Wisdom capsule from Goa

A spiritual teacher at a ShivYog retreat in Goa tells newcomers and experienced practitioners that five days of sincere practice can permanently change your life. He argues that real transformation comes from building inner qualities like patience and devotion, not acquiring external powers or material things. A young man from Haryana turned his meditation into a social-service career, showing how inner work naturally creates a fulfilled life.
Chapters
मैं आप सब को, आप सब के भीतर को के भगवान को प्रणाम करता हूँ, आप सब का दे दिल से स्वागत करता हूँ और आप सब को धन्यवाद करता हूँ कि इस मार्ग पर अब आप चल रहे हो। जिस मार्ग में आपका हर हर कन शिवमय हो रहा है, यहाँ पर जितने भी शिर योगी हैं उन सबको मेरा प्रणाम और जितने भी ऐसे लोग हैं जो शुरयोगीबनने वाले हैं उनको मेरा प्रणाम और आप सब के जीवन में जो चमत्कार उत्पन होने वाले हैं, उन सबको मेरा प्रण। कहने को तो आप 15 दिन के शिविर में आये हो। क्या होता है 5 दिन? कुछ भी नहीं, लेकिन अगर आप खुले हो तो यही 5 दिन आपके जीवन को हमेशा हमेशा के लिए बदल दे। अगर 1 सेब 1 सेब दुनिया को बदल सकता है, 1 पत्नी से लड़ाई कालीदास को बदल सकती है। कहे प्रिय मेरे साथ तो तुम न जाने कितने मिनट कितने घंटे, कितने दिन बिताने वाले हो, कुछ कुछ तो होगा, कुछ तो होगा, कुछ तो होगा। मैं इतना जानता हूँ, मुझे इतना पता है। और जैसा मैंने कहा मैं इन लोगों से जो मिला जिन्होंने शिवयोग की साधनाओं को प्राप्त कर, अपने आप को खोला, प्राप्ति और अनुभव में फर्क अनुभव किया। समझना इस बात को मैं तुम्हें शिव योग का सार बता रहा हूँ। अगर इस बात को पकड़ लिया। सिर्फ आज ही नहीं जीवन भर के लिए जीवन बदल जाए। और यही मैं चाहता हूँ की यह शिविर 5 दिन केवल 5 दिन नहीं, लेकिन हर रोज जब तुम उठो तुम्हारे भीतर 1 दिव्य चिंगारी उत्पन करे, जो तुम्हारे भीतर मेरे गुरु की संजीवनी ज्वाला बन कर। तो इसने बहुत ध्यान से सुना। 1 मंद कहता है मेरे पास दौड़ा दौड़ा आता है। एअरपोर्ट पे भैया हमारी शादी हुई थी, कुछ कर दिए, हम पत्नी भाग गई, कोई ऐसा मंतर 2 वापस आ जाए। और मैंने कहा मैं कितनी भी बार मंत्र देकर वापस ले आऊंगा, अगर तुम अपने चरित्र को नहीं बदलोगे भाग जाएगी। यह मत पूछो की कौन सी साधना करूँ की वो लौटाए। यह पूछा हे गुरुदेव मुझे शांति 2 पेशेंस 2 के हर रिलेशनशिप में अगर पेशेंस नहीं है तो तुम कटखने हो जाओगे? जैसा 1 पागल कुत्ता हो जाता है? समझो हम योग, वस्तु या पदार्थ अपने गुरु से नहीं मांगते, हम साधना, वस्तुएं और पदार्थ के लिए नहीं करते, हम साधना करते हैं अपने भीतर गुण उत्पन्न करने के लिए। और अगर गुण है गुणवान हो। जो व्यक्ति गुणवान है, वो स्वयं अपने जीवन में सुख, संपन्नता, सफलता, उत्पन कर सकता है। इसलिए अपनी प्रार्थना बदलो के गुरुदेव, मैं प्रार्थना करता हूँ की आप म मुझे, ज्ञान, ताकत एवं शक्ति दे, विज्ञान, शक्ति एवं ताकत को प्राप्त कर। मैं अपने जीवन में स्वयं सुख उत्पन करे, प्रेम उत्पन करूँ सफलता है। गुरुदेव अगर बदलना ही है, बदल ही रहा हूँ। आज से मैं आपके तप को स्वीकार करता हूँ, आप के तप को अपनी साधना प्रदान करता हूँ। अपने जीवन को अभी कल में फ्लाइट में आ रहा था। मैं फ्लाइट में बैठा बहुत घबरा गया क्योंकि पूरी फ्लाइट में सारे शिवयोगी बैठे थे। और मेरी पीड़ा को समझो शाम के 6 बजे मेरा ब्रिटिश पार्लमेंट में लेक्चर खत्म हुआ। 7 बजे मैंने फ्लाइट ली भारत के लिए रास्ते में फ्लाइट दुबई रुकी। फिर मैं भारत पहुंचा, दिल्ली वहाँ से दौड़ा डोमस्टिक वहाँ से आया। गोआ। तो जब मैं गोआ की फ्लाइट में था, मेरा हाल आप ऐसा समझो जैसा आपका होने वाला है। आज की प्रति प्रसव साधना के बाद तो समझदार को इशारा काफी इससे ज्यादा मैं क्या बोलू तो मेरा हाल बहुत ही ऊपर नीचे था। मैं बड़ा ही सदमे में घबराया हुआ कि हो क्या रहा है, इतना तो शायद हनुमान जी माँ सीता के लिए लंका जाते समय न उड़े होंगे, जितना मैं आपके लिए उड़ के आ रहा हूँ। मैं घबरा गया, न जाने क्या होगा। मैं सीट सबसे आगे बैठा था सबसे आगे और 1 समय पर एयर होस्टेस ने आके कहा की देखो आप सारे शिवयोगी क्यूँकी प्लेन के आगे आ रहे हो। पायलट ने कहा है वेट डिस्ट्रीब्यूट कर। 2 नैया में तो मैंने सुना था सारे 1 तरफ आ गए, पलट जाएगी उस समय बहुत ओमहोमजुमसाकिया की अगर प्लेन के साथ ऐसा हुआ तो क्या होगा। पर मजे की बात वहाँ पर जो मेरी बात हो रही थी, 11 हरियाणा का नौजवान था। और उसने मुझे कहा जयपुर में मैंने साधना की, फिर मैंने बाबा जी से साधना सी और जब मैंने साधना सीखी तो मैंने सोचा की मैं बैंक में ये ऑफिसर की, पोस्ट लोन मैनेजर की और मैं किसानों की मदद करना चाहता हूँ और सीटी भी की मेरी हिमाचल में पोस्टिंग हो इस बैंक में हो कि ये भी नहीं की प्लान बैंक या ढिमका बैंक बैंक भी उसने चुना की इस बैंक म मेरी इस पोस्ट पर इस सिटी पर पोस्टिंग होनी चाहिए। और मुझे उपले में कहता है। धन्यवाद भैया, मैंने अपनी साधना के माध्यम से जो कुछ भी उत्पन्न किया, सब कुछ मैंने अपने लिए क्रिएट किया और फिर अच्छा लगा कि जरूरी नहीं सारे चमत्कार पुराणों में ही की। आज की तारीख में भी ऐसे नौजवान हैं। लेकिन मैं यह कहना चाहता हूँ की देखो अगर केवल नेक्टिविटी रिलीज करने आये। ये तो ऐसी बात हो गयी की न्यूकलियर बम का मच्छर मारने के लिए इस्तेमाल कर रहे हो या बहुत कुछ हो सकता है साधना से सकारात्मक व्यक्ति वो जो कहें मैं एक्टिविटी रिलीज करना चाहता हूँ और सिद्ध वो जो कहे मैं अपने भगवान से जुड़ना चाहता हूँ। पर किसान से सीखो केवल खरपतवार निकाल ही निकालोगे जमीन खाली छोड़ोगे खरपतवार, फिर आ जाएगी, जान से सीखो खरपतवार निकालता है, आम के पेड़ को डालता है, और जहाँ पेड़ लग गया वहाँ आई ही सकती किसी नौजवान ने। मुझे कहा आज की तारीख में नेगेटिविटी बहुत ज्यादा है। मैंने कहा नहीं नेगेटिविटी ज्यादा नहीं। लेकिन 1 बात तो सच है, जो नेगेटिव है वो चिल्लाते ज्यादा है, जो पॉजिटिव हैं उन्हें मौन सिखाया गया है। तो अगर 1 कमरे में 10 लोग हैं, 5 पोजिटिव, 5 नेगेटिव पॉजिटिव वाले कोने में चुपचाप बैठेंगे नेगेटिव वाले हाहाकार मचा देंगे देखने वाले को लगेगा नेगेटिविटी ज्यादा हमे अपनी सोच को बदलना है। sालरीपवातयूशो आम का बीज बोगे, आम मिलेगा खरबूज को बोगे, खरबूज मिलेगा, हाँ जी, ना जी 2 प्रकार के लोग पहला सुर जिसको भगवान देता है और वो मंद प्राप्त करता है और मंद ही लुटा देता है दूसरे प्रकार का व्यक्ति वो जिसको भगवान गुण देता है और वो अपने गुणों को इस्तेमाल कर अपने जीवन में सुख, शांति, संपन्नता, सफलता जागृत करता है। 1 महिला आती है गुरु के पास खूब दुखी होती है ये बाबा जी ये हो गया वो हो गया मजे की बात शायद जाते ही भगवान के पास इसलिए है जब दुम में आग लग गई तभी याद आती है जिस व्यक्ति के जीवन में पीड़ा उसके लिए दिन भर सरसती करना बहुत सरल है तब ज्यादा याद आती है ज्यादा ध्यान लगता है मोटीवेशन है फिर पीड़ा आई गुरु के पास गए, फिर पीड़ा आई गुरु के पास गए और मजे की बात 1 दिन ऐसी कंडीशनिंग हो जाती है पीड़ा इस इक्वल टू डिविनिटी पीड़ा इस इक्वल टू डिविनिटी मजे की बात में दुनिया जहान में जब साधना कराने गया तो लोगो की सोच ही ऐसी है कोई कहता है मैं साधना करता हूँ तो सामने वाला पूछता है अच्छा तुम्हारे जीवन में क्या खराब है क्या प्रोब्लम है तुम्हे कोई मर गया क्या वो समझते ही नहीं साधना केवल नेक्टिविटी हटाने के लिए थोडी है ही मेडिटेट वरी शिवयोगी मेडिटेट तो बिकम द बेस्ट वर्जन ऑफ देम सेल्स अगर बदलना ही है मैं साधना करता हूँ ताकि मेरा हर शन, हर कंसिव हो, हर आदमी जानवर स्वरुप जिंदा पैदा होता है लेकिन 1 शिवयोगी देव स्वरुप शरीर को त्यागता है और यह मेरा लक्ष्य है कि जो भगवान से प्राप्त किया उसको बढ़ाऊँ बड़ा के भगवान को लौटाऊँ जैसे बड़े बुजुर्ग हैं उनको तुम काजू का डब्बा देते हो, उस पर सौ रूपए डाल के वापस कर देते हैं उसी प्रकार से यह शरीर मिला शरीर को कम कर के काट के भगवान को दिया तो क्या दिया अगर शरीर मिला शरीर को सिद्धत्व से जोड़ कर भगवान को दिया तब तो सही मायने में यह जीवन सफल है।










