Ultimate Tractor Buying Guide | Implements and Top 4WD Tractors | Tractor and Tarun | Bengali (Ep37)

Tarun walks through how to buy a tractor, covering horsepower, 4WD versus 2WD, brand choice, test driving, and resale value. He explains what implements work with different tractors and ranks the top 4WD models to consider.
नमस्कार दोस्तों, ट्रेक्टर तरुण के इस एपिसोड में आपका स्वागत है। जब भी हम कोई चीज खरीदते हैं तो हम उसकी पूरी जानकारी लेते हैं और लेनी भी चाहिए क्योंकि उसके बदले हम अपनी कड़ी मेहनत की कमाई जो देते हैं। तो आज के इस एपिसोड में हम जानेंगे की ट्रेक्टर खरीदने से पहले आपको किन बातों का ध्यान रखना चाहिए। तो चलिए शुरू करते है। ट्रेक्टर खरीदने से पहले अपने आप से पूछे जाने वाले सवाल जैसे की क्या मुझे ट्रेक्टर रेंड पे नहीं मिल पा रहा है? या मुझे ट्रेक्टर रेंड पे टाइम पे नहीं मिल रहा है? जब मैं ट्रैक्टर खरीदूंगा तो क्या मैं सिर्फ उसे अपने खेती के काम करूँगा? या मैं उसे रेंट पर भी दूंगा? क्या मैं ट्रेक्टर खरीदने के बाद अपने कृषि कार्य के अलावा और भी कार्य कर सकता हूँ जैसे की दुलाई, इंटर, कल्चर लैंड लेवलिंग या थ्रेशर चलाना जिससे की मेरी आमदनी बढ़े। साथ ही साथ आपको यह कैलकुलेट करना जरुरी है की जब आप ट्रेक्टर रेंट पर लेते हैं तो आपको कितना खर्चा आता है। और जब आप खुद का ट्रेक्टर लेंगे और उससे जब कृषि कार्य करेंगे तो कितना खर्चा आता है। जब आप ट्रेक्टर खरीदेंगे, उसकी भरपाई कब होगी, कितने समय में होगी और आपको मुनाफा मिलना कब से शुरू होगा। इन सारी बातों को ध्यान में रखकर आप ट्रेक्टर खरीदने का डिसीजन ले। ट्रेक्टर खरीदने का डिसीजन लेने के बाद दिमाग में आने वाला सबसे महत्वपूर्ण सवाल कि मैं, कितने एच पी का ट्रेक्टर खरीदूं और ये सवाल है भी महत्वपूर्ण क्यूँकी आपके ट्रेक्टर की होस पॉवर आपके काम के ऊपर निर्भर करती है। अगर आप सिर्फ अपने खेती के कार्य करना चाहते हैं और आपके खेत मिट्टी अगर नरम है तो आप 30 से 40 एचपी का ट्रैक्टर ले सकते हैं। अगर आपके खेत की मिट्टी सख्त है तो आपको 40 से 50 एचपी का ट्रैक्टर देखना चाहिए। खेती के काम के साथ साथ यदि आपको अन्य कार्य जैसे ढुलाई, थ्रेशर, चलाना, बड़े इम्प्लीमेंट का उपयोग जैसे की थ्री, बोटममंबीप्लाऊ वैक्यूम प्लांटर का उपयोग करना है तो आपको 50 एचपी से ऊपर का ट्रैक्टर लेना चाहिए। वैसे तो ढुलाई का काम आप कम एचपी के ट्रेक्टर से भी कर पाते हैं। लेकिन अगर चढाई ज्यादा है, लोड ज्यादा है तो वहाँ 50 एचपी से ऊपर का ही ट्रेक्टर अच्छे से काम कर पाता है। तो ट्रेक्टर के हॉसपावर का सलेक्शन आपके कार्य के अनुरूप होना चाहिए। ट्रेक्टर की हॉस पॉवर फाइनल करने के बाद आपको यह देखना चाहिए की टू विल ड्राइव ले या फोर विल ड्राइव लें। वैसे तो टेक्नोलॉजी के जमाने में जब काम करने के तरीके चेंज हो रहे हैं तो आपको फोर विल ड्राइव ही लेना चाहिए ताकि आप हर तरह के कृषि कार्य आसानी से कर पाए। ट्रेक्टर में फोर विल ड्राइव होने की वजह से आप बडे, से, बडे इम्प्लीमेंट के साथ आसानी से काम कर सकते हैं। फोर विल ड्राइव ट्रेक्टर में विल स्लीपेज कम होता है, ट्रैक्शन ज्यादा मिलता है और सोयल कंपैक्शन भी कम होता है। साथ ही साथ आपको मिल जाते हैं। आगे के बड़े टायर तो ओवर ऑल आपकी प्रोडक्टिविटी बढ़ती है। ट्रेक्टर की होस पॉवर उसके बाद टू विल या फोर वील ड्राइव फाइनल करने के बाद आपको ट्रेक्टर के ब्रैंड और उसकी टेस्ट ड्राइव के बारे में सोचना चाहिए। वैसे तो बाजार में ट्रेक्टर की कई कंपनियां मौजूद हैं। आपको ऐसी कंपनी के बारे में सोचना चाहिए जिन्हें ट्रेक्टर बनाने की महारत हासिल हो। जिनके ट्रेक्टर के पार्ट्स उच्च कोटि के हों ताकि आपको उन्हें बार बार बदलने की जरुरत न पड़े। उसका मेंटेनेंस आपके काम के अनुरूप हो और डीलरशिप पर आसानी से पहुंचा जा सके। ये सारी बातें देखने के बाद आप जिस भी कंपनी का ट्रैक्टर कंसीडर करें उसका डेमो और टेस्ट ड्राइव बुक करें। आइए अब जानते हैं की टेस्ट ड्राइव में आपको किन किन बातों का ध्यान रखना है। तो चलिए देखते हैं जब भी आप ट्रेक्टर की टेस्ट ड्राइव करे तो ये देखे की ट्रेक्टर में चढ़ना और उतरना कितना आसान होता है। अब ये देखे की ट्रेक्टर की सीट कितनी कंफर्टेबल है उसके एडजेसमेंट चेक करें। जब आप घंटो काम करते हैं तो सीट का कंफर्टेबल होना बहुत जरुरी है। ट्रेक्टर आरोप बैठने के बाद यह जरूर देखे की उसमे दिए गए लिवर जैसे गियर, लिवर, पी, सी, डी, सी, पी, टी, ओ, रेंज, लिवर को ऑपरेट करना कितना आसान है। 1 और महत्वपूर्ण बात ट्रैक्टर में पावर स्टेरिंग होना बहुत अच्छी बात है। हम ट्रेक्टर से कई घंटों तक बिना रुके काम करते हैं। अगर ट्रेक्टर में पावर स्टेरिंग होगा तो हम बिना थकावट के कई घंटो तक आसानी से काम कर सकते है। आज कल जैसे मोबाइल हमारी लाइफ का पार्ट बन चुका है। अगर ट्रेक्टर में भी आपको मोबाइल चार्जर और मोबाइल रखने की जगह मिल जाए तो क्या बात है। ट्रेक्टर की सीट पर बैठने के बाद यह भी देखे की फ्रंट विजिबिलिटी कैसी है। अगर फ्रंट विजिबिलिटी अच्छी होगी तो आपको ट्रेक्टर ड्राइव करना आसान होगा। साथ ही साथ आप ट्रेक्टर में ये भी देख सकते हैं कि आपके ट्रेक्टर के इंजन में पिस्टन कुलिंग जेट जैसा फीचर है क्या जो की आपके इंजन की लाइफ को बढाता है। ट्रांसमिशन में टॉप शेफ लुब्रिकेशन जैसा फीचर है क्या जिसकी वजह से ट्रांसमिशन की लाइफ बढ़ती है। 1 और महत्वपूर्ण बात जो है ट्रेक्टर की वारंटी के बारे में, ट्रेक्टर की वारेंटी के बारे में जानकारी डीलरशिप से जरूर लें। इन फीचरों के अलावा और भी बहुत सारे फीचर आते हैं ट्रैक्टर्स में आप उन्हें अच्छे से देखे और समझे और अपनी आवश्यकता के अनुसार ट्रैक्टर खरीदने का डिसीजन ले। ट्रेक्टर में 1 खास बात और देखी जाती है वो है रीसेल वैल्यू तो जब आप अपना डिसीजन बनाये तो ये भी देखें कि उस ब्रांड के ट्रेक्टर की रीसेल वैल्यू कैसी है। जब फ्यूचर में अगर आप ट्रेक्टर को एक्सचेंज करेंगे तो आपको उसका अच्छा वैल्यू मिलना चाहिए। तो दोस्तों मुझे यकीन है ये सारी जानकारी आपके लिए बहुत ही मददगार साबित होगी और जब भी आप ट्रेक्टर खरीदेंगे तो इन बिंदुओं पर बिल्कुल ध्यान देंगे तो इसी तरह की जानकारी पाने के लिए देखते रहे ट्रैक्टर एंड तरुण।
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