Shiv Mahapuran Maha Sadhna - Day 1

A five-day devotional practice begins with daily meditation on Om Namah Shivaya, described as a healing medicine for personal suffering and collective wellbeing. The speaker uses the analogy of Earth as a living organism whose cells must work in harmony, urging listeners to practice breath-and-mantra meditation with love and gratitude for five days.
Chapters
nmch sbकeerbatेbगvाn को mera परणाम बहुत prेmवसmाnसe शिव महापुराण साधनाे हार्दिक स्वागत कर्ता बिल्कुल शांत होकर बैठे और मन ही मन आवाहन करें। भगवान शिव शिवा का अपने भीतर 1 खुशी ले करके आये और स्मरण करें प्रेम का, जो कभी भी आपने भगवान के प्रति अनुभव किया है, शंभर के लिए अपनी आँखें बंद कर लें और मन ही मन 1 दिव्य शिवलिंग का निर्माण करें। 1 ज्योतिर लिंग का भगवान शिवसेवा का निराकार स्वरुप महिमन स्मरण करें निर्माण करें। भगवान के उस लिंग स्वरुप का, जिससे यह ब्रह्मांड उत्पन्न हुआ, जिसमें 1 दिन ब्रह्माण लीन हो जाएगा, इस लिंग स्वरुप के प्रति अपने भीतर भक्ति भाव, प्रेम भाव का स्मरण करना और इस भाव को और जागृत होने 2 मन ही मन प्रार्थना। हे शिव शिवा, मैं आपको पूर्ण समर्पण करता हूँ। मैं आपकी शक्ति का, तेज का, अपने जीवन में आह्वाहन करता हूँ। मेरी मेरे परिवार की रक्षा करना, इस जीवन में मैं सुख शांति स्वास्थ्य को अनुभव कर सकूँ और जब मेरा समय आये, मैं 1 बार फिर आपमें लीन हो सकूँ। हे शिव शिवा। आज तक आपने मेरी रक्षा की, मुझे कितना कुछ दिया, मैं आपका धन्यवाद करता हूँ। इस प्रेम भाव को अब विज्वलाइज करो। 1 ऊर्जा स्वरूप धारण करते हुए और स्मरण करो। ये प्रेम भाव तुम्हारे हृदय से अब भगवान के ज्योतिर लिंग स्वरूप की ओर प्रवाहित और आज इस प्रेम भाव की ऊर्जा से महादेव का अभिषेक करना और मन ही मन मंत्र nama seva ह। nama seva ओ नाम सेवा। बहुत प्रेम से प्रणाम करो भगवान शिव शिवा को और धीरेधीरे अपनी आखें खोल। 2 ब्लेस 1 चुटकुला मैंने बचपन में सुना था कि 1 लड़का जो बहुत बदमाशी करता है, जिसको सब बहुत डांटते हैं। 1 दिन कक्षा में बैठे बैठे सो गया, जो अध्यापिका हैं, वो रामायण का पाठ पढ़ा रही थी। और जो बेचारा बदमाश बच्चा उसको क्या पता वो शांति से सो रहा है। 1 दम से अध्यापिका ने उसका नाम पुकारा वो उठा और अध्यापिका ने उससे सवाल पूछा राम जी का धनुष किसने तोड़ा यह बदमाश बच्चा चौंक गया, क्योंकि जीवन में इतनी बदमाशियां की हैं, इतनी बार बड़े बुजुर्गों ने कहा है रंगे हाथों पकड़ा है। तो इस बेचारे को लगा कहीं कोई बवाल, कोई उपद्रव उत्पन हुआ है? इस बच्चे ने जोर से कहा रामजी का धनुष मैडम मैंने नहीं तोड़ा मैं तो यहाँ बैठ के सो रहा था। जो बेचारा उपद्रवी है, उससे तुम कुछ भी पूछ लो, उसे कुछ भी बता। 2 उसका कर्ता भाव, उसे या तो पर्पेट्रेटर या विक्टिम, इन 2 विचारों से ऊपर उठने नहीं देगा। और मजे की बात जो महादेव की मौज में है, वो ना तो पर्पेट्रेटर हैं, वो ना तो विक्टिम हैं, वो शिव योगी है। क्योंकि जो शिवयोगी है, वो जानता है। यह जो कुछ भी है, यह मेरे भगवान की माया है। it is all the gres divinity ऑफ शhिवshiवा। और इसलिए जो शिवयोगी है, वो शांत है, उसके भीतर 1 खुशी है, उसके जीवन में 1 सुख है, हर हाल में खुशी है। क्योंकि इस शिव योगी का जो कोर है सेंटर, वह भगवान के प्रति प्रेम है। वक्त अभी बहुत सारे वैज्ञानिक वेस्ट में कह रहे हैं, ये जो मेंटल हेल्थ मूवमेंट हैं, ये नाकाम रहेगी। जब तक हम इसके स्प्रिचुअल कोर को एक्सप्लोर नहीं करते मेंटल हेल्थ का मूवमेंट ये है कि कोबिड के बाद आपने सुना होगा। हर जगह, हर विज्ञापन में कहीं न कहीं लोग बात कर रहे हैं मानसिक शांति की, लोग बात कर रहे हैं कि किस प्रकार से जीवन में खुशी आ। सके। लोग कह रहे हैं कि हमारे जीवन में वेलनेस होनी चाहिए। हम अपने शरीर को स्वस्थ रखें, अच्छा खाना खाएं, थोड़ी देर, ध्यान करें, थोड़ी सांस लें, प्रणायम करें और इससे मानसिक शांति आ जाएगी। ये जो वेलनेस मूवमेंट थी, भारत में हमें कल्चर में देखने को मिली कोबिड के बाद, लेकिन वेस्ट में 10 पंद्रह साल पहले जब ओपीओयड एपीडेमिक आया तब लोगों ने वैलनेस की बहुत बात करनी शुरू की थी। लेकिन अब वेस्ट में 10 पंद्रह साल की वैलनेस के बाद वैज्ञानिक भी समझ रहे हैं। ये मूवमेंट नाकाम है। अगर इसका 1 स्प्रिचुअल कोर नहीं है। स्प्रिचुअल कोर का मतलब 1 भक्ति, भाव, 11 विश्वास भगवान के प्रति 1 गहरा प्रेम, अगर ये प्रेम होगा तो वही ध्यान साधना बन जाएगी। और उस साधना का 1 व्यक्ति को अनंत गुना लाभ है। और अगर भक्ति नहीं, विश्वास नहीं, भगवान के प्रति प्रेम नहीं, तो फिर वो ध्यान, ध्यान भी नहीं। वो बस 1 प्रक्रिया है। अभी कुछ समय पहले मैं त्रिपुरा रहस्य श्री विद्या साधना सिखा रहा था। और वहाँ पर 1 साधक ने बहुत कीमती सवाल पूछा। उस साधक ने कहा कि भैया, ऐसे कितने लोग हैं? ऐसा कितनी बार होता है कि हम साधना सीख लेते हैं, अपने गुरु से प्रक्रिया सीख लेते हैं। और फिर जब घर में हम उस प्रक्रिया को दोहरा रहे हैं तो हमारा केवल शरीर उस प्रक्रिया को दोहरा रहा है। हम हैं परम नहीं है। वी आर डी सेंसिटाइज्ड फ्रॉम the whole process द प्रोसेस हैज। बकम automated machenical जैसे तुम कभी देखो। जब पंडित जी यज्ञ करवा रहे हैं तो जो बैठा है उसका बस शरीर बैठा है, उसको बस पता है। मैकेनिकल स्वाहा में मुझे आहुति फेंकनी है। वो डी सेंसेटाइज हो गया। इस पूरी प्रक्रिया से वो कहीं और है। बस शरीर वहीं पर है। और उस साधक का सवाल यह था कि ऐसी साधना का क्या लाभ है जिस साधना को मैं केवल अपने स्थूल शरीर से कर रहा हूँ। और अगर ऐसी साधना का लाभ नहीं तो किस प्रकार से मैं इस डी सेंसिटाइजेशन को ओवर कम कर सके। अब तुम इस बात को समझो कि ऐसा नहीं कि वो साधक डी सेंसिटाइज्ड हैं, तो उसी के भीतर ही कुछ खराबी होगी। हम सब 1 न, 1 डिग्री तक डी सेंसिटाइज, हे डी सेंसेटाइज का मतलब। अब हमें रुची नहीं, या कोई भी 1 भावात्मक कनेक्शन नहीं। तुमने भी इस डी सेंसेटाइजेशन को अनुभव किया होगा, 5 लोगों के साथ बैठे हो, 4 हसना शुरू करते हैं, तुम भी हंस लेते हो। लेकिन वो हंसी बस ऊपर ऊपर की है। तुम्हें पता ही नहीं, ये क्यों हँस रहे हैं। तुम बस हो, तुमने डीसेंटरेसाइजेशन अनुभव की होगी, तुम चलते हुए जा रहे हो। 4 लोग कोई बात कर रहे हैं। फिर तुमसे सवाल पूछे और तुम्हें पता ही नहीं कोई बात हो भी रही थी तो तुम पूछते हो हा क्या तुम कहीं अपने मन में अंतर मन में खो रखे हो। और ऐसा डी सेंसेटाइज व्यक्ति जब ध्यान भी करेगा तो वो 1 प्रोटोकॉल की तरह कर रहा है, मैकेनिकल कर रहा है। अभी अमेरिका के कुछ एयरपोर्ट्स पर जो चाय की दुकानें हैं, कॉफी शॉप्स हैं, वहाँ पर रोबोट बिठा रखे और वो रोबोट तुम्हारे लिए कॉफी बनाते है, तुम वहाँ खड़े हो। 1 स्क्रीन है स्क्रीन पर लिखो कौन सी चाय पीनी है और वो रोबोट का हाथ होगा, वो ही दूध लेकर के आएगा, वहीं चाय लेकर के आएगा। वहीं 1 ग्लास में डालेगा उसमें तुम बोलो कितनी चीनी है तो रोबोट उतनी, चीनी डालेगा, फिर रोबोट का हाथ तुम्हें चाय पकड़ा देगा। अब सोचो इसी रोबोट को मैं प्रोग्राम कर दूं कि तुम्हे अब सुबह से शाम तक हटयोग करना है। तुम्हे पदमासन लगाकर और मैं उसके अंदर मैकेनिकल लंग्स डाल दूं। तुम्हें पदमासन लगाकर, गहरी सांस कर, अगनिसार कर, मैकेनिकल आँखें डाल दूं, शाम वी मुद्रा लगाए बैठे रहना है। तो तुम्हें क्या लगता है कि वो रोबोट साक्षात्कार को प्राप्त कर? पाएगा? कैसे करेगा उसके अन्दर चेतना ही नहीं, कोंशसनेस ही नहीं वो 1 मैकेनिकल रेपिटिशन है। और अब वैज्ञानिक भी इस बात को समझ रहे हैं कि उन्होंने कितना शोध किया। उन्होंने पूरी कोशिश की कि किसी न किसी प्रकार से ध्यान और योग से अध्यात्म को निकाल दिया जाए। क्यों? क्योंकि जो आध्यात्म है उसकी कोई साइंटिफिक मेजरमेंट नहीं है, जो तुम्हारे भीतर का विश्वास है, उसकी ताकत है। लेकिन कोई साइंटिफिक मेजरमेंट नहीं। ताकत को सब समझते है, पूरा विज्ञान प्लसीवोंको समझता है, पूरा विज्ञान माइंड ओवर मैटर को समझता है, द पॉवर ऑफ फेट को समझता है। लेकिन हम फेट को मेजर नहीं कर सकते, उसके इम्पैक्ट को मेजर कर सकते। और पूरी कोशिश की गई कि हम किसी न किसी प्रकार से ध्यान, साधना से, योग से आध्यात्म को परे कर दें। और फिर 1 बड़ा ही बेनाइन न्यूटरल प्रोडक्ट रह जाएगा। और उसका फायदा ये है कि वो प्रोसेस साइंटिफिक होगा लेकिन नुकसान ये कि उस योग से जो फायदा हो रहा था अब वो फायदा नहीं होगा। फिर लोगों को जब ये प्रक्रियाएं दी गई वो भी सैन फ्रांसिस् को के रोबोट के समान अपना कर रहे हैं। लेकिन फायदा नहीं हो पा रहा। और अब विज्ञान कह रहा है कि नहीं शायद हमने गलती कर दी, शायद अध्यात्म को वापस लाना होगा। शायद अध्यात्म के बिना ध्यान बेकार है, शायद भक्ति के बिना साँस पर ध्यान बेकार है। और अब 1 बार फिर वेलनेस के ग्रंथों की रचना की जा रही है। फिर से दोबारा, they are being re riton और इस बार the core is spricality और स्प्रिचैलिटी का मतलब क्या है। अब चलो हमने 1 बात मान ली कि ठीक है अगर हमें भी सुख और शांति के मार्ग में आगे बढ़ना है, तो हमारा कोर स्प्रिचुएलिटी होना चाहिए। बट वाट, इज स्प्रिचैलिटी। अगर कम से कम शब्दों में बोलूं तो स्प्रिचुएलिटी का मतलब। मैं अपने भगवान से प्रेम करता हूँ और मुझे मेरे भगवान पर विश्वास है। मैं अपने भगवान से प्रेम करता हूँ और मुझे मेरे भगवान पर विश्वास है। i love and i trust the divinity। तुम बस इतना भाव लेकर के आओ और तुम पाओगे कि तुम्हारे शरीर के भीतर टैंजिबल चेंजेज आने शुरू हो जाएंगे, तुम्हारा हार्ट रेट नीचे चला जाएगा, तुम्हारी सांस गहरी हो जाएगी। और अगर मैं तुम्हारी एमआरआई स्कैन कर सकता, तो मैं तुम्हें दिखाता कि तुम्हारी ब्रेन के वो हिस्से लाइट अप कर रहे हैं, जो तुम्हारे भीतर डोपामीन के प्रवाह को सिमुलेट करते। बस इतना सा भाव कि मैं अपने भगवान को प्रेम करता हूँ, मेरा मेरे भगवान पर विश्वास है। तुम कोशिश करो, अभी बैठे हो, मेरे सामने तुम सुन रहे हो। तुम जानना चाहते हो कि किस प्रकार से तुम शिव शिवा से जुड़ सको। और 1 बात समझना शिव से जुड़ना बहुत सरल है। तुम्हें शिव से जुड़ने के लिए ज्ञानी होने की जरूरत नहीं क्यों, क्योंकि भारत में बहुत मार्ग हैं, भारत में बहुत प्रकांड विद्वान हैं, और हो सकता है तुम उतने विद्वान नहीं। हो सकता है। तुम ने बहुत कोशिश की हो, लेकिन जीवन का भार इतना है कि तुम उसमें दबे चले जा रहे हो। तुमने सोचा कि हाँ, अब मैं भी थोड़ी और पढ़ाई लिखाई करूँ थोड़े और ग्रंथ पढ़ लूं, थोड़ी और पोथी पढ़ लो, तुम खरीद के लेकर के भी आए, लेकिन फिर भी तुम्हारे जीवन ने तुम्हें उस ग्रंथ तक पहुँचने नहीं दिया। और अब तुम्हारे भीतर विचार है कि मैं विद्वान नहीं मैं, कैसे भगवान तक पहुँच पाऊँगा। तुम इस बात को समझना। तुम्हें पड़े लिखा होने की भी जरूरत नहीं, तुम्हें विद्वान होने की भी जरूरत नहीं। तुम जो हो, जैसे हो, भगवान शिव, शिवा इतने भोले भाले हैं कि वो तुम्हें स्वीकार कर लेंगे। तुम बस अपने भीतर इस विचार को लेकर आओ। मैं अपने भगवान को प्रेम करता हूँ और मेरा मेरे भगवान पर विश्वास है। हमारे शास्त्रों ने कोशिश की, हमें समझाने की कहानियों के माध्यम से, और 1 बहुत कम थी। कथा है हमारे पुरानों की, और वो कथा है अमृत मंथन अमृत मंथन में देवता और दानव बहुत परिश्रम कर रहे हैं, समुद्र का मंथन कर रहे हैं, ताकि वो अमृत को प्राप्त कर सके, और मंथन चल रहा है। mahant ho rahe, he very industrious, both of them, even the asuras, even the death, as miner deferences, but both of them, very industrious, the goal, is the same amrit, chi, dono ko। और अमृत की खोज में चाहते न चाहते हुए विष का प्रवाह हो जाता है। हलाहल विष खोज अमृत रहे थे, लेकिन उत्पन्न क्या हो गया हलाहल विश? और जब हलाहल विष अब प्रभावित हो गया, उत्पन हो गया। तो अब दोनो हाहाकार मचा रहे हैं कि क्या करें? देवता भी सिर पकड़े बैठे हैं, क्या करें? दानव भी सर पकड़े बैठे हैं कि क्या करें। अब हमें नहीं पता। अब ये दोनों भी बदमाश बच्चे की तरह बिल्कुल मासूम। हम नहीं जानते क्या हो रहा है। जो देवता और दानव का हाल था, वही आज मनुष्य का हाल है। आज भी तुम्हें देवता जैसे लोग देखेंगे, जिनको तुम अच्छा समझते हो। और तुम्हें दानव जैसे दिखेंगे, जिनको तुम खराब सोचते हो। और दोनों बड़े मेहनती हैं, दोनों बहुत परिश्रम कर रहे हैं। और दोनों कुछ ढूंढ रहे हैं। उनसे पूछो क्या? तो दोनों तुम्हें बोलेंगे हम अमृत ढूंढ रहे है। बॉडी शो इंडस्ट्रिय हर कोई भाग रहा है। तुम बस सोशल मीडिया को खोलो तो सही हर कोई। 1 अंधी दौड़ में हस। और अगर तुम इस हसल कल्चर का हिस्सा नहीं, तो लोग तुम्हें आलसी समझेंगे। असफल समझेंगे। इसलिए तुम भी कोशिश करते हो, देवता और दानव के समान सोचो समुद्र का ही मंथन। कोई अंत नहीं है सफलता का। जिसको तुम खोज रहे हो, तुम बस लगे हो, मंथन हो रहा है। और अमृत मिले या न मिले, उस अमृत की खोज में। 1 बात पक्की है कि तुम्हें विश मिल जाता है सफलता की खोज में। ऐसे में कितने नौजवानों से मिला कि इतने स्ट्रेस हो गए, इतने स्ट्रस्ट हो गए कि अब स्वस्थ है ही नहीं। अब हाइपरटेंशन है किडनी डिजीज है, लिवर डिजीज है क्यों? क्योंकि टेंशन थी, स्ट्रेस था, तो ठीक है, अलकोहल पर डिपेंडेंट हो जाते हैं, रात को नींद नहीं आती। 2 पैक के बाद तो आ जाएगी। अमृत तो नहीं निकला। इतनी भागदौड़ से विश जरूर निकल गया। अब शरीर, काम यही नहीं करना। या फिर इतने स्ट्रेस हो गए, इतना अनहेल्दी लाइफस्टाइल जी लिया के अब शादी या बच्चे हुए नहीं रहे। और फिर नौजवान मेरे सामने बैठे भैया मैं क्या करूँ? अमृत की खोज में न जाने कैसे विश को मैं जागरत कर। बैठा, तुम अभी दुनिया को भी देखो, दुनिया में भी तुम्हे देवता देश मालूम पड़ेंगे, तुम्हें दानव देश मालूम पड़ेंगे। लेकिन दोनों देवता दानव काम 1 ही कर रहे हैं। मंथन और तुम देखो प्रकृति का मंथन चालू है। कौन कितना नैचुरल रिसोर्स निकाल देगा, कौन देश कितना सफल हो जाएगा। सब अमृत की खोज में, सबको है। कुछ कर दे कि यूनिवर्सल हेल्थ केयर हो, क्वालिटी ऑफ लाइफ हो, कुछ हो सब अमृत की खोज में। और इस प्रकृति के मंथन में अमृत मिले न मिले, विश जरूर प्रवाहित होता है, विश पक्का है। और आज अगर तुम प्रकृति को देखते हो, तुम संसार को देखते हो, कलेक्टिव कांशसनेस को देखते हो, तो तुम पाओगे कि हाँ, अब दूर से जैसे बादल दिखते हैं, जो बादल दर्शाते हैं कि तूफान आने वाला है। तुम्हें भी दिखना शुरू हो गया है। कि हां इस विश्व का प्रभाव, जिसको जानें अनजानें में हमने उत्पन कर दिया। अब न जाने ये विश कौन सा स्वरूप धारण करे। पर ये हलाहल विश प्रकृति में मनुष्य ने उत्पन तो कर ही दिया न। पर्सनल लेवल हम विश्व की उत्पत्ति करते। ऑन आ फैमिली लेवल, तुम्हें सोचना होगा, कहाँ? कैसे तुम्हारे को बहुत उदाहरण मिल जाएंगे, ऑन डोमेस्टिक लेवल, ऑन इंटरनेशनल लेवल, ऑन अ ग्लोबल लेवल देवता। और दानव काम 1 ही करते हैं मंथन। और जब उस विष की उत्पत्ति होती है, तो आप क्या करें? उस विष की उत्पत्ति के समय हमें हमारे शास्त्र सिखाते हैं। भक्ति, अब भक्ति का समय है। अब शिव शिवा के आह्वाहन का समय है। और सबसे पहली चीज यह होगी कि जब तुम्हारे भीतर बकती आएगी, विश्वास, आएगा, शिव के प्रति प्रेम आएगा, सबसे पहले तुम बदल जाओगे। म महाभारत में वर्णन है करण का करण, जिसने कवच और कुंडल पहने थे। और जब तक कवच और कुंडल पहने थे, कोई भी अस्त्र उसके प्राण नहीं ले सकता था। 1 शिव योगी के लिए उसका कवच और कुंडल उसकी भक्ति है। जब तुम्हारे भीतर अपने भगवान के प्रति भक्ति होगी, प्रेम होगा, विश्वास होगा। तो तुमने 1 कवच को धारण कर लिया। और अब हमारे पास वैज्ञानिक एविडेंस है। इस बात का पीपल विद फेट आर मोर रेजिडेंट people विद फेट हैव मोर कैपेसिटी तो ओवर कम मेंटल हेल्थ दिसॉडर्s चाहे डिप्रेशन हो, चाहे एंग्जाइटी हो, तुम्हारी गोलियां नहीं काम करेंगे, तुम्हारी भक्ति बहुत काम करेगी। it is नोन क्वांटीफयबल डेटा पीपल विद फेट हैव द पॉवर मच मोर पॉवर स्टेटिस्टिकल तो ईवन ओवर कम adiction अगर एडिक्शन रिकवरी में कहीं, थोड़ा भी प्रोमिसिंग डेटा है, तो तुम पाओगे वो है। फेतबेसप्रोग्रामस बाकी सारा का सारा डेटा। तुम पाओगे कुछ साल भर काम करता है, कुछ 2 साल काम करता है, कुछ 1 महीने में काम करता है। इसलिए कहते हैं कि जो रिहैब इंडस्ट्री है, वो रिवाल्विंग डोर। इंडस्ट्री कुछ फायदा नहीं है। जब तक बैठे हो, रिहैब में थोड़ी बहुत रिकवरी है। जैसे ही बाहर आए, फिर हुम फट, सुहा। और अभी, जो भी तुम्हें सक्सेस देखने को मिल रहा है। क्यों? क्योंकि कहीं न कहीं 1 फेद बेस्ट प्रोग्राम है। अब तो हमारे पास डेटा है कि भक्ति ही हमारा कवच है, भक्ति ही इस हलाहल विष से हमारी रक्षा कर सकती। और इसलिए जब देवता और दानव ने अनजाने में विश की उत्पत्ति कर दी, जैसे तुम भी अनजाने में ही करते हो। कहाँ, तुम विश को ढूंढ रहे हो? तुमने बीमारी ढूंढी थी, क्या? तुमने असफलता ढूंढी थी? क्या? तुम तो मंथन कर रहे थे, तुम तो अमृत चाहते थे, यू र, हसलिंग, यू गुड पर्सन। लेकिन विश की उत्पत्त होती। पहले विषय मिलता है। और सोचो अगर देवता और दानव के पास। उस समय भगवान शिव नहीं होते, तो क्या होता? उस समय प्रकृति का विनाश हो जाता। लेकिन देवता और दानव ने आह्वाहन किया, हे महादेव, मेरी रक्षा करो, किं करिश्यति, वेयम चंद्रशेखर राष्ट्र में है, न चंद्रशेखर। मा। जिसके साथ शिव शिवा है, उसका यम भी क्या कर सकता है, यही मारकंडे ने भी कहा था। और जब प्रार्थना की, तब महादेव, वहाँ आ गए। दोनों हाथों से उन्होंने हलाहल विश को उठाया और पी लिया। क्यों? क्योंकि हमारे जीवन का जो विषय है, उसे हम झेल नहीं पाएंगे, अकेले नहीं झेल सकते। हलाहल विष का मतलब ही ये है। ऐसा विश जो जीवन को समाप्त करते, खुशी को समाप्त करते। और जब हमारे जीवन में ये हलाहल विष आता है, दुख का, अशांति का, असफलता का। और अगर हम अकेले ही इस हलाहल विश्व को भोगने की कोशिश करते हैं, तो जीवन बहुत कठिन होगा। हम इसे नहीं संभाल पाएंगे। फिर हम खड़े हैं अपने परिवार और इस विश्व के बीच। फिर 1 दिन हम गिर जाएंगे। ये विश्व हमारे परिवार पर आक्रमण करेगा और दूसरा है। तुम इस बात को समझो। तुम्हें अकेले खड़े रहने की जरूरत नहीं, तुम आव्वाहन करो, शिव शिवा का, तुम प्रेम करो, अपने शिव से, तुम समर्पण करो, शिव शिवा को। और शुरुआत 1 भाव से ही करो। मैं अपने भगवान को प्रेम करता हूँ, मेरा मेरे भगवान पर विश्वास है, और मैं अपने भगवान की शक्ति को स्वीकार करता हूँ। i accept the grace of shiv, shiva। और फिर विश हलाहल भी क्यों न हो, जब जब जीवन में विश आएगा, तुम तक वो विश पहुँचेगा ही नहीं। तुम अपने जीवन को जी रहे हो। खुश मासूम, जैसे 1 बच्चा जीता है, बाहर क्या हो रहा है, हमें नहीं पता क्यों? क्योंकि पिता ने सब कुछ संभाल लिया। 1 शिवयोगी भी उस बच्चे के समान है। उसके जीवन में भी विश उत्पन कहीं न कहीं जरूर हो रहा होगा। क्योंकि तुम देखते हो शिवयोगियों के जीवन को, वो हस रहे हैं, खेल रहे हैं, मुस्कुरा रहे हैं, उन्हें कोई चिंता नहीं। तुम दुनिया को देखते हो, तुम्हें बड़ी टेंशन होती है, वो देखते है। वो तो हंस रहे हैं। दुनिया में कितना खास है, उनके जीवन में कितनी स्टेबिलिटी है। और फिर तुम सोचते हो कि अरे, उनके जीवन में तो विश्वनी नहीं होता, उनके जीवन में भी विश है, उन तक नहीं पहुंचा। उन तक पहुँचने से पहले महादेव उस हलाहल विश को हर लेते। they are protected and in that protection, they are free to do the sad। the आर फ्री गो, डीप किसी व्यक्ति ने मुझसे पूछा कि भैया, आप हमारी यूनिवर्सिटी में ध्यान सिखाना चाह रहे हों, तो हम चाहते हैं। आप 1 स्पेशल करकलम, डेवलप करो, जिसमें नास्तिक आकर के ध्यान को सीख सकें। क्योंकि अब नास्तिकों को भी दिख रहा है कि अच्छा ध्यान में कुछ तो फायदा है। तो अब नास्तिक भी कह रहे हैं, अब हमे भी ध्यान चाहिए, अब हमें भी योग चाहिए। लेकिन नास्तिक का अहंकार तो देखो कह रहे? तुम्हारा ध्यान हम ले लेंगे, तुम्हारे भगवान को नहीं लेंगे। तो अपने ध्यान को सेनेटाइज करो। पहले। और फिर हमें तो माइंडफुलनेस का, यही तो मतलब है। तुमने अपने अहंकार की फिनाइल मार दी ध्यान पर। और तुम्हें लग रहा है। तुमने भगवान को हटा दिया, तुमने भगवान को नहीं मारा, तुम ध्यान को मूर्छित कर दी। और वो मत। वो बस शरीर है। और मैंने कहा देखो, मैं ऐसा नहीं कर सकता। अध्यात्म के बिना ध्यान अधूरा है। और फिर वो बच्चे और थोड़ा लड़ाई में लगे की भैया, ऐसे थोड़ी ना होता है। नास्तिक का भी तो सोचिए, उसे भी अब ध्यान करना है, उसे भी रुचि है, उसे भी अब अंतर मन में छलांग मारनी है। तो आप प्रक्रिया तो दीजिए, आप आप दे दीजिए। देखिए कितनी मेडिटेशन एप्स आ गई। अरबो खरबो, उन्होंने बना लिए आप प्रक्रिया 2 मैंने कहा देखो? 1 एडवेंचर स्पोर्ट है, जिसको कहते हैं बंजी जंपिंग, बंजी जंपिंग में तुम खाई में छलांग मारते हो, पहाड़ की चोटी पर हो, और खाई में तुम छलांग मारते हो, लेकिन खुदकुशी नहीं कर रहे, तुम छलांग मार रहे हो। क्योंकि वो तुम्हारे पैरों को 1 डोर से बांध देते हैं कि लास्टिक की डोर है। और तुम छलांग मारते तो हो। और तुम जाते हो गहराई में, लेकिन फिर वो डोर तुम्हे ऊपर खींच लेते, फिर तुम ऊपर खींचे, चले आते। औ फिर तुम खुश होते हो, हँसते हो, खेलते हो, मुस्कुराते हो। फिर गुतवाकरषणतुम्हे नीचे खींचता है। और जब तुम नीचे गिर रहे हो, बंजी जंपिंग में बड़ा डर लगता है। लेकिन जब डोर तुम्हें खींच के ऊपर लाती है, तो मजा आता है। खुशी होती कि अरे हम बच गए, अरे हम बच गए। और इसलिए बंजी जंपिंग में खुशी भी है, डर भी है, खुशी केवल डोर से है, वरना डर ही होता। और डर के बाद मृत्यु होती। सोचो मैं बोलू छलांग मार। 2 बिना डोर के, तो डर है, डर है, डर है, डर है, डर है। फिर बम पर जब भी होगी, छलांग मारता, उसके पास डोर है, वो कहता है, हर हर महादेव छलांग मारता है। पहले डर है, डर है, डर है, फिर डोर खींचते, फिर वो खुशी खुशी, ऊप, अध्यात्म के बिना तुम अपने अंतर मन में छलांग मार रहे हो। बिना डोर के, शिव की डोर, बिना बांधे। जब तुम अंतर मन में छलांग मारते, तो केवल भय मिलेगा, केवल चिंता मिलेगी। फिर जितना तुम अंतर मन में गहरे निकलोगे उतना, तुम और भयभीत हो जाओगे। क्योंकि अंतर मन में बहुत विष दिखेगा। अंतरमन में तुम्हारे ही इतिहास के तुम्हें गड़े मुर्दे दिखेंगे। अंतरमन में तुम्हें वो सभी विचार देखेंगे, जिससे तुम्हें ग्लानी, क्रोध, दुख उत्पन होगा। फिर क्या करोगे? छलांग तो मारी थी सफाई करने के लिए, मंथन के लिए, अमृत खोजने के लिए, लेकिन पहले तो विश मिल गया, अब क्या? और जो शिव योगी सिद्ध है, वो कहता है की देखो, अंतर मन में छलांग मारो, लेकिन लेकिन पहले दिखा लो। how can you jump in the caves without being bundi cod? तो सिद्ध भी कहता है कि पहले दीक्षा ले लो, पहले शिव नाम औशधी ले लो, पहले महादेव को प्रेम करना सीख लो, जुड़ जाओ। और फिर ध्यान करो छलांग मारो। और 1 शिव योगी भी छलांग मारता है अंतर मन में, और देखता है। अरे, यह क्या विचार है, ये क्या कर्म है, यह मैंने क्या उत्पन कर दी। और जैसे ही भय होता है, गुरु की डोर खींच लेते, निकल पा। आज इतनी सफाई ही काफी है। फिर तुम ऊपर आते हो, तुम्हें खुशी होती है, तुम मुस्कराते हो। इसलिए हर शिव योगी जब ध्यान से उठता है, मुस्कुराता हसता, खेलता, एड्रनलिन, रश। और जितनी बार छलांग मारता है, हर हर महादेव, उतनी बार गुरु खींचते हैं। जितनी बार विश निकलता है, उतनी बार उसके शिव शिवा विश्व को हर लेते। और मैंने नौजवान को कहा कि देखो नास्तिक को मैं क्या ध्यान से खा। तो यही बात हो गई। wiाutcoldthen it is नोट बnजीजपिng इट इज सोसाइड, you want to go within you want to deal with your mind, you want to solve this thisgunjaloftots that you have made nale me mar tet है gunja, अब इस इसको तुम सुलझाने की कोशिश कर रहे हो, केवल महादेव तुम्हारी ऊँगली थाम के तुम्हें इस समुद्र के पार लेकर के जा सक। क्योंकि याद रखना, दुख बहुत शक्तिशाली है, तुम्हारी समस्या बहुत शक्तिशाली है, बहुत बार दुनिया तुम्हारे दुःख को समझती ही नहीं है। मैं ऐसे कितने लोगों से मिला जो बहुत पढ़े लिखे तो हैं शास्त्रों में, लेकिन उन्हें दुनिया की समझ नहीं। 1 महीने देखा विधवान, वो बैठा है उसके सामने, 1 माँ 1 बच्चे को लेकर आई, वो बच्चा बेचारा 22 23 साल का होगा, बहुत हैवी, एडिक्शन है उसको बहुत ज्यादा। और अब माँ कह रही है कि किस प्रकार से मैं बच्चे को बाहर निकाल और वो बेचारा जो विद्वान था उसे जितना आता था, जितनी समझती उसने देखा कि हाँ चलो एस्ट्रोलॉजिकल चार्ट में यह भारी है, वो हल्का है, ये है। और क्या उपाय देता। 1 ही उपाय दिया कि देखो तुम्हारे शनी में यह समस्या है, जाके सरसों के तेल को कहीं पे चढ़ा। 2 अब सोचो बच्चे को, इतनी हैवी, एडिक्शन है, इतनी हैवी, सब्स्टेंस, अब्यूस डिसॉर्डर है, इतनी हैवी, डिपेंडेंस है, इतना विश अब उसके जीवन में जागृत हो चुका है। और इस बेचारे विद्वान ने अपनी समझ के अनुसार उसको 1 ऐसा उपाय बताया जिससे ना तो बच्चे का लाभ, ना माँ का लाभ उल्टा शायद पतन। और हो क्यों? क्योंकि जो बेचारा रिकवरी में है उसको ट्वेंटी फोर आवर केयर चाहिए। अब माँ उस बच्चे को छोड़ कर जा रही है, तेल फेंकने तो सोचो उस बच्चे का क्या होगा? और वो विद्वान भी शायद यह उपाय इसलिए दे रहा है क्योंकि उसको खुद ज्ञान नहीं कि जो तुम्हारा दुःख है, वो कितना शक्तिशाली है। क्योंकि शायद इस विद्वान ने जीवन में कभी मंथन किया ही नहीं। तुमने बहुत मंथन किया है, तुमने अपनी पढ़ाई में मंथन किया है, तुमने अपने काम में मंथन किया है, तुमने अपने जीवन में मंथन किया है। इसलिए विश्व की उत्पत्ति हुई। और अब तुम समाधान ढूंढ रहे हो। और तुम किसी ऐसे विद्वान के पास जाकर के बैठ जाओ जिसने पर लिख तो बहुत लिया, लेकिन कभी मंथन नहीं किया, परिश्रम नहीं किया तुम्हारी तरह। और इसलिए वो दुख को नहीं जानता। तुम मंथन में आगे बढ़े, तुमने शादी की, तुम मंथन में आगे बढ़े, तुमने बच्चे पर दादा की। और केवल तुम जानते हो कि कितना दुःख होता है। जब तुम्हारे बच्चे बीमार हैं। और तुम उन्हें श्वास देने में। असफल केवल तुम जानते हो असहाय होने के उस भाव को, जब तुमने पूरी मेहनत कर दी, पूरा पैसा डाल दिया, दिन रात 1 कर दिया, लेकिन फिर भी बच्चा पढ़ाई में लुढक के घर वापस आ गया। यह तुम्हारा दुख कोई नहीं जानता। तुम कितने विद्वानों के पास चले जाओ। जिसकी खुद की शादी नही हुई, तो जानता ही नहीं, वो भी तुम्हें कुछ न कुछ उपाय दे देगा, अपनी विधि दे देगा। और तुम घर आ जाओगे अपने हलाहल विष के साथ। अगर उस विद्वान को पता होता कि तुम्हारे हलाहल विष की ताकत क्या है, तो वो भी जानता कि सिवाय शिव के कोई और औशधी काम ही नहीं करेगी। क्यों? क्योंकि वो तुम्हारे हलाहल विष को समझते नहीं, वो तुम्हारे दुःख को, कष्ट को, पीड़ा को, समझते ही नहीं। तुम्हे पता है कि घर में अगर किसी को कैंसर हो, तो किस प्रकार से तुम पूंजी इकट्ठी कर उसे बचाने की कोशिश कर रहे हो। किस प्रकार से तुम्हारा दृण निश्चय है। जब दुनिया जहान का रही है, इनका कुछ नहीं हो सकता। तुम्हे पता है कि कितना दुख होता है, जब डॉक्टर तुम्हारे सामने 2 उपाय रख देता है, कहता है कि जी, या तो ये दवाई 2 शायद काम कर जाए, लेकिन ये दवाई अधमरा कर देगी। और या घर ले जाओ। और तुम्हें चुनना पड़े कि मैं क्या करूँ, या तो घर ले जा कर इनको मैं पीड़ित देखों, या अस्पताल में इन्हें महापीडितदेखूं और सोचो, जो तुम्हारा विश जानता ही नहीं, जो जानता ही नहीं कि तुमने कितने हलाहल विष को अनुभव किया है, बूँद बूँद कर। जब तुम्हारे भीतर वो विश जा रहा है, तो क्या तुम्हें उपाय देगा? क्योंकि जैसे सैन फ्रांसिस्को का रोबोट है, वो कॉफी बना रहा है, वैसे ये विद्वान भी बैठ बैठ के उपाय बना रहा है। ये भी डी सेंसेटाइज है। इसके लिए भी तुम 1 स्टेटिस्टिकल डेटा हो, इसके लिए भी तुम जजमान हो, इसके लिए भी तुम बस वह डेढ़ सौ रुपए हो। और इसलिए अगर तुम इस बात को समझो कि बहुत ताकत है, तुम्हारे विश्मय, बहुत शक्तिशाली है। ये विश्। तो तुम समझ जाओगे कि इस विश्व से बढ़ के ब्रह्माण्ड में केवल 1 ही ताकत है। और वो है शिवा। शिवा, हर हर महादेव और कोई औसधि है ही नहीं। देर is just an cor। और तुमने कई औषधियाँ अपने जीवन में उतारी जरूर रहे, तुम जानते, तुम्हारा जीवन और है ही क्या? पहले मंथन, फिर विश की अनुभूति और फिर औषदी की खोज। तुम मेरे मासूम हनुमान हो, लेकिन हनुमान को तो संजीवनी बूटी मिल गई थी। तुम तो हर पहाड़ की चोटी पर फुदकते फिर रहे हो। यही तो तुम्हारा जीवन है। पहले मंथन, फिर विष की अनुभूति और फिर औषदी की खोज। और किसी दिन जब तुम थक हार के 1 वृक्ष के नीचे बैठोगे, तो वहां तुम्हें शिवयोगी अपनी मौज में दिखाई पड़ेगा। और वो शिवयोगी बस 1 ही बात बोल रहा होगा, शिव नाम, औषधी। और अगर तुम्हे उस शिवयोगी की बात समझ आ जाएगी, तो तुम्हारा जीवन बदल जाएगा। अगर तुम्हे उस शिवयोगी की बात समझ आ आएगी, तो तुम भी शिव का आवाहन करोगे, तुम भी अपने भीतर इस भाव को उत्पन करोगे। मैं अपने शिव को प्रेम करता हूँ, मैं अपने शिव पर विश्वास रखता हूँ और मैं अपने शिव को पूर्णता स्वीकार करता हूँ। और जिस दिन तुमने आवाहन कर लिया, फिर कवच है, फिर कुंडल है, then you are। resident दैन, यू आर स्ट्रॉंग। फिर फिर तुम्हें पता ही नहीं कहाँ गया, ये vis क्यों? क्योंकि फिर नील कंठ, महादेव तुम्हारे साथ है। और 1 ही है महाकाल महामृत्युंजय, महादेव, परात, पर शिव, शिवा, जो तुम्हारे विश् को हर ले, और कोई भी नहीं बाकी, सब तुम्हें मंथन की प्रेरणा दे देंगे। लेकिन 1 ही है जो तुम्हें ताकत देगा। और इसलिए अब तुम इस बात को समझो, तुम्हें अध्यात्म की ओर चलना होगा, तुम्हें अध्यात्म में गहरा उतरना होगा, चाहे तुम कितने भी बड़े, वैज्ञानिक क्यों न हो जाओ, कितने भी बड़े चिकित्सक क्यों न हो जाओ। और हाँ, तुम्हारा अहंकार तुम्हें बोलेगा, तो मुझे 1 नए अध्यात्म की जरूरत है, 1 नए ध्यान की, इस सदी के ध्यान की, सूखा ध्यान, जिसमें शिव की महिमा ही नहीं, तो तुम चौंक जाना, समझ जाना। ये औषधि वहाँ से आ रही है, जो विश्व को जानता नहीं, ये तुम्हें कह रहे हैं, छलांग मारो खाई में, बिना बंजीकॉटकेऔर, ये तुम्हें कितना भी बहला दे, फुसला दे। अगर तुम्हे उस पद्धती में कहीं शिव का एहसास न हो, तुम भाग पढ़ना। तुम्हें अगर उस औषधी में शिव की सुगंध न आये, तुम भाग पड़ना, ये तुम्हें खुदा एंगे खाई में बिना बंजी काट के। और फिर ये तुम्हें कितना भी डेटा दे, देगी, देखो, इतने लोग कूद चुके हैं, कुछ तो होगा, तुम भी कूद, पड़ो तुम हाथ जोड़ लेना, कि भैया, आप अपनी विधि रखो, आप अपना संसार रखो। मैं तो अनंत को पकड़ कर बैठा हूँ। और मेरा अनंत है वो शिव, जो मुझसे प्रेम करता है, वो शिव, जो मेरी रक्षा करता है, वो शिव, जो मुझे स्वीकार करता है, वो शिव, जिस पर मेरा अटूट विश्वास है। हर हर महादेव, अब अपने जीवन में इस अध्यात्म को हमें लाना होगा। क्यों? क्योंकि इस दिव्य काल में मैं बहुत खुश हूँ, आप सब मेरे साथ जुड़ सकें। अगले कुछ दिन मैं आपके भीतर उस महादेव के प्रति 1 गहरा प्रेम उत्पन करूंगा और ध्यान से बैठना। इस शिव महापुराण में। क्या पता तुम बदल जाओ। और अगर बदल गए, फिर मुझे मत कहना, ये मेरे शिव की माया है? मैं कौन होता हूँ, तुम्हें अपने सामने बिठाने वाला ना मेरी शकल है, ना मैं सुन्दर हूँ। मैं तो बस 1 डिजिटल डेटा हूँ, जो स्क्रॉल कर करते तुम्हारे सामने आ गया। और तुम यहाँ रुक कर मुझ जैसों को सुन रहे हो। कौन हूँ, मैं में कुछ भी नहीं, यह मेरे शिव की माया है, जो तुम्हें यहाँ पर ले आया, कुछ देने के लिए हिलाया होगा, सहायता के लिए ही लाया होगा। और अगर तुम बैठ गए इस पूरा हफ्ता मेरे साथ, तो तुम्हारा जीवन बदलना शुरू हो जाएगा। और देखो, थोड़ी मेहनत तो करनी होगी, जिस शिव के साथ तुम अनंतकाल व्यतित करना चाहते हो, 1 हफ्ता कुछ मिनट तुम उसके साथ क्या नहीं व्यतित कर सकते? इन कुछ दिनों में, इस शिव महापुराण में मेरी यही 1 मेहनत होगी कि किस प्रकार से मैं तुम्हें शिवनाम औषधि दे सकूँ। और मैं तुम्हें पहले ही बता रहा हूँ कि शायद मैं भी तुम्हारे विश्व को नहीं जानता, क्योंकि केवल तुम्हें ही पता है तुमने कितना दुःख अनुभव किया है। और मैं ये कह भी नहीं रहा कि मैं तुम्हारे दुख को समझ सकता हूँ, मैं तुम्हारी पीड़ा को समझ सकता हूँ। मैं जानता हूँ मेरे बस की नहीं। पर मैं तुम्हें इतना जरूर कह रहा हूँ कि इस ब्रह्मांड में शिव से बढ़ के कोई और औषधि नहीं, कोई और ध्यान नहीं। और तुम जो औषधी की ख खोज में जीवन भर भटके हो। तुम शिवनाम औषधि को भी अपने जीवन में लेकर के। और अगर तुम्हारे जीवन में सुख और शांति आती है। ये इस शिवयोगी, इस, इशान शिवानंद के लिए बहुत खुशी की बात होगी। इन कुछ दिन हम और गहरे उतरेंगे, हम समझेंगे कि शिव योगी के लिये जीवन क्या है, मृत्यु क्या है? और किस प्रकार से 1 शिव योगी मृत्यु की ओर बढे। इन कुछ दिनों में मैं आपको समझाऊँगा किस प्रकार से हम शिव योगियों के समान महादेव की भक्ति कर सकते हैं और महादेव की साधना में गहरे उतर सकते हैं। लेकिन मैं पहले ही बता रहा हूँ, जो मेरी साधना है, वो अध्यात्म के साथ है। i will not ट्राय टू बी एक्ट्रा साइंटिफिक एंड यूज अननेसेसरी मंबोजmबoक्यों, क्योंकि मेरा जो इष्ट है, वो खुद ही बोला नाथ है। और जो बोला नाथ का शिष्य है, वो कैसे कॉम्पलिकेटिड बात तुमसे कर सकता है। मैं तुम्हें वो ध्यान की विधि सिखाऊँगा, जो मेरे गुरु ने मुझे सिखाए। मैं तुम्हें शिव से प्रेम करना सिखाऊंगा, जो मेरे गुरु ने मुझे सिखाया। मैं तुम्हें सिखाऊँगा किस प्रकार से तुम्हारी भक्ति तुम्हारी रक्षा कर सकती। और ये रक्षा ही सर्वश्रेष्ठ है, ये ही तुम्हारा कवच और कुंडल है। मैं तुम्हें सिखाऊंगा किस प्रकार से तुम ध्यान के माध्यम से शांति की ओर बढ़ सकते हो। और अभी भी मैं शांति ही कह रहा हूँ, मैं ये नहीं कह रहा कि तुम सफल हो जाओगे, तुम और hsl कर सकते हो। sprituality is not about doing more manthan more churning, sprituality is about having the residence to overcome the poison that you have created ड्यूरिंग दैट चर्निंग तो अगर तुम्हें लगता है तो मेरी साधना से, मेरे शिव से, और फिर जा के समुद्र मंथन जोर जोर से कर, लोगे, मैं नही करारा, उसके लिए तो में बहुत विद्वान मिल जायेंगे। मैं तो तुम्हें यह बताऊँगा कि जब तुम विष की उत्पत्ति करते हो, तो कैसे मेरे शिव के माध्यम से तुम अपनी रक्षा कर सको? क्योंकि तुम्हें और स्पीड से चरनिंग करने की जरूरत नहीं। तुम बस जो हो, जहाँ हो, जितने हो, रहो ताकतवर हो जाओ, अपनी रक्षा कर लो, शिव का आह्वाहन कर लो, तुम्हे उस शिवामृत का भी अनुभव हो जाएगा। यू आर गुड वैर यू आर। i will just help you। विच सम मीनस दैट में हेल्प यू। और अगर कुछ भी नहीं, तो कहते हैं कि शिव माह पुराण को सुनने से बहुत हीलिंग की अनुभूति होती। तो तुम बस बैठ के सुन लेना। अगर हो सके तो जब मैं बोलूं आंखें बंद कर लेना, अगर हो सके त जब मैं बोलूं, हर, हर महादेव तुम उतना ही बोल। 2 अगर हो सके तो मेरे साथ ओम नम शिवाय का जप कर लेना। और अगर उतना भी नहीं, तो याद रखना, इस स्थान पर मेरे शब्द रहेंगे। कुछ समय तक जब तुम्हारा मन करे, शिव योगी यहां बैठे हैं, तुम्हारे इंतजार में, जब तुम्हें लगे, तुम थक गए हो, जब तुम्हें लगे कि बस, अब मैं अकेला इस विष को नहीं झेल सकता, तो तुम दौड़े दौड़े, शिवनाम औषधि को प्राप्त करने आ जाना, और वो औषधि तुम्हें मिल जाएगी। आई जस्ट। want you to now, you are not a lone। the शिवयोगी इज आर vidयu, यू आर लव्ड, यू आर प्रोटेक्टेड। और साथ ही साथ जब हम यहाँ पर मिलेंगे, हम तुम्हारे इलावा हर उस मनुष्य के लिए प्रार्थना करेंगे जो प्रकृति में हलाहल विश्व को भोग रहा है, और हम प्रार्थना करेंगे कि अंधकार में उसे भी महादेव रूपी रोशनी की किरण दिखाई पड़े, ताकि वो भी स्वयं को, अपने परिवार को इस दुख से बाहर निकाल सके। याद रखना तुम शिवयोगी और 1 शिव योगी के लिए वासुदेव कुटुम्ब, 1 शिव योगी के लिए वन वर्ल्ड वन फैमिली। मेरे गुरु ने मुझको सिखाया था कि बेटा जैसे तेरा शरीर है ना, और तेरे शरीर में सेल्स हैं। और अगर शरीर का 1 हिस्सा बीमार है तो पूरे शरीर में बीमारी फैलने का डर है, तो तुम यह नहीं कह सकते 1 हिस्सा बीमार है उसे काटकर फेंक, 2 अगर 1 हिस्सा बीमार पड़ता है, तो बाकी सब सेल्स को सहायता करनी चाहिए उस हिस्से की, ताकि शरीर रोग मुक्त हो सके। जैसे शरीर है मेरे गुरु ने समझाया, वैसे ही यह पृथ्वी और पृथ्वी पर जितने मनुष्य हैं न, वो इस पृथ्वी के सेल्स हैं। और जैसे कैंसर सेल्स होते है न जो आक्रमण करते हैं शरीर के दूसरे सेल्स पर, वैसे तुम्हारे आसपास भी तुम्हें कैंसर जैसे लोग दिखाई पड़ेंगे, जो आक्रमण करेंगे दूसरे सेल्स पर। और 1 स्वस्थ शरीर कौन सा शरीर होता है जो कहता है कि किस प्रकार से सारे स्वस्थ सेल्स मिल कर के अगर कहीं बीमारी है उसका समाधान कर सके। और जो 1 रुग्ण शरीर होता है उसमे क्या होता है कि जो कैंसर सेल्स हैं वो कहते हैं कैसे पूरे शरीर को बीमार कर दू। और क्योंकि तुम शिव योगी हो, यू आर the हेल्दी सेल्स, यू आर द वाइट ब्लड सेल्स, तुम्हारी तो यही प प्रार्थना होगी किस प्रकार से हर मनुष्य को शुभ नाम और सधी मिल जाए, किस प्रकार से हर मनुष्य विश्व के अंधकार से ऊपर उठ सके, किस प्रकार से पृथ्वी का एवरी सेल बिकम्स हेल्दी। and doing these five days, we will not just play for our healing, but we will see the earth as a living organism, and we will try to heal the world, as well, because i know this shiver anunt। शिव कृपा, अनंता, इस 5 दिन हम उस अनंत का आवाहन करेंगे, हो सके आप सब लोग आना जुड़ना और मेरे साथ साधना करन। 1 बार फिर शिव के प्रति अपने भीतर प्रेम को जागृत करो। एंड आई वांट यू टो विज्वलाइज दिस इमोशन मनी मन शिव शिवा के प्रति धन्यवाद का भाव तुम्हारे जीवन में ऐसी कौन सी घटना गठित हुई जब तुमने स्वयं को लव्ड महसूस किया, वट हैपन इन योर लाइफ दैट मेड यू फील लव एंड कनेक्शन तो वर्ड्स the डिवाइन और शिव के प्रति इस प्रेम के भाव को, धन्यवाद के भाव को विज्वलाइज करो, ऐज एनर्जी और एकागृत करो, इस शक्ति को अपने हृदय में अपने सामने स्मरण करो, महादेव के ज्योति लिंग स्वरूप का। और अब भाव कि मैं इ ऊर्जा से अपने शिव का अभिषेक कर रहा हूँ, न जल्द से, न दूध से, मैं धन्यवाद के भाव से, अपने प्रेम के भाव से, शिव शिवा का अभिषेक कर रहा हूँ और मन ही मन इस विचार को स्वीकार करूँ। मैं शिव शिवा को प्रेम करता हूँ मैं शिव शिवा में पूर्ण विश्वास रखता हूँ मैं शिव शिवा को स्वीकार करता हूँ और 1 सरल ध्यान की विधि अगले कुछ दिनों तक तुम्हारा ध्यान तुम्हारी साँस की ओर तुम साँस लो और मंत्र ओम नमशिवाय मानो तुम ओम नम शिवाय मंत्र के साथ सांस भीतर ले रहे हो तुम्हें और कुछ नहीं करना बहुत सरल सांस लो मंत्र ओम नमशिवाय सास निकालो मंत्र ओम नमशिवाय तो मनि मन अगर मंत्र चलता है ओम नम शिवाय तुम्हारी सांस चल रही है, फिर मंत्र चलता है ओम नम शिवाय तो सांस चल रही है तुम बस अपनी सांस के प्रति जितना जागरत हो सकते हो तुम जागृत हो जाना पूरी सास भीतर पूरी सांस बाहर औ और तुम्हारी सांस चलती रहे, तुम्हारी सांस चलती रहे तुम्हारी आँखें बंद करने की भी जरूरत नहीं तुम बस मुस्कुराओ तुम बस भगवान के प्रति 1 प्रेम भाव को स्वीकार करो और बस सांस चल रही है तुम बस सांस के साथ अपनी जागृति और अपने मंत्र को जोड़ 2 और तुम पाओगे सांस गहरी हो जाएगी, हार्ट रेट स्लो हो जाएगा तुम्हारा सेंट्रल नर्व सिस्टम मसल्स को रिलैक्स होने का आदेश दे देगा और अभी सोने से पहले भी बस कुछ देर तक तुम्हें यही करना है अपने आप को शिव की डोर से बांध तुम्हें अंतरमन में छलांग मारनी है ब्लेस आप सबको आप सबके भीतर बैठे शिव शिवा को मेरा प्रणाम मैं प्रार्थना करता हूं आप सबको भगवान शक्ति दे कि आप सब अगले 5 दिनों तक मेरे सामने बैठे इस औषधि को स्वीकार कर सके आई ब्लेस यू एंड आई ब्लेस योर फैमिली आई लव यू and i love your family and i give you the gift ऑsiवsिवाब्लेस जाने से पहले इस वीडियो के नीचे 1 कमेंट करना और इस वीडियो को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक शेयर करना ताकि हर व्यक्ति इस औषधि को अनुभव कर सके नम शिवाय।










