In this Hindi‑language guided meditation, the facilitator (Ishan Shivanand) leads listeners through a step‑by‑step practice that prepares the body as a sacred vessel, uses deep, rhythmic breathing to circulate divine energy from the crown of the head to the toes and back, visualizes the flow of that energy as water clearing blockages, and repeatedly invokes Lord Shiva’s various aspects (peace, strength, love, health, success). The meditation emphasizes the concept of each of the listener’s "11 particles/parts" (chakras) opening to receive divine light, and repeatedly affirms that every moment, every particle becomes "Shivamaya" (filled with Shiva). The session concludes with gratitude to Shiva, a declaration of acceptance of all divine powers, and the mantra “Nam Shivāy”. The overall purpose is to deepen the practitioner’s connection to the divine, cleanse energetic blockages, and embed a lasting sense of Shiv‑infused vitality.
Chapters
बिल्कुल शांत हो जाओ। अपने शरीर को बिल्कुल ढीला छोड़। 2 तुम्हारा ध्यान, तुम्हारे पूरे शरीर की ओर, और आज अपने शरीर को तुम तैयार करना। जैसे भोजन से पहले तुम 1 पात्र को तैयार करते हो, तुम उस पात्र को बिल्कुल साफ कर देते हो। उसी प्रकार से आज जब तुम्हारा शरीर तुम्हारे शिव, तुम्हारे गुरु की दिव्यता को प्राप्त करने वाला है। सबसे पहले तुम अपने शरीर को तैयार करना। तुम्हारा ध्यान, तुम्हारे सर से लेकर तुम्हारे पार तक, तुम पूरी साँस को खींच ना मानो। तुम्हारी सास तुम्हारे कपाल से तुम्हारे भीतर प्रवेश कर रही। और जैसे जैसे अपनी स्वांस को खींचो अनुभव करो, तुम्हारी स्वास ऊर्जा स्वरूप में तुम्हारे पैरों के अंगूठों तक प्रवाहित। और जब तुम सांस निकालते हो, 1 बार फिर अनुभव करना। तुम्हारी स्वास ऊपर उठते हो, पैरों के अंगूठों से 1 बार फिर कपाल तक और कपाल से 1 बार फिर विसर्जित पूरी श्वास की चो और तुम्हारी स्वास सूरजा स्वरूप में सर से लेकर पाँव तक, फिर पाँव से लेके। ऊपर कपाल तक। जिस प्रकार से बहता पानी अपने रास्ते की हर रुकावट को बहा के ले जाता है। अनुभव करो। अगर तुम्हारे बीच में तुम्हारे शरीर में कहीं कोई भी ऊर्जा रुकी हुई है। तुम्हारी स्वास उस ऊर्जा को 1 बार फिर प्रवाहित करते हो, मानो तुम्हारा शरीर दिव्य कृपा को पाने के लिए बिल्कुल तैयार स्वास को और गहरा कर। 2 जितना गहरा तुम कर सकते हो तुम्हारा ध्यान, तुम्हारे शरीर की ओर, तुम्हारे विचारों की ओर, तुम दृष्टा भाव रखना। हर लहर सागर से ही तो उत्पन्न होती है, और हर लहर उस सागर में लीन हो जाती है। तुम्हारा हर विचार तुम्हारे भीतर के अनंत से उत्पन्न हुआ है। और तुम्हारा हर विचार उस अनंत में लौट जाएगा। तुम केवल अपने विचारों के साथ बहना और गहरे, और भीतर तुम्हारी सांस चलती रहे। हो सकता है तुम इतने गहरे उतर जाओगे कि तुम्हारे मन को मेरी आवाज सुनाई देना बंद हो जाए। लेकिन तुम गहरे उतरते रहना। तुम्हारे हृदय तक मेरी आवाज पहुँच रही है, तुम्हारे अंतर्मन तक मेरी शक्ति पहुँच रही है। मैं तो चाहता हूँ, तुम गहरे उतरो। इसलिए जो कुछ भी हो, ठीक तुम केवल अनुभव करना। जैसे बालक सब कुछ अनुभव करता है। देखते ही देखते बालक का शरीर बदल जाता है, उसके विचार बदल जाते है। उसी प्रकार से आज जब मैं शक्ति का आवाहन करूँगा, आज जब तुम इस शक्ति को ग्रहण करोगे, तुम्हारा कंकन भी बदलना शुरू हो जायेगा, बिल्कुल द्रष्टा भाव, जो कुछ हो, तुम होने देना। तुम केवल 1 धारना को पकड़ के बैठना, तुम केवल 1 बात को समझना। आज तुम्हारा हर छण, हर कण शिवमय हो रहा है। तुम्हारा हर छण, हर कण शिवमय हो रहा है। तुम्हारा हर षण, हर कण शिवमय हो रहा है। तुम आज पूर्ण हो रहे हो और गहरे। और अब, जब तुम्हारा शरीर बिल्कुल शांत, जब तुम्हारे 11 कण के द्वार खुले हैं, जब तुम्हारे शरीर का 11 हिस्सा उस दिव्य ऊर्जा को प्राप्त करने के लिए तैयार है, तुम अपना ध्यान उस निराकार के साकार स्वरूप की ओर लेकर के जाना। हर मनुष्य ने उस अनंत को 1 आकार दिया है। तुम्हारे भीतर भी तुम्हारे भगवान का 1 आकार होगा। वो आकार जो तुम्हें अनंत से जोड़ता है। अपना ध्यान आज अपने भगवान की ओर लेकर के जा और बहुत प्रेम से तुम धारना उत्पन करना। मैं अपने शरीर में, अपने भगवान का स्वास्थ्य स्वरुप में आवाहन करत। मैं अपने कणकण में, अपने भगवान को स्वास्थ स्वरूप में आह्वाहन करता हूँ। जो कुछ भी मेरे आसपास है, सनंत से उत्पन्न हुआ और सनंत में ही लीन हो जाएगा। मैं भी उस सनत से उत्पन्न हुआ। और अगर सब कुछ सनंत से उत्पन्न होता है, तो आज मेरे श शरीर में स्वास्थ उस नंत से उत्पन्न होगा। मैं आवाहन करता हूँ मैं अपने भगवान का ह दिव्य, ऊर्जा स्वरूप में, अपने शरीर के कणकण में आह्वाहन करता हूँ। मैं अपने शिव का शांति स्वरुप में, अपने मन में आवाहन करता हूँ। मैं अपने भगवान, प्रेम स्वरूप में, अपने हृदय में आह्वाहन करता हूँ। मैं अपने महादेव का ताकत स्वरूप में, अपने शरीर में आह्वाहन करता है। मैं उस दिव्यता का अनंत स्वरुप में, अपनी चेतना में, आवाहन करता हूँ। मैं अपने भगवान की सभी शक्तियों का सफलता स्वरूप में, अपने जीवन में आवाहन करता हूँ। तुम्हारी स्वांस भीतर तुम्हारी स्वास पर और तुम्हारी धारणा मानो। तुम आज अपने भीतर स्वास नहीं नो। आज तुम स्वांस के स्वात, अपने भीतर उस परमपिता की दिव्यता को ग्रहण कर रहे हो। तुम भाव उत्पन करो मैं आवाहन करता हूँ अपने शरीर में, अपने पूरे परिवार में, अपने भगवान के सभी दिव्य शक्तियों का। मैं आह्वाहन करता हूँ अपने जीवन में, अपने भगवान के दिव्य प्रकाश का। मैं अपने कण कण में आवाहन करता हूँ। मेरे शुभ के दिव्य ज्ञान का। मैं आवाहन करता हूँ अपने कंकण में शिव तत्व का मानव आज तुम बदल रहे हो। तुम धारना उत्पन्न करना, हर षण, हर कण शुभमय हो रहा है। तुम इस बात को समझना सामान्य ऊर्जा, अपनी ओर सामान्य ऊर्जा आकर्षित करती है। आज जब तुम अपने भीतर अपने भगवान का आवाहन करते हो, इस प्रकृति में जो भी दिव्य है, आज से तुम्हारी ओर आकर्षित होगा। अनंत का प्रेम, अनंत की शक्तियाँ, अनंत, सफलता, दिव्य, भाग्य, सब कुछ, तुम्हारी ओर आकर्षित, सतचित, आनंद, तुम्हारी ओर आकर्षित, तुम भाव उत्पन करो। मैं आवाहन करता हूँ। अगर मुझे स्थापना करनी ही है। मैं अपने कण कण में अपने शुभ की स्थापना करता हूँ। आज से मेरा शरीर 1 दिव्य मंदिर, आज से मेरा कण, कण, शुभ, मैं अगर स्थापना करनी ही है। मैं अपने भगवान की स्थापना अपने शरीर के 11 कण में करता हूँ। आज से हर छण, हर कण शिवमय हो रहा है। और जब मैं ही अनंत हूँ, जब मैं ही दिव्य हूँ, तो मेरे भीतर हर शन व दिव्य प्रकाश प्रवाहित है। मेरे भीतर की शक्ति बढ़ रही है। धन्यवाद। भगवान शिव सेवक, उस तेज के लिए, जिस तेज से मैं अपने जीवन के हर नकारात्मक तत्व को भस्म कर सकता हूँ। धन्यवाद भगवान शिव, शिवा, उन सभी शक्तियों के लिए, जिनके द्वारा मैं अपने भीतर स्वास्थ्य, संपन्नता, सब कुछ उत्पन्न कर सकत। धन्यवाद। भगवान शिव शिवा उस दिव्य भाग्य के लिए, जिसको अनुभव कर मैं पूर्ण संपन्न हो सकत हूँ। धन्यवाद। मेरे भगवान का उन सभी चमत्कारों के लिए जिनको मैं आज से अनुभव करने वाला हूँ, मेरा शरीर, मंदिर और अगर अनंत से उत्पन हुआ है, सब कुछ तो आज उस अनंत से ये दिव्य प्रकाश मेरे भीतर पूर्णता उत्पन्न हो रहा है। मैं इन सभी शक्तियों को स्वीकार करता हूँ। मेरा हर कण, हर कण, शिव मय हो रहा है। नम शिवाय।