम स्वप्न में फिर डूब रहे हो और मेरी आवाज़ में 1 ही ध्वनी होगी। और वो ध्वनी है ओम नम, शिवाय दुनिया, तुम्हे सुलाने की कोशिश करेगी, गुरु तुम्हें जगाता और जाग्रति में ही शिव है, जागृति में ही महादेव हैं, महाकाल है, महा मृत्युंजय है, चाहे जो कुछ भी हो, तुम कोशिश करना, तुम्हारा ध्यान सांस पर, तुम्हारा ध्यान मंत्र पर, और तुम्हारा ध्यान इस बात पर कि मेरे शिव की ऊर्जा मेरे भीतर हर सांस के साथ मेरा कण कण शिवमय हो रहा है। तुम्हें बताना था, बहुत सारा प्रेम, बहुत सारी ब्लेसिंग्स, और बहुत सारी शक्ति जाने से पहले इस वीडियो को जरूर से जरूर शेयर करना, हर बच्चे के साथ जिसको जागने की जरूरत है, तुम्हारे हर रिश्तेदार के साथ जो स्वप्न में गहरा उतरता चला जा रहा है। share this video with anyone you feel needs shiva in their life और हां, जरूर से जरूर हर शिवयोगी के लिए 1 अच्छी सी कमेंट लिखना और इस वीडियो को जरूर लाइक करना ठीक है। प्यारे बहुत सारी ब्लेसिंग्स बहुत सारा प्रेम अब मिलूंगा अगले हफ्ते आप सब से ब्लेस यू यू थैंक यू आप सबको, आप सब के भीतर के भगवान को मेरा प्रणाम नम शिवाय।










