Achieving Quality Crops with Proper Tillage | Overview On Tillage | Tractor & Tarun | Bengali Ep. 25

Tractor & Tarun explains tillage methods and equipment for preparing fields before planting. Proper soil preparation directly affects crop quality and farmer income. The video covers different tillage techniques used to get better yields.
नमस्कार दोस्तों, ट्रेक्टर न तरुण के इस एपिसोड में आपका स्वागत है। जैसा कि हम जानते है जब भी हम कोई नई फसल लगाते हैं हमें खेत तैयार करना पड़ता है और खेत जितना अच्छे तरीके से तैयार होगा। फसल भी उतनी अच्छी होगी और हमारी आमदनी भी बढ़ेगी। तो इस एपिसोड में हम देखेंगे कि खेत तैयार कैसे किया जाता है। तो चलिए देखते हैं।
नमस्ते दोस्तों, आज हम जानने वाले हैं जुताई के बारे में। जुताई यानी फसल की बुआई के लिए खेत को तैयार करना और उसके लिए किन किन उपकरणों का इस्तेमाल होता है। जुताई को आम तौर पर टिलेज भी कहा जाता है। टिलेज 4 प्रकार के होते हैं प्राइमरी टिलेज, सेकेंडरी टिलेज, स्पेशल टिलेज और जीरो टिलेज। तो सबसे पहले जानते हैं प्राइमरी टिलेज के बारे में। प्राइमरी टिलेज में उपकरण गहराई में जाकर मिट्टी को अच्छे तरीके से तोड़ता है और नीचे की मिट्टी को ऊपर और ऊपर की मिट्टी को नीचे कर देता है। जिससे जमीन के निचले सतह के पोषक तत्व ऊपर आ जाते हैं और पुरानी फसल के बचे हुए अवशेष गहराई में जाकर मिट्टी के साथ अच्छे तरीके से मिक्स हो जाते हैं। प्राइमरी टिलेज में ज्यादातर प्लाक का इस्तेमाल किया जाता है जैसे कि एमबी प्लाऊ, डिस्क प्लाऊ या चिजल प्लाऊ प्लाऊ के साथ साथ आप कल्टिवेटर, स्पेशली, डक, फुट, कल्टीवेटर, स्पीडिंग, मशीन या पॉवर हारों का भी इस्तेमाल कर सकते हैं। ये सभी उपकरण 6 से 12 इंच की गहराई तक जुताई कर सकते हैं। इन सभी प्राइमरी टिलेज उपकरणों का इस्तेमाल आप ऐसी फसल के लिए कर सकते हो जिनकी जड़े गहराई में जाती है जैसे की कपास, गन्ना, केला, मक्का, सोयाबीन या आलू अब जानते हैं सेकेंडरी टिलेज के बारे में। इस प्रकार की जुताई में मिट्टी को अच्छे तरीके से बारिक किया जाता है। प्राइमरी टीलेज के बाद मिट्टी के जो बड़े बड़े ढेले होते हैं उसे अच्छे तरीके से तोड़ के बारिक किया जाता है और जमीन को अच्छे तरीके से लेवल भी किया जाता है। जिससे बुआई भी अच्छी होती है और बीच का अंकुरण भी अच्छा आता है। सेकेंडरी टीलेज में ज्यादातर रोटरी टिलर का इस्तेमाल किया जाता है। रोटरी टिलर मिट्टी को अच्छे तरीके से बारीक करके उसे लेवल भी कर देता है। रोटरी डीलर के अलावा कल्टीवेटर या हैरो का भी इस्तेमाल किया जाता है। ये सभी उपकरण 6 से 7 इंच की गहराई तक जुताई कर सकते हैं। आइये अब हम टीले के आखिरी 2 प्रकारों के बारे में जानकारी लेते हैं। पहला ऐसा प्रकार यहाँ पर आप ज्यादा से ज्यादा 2 या ढाई फीट की गहराई तक जाकर जुताई कर सकते हो यानि स्पेशल टिलेज। दूसरा ऐसा प्रकार जहाँ पर फसल की बुआई के लिए किसी प्रकार की जुताई की जरुरत नहीं पड़ती है यानि जीरो टिलेज। स्पेशल टिलेज के लिए सब्सैयलरका इस्तेमाल किया जाता है। सब्सैयलरजमीनके अंदर लगभग 2 फीट गहराई में जाकर जमीन की निचली शतक को अच्छे तरीके से तोड़ता है और साथ ही साथ 2 फीट चौड़ाई तक जमीन को लूज भी करता है। इसका इस्तेमाल आप ऐसी जमीन में भी कर सकते हो, जहाँ पर 3 या 4 साल तक खेती नहीं की गई हो। आइये अब जानते हैं जीरो टिलेज के बारे में। इसका इस्तेमाल आमतौर पर ऐसे किसान करते हैं जो धान की कटाई के बाद गेहूं की फसल लेते हैं। धान की कटाई के बाद गेहूं की फसल की बुआई करने के लिए जीरो टिल ड्रिल की मदद से बिना कोई जुताई किए गेहू की बुआई आप कर सकते हो। इसका इस्तेमाल करने से आपके समय की भी बचत होगी और लागत भी कम आएगी। लेकिन याद रहे जीरो टिल सीड ड्रिल का इस्तेमाल करने के लिए जमीन में सही मात्रा में नमी होना बहुत जरूरी है।
तो देखा दोस्तों कैसे आप खेत की मिट्टी के अनुसार सही उपकरण चुनकर अपना खेत तैयार कर सकते हो। तो इसी तरह की जानकारी पाने के लिए देखते रहिये ट्रैक्टर एंड तरुण।
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