Mastering Implement Depth Control: Ploughing Tips | Tractor and Tarun | Hindi Ep 3

Tarun and an engineer explain how to control plough depth using tractor levers. They cover the mechanics of depth control systems and show farmers how to adjust implements for better ploughing results.
आओ, आओ भारतीय नारी आ जाओ। जय हो ट्रैक्टर तो बहुत ही बढ़िया चलाया।
तुमने देखा भैया चला लिया न, मैंने.
ट्रैक्टर ट्रेक्टर तो तुमने चला लिया। पर तुमको पता है उसमे इम्प्लीमेंट कैसे जोड़ते हैं, उसकी सेटिंग कैसे होती है और खेतो में काम कैसे होता है।
अरे इन सबके बारे में तो बहुत पढ़ा है किताबों में। तुम क्या सिखाओगे?
तुम बिल्कुल किताबी कीड़ा हो, यह मान लो, तुम इंजीनियर हो न। तुमको तो पता होना चाहिए किताबी ज्ञान क्या होता है और प्रैक्टिकल क्या होता है।
ऐसा है तो तुम सिखा 2 सीखा.
तो 1 ही आदमी सकता है।
अच्छा वो जिसकी तुम बहुत तारीफ कर रहे थे, सही पहचाना तुमने बुला लो.
उसको देखे हम भी चलो बुला लेते हैं। संध्या ये देखो, ये है 3 उंगली वाले जादूगर।
अरे वाह, अभी भी याद है, तुम्हें.
अरे मुझे ये भी याद है। और ये भी याद है कि तुम मुझे आज पी सी और डी सी लीवर के बारे में बताने वाले हो।
यानि की पोजिशन और ड्राफ्ट कंट्रोल लेवर।
बिल्कुल सही कहा। लेकिन ये कौन है?
अरे हाँ इनसे मिलिए ये हमारी बहना है। संध्या और अभी अभी इंजीनियरिंग कर रही है। अभी अभी टेक्टर चलाना सीखी है तो मैंने जब पूछा की इम्प्लीमेंट का सेटिंग और एडजसमेंट आता है तो बोली किताब में पढ़ा है। मैंने। तो मैंने कहा चलो किताब में तो पढ़ा ही है, थोड़ा प्रैक्टिकल नॉलेज भी ले लो। तो मैं आपके पास ले आया।
बहुत सही किया, प्रैक्टिकल नॉलेज बहुत जरूरी होता है और ये प्रैक्टिकल नॉलेज हम ट्रैक्टर पर जा कर ही लेते हैं। चलो तो इंजीनियर साहब इन पी सी डी सी लीवर को आम तौर पर हर डोलिक का बड़ा या छोटा लिवर बोला जाता है।
अच्छा ये तो मुझे पता ही नहीं था।
सबसे पहले हम पी सी लीवर के बारे में जानकारी लेते हैं। पी सी लिवर का उपयोग यानी जो बड़ा लिवर है इसका उपयोग हर कोई इम्प्लीमेंट जो टेक्टर के साथ जुड़ता है उसको उठाने और गिराने में किया जाता है। क्या तुम्हे ड्राफ्ट क्या? मतलब पता है?
हाँ बिल्कुल पता है। बताओ मिट्टी से जो भी रुकावट पैदा होती है उसे ड्राफ्ट कहते हैं।
बिल्कुल सही तो उसी रुकावट के अनुसार इम्प्लीमेंट की गहराई सेट करने के लिए इस ड्राफ्ट लीवर का उपयोग किया जाता है।
तो संध्या कुछ समझ में आया है।
वो सब तो ठीक है लेकिन इम्प्लीमेंट चलाते समय इसकी सेटिंग कैसे करेंगे।
चलो इसे करके देखते हैं। उचित गियर और इंजन आरपीएम चुने। दोनों लोवर को नीचे करते हुए ट्रेक्टर को आगे बढ़ाए। इम्प्लीमेंट पूरी गहराई लेगा और ट्रेक्टर के पिए स्लीप करेंगे। उस समय डी सी लीवर को धीरे धीरे ऊपर उठाएं। जैसे ही इम्प्लीमेंट पर हल्का झटका लगे, डीसी लिवर को थोड़ा ऊपर उठा कर रोक दे। सही गहराई के लिए पी सी लिवर को ऊपर उठा कर सेट करें और दोनों लिवर को लॉक कर दे।
संध्या काम तो बहुत ही बढ़िया हुआ है। मुझे विश्वास है अगर इस तरह से तैयारी की जाए तो काम में कोई रुकावट नहीं आएगी।
लेकिन ये सब करने में ड्राइवर से गलती भी तो हो सकती है।
बात तो सही है तुम्हारी बिल्कुल।
इस गलती को कम करने के लिए 2 प्रकार की टेक्नोलॉजी उपलब्ध है एमक्यू, आरएल और इक्यू।
आरएल।
आपका मतलब मैकेनिकल एंड इलेक्ट्रिकल क्रिकरेजेंलोर है।
एमक्योर की मदद से इम्प्लीमेंट को तेजी से उठाने में और गिराने में मदद होती है। अच्छा और साथ ही साथ जुताई की गहराई भी समान मिलती है।
और क्यू आर, एल, इ, क्यू, आर.
एल से भरी ऐसी बाहरी इम्प्लीमेंट भी अकेला आदमी उसे जोड़ सकता है और निकाल भी सकता है।
अरे वाह इस टेक्नोलॉजी का सही फायदा मुझे आज पता लगा।
बिल्कुल इससे ड्राइवर की गलती की गुंजाइश भी बहुत कम होती है।
मतलब भैया अब हमारे हैड्रोलिक रिवर्सिबल प्लो से काम करने में और आसानी होगी.
बात तो तुम्हारी सही है संध्या और.
1 जरुरी बात सिलेक्टर कंट्रोल यानी एस सी बी। इससे आप रिवर्सिबल, एमबी, प्लाऊ, लोडर, डोजर और फ्रंट ब्लेड भी आसानी से चला सकते हो।
तो संध्या ये सारी जानकारी तुम्हारे काम में आएगी या नहीं।
बिल्कुल सही ये सिर्फ मेरे लिए ही नहीं, मेरे जैसे दुसरे, स्टूडेंट्स और किसान बंधुओं के लिए भी उतना ही फायदेमंद है। और इस तरह के वीडियो को देखने के लिए देखना न भूलें ट्रैक्टर एंड तरुण।
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