The Sleeping Duty Meditation || (Episode 7) || Ishan Shivanand

Ishan Shivanand guides a Hindi meditation on realizing yourself as Brahman, the universal consciousness. You visualize eleven cells within you, each holding a micro-universe, then expand gratitude to Shiva and the lineage of siddhas, blessing all creation with divine grace.
Chapters
बिल्कुल शांत हो जाओ, वह शांति से लेट जाना। गहरी सांस भीतर गहरी सांस बाहर, उन साँस भीतर उन साँस बार तुम धारणा उत्पन्न करना। मैं ही ब्रह्म। मैं ही अनंत। अहम ब्रह्मास्मी शिवोहम शिवोहम। अहम ब्रह्मास् मि। अहम भरमास। मेरे भीतर अनंत समाया है, मेरे भीतर ब्रह्म समाया तुम्हारा ध्यान तुम्हारे 11 कण की, तुम इस बात को समझना। तुम्हारा 11 क ने जीव के समान तुम्हारा 11 सेल, तुम्हारे ही भीतर 1 ब्रह्मांड के समान तुम्हारे 11 सेल में पूरे ब्रह्मांड का ज्ञान समाया धरना उत्पन्न करो। अहम ब्रह्मा स। तुम्हारा ध्यान तुम्हारे भगवान की हो और आज भाव उत्पन्न कर। हे शिव सेवा। मैं आपका धन्यवाद करता हूँ, उ स्वास्थ के लिए, जो मैंने आज तक अनुभव किया, हे शिवसेवा। मैं आपका धन्यवाद करता हूँ, उस स्वास्थ के लिए जिसको मैं आज से अनुभव करने वाला हूँ। तुम अपना ध्यान अपने भगवान की ओर, इस प्रकाश से लेकर के जा मानव, आज तुम उस प्रकाश के सामने खड़े मानो। आज तुम जो कुछ भी मांगोगे, तुम्हें प्राप्त हो जायेगा। मानो आज वो दिव्य घडी है सर्व सिद्धि काल की खरी। आज वो ऐसा समय है जब तुम्हारे भगवान अत्यंत प्रसन्न, तुम्हारे गुरु अत्यंत प्रसन्न और तुम इस बात को जानना। तुम्हारे गुरु तो हर शन तुमसे प्रसन्न है। शायद इसलिए हर जन्म जब तुम लेते हो, तुम्हारे पीछे पीछे तुम्हारे गुरु आ जाते है। जैसे माँ अपने बच्चे के पीछे दौड़ती है तुम्हारे गुरु न जाने कितने जन्मों से तुम्हे उस प्रकाश की ओर ले जाना चाहते। और आज जब तुम स्वयं को प्रकाश में अनुभव करते हो, सबसे पहले तो तुम्हारे गुरु ही खुश होंगे। आज तुम लौट आये। इस प्रकार से अपना ध्यान अपने शिव, अपने गुरु की ओर लेकर के जाना। मानो तुम्हारे गुरु तुम्हारे शिव बहुत ही प्रसन्न तुम पर अपनी कृपा बरसाते और तुम उस प्रकाश के सामने स्थित उस प्रकाश के भीतर। धन्यवाद भगवान शिव शिवाका उस सफलता के लिए जो तुमने आज तक अनुभव की और उस सफलता के लिए जो तुम आज से अनुभव करने वाले हो। धन्यवाद सभी सिद्धों का, उन सभी दिव्य अनुभूतियों के लिए जो तुमने आज तक अनुभव की और वो सभी दिव्य अनुभूतियां जिनको तुम आज से अनुभव करने वाले हो। धन्यवाद तुम्हारे गुरु का, धन्यवाद सभी सिद्धों का, धन्यवाद तुम्हारे भगवान का, उस प्रेम के लिए जो तुमने आज तक अनुभव किया और धन्यवाद उस प्रेम का, तुम्हारे गुरु के, तप से, तुम्हारे गुरु के द, आज से तुम्हारे जीवन में प्रवाहित होगा। धन्यवाद सभी सिद्धोंका उस खुशी के लिए जो तुमने आज तक अनुभव की और धन्यवाद तुम्हारे भगवान, उन सभी खुशियों के लिए जो आज से तुम्हारे जीवन में प्रवाहित हो। धन्यवाद सभी से धों का, तुम्हारे गुरुदेव का, उन सभी चमत्कारों के लिए जो आज तक तुम्हारे जीवन में गठित हो। और धन्यवाद सभी सिद्ध का, उन सभी चमत्कारों के लिए जो आज से तुम्हारे जीवन में गठित होंगे, तुम आज तैयार हो, तुम हमेशा से ही तैयार थे। जिस दिन तुमने पृथ्वी पर जन्म लिया, उसी दिन से तुम तैयार थे। अनंत को प्राप्त करने के लिए। तुमने जन्म की दिव्यता को प्राप्त करने के लिए लिया है और आज जब तुम्हारे गुरु का तेज, तुम्हारे भगवान की कृपा तुम्हारी ओर प्रवाहित होती, तुम इस कृपा को बाँटना, इस कृपा को प्रवाहित होने दे, तुम आज धारणा उत्पन्न करो जो कुछ भी तुम्हें प्राप्त हो रहा है, आज तुम्हारे भीतर से प्रवाहित, सबसे पहले तुम्हारे परिवार के और प्रार्थना करना, उससे जो तुम्हे सब कुछ देने के लिए तैयार है, हे शिव, शिवा है सुधगुरु आपकी सभी दिव्य शक्तियां मेरे परिवार में प्रवाहित, धन्यवाद, सुख के लिए, संपन्नता के लिए, उस दिव्यता के लिए, जो आपकी कृपा के माध्यम से आज से मेरे परिवार में प्रवाहित, हे शिव, शिवा, मेरा पूरा परिवार उस दिव्यता को प्राप्त करे आज, जो मेरे में प्रवाहित है, मेरा पूरा परिवार सुखी हो, धन्य सफल हो, दिव्य अनुभव करो, तुम्हारे भीतर से ये दिव्यता अब पूरी प्रकृति की ओर प्रवाहित और प्रार्थना करो, उससे जो तुम्हे सब कुछ देना चाहता है हे भगवान, हे गुरुदेव, प्रकृति का, हर प्राणी तृप्त हो, हर वृक्ष फलों से लदा हो, हर नदी बहती रहे, हर प्राणी को भरपेट खाना मिले, हर प्राणी में सुख, शांति, दिव्यता प्रवाहित, अगर मेरा कण, कण सुखी हो सकता है, शांत हो, हो सकता है, तो पूरा ब्रह्मांड आपकी दिव्यता को प्राप्त करके बिल्कुल शांत हो सकता है। अहम ब्रह्मास् ने, हे परमपिता है सुधगुरु धन्यवाद सभी प्राणियों को तृप्त करने के लिए, सभी प्राणियों के भीतर सुख और शांति प्रवाहित करने के लिए, तुम्हारा ध्यान पूरे ब्रह्मांड की मैं तुम्हारे हाथ में छोड़ता, तुम्हारा मन, तुम्हे जहाँ भी ले जाए, तुम्हारे भीतर भी वही ब्रह्मांड है, तुम्हारे बाहर भी वही ब्रह्मांड है और आज ध्यान उसकी तरफ जो में सब कुछ प्रदान करना च, चाहता है हे शिव शिवा, हे शुद्ध गुरु आपकी दिव्यता पूरे ब्रह्माण में प्रवाहित हो, शिव, अनंत, शिव, कृपा, अनंता, अनुभव करो, तुम्हारे भीतर, तुम्हारे ही भीतर ये दिव्यता प्रवाह, शिव, नंत, शिव, कृपा, अनंत और भाव उत्पन्न कर धन्यवाद उस दिव्यता के लिए जो ब्रह्माण में प्रवाहित, धन्यवाद उस दिव्यता के लिए, जो आज से इस ब्रह्माण में प्रवाहित होगी, सिर्फ, दृष्टा भाव, रख, अनुभव करो, तुम्हारे भीतर तुम्हारे बाहर ये दिव्य प्रकाश बढ़ता है, और तुम केवल दृष्टा जैसे सूर्य दृष्टा है, इस प्रकृति को देखता हो, उसी प्रकार से तुम्हारा ध्यान, तुम्हारे चारो ओर और अनुभव करना, तुम्हारे भीतर का दिव्य, प्रकाश, चारों और इस शक्ति को प्रवाहित करते हो धन्यवाद सभी सिद्धों का, उन सभी शक्तियों के लिए, जो आज मेरे भीतर प्रवाहित धन्यवाद सभी सिद्धू, उन सभी शक्तियों के लिए, जो आज से मेरे भीतर प्रवाहित, धन्यवाद उन सभी चमत्कारों के लिए, जिनकों में आज से अनुभव करने वाला हूँ, अनुभव करना। तुम गुरु तत्व में लीन, गुरु, तत्व, शुभ, तत्व, मे, लीन, शिव, तत्व अनंत मे, l अहम ब्रहमा, बिल्कुल, शांत, बिल्कुल, शांत, बिल्कुल, शान, तुम्हारे, गुरु, तुम्हारे साथ, तुम्हारे, शिव, तुम्हारे साथ, मैं, तुम्हारे साथ, बिल्कुल, शान और गहरा, और गहरा नम शवा।










