20240208 - Evening Class

Bhakti Vedanta Swami leads an evening class of kirtan chanting and devotional discourse. The session weaves extended call-and-response mantra chanting with talks on Chaitanya Mahaprabhu, the Supersoul, and practices for maintaining bhakti, including stories from Mayapur and questions from attendees.
हरे हरे राम हरे राम.
हरे कृष्णा.
हरे कृष्णा राबा हरे हरे कृष्णा हरे कृष्णा कृष्णा कृष्णा हरे हरे हरे Hare Rama Hare Rama Rama Rama Hare.
Hare.
कृष्णा हरे कृष्णा कृष्णा कृष्णा हरे हरे हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे Krishna Hare Krishna Krishna Krishna Hare Hare Hare Rama Hare Rama Rama Rama Hare कृष्ण, कृष्ण, कृष्ण, हरे, हरे, हरे राम, हरे राम, राम, राम, हरे, हरे कृष्णा हरे कृष्णा कृष्णा Hare Kṛṣṇa Hare Kṛṣṇa Kṛṣṇa Kṛṣṇa Hare Hare Hare Rāma Hare Rāma Rāma Hare Hare Hare Kṛṣṇa Hare Kṛṣṇa Kṛṣṇa Kṛṣṇa Hare Hare Hare Rāma Hare Rāma Rāma Rāma Hare Hare Ram Hare Krishna Krishna Krishna Hare Hare Hare Rama Hare Rama Rama Rama Hare Hare कुष्ण हरी कृष्णा Rāma Hare Rāma Rāma Rāma Hare Hare कृष्णा.
कृष्णा.
Hare Rama Hare Rama Rama Rama Hare Hare.
Hare.
Rama Hare Rama Rama Rama Hare Hare Hare Rama Hare Rama Rama Rama Hare Hare Hare Krishna Krishna Krishna Hare Hare Hare Rama Hare Rama Rama Rama हरे कुष्णा कुष्णा कुष्णा हरे हरे हरे राम हरे याम राम राम हरे हरे हरे कुष्णा हरे कुष्णा कुष्णा कुष्णा हरे हरे हरे राम हरी कृष्ण, हरी कृष्ण, कृष्ण, कृष्ण, हरी, हरी हरी राम, हरी राम, राम, राम, हरी हरी.
कुछ परवाद परवाद.
परवाद परवाद परवाद परवाद परवाद परवाद Hare Kṛṣṇa, Kṛṣṇa Kṛṣṇa, Hare Hare Hare Rāma, Hare Rāma, Rāma Rāma Hare Hare.
अने कृष्णा कृष्णा कृष्णा अने कृष्णा.
कृष्णा अने कृष्णा Hare Kṛṣṇa Kṛṣṇa Kṛṣṇa Hare Hare Hare Rāma Hare Rāma Rāma Rāma Hare Hare Hare Kṛṣṇa Hare Kṛṣṇa Kṛṣṇa हाले कुष्णा हाले कुष्णा कुष्णा कुष्णा हाले हाले हाले राम हरे आमरा बरामा हरे हरे Hare Rama Hare Rama Rama Rama Hare Hare Hare Krishna Hare Krishna Krishna Krishna Hare Hare Hare Rama Hare Rama Rama Rama Hare Hare Hare Krishna Hare Krishna Krishna Krishna Hare Hare Hare Rama.
Hare Rama.
Hare Krishna Hare Krishna Krishna Krishna Hare Hare Hare Rama Hare Rama Rama Rama कृष्णा कृष्णा.
Hare.
Krishna Hare Krishna Krishna Krishna Hare Hare Hare Rama Hare Rama Rama Rama Hare Hare Hare.
Krishna.
Hare Kṛṣṇa Hare Kṛṣṇa Kṛṣṇa Kṛṣṇa Hare Hare Hare Rāma Hare Rāma Rāma Rāma Hare Hare.
Hare Hare Hare Kṛṣṇa.
Hare Kṛṣṇa Kṛṣṇa Kṛṣṇa Hare Hare Hare Rāma Hare Rāma Rāma Rāma Hare Hare.
Krishna Krishna Hare Hare Hare Rama Hare Rama Rama Rama Hare Hare Hare Krishna.
Hare Krishna Krishna Krishna Hare Hare हारे हारे रामा हारे हारे.
हरे कुष्णा हरे कुष्णा कुष्णा कुष्णा हरे हरे हरे रम हरे रम राम राम हरे हरे.
Hare Rama Hare Rama Rama Rama Hare Hare हारे.
हारे हारे.
Hare Rama Hare Rama Rama Rama Hare Hare Hare Krishna Hare.
Krishna Krishna Krishna Hare Hare Hare Rama Hare Rama Rama Rama Hare Hare.
देवाश्रील.
गुरुदे.
हरे.
कृष्णा हरे कृष्णा Kṛṣṇa, Kṛṣṇa, Hare Hare Hare Rāma, Hare Rāma Rāma, Rāma, Hare Hare Hare Kṛṣṇa, Hare Kṛṣṇa.
Hare Kṛṣṇa Kṛṣṇa Hare Hare Hare Rāma Hare Rāma Rāma Rāma Hare Hare Hare.
Kṛṣṇa Hare Kṛṣṇa Kṛṣṇa Kṛṣṇa Hare Hare Hare Rāma Hare Rāma Rāma Rāma Hare.
Hare.
हारे कृष्णा हारे कृष्णा कृष्णा कृष्णा हारे हारे हारे रामा हारे रामा रामा रामा हारे हारे.
कृष्णा कृष्णा कृष्णा कृष्णा कृष्णा कृष्णा कृष्णा कृष्णा कृष्णा कृष्णा हरे क्रिषणा हरे हारे अरे कृष्णा हरे कृष्णा कृष्णा कृष्णा हरे हरे हरे रामा हरे रामा रामा रामा हरे हरे.
कृष्णा कृष्णा हरी हारी हरी रामा हरी रामा राम रामा हरी हारी और कृष्णा अरे क्रेश्ना.
क्रेश्ना क्रेश्ना अरे रामा अरे रामा रामा रामा अरे कृष्णा कृष्ण कृष्ण अरे राम अरे राम राम राम अरे राम हर कृष्णा हरे कृष्णा कृष्णा कृष्णा हरे.
Hare Krishna Hare Krishna.
Krishna Krishna आरामारा हारे कृष्णा हारे कृष्णा कृष्णा कृष्णा हारे हारे हारे राम राम राम राम हारे हारे.
हारे कृष्णा हारे कृष्णा कृष्णा कृष्णा हारे हारे हारे राम राम राम राम हारे.
हारे हारे कृष्णा हारे कृष्णा कृष्णा कृष्णा हारे हारे अनु राम अनु राम राम राम हरे हरे।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।। नीताई गोर हरी गोर हरी गोर हरी गोर नीताई गोर हरी गोर नीताई गोर.
हरी गोर हरी गोर नीताई गोर हरी नीताई गोर हरी गोर नीताई हरी हरी गोर नीताई गोर हरी ग.
Krishna Prasthaya Bhootale Swami Nithyanamane Namaste Saraswati Devi Gauravani Pracharine Nivesa Saraswati Devi पास्चात्या देशतारिने प्रभोनेत्यानान्दा.
गौराभक्तवृण्दा.
Hare Kṛṣṇa Kṛṣṇa Kṛṣṇa Hare Hare.
Hare Rāma Rāma Hare Hare Hare Rādhārāyaṇa.
Mahītā Yādvāyaṇa Mahārāyaṇa Gopāla Govinda Rāma Śrīmad-Śrīdhāna मोग्षास्रोतिदाचालः पंगुन्लंगायतेगिरिं तच्चेतातमान्बन्दे स्री गुरुम् धेनतारिणम् पामानन्नमादुम् स्री चैतन्यमीश्वरम् अर्यों तच्च.
तो आज.
हमारी एक co-director's meeting थी मायापूर की और वो थोड़ी लंबी चली.
Very nice to see all your devotees very enthusiastically chanting Hare Krishna.
तो मुझे बहुत प्रसनाता हुई आप सभी भक्तों को यहाँ पर देखते हुए कि कैसे बहुत उत्साहित होकर आप हरे कृष्ण महामंत्र का कीर्तन कर रहे थे।.
Hare Krishna.
How did you like the installation of the lotus feet of Shri Shaitanya yesterday?
तो कल आपको कैसा लगा वो सामारो जिसमें चेतने महाप्रभु के पद्धचिन्नों की स्थापना हो रही थी?
बालो लेगे चे?
बालो लेगे चे?
So, we are blessed with the participation of the Holiness Gopālakrishna Goswāmī and Girirāja.
Mahārāja But this was the desire of.
His Divine Grace Bhaktisiddhānta Sarasvatī Thakur लेकिन.
ये जो इच्छा थी, वो थी शिलभक्ति सिद्धान्त सरसुति ठाकूर की। वो चाहते थे कि जिस जिस थान पर चैतने महाप्रभू ने भ्रमन किया है, वहाँ पर चैतने महाप्रभू के पदचिन्नों की स्थापना हो।.
चैतने.
महाप्रभू एक बहुत ही विशेष अ.
तो.
आज हमने एक प्रवचन सुना जो भारत के प्रदानमंत्री नरेंद्र मोधी जी ने.
दिया था और.
वो गुणगान कर रहे थे शुरी चेतने महा प्रभु का.
What Chaitanya, the one thing that Ramana Maharaj wrote out that every avatar is a little party.
तो नरेंद्र मोदी जी ने एक विशे को चुआ, जिसमें वो कह रहे थे कि प्रत्तेक अवतार है जो भगवान का, वो कुछ भक्ति प्रदान करते हैं।.
लेकिन.
चैतनि महा प्रभू ने जो कृष्ण भक्ति है, ये बड़ी ही सरलता से सभी को वितरन की।.
तो मैं देख.
पारा हूँ कि कैसे.
आप सभी में बहुत भक्ति है।.
इसका कारण एक ही है कि आप सभी को चेतन महाप्रभू की कृपा प्राप्त हुई है।.
बहुत.
सारे लोग हैं वो भगवान के.
बारे में विच चिंता भी नहीं करते हैं।.
लेकिन चैतन महाप्रभू ने हमें सिखाया है कैसे हम पूर्ण पुरशोत्तम भगवान को प्रेम कर सकते हैं।.
मैंने.
कुछ इसाई लोगों को ये कहा.
था कि.
आप विश्वास करते हैं पिता में, पुत्र में, और होली गोस्ट में.
और.
आप पुत्र के विशय में कुछ.
जानते हैं लेकिन आप उस पुत्र के पिता के बारे में जाधा नहीं जानतें.
और जो होली स्पिरिट है उसके बारे में भी आप जाधा नहीं जानतें.
He taught us about the Paramatma, the Holy Spirit.
इसी भक्तिविदान्त स्वामी शिलप्रभौपाद ने हमें बताया कि परमात्मा कौन है, होली स्पिरिट कौन है?
Every one of your hearts is the chariot of your original Holy Spirit, Paramatma.
तो आप सभी के रिदयों में, शिरोदक्षाई विश्नु परमात्मा के होली स्पिरिट के रूप में विराजमान हैं।.
प्रत्तेक भगत के रिदय में हैं।.
और पर्मात्मा है, पर्मात्मा जो है, वो.
भगवान विश्णु के ही विस्तार हैं, कृष्ण के.
तो.
मैं उन्हें बताता था उन इसाईयों को कि आपको पिता के बारे में जाधा जानकारी नहीं हैं.
लेकिन.
यहाँ भारत में हमें बहुत सारी सिक्षाएं प्राप्त होती हैं कृष्ण के बारे में, राम के बारे में और असली.
हमारे जो परंपिता हैं उन के बारे में। लेकिन चेतन महाप्रभू की जो इच्छा थी.
कि जो भगवान के विषय में जो ग्यान है, इसे सब जगे इसका विस्तार हो, प्रचार हो।.
Bhagavad Gita was spoken by Krishna. Nice verse today.
Srimad Bhagavad Gita chapter 8 verse 4 आधि बूत्तं क्षरोभावा पुरुषस्चाधि दैवतं आध्याज्ञो अधम् एवात्रो तेहे तेह पृत्हमवरा। Translation, O best of the embodied beings, the physical nature which is constantly changing, अधिभूता, अधिभूता, अधिभूता, अधिभूता, अधिभूता, अधिभूता, अधिभूता, अधिभूता, अधिभूता, अधिभूता, अधिभूता, अधिभ� पर्पुट् पर्पुट् पर्पुट् पर्पुट् पर्पुट् पर्पुट् पर्पुट् पर्पुट् पर्पुट् पर्पुट् पर्पुट् पर्पुट् पर्पुट् यह करते करते करते करते करते करते करते करते करते करते करते करते करते करत� प and is situated in the heart. The word Eva is particularly important in the context of these words because by this word the Lord stresses that the Paramatma is not different from Him. The Supersoul, the Supreme Personality of Godhead seated beside the individual soul is the witness of the individual soul's activities and is the souls of the souls' various types of consciousness. शुपर्षोल् करते करते करते करते करते करते करते करते करते करते करते करते करते करते करते करते करते करते करत who cannot approach the Supreme Lord in His manifestation as Supersoul. The neophyte is advised to contemplate the universal form or Virat Purusha, whose legs are considered the lower planets, whose eyes are considered the sun and moon, and whose head is considered the upper planetary system. Hari Om Tatsa.
तो.
हम चर्चा कर रहे थे परमात्मा के विशय में। तो परमात्मा आप सभी के रिदयों में हैं।.
प्रतेख भक्त के विरदयों।.
तो पर्मात्मा सब देख रहे हैं कि.
आप क्या कर रहे हैं? तो क्या आपने आज तक कुछ ऐसा किया है जिसको करके आप शर्मिंदा हैं?
कृष्ण भावनामृत का अर्थ है कि आप जो भी करें वो भगवान कृष्ण की.
सेवा के लिए करें।.
तो.
अगर आप सही तरीके से जो भी करें भगवान कृष्ण की सेवा के लिए करें तो आपको शर्मिंदा होने की आवशक्ता नहीं है।.
जैसे.
की अगर पती और पतनी भगवान से प्रार्थना करते हैं, कि उनको एक संतान चाहिए, जो कृष्ण भक्त हो, दिर्ग आयू हो, और भगवान की सेवा करें.
तो इसके लिए आपको शर्मिंदा होने की कोई आवश्यक्ता नहीं है।.
लेकिन अगर कोई भगवान से प्रार्थना नहीं.
करता.
तो उनका उद्देशी नहीं होता कि.
वो एक कृष्णभक्त संतान के रूप में पाएं।.
तो.
एक कहावत है कि निर्जिला के उपवास के दिन हमें जल नहीं पीना चाहिए नदी के नीचे जाकर, पानी के अंदर.
इसका मतलब क्या हुआ?
एक.
फास्टिंग के दिन, एक वरत के दिन, जिस दिन आपने वरत किया है कि आप पानी नहीं पिएंगे, उस दिन आप पानी पी रहे हैं, वो भी.
पानी के नीचे जाकर.
तो आप विचार कीजियें कि आप गंगा.
में स्नान कर रहे हैं, आप गंगा.
में डूपकी लगा रहे हैं और आपको उस समय कोई भी नहीं देख सकता.
और.
आप वहाँ पर चुपके से पानी.
की कुछ गूट ले लो और फिर.
आप उपर आजाये और सबको दिखाईए कि मैं बहुती तपस्या कर रहा हूं.
लेकिन.
जो परमात्मा आपके रिदे में हैं, वो.
ये देख पा रहे हैं, देख सकते हैं. तो हम भगवान को धोका नहीं दे सकते हैं.
तो वरत के दिन पानी के नीचे जाकर पानी पीना, अगर हम यह करते भी हैं, तो हम किसको धोका दे रहे हैं?
तो.
हम भगवान कृष्ण की सेवा करना चाहते हैं, जिस पकार भगवान कृष्ण संतुष्ठ हों, प्रसन हों.
एक लोचन दास ठाकुर का एक कीरतन.
है जिसमें वो कहते हैं, सबे अलगतार सिरमानी केवलानन्दगन्दा। अलगतार सिरमानी केवलानन्दगन्दा।.
तो भगवान के जितने भी अवतार हैं.
उन सभी अवतारों के जो सार हैं.
मुख्य हैं, शिरोमनी हैं.
वो हैं चेतनि महा प्रभू, और वो अपनी जो कृपा है, वो बड़ी सरलता है सही, सभी को वितरन करते हैं.
और.
जो पद्धुति है, जो महाप्रभुने दी है, उसमें सिर्फ आनन्द ही आनन्द है।.
सिर्फ आनन्द, मात्र आनन्द है। तो नर-नारायन जो रिशी थे, उन्होंने हमें पद्वति दी ध्यान करने की।.
और चेतन महा प्रभु की जो पद्वति है, उसमें है निर्त्य, कीर्तन, प्रसाद सेवन। समस्या क्या है?
सिर्फ आनन्द ही आनन्द है। चेतनि महा प्रभू असल में आप सभी.
से प्रेम करते हैं।.
Chaitanya.
Mahaprabhu इस विशे में चिंता कर रहे थे कि कैसे इन पतित जीवों का उद्धार हो। तो आप सभी का जन्म, जिसका भी जन्म भारत में हुआ है, तो एक.
बहुत ही बड़ा एक आशिर्वाद है।.
So, how many of you downloaded the Sahaja Yoga summing up?
तो आप मेंसे कितने भक्त हैं जिनके पास जैपता का स्वामी आप नहीं था और उन्होंने डाउनलोड कर लिया हैं? कितने भक्तों के पास जैपता का स्वामी आप हैं?
हाथ उठाएं.
आप मेंसे कितने भक्त हैं जिनके पास मुबाईल फोन्स हैं?
हाथ उठाएं.
कितने.
भक्त हैं जिनके पास जैपता का स्वामी आप नहीं हैं?
तो.
जिनके पास भी स्मार्टफोन है, Android.
जिसके पास है, वो Google Play Store से इस आपको डाउनलोड कर सकते हैं, iPhone users, Apple Store से इसे डाउनलोड कर सकते हैं, फ्री में. और मैं एक दिन में कुछ संदेश भेजता हूँ, जो भी मैं सेवाय कर रहा हूँ, जो भी मेरी क्रियाएं हैं, मैं अपनी जैपता का स्वामी आप में अपडेट करता हूँ। आप जानते हैं मैं पूरे दिन में क्या करता हूँ?
अगर आप जानना चाहते हैं, तो आप.
में दे.
इसमें कोई Google की चीज नहीं है।.
तो.
जिनके पास भी स्मार्ट फोन है, मोबाईल फोन, Google Play Store या Apple Store से डाउनलोड कर सकते हैं।.
मैं देखूंगा.
कि आज आप के कितने डाउनलोड्स हुए हैं। तो अब ये समय है प्रश्न उत्तर का।.
ये जो भक्त हैं सभी बहुत ही अद्भूद हैं।.
तो.
एक प्रश्न है कि मायपूर धाम को ओदार्य धाम के नाम से भी क्यों जाना जाता है?
ओदार्य धाम का अर्थ क्या है?
धाम जो है कृपा का कृपा का.
धाम जगनात.
पूरी जाना जाता है एश्वर्य धाम के नाम से.
तो जगनात्वुरी द्वारका से अभिन हैं।.
वरिंदावन जाना जाता है माधुरियधाम के नाम से।.
बहुती मधुर है।.
लेकिन.
चेतन महाप्रभु का आविर्वाव हुआ था नवदीबधाम में।.
और.
वो भगवान कृष्ण का जो प्रेम है, वो बड़ी सरलता से सभी को वित्रण करते हैं।.
वो भगवान.
इसी.
लिए मायपुर कृष्ण का.
जो प्रेम है, वो बड़ी सरलता से.
सभी को वित्रण करते नवदीप हैं। जाना जाता है ओधारे धाम के नाम से।.
और आप वहाँ भगवान की कृपा प्राप्त कर सकते हैं।.
जो भी क्रिया हम मायपुर नवदीप धाम में करते हैं, वो एक सो गुना जादा शुबकारी होता है।.
तो आप कब आ रहे हैं मायापोर?
तो.
एक प्रश्न है कि हम कैसे भक्ती में बने रहें विशेश रूप से जो नए भक्त हैं, जो नव युवख हैं, जो अभी पढ़ रहे हैं या काम कर रहे हैं दफतरों में।.
जो.
नव.
युवख हैं, जो अभी पढ़.
रहे हैं या काम कर दफतरों में। जो नव युवख हैं, अभी पढ़ रहे हैं या काम कर � तो.
भर्ती में कैसे हम बने रहे हैं ये बहुती सरल है.
तो हम भक्ति योग.
में कैसे बने रहें, कैसे शक्तिशाली हों, हमें इसका एक record, इसकी एक सूची रखनी चाहिए।.
और फिर बास नहीं गड़ा है, हमें स्टार्थ हैं, पाइशे दे योग, तो.
हमें भगवान से प्रार्थना करनी चाहिए, मंदिर में जो विग्रे हैं, उन से प्रार्थना करनी चाहिए, कि मैं भक्ती में बना रहूं। हमें गुरु से प्रार्थना करनी चाहिए, कि मैं मेरी भक्ती में बनी रहें। हमें बहुत तीवर इच्छा करनी चाहिए, कि हम � तो मुझे लगता है कि आप में वो सब कुछ है जो भक्ति में निरंतर बने रहने के लिए चाहिए।.
आपको ये सोचना है कि आपको कृपा की आवशक्ता है। जो माया शक्ती है ये बहुत ही प्रबल है। क्योंकि माया शक्ती भी भगवान किर्षन प्रेम पाना चाती हैं।.
लेकिन जो उनकी सेवा है, उनकी सेवा.
है सभी का परीक्षा लेना। एक बार भगवान शिव कीरतन जब कर रहे थे।.
Ḍoḳḱḱḱḱ तो.
ये जो जब ये कीरतन हो रहा था, तो पूरे ब्रह्मान्द में भूकाम्प आ गया, तबाही मच गई, बाड आ गई.
तो.
पार्वती देवी ये सोच रही थी अभी तो महा प्रलय का समय नहीं.
हुआ है तो.
भागती हुई केलाश गई और उन्होंने कहा स्वामी, स्वामी तो भगवान.
शिवने अपना निर्तिय बंद किया। तो उन्होंने पार्वती से पूछा कि क्यों.
मेरे निर्तिय में आपने विगन डाला।.
तो पार्वती उन्हें कहती हैं कि आप.
जब नित्य कर रहे थे तो भूकंप, सुनामी, पाताल लोग पूरा तेहसनेहस होने वाला था तो मैंने सोचा ये तो महां.
प्रजाय का समय नहीं आया है भगवान.
शिव जाने चाहते हैं आशुतोष के नाम.
से भगवान बहुती सरलता, भगवान शिव बहुती सरलता से सन्तुष्ट हो जाते हैं।.
लेकिन पारवती बहुत जिग्यासू थी, वो जानना चाहती थी कि भगवान शिव इतने परम आनंद में कैसे है?
बगवान.
शिवने कहा मैं गौरांगा का नाम.
जब कर रहा था।.
गौरांग.
महा प्रभू कल यूग में अवतार लेते हैं और कृष्ण प्रेम बहुती सरलता से सभी को देते हैं।.
तो पार्वती ने पूछा मैं उनके दर्शन कैसे कर सकती हूं? कैसे मैं उनकी कृपा प्राप्त कर सकती हूं?
तो भगवान शिव ने कहा वो सब समय नवधीप धाम में बास करते हैं.
और आप उनका दर्शन वहाँ कर सकते.
हैं.
और पारवती नवदीब धाम गईं और.
वहां कीरतन करना शुरू कर दिया।.
जो रंगा जो रंगा जो रंगा जो.
रंगा जो रंगा जो रंगा जो रंगा जो रंगा जो रंगा जो रंगा जो.
रंगा तो गौरांग.
महा प्रभू वहाँ पर.
उनने अवतार लिया पार्वती के समक्ष।.
सुप्रादारो। एव, सियास लोग चाहिए, गौरांगा।.
तो.
पार्वती ने चेतन महा प्रभु को प्रणाम किया और कहा कि सभी मुझे.
माया कहते हैं तो मुझे आपके शुद्ध भक्तों का संग प्राप्त नहीं होता लोग.
मुझे कहते हैं माया.
तो लोग.
मुझे पिसाची माया कहते हैं, लेकिन मैंने सुना है कि आप सभी को भगवान की कृपा दे रहे हैं, तो मुझे भी.
कैसे भगवान की कृपा प्राप्त होगी?
तो.
भगवान महा प्रभु ने कहा कि.
वो राधाराणी से अभिन है क्योंकि.
वो.
अर्दशक्ती है इसी.
कारण से आप राधाराणी से अभिन है जो की भगवान की.
एक शक्ती हैं, अंतरंगा शक्ती।.
और.
ये जो स्थान है, इस थान पर आप साक्षातकार अनुभव कर सकती हैं, जो आपका संबन्ध है राधराणी के साथ। तो पार्वती देवी ने चैतने महाप्रभू की.
जो चरण दूली थी वो ली भगवान.
चैतने महाप्रभू के चरण कमलो से उन्होंने.
उनकी चरण रज ली और.
उन्होंने वो.
चरण रज अपने माथे पर लगाई जहां.
पर मातां लगाती हैं सिंदूर वहां पर.
तो.
जो दूईप जहां पर ये लीला.
होई थी वो पहला दूईप है नवदूईप.
धाम का उस द्वीप का नाम है सिमन्त द्वीप।.
Because poverty puts a dust, or a large agenda, let us speak, on her. Simanta has a part in her hair.
क्योंकि उस इसी द्वीप में पार्वती ने जो भगवान की चरण रज है, वो अपने सर पर लगाई थी, जोकी माथे के सर के बिल्कुल बीच में होता है।.
मैं.
भूल गया हूँ आपका प्रश्न क्या है?
तो.
प्रत्तेक द्वीप जो मायापुर है, मायापुर में है, वो एक भक्ति के अंग.
से जुड़ा हुआ है। जैसे की पहला द्वीप, सिमन्त द्वीप है.
जो स्रमण के साथ जुड़ा हुआ है.
तो इस प्राकार प्रतेक जो द्वीप हैं, ये जुड़ा हुआ है भगवान की भक्ति से। ये आखरी प्रश्न है आज का।.
तो.
ये आज का आखरी प्रश्न है ये प्रश्न ये है कि जो भूत होते हैं क्या वो अपनी इच्छा से इसकौन के हमारे मंदिरों में आ सकते हैं और जो श्रीमत भागवतम है उसका श्रवन कर सकते हैं और अपना उद्धार कर सकते हैं या उनका जो काल है, जो समय है भूत के शरीर में, वो उने जहेलना ही पड़ता है किसी भी कारण।.
तो.
जिसने ये प्रश्न पूछा है, वो बहुत ही चिंतित है भूतों के लिए.
आप.
दया करके कभी भूत मत बनिये। आप कभी भी सोचिये मत आत्महत्या करने के बारे में। भगवान घीता में यो कहते हैं कि जो भूत की पूजा करता है वो.
भूत बन जाता है।.
अस्तित्स.
थिंग्स। केवी इन अस्तित्स पोड़, प्रैज, प्रादा, भूय।.
तो ऐसा देखा जाता है, अगर हम कुछ शुब कार्य करते हैं, तो जो भी आशुब जो चीजें हैं, भूत हैं, पिसाच हैं, ये सब दूर चले जाते हैं।.
But, I heard a story that someone sent some ghosts to Israel.
लेकिन मैंने एक कहानी सुनी थी कि कैसे किसी व्यक्ती ने किसी भूत को भेजा था हमारे एक इस कौन मंदिर.
में और.
उस मंदिर में भगवान हरे कृष्ण और सभी उस मंदिर में भक्त हरे कृष्ण महामंत्र का कीरतन कर रहे थे तो कुछ भूत, भूतों का तो.
उद्धार वहीं पर ही हो गया। और कुछ भूत वापिस चले गए उन लोगों के पास जिनों ने उन्हें भेजा था।.
और उन्हें बताया कि मंदिर में जो भक्त हैं वो बहुत ही शक्ति शाली हैं। और वो उन्होंने उन्ही लोगों पर, उन भूतों ने उन्ही लोगों पर हमला कर.
दिया जिनोंने उन्हें भेजा था तो.
भगवान, जो भगवत गीता के ग्यारवें अध्याय में.
तो.
उस अध्याय में उल्लेक है कि कैसे अपना कोई बचाव कर सकता है.
भूतों से, राक्षशों से?
अगर कोई साधारन भक्त है और आत्मःत्या.
करता है, तो वो भूत बन जाते हैं।.
लेकिन अगर कोई ब्राम्मन हो या जिसकी.
सेकेंड इनिसियेशन ब्राम्मन दिक्षा हो चुकी हैं.
और वो अगर आत्मःत्या करते हैं, तो यह ऐसा कहा गया है कि वो.
ब्रह्म राक्षष बन जाते हैं। तो मैं आप से अनुरोत करता हूँ.
कि किसी भी कारण कभी भी आत्मात्या मत कीजेगा। यह एक विज्यान है भूतों के बारे में।.
लेकिन हमें विज्ञान ये सीखना चाहिए भगवान कृष्ण के बारे में। मैं बार बार महाराजी को बता रहा.
हूं कि प्रवचन समाप्त करने का समय हो गया है. क्या मैं आप सभी को कल भी देख पाऊंगा.
Hare Krishna.
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