20240419 || 75th Vyāsa-pūjā Offering by Bhadra Charu Prabhu || Śrī Māyāpur, India

Bhadra Charu Prabhu offers a devotional speech at the 75th Vyāsa-pūjā celebration in Śrī Māyāpur on May 1, 2024. The offering, delivered in Sanskrit and Bengali, honors spiritual masters and explores devotional themes central to the festival.
हारी कृष्णा, नमाऊं विष्णपादाय, कृष्णप्रिष्ठाय, भूतले, सिमते, जायपताका, स्वामेने, तिनामेने, नमाँ आचार्यपादाय, नितयकृपाप्रदायने, गोरकथाद्धामदाय, नगरकदामतारेने।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।� उपलब्दी करची जखन आमी सरासरी भावे सेवा करते परतम तखन आपनार सुन्गे सवस समय जगाजग ठाकतो। किन्द परबर्तिकाले स्वास्तेर कारणे जखन आमी बेसी समय आपनार सुनगे जेते पारी ना। पर आपनी सब समे आमर क संगे जगा जग राखचें। आमी राखे ना किन्दो आपनी राखें। आमी आपना के कोनो रीपोर्ट न दे ना आमी की करची ना करची। किन्दो आपनी जे भावे होग ना क्यानो, आमी करोना कोनो भावे रीपोर्ट एबं आमार हार्ट ओपरेइशन होच्छे से इसमयो तीनी जदियो तो आपनी खवर रकेचेन एबं आमार समस्त प्रकारेर बनने सास्तेर ब्यावस्था रकेचेन त्याहोग सब समय एबं एमनी यो माझे-माझे नि भौक्तरा आजके आमांके बोल छिलो तामें बेसे किछो दुः-तीन ता मात्रो लाइन बोलवो से ता हाँच्छे पुरा कविता सुन्दे चाही छिलो आमें बोलछे स्रिला प्रभुपादेर विजय पताका गुरुदेव महाराज स्रिजय पताका स्वामी नामे तुमी जगत बुझिते सामर्थ्य प्रदानियो नात तुमि दिन जनबन्धो। आपनी स्री गुरु आदेशानुसारे आशिले भारोद बर्शे स्री गुरु गौवरांग कोईंकरज्य साधने जुक्त हले निरलसे देखि आपनार गुरु गौवरानिष्था प्रभुपाद रिष्ट चि पास्चात्यो देशेर चाकोचिक्यो पुर्णो जागोतेक विद्यारोस निजयस्यो पैत्रिक अतुल वैभोबे कोखण होलेना बोश सिगुरु काइंकरज्य साधनेर तरे परिजने परिहरी छाड़ी ग्रिहो पास वरिले सन्यास सहस्ते त्रिदन्रोधरी केगो तुम्ही ज अवश्य तुम्ही गोरांग पार्षद यहाथे नाई सम्शाए। स्रिलाप्रभुभादेर कथर अनुसारे एकथाई सिद्ध होई। दिग्बादिगन्ते देश विदेशेते अंतरिक्खे जलेष्थ हले सांत सुम्य तब सन्यास स्वरूब दरशने कुतु हले आपामर जन न स्रिक्रिष्णभावना प्रचारेर तरे त्रिदन्द्य संत्रिदन्द्य स्रिजातामधब सेवार सोष्थाब नवदिव उन्नयन स्री गुरु गौरान को निताई प्रसंग तमार सर्वस्थधन अद्भूत मंदीर प्रकाशने धीर गौवड मंडल सेवा विमुक्द हुदोई जगद हेरोई तव विष्मय प्रतिभा। स्रिगवर निताई अद्वैद गदाई स्लिवासाधी भख्त गन। तुमार हुदोई आनंदित होई सदाई करे नर्तन। गोरांग चरणे पराण समपिया गोरांग करेछ सार। दुबहु तुलिया गोरांग � गौरेर आचार गौरेर प्रचार तुमार सरवस्पधान। विषय प्रसंगो छाडिया गौरांग भजने तुमार मती। जगद जनरे गौरांग चरणे सतत बढ़ाव रती। गौर प्रियजन सहीत बसती गौर प्रियजने रती। गौर प्रियजन चरण शेवने तव प्रगा गौव्र प्रियजन पदांकित भुमी उन्नोयने द्रिधवती। गौव्र प्रजजने अभेदधर्षने गौडकरी गौडेकरी नित्यवास। सतहत चिन्तह स्रिराथा माधव माधुर्जलिला विलास। गम्भीर सभाब आमी की भुझीव मंतपुध्यभाजन। चातकेर सम हरे कृष्ण, अपने बहुत बहुत पवयम, श्रीपाद बद्धर चारु प्रभु, वो उन्हें, गुरु महाराज के अप्पियरन्स के लिए, अपने अप्पियरन्स के लिए, अपने अपने अप्पियरन्स के लिए, अपने अप्पियरन्स के लिए, � अपने अपने अपने अपने अपने अपने अपने अपने अपने अपने अप�.
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Вот русский перевод текста песни «Любовная песня матери Лорри своему сыну Джею»


