202402012 - Evening Class

Jaya Pataka Swami recounts childhood stories of Nityananda Prabhu in Hindi, including his rescue mission with sanjivani herb, his parents surrendering him, and his meeting with Sri Chaitanya Mahaprabhu in Navadvip. The class ends with Q&A on vaishnava dress, Tulasi worship, chanting when sick, and sexual ethics.
वैद्य को बुलाए। मैं जानता हूँ कि निताई क्यों मुर्चित हुआ है। 1 बार मैंने कुछ लोगों को भगवान श्री राम का नाटक करते हुए देखा था। उसमे जब महाराज दशरथ ने सुना कि राम वनवास को जा रहे हैं, तब दशरत के किरदार निभाने वाले व्यक्ति ने सचमुच ही अपने प्राणों को त्याग दिया। अरे हाँ, मुझे स्मरण हुआ कि जब हम यहाँ नाटे आरंभ करने जा रहे थे, तब हमें निताई ने यह निर्देश दिया था कि जब वह मुर्चित हो जायेगा, तब हमें हनुमान को संजीवनी बूटी लेने के लिए भेजना होगा। इसका मतलब अब हमें निताई को उठाने के लिए यह नाटक को जारी रखना होगा। और फिर नाटक आगे बढ़ता है। आप सभी चिंतित न हो। मैं लाऊंगा मेरे प्रभु के लिए संजीवनी बूटी। जब श्री हनुमान अपने रास्ते पर थे, तब उन्हें अपने पद से भ्रष्ट करने वहाँ 1 राक्षस ब्राह्मण का वेश लेकर आया। हे परमवीर हनुमान। मैं जानता हूँ आप कितना महान कार्य करने जा रहे हैं। इसलिए मैं चाहता हूँ आपको कर यहाँ रुक कर विश्राम कर लीजिये। आप बड़े थके हुए लग रहे हैं। नहीं ब्राह्मण देव। मुझे मेरे प्रभु के लिए जाना होगा। जब तक वे मूर्ख है, मैं विश्राम नहीं कर सकता। कदाचित आप यहाँ स्नान तो करके जाइए। इसी बहाने मुझे आपकी सेवा करने का अवसर प्राप्त होगा। अच्छा दीदी आप के है। तुम सा करके जैसे ही हनुमान स्नान करने गए। 1 मगरमछ उस जगह आया, प्रणाम परमवीर हनुमान। मुझे इस मगरमच के शरीर से मुक्ति दिलाने के लिए आपका बहुत बहुत धन्यवाद। मैं श्राप के कारण इस मगरमच में परिवर्तित हो गयी थी। आपने मुझे इस भौतिक शरीर से मुक्त किया है। इसलिए मैं आपकी बहुत आभारी हूँ। और हाँ, मैं आपको सूचित करना चाहती हूँ कि जो ब्राह्मण आपकी सेवा करने का नाटक कर रहा है वो 1 राक्षस है जो कि रावन ने भेजा है। अतः आप सावधान रहे। अब मैं आपकी आज्ञा लेती हूँ। तुम ने मेरे साथ छल किया है। अब मैं तुम्हें नहीं छोडूंगा, तुम मुझे नहीं मार सकते हनुमान। हनुमान उसके पश्चात गंद मदन पर्वत पर पहुंचते हैं। जब उन्हें किसी जड़ी बूटी की पहचान नहीं रहती है तब वह पूरा गंद मदन पर्वत अपने 1 हाथ पर उठा कर ले आते हैं। उसके पश्चात वैद्य जड़ी पोटि को लेकर लक्ष्मण को देते हैं। हवा हम सभी बहुत परेशान हो गए थे। भगवान का बहुत बहुत धन्यवाद। तुम सुरक्षित हो। सभी माता पिता नेता की तरफ बड़ी ही आश्चर्य दृष्टि से देख रहे थे और सोच रहे थे की कैसे 1 छोटा सा बालक ऐसे गहन नाटे सीख सकता है। मेरे प्यारे नेता तुमने यह नाटक कहाँ से सीखा? यह सभी मेरी ही तो लीलाएँ हैं, इन्हें भला मैं कैसे भूल सकता हूँ? तो इस तरह निताय अपने बाल्य काल में बहुत सी लीलाएं प्रदर्शित करते थे। नित्यानंद प्रभु ने अपने बाल्य लीलाएं, माता पद्मावती और पिता हड़ाई पंडित के घर पर की थी। उसके पश्चात उन्होंने अपना घर छोड़ने का निश्चय किया। परन्तु वे जानते थे कि उनके माता पिता उन्हें 1 क्षण के लिए भी अपनी आँखों से ओझल नहीं होने दे सकते थे और इसलिए उन्होंने अपनी लीला द्वारा 1 बालक ऐसे गहन नाती सीख सकता है। मेरे प्यारे नेता तुमने यह नाटक कहाँ से सीखा? यह सभी अपनी आँखों से ओझल नहीं होने दे सकते थे और इसलिए उन्होंने अपनी लीला द्वारा 1 प्रबंध किया, नहीं तो वो हो जायेगा। हाँ हाँ, मैं अभी उसे लेकर आती हूँ। तुमने यह नाटक कहाँ से सीखा? ये कहाँ है अपनी लीला द्वारा 1 प्रबंध किया। आइए देखते हैं उस प्रबंध को। लाला, लाला, लाला, लाला, लाला, लाला, लाला, लाला, लाला, पद्मावती, ओह, पदमावती। कहिए स्वामी निताय कहाँ है? वह तो खेलने गया था, परन्तु अभी तक घर नहीं आया। क्या जाओ और उसे ढूंढ कर लाओ, नहीं तो वो हो जाएगा। हाँ हाँ, मैं अभी उसे लेकर आती हूँ। निताय निताई कहा हो मेरे पुत्र? अच्छा तो तुम यहाँ छुपे हो, चलो तुम्हें भूख लगी होगी। न। मैंने तुम्हारे लिए अत्यंत स्वादिष्ट पकवान बनाये हैं। परन्तु माता मुझे अभी और खेलना है। प्रसाद ग्रहण करने के बाद खेलना। पुत्र अभी चलो। उसी समय 1 ब्राह्मण उनके निवास पर पहुँचता है। अलख निरंजन, हरी। हरी ब्राह्मण देवता स्वयं हमारे घर पधारे हैं। इससे बड़ा भाग्य और क्या हो सकता है? हमे इन्हें आमंत्रित करना चाहिए। पद्मावती ओ, पद्मावती जी स्वामी। आज हमें ब्राह्मण देवता की सेवा करने का अवसर मिला है। मैं उन्हें हमारे घर आमंत्रित करता हूँ। तुम जल्दी से स्वादिष्ट प्रसाद की व्यवस्था करो, जो आज्ञा स्वामी। हे ब्राह्मण देवता, हम बहुत ही भाग्यशाली हैं। आप स्वयं हमारे गाँव पधारे। मैं चाहता हूँ, आप हमारे घर आकर हमें कृतार्थ करें? जैसा। तुम कहो पुत्र। हे ब्राह्मण देवता। कृपया मुझे बताइए। मैं आपकी कैसी सेवा कर सकता हूँ? पुत्र। मैं जगह जगह धामों में यात्रा करता हूँ, परन्तु अब इस बूढ़े शरीर का अकेले यात्रा करना सम्भव नहीं। मैं चाहता हूँ। तुम कुछ समय के लिए तुम्हारे पुत्र निताई को मुझे दे। 2 मैं अपने जीवन से भी ज्यादा उसकी रक्षा करूंगा और साथ ही निताई के धाम दर्शन भी हो जायेंगे। ब्राह्मण के मुख से यह शब्द सुनकर, हड़ाई। पंडित के पैरों तले जमीन खिसक जाती है और वह गहन संकट में पड़ जाते हैं। ब्राह्मण देवता ने तो दान में मुझ से मेरी जिंदगी ही मांग ली और अगर मैंने मना किया तो अनर्थ हो जायेगा। जब राजा दशरथ को श्री राम के वनवास जाने की सूचना मिली थी, तो दुख में उन्होने अपने प्राण ही त्याग दिए थे। आज वही दुविधा मुझ पर आई है। हे कृष्ण। कृपया कर? मुझे इस दुविधा से बचाइए। यह सोचते सोचते हराई पंडित अपनी पत्नी के पास गए और उन्होंने पद्मावती को सारी घटना बताई। क्या नहीं, नहीं, नहीं, ब्राह्मण देवता। अगर चाहे तो मेरे प्राण ले ले, परन्तु मैं अपने नेता को नहीं दे सकती।
यह मेरा रदय है।
मेरी हर सांस से देख कर चलती है। मैं इसके बिना नहीं रह पाऊँगी और निताय परन्तु मैंने ब्राह्मण देवता को वचन दिया है। अब मैं मना नहीं कर सकता। नहीं स्वामी निताय सिर्फ, हमारा ही पुत्र नहीं, पूरे चक्र का प्राण है। हम सब पर दया करे स्वामी मैं मेरे पुत्र को नहीं दूंगी। निताय a निताई पुत्र, निताई मचाओ निताई पुत्र, हमें छोड़कर मत जाओ पुत्र, निताई पुत्र नहीं रे पापी। तुम्हारे बिना नेता हमें छोड़कर मत जाओ.
पुत्र.
पद्मावती और हड़ाई पंडित अपने दिल के टुकड़े को जाते हुए देख दर्द भरी वेदना से रो उठते हैं। इस तरह की उनका रोना सुनकर 1 पत्थर भी बिगल जाए। कुछ समय तक अलग अलग धामों में भ्रमण करने के पश्चात अब वह समय आ गया था जिस क्षण के लिए नित्यानंद प्रभु वर्षों वर्षों से प्रतीक्षा कर रहे थे। जिसके लिए उन्होंने इस कलयुग में अवतार लिया था। यह वह समय था जब नित्यानंद प्रभु अपने प्रिय भाई श्री चैतन्य महाप्रभु से मिलने वाले थे। नित्यानंद प्रभु श्री चैतन्य महाप्रभु से मिलने नवद्वीप आए थे। परन्तु वे सीधे उनके समीप न जाते हुए नन्दन आचार्य के घर पर ठहरे थे। चैतन्य महाप्रभु अपनी दिव्य दृष्टि से समझ गए थे कि उनका प्रिय भाई आ गया है। प्रिय भक्तों मुझे ऐसा आभास हो रहा है कि 1 या 2 दिवस में कोई महापुरुष यहाँ आने वाले हैं। आप किस महापुरुष की बात कर रहे हैं? माँ प्रभु मुझे आज 1 बहुत सुन्दर स्वप्न आया जिसमें मैंने 1 बहुत महान व्यक्तित्व के दर्शन किए। जिनकी छवि स्वयं हलदर बलराम की तरह दिख रही थी और वे यहीं नवद्वीप में हैं। अगर वे यही नवद्वीप में है तो वे हमें दर्शन क्यूँ नहीं दे रहे? प्रभु आप सभी प्रतीक्षा करें, हम उन्हें जल्द ही मिलेंगे। श्रीवास प्रभु, हरिदास प्रभु अब जाइए और पता कीजिए की वो कहाँ हैं। श्रीवास पंडित और हरिदास ठाकुर पुरे नवद्वीप में नित्यानंद प्रभु को खोजते रहे, परन्तु उन्हें कहीं उनका पता न लगा। आखिर में वे पुनः क्षेत्नीय महा प्रभु के पास आए और कहा प्रभु जिनकी खोज में आपने हमें भेजा था, वे हमें पूरे नजदीक में कहीं नहीं मिले। आप सभी मेरे साथ आइए, हम उनके दर्शन करते है। सभी भक्त महाप्रभु के साथ नंदन आचार्य के घर पहुँचते हैं और उसी वक्त उन्हें नित्यानंद प्रभु के दर्शन होते हैं।
गौरांग.
को रो दिन न जाने काना कहाँ थे। तुम मैं पूरी दुनिया में तुम्हे पागलों की बाती ढूंढ रहा था, पर मुझे तुम कहीं नहीं मिला। अंत में मुझे ज्ञात हुआ कि नंद लाल मेरा प्रिय भाई नवद्वीप में अपने दिव्य स्वरूप को छुपा रहा है। आज मैंने उस चोर को पकड़ ही लिया। चैतन्य महाप्रभु ने अपने मन में सोचा भक्तों को नित्यानंद प्रभु की महिमा दर्शाना चाहिए और इन्हें ऐसा प्रसंग सुनाना चाहिए जिसके श्रवण से इनके शरीर में सात्विक भावों का यह सोच कर महाप्रभु ने श्रीवास पंडित को कहा। श्रीवास प्रभु आप श्रीमद भागवतम का 1 श्लोक सुनाए बरहापेदमअटवरवपु कण यो कनि का राम विभद्र वाह कनक कपिशाम वेजयंती च मालाम। श्रीवास पंडित के मुख से इस श्लोक को सुनते ही नित्यानंद प्रभु मुर्छित हो। पड़े इनके मूर्छित होते ही चैतन्य महाप्रभु ने श्लोक जारी रखने को कहा। रनधानवेनरधरसुधया पूरण्या गोप बिंदेर वृंदा रन्यामस्वपदरमनमप्रा विषद गीत केते है। ha krishna ha krishna नित्यानंद प्रभु महाभाव में आकर चैतन्य महाप्रभु से प्रश्न करने लगे। आप के दर्शन हेतु मैंने कई द्वीपों की यात्रा की। सभी मुख्य पुण्य स्थान व तीर्थों में गया, परन्तु हमने उन स्थानों को खाली पाया। मेरे बहुत तलाश करने पर 1 भक्त ने बताया कि भगवान नवद्वीप में प्रकट होकर हरिनाम संकीर्तन का प्रचार कर रहे हैं और इसीलिए आज मैं अपना सर्वस्व आपके चरणों में अर्पण करने आया हूँ। मुझे शरण दीजिये, कृष्ण मुझे, शरण दीजिये, आप स्वयं ईश्वर हैं। आप जो मेरी स्थिति कर रहे हैं, यह सब गुण तो आप ही में विद्यमान है। हम तो साधारण जीव हैं। आप हम पर कृपा करें प्रभु? क्या आपको इन दोनों की बातों से पता चलता है कि कौन बड़ा है और कौन छोटा। जिस प्रकार हम अपनी बुद्धि से नहीं समझ सकते कि शिव कृष्ण की आराधना करते हैं या कृष्ण शिव की, उसी प्रकार इनकी लीला तो यही समझ सकते हैं। श्री चैतन्य महाप्रभु इस लीला के माध्यम से भक्तों को नित्यानंद प्रभु के दिव्य स्वरूप का दर्शन करवाना चाहते हैं, जिससे उनकी महिमा सभी को पता चले। नित्यानंद प्रभु ने अपने जीवन काल में बहुत सी लीलाएं की हैं। अनंत शेष की तरह उनकी लीलाएं भी अनंत हैं। आज हमने उनकी कुछ लीलाओं को आपके समक्ष प्रस्तुत करने का प्रयास किया है।
A les यातल आर ने, प्रो ने त्या नादा गौरा बगतdaहरेककृष्ण कृष्ण हरे हरे हरे हरे रामा रामा रामा रे हरि हरि यादव या ना महा, श्रीमद सुधाना, श्री गुरुमधीनथारिणmश्री चैतnयमiश्वरमहरिम ताश तो सबसे पहले तो मैं धन्यवाद देना चाहता हूँ जो ड्रामा ग्रुप जो नाटक का 1 ग्रुप था, जिन्होंने नित्यानंद प्रभु की लीलाओं के ऊपर जो नाटक किया वार्ड न। तो हम देख सकते हैं कि कैसे नित्यानंद प्रभु आये थे इस धराधाम पर, उनका सिर्फ 1 ही 1 ही उनके जीवन का उद्देश्य था कि चैतन्य महाप्रभु की सहायता करना mantra और निताई गौर जो आये। उन्होंने कहा कि हमें हरे कृष्ण महामंत्र का जप करना चाहिए। kisna मा र मा.
मा.
तो यहाँ पर मंदिर में हमारे पास विग्रह है गौरीताई के, प्रभुपाद के और प्रभुपाद के गुरु भी in call start तो गौरीताई की कृपा से ही ये जो वर्णिम युग है, ये शुरू हो गया है as a n o de, ये जो कलयुग है, ये दोषों का 1 समुद्र है लेकिन इस कलयुग में 1 बहुत ही अच्छा 1 गुण है जो कि है हरे कृष्ण महामंत्र का, जप सच जो फल आप प्राप्त कर पाते थे सत्ययुग में, ध्यान से, त्रेता युग में जो फल प्राप्त होता था बड़े बड़े यज्ञ करके और द्वापर युग में जो भगवान के विग्रहों की अर्चना करके, वही फल कलयुग में हम प्राप्त कर सकते हैं हरे कृष्ण मंत्र का और ये जो हरे कृष्ण मंत्र है, उस इस जब को लाया गया है। इस धराधाम पे निताई गौर ने गोलो केर प्रेम धन, हरि नाम संकीर्तन, ये जो हरे कृष्ण महामंत्र का जप है। ये धीरे धीरे हमारा जो भगवान के प्रति जो प्रेम है, जो सो गया है, उसे उजागर करता है। तो हम चाहते हैं आप सभी जो भगवान कृष्ण की सेवा करके जो परम आनंद मेल प्राप्त होता है, उस आनंद को चख पाए this is to the l और हम देख सकते हैं कि जो परम आनंद का अवसर है, ये लाया गया है निताई गौर ने और चैतन्य महाप्रभु ने नित्यानंद प्रभु को कृपा दी है ताकि वो पूरे जगत का उद्धार कर पाए। तो? क्योंकि आज हमने थोड़ा देर में शुरू किया और नाटक ने थोड़ा समय लिया तो मैं ज्यादा देर तक नहीं बोलूंगा लाइक। शान। तो कल आपने देखा था की कल सुबह से काफी सारे कार्यक्रम थे, सुबह पदचिन्नोंकी स्थापना हुई थी महाप्रभु की और शाम को दीक्षा समारोह था। तो महाराज जी पूछ रहे हैं आपको कैसे लगा वो और आप सभी को आज जो नित्यानंद प्रभु की लीलाओं का जो नाटक था, वो कैसा लगा? तो कल मैं अपने प्रवचन में बता रहा था कि भक्ति में जो पुरुष हैं या जो महिलाएं हैं, माताएं या प्रभु, यह साधारण नहीं है, ये सभी बहुत प्रिय हैं भगवान कृष्ण को और हमें सबके साथ बहुत ध्यानपूर्वक अपना आचरण करना चाहिए। सो the first question is xsycesnoassor part i डरावना क्या कर रहे थे? successfully distracting as he was one of the friends of niti okay first question गुरु महाराज as a greहस्था is t? आलवेज मैंडेटरी तो वीर वैश्नव ड्रेस, इन आवर होम ऑफ कोर्स मंगल आरती, गुरु आरती, गौर आरती n r performed in vasnveatirइजइट ओके टू ऑफर भोग वालाहम। तो 11 भक्त ने प्रश्न किया है कि गुरु महाराज गृहस्थों के लिए क्या यह अनिवार्य है कि वो घर में सब समय वैश्नव जो वेश है वो धारण करें। हालांकि हम मंगल आरती जो भी आरती होती है घर में, उसमें तो हम वैश्नव कपड़ों में होते हैं। लेकिन क्या घर पे हम कर्मी कपड़ों में भगवान को भोग लगा सकते हैं? प्रश्न has to a तो अगर घर में किसी पति या जो भी भोग लगा रहे हैं उन्हें बाहर जाना है काम करने के लिए। the closlodontothewod तो ऐसा वो कर सकते हैं, अपने कर्मी कपड़े पहन के भगवान को प्रणाम कर सकते हैं। लेकिन ऐसा करने का कोई कारण होना चाहिए। तो जो भक्ति, जो, जो वैश्नव वेश भूषा है, वो ज्यादा कंफर्टेबल होती है, ज़्यादा आरामदायक है है। लेकिन हो सकता है सबकी परिस्थितियां अलग अलग हैं। अपनी परिस्थितियों के हिसाब से वो अपनी वेश भूषा देख सकते हैं। how to apply krishna हव तो प्लाई दैट क्रिश्ना इस दे दूर कॉन्सेप्ट इन डे टू डे डीलिंग i do i m gonting rite अगर हम सब कुछ ठीक ठीक करेंगे, तो हमें उसका जो क्रेडिट है, उसको लेने की आवश्यकता नहीं है, लेना नहीं चाहेंगे। हम ये समझेंगे भक्त यह समझते हैं कि जो भी अच्छा हुआ है वो भगवान की कृपा से हुआ है, क्योंकि हम 1 बहुत ही छोटी जीव शक्ति हैं merge, और अगर हम कुछ इच्छा करते हैं तो वो पूर्ण होता है भगवान कृष्ण की इच्छा से और उनकी शक्तियों के अनुसार। और हम चाहते हैं कि भक्ति करना भगवान की प्रसन्नता के लिए कैन वी ऑफर तुलसी वाटर on ekadsi शुड बी फॉलw the डेज वैन वैन नोट तो प्लक हर लीवस। तो प्रश्न यह है कि हम क्या एकादशी में तुलसी को जल चढ़ा सकते हैं? और हम किस दिन तुलसी पत्ते नहीं तोड़ सकते? nia and तो यहाँ पर हम जानते हैं कि 1 बहुत वरिष्ठ 1 भक्त हैं जो पुजारी हैं सेवा, तुल्य, प्रभु, आप उनसे यह पूछ सकते हैं। तो हमने सुना है कि द्वादशी में हम तुलसी के पत्ते नहीं तोड़ते, लेकिन हम अपने हेड पुजारी, उनसे ये प्रश्न पूछ सकते हैं। so i न, जहाँ तक मुझे पता है, द्वादशी में हम तुलसी पत्ते नहीं तोड़। in here the restriction। मैंने आज तक कोई दूसरे दिन के विषय में कोई नियम नहीं सुना कि किसी दूसरे दिन तुलसी पत्ते नहीं तोड़ सकते। यह तो अगला प्रश्न, यह है। भगवत गीता में हम ये पढ़ते हैं कि हम शरीर नहीं हैं, आत्मा है 2 समलैंगी, आत्मा अपना समलैंगी संबंध बना के अपना जीवन कृष्ण भक्ति में क्या समर्पित नहीं कर सकते? समलैंगी संबंध बनाना क्या गलत है? है? तो ये बिल्कुल ठीक है। जो भगवत गीता में भी हमने पढ़ा है। और जो ये व्यक्ति, जो भक्त हे, जिनका ये प्रश्न है, वो कह रहे हैं कि हम शरीर नहीं हैं, हम आत्मा हैं, लेकिन ये जो प्रश्न हैं, ये सिर्फ शरीर का 1 प्रश्न है। 1 प्रश्न जो सिर्फ शरीर के ऊपर निर्भर है। in men? तो जो 1 स्त्री और पुरुष के बीच में जो संबंध होता है, वो सिर्फ इसलिए होता है ताकि वो कृष्ण भक्त संतान उत्पन्न कर पाए। तो सेम जो 1 ही लिंग के जो लोग हैं वो संतान उत्पत्ति नहीं कर सकते। sir तो अमेरिका में कुछ दुकानें हैं जहाँ पर पुरुषों का वीर्य बिक्री होता.
है.
और जो समलैंगिक जो स्त्रियां हैं वो उस वीर्य को खरीद के उसे इस्तेमाल करती है। संतान उत्पत्ति के लिए live relation, लेकिन अगर कोई पति पत्नी भागवत में लिखा गया होगा, अगर कोई पति पत्नी संबंध बनाते हैं संतान उत्पत्ति के लिए, तो उसे भी ब्रह्माचर्य कहा गया है। सच। तो आज तक मैंने यही पढ़ा है कि अगर 2 व्यक्ति जिनका लिंग समान है, अगर वो सम्बंध बनाते हैं तो वो अनैतिक है, लेकिन जो भी भगवान कृष्ण की सेवा में करते हैं वो सब अच्छा है। can we cant with japa mala, without having bat at for a m in brhmamurta in case? we are not well, r, our health is not god। तो प्रश्न यह है कि अगर हमारा स्वास्थ्य अच्छा नहीं है, या कोई कारण से, क्या हम बिना स्नान किए 4 बजे ब्रह्म मुहर्त में अपनी जप माला में जप कर सकते हैं। अगर आप अस्वस्थ हैं और आप स्नान नहीं कर सकते, भगवान यह समझते हैं। और अगर आप चाहते हैं तो आप आचमन कर सकते हैं और मानसिक स्नान कर सकते हैं। जो सुची मंत्र है इससे वी रिस्पांसिबल, फॉर, आल, द, थॉट्स, दैट, कम, इन आ माइंड क्या। जो भी विचार हमारे मन में आता है, हम उन सभी विचारों के लिए जिम्मेदार होते हैं। प्रश्न। तो आप देखिये जो सतयुग द्वापर युग त्रेता युग तो आपके मन में कोई भी जब विचार आता था इन तीनों युगों में, तो आप उस विचार के लिए जिम्मेदार हो जाते थे। what you कलयुग में आप जिम्मेदार होते हैं, जो भी कार्य आप करते हैं, उसके लिए नहीं, जो आप चिंतन करते हैं, सोचते हैं, लेकिन बार बार अगर हम कुछ खराब सोचते हैं, उसका चिंतन करते हैं, तो स्वाभाविक रूप से वो हमारे कार्यों में आ जाता है। जैसे कि आज हमने ये जो नाटक देखा था, आज हमें सभी सब समय निताई गौर का स्मरण करना है और उनको अपने हृदय में, अपने मन में रखना है। hello i hele, रामा हरे राम राम राम हरे हरे सो कल रात को दूसरा प्रवचन होगा तो हो सकता है अगले दिन मैं यहाँ से चला जाऊं तो हो तो इस जो ये जो यात्रा है मेरी, हो सकता है कल आखिरी प्रवचन रहेगा। तो अभी तक हमने मैंने अपना यात्रा का प्लान विचार नहीं बनाया है, उस पर चर्चा चल रही है। आप में से कितने भक्त हैं जिन्होंने जयपताका स्वामी ऐप डाउनलोड कर लिया है, कितने भक्तों ने जयपता का स्वामी ऐप डाउनलोड नहीं किया है। hal हैव android smart in the ap, अगर आपके पास स्मार्टफोन है एंड्रॉयड का तो आप गूगल प्ले स्टोर से डाउनलोड कर सकते हैं i have a smart and downlod and the auto और अगर आपके पास आईफोन है तो आप एप्पल प्ले स्टोर से इसे डाउनलोड कर सकते.
हैं.
तो जो भी कल यहाँ पर कार्यक्रम था, मैंने उसका पूरा डीटेल अपनी जयपताका स्वामी आप में दिया था। हरा गरी बो शील, जयपताका स्वामी महाराज की श्रील प्रभुपाद की गौर प्रेम नंद।
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