The narrated folk tale tells the story of a modest woodcutter named Validad (also called Vali) who earns five paisa a day, spends four and saves one. Over many years he accumulates enough money to melt it into a gold bangle. Being a simple, self‑less man, he asks his merchant friend to give the bangle to a person with a pure heart. The merchant identifies the beautiful and generous princess of Kayasthan and delivers the bangle to her, describing the giver only as a benevolent stranger. Grateful, the princess asks the merchant to bring back a camel laden with fine silk as a return gift. The merchant, unable to fulfill the request himself, seeks another worthy recipient and finds a young, kind king in Nikabad. He gives the silk to the king, who in turn, unable to repay the exact gift, offers twelve fine horses. The cycle continues: the merchant brings the horses back to Validad, who again refuses to keep them and asks the merchant to give a portion to the princess, who then sends silver coins and more animals to the king, and so on. The exchanges grow larger—camels, horses, elephants, gold coins—until the princess’s father suspects a suitor for his daughter. Ultimately, the king of Nikabad marries the Kayasthan princess, and Validad’s simple act of saving a single paisa is shown to have set off a chain of generosity that reshapes kingdoms. The storyteller concludes with a moral: even the smallest help can become a great gift for others, urging listeners to keep helping without hesitation.
Chapters
मास्टर मित्रगण ये कहानी है बहुत सैकड़ों साल पुराने की। 1 लकड़हारा था जिसका नाम था वाली रात। वो रोज 5 पैसे कमाता था और उसमे से वो 4 पैसे अपने रोज बर्रा के काम में खत्म कर देता था। बट 1 पैसा बच जाता था। उस 1 पैसे को वो रोज 1 गोलक में डालता रहता था। ऐसा सालों तक होता रहा और जब बहुत समय हो गया तो 1 दिन उसने उस गोलक को फोड़ा और उससे बहुत सारे पैसे निकाले लकारा बहुत ही साधारण इनसान था। उसको किसी भी तरह की मोहमाया नहीं थी। उसने सोचा मैं इसका करूँगा क्या। वो 1 स्वर्डकार के पास गया और उस सारे पैसों से 1 उसने कंगन बनवाया सोने का और फिर वो 1 अपने व्यापारी मित्र के पास गया। उससे बोला कि मित्र मैं बहुत ही सीधा इंसान हूँ मुझे इतने पैसों की कोई जरूरत नहीं है। ये 1 मैंने 1 कंगन बनवाया है। तुम किसी ऐसे इंसान को जानते हो जो कि जिसका हृदय सबसे पवित्र हो, सबसे अच्छा हो उसको ये दे सकते हो। व्यापारी ने थोड़ा सोचा फिर उसको याद आया कि हाँ 1 कायस्थान जगह है जहाँ की राजकुमारी है जो की बहुत सुन्दर है और बहुत ही उदार है। मैं उसको ये दे सकता हूँ। वाली दाद ने कहा कृपया जाइए और उसको दे दीजिये। वो 2 दिन की यात्रा के बाद कायस्थान गया। वहाँ की राजकुमारी को वो कंगन दे दिया। राजकुमारी ने पूछा यह किसने दिया है। व्यापारी वाली दाद के बारे में जानता तो था बट राजकुमारी को बताना नहीं चाहता था। उसने कहा कि 1 ऐसा इंसान है जो की अच्छे लोगों की मदद करना चाहता है तो उसने यह आपको यह छोटा सा उपहार दिया है। राजकुमारी ने भी सोचा की अब तो मुझे भी कुछ वापस देना चाहिए, किसी ने इतना अच्छा उपहार दिया है। तो राजकुमारी ने कहा ठीक है अब आप जब वापस जाएगा तो यह 1 ऊंट भर के बेहतरीन किस्म का रेशम आप ले जाइये और उनको वापस उपहार दे दीजिए। व्यापारी मान गया। व्यापारी जब फिर से वाली दात के पास पहुँचा तो वालिदात ने कहा ये क्या है मैं बहुत ही सीधा इंसान हूँ मैं इतने सारे रेशम का करूंगा क्या तुम किसी और अच्छे इनसान को जानते हो जिसको ये हम दे सकते हैं। व्यापारी ने फिर से थोड़ा सोचा। उसने कहा की पश्चिम की तरफ 1 जगह है जिसका नाम है निका बाद, वहाँ के 1 युवा राजा है। वो बहुत ही अच्छे इनसान है। वालिदा ने कहा मित्र कृपया करके तुम ये रेशम उनको दे। 2 व्यापारी मान गया और फिर यह रेशम लेकर के निकाबाद के पास चला गया और वहाँ के राजा को भेट कर दिया। राजा बहुत प्रसन्न हुआ और उन्होंने भी उससे पूछा कौन है यह ऐसा इंसान जिसने मुझे इतना बड़ा गिफ्ट, इतना बड़ा उपहार दिया है। व्यापारी ने फिर से ज्यादा कुछ नहीं बताया तो फिर राजा ने भी उसको वापस उपर दिया। उसने कहा कि तुम ये लो ये 12 बेहतरीन किस्म के घोड़े हैं तुम ले जाओ और वाली दाद को दे 2 बेचारा व्यापारी थोड़ा सा तो फँस रहा था बीच में बट फिर वो वाली दाद के पास गया वाली दाद ने कहा मित्र तुम्हे पता है मैं कितना सादा इंसान हूँ मैं इतने सारे घोड़ों का क्या करूँगा। 1 काम करो तुम 2 घोड़े रख लो और बाकी वापस जाकर के कास्तान की राजकुमारी को दे 2 व्यापारी मान गया और वो फिर से चला गया कास्तान की राजकुमारी के पास और इस तरह से यह सिलसिला चलता रहा 1 बार यहाँ से वहाँ तो 12 घोड़े जब उसने कास्तान 10 घोड़े जब उसने कास्तान की राजकुमारी को दी तो उसके प्रधान मंत्री ने कहा लगता है अब कुछ करना पड़ेगा अब 1 काम करो राजकुमारी आप उसको इतना बड़ा उपहार। 2 की वो वापस आपको उससे बड़ा कुछ दे न पाये। राजकुमारी ने कहा ठीक है। 1 काम करो मित्र व्यापारी तुम 20 खच्चर भर के चांदी के सिक्के ले जाओ बेचारा व्यापारी फंस चुका था वो फिर से वाली दात के पास गया और वाली दात ने फिर से वापस वो भिजवा दिया राजा के पास ढीकाबादकेझिकाबाद के राजा ने भी फिर वही किया उसने वापस उसको 20 ऊट, 20 घोड़े और 20 हाथी भर के सोने के सिक्के भिजवा दिए वाली दास जो 1 बहुत ही सीधा साधा लकडहारा था उसने वापस हाथ पैर जोड़ के व्यापारी से कहा व्यापारी मित्र तुम प्लीज इसको राजकुमारी के पास ले जाओ और इस बार राजकुमारी के पिता को पूरा शक हो गया यह कोई तो है जो कि मेरी पुत्री से शादी करना चाहता है तो इस बार राजा ने कहा पुत्री इस बार हम लोग खुद चलते हैं और देखते हैं कि कौन है वो इंसान जो इतने बड़े बड़े उपहार दे रहा है पूरी साज सज्जा के साथ वो लोग वाली दाद से मिलने जाते है तो व्यापारी 1 दिन पहले उनको रोक देता है और कहता है मैं जरा उसको बता देता हूँ। जब वाली दाद को यह पता चलता है तो उसके पैरों तले जमीन निकल जाती है की अब मैं क्या करूँगा वो चाहता है। 1 पास वाली पहाड़ी पे और वो कूदने वाला होता है कि वह आत्महत्या कर ले और यह खत्म करे तब भी वहाँ पर 2 राज तभी वहाँ पर 2 परियां आ जाती है उसकी कहानी सुनती है और फिर उसका 1 बड़ा सा महल बना देती है सारे राजा और पूरा उनका राज का सब कुछ आता है अगले दिन और वालिदा उनको बताता है पूरी कहानी और उसके बाद कहता है कि महाराज मैं तो बहुत ही बूढ़ा हूँ मैं तो मैं तो शादी कर नहीं पाऊँगा बट मुझे पता है। 1 और ऐसा इंसान है जो आपकी पुत्री के साथ विवाह कर सकता है और फिर वह व्यापारी को भेज करके निकाबाद के राजा को बुलावा देता है और इस प्रकार से 1 कायस्थान की राजकुमारी की शादी आखिरी में निकाबादकी युवा राजा से हो जाती है और जो हमारा वाली दाद था जो बहुत ही सीधा साधा इंसान था वो इस तरह अपने जीवन भर लोगों की मदद करता रहता है कई बार ऐसा होता है कि जब हम लोगों की मदद करना शुरू करते हैं तो हम छोटे छोटे व्यवता में फंस जाते हैं। बट हमें उससे रुकना नहीं चाहिए, हमें लोगों की मदद करते रहना चाहिए। आपको नहीं पता आपकी छोटी सी मदद किसी के लिए कितना बड़ा उपहार हो सकता है। बहुत बहुत धन्यवाद। नवीन जी, आपकी तरफ जोर से ताली बजाइए।