20240419 || 75th Vyāsa-pūjā Offering by HG Nitāi Sevinī Mātāji || Delhi, India

A Hindi-language offering delivered at the 75th Vyāsa-pūjā honoring HG Nitāi Sevinī Mātājī (Delhi event). The speaker, Nilanjana Dasi, recounts humorous and affectionate anecdotes about the guru (comfort, mattress/towel stories, teaching style), reflects on the guru’s past hardships and spiritual impact, and offers prayers for the guru’s strength and continued guidance. The chunk ends with a brief closing/YouTube outro.
Omg atसश्ीगुरुवननमोम विष्णु कृष्ण परेश्तायभूतले श्रीमति जयपताका स्व शामिल, नीति ना मिले, नमो आचार्य पादायानिताईकृपा नगर ग्राम ने गुरु महाराज की गुरु परंपरा की ईज है शील की है। हिंदी में बोले के इंग्लिश में बोले कितने लोग चाहते हैं, हिंदी में बोले ओ मोस्ट। तो आज के दिन ऑस्फिशियलडेसेवंटी फिफ्तयनिवर्सरी गुरु महाराज के अपेरिंसडेथे मैंने तो सोचा था कि काफी गंभीर तरीके से 1 व्यास पूजा ऑफरिंग हम देंगे, लेकिन यहाँ का वातावरण अमोगलीलाप्रभुने इतना हयूमरस बना दिया और इस गरेजमितकषपभूनेभी इतनी सारी, अच्छी अच्छी हंसने वाली कथाएं गुरु महाराज से सम्बंधित बधाई। तो मेरी ऑफरिंग शुरू करने से पहले मैं 1 छोटी सी ह्यूमरस कथा बताकर शुरू करुंगी। जब ये लोग बात कर थे तो मुझे याद आया कि 1 बार गुरु महाराज काफी थके हुए थे और वे रेस्ट सो रहे थे और उन्होंने प्रसाद नहीं लिया था। तो भक्त 1 नए सेक्रेटरी उनके ज्वाइन हुए थे। तो उन्होंने गुरु महाराज को जाके उठाया की गुरमाज आपके प्रसाद का टाइम हो गया है, आप उठ जाइए। तो गुरमेज ने कहा कि प्रसाद के पहले मैं नहाऊंगा जाकर, मेरा ग्रीन वाला टवल ले जाओ। तो वो सेक्रेटरी ढूंढने लगा, उसे टवल मिल नहीं रहा था, पंद्रह मिनट तक ढूंढा फिर से आके गुरु महारज को उठाया, गुरमहाराजटवल मिल नहीं रहा है। गुरमाजनेकहादूसरीवाली बैग में देखो वहाँ पे देखा फिर पंद्रह मीटर गुरमा मिल नहीं रहा है, दूसरी वाली बैग में देखो तो आधा 1 घंटा तक वनलेनहाफवरतकवो ढूंढता रहा। फिर पुराने सेक्रेटरी आया बोला तुम क्या कर रहे हो? और मैं गुरु महाराज का ग्रीन टबल ढूंढ रहा हूँ, बोला ग्रीन जैसी कोई चीज है ही नहीं, उसका मतलब गुरु महाराज सोना चाहता है इसलिए तुम्हे केवल कह रहे है कि ग्रीन डबल ढूंढो। तो बस ये जो बातें कह रहे थे तो मुझे याद आई ऐसी कितनी सारी गुणमार्जहीजजस्ट अमेजिंग इन फैक्ट मुझे और 1 याद आ रहा है। जैसे पर्थ में जब गुणमार्ज गए थे तो वहाँ पे जैसे गुरमारज को 1 परटिक्लर एंगल में सोना होता है उस एंगल में नहीं सोयेंगे तो उनको सांस लेने में मुश्किल होती है तो सही टाइप ऑफ मैट्रेस चाहिए। तो वो बता रहे थे कि पहले तो फ्लाइट काफी देर से लैंड हुई और लैंड होने के बाद जब तक वे डिवोटी के घर पहुंचे सोनी की सारी अरेंजमेंट के ऑलमोस्ट रोल साढ़े 12 1 बज गए थे और उसके बाद में वो मैट्रेस उनको शूट नहीं हो रही थी तो अलग अलग जगहों से मैट्रेस मंगाई जा रही थी। जिनके जिनके घर हैं दूर में है तो मैट्रेस आ रही है और गुरु महाराज की जो सेक्रेटरी है सर्वेंट है, वे शो के देख रहे है कि नहीं ये तो ठीक नहीं है थोड़ा और मोटा होना चाहिए, थोड़ा और सख्त होना चाहिए। तो ऐसे करते करते गुरु महाराज वीलचेर पर बैठे थे और रात के 2 बज गए, फाइनली मैट्रेस ठीक हुआ के है ये मैट्रेस गुरु महाराज के लिए ठीक है। तो फिर गुरु महाराज के पास सर्वेंट्स गए, उनको वीलचेर से उतारेंगे अभी बेड पे सुलायेंगे। तो गुरु महाराज ने कहा चैतनचरतामऋतननिकालो वहां पे जो बेड़ा पास टाइम्स है मध्य लाका, मैं उसके बारे में सुनना चाहता हूँ। उनकी सर्वेंट ने उनको कहा गुण माज काफी देर हो गई है, अब आप सो जाइए। गुड़मार ने बहुत ही गुस्से से कहा कि मैं कब से तुम लोग का बेड पास्टैं्स देख रहा हूँ, मैं बेड कांशसनेस में नहीं सोना चाहता, मैं बेड़ा कांशसनेस में सोना चाहता हूँ। तुम मैंने इतना घंटा, तुम लोगो को टॉलरेट किया। अब तुम लोग चेतन से पढ़ोगे मैं तभी जाके सोऊंगा। तो ये है गुरु महाराज और इन फैक्ट अभी जो अमूगलीला बता रहे थे निमाई नेता की ये अटलांटा के न्यूरोलॉजिस्ट ने बताया है जिनको मतलब जो हमारे इस कोड के ही गुरु परंपरा के लिखित है और वो 1 अमेजिंग न्यूरोलॉजिस्ट हैं और वो जहाँ पर डॉक्टर हैं वहां पे बहुत सरे लोग क्रिस्टल है। तो गुरु महाराज ने उनको कहा कि अरे तुम तो बहुत आसानी से प्रीच कर सकते हो, कैसे हो सकता है मैं क्रिस्टन लोगों को कैसे प्रीच करूंगा, तुम इम्ेरिशनेकहा क्यों नहीं कर सकते, तुम न्यूरलॉजिस्ट हो, तुम्हारा काम क्या है? उनके सारे लिम्स ठीक से काम करते हैं कि नहीं यही तो तुम्हारा काम है। तो जब वो तुम्हारे पास आये उनको चेकिंग करने के लिए, उनको कहो कि यह तुम्हारी इमैजिनरी टाई है और यह तुम्हारे घुटने है घुटनों को इंग्लिश में नी कहते हैं। तो हाथ नीचे करो और बोलो नी ताई ने ताई और फिर कहा गुरु महाराज ने की जब निताई हो जाए उसके बाद फिर 5 मिनट उनको कराओ नी माय किसका हृदय है माई मेरा मेरा हृदय है नि माय नी ताई और इस तरह से तुम परिचित। और फिर गुरु महाराज ने ये भी कहा की उनके दोनों हाथ ठीक है की नहीं इसलिए उनसे क्लैप कर के बोला जल्दी जल्दी करो हरी हरी हरी हरी हरी। तो गुरु महाराज जी कह रहे थे कि नरसी के पुरान में कहा है कि जब हम क्लैप करते हैं तो हमारे पुराने जितने भी कर्म होते हैं। जिस तरह से जब हम क्लैप करते हैं कव्वा उड़ जाता है, उ सब तरह से हमारे सारे पुराने कर्म उड़ जाते हैं। तो उस तरह से गुरु महाराज ने कितनी सुन्दर तरीके से। तो आज के इस स्पेशल लोकेशन पे सेवेंटी, फिफ्त एनिवर्सी बस में गुरुवार से, अपने हृदयपुर से, यही मेरी हिंदी कभी कभी थोड़ी सी गलत भी हो सकती है। बस मैं अपने हार्ट ऑफ हार्ट से, गुरुवार से यही प्रार्थना करुंगी कि हमेशा वो अपने शेल्टर में हमें रखे, उन्होंने हमारे जीवन को टच किया है, उन्होंने हमारे हमें टीच किया है, उन्होंने हमें टर्न किया है कृष्णा की तरफ। मैं जब भी गुरु महाराज को देखती हूँ, मुझे ऐसा लगता है कि उनका अपीयरेंस तो 1 उगने वाला सूर्य जैसा है। जब सूर्य उगता है, राइज होता है तो सारा गन्दा पानी सूख जाता है और अच्छे अच्छे कमल खिलते हैं। उसी तरह से गुरु महाराज जब हमारे जीवन में आते हैं तब हमारा जो गंदा पानी सारे अनर्थ है वो सूख जाते हैं और हमें जो अच्छे अच्छे गुण है 1 कमल के तरह में हिल जाते हैं। इन फैक्ट में परसो ही सोच रहे थे कि गुरु महाराज का जीवन। इन फैक्ट। महाभारत में 1 कथा आती है। मणिपुर के 1 राजा थे मगर मगर ध्वज। तो राजा का समस्या यह थी कि वे मयूर ध्वज है। उनका नाम वे बहुत पावरफुल थे। जब युधिष्टर महाराज ने अश्वमेध यज्ञ किया तो उनका अश्व जो है। इस मयूर ध्वज राजा ने पकड़ लिया था। तो सारे पांडव आए उनसे युद्ध करके अश्व को लेने के लिए। लेकिन चारों पांडव परास्त हो गए। अब बाकी बचे थे युधिष्टर महाराज। तो उन्होंने कहा कि अब मैं जाऊंगा। तो कृष्ण ने कहा देखो इस मयूरध्वज राजा को तुम अपनी शक्ति से नहीं हरा सकते, बुद्धि से हरा सकते हो। ब्राह्मण का वेश लो। तो फिर युधिष्टर महाराज ने ब्राह्मण का वेश लिया। भगवान कृष्ण ने ब्राह्मण का वेश लिया और फिर वे मयूर ध्वज राजा के पास में गए। और उन्होंने कहा कि हे राजन। इस व्यक्ति के बेटे को जंगल में किसी शेयर ने पकड़ लिया है। और उसने यही कंडीशन दी है कि अगर मयूर ध्वज राजा का आधा बॉडी, राइट साइड का आधा, बॉडी का फ्लैश अगर उस सिंह को शेर को दिया जाए। तभी उसके बेटे को छोड़ देंगे। तो उसने कहा इतनी छोटी सी बात। 1 ब्राह्मण को तुम्हें मदद करने के लिए, कुछ भी करने के लिए तैयार हो। तो साथ ही साथ में उसने अपने बेटे को बुलाया और कहा मेरे शरीर को काटो तो उसके शरीर को काट रहे थे पूरा पूरा आधा। और जब आधा शरीर को काट रहे थे तो लेफ्ट साइड की आंख में आंसू आ रहे थे। ऐसा दान नहीं चाहिए। दान तो सत्र मोड में किया जाता है, हंसते हुए किया जाता है। तुम तो रोते रोते दान दे रहे हो। मयुर द्वजा। राजा ने कहा तुम मुझे गलत समझ रहे हो, मैं इसलिए नहीं रो रहा हूँ। मेरी लेफ्ट साइड की आंखों से। इसलिए आंसू निकल रहे है कि राइट साइड तो परोपकार में यूसफुल हो गया, मेरा लेफ्ट साइड क्यों बच गया इसलिए रो रहा है। मेरी लेफ्ट साइड को भी परोपकार के लिए मुझे इस्तेमाल करना है। जब हम ये कहानी सुनते हैं, हमें गुरु महाराज की याद आती है। स्ट्रोक के बाद में उनका सेवंटी फाइव परसेंट शरीर जो है निष्क्रिय हो गया है। लेकिन वो बाकी बचाओ और शरीर से सोचते हैं कि मैं कैसे इस शरीर को यूज करूं। परोपकार के लिये, लोगों के कल्याण के लिये, जीवों के कल्याण के लिए, इन फैक्ट। इसके इस दान की वजह से भगवान कृष्ण इतने खुश हो गए। उन्न्होंने कहा की अब से जब भी, जहाँ भी मेरा मंदिर होगा वहाँ पर पहले ध्वज होगा। क्यूंकि मयूर ध्वज राजा का नाम जो है। और वहाँ पर जो ध्वज होगा उसकी परिक्रमा करने के बाद ही सबको जो है मेरी ब्लेसिंग मिलेगी। उसी तरह से मुझे लगता है कि गुरु महाराज का ये जो ध्वज है विक्ट्री फ्लैग, उसकी पहले पूजा करेंगे। तभी हमें कृष्ण की ब्लेसिंग मिलेगी तो गुरु महाराज। जब हमारे जीवन में कोई फिजिकल प्रॉब्लम आती है तो वो हमारी प्यूरिफिकेशन के लिए है। लेकिन गुरु महाराज के जीवन में जो भी फिजिकल प्रॉब्लम आ रहे हैं, वे उनकी ग्लोरिफिकेशन के लिए है। आगे चल के हिस्ट्री में सब उनके बारे में बातें करेंगे। जिस तरह से अब हम बोलते हैं, रामनुजाचार्य को किसी ने अटैक किया था, मध्वाचार्य को किसी ने कायजन दिया था। जैसे वो स्वामी के दोनों हाथ काट दिए थे, उस से गुरु महाराज के बारे में भी फ्यूचर में हिस्ट्री में बातें होंगी कि कैसे उनको इतना फिजिकल प्रॉब्लम था। फिर भी उन्हें कैसे प्रचार किया। स्पेन में कैसे किसी ने उनका गला काट दिया था। फिर भी वे रुके नहीं, वे टूटे नहीं। इनफैक्ट गुरु महाराज के वाक्य में कहे तो गुरु महाराज कहते हैं आम नोट आउट, इ म नॉट आउट में भी गेम से निकला नहीं हूं। मैं सिर्फ थोड़ा सा क्या कहता हूँ, विश्राम ले रहा हूँ, बस इम नोट आउट। इन फैक्ट। 1 सभा में गुरु महाराज को कोई इंटरव्यूस करते हुए कह रहे थे कि इस सिख ये बीमार है। तो गुरु महाराज ने कहा नोट सिख मई बॉडी इस नोट कॉपोरेटिंगवित मी, मैं बीमार नहीं हूँ, मेरा शरीर मेरी बात नहीं सुन रही है। ये है गुरु महाराज का सुन्दर सा भाव। तो गुरु महाराज की बहुत जरुरत है। इनफैक्ट प्रपा जी के शब्दों में कहें तो बहुत सालों पहले जब प्रपा जी धूप पंच में थे तब 1 बार गुरु महाराज ने प्रपा जी को चिट्ठी लिखी कि प्रपा जी मैं नवद्वीप में हरिनाम कर रहा हूँ और लोगों का अटेंशन जो है हम पे जा रहा है। तो प्रभु पा जी ने 1 सुन्दर बात गुरु महाराज से कही कि यू आर ए प्योर सोल और तुम्हारे मुंह से जो हरि नाम सुनेगा ही विल गो बैक होम, बैक टू गो हिट। तो यह शिला प्रभु के अपने वाक्य है यह शिला प्रभु पासो गुरु महाराज को देखना, गुरु महाराज को प्रणाम करना, इन फैक्ट रथ यात्रा के बाद में 1 बार प्रभुपाद जी जब रथ रथ होता है जो रथ के चक्के होते हैं चक्के कहते हैं रथ के काट को, वील्स को प्रणाम कर रहे थे तो किसी ने कहा प्रभुपाद जगन्नाथ तो नहीं है रथ पे। तो प्रभुपाद ने कहा तो क्या हुआ ये जो रत चक्कर है ये जगननाथ को कैरी करते हैं। तो इमेजिन जो रगननाथ को 1 दिन कैरी करता है वो हमारे लिए पूजनीय है। तो गुरु महाराज तो राधा माधव को 24 घंटे अपने हृदय में कैरी करते हैं। तो उनको तो हम अनलिमिटेड भी चेंसिस पे करे तो भी कम है। तो बस हमें सीरियस होना है। कभी कभी बहुत बार भक्त मेरे पास आके कहते हैं कि जो गुरु महाराज के शरीर की सेवा करते हैं, वापू सेवा करते हैं, वे कितने लकी हैं। वे तो सीधा भगवत धाम चले जाएंगे, हम भी जा सकते हैं। गुरु महाराज ने जी एस एस मीटिंग में 1 बहुत सुन्दर बात कही। उन्होंने कहा 5 चीज अगर कोई 5 चीज करता है तो मैं गारंटी देता हूं वो भगवत धाम जा सकता है। गुरुमाराज ने कहा पहली चीज अपना, जब ठीक से करो, 4 नियम पालन करो, दूसरा चीज वैश्नव की सेवा करो, तीसरा चीज महाप्रभु की जो वानी है उसका प्रचार करो और कहा कि मेरे साथ में कनेक्शन में रहो। यह बहुत जरूरी है कि हम गुरु महाराज के साथ कनेक्टेड रहे, प्रचार करें, महाप्रभु की वाणी प्रचार करे और गुरु महाराज के प्रीचिंग जो मिशन है उसमें हम भी भागीदार बने। हम गुरु महाराज की मदद करें। तो बस जिस तरह से भौतिक जगत में जो सेल होता है वो लिमिटेड टाइम होता है। आप इस पंद्रह दिन के अंदर में नहीं खरीदोगे तो पूरा पूरा पैसा पर पड़ेगा। उसी तरह से साधु की कृपा भी लिमिटेड टाइम होती है। पता नहीं ये साधु कब लीला, खत्म करके चले जाए। तो ये गुरु महाराज की करुणा का, प्रेम का, दया का, जो सेल चल रहा है, हमें इसका फायदा उठाना है, हमें पता नहीं यह सेल कब बंद हो जाएगा। तो आज इस पवित्र मौके पर गुरु महाराज से प्रार्थना करुंगी कि वे शक्ति दे। उनके हर वचनों का पालन करने के लिए। 1 तो शिष्य होता है जो गुरु महाराज कहे तो भी बात न सुने, 1 तो है जो इंस्ट्रक्शन देने के बाद फॉलो करे और 1 है बिना इंस्ट्रक्शन दिए ही समझ जाए। तो मैं गुरु महाराज से रिक्वेस्ट करूंगी कि मुझे वे आशीर्वाद देखें। उनकी बिना कही हुई बातें भी मैं समझ पाऊं.
हो।
1 छोटी सी लाइन बोल के खत्म करूंगी लास्ट मायापुर में गुरु महाराज की व्यास पूजा हुई। गुरु महाराज के चरण धो रहे थे, चरण अभिषेक हो रहा था और मेरे प्रभु जी चरण अभिषेक कर रहे थे और मैं क्राउड में बैठी थी। जब चरण अभिषेक हो रहे थे तो गुरु महाराज इस तरह उस तरह उस तरह बहुत ही जबरदस्त अपने सिर को आप अभी भी उस यू ट्यूब वीडियो में देख सकते हो। तो मुझे लगा क्या हुआ, गुरु महराज क्या कर रहे हैं समझ में नहीं आया। उसके बाद में जब मैं ऊपर आई पुष्पांजलि के लिए गुरु महराज की विल चेयर को ले जा रहे थे बातरूम जाने के लिए, तो गुरमाहजनेमेरे पास आते हुए वीलचेयर रोकने के लिए कहा। गुरु माज ने कहा तुम क्यूं नहीं आई? तो मुझे समझ में नहीं आई कि मैं तो अभी हूं, यहां आई, तुम क्यों नहीं आई, मैं इधर उधर देख रहा था, तुम नहीं आई। फिर गुरमार सेक्रेटरी ने कहा कि गुरमा चाह रहे थे, ऊपर आये क्योंकि जब भी गुरमाजविशाखरपमाते है तो प्रभु जी चरन होते है और जो है पानी डालते हैं तो गुरमाजनेतो मुझे। उस दिन ऐसा लगा गुरमाजकीअनकहहोभी बातें भी समझना है तभी जाके हम परफेक्ट डिसाइपल बनेंगे। जो कहते हैं वो तो करते हैं लेकिन जो मन में सोचते हैं वो भी हमें समझना है। तो आज के सेवेंटी बर्थ एनिवर्सी मैं गुरु महा से प्रार्थना करूंगी। वेज कीप्स आज मी मई, हसबैंड चिल्नंडडिवोटीज स विशाकापटनम अंडर हिज वाम शेल्टर खैर thank you so much hadats gas.
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