NATURE'S HAVEN ON EARTH - Bhagwan Gorakhnath Gaushala, Alwar, Rajasthan | Ishan Shivanand

Ishan Shivanand documents a 100-acre cow sanctuary in Alwar, Rajasthan, founded by Dr. Avdhut Shivananand. The gaushala houses 900 to 1,000 freely roaming cows, runs on biogas and organic systems, and rescues injured cattle. Visitors describe feeling powerful spiritual energy in what's called a "Triveni" of divine presence.
Chapters
t प्रकृति का यह मनोरम और खूबसूरत प्रांगण भारत के राजस्थान राज्य के अलवर जिले में अरावली पर्व श्रंखलाओं के बीच बसा है। गायों के लिए सबसे सुन्द और सुरक्षित माना जाने वाला यह अभ्यारण शिव योग गौशाला और भगवान गोरखनाथ गौशाला के नाम से जाना जाता है। करीब सौ एकड़ में फैली इस गौशाला में 1000 से ज्यादा गाय स्वचंत्र रूप से विचरण करती हैं। इस गौशाला में कदम रखते ही 1 अद्भुत जीवन, ऊर्जा और आनंद की अनुभूति होती है। कई वर्षों तक शिव योग गुरु डॉक्टर अवधूत शिवानंद जी की तपोभूमि रही। इस गौशाला से आचार्य इशान शिवानंद जी का भी गहरा लगाव रहा है।
यहाँ पर गौशाला है। जब बाबा जी वहाँ पर गए, पहली बार तो वहाँ पर दुख था, वहाँ पर बीमारी थी। वहाँ के लोग इतने पढ़े लिखे नहीं थे। और जब बाबा जी वहाँ पर बैठे, बाबा जी ने सब लोगों को अच्छा अच्छा सिखाना शुरू किया। बाबा जी ने बच्चों को पढ़ाना लिखाना शुरू किया। बाबा जी ने बच्चियों की शादी करानी शुरू की। बाबा जी ने जानवरों को बचाना शुरू किया तो अपने आप को स्थान में बदलना शुरू करे।
आचार्य इशान शिवानंद जी व्यस्त दिन चर्या से समय निकालकर अक्सर यहाँ आते हैं। पिछले दिनों भी वो सब परिवार गौशाला आये और बच्चों के साथ प्रकृति की गोद में बसे इस अभ्यारण का भ्रमण कर गौशाला की व्यवस्था का जायजा लिया।
बाबा डॉक्टर अवदूत सेवानंद जी ने इस गौशाला का निर्माण किया है। इस गौशाला में वर्तमान में 900 सौ, 1000 तक गौ, माता और बैल हैं। जिनकी सेवा सुरा बहुत अच्छे तरीके से की जाती है।
भगवान गोरखनाथ गौशाला आध्यात्मिक उर्जा का त्रिवेणी स्थल भी है। यहाँ बाबा जी के तपोबल गायों की जीवन, उर्जा और शिव की अनंत कृपा की अनुभूति सहज ही होती है। बाबाजी ने यहाँ कई सालो तक साधना की है। जिससे यह जगह पूरी तरह जागृत है।
जब बाबाजी 1 छोटी सी कुटिया में बैठ कर के अन्दर ध्यान साधना के लिए चले गए थे। अन्य लिया जल लि ये आहार लिया है। ऐसी ध्यान साधना बाबाजी ने इस क्षेत्र में रह कर के इस गौशाला में रह करके की।
साथ ही यहाँ गायों में प्रवाहित होने वाली दैव्य और सकारात्मक उर्जा तरंगे भी मौजूद है। इसके अलावा गौशाला परिसर में ही 1 शिवालय की स्थापना भी की गयी है जो उर्जा शिखर का काम करती है। यहाँ नियमित रूप से पूजा और साधना होती है।
आई हैड द blessing of shiv shiva to experience the bero swarup and the temple, right, behind me the energy was quite powerful, yet blissful, i could sence that intense conection witnmylfandthe lord shiva।
बाबाजी ने इस गौशाला का नाम गुरु गोरखनाथ के नाम पर रखा है। बचपन से ही आचार्य इशांत शिवा नंजी का इस गौशाला से जुड़ाव रहा है। वो छोटी उम्र से ही यहाँ गायों की सेवा कर रहे हैं। बाबाजी के सानिध्य में उन्होंने यहाँ कई सालों तक साधना और आध्यात्मिक प्रशिक्षण हासिल किया है। इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए वो अपने बच्चे को भी गौ सेवा के लिए प्रेरित कर रहे हैं। इस रेगिस्तानी इलाके में जीवन की ज्योति जलाना बेहद ही मुश्किल भरा कार्य रहा है। यहाँ की पथरीली, जमीन और कंटीली झाड़ियों में हरियाली, फैलाना और बेजुबान गायों को बसाना बड़ी चुनौती थी। लेकिन बाबा जी ने अपने तपोबल और संकल्पशक्ति से सब मुमकिन कर दिया। यहाँ हरियाली के साथ वाटर लेवल भी बढ़ गया,
जहाँ पानी की व्यवस्था नहीं थी, जहाँ कोई रह नहीं सकता था। शाम को जहाँ डर लगता था। गर्मियों के दिनों में जब हवा चलती थी तो आँधी का स्वरूप ले लेते थे, रेत उड़ती थी। ऐसी स्थिति में बाबाजी ने ऐसी जगह पर आकर अपना खड़ा जमाया। बाबा जी ने साधना की साधना के भलीभूत पानी पैदा किया। इस समय गौशाला में बाबा जी ने, साधकों ने 9 बोरिंग करा रखे हैं, जिनमे भरपूर पानी है।
बाबाजी और गुरु माँ के प्रयासों से दशकों पहले यहाँ गो सेवा शुरू हुई। फिर गायों की संख्या बढ़ी तो यहाँ उनके लिए चारे की खेती भी होने लगी। इसके बाद आस पास की बीमार और घायल गाय भी यहां पहुंचाई जाने लगी।
initially be fet cause, who are very much, helthy, this moment, i have learnt that earlier the cars used to come in a very bad state, they were rescued from the butter farms, and they had to be brought up, here to be held to be core properly, and make them, healty again apart from this the meditation around is wonderful, there has been many crabs going around and i could see banboshotsaround the boundresalong with big trees?
जब गांव वालों ने बाबा जी को इन गायों की निस्वार्थ सेवा करते देखा तो वो भी इस मिशन में जुड़ते चले गए।
गोको करना जरुरी है। तो सभी कहा जाते थे कि गोशाला खोल, तो मैंने कहा कि हम खुद क्यों नहीं कर देते। लेट मी एलोन ऐज वन पर्सन ट्राइड तो मैंने गुरु मा से कहा साधना से तो शी फर्स्ट वेंटेड। और उन्होंने गाँव वालों से कहा की गाय को कसाई के यानी बेचना हमारे को दे। 2 तो किसी ने नहीं दी। तो फिर 200 रूपए में। उन्होंने कहा हम आपको 200 रूपया देंगे, गाय छोड़ जा।
इस गौशाला में। खास बात यह है कि यहाँ गायों को बांध कर नहीं रखा जाता है, इसलिए वो स्वछंद होकर चलती है। यहाँ उनकी सुख, सुविधा और चिकित्सा के लिए तमाम जरूरी इंतजाम भी उपलब्ध हैं।
आप इधर देखेंगे। मेरे बाईं हाथ की तरफ 1 कैंपस बना हुआ है, जिसमें उन गायों को रखा जाता है जो ब्लैंड हो।
गौशाला में काम करने वाले मजदूरों का भी खास ख्याल रखा जाता है।
गोमाता की सेवा हो रही है, यहाँ मतलब नौकरी भी कर रहे हैं। कमी नहीं है, कृपया बाबा की कृपा
है साहब सही मायने में कहें तो शिव योग की यह गौशाला 1 ऐसा रमनीक उपवन है जहाँ पशु, पक्षी, वनस्पति और मानवता की निस्वार्थ सेवा होती है। यहाँ सभी 1 साथ मिलकर आनंद पूर्ण जीवन जीते हैं और 1 जुटता का संदेश बाटते हैं।
as have observed this goshala, not just a century for cows, but for all vertes of flora and for every day, are new species of birds is visible, and it is not a shocking thing। बिकज दिस हज सच रिच डाiverसिty
and
in my experience, my friends are chasing edrnalianrush all over the places, scuba diving paragliding this or that, but trust me the peace, the com, i get her with these cows in the midst of this beautiful nature।
इस बियांड ने एड्रनलीन बेजुबान गायों के लिए स्वर्ग मानी जाने वाली इस गौशाला के लिए बाबा जी के साथ गुरु मां और इशान जी ने बहुत परिश्रम किया है और ये सिलसिला आज भी अनवरत जारी है।
बहुत ही सुंदर और ब्यूटीफुल वातावरण जो है वो गौशाला का बना हुआ है और जो मेरे मन में था कि सजा मृत्यु दंड के उनको आजीवन कारावास नहीं उनको 1 स्वर्ग मिलना चाहिए गायों को, तो वो हमारी गौशाला में, राजस्थान में हमने कर दिया
दूर दूर घी के अलावा गोबर से बना कंपोस्ट और गोबर गैस से बिजली के अलावा यहाँ ऑर्गेनिक खेती पर भी काम हो रहा है। गाय और प्रकृति दोनों से इंसानियत को मिलने वाला आशीर्वाद अनंत है। इसलिए जनकल्याण और मानवता की रक्षा के लिए शिवयोग गौशाला में दोनों को स्नेह, सम्मान और सुरक्षा प्रदान की जाती है।
batati।










