SHIVMAHAPURAN - Ascension sadhna | Maha Sadhna | By Shivyogi Ishan Shivanand | (Final day)

The video records the final day of a multi‑day Shiv Mahapurana sadhana led by Shivyogi Ishan Shivanand (Speaker A) with participants (Speaker B). The session weaves together a detailed guided visualization of Shiva’s Jyotirlinga, breath‑mantra synchronization (inhale “Om”, exhale “Namah Shivaya”), and chakra alignment from sahasrara to muladhara, aiming to merge Shiva (light) and Shakti (energy) within the practitioner. After the meditation, the instructor shares a personal hospice narrative from the COVID‑19 era, describing a terminally ill child, the mother’s grief, and how the sadhana helped the child elevate his consciousness toward a “divine death”. He then expands the teaching to a broader philosophical framework: the inheritance of ancestral karmic debt, both spiritual and biological (mental‑health, physiological disorders), and the necessity of self‑less love and letting go to free one’s ancestors. Using the myth of Maharaja Sagar, Kapil Muni, and the later saint Bhagiratha, he illustrates how disrespect leads to collective suffering and how intense tapas (as performed by Bhagiratha) can release ancestral souls. The instructor urges participants to adopt Shiv sadhana to dissolve inherited burdens, create new positive “data”, and assist loved ones in their transition. He announces a forthcoming week‑long online group sadhana (Zoom) focused on the Shri Lalita Rudram chant, free registration for up to 5,000 participants, and a schedule of daily 30‑minute sessions. Throughout, the tone shifts from instructional to compassionate, reflective, and motivational, maintaining a reverent, hopeful, and urgent sentiment toward spiritual liberation and collective healing.
Chapters
शिवा। आप सब को, आप सब के भीतर स्थित भगवान शिव शिवा को मेरा प्रणाम। शंभर के लिए तुम भगवान के ज्योतिरलिंग स्वरूप का स्मरण करो। भगवान का ऐसा स्वरूप जो केवल ज्योति से बना है, तुम स्मरण करो। अगर सूर्य और शक्तिशाली होता तो उसमें से कैसा प्रकाश निकलता। अब स्मरण करो हजार सूर्यों के भीतर कितना तेज होता। और अब उसी तेज को विज्वलाइज करो अपने कपाल के केंद्र में। ये तुम्हारा कपाल है। यहाँ पे कहते हैं हजार पंखड़ियों वाला कमल का फुल हमारा सस्ता। अब मानो यही कमल का फुल अगर महादेव का आसन होता। और यहाँ पे भगवान का ज्योतिर लिंग। स्वरूप। इसको विज्वलाइज करो तुम्हारा सहस्त्रार आसन के समान और उस आसन पर महादेव ज्योतिर लिंग। स्वरुप में समाए इन द फॉर्म ऑफ लाइट। फिर अपनी चेतना नीचे लेकर के जाओ। रीड की हड्डी से धीरे धीरे धीरे धीरे जहां तुम्हारी टेल बोन है, जहाँ पे रीड की हड्डी खत्म होती है, जिसको वैज्ञानिक कॉकिक्स रीजन कहते है। और उस स्थान पर स्मरण करूँ भगवती के शक्ति स्वरुप का महादेव कि मां भगवती और उस स्वरूप का शक्ति स्वरुप। तुम्हारे टेल बोन में स्थित तुम्हारी टेल बोन में, 4 पंक्तियों वाला मूलाधार मूलाधार के केंद्र में स्मरण करो। शक्ति तत्व का, कपाल के केंद्र में स्मरण करो। शिव तत्व का। और अभी तुम्हें विज्वलाइज करना है। तुम्हें सोचना है, तुम्हे अपने भाव को जोड़ना है, मानो तुम्हारी विज्वलाइजेशन से तुम इन्वोकेशन कर रहे हो। और अब मैं मंत्र बोलूंगा और मंत्र के साथ तुम अपनी सांस और विज्वलाइजेशन को जोड़। 2 मंत्र होगा। ओम नम शिवाय। जब मैं, ओम बोलू, तुम सांस भीतर खींचो और स्मरण शिव तत्व तुम्हारी रीड की हड्डी से धीरे धीरे नीचे जा रहा है। मैं नमक बोलूंगा, तुम शंभर के लिए सांस रखो और स्मरण करो। शिव तत्व शक्ति तत्व में लीन हो रहा है, तुम्हारे मूलाधार में, टेल बोन में। और फिर जब मैं बोलूं शिवाय तुम सांस निकालो और तुम्हारी धारणा की शक्ति तत्व का। अब असेंशन हो रहा है। और वो रीड की हड्डी से ऊपर शिव तत्व में लीन। फिर मैं ओम बोलूं सांस खींचो और शिव तत्व रीड की हड्डी से नीचे शक्ति तत्व में लीन। मैं नम बोलूं सांसरो को मूलाधार केंद्र में विज्वलाइज करो। शिव और शक्ति को 1 होते हुए मैं। शिवाय बोलूं सांस रोक निकालो और शक्ति तत्त्व रीड की हड्डी से ऊपर और कपाल पर स्थित शिव तत्व में लीन। ओम सांस भीतर नम। सांस रो को शिवाय सांस निकालो और पूरी ताकत के साथ। तो। अगर मैं बोलूं।
ओम नम सेवा।
तो तुम्हारी सांस चलेगी तुम पूरी खींच रहे हो, जितनी ताकत से कर सकते हो। और साथ ही साथ विज्वलाइजेशन चल रही है। ओम सांस भीतर। शिवतत्व कपाल से मूलाधार की ओर नमक। शास्रों को शिव शक्ति 1 दूसरे में लीन। शिवाय सांस निकालो। शक्ति तत्व मूलाधार से कपाल की ओर। तुम्हारा ध्यान सिर्फ और सिर्फ तुम्हारी रीड की हड्डी पर हर सांस के साथ कपाल पर स्थित शिव तत्व और मूलाधार में स्थित शक्ति तत्त्व के प्रति अपना स मरण। अपनी जागृति और बढ़ने। 2 बहुत अच्छे। अब अपनी सांस को मेरे मंत्र के साथ जोड़ो सभी लोग शुरू करते हैं। सांस भीतर।
ओम रोको नामा, सांस निकालो सेवा, ओम नाम सेवा,
ओ
नमा सेवा, ओ नमा सेवा।
बिल्कुल शांत होकर अपने कपाल में आवाहन करो, शिव तत्व का स्मरण करो। भगवान के ज्योतिरलिंग स्वरूप का मानो, तुम्हारे सस्तरार में आज ज्योती लिंग स्थापित जब सांस खींचे ते हो, तो ज्योतिरलिंग की शक्ति रीड की हडडी से नीचे मूलाधार के केंद्र में स्थित शक्ति तत्व में लीन और फिर जब सांस बाहर निकालते हुए, यही शक्ति तत्व का असेंशन। यही शक्ति तुम्हारी चेतना रीड की हड्डी से धीरे धीरे उठते हुए और कपाल के केंद्र में स् थितशुबमेलीन मानो। हर बार जब सांस निकालते हो, तुम पूर्णता शुभ में हो रहे हो, हर बार जब सांस खींचते हो, तुम भगवान शिव, शिवा की कृपा को, तेज को, हीलिंग को ग्रहण करना। with every inhalation receive, the healing, wिtevरy exelition let the consiousness, evolve and transcend to words, shiva consiousness, fullbretin
nama sevan
litle biddypaर, ओ
नामा सेवा
करते रहे,
ओम नमा सेवाय, ओम नमा सेवाय, ओम नमा सेवा,
आँखें बंद कर लें, पीठ सीधी कर ले अपने आप को ध्यान में और गहरे उतरने दें। शरीर के 11 मास पेशी को आदेश 2 बिल्कुल शांत हो जाओ। तुम्हारा ध्यान तुम्हारे कपाल की ओर आदेश बिल्कुल शांत हो जाओ। छाती पेट पीठ को आदेश बिल्कुल शांत हो जाओ। दोनों हाथ दोनों पैरों को आदेश बिल्कुल शांत हो जाओ। अपने कपाल में जोतिरलिंग का आह्वाहन और स्मरण करो। शिवशिवाके निर्गुण निराकार स्वरुप अपने कपाल में स्थापित होते हुए और हर बार जब सांस भीतर खींचते हो, शिव शिवा की हीलिंग रीड की हड्डी से शरीर के भीतर और हर बार जब सांस निकालते हो, भीतर, जो कुछ भी नकारात्मक भरा है, जितने भी विकार भरे हैं, सनास निकालते समय अपने शुभ पर चढ़ा।
2
देखो, तुम तो महादेव को प्रसन्न करने के लिए हमेशा भांग, धतूरा, तेज का पत्ता, न जाने क्या क्या चढ़ा देते हो। आज तुम इस ज्योति लिंग स्वरूप, पर हर बार जब सांस निकालते हो, तो तुम्हारे भीतर जो कुछ भी नकारात्मक है, शिव शिवा को अर्पित कर। 2 सब शुभ से उत्पन्न और आज शिव मैली है, जिस क्षण तुम अपने विकार महादेव को त्याग दोगे। तुम मुक्त हो, तुम स्वस्थ हो, ओम के साथ सास। betr received the healing, शिवाय के साथ साँस रिलीस लेड को, तुम्हारी साँस की गति मेरे मंत्र से जुड़ी हुई, अगर मेरे मंत्र की गति बढ़ती, तुम्हारी साँस की गति बढ़ेगी, आँखों को बंद रहने 2 हर विचार के प्रति दृष्टाभाव। try to meditate on the visualization
of
the jotedlinginयॉr, सस्ता,
ओम नमा शेवा, ओम नमा सेवाय, ओम नमा सेवाय, ओम नमा सेवाय, ओम नमा शेवाय, ओम नमा सेवाय, ओम नमा शेवाई, ओम नमा सेवाए, ओम नमा शेवा, ओम नमा सेवाए, ओम नमा शेवा, ओम नमा शेवा,
सांस चलती रहे, मन ही मन मंत्र चलता रहे और ध्यान कपाल में स्थित जो तिलिंग की
ओर
बहुत प्रेम से धन्यवाद करो। भगवान शिव शिवा का धन्यवाद करो। सभी सद् गुरुओं का धन्यवाद करो। माँ भगवती हर साँस के साथ तुम्हारा हर करण। शिवमय हो रहा है। तुम स्वीकार करो, धन्यवाद करो और बहुत प्रेम से धीरे धीरे वापस आओ, उंगलियों को हिलाओ, हतेलियों को रगड़ो और अपने चेहरे को स्पर्श करते हुए अपनी आँखें खोल। 2 ब्लेस हर हर महादेव। जब कभी भी तुम्हे समय मिले, इस प्रकार से तुम अपने विचार, स्वास, भाव को साध सकते हो। विचार और भाव को तुम कैसे साधते हो? विज्वलाइज एंड एक्सेप्ट, द ज्योतिर लिंग अपने संस्कार पर। विज्वलाइज एंड एक्सेप्ट बाहर बहुत चिंताएं होंगी, मन बहुत स्थानों पर भटकेगा। लेकिन तुम उस समय क्या कर रहे हो? विज्वलाइज एंड एक्सेप्ट। अपना ध्यान ले जा रहे हो। कपाल में स्थित भगवान के ज्योतिर लिंग स्वरूप की हो। और ज्योतिर लिंग क्यों? क्योंकि ज्योतिर लिंग का स्मरण करना सरल है। अगर मैं आपको बोलू, महादेव के जचाधारी स्वरूप का स्मरण करो, या महादेव के महामृतियुंजय स्वरूप का स्मरण करो, या महादेव के महाकाल स्वरूप का स्मरण करो। फिर मन भटकना शुरू हो जाएगा। लेकिन यहां तो मैं कह रहा हूं, ज्योतिर लिंग। भगवान का वो स्वरूप, जो ज्योति से बना है, दिव्य प्रकाश से बना है। तुम पाओगे सरल होगा। और फिर जब सांस लो मंत्र के साथ ओम, तो सांस ले रहे हो। मंत्री मंत्र चल रहा है ओम। और जब सांस लेते हो, स्मरण करो कि तुम हीलिंग भगवान के भीतर ले रहे हो। शिव शिवा की शक्ति, दिव्य, संजीवनी, भगवान महामृत्युंजय की शक्ति, तुम सांस के साथ, अपनी रीड की हड्डी से नीचे खींचते हुए, अपने आप को हील कर रहे हो। फिर सांस रों को नम, विज्वलाइज करो, शिव और शक्ति मूलाधार में 1 होते हो। और फिर सांस निकालो शिवाय। लेकिन हर बार जब सांस निकालते हो, स्मरण कि मैं शिव शिवा को पूर्ण समर्पण कर रहा हू। अगर तुम्हें भीतर दर्द हो रहा है, पीड़ा हो रही है, तुम सांस निकालते हुए, स्मरण करो कि ये जो मेरी पीड़ा है, वो शिव शिवा को समर्पित। फिर तुम्हें लग रहा है, बीमारी, बहुत प्रबल हो गई, ताकतवर हो गई। याद रखना, सब शिव से उत्पन, शिवी को समर्पित। फिर जब सास निकालो, शिवाय, तो ऐसी धारना, ऐसी विज्वलाइजेशन के जो कुछ भी शरीर में है, जो तुम्हें नहीं अनुभव करना, तुम शिव शिवा को चढ़ा रहे हो। हो सकता है शरीर में कष्ट नहीं मानसिक चिंता है, हृदय में दुःख है। वो, तो तुम्हे पता है, तुम क्या क्या भोग रहे हो, जब तुम सांस निकालोगे, ये सभी विकार, ऐसा भाव रखना, ऐसी धारना रखना कि तुम शिव शिवा को चढ़ाते। और जब कभी भी तुम्हें समय मिले चलते, फिरते खाना खाते। जब कभी भी शन भर के लिए तुम जागृत हो जाओ। तुम सांस, मन और भाव के माध्यम से शिवशिवा से जुड़ो और कुछ नहीं करना, बस ध्यान, मंत्र और स्वांस और विजुलाइजेशन की ओर कैसे बैठे हो। आह्वाहन किया महादेव को कपाल पर। और फिर सांस ली, हम रोकी, नम, निकाली, सेवा। मनीमन। मंत्र चल रहा है, और सांस बहुत अच्छे। इसका तुम अभ्यास करना बहुत ज़रूरी है कि इस जीवन काल में हम तब थोड़ा और करे। मेरे जीवन की 1 घटना है। 1 होस्पिसेस केयर में मैं कुछ समय के लिए काम कर रहा था और ये बात है जब कोवेट अपनी पिक पर था और जब कोविद पीक पर था तो जो हॉस्पिटल फैसिलिटीज थी वो जनरल सिविलियंस को अंदर नहीं आने दे रही थीं। ताकि जो लोग हैं फैसिलिटी के अंदर जो वनरेबल लोग हैं वो बीमार न पड़ जाए। ऐसी ही 1 फैसिलिटी में जब मैं पहुंचा तो वो जो होस्पिस था वहाँ पर बड़े सारे लोग थे जिनको चिकित्सक ने हॉस्पिस भेज दिया मतलब कि अब दवा से कुछ भी नहीं हो सकता और जो इनकी बीमारी है वो बहुत रैपिडली प्रोग्रेस कर रही है और अब कुछ ही समय में ये मृत्यु को प्राप्त हो जाएंगे लेकिन इन्हें घर भी नहीं भेज सकते क्योंकि इन्हें कांस्टेंट केयर चाहिए तो इनको फैसिलिटी में रखा हुआ है। उस फैसिलिटी में 1 बच्चा था, उसकी उम्र 9, 10 साल, 8 साल कुछ ऐसी रही होगी छोटा और उसको कैंसर था और कुछ ही समय में वो अपने प्राणों को त्यागने वाला था। अब क्योंकि कोविद का टाइम था, फैसिलिटी के अंदर फैमिलीज अलाउड नहीं थीं। जब उस बच्चे से मेरी बात हुई तो उस बच्चे ने कहा कि जब वो घर जाएगा तो वो अपनी माँ से माफी मांगेगा क्योंकि उसको लग रहा था कि उसने कोई गलत काम किया है और इसलिए उसको पनिशमेंट मिल रही है कि वो बीमार है, पनिशमेंट मिल रही है कि वो अपने परिवार से अलग है, पनिशमेंट मिल रही है कि उसको पीड़ा है लेकिन उसकी माँ उससे मिलने नहीं आ सकती और उसने मुझे कहा कि जब मैं घर जाऊँगा मैं माफी मांगूंगा और मैं 1 बहुत अच्छा बच्चा बनूंगा। उस बच्चे को पता नहीं चला था उसके साथ क्या होने वाला है, वो मृत्यु को जानता नहीं था, वो शिव को जानता नहीं था, वो भारतीय मूल का भी नहीं था लेकिन उसके मन में इतना अभी संस्कार भर रहा था। 1 गिल्ट भरी थी तो जितनी मैं उसकी सहायता कर सकता था। कुछ दिन मैंने उसके साथ वे अतीत की। जब कभी भी मैं फैसिलिटी में था और जितना मैं उसको साधना करा सकता जितना मैं उसको सांस की ओर ले जा सकता मैं लेकर के गया। जितनी 1 बच्चे को 8 ऑफ डाइंग करा सकते है उतनी मैंने उसको कराई ताकि वो अपनी चेतना को थोड़ा ऊपर तो उठा सके और पहले जो 1 बच्चा भयभीत अपने शरीर को त्यागने वाला था कुछ समय बाद शांतचित्त होकर अपने शरीर को त्याग सका। अब वो बच्चा था फेसिलिटी में था तो मैं उसको साधना करवा सका लेकिन वहीं फेसिलिटी के बाहर उसकी माँ भी थी और उसकी माँ को बहुत क्रोध था। उसकी माँ बहुत व्याकुल थी और उसकी माँ कुछ भी नहीं कर सकती थी। क्यों? क्योंकि इतने स्ट्रोंग इतने ड्रेकोनियन लॉज उस समय बना दिए गए थे। वो चाहते हुए भी अपने बच्चे के पास नहीं जा सकती थी और जब उस माँ को पता चला कि उसके बच्चे ने अपने प्राणों को त्याग दिया तो वह माँ बहुत ही ज्यादा व्याकुल हो गयी। अब ये जो बच्चा था। ये अब शरीर में सफर कर रहा था। इसका शरीर बहुत बीमार पड़ चुका था और इसका समय था प्राणों को इसने त्यागना ही था। और इसलिए इस बच्चे को साधना कराकर इस बच्चे की चेतना को उठा कर। जितना हो सका इसको 1 दिव्य मृत्यु महादेव ने प्राप्त कराई और इसने अपने प्राणों को त्याग। लेकिन वहीं जो परिवार है, जो माँ है वो अब इस मृत्यु को नहीं समझ पा रही। अब माँ व्याकुल है, माँ दुखी है। और माँ को भी इस बात को समझना होगा कि अब साधना कर ये बच्चा अपने प्राणों को उठा रहा है। और ये जोते लिंग की ओर बढ़ रहा है। अगर हम किसी से प्यार करते है तो हमारा उद्देश्य क्या होना चाहिए कि उनका भला हो। जब शरीर का बिमार होकर के पता न हो गया तो फिर प्रियजन का भला कब है? कैसे है? प्रियजन का भला मोक्ष में है, शिवमय होने में है, शिव में लीन होने में है। लेकिन जब प्रियजन चला गया तो हम प्रियजन का अच्छा थोड़ी न सोचते। फिर तो हम व्याकूल हो जाते हैं, फिर तो हम दुखी हो जाते, फिर तो हम उस प्रियजन को वापस बुलाते हैं अपने पास। और ये भी नहीं सोचते कहाँ बुला रहे हो। जो शरीर था वो तो तुमने जला दिए और अब उस प्रियजन को बुला रहे हो इस भूलोक पर तुम्हारे बीच तुम्हारे ही घर में क्यों। अब क्या दे सकते हो तुम उसको जब वो अपने सूक्ष्म स्वरूप मर है और शरीर को तुमने बस्म कर दिया और फिर भी बुला रहे हो तो क्या होगा? फिर तुम उनके यातना शरीर का निर्माण करोगे क्यों? क्योंकि अब अपने बीच तुमने उस प्रियजन को बुला लिया और तुम बड़े दुखी हो रहे हो। और वो प्रियजन कुछ कर तो सकता नहीं। तुम सोचो 1 तो पहले ही मुझे इतनी मुश्किल 1 छोटा सा बच्चा जिसको मृत्यु की समझ नहीं और उसको किसी न किसी प्रकार से मृत्यु के द्वार के उस पार मुझे लेकर के जाना है। बड़ी मुश्किल से किसी न किसी तरीके से वो बच्चा। अब महादेव महाकाल की ओर बढ़ रहा
है
और मृत्यु को तुम टाल नहीं सकते। लेकिन जो प्रोसेस है उसको तुम थोड़ा अच्छा और सक्सेसफुल जरूर बना। सके सेम स चाइल। अब अगर 9 महीने बच्चा माँ के गर्भ में रह गया तो प्रसव तो होगा ही होगा। यू कैन चेंज दैट पर किस जगह पर प्रसव हो रहा है, किन वैरिएबल्स के साथ प्रसव हो रहा है वो उस प्रोसेस पर प्रभाव जरूर डाल सकता है। अगर 1 स्टेराइल अच्छी एनवायरमेंट में क्लिनिकल सेटिंग में प्रसव हो रहा है तो बच्चे ज्यादा स्वस्थ को प्राप्त हो सकता है। वहीं अगर तुम 1 जर्म रिटर्न एनवायरमेंट में प्रसव करोगे। जहां तुम्हारा कोई कंट्रोल नहीं तो तुम बच्चे को बीमारी की ओर धकेल रहे हो, तुम माँ को भी बीमारी की ओर धकेल रहे हो। अब वहीं मैं 1 डिवाइन एनवायरमेंट क्लिनिक में क्रिएट करने की कोशिश कर रहा हूं। ताकि बच्चा अगर मृत्यु को प्राप्त हो रहा है। वो 1 दिव्य मृत्यु को प्राप्त कर सके। और अब जब आत्मा ऊपर उठ रही
है
तो उस बच्चे की माँ को मेरी सहायता करनी चाहिए। हाँ जी, ना जी, लेकिन बच्चे की मां क्या कर रही है, चीख रही है, चिल्ला रही है, बच्चे को वापस बुला रही है। और वो आत्मा अभी तक शिव में लीन नहीं हुई। उस आत्मा का अभी तक अपने परिवार के प्रति मोह है। और अगर तुम दुखी होगे, फिर तुम उस बच्चे को बुला रहे हो, खींच रहे हो अपनी तरफ। वो जा रहा था, प्रकाश में उ जा रहा था। शिव में लीन होने। और अगर तुम कहते हो कि तुम प्यार करते हो, तो तुम्हें तो उन्हें मुक्त कर देना चाहिए था, तुम्हें तो अनकंडीशनल होना चाहिए था, लेकिन तुमने क्या किया? तुम रोए गाय, तो तुमने आत्मा को बुला लिया, अब तुम दुखी हो। और वो बेचारी आत्मा जो तुमसे प्रेम करते है, वो बच्चा जो मृत्यु नहीं समझ पा रहा। अब यह नहीं समझ पा रहा कि मैं अपनी माँ को चुप कैसे करा? और अब वो भी व्याकुल है, तुम व्याकुल हो तो वो भी व्याकुल है। और दुख की बात तो ये होगी कि कुछ समय बाद शायद तुम अपने दुख से आगे बढ़ जाओगे। क्यों? क्योंकि तुम जीवित हो, तुम अपने जीवन में आगे लग जाओगे, तुम्हारे को और चिंताएं आ जाएंगी, तुम अपना मन, फिर शांत कर, लोगे मजे की ओर, फिर बढ़ जाओगे। क्यों? क्योंकि तुम जीवित हो। लेकिन अब सोचो उस आत्मा का क्या जिसको तुमने अटका लिया और फिर तुम बूढ़े हो जाओगे, फिर तुम मृत्यु को प्राप्त होगे। और सोचो उस आत्मा का क्या जिसको तुमने अटका लिया। ऐसी न जाने कितनी आत्माएँ हैं, कितने प्रियजन हैं जो तुम अपने परिवार के साथ जोड़ लेते। 1 परम शुभ भक्त भागीरत की कथा है कि उनका 1 एंसेस्टर था, महाराज सागर और उस पूर्वज ने अश्वमेग यज्ञ कराया, इंद्र ने अश्व में यज्ञ का घोड़ा चुराया और पाताल में कपिल महार्शी साधना कर रहे थे, घोड़े को वहाँ पर ले जाकर बांध दिया। महाराज सागर और उसका परिवार पहुंचा, घोड़ा छुड़ाने, और उन्होंने कपिल महार्शी का आदर नहीं किया। और साधु में इतनी शक्ति थी, इतना तप था, इतना तेज था। जब उनका निरादर हुआ, उन्होंने आँखें खोली और उसी क्षण सागर और पूरा परिवार भस्म हो गया, भस्म हो गया, शरीर की मृत्यु हो गई, लेकिन आत्मा उसी स्थान पर अटक गई, चेतना उसी स्थान पर। और अब मुक्ति नहीं, कई पीड़ियाँ चली
गईं
और सागर और उसके परिवार को मुक्ति नहीं मिली। फिर उन्हीं के वंश में भागीरथ ने जन्म लिया। और जब भागीरथ को पता चला कि मेरे भी एनसेस्टर्स अटके हुए हैं, इसी भूलोक पर। अब मुझे साधना करनी है उन एनसेस्टर्स को मुक्ति प्रदान करने के लिए। और भागीरत ने बहुत तप किया, तप किया जिससे गंगा पृथ्वी पर आ सके, तप किया जिससे महादेव प्रसन्न हो सके। और फिर जब गंगा का प्रवाह उसकी ओर बढ़ा तो भागीरत चलता हुआ गया और उसके पीछे भगवान शिव शिवा की शक्ति चलती हुई गई और वो स्थान पर पहुँचा जिस स्थान पर उसके एनसेस्टर्स भस्म हुए थे। जब वो पहुंचा तो महादेव की शक्ति उसके पीछे पीछे पहुँची और उसके सभी एनसेस्टर्स को मुक्ति प्राप्त हुई। ये कथा हमें ये दिखाती है कि सबसे पहले तो जिस परिवार में हम जन्मे हैं, उस परिवार का जो एथिक डेट है, उस डेट को हम इन्हेरिट करते हैं। कहने का मतलब कि अगर हमारे एनसेस्टर्स हैं, जिनको मुक्ति नहीं हो, उनके दुःख का हम पर प्रभाव पड़ेगा। अब इसको तुम चाहे स्पिचुली एक्सेप्ट करो या तुम इसको बायोलॉजिकली एक्सेप्ट करो। बायलॉजिकली भी अगर तुम्हारे एनसेस्टर्स को मेंटल हेल्थ डिसॉर्डर्स हैं, तो तुम्हे वैज्ञानिक बोलेंगे there is a hai probability, you will in her it, then अगर तुम्हारे एनसेस्टर्स को फिजियोलॉजिकल डिसॉर्डर्स हैं, तो फिर तुम्हे डॉक्टर्स बोलेगा family हिस्ट्री, there is a hai chans you will inherit। चाहे तुम फिजोलॉजिकल बात करो, चाहे, तुम साइकोलॉजिकल बात करो, चाहे तुम स्पीरिचुअल बात करो, यू आर गोइंग टू इनहेरिट द डेट ऑफ योर फैमिली। और जब तुम पैदा हुए तो तुम तो कह सकते हो कि भैया, मैं तो बहुत अच्छा हूँ, मैंने तो जीवन में कभी कुछ बुरा किया ही नहीं, मेरे साथ क्यों, इतना सब कुछ होता है इसलिए बिकाज यू inherited डेट। और अब जब हम इतना सब कुछ इन्हेरिट कर लेते हैं तो हमें समझना होगा। जिस प्रकार से भागीरत ने साधना की, जिससे वो स्वयं को मुक्त कर सका, हमें भी शिव की साधना करनी होगी, हमे भी महादेव के संजीवनी शक्ति का आह्वाहन सीखना होगा। क्योंकि जब 1 शिव योगी साधना करता है तो जिस प्रकार से भागीरथ के पीछे पीछे गंगा चलती है, उस शिव योगी के साथ साथ भी भगवान शिव शिवा की शक्ति चलती है। और फिर जब शिव योगी अपने अंतरमन में डुबकी मारता है तो ये शक्ति भी उसके साथ डुपकी मारती। और अगर कोई अनरिजर्वड एनर्जी है, अगर कोई अटका हुआ एंसेस्टर है, उसको उस कण मुक्ति मिलती है। हर हर महादेव इसलिए हमें साधना करनी है। ताकि 1 जो पुराना डेफ्ट है, जो पुराना हम अपने साथ लेकर के चल रहे हैं, हम उससे स्वयं को मुक्त कर, सके औ और हमें साधना करनी
है
ताकि हम नया डेट क्रिएट न
करें,
हमें साधना इसलिए भी करनी है क्योंकि जिनको हम प्रेम करते हैं, कभी न कभी वो भी महाकाल के साथ आगे बढ़ेंगे, कभी न कभी वो भी शिव में लीन हो जाएंगे, कभी न कभी वो भी मृत्यु को प्राप्त करेंगे। और उस समय या तो हम उनकी मृत्यु में सहायता कर सकते हैं ताकि वो मोक्ष मार्ग की ओर अग्रसर हो। और या तो हम उन्हें पीछे खींच सकते हैं और उन्हें यातना शरीर में इस लोक पर बैठा दे। तो अब तुम बताओ जो जाने वाला है, या जो चला गया तुम उसकी मुक्ति का कारण बनना चाहते हो, या तुम उसके पतन का कारण बनना चाहत। तब तुम्हें अपने आप से सवाल पूछना है। do i love them? and if i love them, then i must be able to let them, go, do i love them, what does love me? अब सेल्फिश थोड़ी होना है कि तुम कहाँ चले गए? तुम्हें तो कुछ समय और बैठना था सेल्फिश, तो हो 40 साल के घोड़े हो गए हो। और अब तुम्हारी माँ शिव की ओर बढ़ रही है। और तुम रोक रहे हो अपनी माँ को और कह रहे हो माँ, अभी तो रुक, मैं तैयार नहीं, कुछ और साल मेरी माँ बन जाए। तेरा समय आ चुका है, लेकिन मैं तैयार नहीं। मैं तुझे यहाँ बिठाना चाहता हूँ, जॉम्बी बना कर के क्यों, क्योंकि मुझे कुछ समय और अपनी माँ चाहिए। इस दिस नोट सेल्फिश, इफ यू लव लर्न टू लेट गो माँ। मैं तेरा धन्यवाद करता। मैं जो कुछ हूँ, जितना हूँ, तुम्हारी वजह से हूं। लेकिन अब तुम्हें आगे बढ़ना है। मैं तुम्हारे को धन्यवाद करता हूँ। और क्योंकि मैं तुमसे प्रेम करता हूँ। आज मैं तुम्हें हर रिश्ते, हर बंधन, हर रण से मुक्त करता हूँ। अब तुम भी शिवमय हो। अब तुम भी शिवमय लीन हो। अब मैं साधना करता हूं। और इस साधना में मैं तुम्हारी असेंशन के लिए प्रार्थना करता हूं। मैं आवाहन करता हूँ महादेव के ज्योति लिंग स्वरूप का, और है शिव शिवा। जिस प्रकार से मैंने आज तक तुम पर बिल्व पत्र, चढ़ाया जल चढ़ाया। आज मैं अपनी माँ भी तुमको प्रदान करता। आज मेरी माँ भी शिवमय हो। और माना ये कठिन है, ये कठिन है। जब जो गया उसका समय नहीं था। लेकिन याद रखना, भाग्य शिव के हाथ में है। अब तो वो चले गए। अब सवाल ये होना चाहिए जो गया मैं उसकी सहायता कैसे कर सकता हूँ? जब जब तुम साधना करोगे, तुम्हारी साधना का। 1 अंश तुम्हारे पितरों के पास पहुँचेगा, जो चला गया, उसके पास पहुँचेगा। और ये साधना का अंश उनकी मुक्ति में उनकी सहायता करेगा। इसलिए तुम्हे साधना में आगे बढ़ना है। 1 जो पुराना रण है, जिस रण के बारे में तुम्हे पता ही नहीं, क्योंकि तुम पैदा हो गए। यह सारा रण तुम पर आ गया। भागीरत की कोई गलती नहीं, लेकिन साथ घर के घर में पैदा हो। इसलिए तुम्हे साधना करनी है कि जो पुराना है तुम उससे स्वयं को और अपने परिवार को मुक्त कर सको। और दूसरा तुम्हें साधना करनी ताकि तुम्हारी साधना से जो आत्मा जाने वाली है, वो भी मुक्ति को प्राप्त कर सके। इट इज वेरी important वी ब्रिंग असेंशन इन our लाइफ। और इसलिए तुम्हें अपने आप को भी हील करना होगा। मुझे उस बच्चे की सहायता में कम समय लगा। वो बच्चा जो माँ पीछे छोड़ गया, रोती चीखती चिल्लाती। मुझे उसकी सहायता में ज्यादा समय लगा, उसको समझाने में समय लगा कि देखो, तुम अपने बच्चे को प्रेम करते हो। और प्रेम का केवल यह मतलब नहीं कि तुम पकड़ के बैठ जाओ। अब प्रेम का मतलब है लेट देम गो और तुम्हारे पास रहेंगे। तो न जाने तुम उन्हें कितना सुख। 2 कितना दुख। 2 शिव के पास रहेंगे तो केवल सुख है, केवल शांति है। और अब वो शिव के पास जा सकते हैं। तो तुम क्यों पकड़ के बैठते हो? लेट गो और हमेशा हमारे में होता है हीलिंग प्रोसेस हमारे हाथ में होत। जब हम छोटे थे, फुटबॉल खेलते थे, तो घुटने छिल जाते थे। और जब घुटने छिल जाते थे, तो घुटने के ऊपर 1 पपड़ी सी जम जाती। और हमारी क्लास में कुछ बच्चे थे, उनके घुटने के ऊपर मोटी पपड़ी जम जाती, फिर वो उसे उखाड़ते देखते, फिर वापस पपड़ी लगा देते, पप फिर न जाने क्यों उन्हें क्या अंदर से खुजली होती। फिर वो पपड़ी उखाड़ते देखते, फिर पपड़ी वापस लगा देते। वो अपने ही ऊपर साइंस एक्सपेरिमेंट बायोलॉजी एक्सप करते रहते हैं। और इसी की वजह से उनके घुटने को ठीक होने में महीनों लग जाते हैं। हीलिंग होती नहीं। और वहीं कुछ अच्छे बच्चे भी थे। उनके घुटने पर चोट लगती। पहली चोट पर ही वो पट्टी बांध लेते, देन, दे लेटिट हील। और उनका घुटना ज्यादा जल्दी ठीक हो जाता। अब उसी प्रकार से तुम हो, तुम बदमाश बच्चे भी बन सकते हो। हाँ, तुम्हारे घुटने छिल गए, तुम्हारे जीवन में, कोई चोट आ गई, कोई ट्रोमा आ गया, कोई प्रियजन ने अपना शरीर छोड़ दिया। तो 1 तो है छाती पीटो रोओ। हर बार जब तुम रोते हो, चीखते हो, चिल्लाते हो, भगवान को गाली देते हो, तुम अपनी पकड़ी पकड़ी उखाड़ के देख रहे हो। क्या हुआ तुम्हारे साथ? और जितना हाहाकार मचाओगे, जितना रोओगे चीखोगे चिल्लाओगे उतना, फिर तुम्हारी मेंटल हीलिंग को और समय लगेगा। और जितना तुम हाहाकार मचाओगे। अब तुम ट्रॉमा दे रहे हो अपने से छोटो को, क्योंकि उन्हें लग रहा है कि वो जिस एनवायरमेंट में पढ रहे हैं, बढ़ रहे हैं, वो 1 अनसर्टन एनवायरमेंट है। अनस्टेबल एनवायरमेंट तो खुद। तो तुम ट्रोमेटाइज हुए, खुद का घुटना तो छिलाए, तुमने दूसरे 10 और का भी छील दिया, साथ ही साथ जो आत्मा असेंड होने वाली थी, तुमने उसको भी अटका लिया। अब तुमने अतिरिक आत्माओं के भी घुटने चलने शुरू कर दिए, सोच लो। ये तो 1 बात हुई कि जब दुख आया, रो, चीखो, चिल्लाओ, हाहाकार मचाओ और दूसरा चोट लगी पट्टी। और इस संसार की सबसे शक्तिशाली दवा शिवनाम औशधी
शिवनाम, औशधी ओम नम शिवा।
और जब शुभ नाम सदी ध्यान शिव की ओर लेकर के जाओगे साधना में और गहरे उतरोगे। फिर तुम जो ट्रामा क्रिएट हुआ है, उसको ज्यादा जल्दी ही कर सके। you have the power to give the drama scar yourself, for a long time, and you have the power to help hel yourself। जब अपने आप को हील करोगे शिव से जुड़ोगे, फिर तुम संजीवनी का भी आवाहन कर सकते हो भागीरत के समान। और फिर शिव की शक्ति आएगी। और फिर जो चला गया, तुम उसकी मुक्ति के लिए प्रार्थना करना, कारण बनना। और फिर सभी देवी देवता, तुम्हारे सामने नसमस्तक हो जाएंगे। कि इस माँ ने उस बच्चे को प्रसव भी दिया। और फिर इसी माँ ने उस बच्चे को मुक्ति भी दी और माना किसी मां को कभी भी यह अनुभव न हो, लेकिन अगर महादेव की माया की वजह से तुम्हें अनुभव करना पड़े। अपने प्रियजन की मृत्यु को, तो तुम उनकी मुक्ति का कारण बनना, पतन, का नहीं। तुम उन्हें खींच कर, वापस मत, बुलाना, बल्कि धकेल कर, ज्योति की ओर भेज देना। तुम रोज चीख कर उनको और अपने आप को ट्रोमेटाइज मत करना, बल्कि साधना कर। मृत्यु के प्रोसेस में उनकी सहायता करना। और जितना तुम शिवमय होगे, तुम उनकी मुक्ति का कारण बनोगे। जितना तुम भागीरत के मार्ग पर चलोगे, शिव योग के मार्ग पर चलोगे, उतना, तुम अपने को ऋण मुक्त कर पाओगे, अपने परिवार को ऋण मुक्त कर पाओगे, जितना तुम शिव में लीन होगा। फिर तुम प्रियजन की मुक्ति का कारण बनते हो। और देखो, तुम कितने अच्छे हो। ये मैं तुम्हें इसलिए कह रहा हूँ क्योंकि तुम इतने अच्छे हो। अगर मैं तुम्हें बोलूं साधना अपने लिए करो, शायद तुम ना करो। हमारी भारतीय मां इतनी अच्छी है कि अगर मैं उनको बोलता हूँ, साधना करो, अपने बच्चों के लिए वो जरूर करेगी। अब मैं तुम्हें कह रहा हूँ कि तुम साधना करो अपने एनसेस्टर्स के लिए जो चले गए या जो जाएंगे और तुम देखना, तुम्हारी साधना और पक्की हो जाएगी। बिकाज आल योर लाइफ यू। have lived selflessly let s, continue this titis। शिव महापुराण के आखिरी दिन पर मुझे तुमसे ये बात करनी थी, तुम्हें ये ध्यान सिखाना था और तुम्हें ये कहना था कि मुझे तुम्हारी सहायता चाहिए। तुम्हारे परिवार की मुक्ति की प्रार्थना करने के लिए मैं बहुत खुश हूँ। आप में से कई लोग हर रोज मेरे साथ शिव महापुरान का हिस्सा बने और मैं चाहता हूँ कि ये जो हमने साधना शुरू की है, इस साधना को हम और आगे बढ़ाएं। इसलिए हम 1 अनुष्ठान करेंगे, 1 हफ्ते का जिसमें रोज मैं आपके साथ श्री ललिता रुद्रम की साधना करूंगा लाइव। लेकिन क्यूंकि ये साधना सोशल मीडिया के लिए नहीं है? ये साधना हम क्लोज जूम पर करेंगे। और आप में से जितने लोगों ने शिवयोग की दिशा ली है, श्री ललिता रुद्रम की दिशा ली है। मैं आप सब से प्रार्थना करता हूं कि इस अनुष्ठान में आप मेरे साथ जुड़े आपको रजिस्टर करना होगा। लेकिन यह aबसोलूटली फ्री है। और दूसरी प्रार्थना आपसे आई थी कि शाम के बजाय अगर हम सुबह सुबह साधना करते तो ट्वेंटी 8 वनडे से हमारा अनुष्ठान शुरू होगा और इस अनुष्ठान में रोज सुबह 7 बजे हम आधा घंटा 7 साधना करेंगे मैं और आप श्री ललिता रुद्रम का पाठ करेंगे। भगवान शिव शिवा का आवाहन करेंगे और अपने परिवार की सुख और शांति के लिए प्रार्थना करेंगे। पहले अनुष्ठान में केवल 5000 लोग भाग ले सकते हैं इसलिए अभी कुछ देर में फेसबुक पर रजिस्ट्रेशन लिंक आ जाएगा। आप जरूर से जरूर रजिस्टर कर लेना। ये फ्री ऑफ कॉस्ट है हर साधक के लिए जिसने दिक्षा ली है आप जुड़ें और मेरे साथ साधना करें। हम सिर्फ परिवार की शांति के लिए प्रार्थना नहीं करेंगे। जो चला गया उसकी मुक्ति के लिए भी हम बहुत साधना करेंगे। भगवान महामृत्युंजय का आवाहन करेंगे और भागीरत समान उस शक्ति को प्रवाहित करेंगे। ताकि जाने अनजाने में जिस किसी को भी इस लोक पर अटका लिया, अब उसे शिव शिवा को अर्पित जब 1 शिवयोगी के साथ रोज साधना करोगे और देखो ये मौका कहाँ मिलेगा तुम तुम शिविर। में आते हो, कुछ समय साधना करते हो, कहते हो मजा आ गया भैया आप 1 बार फिर मैं तो कह रहा हूँ मैं तुम्हारे साथ रोज साधना करने को तैयार हूँ। 1 हफ्ते के अनुष्ठान से शुरू करते और करते करते 5000 7 को को हर हफ्ता मैं अपने साथ साधना कराऊंगा। पहला अनुष्ठान ट्वेंटी 1 अगस्त, वनडे से शुरू होगा। जल्दी रजिस्टर करना क्योंकि हमारे पास जो लिंक है उसकी लिमिट फाइव थाउसंड है ठीक है और अगर रजिस्टर करते हो तो आना जरूर क्यों क्योंकि आपने रजिस्टर तो कर लिया, लाइन में किसी का स्थान तो ले लिया और फिर नहीं आए या अनुष्ठान में आलस कर लिया तो सोचो आपने किसी और की मुक्ति किसी और की साधना में बाधा डाली ऐसे असुर मत बनना प्रिय। सोच समझ के आप आना हीलिंग के लिए आना और हीलिंग के 2 उद्देश्य होते हैं शक्ति को प्राप्त करना और नकारात्मक की आहूति देना। हम इन दोनों को सिद्ध करेंगे। ठीक है ब्लेस आप सब को आप सब के भीतर बैठे भगवान शिव शिवा को मेरा प्रणाम बहुत बहुत धन्यवाद आप सबका इस दिव्य शिव महापुराण का हिस्सा बनने के लिए और अगर 1 बात इस हफ्ते भर की कथा से घर ले जा सकते हो तो ये लेकर के जाना मैं शिव शिवा को प्रेम करता हूँ, स्वीकार करता हूँ, धन्यवाद करता हूँ हर हर महा देव जाने से पहले 2 काम करना, पहला वीडियो को लाइक करो और शेयर करो और दूसरा काम सब शिवयोगियों को बता। 2 कि भैया रोज सुबह हम सब के साथ साधना करने वाले हैं, पाठ करने वाले हैं। सोचो अगर 5000 शिवयोगी दुनिया जहान में रोज साथ बैठकर श्री ललिता रुद्रम का पाठ करेंगे तो हम अपने परिवार को, अपने देश का, इस दुनिया की हीलिंग के लिए क्या क्या कर सकते help me hel हेल्प मी हील योर फैमिली, हेल्प मी हील योर कंट्री, हेल्प मी क्रिएट हीलिंग ऑल अराउंड यू तुम भागीरत हो और तुम्हारे ही माध्यम से शिव की गंगा प्रवाहित होगी ब्लेस्यूआज के लिए इतना ही आप सबको आप सब के भीतर स्थित भगवान शिव शिवा को मेरा प्रणाम नम शिवाय।










