Uncut Stories | Mr. Santok Singh | Farming with Purpose and Impact

This is a YouTube video titled "Uncut Stories | Mr. Santok Singh | Farming with Purpose and Impact" featuring a detailed monologue by Mr. Santok Singh, a farmer from Bhopal. The content, recorded in Hindi, covers his journey and innovative approach to modern farming, including mechanization, cooperative farming, retail initiatives, and organic agriculture. He shares his experiences and advice for youth to treat agriculture as a business and contribute to society. The video was created in July 2025 and presents a personal and educational narrative rather than a conversation.
किसानी का तरीका ऐसे बिजनेस होना चाहिए न कि किसानी का तरीका किसान की तरह हो। जब बड़ी लैंड में सारी चीज मिली तो मुझे बेनिफिट ज्यादा होने की वजह से खर्चे और कम हो गए और पैदावार भी बड़ी। फर्म टो रिटेल हमने किया, फार्म टू किचिन किया और फॉर्म टो माउंट किया। 6 700 लोगो से हमारी पूरी टीम है जो इसमें काम कर रही है। हम ने जो सोसाइटी से कमाया है उस सोसाइटी को भी कुछ दे और अपनी एजुकेशन जो मिला है उसको सारो में बांटे नमस्कार। मेरा नाम संतोष सिंह है, मैं भोपाल का रहवासी हूँ, मेरी पूरी एजुकेशन जो है वो भोपाल में हुई है। 18 साल की उम्र जब मेरी हुई थी तो मैंने अपना फादर का बिजनेस था बॉम्बे में और दूसरी जगह पर 71 साल मेरे बॉम्बे रहने का सिर में इंदौर आया। मेरे फादर का शुरू से ही जमीन का बिजनेस था। यहाँ पर भी हमारी रियल स्टेट का काम और एग्रीकल्चर का बेस हमारा जो है वो एग्रीकल्चर का बेस हुआ करता था। 2000 पंद्रह में मेरा मन करा कि मैं फार्मिंग पर आऊं अपनी कुछ जमीनें देखो तो 5 एकड़ मैंने पहले अपने फादर से ली। जमीन ट्रायल बेसेस पर मैं उसको कैसे कर सकता हूँ। तो मैंने उन्हीं के हिसाब से ट्रेडिशनल, पूरा बिजनेस, पूरा फार्मिंग मैं अपने करीब। मैंने। 1 साल में उसने देखा की मुझे कुछ ऐसा बेनिफिट नहीं मिला इसमें लेबर की भी प्रॉब्लम हुई मुझे खाद बीज कभी समझ में नहीं आया। कुछ नही आया तो मैंने दूसरे साल भी वही किया और उस साल में मैंने स्टडी की इसमें लेबर कॉस्ट को घटाने के लिए जो अच्छी मशीन रीज है उस मशीन से काम करूँ तो मैंने स्टडी करी। पूरे साल में तो सारी काफी कंपनी देखी, इक्यूपमेंट देखे। मुझे जो स्टडी मालूम पड़ा कि ज्वॉइंडियरकी जो सर्विसेज है, उसके जो ट्रेक्टर की पॉवर है, उसकी काम करने की जो क्षमता है और उसकी जो टेक्नोलॉजी है वो बहुत अच्छी लगी। मेरे को तो मैंने सबसे पहले उनकी 2 मशीन डीज ली और ट्रेक्टर लिया। उसको जब मैंने देखा तो बहुत अच्छा मुझे रिजल्ट आया उसका। 1 तो उसने ट्रेक्टर ने काम बहुत अच्छा किया। मशीनरी ने बोनी और बुआई बहुत अच्छी करी, खाद का जो अपना था वो भी काफी कम आ गया और उसकी पैदावार भी बहुत अच्छी हुई। पैदावार अच्छी होने से और कॉस्ट कम होने से मुझे बेनिफिट हुआ। मैंने उसके बाद उसको 20 सेकंड में ट्राई किया। जब मैंने 20 सेकंड में ट्राई किया तब भी मुझे बहुत अच्छा बेनिफिट हुआ। खर्चे कम हुए। फिर मैंने ये सोचा की क्यों न मैं इसको 50 एकड़ में करूँ। अब 50 एकड़ में करने के लिए मेरे को 1 साल और लगा मतलब 17 में मैंने जब 50 एकड़ में करा। फिर जब मैं ने अपना विचार बनाया कि क्यों न मैं सारे किसानों को जोड़ के जो लोग आज की तारीख में पुरानी बदती ही कर रहे हैं, चीजें है तो उसमे उनको मैं मशीनरीज में डालू। तो मशीनरीज जब मैंने उनको बताई उनको समझाई तो कुछ लोग तो समझे नहीं कुछ लोग किसानों को समझ में आया तो मैंने उनको 1 पहले साल तो उनको बोला की मैं रेट टूरेट आपको करके दूंगा सिर्फ मुझे डीजल की कॉस्ट 2 तुम इस मशीन 1 बार अपनी पैदावार करके देखो और मशीनरी से खर्चा अपना जोड़ के देखो उसे तुम्हे समझ में आयेगा कोस्ट वही लगना जो बाजार की कोस्ट है खाली डीजल पर मत लगाना खेती से लेकर कटाई तक का मैंने जब उनको पूरा प्रोजेक्ट बना के दिया तो उनको भी लगा के बेनिफिशल है सब लोगों से बात करने के बाद यह लगा कि सब लोग इंटरेस्टेड हो रहे थे तो फिर मैंने ज्वाइनडर से बात करी तो उसकी जो मशीन रिज थी जैसे सुपर सीडर पहले तो मैंने सीडर ऐसे ही किया था नॉर्मल सीडर से और ज्यादा बेनिफिट के लिए इनकी मशीनरी देखी तो सुपर सीडर आया और वैक्यूम प्लांटर लिया हमने वैक्यूम प्लांटर और इससे जब खेती हमने करी और बाकी किसानों को भी हमने सारी चीज दी तो उससे बेनिफिट हमको मशीनरी से बहुत अच्छी आई डिडेक्शन के साथ साथ बीच का कंजमशन कम हुआ और खाद हमारी बहुत कम लगी और पहला बार हमारी बहुत अच्छी है जो हमें जो है सक्सेस हमारी उससे हमारी बड़ी और हमारे साथ किसान जोड़ना शुरू हो गया और रिटेल बिजनेस में हमने जब चालू किया तो इसको फॉर्म टो रिटेल हमने किया फार्म टू किचिन किया और फॉर्म टू माउत किया तो हमको बेनिफिट उसमें पिचहत्तर परसेंट बढ़ गया मतलब पिचहतर पर को बेनिफिट आया हमने किसानों को जब समझाया जोड़कर आपको जितनी भी क्रॉप लेनी है वो आप लो जितनी आपकी पैदावार हो आपको बाजार में बेचना है आप बाजार में बेचो मुझको अगर आपको देनी है पैदावार तो मुझको दे। 2 तो उनकी पैदावार में मार्केट के रेट से 10 परसेंट ऊपर मैं खरीदता था और डायरेक्ट रिटेल करता था और डायरेक्ट माउंट के लिए मैंने किसान के नाम से किसान ग्रीस और किसान मार्ट है स्टार्ट किया है और उसको आज मुझे काफी अच्छा बेनिफिट मिल रहा है उसमें 1000 लोग रोज खाना खा रहे हैं उधर से जो मौत तक पहुँच रहा है और जो रिटेल दुकान पर आ रहा है वो रिटेल पर मार्ट में पहुँच रहा है महीने में जो भी चीज उनकी लगती है वो उसे यूज कर लेते हैं हम महीने में फिल करके बिलिंग कर देते है इससे हमको बहुत अच्छा बेनिफिट हुआ और हमारे किसानों को भी काफी अच्छा बेनिफिट हुआ कोवेट के बाद ऐसी हमें ये समझ में आया की एग्रीकल्चर ही 1 ऐसा बिजनेस है जो चलता रहा था और इसकी नीट हर 1 इंसान को हमेशा ही रहनी है तब हमने रिटेल को थोड़ा सा और अच्छी तरह बढ़ाने की कोशिश करी तो आउटलेट बढ़ाने पर हमने ध्यान दिया इस बीच में हमारा यह भी ध्यान आया की जब हमारा वो 21 रुपए की थाली अच्छी चल रही थी तो हमने देखा की बहुत जरुरत जैसे ऑटो वाले हो गए स्टूडेंट्स हो गए जो नूडल्स खेलो ले रहे हैं और समोसे खा रहे हैं कचोरी खा रहे ैइस टाइप की चीजें खा के अपना क्यूकी उनकी 1 जरूरत जितनी रहती थी भाई जितना उनके जेब में पैसा रहता था उतना ही आदमी कर सकता है 40 50 रुपए में जो हाइजिन को भी इफेक्ट करता था और उनका पेट भी नहीं भरता था जिस हिसाब से हेल्दी नहीं होता था कवर में हमने बहुत स्टडी करती हें कैसा लगा तो हमने सोचा 1 ऐसा मिशन बनाये अपने किसान की तरफ से हम 1 रसोई खोले तो हमने उसके बाद 1 किसान रसोई का रसोई चालू करेगी जिसके अन्दर हमने 30 रुपए में पूरा खाना मतलब के दाल, चावल, रोटी, सब्जी साढ़े 5 सौ ग्राम खाना 1 आदमी की डाइट करी जिसमे 30 रुपए रखा मतलब 30 रुपए याने के 1 डाइट अपनी 30 दिन की रहेगी 900 रूपए गी और शाम की डाइट भी हम देते थे सुबह शाम की तो 1800 रूपए की तो 1 आम आदमी के लिए यह काफी अच्छा था हेल्दी रहने के लिए भी और सब चीज उसका हमें बहुत अच्छा स्कोर मिला तो आज की तारीख में 6 708 सौ आदमी हमारा वहाँ पे पूरा भोजन लेता है हम भी कई बार देखते है की हम खुद भी चले आते है ऐसा मिशन करते हुए आज हम जो है हमारा 300 किसान साढ़े 300 किसान है वो हमारे साथ जुड़े हुए हैं 6 700 लोग कैसे हमारी पूरी टीम है जो इसमें काम कर रही है और जुड़ी हुई है और जो मैंने इसमें देखा है जो मार्जिन किसानी में है किसानी का तरीका ऐसे बिजनेस होना चाहिए न की किसानी का तरीका किसान की तरह हो उसको 1 मल्टी नेशनल कंपनी की तरह उसको बनाये और बाजार में जो भी चीज दे वो फॉर्म तो किचिन का कॉन्सेप्ट होना चाहिए और वो किचन के लिए क्योंकि जो अपना किसान है वो इतना फाइनेंशियली स्ट्रॉंग नहीं है तो उसके लिए उसको 1 जरूरत या तो सरकार की जरुरत होगी या प्राइवेट वो अपना ऐसा बनाये कोई कांसेप्ट जो कस्टमर को भी अच्छा मिले और कस्टमर्स भी यही चाहता है की हमको अच्छी चीजें मिले और ऑर्गेनिक मिले तो हमने अभी कांसेप्ट चालू किया है कि 1 किसान को कैटल भी रखने को बोला है, कोल्टी भी रखने को बोली है और सब्जी भी लगाने को बोली है, फ्रूट्स भी लगाने को बोला है और रेगुलर क्रॉस दालें वगैरह सारी तरह की चीजे रखने को बोला है डाले भी करे दलन भी करे, चावल भी करे और गेहूं भी करे जिससे कैश क्रॉप भी उसकी बने है तो ये सारे जो हमारे काउंटर्स है ये हम ऑर्गेनिक की तरफ लेकर जा रहे हैं जिससे की जैसे काउ डंक है उससे वो लोग गोबर गैस प्लांट बना लें आजकल गोबर गैस प्लांट में भी सब्सिडी है तो गोबर गैस से गोबर गैस बना लेंगे गोबर गैस से अपनी उनका चूला और इसका खर्चा जो रहता है वो कम हो जाएगा और उसका जो वेस्ट निकलता है वो जो है सारा का सारा उस होता है खेतों में खेतों में, यूज़ होने में क्या होता है उनकी जो जो दवाइयों की कीमत है, फर्टिलाइजर कीमत है वो कम हो जाती है और धीरे धीरे प्रोडेक्शन भी उसी लेवल पर आने लग जाता है जिस लेवल पर मतलब अपनी दवाइयों के थ्रू काम करते है और उसको ऑर्गेनिक की तरफ ले जाने का हमारा मकसद है जो आगे हम सारे किसानो को लेकर वर्किंग कर रहे है ऐसे हमारे छोटा कांसेप्ट यहाँ पर बने है 55 के हमने हमारी जमीनों में 55 बना के कुछ किसान जैसे है जिनके पास खेत नहीं है कुछ नही है तो उनको खेती की जमीन बिक गई है या गलत उनके कारणों से किसी वजह से बिक गई है या कर्जा होने की वजह से बिक गई है तो उनको हमने 55 का कांसेप्ट बनाया हमारी जमीन में और उनको बोला है 2 गायें, रखो, इतना, पोलट्री, रखो और ये सब्जी उगा और ये बाकी अनाज वगैरह होगा और उसको हम ये बोलते है की आपको अगर बाजार में रेट ज्यादा मिले तो आप बाजार में भेज दे नहीं बिके तो हमारी गाड़ी आएगी वो लेकर चली जाएगी और हम शहर में भेज दे तो उनको रेट देते ये अभी हमारा पूरा कांसेप्ट चल रहा है एग्रीकल्चर के 10 साल के मेरे एक्सपीरियंस से में यूथ को ये कहना चाहता हूँ कि एग्रीकल्चर में को आप व्यापार की तरह करें, अपनी जमीनों को, अपने खेतों को और अपने आप को शहरों में न बेचें, अपनी खेती खुद के करें और उसको आधुनिक तरीके से करेंगे तो आपको काफी फायदा होगा, देश को भी फायदा होगा, सोसाइटी को भी फायदा होगा और जब आप सक्सेस हो जाएं तो कोशिश करें कि हम ने जो सोसाइटी से कमाया है उस सोसाइटी को भी कुछ दे और अपनी एजुकेशन जो मिली है उसको सारो में बांटें ये मैं नए युवक को कहना चाहता हूँ धन्यवाद।
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