In this Hindi travel‑vlog, the speaker recounts a family trip from Bangalore to Udaipur and then to Kumbhalgarh Fort in Rajasthan. She describes the massive 36‑km wall, the 300+ temples inside the fort, the seven grand gates, and the Badal Mahal perched high above the clouds. While climbing toward the Badal Mahal she feels fatigue and doubt, but encouragement from her children and husband spurs her onward. Her husband then tells a parable about Gautama Buddha, his disciple Ananda, and villagers who repeatedly point the way to the village of Ramnagar, illustrating how guidance and perseverance bring one closer to the goal even when the destination seems distant. The story ends with the speaker finally reaching the Badal Mahal, experiencing its cool breezy chambers and panoramic Aravalli views, and drawing a motivational lesson: obstacles are often nearer than they appear, confidence and continuous effort lead to success, and the people we meet can be signals to keep moving forward.
Chapters
हैं। आपको भी कभी ऐसा लगा है की आप बहुत मेहनत कर रहे हैं, बहुत कोशिश कर रहे हैं लेकिन आपको सफलता नहीं मिल रही है। आप अपने रास्ते में आने वाली मुश्किलों को देखकर थोड़ा घबरा रहे हैं और आप आने वाली मुश्किलों को देख कर रुक जारे है। हम ज्यादा है बेवफ कर रहे हैं तो ये स्टोरी आपको है। ये स्टोरी आपको मुश्किल समय में हिम्मत देगी। आपको अपने लक्ष्य प्राप्ति के लिए निरंतर प्रयास करने के लिए आपको प्रेरणा देगी। आप सभी ग्रेट वार्ड ऑफ़ चाइना के बारे में जानते होंगे। सबसे लम्बी दीवार है दुनिया की पर क्या आप यह भी जानते है की दुनिया की सबसे दूसरी लम्बी दीवार जो है वो हमारे देश में है, जी हाँ यह राजस्थान में है। उदयपुर से टी टू किलोमीटर दूर कुम्बलकड़कीजो चारों तरफ की दीवार है वो 36 किलोमीटर लम्बी है और इसका जो वित है वो इतनी है कि इसमें 10 फुलवार 1 साथ चल सकते हैं। तो 1 बार। गर्मी की छुट्टियों में मैं अपने बच्चों और अपने पति के साथ बैंगलोर से घूमने आई और जब हम उदयपुर से टी टू किलोमीटर ट्रेवल करके कुम्बल घर पहुँचे तो वहाँ देख के हम अच्छे चकित रह गए क्योंकि ये किला इतना विशाल है की इसके अन्दर जो है साढ़े 300 के करीब मंदिर है किले के अन्दर 7 जो बड़े द्वार है सबसे ऊपर जाने के लिए वहाँ पर 1 बादल महल है जैसा की आप नाम से समझ सकते है। बादलों को छूता हुआ यह समुद्र से कुछ हजार फुट की ऊँचाई पर था। तो जब हम मंदिर वगैरह देखने के बाद हम बादल महल को देखने जाने लगे तो रास्ते का थोड़ा बहुत घुमावदार था। मैं बीच बीच में गर्मी की वजह से थोड़ा थक रही थी और मेरे बच्चे जो है काफी आगे आगे जा रहे थे और वो बीच में बीच बीच में वापस आकर मुझे बता रहे थे, बस थोड़ी दूर है, बस थोड़ी दूर है और मैंने आने वाले लोगों से भी पूछा कि क्या मुझे वहाँ जाना चाहिए, क्या वहाँ जाना सही है या मैं वापस चली जाऊं तो सबने बताया की नहीं, आप 1 बार ऊपर जाइए जरूर और आप को बहुत ही अच्छा लगेगा। फिर मैं थोड़ा उत्साह के साथ आगे बढ़ गयी और थोड़ी दूर जाने के बाद भी जब बादल महल नहीं आया तो मैं फिर थोड़ा सा निराश हो गयी। उस समय मेरे पती ने कहा वो जो मेरे साथ ने कहा की मैं तुम्हे महात्मा बुद्ध की स्टोरी सुनाता हूँ। यह बात उस समय की है जब महात्मा बुद अपने शिष्यों के साथ रामनगर नाम के गाँव में प्रवचन देने जा रहे थे। गर्मी के कारण बहुत तेज धूप होने के कारण जो उनके शिष्य थे वो थोड़ा थक गए थे और उनको समझ में आता की रास्ता कितनी दूर है। प्रिय शिष्य भक्त बुद्ध के आनंद भी उनके साथ थे। रास्ते में जाते हुए आनंद में 1 बूढ़े व्यक्ति से पूछा रामनगर गाँव कितनी दूर है? तो उन्होंने बूढ़े व्यक्ति ने बताया की बस पास ही है अब जल्दी पहुँच जायेंगे और उसके बाद बूढ़ा व्यक्ति जो है वो महात्मा बुद्ध को देख कर मुस्कुराया और महात्मा बुद्व उसको देख कर मुस्कराया आनंद के मन में सवाल उठा की आपस में मुस्कुरा क्यों रहे हैं। पर उससे पहले वो कुछ पूछ पाता, वो सब आगे बढ़ गए और थोड़ी दूर जाने के बाद जब फिर से गाँव नहीं दिख रहा था तो उन्होंने रास्ते में जाते हुए 1 महात्मा से पूछा की और कितनी दूर है? महात्मा ने कहा की आप सही जा रहे हैं 24 किलोमीटर दूर और है पहुँच जायेंगे। उसके बाद महात्मा भी गौतम बुद्ध को देख कर मुस्कुराए और गौतम बुद्ध महात्मा को देखकर मुस्कराए आनंद के मन में पुन यह क्रेन मुस्करा रहे हैं? आगे बढ़ गए। थोड़ी देर चलने के बाद फिर गाँव नहीं आया। अब उन्होंने 1 बूढी माता से पूछा गाँव कितनी दूर है? बूढ़ी माता ने बताया बेटा तुम लोग बस पहुँच ही गए हो, गाँव कुछ ही किलोमीटर है कुछ ही कदम है, ऐक्चवली, तो फिर से आनंद। तो लगा बस अब तो हम पहुँच गए और फिर आगे बढ़ गए। अभी गाँव नहीं आया तो उस पर थोड़ा क्रोध आ गया, उसने गुस्से में अपना सामान नीचे रखा और अपने गुरु महात्मा बुध से पूछा की क्या मैं आपसे 1 प्रश्न कर सकता हूँ? तो गौतम बुद्ध ने कहा अवश्य करो आनंद। तो उससे पूछा की हम जिस काम में भी जा रहे हैं वो हमें आगे बढ़ने की राह दिखा रहे हैं लेकिन गाँव तो भी नहीं आ रहा और जो भी आपको मिल रहा है वो आपको देख कर मुस्कुरा रहा है, तो इसकी क्या वजह है? तो गौतम बुद्ध ने बताया की ये जो गाँव है रामनगर में, यहाँ पहले भी जा चूका हूँ और ये गाँव कितनी दूर है ये मैं जानता हूँ और राह में मिलने वाला हर व्यक्ति भी यह बात जानता है पर हम जैसे उद्देश्य देते हैं सबको अपनी सफलता के मार्ग पर निरंतर आगे बढ़ते रहने के लिए, वैसे गाँव वाले भी चाहते है की हम तो साहित न हो इसलिए वो भी हमें आगे बढ़ने की राह दिखा रहे हैं। तो अब आनंद बात समझ आई, वो मुस्कुरा दिया और सब आगे बढ़ गए। थोड़ी देर में गाँव आ गया और वो समय पर पहुँच गए। तो दोस्तों, हमें यहाँ पर यह शिक्षा मिली कि हमारे जीवन में हमें जैसे गाँव वाले उनको प्रेरणा दे रहे थे, वैसे हमारे जीवन में भी हमें बहुत सारे लोग मिलते है जो हमें प्रेरणा देते हैं तो हमें उनको संकेत समझना चाहिए और की हमें कई बार आगे बढ़ने के अवसर मिलते हैं तो हमें उस अफसर को अपने हाथ से नहीं जाने देना चाहिए। तो ये कहानी सुनते सुनते मुझे भी देखा की मैं भी बस अपने लक्ष्य के बहुत करीब पहुँच चुकी थी। बादल महल में कुछ ही मीटर दूर थी और जब मैं वहाँ पहुँची तो वहाँ का बहुत ही मनोरम था। वहाँ के हवा कमरे जो थे वो ऐसे डिजाइन के हुए थे की बहुत ही ठंडी हवा आ रही थी और जब मैं उसके छत पर पहुँची तो अरावली की पहाड़िया दूर दूर तक दिखाई दे रही थी। आपको राजस्थान जाने का मौका मिले तो आप भी जरूर जाइएगा कुंबल कर और आपको यही बताना चाहती हूँ की अगर आपके मार्ग में भी कभी कठिनाइयाँ आये इस कहानी से शिक्षा लेना। अपने नेक्सट स्टेप को ध्यान देना और सफलता आप देखोगे की वह आपके बहुत करीब है। आपको जरुरत है की आप अपना कॉन्फिडेंस बनाये रखे और हमेशा अपने मन में यह विश्वास रखे की हमारी मंजिल बस। हमारे बहुत समीप है।