NAVIGATE THROUGH CHAOS | Mindful Matters | Ishan Shivanand

In this Mindful Matters episode, Ishan Shivanand delivers a passionate discourse on navigating life's chaos through steadfast spiritual practice. He emphasizes that true resilience comes from maintaining a regular meditation routine, regardless of external setbacks or negative energies. Drawing on teachings from his guru, he outlines four essential pillars—Acceptance, Goal, Gratitude, and Continuation—that form the backbone of disciplined growth. Ishan uses vivid metaphors, likening the soul’s journey to a river that inevitably reaches the ocean, reassuring listeners that even a turbulent path leads to the same ultimate union with the divine. He stresses that while material losses (wealth, health, relationships) are possible, one’s devotion and inner spirituality remain untouchable. The talk culminates in a call to share the message, reinforcing that collective blessings amplify individual transformation, and assures that the divine presence (Shiva, Siddhars) constantly supports the seeker.
Chapters
आप सब को, आप सब के भीतर के भगवान को मेरा प्रणाम। मैं बहुत प्रेम और सम्मान से आप सबका हार्दिक स्वागत करता हूँ। आज के माइंडफुल मैटर्स में। इससे पहले हम शुरू करें। शंभर के लिए शांत हो जाए। पीठ सीधी गर्दन सीधी 3 गहरी सांस लेना, पहली सांस भीतर सांस बाहर और धन्यवाद भगवान शिव शिवा का, दूसरी सांस भीतर सांस बाहर और धन्यवाद, सभी सिद्धों का, तीसरी सांस भीतर सांस बाहर और धन्यवाद शक्ति तत्त्व का, शंभर के लिए बिल्कुल शांत हो जाए। आँखें बंद और अपना ध्यान लेकर के जाए उस समय की ओर जब आप बहुत खुश थे, त्रप्त थे, जब आपके जीवन में कुछ बहुत अच्छा गठित हुआ था। याद करने की कोशिश करें उस भाव को जो कंकड में प्रभावित था, क्या हुआ था, उस पर ज्यादा ध्यान नहीं देना ध्यान उस भाव की ओर जिस भाव को आप खुशी और तृप्ति कहते हो, जिस खुशी से आपके भीतर धन्यवाद का भाव उठता है, अपनी ही याद से, अपनी खुशी से, इस ऊर्जा को बटोर न, और इस ऊर्जा को अपने वर्तमान में ले कर के आओ जिस स्थान पर तुम बैठे हो, और मन ही मन। 1 सरल सा भाव, मेरे जीवन में आज तक जो कुछ भी अच्छा गठित हुआ है, मैं उसे स्वीकार करता हूँ। और मेरे जीवन में आज से जो कुछ भी अच्छा गठित होगा, मैं उसके लिए धन्यवाद करता हूँ। मैं खुशी के लिए, सुख के लिए, शांति के लिए तैयार हूँ, इस भाव की ओर, अपना सारा ध्यान, सारी, चेतना लेकर के जाना। मेरे जीवन में जो कुछ भी अच्छा गठित हुआ, मैं उसे स्वीकार करता हूँ। मेरे जीवन में जो कुछ भी अच्छा होने वाला है, मैं उसके लिए भगवान को धन्यवाद करता हूँ। मैं तैयार हूँ खुशी के लिए, सुख के लिए, शांति के लिए। धीरेधीरे। मुस्कराते हुए, अपनी आँखें खोल। 2 स्यो कुछ समय पहले की बात है, लगभग 12 साल हो गए, बाबाजी ने मुझे कहा कि लखनऊ आश्रम में थोड़ी साधना करनी है। और लखनऊ आश्रम में। बाबाजी ने स्वयं महाकाल स्वरूप की स्थापना की है। महादेव का महाकाल स्वरूप। और जब मैं अपने गुरु से ज्ञान ले रहा था, मुझे थोडा आश्चर्य हुआ कि जिस भगवान की हम प्रार्थना करते है, उसका महाकाल स्वरूप भी है और महामृत्युंजय स्वरूप भी है। और मैंने अपने गुरु से पूछा कि जब मैंने बाकी धर्म को पढ़ा, thing is so black in। वाइट, यह भगवान है, यह शैतान है, यह अच्छा है, यह बुरा है। और हमें जो सप्तरिषि सिखाते है, उसमें तो हमें बताया गया कि सब कुछ महादेव है। ऐसा कैसे हो सकता है कि प्रकाश भी, शिव तत्व, अंधकार, विश्व, तत्व, ज्ञान विषय, तत्व, ज्ञान विषय, तत्व केस विश्व तत्व और बाबाजी ने मुस्कुरा के मेरको कहा बेटा तुम्हे। 1 बात अपने जीवन में समझनी होगी, जो प्रकृति है, प्रकृति थोड़ी कयाटिक हमेशा रहेगी, प्रकृति के भीतर अगर तुम एटम्स देखते हो, एटम्स और इन कोंस्टेंट स्टेट ऑफ मोशन। the world around you, it is not clockwork, the world is always changing। प्रकृति में कुछ भी स्थाई नहीं है, प्रकृति में हमेशा 1 बदलाव है। और इसी बदलाव की वजह से तो शायद विकास हु, प्राणी। बदले अगर तुम पेलियनटोलोजी की स्टडी करते हो तो तुम पाओगे हजारों ऐसे जीव थे पहले जो अब है ही नहीं, अगर तुम आर्कियोलॉजी की स्टडी करते हो। हजारों ऐसी सिविलाइजेशंस थी जो आज है ही नहीं। जिस दिन विज्ञान हमारा बढ़ेगा, उस दिन शायद हम इतिहास के ऊपर 1 प्रकाश डाल सकेंगे, क्योंकि हमें तो पता ही नहीं। शायद 10 हज़ार, 11 हज़ार साल की वर्ल्ड हिस्ट्री हम जानते हैं, उसके अलावा हमें कुछ पता ही नहीं और कुछ 1 कयास आया। महाकाल का स्वरूप जागृत हुआ और उस केस में, उस आंधी में, उस तूफान में कुछ सिविलाइजेशंस, कुछ प्राणी, कुछ जीव अटक गए, रहे गए, लुप्त हो गए और कुछ उस केस से निकल कर के चले गए। और कहने का क्या मतलब है। इंसान का अहंकार इस बात से आता है कि हमें लगता है हम पैटन रिकोगनाइज कर सकते हैं और हम पैटन प्रेडिक्ट कर सकते हैं। आज की तारीख में हम ज्ञानी किसको बोलेंगे? the person who can recognize a paton and who can predit where the paton is going? अगर इकोनमी में पी एच डी है, to who s the गेटस, इकोनोमिस्ट, जो बता दे कि अभी पैटन क्या है और आगे जीडीपी का क्या पैटन होगा। हज पर्सन हज ग्रेड सोशालोजिस्ट जो बता सकता है कि अभी लोग क्या सोच रहे हैं और आने वाले कल में क्या सोचेंगे। और यही तो अहंकार है जब हम कहते हैं कि हम समझ गए, हम पैटन समझ गए और अब हम पैटन प्रेडिट कर सकते हैं। लेकिन प्रकृति तो महादेव की इच्छा से। और जिस व्यक्ति को लगता है कि पूरी जिंदगी बस, पैटन से पैटन रिकोग्नेशन और पैटन प्रेडिक्शन, वो व्यक्ति सबसे ज्यादा स्ट्रेस और एंग्जाइटी में रहेगा। क्यों? क्योंकि जिस चीज को वो केस कहता है, इट इज, नौट कोस, नेचर एंड नेचर इज। अनpरedिctaबl। कभी न कभी तो कोई न कोई आंधी आएगी, कोई न कोई तूफान आएगा, कभी न कभी तो मौसम बदलेगा, कभी न कभी तो बरसात नहीं होगी, कभी न कभी तो स्वास्थ में भी बीमारी आ जाएगी, कभी न कभी। तो जो तुमने नहीं प्रिट किया था, जिसकी तुमने नई मेहनत की थी, वो चीज तुम्हारे जीवन में चल के आ जाएगी, तब क्या करोगे? अगर तुम्हारे जीवन में इकलौती स्टेबिलिटी, तुम्हारा तर्क था, तुम्हारे पैटेंस थे और तुम्हारी पैटन प्रिडिक्शन थी, तब पता है क्या होगा? जब क स आएगा, तो तुम टूट जाओगे, तुम गिर जाओगे, तुम्हारे भीतर इतनी एंग्जाइटी, इतना स्ट्रेस आएगा कि तुम हाहाकार मचाओगे, और फिर दुखी हो जाओगे। और उस दुख और ग्लानि की दलदल में डूब जाओगे कि हे भगवान, मेरे साथ ऐसा क्यों हुआ? और यह भी अहंकार है कि मेरे साथ ऐसा क्यों हुआ। क्यों तुम कौन से खेत की मूली हो? जब अवतार भी इस पृथ्वी पर आये? थर्ड डाइमेंशन के नियम हैं, कायदे कानून है, और थर्ड डाइमेंशन का नियम है। केस रैंडम चीजें होती है। और अगर तुम्हारी प्रार्थना भगवान से इसलिए है कि मैं इस केस को कंट्रोल कर लूं, तो तुम्हें अपनी साधना और पूजा में केवल दुख और हताशा ही मिलेगी। क्योंकि जो प्रकृति का नियम है, वो वो बदलता नहीं, जो 1 थर्ड डाइमेंशन के असूल है, वो बदलते नहीं, द लॉज, आर द लॉज, द नेचर, वर्क्स इन दैट मैन। और फिर 1 व्यक्ति कहता है? अगर ऐसा है तो फिर मैं साधना क्यों करूँ? क्योंकि अगर बाहर के रहने वाला है तो फिर मेरी साधना क्यों? और तब मेरे गुरु ने सिखाया साधना इसलिए क्यों क्योंki? you cannot control the case, but you can have the stent to navigate through the cause। मैं कहता हूँ, you can not control the case, that is around you no body can। बट यू कैन हैव द स्टेंट, तुम्हारे भीतर ताकत हो सकती है कि तुम इस आंधी से कैसे निकल के आगे बढ़ सको। और साधना, क्यों पूजा, क्यों भगवान, क्यों श्रद्धा, क्यों भक्ति, क्यों विश्वास, क्यों ताकि, तुम्हें, ताकत मिले, ताकि। तब जब तुम्हारे जीवन में तूफान आता है, तुम हताश गिर ना जाओ, तब तुम फ्रीज न कर जाओ। ये सोच के कि जी, मैंने तो यह पैटन बनाया था। और ये पैटन तो टूट गए, पैटन तो टूटते आये हैं, पैटन तो बने ही। टूटने के लिए तुम्हारी इक्वेशन कल को कोई न कोई ओबसौलूट कर ही डालेगा। यह तो होना ही है। प्रकृति की इकलौती स्थाई वस्तु है। बदलाव, सिविलाइजेशंस, बदलेंगे, पॉवर सेंटर्स बदलेंगे, गवर्नमेंट, बदलेगी, यह सब कुछ होता रहेगा। और हर बार जब 1 ट्रांजीशन ऑफ पॉवर होगा, या ट्रांजीशन किसी भी तरीके का ट्रांजीशन होगा, तो टर्मोइल तो होगा। और इस चीज को आप बदल नहीं सकते। लेकिन आप क्या बदल सकते हो कि मेरी कितनी रिजिलियंस है, मेरी कितनी ताकत है? क्या मेरे सर के ऊपर मेरे भगवान का हाथ है? क्योंकि अगर मेरे सर के ऊपर मेरे भगवान का हाथ है। दैन आई, अम बेस। और ये जो शब्द है, ब्लेसिंग, यह बहुत जरूरी है। ब्लेसिंग। 1 ऐसी प्रक्रिया है जो 1 साधारण वस्तु को साधारण बना सकती है, जो सरल को बहुत शक्तिशाली बना सकती है। तुम्हारे पास सब कुछ हो सकता है। और अगर ब्लेसिंग्स नहीं तो जो है उसको गंवा दोगे। तुम्हारे पास कुछ भी नहीं। और अगर ब्लेसिंग्स है, तुम बना। 2 ऐसे में ने कितने नौजवान देखे जिनके पिता ने उनको कुछ भी नहीं दिया, लेकिन ब्लेसिंग्स थी। और उस नौजवान ने बना दिया, तरक्की कर ली, सफलता प्राप्त कर ली। और ऐसे कितने नौजवान देखे जिनको उनके पिता ने सब कुछ देने की कोशिश की। अव्वल एजुकेशन, अव्वल शुरुआत। लेकिन शायद उस नौजवान के जीवन में ब्लेसिंग्स नहीं थी। तो वो बेचारे रह गए। कितनों के जीवन में दुख भी आया। और ठीक है, दुख आता है, समस्या आती है पीड़ा आती, बीमारी भी आती। और मृत्यु, मृत्यु तो आएगी ही आएगी। लेकिन जिनके परिवार में भगवान उनके साथ थे, जिनके पास शक्ति थी। तो नेविगेट थ्रू द केस ऑफ कॉस इट इस कोटि तुम 1 बच्चे का सोचो 1 बच्चा, जिसके प्रियजन कल कल जीवित थे, आज है ही नहीं, उसके उसके दिमाग में क्या केस हो रहा होगा। कि ये क्या हुआ, आज कोई है, कल है ही नहीं, कहा गया, किधर गया? लेकिन अगर उस बच्चे के जीवन में भगवान है, उसके परिवार के ऊपर ब्लेसिंग्स है, सो उस केस में भी वो सेलिब्रेशन ढूंढ लेंगे, ताकत ढूंढ लेंगे। और जब परिवार बाहर निकलेगा उस घटना से और शक्तिशाली निकलेगा, और ताकतवर निकलेगा विकसित निकलेगा, क्योंकि हर बार जब तुम उस तूफान से निकलते हो, every time humanity work to that ceos हयूमेनिटी कम्स आउट, स्ट्रॉंगर मोर powerful more reजिलिenट उतनी ताकत जो शायद आती ही नहीं, अगर वो तूफान नहीं आता, अगर वो तूफान नहीं आता, तो शायद हम आदिमानव होते, आज की तारीख में, जंगल में बैठे होते, तूफान आया तो हमें मौके मिले नेसेसिटी बिकेम द मदर ऑफ इनवेंशन। और ठीक है समस्या आई, जिसको जाना था वो तो जाएगा ही जाएगा, लेकिन अगर तुम शिवयोगी हो तो जाने वाला बहुत ब्लेसिंग्स दे, कर के जाएगा खुश जाएगा, तरफ हो करके जाएगा। और जब जाएगा तो परिवार का बहुत विकास होगा, परिवार भगवान के और करीब चला जाएगा और दिव्य हो जाएगा और शांति हो और सुख होगा। और अगर जीवन में भगवान नहीं, ब्लेसिंग्स नहीं, वन लॉस्विलखमकेोसविल कम, फिर बहुत बहुत मुश्किल है, उससे बाहर निकला, फिर 1 पीड़ी कुछ बनाएगी दूसरी पीढ़ी गवा देगी, फिर 1 पीढ़ी बनाएगी दूसरी गवा देगी, फिर 1 बनाएगी दूसरी गवा देगी, 1 पीडी कोशिश करेगी तूफान से बाहर निकलने की दूसरी उस तूफान में खो जाएगी। और अगर जीवन में ब्लेसिंग्स है और तुम्हारे पास तुम्हारे भगवान है तो हर पीडी थोड़ी तरक्की करेगी और उसके बाद आने वाली पीड़ी थोड़ी और आगे बढ़ के चले जा सकती है। तो सबसे पहले तो तुम्हें 1 बात को समझना होगा केस नार्मल तुम्हें 1 ब्रहम प्रदान किया गया पैटन रिकोग्नेशन एंड पैटन प्रिडिक्शन जो व्यक्ति सबसे ज्यादा ज्ञानी है, चाहे वो इकोनोमिस्ट भी क्यों न आओ, वो लास्ट में बोलेगा इंटरेस्ट, इस सब्जेक्ट तो मार्केट प्लीज रीड डॉक्यूमेंट कैरफुलली बिफोर वेस्ट कि ह्यूमन एरर हमेशा हमेशा होने को कुछ भी हो जाएगा, तुम कितना भी पैठन करो, भगवान ने भी कहा तुम कर्म करो फल की इच्छा मत करना, क्योंकि तुम कुछ हल्का पुल्का, सोच के अपना आगे बढ़ते रहोगे और कभी न कभी कुछ रैंडम हो जाएगा। और अगर ब्लेसिंग हैं तो वो जो रैंडम होगा वो सोना होगा, वो बहुत अच्छा होगा, तुम पानी ढूंढने निकालोगे, तुम्हें तेल मिल जाएगा। और रैंडम सक्सेस भी आता है, ऐसी बात नहीं है। vरytइमकेसडजन नीड टू बी डेडली केओस महाकाल ब्यटीफुल खास होता ही है, कभी कभी वैज्ञानिक कुछ बनाने निकलते हैं और कोई नया एलिमेंट खोज लेते हैं। क्यों? क्योंकि उनके जीवन में ब्लेसिंग्स हैं, हम जानते हैं किस होगा, लेकिन अगर तुम्हारे दिमाग में डेफिनेशन ऑफ कयास, इस रैंडम नेगेटिविटी तुम गलत हो, कभी कभार केस रैंडम ब्यूटी जेल जो कभी सोचा ही नहीं था, जिंदगी ऐसी बदल गई, इतनी अच्छी, इतनी बढ़िया कि तुम प्रेडिक्ट ही नहीं कर सकते। तुम्हारा पैटन इतना था, सीमित था और 1 दिन भीतर दिव्यता का विस्फोट हुआ। शायद इसी को तो शक्तिपात कहते है न इतनी शक्ति थी, तुम्हारा पैटन फट के चकना चूर हो गया और जहाँ तुम्हें लगता था तुम्हारी यही सीमा है, तुम न जाने कहाँ पहुँच गए, तुम्हारी खुशी न जाने कहाँ पहुँच गई, सफलता न जाने कहाँ पहुँच गई, पता नहीं। 1 साधक 1 बार आये शिविर में और मुझसे बात कर रहे थे, जब पहली बार वो बाबा के पास गए तो उन्हें शराब का बहुत शौक था, तो जब शिविर में भी आए तो अपनी बाटली बहुत महंगी वाली बैग में लेकर आए थे, ठीक है सुबह शिविर करूँगा शाम को टिकाऊंगा और उस समय बाबाजी 77 दिन के शिविर लेते थे। और अगर 1 तपस्वी शराबी से पूछो कि क्या तुम 7 दिन अपनी तपस्या रोक सकते हो? वो हंसेगा, मुस्कुराएगा, क्यों क्योंक जो बॉडी है, इट, इस डिपेंडेंट, ऑन, दैट सब्स्टेंस कहता है पहला दिन जब मैंने साधना की मेरे भीतर कुछ बदलाव मुझे पता ही नहीं था मेरा मन नहीं किया, दूसरा दिन, तीसरा दिन, चौथा दिन, अगर आप किसी वैज्ञानिक 1 व्यक्ति से पूछो जो पैटन स्टडी करता है, 1 व्यक्ति जो कि इतना, इतना, ज्यादा अल्कोहल डिपेंडेंट है और वो 4 दिन तक शराब ना पिए, क्या होगा वो पैटन वाला बोलेगा उसको विड्रॉल होना चाहिए, हार्ड पाल्पिटेशन होनी चाहिए, ये होना चाहिए, वो होना चाहिए, हो सकता है मर भी जाए, हो सकता है उल्टी आए, यह हो, फलान हो, डिकान हो, उसको पता ही नहीं कि वो जिस अहंकार में बैठा है देर। इस समथिंग वे भी व्यक्ति ने कहा कि 7 दिन हो गए। और वो शराब की बोतल मेरे बैग में पड़ी रहेगी और मैं इंतजार करता रहा कि कब मेरा मन करेगा, कब मेरा मन करेगा, मेरा मन ही नहीं किया और कहता है आज 12 साल होने को आया है, वो बोतल आज भी शायद कहीं पड़ी होगी, सोच रहा हूँ किसी मित्र को दे। 2 मेरा मन ही नहीं किया, जब मैं आया था, मैं ये सोचकर आया था कि ठीक है 1 या 2 दिन नहीं पीऊँगा बढ़िया हो जाएगा। और जब ब्लेसिंग जीवन में आई तो 12 साल निकल गए, जीवन बदल गया, उद्देश्य बदल गया, कहते है अब मेरा उद्देश्य यह है नहीं कि मैं इस चीज को छोड़ दूं, त्याग दूं। अब मेरा उद्देश्य है कि किस प्रकार से मैं दूसरों के जीवन में दिव्यता लेकर आ जाऊँ, जब तुम्हारे जीवन में ब्लेसिंग्स आएंगे, जब तुम्हारे जीवन में तुम्हारे भगवान आते हैं तो ये विस्फोट होता ही होता है। and then the cars can be beautiful as well, it can be an inवenशioन aजवeल। तब अगर तुम उस आदमी से बात करो की क्या हैं बोलेगा बहुत कुछ है, पर 11 खुशी है जो मैं समझा नहीं सकता, जैसे जब शादी होती है न, घर में इतने लोग नाच रहे हैं, 1 के बाद 1 फंक्शन हैं, सब कुछ चल रहा है, कैसे चल रहा है हमें नहीं पता, लेकिन हम सब बड़े खुश है। एवरीथिंग लुक्स के टेक बट इट सो वेरी वेल कोरियोग्राफ थ्रू द ग्रेस ऑफ डिवाइन और उस उस के बाद जब हम बाहर निकलते हैं, कितने खुश निकलते है, इट इज, अ सेलिब्रेशन। तो 1 बात तो पक्की है, जीवन में क्यासाहिक और वो नेगेटिव भी हो सकता है। और दूसरा, अगर तुम्हारे जीवन में तुम्हारे साथ ब्लेसिंग्स हैं, भगवान की शक्ति है। तो फिर ये क्यास महाकालेश्वर की ताकत भी हो सकती है। ऐसा कयास जो तुम्हें विकास की ओर लेकर के जाएगा। और सबसे जरूरी क्या तुम्हें समझना होगा कि तुम्हे इस कयास से डरना नहीं, तुम्हें किसी भी मुसीबत से डरना नहीं। तुम्हें घबराना नहीं घबराना। तो उस चीज से है न, जो चीज कभी गठित हो ही नहीं सकती। अब बीमारी तो थर्ड डायमेंशन, इससे क्या घबराना? आएगी? क्यों नहीं आएगी? हमेशा आएगी आ भी सकती है। मृत्यु, मृत्यु से क्या घबराना? इज ओनली पॉसिबिलिटी, जो जो चीज होनी है, वो तो होगी ही न। इकॉनोमिक अप डाउन, उस चीज से तुम्हें क्या घबराना है? देखो, मेरे गुरु ने मुझे 1 बार कहा था, बेटा, 1 धोबी को भी समस्या है, 1 राजा को भी समस्या है। तुम्हें यह चुनना है कि तुम्हे कौन सी समस्या चाहिए। क्योंकि अगर तुम्हें समस्या नहीं चाहिए, तो सब कुछ छोड़ छाड़ कर बैठ जाओ हिमालय के ऊपर, लेकिन अगर हिमालय के ऊपर भी बैठ जाओ, तो भी समस्या है क्यों? क्योंकि तेंदुआ पीछे पड़ गया, तो मच्छर ने काट दिया, तो ठंड, लग गई। तो पानी नहीं मिला। तो मेरे को 1 बार हिमालय में समस्या हुई थी। मैं जुनार गली के पार ट्रैक कर रहा था। अब सुबह सुबह प्रेशर आया। रात को इतनी ठंड हुई कि जो बोतल थी, वो जम गई। अब सुबह सुबह प्रेशर आ रखा है, लोटे के अन्दर का पानी जमा हुआ है। तुम सोचो। अब यह भी क्या समस्या है? इस केस के बारे में तो मैंने सोचा ही नहीं था। अब मैं आग लगा रहा हूँ, क्यों ताकि फटाफट थोड़ा, सा पानी पिगला सकू। अब किसने सोचा था कि सुबह के प्रेशर के लिए मुझे आग भी लगानी पड़ेगी। तो देखो, कैश तो आते ही आते हैं, धोबी को भी समस्या है, राजा को भी समस्या है, जो हिमालय के ऊपर भी बैठा है, उसको भी समस्या है। तो तुम क्यों डर? किसी भी समस्या से, किसी भी महामारी से? अरे ठीक है, है तो है। क्या साधारण है, इसमें तुम ताकतवर बनो, ताकि कोई भी कयास, कोई भी, तूफान, कुछ भी तुम्हारे जीवन में आये, तुम नेविगेट करके उससे बाहर निकल सको। क्योंकि जो नेविगेट करके निकलेगा, उसी पर महाकाल की शक्ति है। और फिर 1 दिन यही महाकालेश्वर, वहाँ मृत्युंजय भी बन जाएगा। और उस दिन तुम पाओगे, इतनी, ताकत, इतनी शक्ति, अब इतना, इतना विस्फोट जीवन में गठित हो गया। मैंने हर सीमा अपनी लिमिटेशन की पार कर ली। और इसलिए प्यारे, यही मैं चाहता हूँ कि तुम ताकतवर बनो, तुम शक्तिशाली बनो। और पहली सीडी क्या है? डोंट बी, अफ्रेड, ऑफ कास डोंट। क्वेश्चन, यह भगवान मेरे साथ क्यों हुआ? ठीक है। और दूसरी सीडी क्या है कि तुम अपने आप को याद कराओ। तुम चाहते क्या बहुत जरूरी है, तुम चाहते क्या हो? तुम्हारे जीवन का उद्देश्य क्या है? अगर तुम्हारे मन में 1 लक्ष्य होगा, तो रास्ता चाहे कितना भी कठिन क्यों न हो, तुम उस रास्ते को पार करके अप लक्ष्य तक पहुँच जाओगे। अगर तुम्हारे भीतर लक्ष्य नहीं तो हाहाकार, तुम पर बहुत प्रभाव डाल देगा। और जब मैं लक्ष्य की बात करता हूँ, मैं 1 टेम्परेरी लक्ष्य की नई बात कर रहा है, लक्ष्य कि मैं बारहवीं के एग्जाम पास कर दूं, बारहवी के बाद मैं अपने एंट्रेंस एग्जाम क्लियर कर दूं। उसके बाद कॉलेज क्लियर कर? 2 फिर 1 नौकरी मिल जाएगी। बहुत बहुत साधारण, बहुत बच्चे लक्ष्य है लक्ष्य का, मतलब क्या है? मेरा पैशन, वट इस द ऑब्जेक्टिव आम वेरी पैशनेट। अबाउट जितने भी तुम सिद्धों को देखोगे, उन सिद्धों ने कुछ न कुछ कर्म, जरूर अपने जीवन में किया। मेरे गुरु उनको किसानी का शौक था। और ठीक है, वो किसान हैं, वो अपनी मेहनत कर रहे हैं, सब कुछ कर रहे हैं, लेकिन किसान उनका लक्ष्य नहीं, उनका लक्ष्य कुछ और था, पैशन कुछ और था। और तुम्हें भी इस माया में कुछ कुछ धर्म की पूर्ति करनी होगी। लेकिन ये जो तुम्हारी ड्यूटीज हैं। डोंट कंफ्यूज योर ड्यूटीज wit योर gol, तुम्हारा बच्चा हो गया, ठीक है, तुम्हारी ड्यूटी हो, उसको पढ़ाओ लिखाओ, शादी कराओ, बट दैट इज नो योर gold इस योर ड्यूटी, देर इज अ डिफरेंस, बिटवीन गोल एंड ड्यूटी, ड्यूटी समथिंग दैट यू हैव टू डू गोल समथिंग रैली वान्ट टू डू। और अगर, तुम्हें पता ही नहीं तुम्हारे गोल क्या है, तुम कंफ्यूज हो जाओगे, तुम ड्यूटी को गोल बना लोगे। और जब ड्यूटी खत्म हो जाएगी, तुम्हें मिडलाइफ क्राइसिस आ जाएगा कि बस, अब मैं क्या करूँ, जिंदगी में ड्यूटी तुम्हें रिटायरमेंट तक ले जाएगी, रिटायरमेंट के बाद क्या करोगे, फिर समस्या है, फिर डिप्रेशन है ड्यूटीज, 1 तरफ रखना, गोल पे, थोड़ी साधना करना कि तुम चाहते क्या हो, वाट डू, आई वॉन्ट और अगर गोल भीतर है। फिर तुम पाओगे, तुम्हें बहुत ताकत है, बहुत शक्ति है चलने की मेहनत करने की। तुम कभी देखना, चाहे वो योद्धा क्यों न हो, चाहे वो राजा क्यों न हो। उसके मन में 1 गोल था। और इसले युद्ध में जब वो लड़ भी रहा था, चाहे कितने भी तीर उसको लग गए, वो अपने गोल तक पहुंच गया, अगर गोल नहीं होता तो 1 तीर लगता, वो उसी को लेकर के बैठ जाता। यू हैव टू फाइंड द डिवाइन गोल इन योर लाइफ। और इसलिए आज से जब तुम साधना करो, जरूर, इस चीज पर सोचना मेहनत करना, प्रार्थना करना अपने भगवान से, कि तुम्हें यह ज्ञान मिल सके, ताकि तुम समझ सको, तुम चाहते क्या हो। और उस समय ड्यूटी और गोल में थोडा सा फर्क रखना, ड्यूटीज, तो तुम्हें करनी होगी और ड्यूटीज तुम दुखी भी कर सकते हो। ऐसे मैंने कितने देखे जिंदगी भर डिप्रेस रह गए, और जो करना था, सब कर दिया। बाहर से अगर पेपर पर देखोगे, अकाउंट्स में देखोगे, बैलेंस, शीट में देखोगे। इस व्यक्ति ने सब कुछ किया, जो उसे करना था। लेकिन क्वालिटी थी? नहीं, क्वालिटी क्यों नहीं थी, क्योंकि पैशन था ही नहीं, वैशन क्यों नहीं था, क्योंकि गोल पैशन को ट्रिगर करता है पहली सीडी क्या जो कुछ भी हो, ठीक इट इज द बेला गॉट दूसरा क्या कि सबके बीच what is my col? what is the परपस माई eग्जिस्टेंस मैं इस पृथ्वी पर क्यों आया? क्या मेरी एग्जिस्टेंस थी कि मैं फलाने के साथ शादी करके उसके साथ बस जाऊँ? क्या इसलिए मैं पैदा हुआ? और अगर वो मेरा गोल नहीं था, तो अगर रिश्ता ऊपर नीचे जाता और वो अपने रास्ते जाता है, तो मुझे इतना दुख नहीं होगा, क्योंकि मेरा गोल कुछ और था। और ठीक है। the रeलेशinशिपkेm आई गिव माई टू हंड्रेड परसेंट but it happens समटाइम the रिलेशंस bi माई गोल इस समथिंग more in life ऑलवेज रिमेंबर यार gol पहला gol दूसरा कontरेदूसरा ग्रैटिट्यूटग्रैटिट्यूट का मतलब धन्यवाद का भाव धन्यवाद बहुत सरल है। धन्यवाद हमारे भीतर अहंकार को मारता है। धन्यवाद हमारे जीवन में आगे बढ़ने में सहायता करता है। धन्यवाद मधु और कैटव को खत्म करता है। और धन्यवाद का क्या मतलब है कि मैं हर वस्तु में, हर घटना में, हर रिश्ते में अपने भगवान को स्वीकार करता हूँ। और मैं स्वीकार करता हूँ कि इस घटना से भी मेरे जीवन में कुछ अच्छा होगा। और देखो हर घटना से कुछ अच्छा हो सकता है। अगर तुम चाहो और हर घटना से कुछ खराब हो सकता है। अगर तुम चाहो 1 बालक 1 अच्छे घर में पैदा होता है, उसको सब कुछ मिलता है, इतना पैसा मिलता है, इतना पैसा मिलता है। that in a young age, he start doing drugs and by the age of twenty six ही overdoses an डाइज दुनिया बोलेगी पैसा खराब है, और फिर वही प्रलाद जैसा 1 राक्षस के घर पैदा होता है, और फिर भी अपनी साधना करते करते करते करते अपने भगवान को प्राप्त कर लेता है, तो तुम्हे इस बात को समझना होगा। यह फिर से अहंकार है। अहंकार के पैटन हैं, पैटन रिकोग्नेशन है, और पैटन प्रेडिक्शन है। और पैटन प्रेडिक्शन के एंड में केवल स्ट्रेस है केवल एंग्जाइटी। क्योंकि जहाँ तुम कहते हो कि बस, अब तो मैं ही पैटन प्रेडिक्ट करूंगा, तो तुमने अपने आप को भगवान बना दिया। और जब तुमने अपने आप को भगवान बना दिया, तो तुम्हारे जीवन में फिर भगवान है ही नहीं। और जब तुम्हारे जीवन में भगवान ने, तो इतनी बड़ी 1 शक्ति जो तुम्हारा साथ दे सकती थी, फिर उसे कहाँ से लाओगे? और जब तुम कहते हो, हे शिव शिवा शिव, अनंत शिव कृपा अनंता, हे भगवान, मैं तुम्हें स्वीकार करता हूँ, तुम्हारे आदेश को स्वीकार करता हूँ। मैं अपने लक्ष्य की ओर बढूंगा, मैं अपनी साधना की ओर बढूंगा। और जो भी मेरे जीवन में आज गठित हो रहा है। जिसको कनॉट कंट्रोल आई एम थैंक फुल फॉर this experiencandther are many things i कनोट कंट्रोल हाव हाऊ कैन आई कंट्रोल लाइफ डेथ, हाऊ कैन आई कंट्रोल वेदर ह हाऊ कैन आई कंट्रोल द थिंग्स दैट आर हैपनिंग हाऊ कैन आई कंट्रोल अगर मेरे देश के बॉर्डर बंद हो गए, तो मैं कहां टपूसीमारके जा सकता हूँ। फिर तो भगवान ने सही मायने में भगवान ने 1 स्थान पर बैठा दिया और तब या तो मैं कम्प्लेन करूँगा और अगर कम्प्लेन करूँगा तो संचित कर्म का घड़ा और भर दूंगा इतना कि 1 दिन इसी भार से मैं मर जाऊं और या ग्रेड फुल, और अगर ग्रेटफुल होंगा तो मुझे ताकत मिलेगी, ताकि इस तूफान के पार में जा सकूँ ताकि जब पार करूँ और शक्तिशाली और ताकतवर the things आई, कॉन्, कंट्रोल, म, ग्रेटफुल, टू, गॉड, फॉर, दैट इंसिडेंट जो मेरे जीवन में आया, कुछ सिखाने आया, कुछ बताने आया, मुझे बढ़ाने आया तो मेरे भगवान का धन्यवाद, इस अनुभव का धन्यवाद। और हाँ थोडी मेहनत लगेगी इस सोच को लाने में, लेकिन यह सोच कीमती है, यह सोच तुम्हें ताकत देगी, यह सोच तुम्हें साहस देगी। ताकि जिन लोगों को तुम प्रेम कर सकते हो, केवल प्रेम नहीं करना, उन्हें 1 दिशा भी दिखाना क्योंकि याद रखना जब कभी भी जीवन में दुख आता है, सिर्फ तुम्हारे नहीं आ रहा, पूरे परिवार के जीवन में दुख आ रहा है तो पूरा परिवार हताश है, पूरा परिवार दिशा ढूंढ रहा है और अगर परिवार में 1 व्यक्ति शिवयोगी है, उस समय वो परिवार को बांध सकता है, उस समय वो वो डोर बन सकता है जो परिवार को पार लगा दे। उस समय परिवार को भी 1 साहस चाहिए, शक्ति चाहिए, प्रेम चाहिए और अगर शिवयोगी परिवार में होगा तो ठीक है समस्या आएगी, लेकिन बहुत जल्द खत्म भी हो जाएगी। ही कैन नेविगेट वेरी सून, वेरी फास्ट, द होल, फैमिली आउट ऑफ दैट सिचुएशन और मैंने कितने सहयोगियों के जीवन में देखा, वो और शक्तिशाली हो गए, लेकिन भाव भाव क्या था? धन्यवाद, पहला भाव क्या है? एक्सेप्टेंस दूसरा क्या है गोल्स, तीसरा क्या है? ग्रैटीट्यूड और चौथा और आखिरी सबसे कीमती dicipline डिसिप्लिन का मतलब तप साधना और जैसा मैंने आपको कहा साधना इसलिए नहीं दैट वी कंट्रोल द केस साधना इसलिए ताकि we can नेविगेट through the केस साधना इसलिए नहीं कि हम दुनिया को बदल दें, साधना इसलिए क्योंकि हमें अपने आप को और शक्तिशाली बनाना है। साधना शुड बी dicipline not a given tik कभी तुमने देखा है क्या? 1 पक्षी जब अपने अंडे पर बैठता है, तब वो कुछ भी अंडे से रिटर्न में नहीं मांग रहा। 1 मैमल के लिए कितना आसान है? 1 मैमल का बच्चा पैदा होता है और बच्चा जो है रेस्पोंसे, व बच्चा दूध पीता है, बच्चे के प्रति ममता आती है, बच्चे का ध्यान रखना है, बच्चे को बहुत फीडबैक मिलता है 1 मैमल के साथ और 1 रेपटाइल है रेपटाइल तो अंडे देकर भाग जाता है, वह हो गया मेरा कचुआ अंडे देगा बाय बाय बच्चा ओ चिड़िया खाए कुछ हो पता नहीं लेकिन पक्षी पक्षी अनोखा है, ना तो रेपटीलियन है, न मैमेलियन है। अगर तुम पक्षी को देखो अंडा होगा, अंडे का क्या करे अंडे से कोई फीडबैक नहीं और अब भीतर भगवान ने ऐसा डी एन ए जाना है की अब उड़के भी नहीं जाना। तो आप अंडे पर बैठे रहो और ऐसे पक्षी हैं जो 20 दिन, 30 दिन, 35, 40 दिन तक अपने अंडे पर बैठे रहते हैं। और ऐसा नहीं है कि अंडा हिल रहा है, नहीं हिल रहा है, कुछ हो रहा है, कुछ नहीं हो रहा है। फिर बस बैठना है, फिर बस करना है। हो सकता है कई दिनों तक कुछ पीना और फिर 1 दिन अंडा हिलना शुरू हो जाएगा और 1 दिन उसके भीतर से पक्षी बाहर आ जाएगा। जो साधक हैं वो अपनी साधना करता रहता है। वो साधक उस पक्षी के समान है, वो बैठा है क्योंकि उसको बैठना है। वाय बिकॉज इट इज इन इस जीनस उसको। उसके गुरु ने सिखाया उसकी जींस के भीतर डाला कि तुम्हें चिंता ही नहीं करनी। अंडा हिले ना हिले, कुछ हो ना हो। तुम तुम अपनी साधना करते रहो और अगर तुम अपनी साधना करते रहोगे। 1 दिन जरूर से जरूर तुम उस स्थान पर पहुँच सकते हो जहाँ पर तुम्हे पहुंचना होगा। लेकिन अगर तुम हर बार, हर साधना के बाद फीडबैक फीडबैक की गुजारिश रखोगे तो बहुत जल्द यू, विल, फेल और होते हैं। ऐसे लोग, बिल्कुल होते है। ऐसे लोग। ऐसे लोग तुमने देखा होगा जिमनेजियम में जो 5 मिनट ट्रेडमिल में चलेंगे और फिर फटाफट, वेंग मशीन पर खड़े होंगे कि कितना वजन कम हुआ। अब ऐसे व्यक्ति को आप ढक्कन नहीं बोलोगे तो क्या बोलोगे। पिछले 35 साल से समूह से बड़ा पाव ठूंस रहा है। और 5 मिनट ट्रेड मिनट पर चढ़ने के बाद तुम अपेक्षा रख रहे हो कि तुम्हें कुछ मिल जाएगा। जीवन भर तुमने नकारात्मक भाव, सोच विचार रखे हैं। और 5 मिनट की साधना के बाद 2 माला के बाद तुम अपेक्षा रख रहे हो की महादेव सामने ख बे हो जायेंगे। तब तुम्हें धीरे धीरे बदलेगा कितना धीरे जितना धीरे ग्लेशियर पिगलते हैं, लेकिन पिगलते हैं, इसमें कोई 2 राय नहीं, गंगा बहती है, इसमें कोई 2 राय नहीं, लेकिन सब अपने समय से होगा। साधना टू मिनट नूडल है ही नहीं। अगर चिड़िया भी बोले बस बस मैं बैठा अंडा अंडा मुझे मिल गया, अब बस हो गया, खत्म गुरु की कृपा मिल गयी, शक्तिपात मिल गया। अब अब मैं अंडा लेकर घर जा रहा हूँ। अगर तुम उस अंडे का कुछ करोगे नहीं तो क्या होगा? वो सड़ जाएगा कितने ऐसे मैंने देखे, ज्ञान ले कर के गए, कुछ किया नहीं, फिर उसको सजा के रख दिया, 1 स्थान पर, फिर उस अंडे से भीतर कभी चिड़िया आएगी नहीं पक्षी। आएगा ही नहीं, तुम्हें वह प्रेम जो मिल सकता था, कैसे मिलेगा तुमने जो प्राप्त कर लिया, तुम्हें उस पर बैठना होगा, साधना करनी होगी। यू सेट ऑन द गोल्डन गैट गुरु हैज गिवन टू यू एंड दैट इज following the bat the प्रैक्टिस विदाउट द वॉन्ट ऑफ फीडबैक फिर आगे बढ़ते जाओ, बढ़ते जाओ, बढ़ते जाओ, समय लगता है, बिल्कुल लगेगा, हर चीज में समय लगेगा। तुम्हारी जिंदगी हिंदी पिक्चर नहीं है कि 1 गाने में हीरो और हिरोइन को प्यार हो जाए। कभी कभार सालों लग जाते। कभी भी असली जीवन में ऐसा नहीं होता। जैसा हिंदी पिक्चर में दिखाते कि जी चलते चलते ये हो गया। और बस अब तो तुम ही तुम हो। और फिर स्विस एल्स पे। दोनों। गाने गा रहे हैं। असली जीवन में मेहनत करनी पड़ती है, तब लगता है यू, मस्ट, यूmsरयूमस्टपरसीवेर और अगर साधक के भीतर, फिर ये अहंकार होगा, अहंकार ही है काम, क्रोध लोग मोहका? तो फिर भीतर से आवाज आएगी की फीड बैक कहाँ है? अभी मैंने 2 घंटा कल साधना की और आज आज मेरी लाटरी नहीं लगी छोड़ो अब मैं साधना नहीं करता, जब तुमने ऐसा किया तो आसपास के सभी नकारात्मक तत्व बहुत मुस्कुरा रहे हैं, खुश हो रहे हैं की अभी अपनी दिव्यता छोड़ के, देवीयता छोड़ के, आजा हमारी तरफ आज, तो तुम्हें अपने आप को सिखाना होगा कि respected what happens this is who? यह मैं हूँ, मेरी साधना, मैं हूँ, मेरी साधना, मेरा आकार है, मेरी स्टेबिलिटी है। द बात, द बात जो मेरे गुरु ने मुझे दिया, अंत में, यही मेरी सच्चाई है। और हर चीज के बाद यही 1 ऊर्जा है, जो मेरे साथ रहने वाली है। क्यास मुझसे सब कुछ ले लेगा? 1 समय पर, लेकिन खास मुझसे मेरी साधना नहीं ले सकता। और ये बात पक्की है, कयास तुमसे स्वास ले सकता है, परिवार ले सकता है, कास, तुमसे तुम्हारी सम्पत्ति ले सकता है, लेकिन खास कभी भी, कभी भी तुमसे तुम्हारी भक्ति, तुम्हारी साधना, तुम्हारी स्पेचुआलिटी नहीं ले सकता। और अगर तुम अपने हाथों से अपनी स्पेशएलिटी छोड़ दोगे, तो फिर तुमने इस केस को जीतने दिया। इसलिए डिसिप्लेन डिसिप्लेन सबसे किमती में 1 बार फिर बताता हूं। 4 चीजें जो मदद करेंगे तुम्हारी, अगर तुम आज की तारीख में पाप दे की कहीं खंडकार में छिपे बैठे हो, अगर तुम्हे लगता है कि तुम्हे ताकत की जरूरत है, तो इन शब्दों को याद रखना। 4 सीडिया, पहला एक्सेप्टेंस ठीक है, हो गया, दूसरा गोल, अब मुझे कहा जाना है? तीसरा ग्रैटिट्यूड, जो कुछ भी हो रहा है, शिवानंद, शिवकृपानंद, godsgresचौथा, ठीक है, कुछ भी हो, साधना नहीं रोकने, चाहे, स्वास्थ, चाहे, कुछ साधना रहीं रोकने, और मजे की बात साधना के लिए, तुम्हें कुछ और चाहिए भी नहीं। बस 1 स्थान चाहिए जहाँ तुम बैठ सको, आंखें बंद कर सको। और ऐसे कितने मैंने साधक देखे। जब जीवन में शरीर में कोई पीड़ा आई, तब वो सबसे बढ़िया साधक बन गए। क्यों? क्योंकि तब कुर्सी पर बैठे थे, कुछ करने को था? नहीं, यह तो बैठ के टीवी देखते है, यह साधना करते हैं। और उस समय इतनी बढ़िया साधना हुई, बहुत जल्द दे नेविग्रेटेड थ्रू द के शरीर स्वस्थ हो गया, लेकिन अब उस शिखर तक पहुँच चुके हैं। ना देर, इज ओनली ग्रोथ, ग्रोथ, ग्रोथ, ग्रोथ, ग्रोथ। इसलिए याद रखना, आज की तारीख में महादेव हो सकता है। तुम्हारे जीवन में, महाकाल स्वरूप में हो या महामृत्यंजय अंत में, है, तो महादेव ही तुम्हारा जीवन सुख शांति दिव्यता को अनुभव करने के लिए हुआ है। हर नदी समुद्र तक पहुंचती है, कुछ नदियों का मार्ग थोड़ा तीखा होता है, थोड़ा कठिन होता है, लेकिन हर नदी समुद्र तक पहुंचती जरूर है। और तुम इस बात को स्वीकार करना। अगर तुम्हारा मार्ग थोड़ा ऊपर नीचे है, कोई चिंता नहीं, तुम भी समुद्र तक पहुंचोगे। लेकिन जो मार्ग मिला, धन्यवाद, एक्सेप्ट, रिमेम्बर, द गोल, भी, ग्रेटफुल, एंड, कंटिन्यू, dicipln अगर इन 4 पिलर्स को तुम पकड़े रहोगे, तो तुम्हारा विकास हर्षण होता रहेगा। और फिर जो कुछ भी जीवन में हो, कुछ भी घटित हो, कोई बात नहीं, बहुत सिविलाइजेशंस आई गई, बहुत जीव, जंतु आए गए, सोच आई गयी। तुम हमेशा आगे बढ़ के निकल जाओगे, तब तक जब तक 1 दिन तुम्हारी नदी, उस समुद्र में लीन नहीं हो जाती। और यही मेरी प्रार्थना है तुम सब के लिए कि तुम उस अनंत का अनंत को स्वीकार करो और 1 दिन उस अनंत में लीन ब्लेस्यूयाद रखना। तुम जहाँ कहीं भी हो, तुम अकेले नहीं हो। अगर तुम इस चीज को मानते हो, तो तुम्हारे जीवन में उसी क्षण, उसी समय ब्लेसिंग्स प्रभावित होनी, शुरू हो जाएंगी शिवयोगियों की तपो। अग्नी तुम्हारे जीवन में प्रभावित होनी, शुरू हो जाएगी। आज भी हो सकता है बैठ कर। तुम मुझे सुन रहे हो, लेकिन तुम्हारे हृदय में 1 शांति है, तुम्हारी मां स्पेशियों में 1 ताकत है, यह तुम नहीं हो, यह मैं नहीं हूं, यह मेरे गुरुओं की तपौनी और तुम तक इसलिए पहुंच रही है क्योंकि तुम स्वीकार करते हो, तुम्हें अकेले रहने की जरूरत है ही नहीं, तुम अकेले हो ही नहीं। जो प्रेम, जो शांति, जो शक्ति तुम अपने परिवार से खोज रहे हो, ठीक है, वो ड्यूटी है, लेकिन तुम्हारा गोल, तुम्हारा, तप, तुम्हारी साधना, तुम्हारा भगवान है, उस भगवान को अपने जीवन में जरूर आने देना। तुम्हारा जीवन अवश्य बदलेगा, अवश्य बदलेगा और याद रखना। तुम्हे स्वीकार करना है, तुम्हे स्वीकार करना है। अगर तुम स्वीकार करोगे, उसी क्षण तुम शक्तिशाली हो जाओगे कितना ya mt sochna coke, yad rana, shiv, anant, shiwakupaananta, so be blessed, be held and remember। the siddhars are always with you, the divinity is always with you and in that case you are never a long, there is some one to hold your hand and take you to words the lit remember that bless you। आप सब को, आप सब के भीतर के भगवान को मेरा प्रणाम। आज असेंशन क्लास रोम का 1 नई साथना, 1 नया एपिसोड सब बच्चों के लिए आ अपलोड होगा, आप सब उसादा जरूर करना आपका भला होगा। मिलते हैं अगले हफ्ते माइंडफुल मैटर्स ब्लस्यूनामशिवाय जाने से पहले इस वीडियो को जरूर से जरूर शेयर करना। हो सकता है कोई व्यक्ति कहीं कोस में बैठा है और यही वीडियो उसके लिए realit bun जाए। so please before you go try to share spred like and comment blessings in this video, your every action will lead to a devin reaction। सो dont forget to c नमशिवाय।










