Rebuild your self through sound sleep | Prati Prasav Sadhna | @IshanShivanand

Ishan Shivanand explains how real peace comes from calming your mind through spiritual practice, not from numbing yourself with screens, food, or intoxication. Poor sleep and constant mental activation lead to breakdown. True rest heals your body and sharpens your mind.
Chapters
मैं प्रार्थना करता हूँ कि आप सबको 3 चीजें मिले, सबसे पहली चीज 1 अच्छी नींद, अच्छी नींद केवल तभी आ सकती जब 1 व्यक्ति अपने आप को शांत करना जानता है। आजकल समस्या क्या है कि हम अपने आप को स्विच ऑन करना तो जानते हैं, चालू करना तो जानते हैं, लेकिन स्विच ऑफ करना नहीं जानते, बंद करना पता ही नहीं। समस्या क्या है कि हमें शांत होना अब याद नहीं। और उससे भी बड़ी समस्या है कि हमें शांति और मूर्छित होने में फर्क नहीं पडता। जानते हो न कि बेहोश होने में और शांत होने में फर्क है। हां जी, ना जी, साधना से शांत हुए तो शांत हुए, शराब पी के शांत हुए तो बेहोशी है। कुछ लोग जो शांत होना नहीं जानते, शांत होना पड़ेगा। क्योंकि अगर शांत नहीं होंगे तो पागल हो जाओगे। सारा समय अगर दिमाग चलता रहेगा, चलता रहेगा तो पागल हो जाओगे। और जिसको उसके माँ बाप ने शांत होना नहीं सिखाया। अब शांति तो चाहिए। तो शांति का विकल्प क्या है? बेहोशी, फिर वो बेहोश होगा, कैसे होगा? टीवी के सामने बैठ जायेगा, तब तक जब तक दिमाग का उबला आलू नहीं बन जाता। रात को बिस्तर पर लेटेगा नींद नहीं आ रही, क्या करेगा फ़ोन उठा लेगा और रात के 34 बजे तक फोन देखता रहेगा, तब तक जब तक बेहोश नहीं हो जाता। और फिर 6 बजे जब उठने की बारी आएगी। अब उठा नहीं जा रहा तो दे दना दन कॉफी चाय। अपने भीतर फेंके हफ्ता भर काम किया, संडे आ गया। और अब पता ही नहीं शांत कैसे होना है। क्यों? क्योंकि शरीर के सारे सेल्स तो काम में लगे हैं। दिमाग टेंशन में लगा है। जिसको शांति नहीं आती, वो विकेट में क्या करेगा, पार्टी करेगा, पार्टी का मतलब क्या है, बेहोश कर। 2 अपने आप को। 1 बहुत बड़े। फाई स्टार ने दुनिया के सबसे महंगा जो फाइव स्टार है, उसने कहा, हमें हमें साधना सीखनी है, हम चाहते हैं कि आप आये और हमारे गेस्ट को साधना सीखा। तो 1 मीटिंग रखी गयी। मैंने कहा क्या सिस्टम है जी, आपका कहते हैं हमारे यहाँ दुनिया के सबसे रईस लोग आते। मैंने कहा, बढ़िया कहते हैं, वो रात भर पार्टी करते हैं और उनके लिए पार्टी करने का मतलब है। तब तक दारू पियो, जब तक होश ना हो, तब तक कुछ और पदार्थ भीतर डालो, जब तक शरीर तो सदर रहा है, आत्मा मुख को प्राप्त हो गई। और वो वाला मूक्स जिसमे स्वर्ग नहीं पता है। और कहते है फिर दिन भर हमारे यहाँ इन हाउस डॉक्टर्स हैं, होटल में इन हाउस डॉक्टर्स हैं, वो इंटरवीनस देते है ताकि जो रात को टॉक्सीफाई किया है वो दिन में निकल जाए ताकि अगली रात को और पार्टी की जा सके। और मैंने कहा क्यूँ कहते हैं, बस, डिस्ट्रेस होने का यही उपाय है। मैंने कहा यह डी स्ट्रेस नहीं, स्ट्रेस अभी भी है। लेकिन फर्क सिर्फ इतना है कि अभी आप स्ट्रेस के प्रति न हो गए, बेहोश हो गए, दुख अभी भी है, लेकिन आपने खुद को बेहोश कर लिया। दुख है, लेकिन आपको पता ही नहीं जैसे पेनकिलर मेडिसन होती है। न दर्द थोड़े समय के लिए खत्म कर देगी। आपको लगा सब अच्छा है। लेकिन जहाँ उसका इफेक्ट गया तो वही दुख दर्द पीड़ा क सब सामने आ गया। बेहोशी और शांति में बहुत फर्क है। बेहोशी शरीर को खत्म करती है, चाहे वो बेहोशी किसी भी चीज से हो। कुछ लोग खाने से बेहोश होना पसंद करते हैं, तब तक खाएंगे जब तक बिस्तर ना पकड़ ले। कुछ लोग शौपिंग से बेहोश होना पसंद करते हैं। तब तक खरीददारी करेंगे जब तक बस स्मॉल में गिर नहीं जाते। बेहोशी बेहोशी हमेशा शरीर को खत्म करेगी। शांति शरीर को स्वस्थ होने का मौका देगी। बेहोशी टॉक्सिक है, शांति, शुद्ध है, खूबसूरत है बेहोशी की डोसेज। हमेशा बढानी पड़ेगी शांति वैसी की वैसी रहती है। बेहोशी तुम्हें तुम्हारे भगवान से दूर लेकर जाएगी। शांति तुम्हें तुम्हारे भगवान के करीब लेकर के। आएगी। जो व्यक्ति जितना बेहोश है, अपने जीवन में उसका दिमाग चल नहीं पायेगा। जैसा मैं बता रहा था, न वो केवल 3 परसेंट से सोचेगा, नाइनटी सेवन, परसेंट से नहीं सोचता।










