This is a YouTube video titled "Jinu aur Deepak | Episode 33 | Transforming Fields into Gold with John Deere | Hindi" featuring a multi-speaker discussion primarily led by Deepak. The conversation revolves around the cultivation and mechanization of maize farming in India, highlighting modern agricultural equipment like MB Plough, Vacuum Planter, and Corn Header to improve productivity and efficiency. The dialogue is in Hindi and includes cultural references to enjoying corn (bhutta) with friends and family, emphasizing the importance of mechanization in farming.
वह भुट्टे का स्वाद तो ऐसे ही खाने में है, वो जरा नींबू भी लगाना। दीपक। भैया लगता है की बड़ी जोर की भूख लगी है। 45 भुट्टे तो आप ही कर गए है, वो काफी दिनों से इच्छा अधूरी.
थी, वाह लाजवाब मजा आ गया और.
1.
जीनू जरा आराम से कुछ कहा दीपक जी भरत भैया हाँ मैं। वही कह रहा था कि ये भुट्टा बहुत ही स्वादिष्ट है और सर्दी के मौसम में दोस्तों के साथ ऐसे बैठ के भुट्टा खाने का मजा ही कुछ और है।
और हमें तो बचपन में सिर्फ भुट्टा ही पता था। अब बच्चे किसी भी मौसम में वो क्या बोलते हैं, हाँ पाप कौन खाते हैं, बच्चे तो बच्चे, परसों पिताजी भी उनके साथ बैठ कर बड़े मजे ले रहे थे।
हा जीवन। लेकिन यही नहीं, फूड इंडस्ट्री में मक्के का बहुत सारा उपयोग किया जाता है। कार्न, फ्लेक्, सी लेकर पॉप कॉर्न तक सब कुछ मक्के से तो बनता है। जिसकी वजह से आज से देश विदेश में बहुत डिमांड है। और इसी लिए मक्के को कैश क्रॉप माना जाता है।
वो तो ठीक है भैया, मगर मेहनत भी बहुत करनी पड़ती है।
मक्के की खेती मैकेनाइजेशन की वजह से पहले से काफी आसान हो गई है और मेरा मानना है कि हर किसान को इस नए दौर में आधुनिक बनना चाहिए।
मगर कैसे।
मक्के की खेती करते वक्त 3 महत्वपूर्ण पड़ाव होते हैं, जुताई यानि जमीन की अच्छी तरह से खुदाई, उसके बाद मक्के के बीज की बुआई और अंत में मक्के की फसल की हार्वेस्टिंग। इन तीनों कामों के लिए कई सारे आधुनिक इम्प्लीमेंट्स उपलब्ध हैं।
मतलब, जुताई से लेकर कटाई तक, मैकेनाइजेशन.
हाँ, बिल्कुल, तेलंगाना, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों में जहाँ मक्के की खेती बड़े पैमाने पर की जाती है, वहाँ आजकल पूरा मैकेनाइजेशन होता है। जैसे हम शुरुआत करते हैं बुआई से। अब अच्छी बुआई के लिए जरूरी है अच्छी जुताई। एमबी प्लाव हर तरह की जमीन की जुताई करने में किसान की मदद करता है। ये ऑपरेट करने में एकदम आसान है। ये जमीन में ज्यादा गहराई तक पहुँचता है जिससे सोइलइनवर्जन अच्छे तरीके से होता है।
अरे वाह, ये तो सही में बढ़िया है।
अब जुताई के बाद बुआई। मक्के के बुआई के लिए वैक्यूम प्लांटर बहुत काम में आता है। वैक्यूम प्लांटर के इस्तेमाल से बीज की मात्रा कम लगती है, जिस वजह से महंगी बीज जैसे कौर्न, कपास, सोयाबीन में बीज का खर्चा कम होता है। ये निर्धारित किए हुए अंतर पर बीज की बुआई करता है। इससे हर बीज को अच्छा पोषण मिलता है और उसका अंकुरण सही तरीके से होता है। जिससे उत्पादकता बढ़ती है। बीज पंक्तियों में लगाए जाने के कारण निराई आसान हो जाती है। और मशीन से फसल की कटाई करना भी।
यानि कमाई और मुनाफा दोनों ज्यादा, ये तो बहुत बढ़िया है।
जुताई और बुआई को तो समझ आ गया मगर फसल तैयार होने के बाद क्या करे।
मक्के की हार्वेस्टिंग के लिए कॉर्न हेडर का इस्तेमाल किया जाता है। जॉन डियर का डब्ल्यू सेवेंटी कम्बाइन हार्वेस्टर और ग्रीन सिस्टम कॉर्न हेडर की जोड़ी न सिर्फ मक्के की फसल की कटाई करती है बल्कि साथ साथ मक्के के दाने भी एकदम सफाई से अलग कर देती है।
दीपक भैया एमबी प्लाव, वैक्यूम प्लांटर और कौन हेडर मतलब मक्के की खेती का.
पूरा सोलूशन हाँ तो मैकेनाइजेशन से बेहतर उत्पादकता ऊपर से कैश क्रॉप मतलब सोने पे सुहागा.
यानी बहुत सारे भुट्टे और बहुत सारी भुट्टा पार्टियाँ दीपक भैया।
आपसे यह बहुत ही महत्वपूर्ण जानकारी मिली है थोड़ी अलग सोच और मैकेनाइजेशन के साथ 1 किसान को प्रगति की नई दिशा दिखा देगा।
सही कहा भारत हम सभी को यह बात हमेशा याद रखनी चाहिए इसी बात.
पर और 1 भुट्टा हो जाए।
अरे वाह दीपक ने दिया तरक्की का मंत्र और बताया कैसे नई सोची है उसका पहला कदम?