This transcript presents the first episode of a guided sleep meditation series titled “The Sleeping Duty Meditation”. Two voices (Speaker A and Speaker B) alternate, delivering a devotional instruction that introduces a seven‑day sadhana (spiritual practice) centered on sleep. The guru, described as the speaker’s teacher, imparts secret knowledge and promises that through proper relaxation the practitioner can awaken innate healing powers, divine consciousness, and manifest health, prosperity, and spiritual insight. The meditation walks the listener through a progressive body‑relaxation sequence—starting from the face, moving down the neck, chest, abdomen, limbs, and finally to each atomic particle—while repeatedly invoking the guru’s divine energy (Guru‑Mandal) and affirming the presence of a universal seed within each cell. Breath is used as a conduit for the guru’s light, and negative elements are expelled with exhalation. The practice emphasizes acceptance of inner divinity, chanting of invocations to Shiva and the guru, and visualizing the transformation of a seed into a tree as a metaphor for personal cosmic potential. The tone is reverent, instructional, and highly enthusiastic, promising that the practitioner will experience profound inner awakening, health, and spiritual visions during the ensuing sleep state.
Chapters
मैं कब धूत का बेटा हूँ और मेरे गुरु ने बहुत समय लगा। कर बहुत प्रेम से मुझे बहुत सारे रहस्य सिखाए थे, मुझे बहुत ज्ञान प्रदान किया था। और यह मेरा धर्म बनता है कि
जो ज्ञान मेरे गुरु ने मुझे सहज
ही प्रदान कर दिया।
मैं वो सारा ज्ञान बांटूं उन सभी लोगों में जो मेरे पिता को अपना
गुरु कहते हैं,
अगले 7 दिनों में मैं तुम्हें साधना सिखाऊंगा, 1 सादना जो तुम्हारी सहायता करेगी खुद को जागृत करने के लिए। 1 सादना जो मेरे गुरु ने मुझे
सिखाई थी,
क्योंकि मेरे गुरु ने मुझे btaya slip is one of the most important processes given to man by god इन द प्रोसेस ऑफ स्लीप a man has the power and potential to heal himself completely, if a man truly learns to relax hes activating all his inr healing potensial। अगले 7 दिनों में मैं तुमको सिखाऊंगा किस प्रकार से अपने भीतर की इन क्षमताओं को जागृत करना है, वैसे ही
जैसे मेरे गुरु ने मुझे सिखाया था।
जब तुम रात को सोने बैठो,
तो
ये साधना वो आखिरी अवस्था होनी चाहिए, वो आखिरी प्रक्रिया होनी चाहिए, जो तुम अनुभव करो, अपना फ़ोन, अपना टीवी, अपना सब कुछ तुम छोड़ देना लेट दिस मेडिटेशन वि लास। thing that you do before you go to sleep and all the people, who are listening to me right now।
i want to congratulate you
i want you to understand the assam power of my guru। i want you to understand this epic journey in, which you are about to abakan i want to congratulate you on all the medicals that are about to
happen in your life।
अगर बीच पर पानी पड़ता है, तो
बीज भी वृक्ष बन जाता है।
तुम्हारे भीतर अनंत की क्षमता है औ। और जब मेरे गुरु की शक्तियां तुम्हारे भीतर प्रवाहित होंगी, तो तुम्हारे भीतर भी बहुत दिव्यता जागृत होगी, बहुत स्वस्थ, बहुत संपन्नता, तुम्हारे जीवन में जागृत होगी सो। for all the medical that are about to happen। इन योर लाइफ फॉर आल द मेडिकल स दैट यू आर आबा manifest i
congratulated you
let a started this churme, let s you imashi।
ज से तुम 1 नई यात्रा की शुरुआत करने वाले हो। ये यात्रा तुम्हें तुम्हारे ही भीतर लेकर के जाएगी। यह यात्रा तुम्हारे लिए बहुत कीमती है। क्योंकि इस यात्रा को पूर्ण करते समय तुम उन सभी सिद्धों से मिलोगे जो तुमसे बहुत प्रेम करते है। ये सिद्ध हमेशा से तुम्हारे साथ है। ये सिद्ध हमेशा से तुम्हारे लिए साधना कर रहे। मैं तुम्हारे भीतर की क्षमता को जागृत करना चाहता हूँ, जिससे तुम इन सभी सिद्धों के प्रेम को अनुभव कर सको। तुम इन सभी सिद्धों के प्रेम को जान सको, स्वीकार कर सको। इस यात्रा की शुरुआत से पहले तुम बिल्कुल शांत हो के लेट जाना, अपने शरीर को बिल्कुल ढीला छोड़। 2 तुम्हारा ध्यान तुम्हारे चेहरे की ओर तुम आदेश देना। अपने चेहरे को बिल्कुल शांत हो जाओ। तुम्हारा ध्यान तुम्हारी गर्दन की ओर तुम आदेश। 2 अपनी गर्दन को बिल्कुल शांत हो जाओ। तुम्हारा ध्यान तुम्हारी छाती, तुम्हारे पेट की ओर। तुम आदेश तो बिल्कुल शांत हो जाओ। तुम्हारा ध्यान तुम्हारी पेट की ओर बिल्कुल शांत हो जाओ। तुम्हारा ध्यान, तुम्हारे दोनों हाथ, दोनों पैर और आदेश बिल्कुल शांत हो जाओ। तुम अपना ध्यान अपने शरीर के 1 कण की ओर लेकर के जाना और इससे पहले तुम इस यात्रा को प्रारंभ करो। तुम पहले स्वीकार करना। तुम स्वीकार करो उस दिव्यता को जो तुम्हारे कण कण में विराजमान है। तुम स्वीकार करो उस शिव तत्व को जो तुम्हारे कण कण में विराजमान है। तुम इस बात को समझना। जैसे 1 बीज वृक्ष से उत्पन्न हुआ उसी वृक्ष को फिर जन्म देता है। उसी प्रकार से तुम ब्रह्मांड के बीज हो। तुम्हारे भीतर ब्रह्मांड के अनंत शक्तियाँ विराजमान हैं। आज से हम इन सभी शक्तियों को जागृत करेंगे। हम तुम्हारे भीतर की दिव्यता को जागृत करेंगे। लेकिन सबसे पहले तुम्हें स्वीकार करना होगा। मैं अपने कनकन के भीतर की दिव्यता को स्वीकार करता हूँ, जागरत करता हूँ, प्रणाम करता हूँ तुम उस चेतना को अपने सर से लेकर पांव तक प्रवाहित होने 21 बहुत सरल सभा, मैं अपने भीतर की सभी शक्तियों को स्वीकार करता हूँ, जागृत करता हूँ, प्रणाम करता तुम पाओगे। तुम्हारा शरीर 1 ही साथ शांत एवं जागृत होना शुरू कर देगा। तुम्हारे विचार बिल्कुल शांत होंगे, लेकिन तुम्हारा कण कण स्तविता को प्राप्त करने के लिए जागरतअब। अपना ध्यान लेकर के जाना। सभी सिद्धों की ओर। तुम्हारे गुरु मंडल की ओर। तुम्हारे गुरुदेव की और आज प्रार्थना करो अपने गुरु से। हे गुरुमंडल, मैं आज से अपने जीवन को बदलना चाहता हूँ। मेरा शरीर सनंत से उत्पन्न हुआ। आज मैं 1 बार फिर इस अनंत से बदलाव को उत्पन्न करना चाहता हूँ। हे गुरुमंडल, मुझे अपनी दिव्य शक्ति प्रदान करे, मुझे दिशा प्रदान करे। मैं आज बिल्कुल तैयार हूँ, क्योंकि अगर बदलना ही है, बदलता ही रहूंगा। अगर प्रकृति में इकलौती स्थायी वस्तु है बदलाव। हे गुरुमंडल। आज आपके तेज से मेरे हर कण, हर कण को शिवमय होने 2 मैं स्वयं को पूर्ण समर्पित करता हूँ। मैं आज बदलने के लिए तैयार हूँ। मैं आपकी दिव्यता को प्राप्त करने के लिए तैयार हूँ और तुम अनुभव करना। जैसे जैसे तुम आवाहन करते हो, तुम और गहरे अपने भीतर उतरते जा रहे हो। जैसे जैसे तुम आवाहन करत मानो। 1 बार फिर तुम शक्ति के गर्भ में विराज मान। अपने चारों ओर महसूस करना अपने गुरु के प्रेम को और अब गहरी सांस भीतर लेना, मानो। तुम स्वांस को नहीं, अपने गुरु के तेज को अपने भीतर ले जा रहे हो और पूरी सांस बाहर निकाला मानो। तुम स्वांस को नहीं, बल्कि अपने भीतर के सभी नकारात्मक तत्वों को त्याग रहे हो। तुम पूरी सांस लेना। जैसे 1 बालक अपने पिता की उँगली को थाम के न जाने कहाँ कहाँ चल देता है, वैसे ही आज अपने गुरु की शक्तियों को तुम पूर्ण समर्पण कर देना। इस दिव्य निद्रा में तुम अनुभव करना। ये शक्तियाँ तुम्हें न जाने कौन कौन से दिव्य लोक के दर्शन करवाएंगे।
मानो।
ये शक्तियाँ तुम्हें निद्रा में नहीं, बल्कि ध्यान की। 1 ऐसी अवस्था में ले जा रही है, जहाँ तुम्हारा हर कण, हर कण शिवमय हो रहा है। स्वास्थ भी सनंत से ही उत्पन्न होता है, सफलता भी सनंत से ही उत्पन्न होती है। जो कुछ भी तुम देखते हो, इस सनंत से ही उत्पन्न हुआ। और आज तुम्हारे गुरु के तेज से तुम जो कुछ भी चाहते हो, तुम्हारे भीतर जागरत होगा। जैसे जल पडने पर 1 बीज वृक्ष में परिवर्तित होता है। आज मैं तुम्हारे कण कण में आवाहन करता हूँ। मेरे गुरु के तप का, मेरे गुरु के तेज का, मेरे गुरु की साधना का, तुम्हारा कण कण आज जागृत होगा। गहरी सांस भी अपने शरीर को बिलकुल हल्का होने 2 तुम इस दिव्यता के पुत्र हो। और आज तुम्हारे गुरु के तेज से तुम्हारे जीवन में सुख संपन्नता दिव्यता उत्पन्न होगी। तुम स्वीकार करना, शिव, अनंत, शिव, कृपा, अनंता, तुम स्वीकार करना उस दिव्यता को जो तुम्हारे कण कण में प्रवाहित है, और जैसे जैसे और शांत होते हो, धन्यवाद करना गुरुमंडल का उन सभी चमत्कारों के लिए जो आज से तुम्हारे जीवन में उत्पन्न होंगे। धन्यवाद करना गुरुमंडल का इस जीवन के लिए, जिसमें तुम न जाने कितने चमत्कारों को अनुभव करोगे। धन्यवाद करना गुरुमंडल का इस निद्रा के लिए, जिसको तुम अब अनुभव करने वाले हो, धन्यवाद गुरुमंडल का उस शांति के लिए, सुख के लिए जो अब मेरे कण कण में प्रवाहित है, मैं अपने भीतर जाने के लिए तैयार हूँ। हे गुरुदेव, मेरी उंगली थाम के मुझे ले चलो, और गहरा, और भीतर। मैं इस यात्रा के लिए तैयार हूँ, और गहरे और भी मैं तैयार हूँ, उन सभी अनुभवों के लिए जो मेरे गुरु मेरे जीवन में उत्पन्न करना चाहते है। और गहरे और भीत इस अवस्था को अनुभव करते हुए, अपने गुरु के हाथ को थामते हुए, इन दिव्य शक्तियों का आवाहन करते हो। तुम और गहरे उतर जाना, और तुम पाओगे शिक्षण, तुम्हारी आंखें खुलेंगी, तुम्हारा हर कण पूर्णता शिवमय हो चुका होगा। धन्यवाद नमश्वाय।