Realize your CAPABILITIES | Prati Prasav Sadhna @IshanShivanand

Ishan Shivanand argues that children need to learn their own capabilities, not limits. He contrasts first-world schools teaching "you can do anything" with third-world schools that discourage big dreams. African children fearless around lions, kids in wealthy countries building software to protect marine life: belief in potential creates boldness.
Chapters
सिद्धू का काम 1 ही है कि जो बच्चा है न, उसको बताया जाए कि तू क्या कर सकता है। तेरी क्षमता क्या है? मैं दुनिया जहान में घूमा, मैंने जंगलों में भी बच्चे देखे, बच्चे जो निडर है क्यों? क्योंकि उनको सिखाया गया कि डरना है ही नहीं, शेर है क्या? फर्क पड़ता है। अफ्रीका के जंगलों में गया, मसाईमारा में, शेर वहाँ पर सो रहा है, बच्चे मजे से चलते हुए जा रहे हैं। और मैंने शेर को देखा, बच्चे को देखा, मैं डरा हुआ हूँ। और मेरे को बच्चा कह रहा है रे अकूना मटाटा शेर खा पी कर बैठा तेरे को क्या जो बच्चों को सिखाया। बच्चों ने वो पकड़ लिए, जब मैं छोटा था, मेरे गुरु ने, मुझको सिखाया, मेरे सब यार दोस्त सीख रहे थे। for apple for bal sीforkेटऔरमैं एकलौता जिसको सिखाया जा रहा था फोर अम्बा बी मुंडी डी दुर्गा दुर्गा पद पनिवार ने दुर्ग चेतन, 10 दुर्गा में 4 गुरु के बोझ का मारा और मैं सोचता था क्यूँ? और वही जो मेरे दोस्त थे, जब बारहवीं आई, दसवीं आई, सब स्ट्रेस हो गए। क्यों? क्योंकि उनको पता था कि ये हिसफॉरaपलबीसफॉरबॉल, लेकिन उनको अपने बारे में कुछ पता ही नहीं था। और वही जब दसवीं बी, मुझे कोई स्ट्रेस ही नहीं। और मैं समझ गया बच्चा वैसा ही निकलता है जो उसको सिखा देते हो। आज की तारीख में नया निकला, लोग कहते हैं फर्स्ट वर्ल्ड कंट्री है, वो बहुत सफल कंट्री है। और मुझे समझ नहीं था। क्या? 1 कंट्री फर्स्ट वर्ल्ड है, क्यों? 1 कंट्री थर्ड वर्ल्ड कही जाती है, वही नीला आसमान है, वही वही धरती है, वही बीज डालो धरती पेड़ देगी। ऐसा तो है नहीं कि थर्ड वर्ल्ड कंट्री वाले को आम मिलेगा नहीं तरबूजा मिलेगा नहीं, धरती तो सबके लिए सामान्य है, सूर्य तो सबके लिए सामान्य है। लेकिन मैं 1 चीज समझ गया, पढाई सबके लिए सामान्य नहीं है। फर्स्ट वर्ल्ड कंट्री के बच्चे को सिखाया जाता है। बेटा तू कुछ भी कर सकता है, तू कुछ भी कर सकता है। 2 कर। और इसलिए जब मैं फर्स्ट वर्ल्ड कंट्री के स्कूल में बच्चों को सिखाने जाता हूँ, बच्चे ऐसी ऐसी सोच रखते है, क्यूंकि उनको सिखाया गया कुछ भी कर सकता है। तो 1 बच्चा मुझसे मिलता है, कहता है? मैं 1 ऐसी एप्लीकेशन बना रहा हूँ जिस एप्लीकेशन से हम समुद्र में तैरती इस इस मछली को बचा लेंगे। और मैं कह रहा हूँ, वह जी 1 छोटा सा, बच्चा, तीसरी कक्षा का मछली बचाने निकला है। फिर किसी और बच्चे से मिलता वो कहता है, हमें सिखाया गया कुछ भी कर सकते हैं। तो मैं विमनम्पावमेंट के लिए कुछ बना रहा हूँ, कुछ को 1 सॉफ्टवेयर बना रहा हूँ। और फिर मैं थर्ड वर्ल्ड कंट्री के स्कूल में जाता हूँ। थर्ड वर्ल्ड कंट्री के स्कू के बच्चों को न जाने क्या सिखाया जाता है। लेकिन 1 चीज जरूर सिखाई जाती है की तेरे बस की बात नहीं है, तेरे बस की तब होगी, अगर फर्स्ट वर्ल्ड वाला अपनी कृपा तेरे करेगा, तू इंतजार कर, वो आयेगा टॉफी लेके, वो आयेगा इंडस्ट्री लेके, तब तब तेरा कुछ होगा, वरना तेरा कुछ हो ही नहीं सकता। इसलिए जो थर्ड वर्ल्ड वाला है, वो बिचारा बैठा रहता है। वो कभी सोचता नहीं की मैं मछली बचा हूँ या प्रकृति बचाओ या दुनिया बचाओ, वो बस कहता है कि मैं खुद को बचा लो, इतना काफी छोटी सोच, उसके भीतर क्रांतिकारी सोच नहीं है जैसे हमारे यहाँ के क्रांतिकारियों की थी। भगत सिंह अपना नहीं सोच रहा था, तो देश का सोच रहा था, देश के नौजवानों का सोच रहा था। बड़ी फर्स्ट वर्ल्ड सोच थी, और आज की तारीख़ के नौजवान से बात करता हूँ बड़ी थर्ड वर्ल्ड सोच है की बस मेरा मेरा निकल जाए, मेरा हो जाए, मेरी नौकरी हो जाए। मैं मई पे गाड़ी खरीद लो, सैटरडे संडे में पार्टी कर लो, मैं शांत हो जाओ, बस पापा मम्मी, आप, मुझे कुछ मत बोलना, मैं अपने लिए जी रहा हूँ इस इमपरटंट। और ये सोच केवल इसलिए आती है क्योंकि कभी उसको किसी ने बताया ही नहीं कि तू अनंत है, तू उस अनंत से आया है। शिव अनंत, शिव कृपा अनंता की, तेरे बस की है, आविश्कार तेरे बस की है, क्रांति न जाने क्या क्या है जो तू कर सकता है। और मैं ऐसा नहीं कह रहा कि मैं बहुत दिव्य पैदा हुआ था। मेरे गुरु ने सिखाया, मुझे तो पता ही नहीं था कि मैं क्या क्या कर सकता। किसी शिव योगी को यहाँ बैठे पता ही नहीं था कि उसकी काबिलियत क्या क्या है। जब साधना में आए थे तो पता ही नहीं था की कितनी शक्ति है उसके भीतर।










