Ishan Ji teaches Prati Prasav, a purification practice that clears mental impurities like ignorance before starting relationships or prayer. Without this inner cleansing, old habits and negative patterns keep pulling you toward failure and unhappiness. The practice involves subtle awareness work followed by meditation to replace these patterns with true self-knowledge.
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हर रिश्ते की शुरुआत से पहले हमें प्रतिप्रसव करनी चाहिए। शुद्धि हर काम की शुरुआत से पहले हमें प्रति प्रसव की प्रक्रिया करनी चाहिए। शुद्धि प्रार्थना से पहले हमे प्रतिप्रसव करनी चाहिए। शुद्धि और अगर शुद्धि होगी, हम सही मायने में प्रार्थना का भी फल भोग पाएंगे। अगर शुद्धि होगी तो हम रिश्ते में भी खुश हो पाएंगे, अगर शुद्धि होगी तो हम हर क्रम में सफल हो पाएंग। और अगर शुद्धि नहीं है तो पुराने विकारों को साथ ले लेकर न जाने हमारा मन, हमें कौन सी दिशा में ले जाए और फिर बीमारी के पास लाके खड़ा कर दे। और फिर बोले जैसे जीपीएस बोलता है, यू हैव रीच योर डेस्टिनेशन बहुत जरूरी है कि हम इस बात को समझे। हमारी जो सोच है, हमारे जो विकार हैं, हमारा जो बिलीव सिस्टम है, इसको केवल हम ही बदल सकते। इसलिए सिद्धू ने कहा है प्रतिप्रसव व्याय सूक्ष्म, ध्यान आय। तत वृत्त की बहुत जरूरी है की हम सबसे पहले प्रतिप्रसव साधना करके अपनी सूक्ष्मता को बढ़ाये, ध्यान करके अपनी वृत्तियों को त्यागे। ताकि हमारे भीतर 1 विद्या उत्पन हो और वो विद्या केवल इतनी की हम कौन है। अगर ये विद्या नहीं होगी तो फिर अविद्या होगी और अविद्या से उत्पन्न होगा। अविध्या, स्मिता, राग, द्वेश, अभिनिवेश, क्लेश, अविद्या से उत्पन्न होंगे। हमारे जीवन में कलेश और अविद्या का मतलब है कि हम जानते ही नहीं, हमारी क्षमता क्या है, हम जानते ही नहीं कि हम कौन हैं, हम जानते ही नहीं, हम क्या कर सकते हैं। और यह बात समझ लेना, यह बहुत जरूरी है। हमें जो लगता है, हम कर सकते हैं, उसके हिसाब से हम अपने जीवन को निर्धारित करते हैं। deneno।