Ishan Shivanand explains how relationships act like heat, melting the hidden beliefs and traumas we carry inside. When discomfort surfaces in a relationship, we blame the other person instead of recognizing the material was already within us. Self-awareness means understanding the source of emotional turbulence is internal, not external.
Chapters
हमारे जीवन में जरूर कोई न कोई घटना होती है, कोई न कोई नायक या खलनायक, आके कुछ दे डालता है। हम तो बड़े अच्छे, नादान लोग है, कोई घटना घटित हुई आप। ऐसा समझो उस आदमी ने कुछ लिया, डाल दिया आपकी बर्फ में और मजे की बात, हमें पता भी नहीं चलता कि हमारी बर्फ में क्या क्या है, पर बैठे हैं, पर बैठे है, पता भी नहीं चलता। जीवन जीते रहते हमें पता कब चलता है। जब हम 1 रिश्ते में प्रवेश करते हैं, जब हमारा 1 व्यक्ति के साथ ट्रांजेक्शनल एनालिसिस होता है, जब हम 1 व्यक्ति के साथ बातचीत करते है और जब कभी भी हम 1 रिलेशनशिप में हैं, उस रिलेशनशिप की फिक्शन में हमारी बर्फ बदलनी शुरू होती है, चाहे कोई भी रिलेशन मालिक और नौकर की भी हो सकती है, पाती और पत्नी की भी हो सकती है, बाप और बेटे की भी हो सकती है। और जैसे जैसे रिलेशनशिप में समय बढ़ता है, हमारी बर्फ पिघलनी शुरू हो जाती है। और जब बर्फ बिगड़ती है तो क्या ऊपर आता है, हमारे खुद के बिलीव सिस्टम, हमारे खुद के ट्रोमा, हमारे खुद का स्ट्रेस फुल वियर, हमारे खुद का पैरानोया, हमारे खुद के डिलिजनलडिसाडर्स और जब बास आती है तो हम सीधा कहते हैं सामने वाले की गलती है, जरूर इसने कुछ किया होगा। हम यह नहीं समझते कि हमारे भीतर ही था।