TUNE your MINDSET to the channel of TRUTH | Ishan Shivanand

Ishan Shivanand explains how consciousness evolves through dimensions: second-dimensional thinking only knows how to pull, third-dimensional thinking discovers pushing, which led to cars and rockets. The fourth dimension transcends both, operating beyond natural laws. Alignment with the cosmos makes you immune to worldly limitations.
Chapters
मैं सिर्फ 1 चीज जानता हूँ कि मेरे शिव से बढ़ के इस ब्रह्माण्ड में कोई और शक्ति नहीं, मेरे शिव से बढ़के इस ब्रह्माण्ड में कोई शक्ति नहीं, मेरे भगवान से बढ़कर इस ब्रह्मांड में कोई शक्ति नहीं। और चाहे असुर कितना भी पराक्रमी हो, चाहे असुर, न जमीन पे भस्म हो सके, न आसमान में, न इंसान से, न जानवर से। मैं जानता हूँ की मेरा भगवान किसी न किसी प्रकार से मुझे मुक्त करेगा, क्यों? क्योंकि हर उत्पत्ति ब्रह्मांड से हुई है। और अगर मैं ब्रह्मांड से जुड़ने की चेष्टा रखता हूँ, अगर मैं ब्रह्मांड से जुड़ता हूँ तो फिर ये सब चीजें मेरे पर कोई प्रभाव नहीं डालत। ये 11 सोच का फर्क है, कांशसनेस का फर्क है, फ्रॉम सेकंड डाइमेंशन तो थर्ड फ्रॉम, थर्ड तो फोर्थ। जब 1 व्यक्ति की सेकेंड डायमेंशनल सोच थी तो वो सिर्फ खींचना जानता था, खींचना इसलिए वो अपने जीवन को भी खींचता था, घोड़ा रत को खींचता था, लेकिन 1 समय 1 आदमी ने कहा जरूर 1 संत रहा होगा, सिद्ध रहा होगा। उस थर्ड डाइमेंशनल में से 1 चिंगारी निकाली, हाइयर डाइमेंशन की। और उसने कहा खींचूं क्यूँ खींचने में मेहनत है क्योँकि जब तक में खींचने में अपनी जिंदगी व्यर्थ गंवाऊंगा, तब तक मैं अपने घोड़े जितना सीमित हूँ। 11 घोड़े मतलब 11 की शक्ति उस 1 व्यक्ति ने पूरी की, पूरी चेतना ही बदल दी, उसने कहा इट इज नौट पुलिंग लेटर, ट्राइ पुशिंग के खींचने से ज्यादा क्यो न मैं धके लू और गाड़ियों का आविष्कार हो गया। अब खींचना सिद्धांत नहीं बचा, धकेलना सिद्धांत हो गया, चेतना पलट गई, चेतना बढ़ गयी। और उसी धकेलने के सिद्धांत पर आज की तारीख में इंसान चाँद पर पहुँच गया। क्योंकि जब तुम 1 स्पेसशिप को देखो तो स्पेस शिप के भीतर जो फ्यूसिलाज जो फ्यूल टैंक्स हैं, उनके भीतर विस्फोट होता है। और वो विस्फोट, वो अग्नि 1 स्पेसशिप को धकेल देती है, ऊँचा जैसे 1 रॉकेट में चिंगारी रॉकेट को धकेल देती है, धकेल देती है हमारे गृतवाकृष्णसे दूर चांद के पास। और ये तभी मुमकिन हुआ। अगर 1 आदमी ने सोचा मैं क्यों खींचने में पड़ा हूँ, अब मैं खेलूंगा। और जहाँ मैंने धकेलना शुरू किया वहाँ अब खींचना, अब्सलूट हो गया। इस अब्सलूट इट इज फिनिश, इट इस डेट, it is bed as a dोdoeकटिnटअबअगर। कोई घोड़े पर चलता है, तुम हँसते हो, उसके ऊपर क्या जरुरत है? अरे भैया और 1 समय पर घोड़े होते थे, लेकिन अब गाड़ियाँ आ गई। हर गाड़ी में 3, 400 हॉर्स पॉवर है, खेलता है, हर 1 स्पेसशिप में न जाने कितने लाखों हॉर्स पॉवर है, धकेलता है। और 1 दिन उस थर्ड डाइमेंशन में भी फोर्थ डाइमेंशन, सोच आएगी और न जाने वो क्या होगी, फिर वो इसे खींचने और धकेलने से भी परे होगी, तेरे गुने, विश्ववेदा, निरयोगशयमहात्मवान, वो तीनों गुणों से परे होगी, कब तक स्टेप खेलते रहोगे और सोच का फर्क है। और मेरे बाबा ने मुझे यही सिखाया मेरे जीवन में कि देखो तुम उन्नति करो क्यूँकि? अगर तुम 1 शिव योगी को देखो तो ऐसा मालूम होता है कि उस पर प्रकृति का कोई नियम, कोई कायदा, कोई कानून लागू ही नहीं है।










