In this Hindi spiritual monologue, the speaker urges listeners to stop seeking divinity outside themselves and to recognize the guru as the inner divine voice that awakens the god within. He cites psychologist Gavin de Becker’s book The Gift of Fear, which studied people who survived accidents versus those who did not. Both groups possessed an inner voice warning of danger, but survivors heeded it while others ignored it. The speaker parallels this with everyday life: the inner voice that prompts us to rise early, exercise, pray, and practice sadhana is often silenced by habits like hitting the snooze button. By dismissing this inner guidance, people miss the guru‑element, the Shiva‑element, that can protect and enlighten them. The talk calls for disciplined listening to this inner voice, aligning daily actions with it, and thereby awakening the inner guru for personal transformation.
Chapters
तुम आसमान की ओर मत देखो दिव्यता के लिए गुरु वो नहीं जो तुम्हे भगवान प्रदान करते, गुरु वो जो तुम्हारे भीतर के भगवान को जागरत करते मनोविज्ञान आज की तारीख में बहुत तर्क वितर्क कर रहा है ध्यान से सुनना, शायद जीवन बदल जाएगा 1 मनोविज्ञानिक है जिसका नाम है गिविन दिवेकर उसने 1 किताब लिखी द गिफ्ट ऑफ फिर और इस किताब में उस मनोविज्ञानिक ने कहा की कई लोग हैं जिनके जीवन में दुर्घटना उत्पन होती है कोई भी दुर्घटना घर में चोरी हो गयी, किसी ने बुरा भला कह दिया, कोई पैसा लूट कर ले गया और इस मनोविज्ञानिक ने बताया इसका शोध बहुत खूबसूरत था इसने शोध किया उन लोगों के ऊपर जिनके जीवन में दुर्घटना घटित हो गयी और उन लोगों के ऊपर जो दुर्घटना से बच कर निकल गए और उसने पाया कि दोनों लोगों के भीतर 1 चीज सामान्य थी और वो थी 1 अंदर की आवाज जो लोग दुर्घटना से बच के निकल गए उनके भीतर भी 1 अंदर की आवाज थी जो उन्हें कह रही थी कि कुछ तो गलत है गो फिलिम आपको कभी आई है किसी से बात कर रहे हो वो बड़ा मुस्कुरा रहा है लेकिन कुछ कुछ दाल में काला लग रहा है कभी लगा है हां जी ना जी कोई लॉजिक नहीं है लेकिन लेकिन लग रहा है गेविन दिवेकर ने पाया कि जो लोग बच के निकल गए उन्होंने अपने अंदर की आवाज को स्वीकार किया और जो लोग फंस गए उनके भीतर भी अन्दर की आवाज थी लेकिन उन्होंने अपने खुद के ज्ञान को, अपने अन्दर की आवाज को नकार दिया जब रोज रात को सोते हो तो तुम्हारे अंदर की आवाज तो होती है न जो तुम्हें कहती है की सुबह जल्दी उठेंगे, थोड़ा व्यायाम करेंगे, थोड़ी प्रणाम करेंगे, थोड़ी सादना करेंगे और जब सुबह अलार्म बचता है तो अंदर की आवाज कहती है वाह वाह अब हम योग करेंगे, प्रणाम करेंगे, साधना करेंगे लेकिन 1 और भीतर अंदर की आवाज होती है हलकट बैठ, सोझा और ज्यादातर लोग क्या करते हैं अंदर की आवाज को कहते हैं चुप बैठ और इन्हीं लोगों ने स्नूज बटन का इजाद किया है हाँ जी नाची और हर 10 मिनट बाद उनकी ऊँगली अब सोते सोते अपने आप हे ऊँगली अपने आप चलती है अन्दर की आवाज को नकारती है तुम्हारे भीतर है न अन्दर की 1 आवाज हजारों लोगो के भीतर है लेकिन तुम्हारे भीतर थोड़ी तेज है इसलिए तुम न जाने कहाँ कहाँ से चल के आज इसके अन्दर बैठे हो क्यूंकि तुम्हारे भीतर 1 आवाज थी जो तुम्हें कह रहे थे जो तुम्हें बचाती है, जो तुम्हें ज्ञान देती है, जो तुम्हें समझाती है वो तुम्हारी आवाज नहीं, वो गुरु तत्व की आवाज़ है वो शिव तत्व की आवाज है वो तुम्हारे भीतर का सेव कह रहा है कि जुडो कहाँ गिरे बैठे हो तुम पहुँचो बनो।