TRANSFORM, PROGRESS and EVOLVE with Shiv Yog | Prati Prasav Sadhna | @IshanShivanand

Shiv Yog teacher Ishan Shivanand argues that without a guru's guidance, you waste effort chasing the wrong goals. True evolution comes through sadhna, a spiritual practice that aligns mind and soul, making happiness independent of external things like phones or temples.
Chapters
अगर आप खुद को नहीं जानते तो लक्ष्य नहीं है। जिस व्यक्ति का लक्ष्य नहीं, उसको हर राह चलता व्यक्ति 1 लक्ष्य प्रदान कर देगा। शिव योग में हम जानते हैं मंत्र मूलम गुरुर, वाक्यम, मुक्ष, मूल गुरु कृपा। जब भगवान हनुमान लंका की ओर बढ़ते चले जा रहे थे, तो कहानी है कि 1 असुर सुरसा उनके सामने आ गए और कहा, मेरे मुँह के भीतर आओ। अब वो भगवान हनुमान थे, लड़ सकते थे। हाँ जी, ना जी बोलो। लेकिन अगर लड़ते समय व्यर्थ गंवाते, फिर सुरसा, कहती? तू रुक में अपने पति को लेकर के आते और लड़ाई होती और धुनाई होती, विचारी मां सीता वेट करती रह जाती। और रामजी भी बोर हो जाते। जब हम जानते थे, हमारा लक्ष्य सीता है। लेकिन उसको समझ नहीं पाया, क्योंकि गुरु नहीं था। और इसलिए रोज सुबह उठते हैं, अखबार पढ़ते हैं, कोई सुरसा देखते है, भिडिया आते हैं, उसके साथ टीवी न्यूज़, चैनल देखते हैं, कोई सुरसा देखते हैं, बिडिया ते हैं स के साथ। और जीवन जलेबी के समान हो जाता है। गोल, गोल, गोल, गोल, गोल, गोल। और शिव योग में बाबा कहता है? यह तुम्हारा लक्ष्य है ही नहीं। तुम्हारा लक्ष्य है, सफलता, तुम्हारा लक्ष्य है, साधना, तुम्हारा लक्ष्य है तुम्हारा परिवार। और जैसे जैसे प्रेम बढ़ता है, वैसे वैसे मंत्र मूलम गुरु, वाक्य, मुक्ष्य मूलम गुरु कृपा। और ऐसा नहीं है। शिव योगी के जीवन में सुरसा नहीं, आती, आती है। लेकिन हम चुपचाप बाय बाय करके निकल जाते हैं। और तुम्हे सुरसा की ज्यादा चिंता नहीं करनी, वो अगली चीज से भर जाएगी। उसका तो प्रकृति में है। भिड़ना शिवयोग, तुम्हें 1 नरेटिव देता है, गुरु, तुम्हें लक्ष्य देता है, 1 मार्ग देता है। नरेटिव के बाद उन वैज्ञानिकों ने कहा, शिवयोग कैसे। 1 व्यक्ति के जीवन में भला करता है। ट्रांसेंडेंस एवोलूशन विकास। हमारे भीतर 1 इच्छा है। प्राकृतिक इच्छा विकास की। हम सब बढ़ना चाहते हैं। पहले से बेहतर होना चाहते, कुछ पाना चाहते। 1 शोध हुआ था कि क्यों आज की तारीख में बच्चों को वीडियो गेम खेलना पसंद है। तुम पाओगे पागल हो रखे हैं। बच्चे विडियो गेम खेलते रहते, पब्जी फोरना, घंटों, घंटे, खाना भी नहीं खाएंगे। वजन का लॉस हो जाएगा, खेलते रहेंगे, खेलते रहेंगे। शोध हुआ। क्यूँ? खेलते है? क्यों? क्योंकि जब आप घंटो, घंटो, गेम खेलते हो, तो जो आपका कैरेक्टर है, उसका विकास हो जाता है। आप उसको नए कपड़े दे सकते हो, नए बंदूकें दे सकते हो। नई डांस मूव्ज है, उसकी। और विकास हो जाएगा। बच्चे इसलिए खेलते हैं, क्योंकि वो विकास उत्पन्न करना चाहते हैं। हर कोई तुम देखोगे कि 1 व्यक्ति शॉपिंग कर रहा है, बार बार, बार बार माल जा रहा है। क्यों? क्योंकि उसको लगता है, विकास हो जाएगा। जब मैं पुराने, फ़ोन से, नया, फ़ोन, खरीदूंगा इट सेन। एवोलूशन। हम भारी विकास कर रहे हैं, अपने आस पास। क्यों? क्योंकि हमारे भीतर 1 विकास की इच्छा है। साधना क्या करती है? इसको 1 डायरेक्शन देती है कि विकास केवल फ़ोन का नहीं होना, विकास केवल विडियो गेम का नहीं होना, विकास केवल घर का नहीं होना। अगर विकास होना है, तो सही मायने में यह भाव प्रकृति ने हमारे भीतर इसलिए डाला था कि अगर विकास होना है, तो हमारे मन का होना है, हमारी सोच का होना है और हमारी आत्मा का होना। और यह विकास केवल तब होता है, जब हम साधना करते हैं आत्मा के विकास का मतलब कि अब माफ़ करना सरल हो गया। अब खुश होना सरल हो गया। अब खुशी के लिए हमें पदार्थ नहीं चाहिए। अब हम बस बैठे हैं। और जो मेरे गुरु ने बताया, हर हाल में खुशी। अब साधना के लिए मंदिर भी नहीं चाहिए। जहाँ तुम बैठो, वहीं ज्योति हो गया। अब कुछ नहीं चाहिए। अब तुम खुद उत्पन्न कर सकते हो, प्रकृति से उत्पन्न कर सकते हो। यही विकास है tooate।










