Uncut Stories | Mr. Genabhai Patel | Organic Farming using Mechanization with John Deere

This is a YouTube video titled "Uncut Stories | Mr. Genabhai Patel | Organic Farming using Mechanization with John Deere" featuring an interview conducted in Hindi with Mr. Genabhai Patel from Gujarat, India. The content is an in-depth personal story and discussion about his journey in modern and organic farming, particularly pomegranate cultivation, his innovations, challenges, and contributions to local farmers. The interview highlights his background, farming techniques, community impact, and recognition including national awards. The format is a single-speaker interview with an interviewer, not a multi-speaker conversation involving Francisco Jimenez.
नमस्कार दोस्तों, अनकट स्टोरीज में आपका स्वागत है। जैसा की आप जानते है अनकट स्टोरीज में हम ऐसी स्टोरी शेयर करते हैं जो कि आपको नए तरीके से कृषि कार्य करने के लिए प्रोत्साहित करती है। इस बार जो स्टोरी हम शेयर करने वाले है वो है श्री गेना भाई पटेल की स्टोरी जो कि गुजरात के बनासकाठा डिस्ट्रिक्ट के लाखनी तहसील के रहने वाले हैं। इन्होंने अनार की खेती बहुत ही आधुनिक तरीके से की और उन्होंने न सिर्फ अपने आप को अपनी फैमिली को आगे बढ़ाया बल्कि प्रदेश और देश का भी नाम ऊपर किया। इन्हें कई तरह के नेशनल और इंटरनेशनल अवॉर्ड मिल चुके हैं और भारत सरकार ने इन्हें पदम श्री से भी सम्मानित किया है। तो देर किस बात की आइये मिलते हैं नमस्कार पटेल साहब आपका समय देने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद। तो सबसे पहला प्रश्न किसान भाइयों की तरफ से आपका बचपन कैसा रहा? आपकी कृषि में नए कार्य करने की रुचि कैसे बड़ी और आपने क्या पढाई.
की है मैं मेरे पिता जी कि कार करते थे और छोटा था, 1 साल की आयु में हो गया था और उसका कोई इलाज नहीं हुआ। उसके बाद मेरा 67 साल का हुआ। उस टाइम मेरे लिए मेरे पिताजी ने मेरे गाँव में स्कूल चालू किया था और मेरे भाई मेरे बड़े पैसा जो मुझे कंधे पर उठा के मुझे स्कूल में लेकर जाते थे। तो मैं कुछ टाइम जो गाँव का लड़का रहता है उसको बाहर जाने में जो दिव्यांग होते है उनके लिए बहुत तकलीफ रहती है। तो मैं पढना भी नहीं चाहता कम टाइम के मेरे को पढ़ना नहीं है, घर छोड़ जाना नहीं था लेकिन मेरे बड़े भाई कंधे पर उठाकर ले जाते थे। मैं गंदा पे मारता रहता था मेरा नहीं जाना नहीं जाना है लेकिन 67 दिन के बाद मुझे अच्छा लगा पढने के लिए और पढ़ने में मैं आता था। सभी लोगों में जो बच्चे पढ़ते थे उसमें सबसे पहले नहीं आता था। पढने में मैं बहुत होशियार था, 1 बार मैं चौपड़ी पढ लेता था। उसके बाद में मेरे को पढने की कोई जरूरत नहीं रहती थी। तो फिर पढने के बाद यह 45 कक्षा पूरा पढ़ा और उसके बाद में मैं दिशा चला गया। तो मेरे जाने आने में बहुत दिक्कत होता था। मेरे पिताजी ने उस टाइम बहुत आनंद हुआ। 1 छात्रा स्कूल में स्कूल में बहुत अच्छी तरह से दिव्यांग होते हुए मैं पढने में होशियार था तो मुझे बहुत अच्छा रेस्पोंस मिलता था और उसके बाद में मैं 11 तक पढ़ा। फिर बाद में मैंने बस मेरे कोई पढ़े हुए नहीं थे इसलिए मैंने छोड़.
दिया पढाई तो ग्यारहवीं के बाद आपने पढाई छोड़ दी।
फिर मैं यहाँ गाँव में चला आया और यहाँ पर बैठा रहता था। 2424 रेड बिगाड़ कोई वो टीचिंग नहीं था, नहीं तो मैं वो भी कुछ कर लेता। फिर बैठा मैं सोचता था कि कुछ करना चाहिए अपने से बैठे बैठे कैसे खा सकते है? तो में मेरे भाई जो टेक्टर चलाते थे, कभी चलता था उस टाइम मैं गाड़ी में आता था जाता था तो उस ड्राइवर को देखता था कि यह कैसे चला रहे है, मेरे भाई टक्टर चलाते मेरे पास में बैठा था की कैसे चला रहे। तो मैं चलाने के लिए सीख गया और बहुत अच्छी तरह अच्छा ड्राइवर बन गया। जो ड्राइवर जो डीजल की पत करते उससे हर घंटे में 1 लीटर डीजल बचा दा था, वो 1 खूबी होती है चलाने की। तो मैंने करीबन 67 साल एक्टर खेती में मेरे पिताजी को बाइयों को हेल्प किया। हमारे गाँव में 67 बड़े किसान हैं, छोटे छोटे किसान हैं। तो उनको बहुत परेशानी रहती थी, किसान का जब देखता था तो ऐसा लगता था कि किसान को 10 रुपए चाहिए। तो हमारे गाँव के टीचर के पास वो लेने के लिए जाते थे। तो मैं सोचता था कि कुछ ऐसा किया जाए की उनकी वजह से किसान को किसी के आगे हाथ नहीं जोड़ना चाहिए। तो वो करीबन 80 साल हो गयी, ऐसा मुझे कैसी में हमारे गाँव में.
असे कैसी साल की 1980 सौ 81 की बात कर हाँ और तब तक आप खेती तो करने लग गए, खेती खेती करने लगे थे, समय क्या फसल.
लेते थे, आप कम समय में हमारे यहाँ पर जीरा होता था, कैस्टर होता होता था, फिर बाद में मैं सोचता रहता था। तो उनके लिए मैंने 1 मंडल बनाया किसान किसान का समूह बन के जो कुछ मेरा ख्याल ऐसा था, कुछ अच्छा हो सकता है।
तो उन किसानों ने उस समय पर आपको भरोसा कैसे किया कि चलो मंडल.
बनाते हैं, वो उनको बताया मैंने किसान जो हमारे जो जिला के कृषि अधिकारी देते थे, उनको बुलाकर यहाँ मीटिंग करवाया और मीटिंग करवाने के बाद सभी को थोड़ा सा लगा। नहीं ये बात सही है। तो अच्छा छी लेके आये। हम अच्छा छीलकर किसानो को सबशीडाइजवालाछीट दिया.
वो किस चीज का सीट था, वो.
राय का, राई का छीटा। और उसी टाइम बहुत अच्छी राय हुई थी, जो हमारे जो परंपरागत राह करते थे उससे भी अच्छा होने लगा था।
तो फिर आपने राय की खेती, इस रिया में, उसके बाद फिर आधुनिक खेती की तरफ आप कैसे मुड़े आधुनिक खेती.
में मैं क्या करता था कि प्याला मेरे तो वो टैक्टर चला, लेकिन मैंने अनार बोया, उसी टाइम तो मेरे को अनार में कोई स्प्रे करना है, कोई जो गाय आधारित खेती करते हैं, जो प्राकृतिक खेती करते हैं, तो उसका जो युवा मूरत रहता है, वो छोड़ने के लिए हमने ब्लोवर बसाया था। तो ब्लोवर में वो टेक्टर ऐसी अच्छा है, ये टेक्टर जॉन डियर का था, मैंने देखा तो मेरे पास 1 जॉन डियर तपन था और दूसरा जॉन डियर एक्टर मैंने 50 साल खरीदा था, क्यूंकि उनकी जड़ ज्यादा रहती है तो वो छूटने के लिए, उसके ऊपर जो जो जीवामृत वगैरह छांटना है बहुत अच्छी तरह से या इसका जो रोटावेटर चलाना है तो वो उसकी अच्छी तरह से चलता है। तो मैंने वो जॉन डियर ट्रेक्टर पसंद.
किया तो जान डियर ट्रैक्टर पसंद करना और फिर उसको खरीद के आपन खेती में खुद से उसका उपयोग किया। तो जान डियर ट्रैक्टर खरीदने का कोई मतलब आपके दिमाग में कैसे आया कि जानडियर लेना चाहिए जो मेरे पास पहले.
रेक्टर था उससे ज्यादा शक्तिशाली था और उसकी बहुत अच्छी थी। और किसान को क्या है जितना जमीन का लेयर है, जो जमीन में वो आधे फुट फुट लेर तोड़ता है लेकिन जान डियर 1 फुट डेड फुट चला जाता है इसकी कल्टिवेटर तो उसकी वजह से मुझे बहुत अच्छा लगा इसलिए मैंने यह पसंद कर लिया।
तो हमें आप यह बताइए कि जब आप अनार की खेती करने लगे और उसमे आपको जो फायदा हुआ लेकिन उसके पहले भी आपने कई प्रयोग किए तो ये प्रयोग करने का सोच, ये कैसे.
आपने शुरू किया है किसान किसान है न किसान रोज प्रयोग करता रहता है, किसान को प्रयोग नहीं करेंगे तो उसको नया नया कुछ, न कुछ करना ही पड़ता है नहीं तो वो टिक नहीं सकता है तो उसी को तो जब उसके ऊपर आपत्ति आती है, उसमे से कुछ सीखता है, जब आपत्ति आती है कभी भी आपत्ति आती है तो उसके बारे में वो सोचता रहता है कि मैं इसके लिए क्या करूँ, उसे कैसे किया जाए तो उसका असर पड़ सके तो वो हम करते रहते थे लेकिन हमारे यहाँ पर ये क्या है 1 तो दोरा धरती ऐसा है बैठे अंदर जमीन है और 1 पानी की दिक्कत बहुत है पानी हमारे यहाँ 708 सौ चले गए, हमको अनार लगाने से पहले हमारे यहाँ उन्होंने सुदाम कैनाल की वजह से हम पानी रहा था, वो होने लगा और उसकी वजह से हमारे यहाँ अनार की खेती का मैंने सोचा कि ऐसा किया जाए, मैं मेरे लिए भी सोचता मेरी 1 सोच थी, मैं हर किसान जो कर सकते वो मैं नहीं कर सकता, पानी का जो इसका क्या रहा है, बोलते हैं, उसमें पानी चला जाता है तो वो ज्यादा पानी जाता है, आय कम होती है। तो हमने सोचा कि हम ड्रीपेरिगेशन करें और बहु वर्ष वर्ष के बाद में जो पौधे का जो मैंने सोचा आम कर सोचा। और भी मैंने बहुत इसका गहन न्यासा आपने ट्राई किया, किया, चीकू का किया लेकिन उससे ज्यादा बेचने के लिए और सबसे अच्छा किताब में पढ़ा था की 1 अनार सौ बीमार को मिटाती है तो मैंने अनार के लिए अध्ययन किया इसके लिए मैं राजस्थान गया, मैं महाराष्ट्र गया, क भूमि में गया, हमारा जो क्लाइमेंट है वो अनार के लिए बहुत.
बढ़िया तो ये आपको कैसे पता लगा कि आपके एरिया का क्लाइमेट जो है वो अनार के लिए बहुत अच्छा है.
जो हमारा जो, इसे मिलिटी, जो बोलते हैं, मिलिटी पॉवर जो इसमें हवा में भेज रहा है वो कम है, यहाँ की जमीन सैंडी है और पानी कितना भी गिरता है, पानी 10 इंच, 20 इंच, पानी गिरता है तो अभी वो आधे घंटे में की लीक हो जाता है तो उसकी वजह से हमको ऐसा पक्का किसान की नजर। तो मालूम हो गया कि पक्का ये.
अनार होगा होगा तो कितने साल लगे.
इस प्रयोग को सफल होने में 34 साल निकल गए थे, किसी को बोलता था तो वो बोलते थे नहीं हो सकता मैंने भी नहीं देखा मैंने सत्य नारायण भगवान की कथा होती थी, उस टाइम वो फ्रूट लाते थे, लाते थे, वो 12 अनार लाते थे, ऐसे ही देखा था लेकिन अनार के बारे में किसी को कुछ मालूम नहीं था। लेकिन जब देखा और मैं महाराष्ट्र चला गया महाराष्ट्र में किसानों का जो खेत में देखा, इनका जो जमीन है उनकी वजह से हमारा जमीन थोड़ा हल्का है लेकिन अच्छा अनार हो जाएगा तो कैसा.
हुआ, पहली फसल कैसी रही।
फिर हमने 18 हजार पौधे लाकर लगा दिए। भाइयों को पूछा की आप साथ में आते है तो बहुत अच्छा रहेगा तो भाइयों ने भी विश्वास किया नहीं यह करता है तो कुछ अच्छा होगा तो हमने अनार लगा दिया लगा देने के बाद में डेढ़ साल के बाद 2 साल में तैयार हो गए तो उसी टाइम बहुत अच्छी तरह से अनार, बहुत बढ़िया बड़े बड़े हो गए थे। लेकिन मार्केट का थोड़ा मालूम नहीं था, का बेचना है कैसे करना है तो 12 साल रहा लेकिन फिर हमने इन्टरनेट में रखता हूँ माध्यम से कंप्यूर इंटरनेट भी उस करता हूँ। तो उनकी वजह से मैंने व्यापारियों को ऐसे रखा उसके ऊपर तो व्यापारी लोग यहाँ पर आये जो बार पश्चिम बंगाल के हैं, ये पुन है, हमारे जयपुर ऐसी है.
ऐसी को फोटो वगैरह भेजते.
थे, यहाँ है भेजते थे, बहुत अच्छा अनार होता था हमारा एकदम जो हमने महाराष्ट्र में देखा उसका जो नाप रहता है उसका स्वीटनेस तो महाराष्ट्र में 20 का मेरा यहाँ पर ट्वेंटी थ्री अच्छा बहुत बढ़िया अनार होता था हमारे यहाँ के नारा हुआ पंद्रह 20 दिन, 30 दिन तक बिगड़ता नहीं है।
तो फिर ये जब आपकी फसल अच्छी हुई आपको मुनाफा भी मिलने लगा तो बाकी के किसान फिर आपको देख के आपके पास आने लगे, आस पास के.
जो हमारे गाँव के, सिवा के जो लोग रहते थे उन्होंने सब बोलते थे कि नहीं यह नहीं होगा नहीं होगा लेकिन हमारे गाँव के किसान तो हमारे ऊपर नहीं, ये कुछ करता है तो कुछ अच्छा ही करेगा। लेकिन जब हो गया उसके बाद में मैंने किसानों को सभी को एकत्रित किया कि भाई आप आ जाइए इसमें जुड़िए क्यूंकी थोड़ा है तो इसको बेचने में भी दिक्कत रहता है, आप सब जुड़ेंगे तो बहुत अच्छा होगा और जुड़ने के बाद मैं बहुत अच्छा हुआ। जो जो हमारे छोटे छोटे किसान थे उनको दिक्कत थी तो उन्होंने उनको मैंने पौधे भी अवेलेबल कराए और उनके पास पैसा नहीं था तो मैंने दे दिया अगर आप बाद में दे देना। मुझे और मेरे टैक्टर के ऊपर मैंने वो स्प्रेयर पंप वगैरह लेके जा के उनको सब लगवा के 12 साल में सब बच्चे हो गए। जो मैं आपको बोलू तो 1 बिगा जमीन से 10 से 12 हजार की आय हो रही थी। और अनार लगाने के बाद मैं मैं आपको बोलू हमारा यहाँ पर विग में ढाई सौ पौधे आते हैं तो 1 पौधे पर बोलते हैं तो किलो फ्रूट आते है तो ज्यादा, नहीं मान तो 50 रूपए का पर केजी है तो 1 पौधा देता है ढाई सौ पौधे में ढाई लाख 3 लाख रुपए की.
आय होती तो ये अनार की खेती.
से होने लगा, अनार की खेती से.
हो, यहाँ पे आपने कितने किसानों को आपके साथ जोड़ा।
मेरे गाँव के सब किसान जुड़ गए। फिर तो बहुत स्प्रेड हुआ उनका तो पूरे जिले में 12 हजार एक्टर में अनार लगा, फिर हमारे पास में राजस्थान ने राजस्थान में भी 12 13 हजार एक्टर में लगा, कक्ष में लगा, पूरे गुजरात में करीबन 40 हजार एक्टर में अनार का वो हुआ और मेरे ख्याल से 5 करोड़ पौधे। फिर यहाँ पर मेरे घर पे बहुत किसान आने लग गया है, हर सुबह मैं 67 बजे मैं इधर बैठा था, आज तक 70 से 80 हजार लोगों ने, किसानों ने मेरे खेत की मुलाकात.
की, आपसे सलाह ले के बिल आगे बढ़े, आगे बढ़े। तो जैसे आपने बहुत सारे किसानो के लिए काम किया, आपने उनको जोड़ा, उनको फायदा होने लगा, आपको बहुत सारे अवॉर्ड भी मिले इसके लिए। फिर आपको पदम श्री से भी नवाजा गया तो ये यात्रा कैसी रही।
अवॉर्ड तो जो मेरे को राजस्थान से भी अवॉर्ड मिला था। फिर बाद में मेरे को 10 नेशनल एवार्ड मिला है, मेरे को इजरेल प्रधानमंत्री थे, व्ंजामेतन्होंने फेयर को सम्मानित किया था और मेरा मुझे भारत, गौरव, अवॉर्ड, ब्रिटिश, पार्लामेंट, ऑफ़, लंदन में भी मिला है। फिर बाद में ये सब अवॉर्ड और सब मेरा काम जो मैं इधर 1 बार बैठे बैठे देख रहा था तो हमारे टीवी पर चल रहा था की पदमश्री विभूषण का नामांकन हो रहा है तो मैंने भी उसमें वो किया नहीं सबमिट नहीं हो रहा था लेकिन मैं 1 काम लेता हूँ तो उसके बारे में पूरा पूरा एंड तक उसका काम रखता हूँ छोड़ना नहीं है तो मैं बैठा रहा 12 बजे तक 12 बजे तक उसमें स्पेस मिल गया और मेरा फॉर्म था वो सबमिट हो गया। फिर मैं भूल गया था 26 जनवरी 2017 के दिन मुझे कॉल आया सूबे में आपको भारत सरकार रही है। 13 4 2017 के दिन मुझे दिल्ली बुलाया गया, दरबार हॉल जो हमारे जो अंग्रेजों के वाइसर बैठते है वही दरबार में हमारे राष्ट्रपति जी बैठते है तो वहाँ पूरे प्रधानमंत्री का विरोध पक्ष के लोग रहते हैं और उसके बीच में पदमश्री के लिए बुलाया गया और मैं विल चेयर पर बैठ गया था तो वहाँ से माननीय राष्ट्रपति जी मेरे सामने आके मुझे पदमश्री का बहुत अच्छी बात.
है, बहुत ही खुशी की बात है.
इसी के लिए मैं आज प्रधानमंत्री जी और सभी किसान भाइयों को भी मैं अब मानता हूँ जिनकी किसी की दुआ से मुझे श्री मिला है नहीं तो ये सरकारी गोल या छोटा गाँव है यहाँ पर पाकिस्तान की बॉर्डर पर हूँ और 1 छोटे किसान को 1 कर को प्रधानमंत्री जी ने भी 1 हीरो बनाया है और पद पद में श्री सम्मान दिया है।
मुझे तो आप हमारे किसान भाइयों को क्या सलाह देंगे कि वो किसानी करते करते अपनी आय को बढ़ा सके, कैसे आधुनिक खेती करे तो आपकी सलाह क्या होगी?
मैं किसान भाइयों को बोलना चाहता हूँ कि 1 तो पहले पानी बचाइए जल है तो जीवन है और अपने को ट्रिकेशनकरनाहै इसमें फवारा बदती है और ड्रिपइरिगेशन है तो हमें ड्रिपेरिगेशनही करना है और जितना कम पानी में हमारे माननीय प्रधानमंत्री जी बोलते है पर ड्रॉप मोर क्रॉप 11 बूंद से ज्यादा कैसे हो सके तो वो हमें करना है किसान भाइयों में 1 में 1 दिव्यांग किसान हूँ लेकिन आप तो सब सशक्त है आपके पास में सकती है तो आप तो कुछ भी कर सकते सब बोलते हैं बूढे हो गए कैसे बूढे होते आदमी बूढा कहाँ से होते है मैं किसान भाई आपको बोलता हूँ की आदमी बुडा माइंड से होता है शरीर से तो कुछ नहीं होता है आप माइंड से 80 साल के हो तो आप जवान हो तो 1 बात बता में भी सफल होना नहीं चाहता हूँ और मैं आगे भी कुछ न कुछ ऐसे शोध करूँगा और 1 मैं किसान भाइयों को बोलना चाहता हूँ की अभी अपना 1 प्राकृतिक खेती करना है तो कुल मिला.
के आधुनिक खेती करने की जरुरत है बिल्कुल आपका बहुत बहुत धन्यवाद, आपका समय देने के लिए बहुत बहुत बहुत धन्यवाद.
आपका भी बहुत बहुत धन्यवाद तो दोस्तों.
कैसा लगा आपको श्री गेना भाई पटेल से मिले अगर आपको अनार की खेती से रिलेटेड कोई भी क्वेश्चन हो तो आप कमेंट बॉक्स के जरिए पूछ सकते हैं हम जरूर गेना भाई के जरिए उनका आंसर आपको दिलवाने की कोशिश करेंगे। तो मिलते हैं अगले अनकट स्टोरी में तब तक के लिए धन्यवाद।
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