Virendra Singh Parmar talks about how John Deere tractors transformed his potato farming operation. He and his family discuss the shift from traditional methods to mechanized agriculture and the impact on their yields and efficiency.
मैं वीरेंद्र सिंह परमार ग्राम कानापुर पोस्ट मिसरी आगरा यूपी का रहने वाला हूँ, मैं 1 किसान हूँ, ये मेरे भाई हैं अवदेसिंहपरवार और ये मेरे चाचा जी हैं। अमर सिंह परमार हमारा जो मेन बिजनेस है वो सिर्फ 1 आलू का धंधा है और हमारी जो तर्क हुई है, हमारी जो खुशाली आई है वो सिर्फ आलू की मेरे पास सन 2000 पंद्रह.
से.
50 45 जॉनडियर टेक्टर लिया था और जब मैंने धीमे धीमे अपना आलू का काम बढाया तो और भी टेक्टर लिए। मेरे पास आज की तारीख में 5 टेक्टर है जॉनी पांचों के 5 टेस्ट में मैंने तानवीओटमोबाइल श्याम के लिए है इसके राइटर श्री मावी शर्मा है। हमने जो टेक्टर ये लिया है जब से हमें ऐसी कोई परेशानी नहीं आई.
है और स्टिंग.
और आपका ब्रेक मतलब इतना अच्छा काम करते हैं, इतना अच्छा काम करते हैं, जिनकी जितनी तारीफ़ करे है उतना ही कम 1 जमाना होता मेरे चाचा जी और मेरे पिताजी आलू की बुवाई करवाते थे और जब आलू की बुवाई करते समय हाथ से वायु होते थे जितना 1 आदमी है 2151 10 1 पर नहीं कर पाते थे क्यूँकी लेवर की व्यवस्था नहीं थी जब धीरे धीरे समय बढ़ा और ये संसाधन बढ़े तो हमने इनके आशीर्वाद से वो काम आगे बढ़ाने की कोशिश की। टक्करों की वजह से हमने इतनी अच्छी जमीन में जुताई भी की है हैरो से कल्टीवेटर से, बाई की मशीन से, कितना भी लोड डाला है आज तक.
उन्होंने कोई दुआ के बारे में, क्लिक के बारे में, ब्रेक के बारे में, स्टीरिंग के बारे में, कोई शिकायत का.
मौका बिल्कुल नहीं मिला है और इतना इन्होंने काम किया, इतना उन्होंने काम किया.
इन टेक्टर के काम से, इनके कार्यकाल से हम बहुत ही बहुत ही खुशहाल है जिंदगी का बेस्ट जीवन, जो डियर टेक्टर।