Connectivity Technology Explained | Tractor and Tarun | Hindi Ep 42

Tarun explains John Deere's JD Link system, which lets farmers track tractor location, fuel use, machine health, and operator performance from their phone. The tech also handles geofencing, fleet management, and connects farmers directly to dealer support.
नमस्कार दोस्तों, ट्रैक्टर तरुण में फिर से आपका 1 बार स्वागत है ट्रैक्टर तरुण में हमेशा ही हम आपको ट्रेक्टर और ट्रेक्टर में आने वाली नई नई टेक्नोलॉजी के बारे में बताते हैं जिससे की आपके खेती के काम आसान हो पाये। इसी श्रृंखला में मैं आपको आज जिस टेक्नोलॉजी के बारे में बताने वाला हूँ वो आपको आपके ट्रेक्टर से जोड़े रखती है यानि की कनेक्टेड रखती है आप चाहे घर पर हो या फिर कहीं और आपके पास 1 ट्रेक्टर हो या कई ट्रेक्टर हो आप ट्रेक्टर से हमेशा जुड़े रह सकते हैं। तो देर किस बात की आइए देखते हैं आपका ट्रेक्टर कहाँ है, किस खेत में काम कर रहा है, कितना काम किया है, डीजल की खपत कितनी हुई है, कितना बचा है और भी कई तरह की जानकारियां आपको आपके मोबाइल स्क्रीन पर मिल जाती है। आपके ट्रेक्टर पर आपका पूरा नियंत्रण होता है जिससे की आपकी प्रोडक्टिविटी बढ़ती है और मुनाफा भी बढ़ता है। तो है न इंट्रस्टिंग। आइए जानते हैं इस कनेक्टिविटी टेक्नोलॉजी के बारे में विस्तार से। इस कनेक्टिविटी टेक्नोलॉजी के तहत ट्रैक्टर में आपको 1 नेक्सट जनरेशन मॉडल इंस्टॉल करके मिलता है जो की सेंसेस के जरिए ट्रेक्टर की सारी इंफॉर्मेशन इंटरनेट के माध्यम से क्लाउड पर सेव करता है और फिर आप आपके मोबाइल पर 1 ऐप के द्वारा वो सारी जानकारी देख पाते हैं। इस कनेक्टिविटी टेक्नोलॉजी को जॉनडियर में जे डी लिंक के नाम से जाना जाता है और जिस ऐप के द्वारा आप इन्फॉर्मेशन देखते हैं उसे ऑपरेशन सेंटर ऐप कहा जाता है। तो आइए जानते हैं इस टेक्नोलॉजी के कुछ खास फीचर्स के बारे में। जब आप ट्रेक्टर से दूर होते हैं और आपको ट्रेक्टर का रियल टाइम स्टेटस जानना होता है तो कनेक्टिविटी टेक्नोलॉजी आपको देती है ट्रैक एंड ट्रेस फीचर। इस फीचर की सहायता से आप घर बैठे बैठे ट्रेक्टर की लोकेशन आपके मोबाइल में देख सकते हैं। ट्रेक्टर किन रास्तों से गुजरा है, काम की लोकेशन पर पहुंचा या नहीं पहुँचा है, कब पहुँचा है और ट्रेक्टर किस गति से काम कर रहा है यह सारी इनफार्मेशन आप ट्रेक्टर ऑपरेटर को कॉल किए बिना ही आपके मोबाइल पर देख सकते हैं। हर किसान और कॉन्ट्रेक्टर चाहते है की उनका रेक्टर हमेशा अच्छी कंडीशन में रहे और इसे जानने के लिए कनेक्टिविटी टेक्नोलॉजी आपको देती है। मशीन हेल्थ अलर्ट आप ट्रेक्टर के पास न होकर भी सारे अलर्ट रिमोटली देख सकते हो जैसे कि इंजिन, ओवरहेटिंग ऑयल, प्रेशर का कम होना या फिर डीजल में पानी का मिल जाना इत्यादि। ये सारे अलर्ट आपको आपके मोबाइल पर दिख जाते हैं और तो और आने वाली समस्याओं का हल भी सूचित किया जाता है जिससे कि आप सही टाइम पर मेंटेनेंस करते हैं और आपके मशीन की लाइफ बढ़ाते हैं। जब हम अपना ट्रेक्टर ड्राइवर या ऑपरेटर को देते हैं तो स्वाभाविक है हमारे मन में आता है कि वो ट्रेक्टर ठीक से चलाएगा या नहीं, चलाएगा, काम कर रहा है या नहीं कर रहा है या तो आइडल खड़ा है ये सारे सवाल। इन सारे सवालों के जवाब हमें मिलते हैं। मशीन मॉनिटरिंग फीचर के द्वारा यह टेक्नोलॉजी इतनी आधुनिक है कि आपको घर बैठे बैठे पता चल जाता है कि ट्रेक्टर कितने आरपीएम पर चल रहा है, कितना लोड ले रहा है और अगर ऑपरेटर नया है और ट्रैक्टर ठीक से नहीं चला रहा है तो आप उसे गाइड कर सकते हैं। आपको यह भी पता चल जाता है कि डीजल कितना खपत हुआ है और कितना बचा है तो आपको यह जानकारी मिल जाती है कि कितना प्रोडक्टिव काम हुआ है और कितनी देर ट्रैक्टर आइडल रहा है। बिना पेन और पेपर के आपके किए हुए काम का ब्योरा या रिकॉर्ड्स अगर आपको मिल जाए तो क्या बात है। यह टेक्नोलॉजी आपको डिजिटल वर्क डॉक्यूमेंटेशन का फीचर भी देती है। जब भी आपका ट्रेक्टर किसी खेत में काम खत्म करता है तो उसकी 1 रिपोर्ट अपने आप बन जाती है। खेत में कितनी देर काम हुआ है उसकी एकरेज रिपोर्ट आपको मिलती है जिसमें लगने वाला समय और डीजल की खपत की भी जानकारी मिल जाती है। जो कि आप 1 क्लिक से आपके मोबाइल से कस्टमर को भेज सकते हैं। इस वर्ग डॉक्यूमेंटेशन फीचर की वजह से आपको किसी के ऊपर निर्भर रहने की जरूरत नहीं है। आपको यह भी पता चल जाता है की आपका ट्रेक्टर कब चालू हुआ और कब बंद हुआ। आपके ट्रेक्टर के अधिक इस्तेमाल को रोकने के लिए यह टेक्नोलॉजी में आपको मिलता है। जियो फेंसिंग फीचर। अगर आपका ट्रेक्टर आपके बताए हुए एरिया से बाहर चला गया तो आपको तुरंत अलर्ट आ जाता है। इसके साथ आप कर्फ्यू टाइम भी सेट कर सकते हैं। अगर कर्फ्यू टाइम में ट्रेक्टर शुरू किया गया तो उसका अलर्ट आपको मिल जाता है। इस तरह आप आपके ट्रेक्टर के अनधिकृत इस्तेमाल को रोक सकते हैं। कारोबार में तरक्की मतलब जिम्मेदारियां और इसके लिए आपको मदद मिलती है इस फीचर की जिसे कहा जाता है फ्लीट मैनेजमेंट। जब आपके पास 1 ट्रेक्टर से ज्यादा ट्रैक्टर होते हैं तो हर ऑपरेटर, हर ट्रेक्टर और काम का ब्योरा रखना आसान नहीं होता। लेकिन इस फीचर की सहायता से आपको ये सारी चीजें 1 ही जगह पर मोबाइल ऐप में दिख जाती है जिसकी वजह से आप बेहतर प्लानिंग कर सकते हैं, डेटा ड्रिवन डिसीजन ले सकते हैं जिससे आपकी प्रोडक्टिविटी भी बढ़ेगी और समय की बचत भी होगी। इन सब फीचर्स के अलावा आपको 1 और खास फीचर मिलता है। डीलर प्रोएक्टिव सपोर्ट आपके साथ आपका डीलर भी आपके ट्रेक्टर के साथ जुड़ा होता है। इंजन सम्बंधित कोई भी अलर्ट आने पर वो अलर्ट डीलर को भी जाता है और डीलर डीलर प्रोएक्टिव सपोर्ट के द्वारा उसकी सर्विस टाइम पर करता है। जिसकी वजह से डाउन टाइम भी कम होता है और आपकी ट्रेक्टर की लाइफ भी बढती है। ये थे जे डी लिंग कनेक्टिविटी टेक्नोलॉजी के फीचर्स तो जो किसान भाई अपने कारोबार को बढ़ाना चाहते हैं और हमेशा सोचते हैं कैसे संभालेंगे। तो इस टेक्नोलॉजी का उपयोग करें और निश्चिंत रहे। तो दोस्तों कैसी लगी आपको यह टेक्नोलॉजी और इसके फीचर्स हमें कमेंट बॉक्स के जरिए जरूर बताएं। तो चलिए मिलते हैं अगले एपिसोड में तब तक के लिए धन्यवाद।
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