202402013 - Evening Class

Jaya Pataka Swami leads kirtan and teaches that chanting Hare Krishna is the path to liberation in this age. He cites the Bhagavad Gita on constant remembrance of Krishna and uses stories of Markandeya Rishi, Jarasandha, and Chaitanya Mahaprabhu to illustrate japa practice and devotee duties.
Hare Kṛṣṇa Hare Kṛṣṇa Kṛṣṇa Kṛṣṇa Hare Hare Hare Rāma Hare Rāma Rāma Rāma Hare Hare Hare Kṛṣṇa Hare Kṛṣṇa Kṛṣṇa Kṛṣṇa Hare Hare Hare Rāma Hare Rāma Rāma Hare Hare Hare Hare Hare Kṛṣṇa Hare Kṛṣṇa Kṛṣṇa Kṛṣṇa Hare Hare Hare Rāma Hare Rāma Rāma Rāma Hare Hare Hare Kṛṣṇa Hare Kṛṣṇa Kṛṣṇa Kṛṣṇa Hare Hare हायरे कृष्णा हायरे कृष्णा कृष्णा कृष्णा Hare Kṛṣṇa Hare Kṛṣṇa Kṛṣṇa Kṛṣṇa Hare Hare Hare Rāma Hare Rāma Rāma Rāma Hare Hare Hare Kṛṣṇa Hare Kṛṣṇa Hare Kṛṣṇa Hare Kṛṣṇa Kṛṣṇa Kṛṣṇa Hare Hare Hare Rāma Hare Rāma Rāma Rāma Hare Hare Hare Kṛṣṇa Hare Kṛṣṇa हारी कृष्णा हारी कृष्णा कृष्णा कृष्णाने आरे हारी रामा हारी राम राम हारे कृष्णा हारे कृष्णा कृष्णा कृष्णा अरे कुष्णा अरे कुष्णा कुष्णा कुष्णा अरे अरे अरे रामों अरे रामों रामों रामों रामों हरे हरे बोलो हारे कृष्णा हारे कृष्णा कृष्णा कृष्णा हारे हारे हारे राम हारे राम राम राम हरे हरे हारे कृष्णा हारे हारे कृष्णा हारे कृष्णा कृष्णा हारे हरे हरे हारे कृष्णा हारे कृष्णा कृष्णा कृष्णा हरे हरे हरे राम हारे राम राम राम हरे हरे ह Hare Kṛṣṇa Hare Kṛṣṇa Kṛṣṇa Kṛṣṇa Hare Hare Hare Rāma Hare Rāma Rāma Rāma Hare Hare Hare Kṛṣṇa Hare Kṛṣṇa Kṛṣṇa Kṛṣṇa Hare Hare Hare Rāma Hare Rāma Rāma Rāma Hare Hare हारे किसना हारे किसना किसना किसना हारे हारे हारे राम हारे राम राम राम हारे हारे हारे किसना हारे किसना किसना किसना हारे हारे हारे राम हारे राम राम राम हारे हारे किसना हारे किसना किसना किसना हारे हारे हारे राम हारे राम राम राम हारे हारे हारे किसना हारे किसना किसना क हाईरी किसना हाईरी किसना किसना किसना हाईरी हाईरी राम हाईरी राम राम राम हाईरी हाईरी किसना हाईरी किसना किसना किसना हाईरी हाईरी राम हाईरी राम राम राम हाईरी हाईरी किसना हाईरी किसना किसना किसना Hare Ram Hare Ram Hare Krishna Hare Krishna Krishna Krishna आरे आरे Hare Kṛṣṇa Hare Kṛṣṇa Kṛṣṇa Kṛṣṇa Hare Hare Hare Rāma Hare Rāma Rāma Rāma Hare Hare हारे कृष्णा हारे कृष्णा कृष्णा कृष्णा हारे हारे हारे रामो हारे रामो रामो रामो हारे हारे Hare Krishna Hare Krishna Krishna Krishna Hare Hare Hare Rama Hare Rama Rama Rama Hare Hare Hare Krishna जाया जाया पताका स्वामी गोरोदेवा जाया.
जाया.
प्रभुपाद प्रभुपाद प्रभुपाद जाया जाया प्रभुपाद जाया जाया ब्रह्मुपा जाया जाया ब्रह्मुपा निताई गोंर हरी बोल नीताई गौर हरी बोल। हरी बोल। हरी बोल। हरी बोल। हरी बोल। हरी बोल। दाई गौर प्रेमाननदे।.
गुरुमाराक जो बीच वाला माईक पड़ो।.
हरी बोल। स्वामे नेति नामिने गऊरवानी प्रचारिने प्रभो नित्यानान्द खुद्धवर्चिवासादि।.
खुद्धवर्चिवासादि।.
खुद्धवर्चिवासादि।.
खुद्धवर्चिवासादि। खुद्धवर्चिवासादि। खुद्धवर्चिवासादि। खुद्धवर्चिवासादि।.
खुद्धवर्चिवासादि।.
रामा खुद्धवर्चि रामा हारे हरे यादवाय नामः स्रीमाद सुधाना पंगोनलंगाय तेगिरिम् स्री गुरुम् धीनतारिणम्.
स्री चैतन्यमीश्वरम् हारियों तच्चत् स्रीमद्.
भगवदगिता, चेप्टर 8, वर्ड 7 तस्मात सर्वेषु कालेषु माम अनुष्मर युध्यता मैयर्पितमनो बुद्धेर् माम एवैशयसि असंशयः अर्जुन, आप अपने अपने अपने अपने अपने अपने अपने अपने अपने अपने अपने अपने अपने अपने अपने अपने अपने अपने अप� लोड नहीं करते है कि वन्ने करते करते करते करते करते करते करते करते.
करते करते कर� तो.
यहाँ पर हम देखेंगे कि भगवान कृष्ण ने हमें एक बहुती सुन्दर एक आदेश दिया है.
कि भगवान.
कृष्ण आर्जुन को कह रहे हैं कि सद्देव मेरा चिंतन करो। ठीक उसी बगाई शिलप्रावपान ने भी हमें कहा था कि हमें भी सद्देव कृष्ण का चिंतन करते रहना चाहिए। तो भागवतम में एक स्लोक है जिसमें कहा गया है कि जो कल्यूग है ये दुखों का एक गल्तियों का कमियों.
का एक सागर है तो.
जैसे कि इस मंदिल के सामने एक अरेबियन सागर है तो उस समुद्र में, जो सागर में, जल की कितने बूंदे हैं? इतने बूंदों के समान ही इस कल्यूग में इतने दोश हैं, जितनी बूंदे हैं इस सागर में. तो ये पहुत ही एक मुश्किल परिस्थिति.
है, तो.
हम देख सकते हैं कि कैसे पूरे विशो भर में अलग-अलग युद्ध हो रहे हैं हमने हाली में देखा रशी और युक्रेन का युद्ध इस्राईल और पलिस्तीन का युद्ध अफ्रीका में पूरे जगए पर बहुत सारे युद्ध हो रहे हैं। तो इसलिए भागवतम में जो शलोक है, ये यही बताता है कि ये जो कल्यूग है, इसमें बहुत दोश हैं।.
हस्तिहा का महाद्यणा, अधरवान युद्ध हो रहे हैं।.
लेकिन इस कल्युग में एक बहुत अच्छा गुण है। एक बहुत अच्छा गुण।.
किर्तनादेव किर्ष्णस्चा मुक्तसंगा बजान बज़त। Despite chanting आहाई किर्ष्णना मंत्रा, you can go back to Godhead.
गुण इस कल्यूग में ये है कि सिर्फ हरे कृष्ण महा मंत्र का जब हम जप करते हैं, सिर्फ इसी माध्यम से ही हम भगवत धाम वापस जा सकते हैं।.
Although, so you lot people are Shudras.
Barbarians, लेकिन हाला कि कल्यूग में बहुत सारे शुद्र हैं, लोग हैं जो बहुत ही हिंसा करते हैं. लेकिन ये जो हरे कृष्ण महा मंत्र का जब करना ये बहुत ही एक सरल माध्यम है सभी लोगों के लिए. तो अर्जुन युद्ध स्थल में था और युद्ध स्थल में ही भगवान ने उन्हें उपदेश दिया था कि वो सब समय उनका चिंतन करें तो आप लोग आफिस में नौकरी करते हैं जहां पर आपको नौकरी करनी होती है जहां कीचन में जहां पर भी हैं आप, कृष्ण का स्मर्ण करें. तो अगर अर्जुन युद्धुक स्थल पर, युद्धुक शेत्र में, भगवान कृष्ण का चिंतन कर सकते हैं, तो हम सभी भगवान कृष्ण का चिंतन कर सकते हैं.
तो.
असल में जितना हम हरे कृष्ण महा मंत्र का जब करते हैं, तो हमारी जो भौतिक, जो हमारी मानसिक्ता है, जो बहुत सारे संसकार पुराने हैं हमारे मन में, वो धीरे धीरे खतम होते रहते हैं।.
हिदाय परस्था हरिजाय हमारा जो रिदय है.
वो पूरा साफ हो जाता है। तो यहां हम बहुत ही भाग्यशाली हैं, कि यहां पर हमारे पास शिलप्रभुपाद हैं, और बहुत सारे विग्रहें, स्थापित विग्रहें हैं.
मंदिर में, हम भगवान के विग्रहों का दर्शन कर सकते हैं, उनसे प्रार्थना कर सकते हैं।.
हम भगवान के विग्रहों का दर्शन कर सकते हैं, उनसे प्रार्थना कर सकते हैं।.
हम भगवान के विग्रहों का दर्शन कर सकते हैं, उनसे प्रार्थना कर सकते हैं। हम भगवान के विग्रह.
मैत्रे रिशी अपने ध्यान में इतने लीन थे कि छे मनू चले गए। तो ब्रह्मा के एक दिन में चौदा मनू होते हैं। तो मार्कन्दे रिशी इतने लीन थे अपनी ध्यान में, कि छे मनु चले गए, और उन्हें पता भी नहीं लगा।.
तो.
साथ्वे मनु में जो इंद्र थे, उन्होंने सोचा, मैं मार्कन्दे रिशी की परीक्षा लेता हूं।.
He went, he brought with him apsaras.
तो वो कुछ अफसराऊं के साथ मार्कंडे रिशी के पास गए, लेकिन जो वहाँ पर गए थे उनकी परीक्षा लेने, उन सभी को जलन होने लग गई, उनने बहुत गर्मी लगने लग गई. तो फिर वो सब वहाँ से भाग गए. नरानारायन रिशी इसे देख कर बहुत ही प्रसन हुए।.
तो.
मार्कन्दे रिशी की दृद्धा देख कर नरानारायन बहुत ही प्रसन हुए। तो वो उस रिशी के सामने प्रकाशित हुए। और उन्होंने पूछा कि आपको अगर कोई वरदान चाहिए।.
तो.
आज भी मारकंडे रिशी, बंबई, भारत, पूरे ब्रह्मान्द भर में ब्रह्मन कर रहे हैं। लेकिन उन्होंने क्या किया? उन्होंने सदेव भगवान कृष्ण का चिंतन किया। तो एक बहुत अच्छे उदारण थे, मारकंडे रिशी। तो आपको सदेव भगवान कृष्ण का चिंतन करना चाहिए, आप जो भी करते हैं उसमें।.
तो.
जब भगवान कृष्ण, भीम और अर्जुन जरासंद के पास गये और भीम ने जरासंद को हरा दिया तो हराने के बाद ऐसा हो सकता था कि जरासंद का जो राज्य है, समराज्य है, वो भीम खुद ले ले थे लेकिन बजाय इसके उन्होंने जरासंद के ही पुत्र सहधेव को बुलाया और उसको राजा बनाया।.
And then, Krishna had the son of Jarasandha free all the kings.
जरासन्दा के अधिया कि जिन भी राजाों को बंदी बनाया था, उनको कृपा करके छोड़ दे।.
जरासन्दा के अधिया कि जिन भी राजाों को बंदी बनाया था, उनको कृपा करके छोड़ दे। जरासन्दा के अधिया कि जिन भी राजाों.
को बंदी बनाया था, उनको तो जरासंद का एक विचार था, क वो भगवान शिव को प्रसन करने के लिए एक लाख राजाओं की बली देना चाहता था, उनके सर काट के भगवान शिव को अर्पित करना चाहता था. तो उसने लगबग बीस हजार राजाओं को बंदी बना लिया था. तो मुझे पता नहीं है उसे बाकी अस्ति अजार कहां से मिलते हैं। लेकिन आप इसकी कल्पना कर सकते हैं, इन सभी राजाओं को बंदी बनाये गया था, काराग्रह में रखा गया था, और उनको कोई आदर नहीं दिया जाता था। तो उनको जब मुक्त कराये गया, भगवान कृष्ण ने आदेश दिया कि इन राजाँ को अच्छे कपड़े पेनाए जाए, अच्छा प्रसाद दिया जाए, और अच्छे आसन दिये जाए।.
और.
जब ये राजा अपने घर गए, उसे जाने से पहले भगवान कृष्ण ने उ कि जब भी आप संतान उत्पत्ति चाहेंगे, मेरा स्मर्ण कीजिएगा। तो जो भी ग्रिहस्त हैं, उन्हें सभी को गर्बोदान संसकार करना चाहिए। भगवान से प्रार्थना करनी चाहिए। तो एक कृष्ण भावना मृत दीर्ग आयू वाला स्वस्त एक सुपुत्र उनको प्राप्त हो।.
तो.
भगवान कृष्णने उन्हें यही आदेश दिया कि आप मेरा स्मरन करिये।.
तो भगवान कृष्णने उन्हें यही आदेश दिया.
कि आप मेरा स्मरन करिये।.
तो ये ऐसा नहीं है कि भगवान सिर्फ अर्जुन को कह रहे हैं कि आप मेरा स्मर्ण कीजिये। वो सभी को कहते थे।.
तो.
जिन भक्तों की दीक्षा हो चुकी है, या जो अन्य भक्त जो भक्ती में अलग-अलग सेवाएं कर रहे हैं, उन्हें सभी को भगवान कृष्ण का चिं.
इसी.
लिए हम सोला माला का जब करते हैं। तो सोला माला जब करने के बाद भी हमें भगवान कृष्ण का समरन करना चाहिए।.
तो.
ये जो भक्ति के जो नो अंग हैं शर्वनम, कीर्तनम, स्मर्णम ये बहुती महतुपूर्ण हैं जिसका अर्थ है कि भगवान का चिंतन करना। पहला सेदनम पाद सेवनम, वन्दनम, अर्चनम, दास्यम, साक्यम, आत्मा निवेदनम। तो ये नौ विदियाँ हैं, निविदियाँ हैं धक्ति की। तो हम जब करते हैं, श्रवन करते.
हैं.
तो जब हम अपना काम कर रहे हैं, नौकरी कर रहे हैं, या भोग बना रहे हैं, खाना बना रहे हैं, जो भी क्रिया हम करें, जो भी हम कुछ करें, सब समय हमें भगवान कृष्ण का समरन करना चाहिए।.
प्रभुपाद.
ने एक प्रवचन में कहा था, उनकी इच्छा थी कि जो भी उनके ग्रिहस्त, सिश्य या अनुयाई हैं, वो सभी परमांस बनें।.
प्रभुपाद.
ने कहा उनके गुरु थे पुत्र शिलभक्ति विनो ठाकुर के।.
तो.
शिला प्रहुपान ने लंडन में ये प्रवचन दिया था और उन्हें ने कहा था कि जो भी ग्रिहस्त बक्त हैं उनकी संतान उन्हें आचार्यों के रूप में प्राप्त करनी चाहिए.
तो.
भगवान का स्मरन है एक एक चीज जो हम सभी को करनी चाहिए। कम से कम श्रावन और कीरतन हमें करना चाहिए। लेकिन यो जो नौ अभ्यास हैं, विदियां हैं भक्ती की, हमें प्रयास करना चाहिए जितनी हम कर पाएं उतनी. तो स्मर्णम हम सदय भगवान कृष्ण का चिंतन करें. Bhagwān bahut ādbūd ṭhe.
Ā, man, to tell you, you know he was known as Rāmaṇa. He tried to save Sītā. Ātān, Rāmaṇa.
तो जटायू उन्हें पता था कि वो रावन के सामने कुछ नहीं है और उनका सामना नहीं कर पाएंगे फिर भी उन्होंने माता सीता के बचाओ के लिए उन्होंने प्रयास किया और आखिरकार उनकी मृति हो गई। तो रादनाथ स्वामी महराज एक कुछ दिन पहले नासिक जो धाम है उसका गुणगान कर रहे थे जटायू.
ने.
अपने प्रान त्याग दिये भगवान राम की गोद में तो भगवान इतने कृपालू हैं। तो हम इसको देख कर समझ सकते हैं कि जटायू जो अपना शरीर त्यागने वाला था, भगवान ने उने अपनी गोद में ले लिया। तो इसमें कोई संदेह नहीं है कि जटायू वापस भगवतधाम चले गए।.
जन्ना आई हर्ड अलुभाविश्ट विश्वारी आओ वाद्शेद्धन्या नब्रैस्थ पागाः।.
तो और गोपाल कृष्ण गोस्वामी महाराज से हमने सुना था कि कैसे चैतने महा प्रभु ने उस भक्त को अलिंगन किया जिसे कोड था।.
और.
चैतने महा प्रभु के सपर्ष मात्र से, उनके अलिंगन से जो उस भक्त को जो कोड था वो बिलकुल ठीक हो गया।.
तो.
इस प्रगार के अलग-अलग चमतकार प्रतेक दिन होते थे चेतने महाप्रभू के द्वारा. तो ऐसी बहुत सारी चीजे हैं जो हम जिन का हम स्मारण कर सकते हैं.
तो.
हम लोगों को बता सकते हैं भगवान कृष्ण के बारे में, भगवान राम के चेतनि महा प्रभु के विशय में।.
तो भगवान कृष्ण के बारे में, भगवान राम चेतनि महा प्रभु विशय में। तो कृष्ण के बारे में, भगवान राम.
के चेतनि महा � तो मुझे आपके साथ मैंने एक बहुत अच्छा समय बिताया सभी भक्तों के साथ और आपकी उपस्तिती में मेरे लिए बहुत सरल हुआ भगवान कृष्ण का समरन करना.
और मैं आशा.
करता हूँ कि आप सभी भगवान कृष्ण का स्मर्ण कर पाएं सदेव, सब समयं।.
I tried to tell you, as I saw yesterday, of Dravana, entire God, how.
They met together, तो कल हमने यहाँ पर नाठक देखा कि कैसे निताई गोर वो उन्होंने एक दूसरे से मिले?
नित्यानन्द.
प्रभू की कुछ बाल लीलाई हमने देखी. तो कुछ लोग अपने जो गले की टाई अपने घुटनों पर पहनते थे. और वो पूछते थे कि ये क्या है। और हम कहते थे कि ये मेरी नी टाई है, घुटनों की टाई है।.
हारी वाल।.
क्योंकि.
तो.
किसी भी प्रकार से हम चाहते हैं कि हम भगवान गौरनिताई का स्मर्ण करें और लोगों की साहेता करें गौरनिताई का चिंतन स्मर्ण करवाने में।.
और.
हमें सब समय इसका स्मारण रहना चाहिए कि कल्युग में एक महान गुण.
है हरे किष्णा हरे किष्णा किष्णा किष्णा हरे हरे हरे रामा Hare Rama Rama Rama Hare Hare This name of Krishna.
Is not written from Krishna and.
Somehow or other हमें अनने लोग भगवान कृष्ण.
के नाम का जप करें और किसी भी प्रकार से हम चाहते हैं कि सभी लोग भगवान कृष्ण के नाम का जप करें। तो जब चेतने महा प्रभु का अभिर्वाव हुआ था, वो पूर्णिमा का दिन था।.
तो जब चेतने महा प्रभु क तो.
उस समय ये एक संस्कृति थी, एक पद्धिति थी, एक चलन था, कि जो भगवान के नामों का जप है, वो जोर जोर से नहीं किया जाता था. सिर्फ एक ही समय पे जोर जोर से जप कर सकते थे, जब वो गंगा सनान में होते थे, गंगा में होते थे. तो वो समझते थे कि वो उन शुद्धी हो जाएगी उनकी अगर वो जोर से जब करेंगे गंगा में। तो वो उस लूनर एकलिप्स ग्रेहन्ड के दिन जोर जोर से जब करते हुए गंगा में जा रहे थे।.
और वो मुसल्मस और नान हिंदोस तो.
कुछ अहिंदु, जो लोग हिंदु नहीं हैं, और कुछ मुसल्मान, ये लोग हस रहे थे भक्तों के उपर, कि देखिए कितने मूर्ख हैं हिंदु, जो जोर जोर से जब कर रहे हैं। तो वो लोग, वो मुसल्मान लोग ऐसे नकल कर रहे थे भक्तों की, कि वो ऐसे जब कर रहे हैं भगवान के नामों का. तो इस प्रकार, जैसे न तैसे, सब लोग ही जब करने लग गये थे।.
इदर वो नहीं होगा निर्गिनेजिस, वो नहीं.
होगा निर्गिनेजिस.
तो वो नहीं.
जो गंगा में थे, वो भी जब कर रहे थे, और जो लोगों को देख कर हस रहे थे, वो भी जब कर रहे थे।.
तो जो जो गंगा में थे, वो भी जब कर रहे थे, और जो.
लोगों को देख कर हस रहे थे, वो भी जब थे। तो जो लोगों को देख कर हस.
रहे थे, वो भ तो शास्त्रों में, भागवतम में बताया गया है कि कल्यूग में एक महान गुण है एक महान गुण, ऐसे नहीं कहा गया है कि दो, लेकिन लोग इसका भी लाब नहीं उठा रहे हैं. कि एक गुण ऐसा है कि आप इस दुखों के सागर से आपका उद्धार हो जाएगा, सिर्फ हरी नाम जब करके, फिर भी लोग क्यों नहीं जब कर रहे हैं।.
जब आप नहीं जब कर रहे हैं, आप जब हरी नाम जब करके, फिर.
भी लोग क्यों नहीं जब कर रहे हैं।.
जब तो भागवतम के बारवे स्कंध आप में इशलोग का वरनन है आप इशलोग को कन्थस्त कर सकते हैं और जो भी लोग आप से पूछे आप जब क्यों करते हैं तो आप उन्हें बता सकते हैं कि हम जब इसी लिए करते हैं.
सवाधावचनिदी राचन साविरा एस आउच्छन और दि�.
तो लोगों को हम ये बता सकते हैं, ये जो कल्युग है, ये दोशों का सागर है।.
तर्शे निधी। तर्शे निधी। जीवरो। तर्शे आसीम दोश।.
ये कल्युग है, दोशेर आसीम दोश। दोशेर सागर। तो ये जो कल्युग है, ये दोशों का सागर है।.
अस्तिहा का महान गुण है।.
यह एक एसा महान गुण है कि सारे दोशों से उपर है।.
कि.
आप हरे कृष्ण महा मंत्र का जब करें और भगवधाम चले जाएं। तो.
मैं आशा.
करता हूँ कि आप सभी जप करेंगे और भगवान कृष्ण का स्मर्ण करेंगे।.
बोलने.
नहीं।.
कृप्या.
करके ये जो अमूल्य मनुष्य जीवन हमें प्राप्त हुआ है, इसको व्यर्थ ना गवाएं।.
प्रिहत्नारादिया विरान। हरे कृष्णा हरे। हरे नामा हरे नामा। हरया नावा, हरया नावा, हरया नावा, हरया नावा, हरया नावा, हरया नावा, हरया नावा, हरया नावा, हरया नावा, हरया नावा, हरया.
नावा, हरया नावा, हरया नावा, हरया नावा.
हरया नावा, हरया नावा, हरया नावा, हरया नावा, हरया नावा, हरया तो हम सब.
समय भगवान के नामों का नावा, जप कीरतन करना चाहते हैं और हरया भगवान के विशय में चिंतन, उनका स्मर्ण करना चाहते हैं.
After ten years, Lord Caitanya, He came up to the other side of the Ganges.
तो दस वर्ष पूर चेतन महा प्रभु गंगा के दूसरे तथ पर गए।.
तो.
सन्यासी का एक नियम होता है कि जहां आपकी पूर्वाश्रम की जो पतनी धर्म पतनी रहती हैं आपको उस शहर में दुबारा जाना नहीं चाहिए।.
तो.
वो गंगा की दूसरी तठ पर थे और वहाँ से उन्होंने अपनी माता, सची माता को बुलाया. तो चैतिन महा प्रभुने सची माता को कहा कि प्रतेग दिन मैं आउंगा और प्रसाद ग्रहन करूँगा।.
तो.
सची माता ने सोचा, शायद मैं स्वपने देख रही हूँ, ऐसा कैसे होगा? तो उस समय वो विद्धियावाचस्पती के घर में रह रहे थे। तो इसी बीच में उस घर के बाहर लाखों की संक्या में लोग एकत्रित हो गए।.
भोरंगा, भोरंगा, भोरंगा, भोरंगा, भोरंगा, भोरंगा, भोरंगा, भोरंगा, भोरंगा, भोरंगा, भोरंगा, भोरंगा, भोरंगा, भोरंगा, भोरंगा, भोरंगा, भोरंगा, भोरंगा, भोरंगा, भोरंगा, भोरंगा, भोरंगा, भोरंगा, भोरंगा, तो भोरंगा विद्या वाचसपती.
ने चेतने महा प्रभु से अनुरोध किया और कहा अगर आप मेरे घर के बाहर नहीं जाएंगे इन लोगों से मिलने तो ये लोग मेरा घर तोड़ेंगे फिर चेतने महा प्रभु बाहर गए.
तो हजारों.
की संक्या में वहाँ भक्त थे और सभी ने चेतने महाप्रभू को प्रणाम किया। He told them, Chaitanya Mahaprabhu उन सभी को कहा, कि आप भगवान कृष्ण के नामों का जब कीर्थन कीजिये और सदेव उनका स्मरन कीजिये।.
Then he went into the house, He went invisible to them. He went like two kilometers away.
Chaitanya Mahaprabhu wapas us ghar me gaye aur wahan se wo adrish ho gaye aur lagbak do kilometer door chale gaye.
He said, I want to see Lord Chaitanya. He told them, I said, if some crazy girl is in my house, she is not here.
तो लेकिन वो सबी लोग चैतने महा प्रभु का दर्शन करना चाते थे और वो सोच रहे थे कि वो चैतने महा प्रभु उनके घर में है विद्या वाचस्पती ने चार पांच लोगों को अपने घर बुलाया और दिखाया कहा देखिये चैतने महा प्रभु यहाँ पर नहीं है.
और.
भी बहुत सारी लीलाईं हैं जो चेतने महाप्रभू ने की।.
तो.
कल मैंने अपना भक्ति वेदान्ता जो कोर्स है, उसकी आखरी परीक्षा खतम कर दी।.
तो.
जब मैंने ये इच्छा जताई थी, मायापूर इंस्टिट्यूट को, कि मैं ये भक्ति वेदान तो ये कोर्स करना चाहता हूं, तो मायापूर इंस्टिट्यूट ने कहा था, कि हम आपको एक उन्रेरी दिग्री ऐसे ही दे देंगे। लेकिन मैंने कहा, नहीं, मैं परीक्�.
क्योंकि मैं.
आप सभी के लिए एक आदर्श उधारण बनना चाहता हूं।.
परसों.
किस भक्तने दीक्षाली थी, हाथ उठाईये।.
तो ब्रामन.
दिक्षा अगर आप लेना चाहते हैं, तो आपको भक्ति शास्त्री दिग्री लेनी पड़ेगी. आप कहीं से भी भक्ति शास्त्री कर.
सकते हैं, मायापूर, व्रिंदावन, आपको.
प्रभाद कर सकते हैं मायापूर से, व्रिंदावन से, गोवर्धन इको विलेज्ज से या और भी कहीं से?
आपको प्रभाद कर सकते हैं आप कहीं.
से भी ये कोर्स डिग्री कर सकते हैं। कोई भी प्रमाणिक जगह से, जो बोर्ड अफ एक्जामिनेशन द्वारा प्रमाणिक हैं, और कुछ जो institute हैं वो मुफ्त में करवाते हैं? कोई कुछ पैसे लेते हैं इसके? डस अजार, बारा आजार, तेरा आजार, इसकी फीस होती हैं? जूह में होता है यह? जूह.
कहीं.
कहीं पर ये बहुती साधारन फीस होती है या फ्री में होता हैं? तो आप सभी प्रभुपात की फुस्तकों का अध्यान कीजिये और इन डिग्रियों को प्राप्त.
कीजिये हर एक.
जो इन शास्त्रों का जो शलोक है, ये अमरित के समान है।.
ग्रिहस्त.
होना एक बहुत बड़ी जिम्मेधारी है। अपने जो सिश्वें संतानों को उनका अच्छा परिक्षन, प्रसिक्षन करना था कि वो भक्त बनें.
अपने.
जो सिश्वें तो फ्रांस या संतानों.
को उनका अच्छा परिक्षन, प्रसिक्षन करना था कि वो भक्त बनें.
अपने जो सिश्वें संतानों को उनका अच्छा परिक्षन, चाइना, प्रसि कुछ सिंगपूर ऐसे देश हैं, जितनी संख्या बच्चों की वहाँ होनी चाहिए, उससे लगबग आदि हैं।.
वहाँ.
पर नियम ऐसा है कि अगर पती पतनी को कम से कम दो संधाने होनी चाहिए। लेकिन अगर ओसत लगाएं, तो चार, मतलब दो पती पतनी, उनकी सिर्फ एक संतान हैं।.
तो.
ये बहुत ही सरल है, लोगों को बोल दें कि संतान उतपत्ति ना करें। लेकिन जब उन्हें आदत पड़ जाती है, तो बहुत मुश्किल है अगर हम उन्हें कहें कि आप संतान उत्पत्ति कीजिए।.
तो.
ये अच्छा रहेगा अगर संतान बहुत सारी होंगी, अगर सभी संताने भक्त होंगी और पुरा विश्व भक्तों से भर जाएगा।.
अगर.
महाराज जी, अगर महाराज जी, अगर महाराज जी, अगर महाराज जी, अगर महाराज जी, अगर महाराज जी, अगर महाराज जी, अगर महाराज जी, अगर महाराज जी, अगर महाराज जी, अगर महाराज जी, अगर Will महाराज he attain the same mood of serving Lord Krishna if जी, अगर महाराज जी, अगर महाराज जी, he goes back home, back to God? तो एक प्रश्न है कि ऐसा हो सकता है कि सिश्य को अपने गुरु का भाव ना समझ आए या ना जाने कि गुरु किस भाव में भगवान कृष्ण की सेवा करना चाता है? तो क्या होता है जब सिश्य का भाव गुरु के भाव से नहीं मिलता? क्या भगवधाम जाकर सिश्य का और गुरु का भाव समान हो जाता है क्या?
तो आपको.
देखना चाहिए कि अगर आपका भाव ऐसा है कि आप भगवधाम ही चले गए तो इसका मतलब ये है कि आपको निष्चे ही अपने गुरु की कुछ कृपा प्राप्त हुई होगी।.
हाँ। I spent several weeks every day giving class so people can get the idea of my work.
तो यहां पर मुझे कुछ समय हो गया है। कुछ सप्ताओं से मैं प्रवचन कर रहा हूं हर जगे। तो भक्तों को मेरा भाव कोड़ा बहुत तो समझ आ गया होगा।.
अरे दे?
यूर्मा.
Next question. I am a new devotee.
हाँ बहुत गर। पाउजाओं.
तो एक भक्त का प्रशन है कि मैं नया भक्त हूँ और मैं आपकी सेवा करना चाहता हूँ, सिश्य बनना चाहता हूँ, लेकिन मैंने सुना कि आप भविष्य में दीक्षा देना बंद कर देंगे, तो ये क्या सही है? तो इसका उत्तर महाराज जी ने दिक्षा की क्लास में दिया था, अगर भगतों को याद हो तो।.
तो.
मैं प्रयास कर रहा हूँ, अपने जो वरिष्ट सिश्यों को ये कहने का कि वो भी अब ये सेवा लें दिक्षा गुरु बन कर।.
When I do that, then except in their cases, I may stop giving initiation except to those who are taken shelter.
तो ऐसा होगा भविष्य में, तो ऐसा होगा अगर सभी जो वरिष्ट सिश्य हैं, जिनको मैं आदेश देता हूं दिक्षा देने का, तो मैं दिक्षा देना धीरे धीरे कम कर दूंगा, बंद कर दूंगा, लेकिन कुछ ऐसे केस होंगे, जिनमें मैं दिक्षा दूंगा, विश.
तो.
जिन जिन भक्तों ने गुरु आश्रे ले चुके हैं, मैं उने दीक्षा दूँगा।.
तो.
जिनों ने दीक्षा ले चुके हैं, वो तो पहले से ही दीक्षा ले चुके हैं।.
लेकिन.
मैं आप सभी को ये बताना चाहता हूं कि मैंने अभी तक दिक्षा देना बंद नहीं किया है।.
लेकिन.
ये सही बात है कि कुछ समय बाद मैं बंद कर सकता हूं।.
तो.
इसी लिए आप सभी सोला माला का जब कीजिये और गुरु आश्रे लीजिये, जो लेना चाहते हैं। अफ़्टर नोईंग अबाउट हाँ प्रेशीयस इस यूमन बोड़ी इस, शुद वी कंटिन्यू अवा कौपरेट जौब, विच दिमान्ज लौट्स अफ़्टायम और अनर्जी, और वी शुद तेक शेल्टर अफ़्पोली ब्रजधाम और लीद असिम्पल लाइफ फुल तो एक प्रश्न ये है कि अब हम ये समझ चुके हैं कि जो मनुष्य जीवन है बहुती अमूल्य है तो इसे समझने के बाद क्या हमें अपनी नौकरी वगेरा छोड़कर जिसमें बहुत समय और परिश्रम लगता है क्या हमें बरजधाम का आश्रे लेना चाहिए और एक साधार.
अपने.
सुना होगा कि चेतने महाप्रभू ने जब भ्रामन किया वो काफी ग्रिहस्त भक्तों के घर गए और कुछ भक्तों ने उन्हें ये कहा कि मैं अपना घर चोड़ना चाहता हूँ और आपके साथ आना चाहता हूँ.
तो.
चैतनि महा प्रभु ने कहा कि आप अपना घर मत छोड़िये, अपने बच्चों को मत छोड़िये और मरकट वैराज्य मत दिखाईए। और आप यहीं रहिए और जिन से भी आप मिलते हैं, उन्हें भगवान कृष्ण का संदेश दीजिये।.
It's a very personal question. It's all related. It starts with the Guru, with the wife.
लेकिन फिर भी ये एक नीजी प्रश्न है, जब किसी की उमर जादा हो जाती हैं, वो वरिष्ट हो जाते हैं, बुड़े हो जाते हैं, तो वो अपने गुरुष से या अपनी धर्म पत्नी के साथ इस विशय पर चर्चा कर सकते हैं।.
Generally, for Chaitanya, it's an advanced practice. Krishna Francis was so happy to change.
तो चेतनि महा प्रभुने आम तोरपे ये कहा है कि जो जहां भी हों हमें भक्ति का प्रयास करना चाहिए।.
Just like we see some of the hastas having a martirix in their house and doing naamhaat, they are preaching.
तो जैसा कि हमने देखा है कुछ ग्रिहस्त अपने घरों में भक्ति व्रिक्षा से प्रचार करते हैं नाम हट्टा से प्रचार करते हैं तो वो बोहती अच्छा प्रचार.
कर रहे हैं प्रभुपात.
ने कहा था कि उनके गुरु महाराज ने कुछ सन्यासियों को इंग्लेंड भे वो खाली हात वापस आ गए असफल हो कर।.
प्रहुपाद.
ने कहा कि मैंने तीन ग्रिहस्त पती पत्नियों को भेजा था और वो सफल हो गए थे प्रचार में। 9-14 यह प्रशन है हरे किषना गुरु महराज आपकी कृपा बरस रही है और बरस्ती ही जा रही है और मेरा लालच आपके दर्शन करने का संग का श्रवन करने का बढ़ते ही जा रहा है। गुरुमाज आपके सिक्षाओं को अपने जीवन में उतार सकूं ऐसा अशिर्वाज द विनम्रता का अभ्यास करने में दर भी लगता है कि कहीं किसी को मेरी वाणी से चोट न पहुँचे इसके लिए और क्या कर सकते हैं जिससे विश्वास और द्रड हो सके सेवा इत्यादी में। So this is a question that first is a glorification about your mercy and all and I am becoming greedy to see you माताजी आपके लिए आपके लिए आपके लिए आपके लिए आपके आपके लिए आपके लिए आपके आपके लिए आपके लिए आपके लिए आपके लिए आपके लिए आपके लिए आपके लिए आपके लिए आपके लिए आपके.
ल.
तो.
भक्तिरसामृत सिंदु जो ग्रंथ है, उसमें भक्ति की योग्यताओं के बारे में बताया है। एक तीवर इच्छा होनी चाहिए। इसको कहते हैं लॉल्यम। तो मैं बहुत ही प्रसंद हूँ कि आपको ये जो तीवर इच्छा है, आप इसको अनुभव कर पा रहे हैं लॉल्यम का। तो हमें ये देखना चाहिए कि किसी भी प्रकार से हमें विनंब्र रहना हैं।.
And people, sometimes, humbly say, oh, can I, can I ask a question?
तो आप विनम्रभाव से सब प्रश्न कर सकते हैं, क्या मैं कुछ कह सकता हूँ, क्या मैं प्रश्न कर सकता हूँ? तो आप ऐसे बोल सकते हैं कि आप बहुती बुद्धिमान हैं, आप बहुत सुन्दर दिखते हैं, मेरा आपसे सिर्फ एक अनुरोध है। आप ये सब कुछ भूल जाएए।.
श्यात हरे कृष्णा, हरे कृष्णा, कृष्णा, कृष्णा, हरे, हरे, हरे, हरे, हरे, हरे, हरे.
हरे, हरे, हरे, हरे, हरे, हरे, हरे, हरे, हरे, हरे, हरे, हरे, हरे, हरे, हरे, हरे, हरे.
हरे, हरे, हरे, हरे.
तो.
एक भक्त ने ऐसे ही एक व्यक्ति को कहा था उस मेजिस्ट्रेट को कि आप ये सब कुछ भूल जाये आप इतने बुद्धी मान हैं सब कुछ और आप सिर्फ हरे कृष्ण महा मंतर का जब कीजिये तो उस मेजिस्ट्रेट ने उत्तर दिया कि मैं हरे कृष्ण महा मंतर का ज�.
तो.
वो जो भक्त है, वो निर्ट्य करने लग गया। आपने तो जब करी लिया हरे किष्ण का। और अब रुखियेगा नहीं।.
और.
इसका रहस्य ये है कि हम सभी का आदर करते हैं और हम उनको प्रयास करते हैं, अभ्यास करते हैं कि वो हरेकृष्ण महा मंतर का जप कर पाएं। ये अपराद पूर्वक नहीं है। So.
Thank you all for coming. तो.
मैं आप सभी को अपना आशिर्वाद और अपनी स्वईच्छा है, अपना आशिर्वाद आप सभी को दे रहा हूं, कृष्णेर मतिरस्तु.
जब.
मैं वापिस आओंगा जुहु में, मैं आशा करता हूँ कि आप सभी अपनी भक्ती में आगे बढ़ रहे होंगे। हरे कृष्णा हरे.
कृष्णा किष्णा किष्णा हरे हरे जगत.
गुरुषिल प्रवुपाद की गोर प्रेमनन्दे.
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