Ishan Shivanand explores the search for God and happiness, arguing that the divine already lives within you. The main obstacle is a self-imposed barrier of grief, doubt, and attachment. Opening this inner veil lets you directly experience the divine presence that surrounds you.
Chapters
that, if all this noleg is city in me, if all the happiness is city, if all the bis is city in me and i just except in imagine, how much happiness is salilycomout। भाग जाने कब से मैं सोने को ढूंढ रहा, भगवान ढूंढ रहा, मुझे पता चलता है मैं ही हूँ कितनी खुशी हो वाह ये देखो, इस यही होता है सेल्फ रिलाइज सुनिए उसकी रेलाइजिश फलाने की रेला जानने वाला भी जानता था की अगर बोलो ने सबबड़ासीजेलाइटिस तो सबसे पहले पत्नी पूछे पीस को रियलाइज करने डारा तो इसलिए जानने वाले ने बहुत विनती शब्द दे दिया। सर 3 स्तन जितना सुख उत्पन होना है मेरे भीतर से जितनी दिव्यता उत्पन्न होनी है मेरे भीतर से मैं भगवान का आवाहन कैसे कर सकता हूँ जो पहले से ही मेरे भीतर बैठा है पहले ऐसी ही मेरे चारों तरफ है। अगर कोई कहता है मैं तुम्हें भगवान भी लूंगा कैसे दिलाएगा भगवान तो गन करले, लेकिन अगर तुम्हे कहता है मैं तुम्हारे भगवान से जोड़ सकता हूँ उस व्यक्ति को पकड़ लेना व्यक्ति की क्यूंकि वो जो चारों तरफ है समस्या सी कि मैं द ग्रेट बैरियर ग्रीफ बना बैठा है मुझे अपनी दरवाजे और जैसे ही मई खोलूंगा मेरा बाबा का भूगटकेअखहतधेझिवा, अब वो ये नही की भगवान को पुकार जिला भगवान मेरा तो तू अपने उकटसेपटटिस gongpinthevewicr win the bed of ignores, as open the re, my dear very is like that just open the v s sites।