Jinu aur Deepak | Episode 32 | Achieving Big Dreams with John Deere | Hindi

Jinu and Deepak talk with Jeet Pillai about mechanized post hole diggers for coconut plantations in Tamil Nadu. The conversation covers how farmers are using this equipment to dig faster, reduce labor costs, and increase yields on their farms.
मकर संक्रांति की बहुत शुभकामना। बाबूजी जीते रहो। हाँ दीपक ये नया साल हम सभी के लिए बहुत तरक्की और ढेर सारी खुशियाँ लाये।
अरे भाई, सिर्फ चैनल, बदलते, रहोगे या.
कुछ देखोगे भी मगर ये तुम उल्टा होकर क्या कर रहे हो।
अरे ऐसे देखता हूँ तो और मजा आता है। यकीन मानो.
अरे ये क्या है.
नमस्कार दोस्तों, तरक्की किसानों की प्रोग्राम में आप सब का बहुत बहुत स्वागत नए साल और मकर संक्रांति पोंगल बिहु लोरी की आपको ढेर सारी शुभकामनाएं। हम जानते है की आप सब अपने खेतों में बहुत मेहनत करते हैं, नए तरीके, नए प्रयोग करते हैं। और इसी कारण आपकी और देश की भी प्रगति होती है। और हमारा यह प्रयास होता है की इस प्रोग्राम में हम आपके सामने ऐसे किसानों के अनुभव लायें जिससे आपको और भी प्रेरणा मिले। आज हम लाये है तमिलनाडु के किसान श्री जीत पिल्लई के नारियल के बगीचे में। श्रीजीत पिल्लई ने विरासत में मिले बगीचे को न सिर्फ संभाला बल्कि मैकेनाइजेशन का इस्तेमाल करके उसे पूरी तरह से बदल दिया। आज उनके बगीचे के नारियल कौस्मेटिक कंपनीज में खरीदे जाते हैं। इतना ही नहीं बल्कि एक्सपोर्ट भी होते हैं। आइए जानते हैं श्री जी पिल्लई के सक्सेस की कहानी थैंक्यू श्रीजीत जी। आज हमें अपना बहुमूल्य समय देने के लिए धन्यवाद।
अरे नहीं प्रकाश जी, ये तो मेरे लिए गर्व की बात है की आप मेरे बगीचे में आए। पहले इस बाग में नारियल के 5 सौ पेड़ थे और काफी जगह खाली पड़ी थी। मैंने उसी जमीन पर प्लांटेशन करने का फैसला किया। मगर प्लांटेशन से पहले नारियल के वैराइटी, फर्टिलाइजर और प्लांटेशन टेक्निक का अभ्यास किया। उसी की वजह से आज इस बगीचे में 5000 नारियल के पेड़ हैं यानी.
4500 नए पेड़ो की बुआई। फिर तो आपको काफी समय लगा होगा।
जी बिल्कुल नहीं और हर नया पेड़ मैंने खुद बोया है। मगर कैसे ये ग्रीन सिस्टम का पोस्ट होल्डर। ये इम्प्लीमेंट आसानी से ट्रेक्टर को जोड़ा जा सकता है। ये जमीन में 800 से 1300 मिली मीटर की गहराई तक गड्ढे खोदता है। मैंने मेरे नारियल के बगीचे में इसी डिगर का उपयोग किया है। यह पोस्ट होल डिगर कुछ ही मिनट में आवश्यक गहराई तक गड्ढा खोद देता है और मेरा पूरा काम आसान कर देता है।
अरे वाह यानि खुदाई के लिए मजदूरों के ऊपर निर्भर रहने की कोई जरूरत नहीं।
सही कहा आपने और इसका ताक़तवर गेयर बॉक्स। यह ध्यान रखता है की डिगर हमेशा सटीक था और आसानी से चले और काम इतनी तेजी से होता है तो बहुत सारे समय की भी बचत होती है।
मगर क्या यह डगर 1 ही साइज में गड्ढे खोदता है?
नहीं। डिगर के अगर 9, 12, 18, और 24 इंच ऐसे अलग अलग साइज में उपलब्ध होते हैं। किसान अपनी जरूरत के अनुसार किसी भी साइज का अगर उपयोग कर सकता है।
इतने कम समय में इतना गहरा गड्डा और इतना सटीक सही में यह तो अद्भुत है। अद्भुत.
वाह, ये तो बढ़िया है। मगर क्या ये पोस्ट होल डिगर अन्य पेड़ों के लिए उपयोग कर सकते हैं?
हाँ क्यों नहीं। इसका उपयोग हर किसम के पेड़ की बुआई के लिए किया जा सकता है। जैसे कि आम, अनार, नींबू, सीताफल, सागवान और खेतों की फेंसिंग के पिलर्स लगाने के लिए भी इसका उपयोग किया जा सकता है।
तो क्या ग्रीन सिस्टम पोस्ट होल डिगर ही है आपकी सफलता का राज जी.
बिल्कुल ग्रीन सिस्टम पोस्ट होल डिगर ने सही मायनों में मुझे उन्नति की दिशा दिखाई है।
अरे, ये तो किसी चमत्कार से कम नहीं। अब तुम क्या देख रहे हो जीनू?
तमिलनाडु और यहाँ की मिट्टी अलग है। मैं यह देख रहा हूँ कि क्या यह होल डिगर हमारे खेत के मिट्टी में भी काम कर सकता है। क्या हुआ ये देखो यहाँ पर लिखा है कि ग्रीन सिस्टम पोस्ट होल डिगर हर किस्म की मिट्टी में इस्तेमाल किया जा सकता है।
मुझे तो पहले से ही पता था वो कैसे यह जॉन डेयर की टेक्नोलॉजी है? हर किसान और हर मिट्टी के लिए बनी ही होगी।
हा हा।
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