20240419 || 75th Vyāsa-pūjā Offering by HG Pūrṇacandra Gaura Prabhu || Delhi, India

Hindi-language YouTube recording of a devotional discourse by HG Pūrṇacandra Gaura Prabhu (two speakers present). The speaker narrates biographical and hagiographic stories about a guru-maharaj: miraculous healings (a paralysed clerk healed by following guru's instructions to chant and follow rules), weather miracles (dispelling a storm by chanting maha-mantra), and anecdotes about disciples, initiation (diksha) and devotional practices (japa, 16-mala). The talk emphasizes guru's mercy, devotional discipline, and personal anecdotes from Odissa and Mayapur events. The video contains closing English-language channel prompts.
रे किस तो मैं हिंदी में बोलने के लिए कोशिश कर रहा हूँ। तो तो पतिंशगुरुमहाराज की जो बात हम शास्त्र में सुनते हैं, मुकम करोति बाजल पंगुलंघयतिगरजत। तो पंगुलंगिगिरिका में 1 एग्जाम दूंगा। तो ओडिशा के भद्रक में जो भद्रक मंदिर में हमारे गुना से बार दीक्षा दिए थे, पहला उनके जीवन में जो दीक्षा शुरू किए थे रामनवमी के दिन, तो गुरु महाराज ने नाइनटीन सेवेंटी रामनवमी अप्रैल 17 तारीख को पहला दिख्यानुष्टन किए थे। तो उसके बाद जो भक्त भक्त लोग बढ़े थे। 1 प्रभु जी ने गुरुमाराज का जो फर्स्ट डिसेबल थे, वो प्रचार कर रहे थे। तो उनके 1 ऑफिस में इरिगेशन ऑफिस से इरीगेशन ऑफिस में 1 क्लर्क था, उन्होंने बहुत तांत्रिक थे, शिव जी का, बहुत तांत्रिक थे और तांत्रिक कारण से मंत्र का गड़बड़ हो गया, इसी कारण से उनका कमर से नीचे तक उनका 2 पैर नहीं चल रहा था, वो चलते फिरते नहीं कर सकते थे इसलिए जो ऑफिस ड्यूटी जाते थे कभी कभी उनको महीने में 15 दिन में उनको रिक्शा में बैठा देते हैं, वो ऑफिस साइन करके आता है। यह सब बहुत दिन चलने के बाद प्रभु जी बताया कि तुम्हे काम करो, तुम तो बहुत तंत्र के पास गए, डॉक्टर के पास गए, तुम 1 बार हमारे साथ मारा, गुरू महाराज भुवनेश्वर आ रहे हैं। तो इसलिए तुम चलो हमारे साथ, तो हमारे गुरु महाराज को मिला, उनकी कृपा हो तो तुम अच्छा हो सकते हो। उनकी बात सुनकर उनके साथ उन्होंने भुवनेश्वर आए थे। तो भुवनेश्वर में क्या हुआ? जमने हुई विद्या रत्न प्रभु ने गुर्मा मिला है गुरमाजउनकोसिबताए की, तुम क्या चाहते हो, गुर्माराजमेचलना चाहता हूँ, वो भक्ति नहीं कर रहा था कर्मी। तो उसी दिन गुर महाराज ने बताया कि 1 काम करो, तुम अच्छा होना चाहते हो तो तुमको अभी से 4 माला जप करना पड़ेगा, जब करोगे और बोले हाँ गुर्मा करूँगा, गुर्माज बताया की ठीक है तुम सब्तीग्रहणकरना जब से तुम पूरा 4 नियम पालन करेगे, 16 माला जप करोगे तो तुम पूरा चल सकोगे, सब कुछ कर सके तो उसे बात सुन कर, वो बहुत मैंने अच्छा महसूस किया, घर में आया गुरवाज उनको जब माला दिया जप करना करने के लिए बताए घर में आ के जब 2 माला 4 माल किया अच्छा लग रहा है जब वो 8 माल किया तो वो क्या करते उड़ नहीं सकते, जैसे मे पूरा जिसका पर नहीं चलता है जैसे, तो मैंने घिसते घिसते हैं। 8 माला जब किया थोड़ा सा दिवाल पकड के वाल पकड़ के चलना सीखा। उसके बाद जब 16 माला किया, 4 नियम फल हो गया और साइकिल चलाया साइकिल से फिर उनका ऑफिस आया, सारे कुछ काम किया तो गए थे, बहुत खुश हो गई मैं कितने डॉक्टर दिखाया कितना तारिको दिखाया कुछ नहीं हुआ। इन साधु ने मुझे हर नाम करने बताया और नियम पालन करने के लिए बताया तो मैं चल सकता सब कुछ कर सा। जब गुर्मा के पास दोबारा जब मिलने गया तो जब बोले कि गुरमा अच्छा हो गया तो आपकी कृपा से मैं अच्छा हो गया तो आप जो बताएंगे हम कहेंगे करेंगे। तब गुरु महाराज ने बताया तुम मेरे इस का नियम जो है, सारे पालन करोगे तो सोला माला जब हर रोज करोगे प्रसाद लोगे भक्त बन जाओगे तो सिर्फ चलना नहीं तुमको हम साथ में भगवत धाम ले जायेंगे। यह सचमुच बात हैं। ऐसा हुआ है उन्होंने आई टी फाइव में दीक्षा लिए थे। प्रभु जी ने। तो हम इससे सीखते हैं कि बंगुलंगहेतेगिरी जो पंगु गिरि लंघन कर सकता है। भक्ति करने से। ये सच मुच गुरुमहाराज के जीवन में हुआ था। तो 1 बार की बात है, भतरतिहडीमेंएकबार बहुत बड़ा प्रोग्राम हो रहा था नाइटी नाइनटी, फाइव में तो गुरु महाराज आये थे मायापुर बहुत सारे भक्त लोग पेंडल प्रोग्राम के सहायत आये थे। तो 1 बहुत बड़ा फील्ड था फील्ड में प्रोग्राम हो रहा था। बहुत सारे गाँव के लोग देखने आये थे गुरमा, इतना बड़ा, इतना अच्छा दिखने वाले सब लोग सुन रहे थे। शाम का टाइम था, इवनिंग का टाइम तो लगभग 6 बजे तो उसी समय मौसम का ही। तो जब उसी समय इतना तो तूफान आया बहुत से आकाश पूरा मन बादलों में छा गया। तो अन्धकार पूरा हो गया। अंधेरा इतना जोर से इधर आया था। सारे लोग चलने लगे, प्रोग्राम छोड़ के चलने लगे तो गुरु महाराज स्टेज पर थे। गुर्मा स्टेज से नीचे गुरु महाराज ने क्या किया तो ऊपर में आकाश को देख के गुरुमहाराज 2 हाथ उठाया और ममंत्र तो सचमुच गुरुमहाराज। जब 2 हाथ उठाये उठे के हरे, कृष्णा हरे कृष्णा कृष्णा कृष्णा हरे हरे हरे रामा हरे रामा रामा रामा हरे हरे महामंत्र किए। दोनो हाथ नीचे उतर दिए तो कुछ खन के अन्दर सारे बारिश और बादल कहाँ चले गए। तूफान चले गए। सारे लोग बैठे अच्छा ऐसे प्रोग्राम हुआ जब रात सोने गए तो 10 बजे रात को ज्यादा बारिश हुआ इतने टाइम रुकने की क्षमता उनके पास है बारिश को भी। इसलिए सारे लोग वहाँ का जो लोग आये थे बहुत सारे 10 हजार से ज्यादा लोग थे। तो सारे लोग बोलने लगे ये सचमुच.
कोई.
लोग नहीं, कोई मानव नहीं, ये देवता की क्षमता है उन्होंने कोई देवता है दिखने में तो बहुत लम्बा है बहुत उनका फिगर तो बहुत अच्छा है। सारे लोग बोलने लगे कोई देवता होगा, कोई मानव होगा तो ऐसा नहीं कर पाएगा। तो यह गुरुमहाराज का बहुत सारे लीला है जो गुरुमाराज ने करके दिखाया। कभी कभी भक्तों के साथ इतना फ्रेंडली हो जाते हैं, कभी भक्तों के साथ खेलते हैं, कभी बहुत शासन भी करते हैं। 1 बार की बात मुझे याद है बालेश्वर में 2000 3 में गुर्माजआये थे हमारा जो ओडिसा का तो स्टेट काउंसिल में स्टेट सम्मिलन होता है। उसी प्रोग्राम में आये थे, लगभग हजारों भक्त लोग थे उसी प्रोग्राम में, लास्ट में जब गुर्मा जा रहे थे तो भक्त लोग कुछ बोले के गुरमा आपके साथ फोटो फोटो खींचना है। तो गुरमा जी बताया ठीक है। 1 बहुत ऊँची का जागा था सारे भक्त उधर खड़े हो गए। तो खड़े होने के बाद गुरमा फोटो खींचने के लिए बोले तो 145 लडकिया थे जो पिछली बार गुरमार 2 हज़ार 2 में 16 आये थे दीक्षा के लिए, गुरमा रिक्वेस्ट किए थे, गुर्मा बोले की ठीक है, दिक्षा होगा तो इस बार गुरबाज उनको जो देख लिए पूछे क्या दिक्षा इस बार हुआ क्या तुम्हारा न दिक्षा हुए नहीं तो गुरमार पुचन्द्रपहजीने हमारा दिक्षा दीक्षा नहीं दे तो गुर्मा सामने मुझे बोले तुम दीक्षा क्यो देते उनको कोई प्रॉब्लेम, उनका कोई नियम पाल फॉलो करता नहीं 16 माला करते नहीं गुर्मा ऐसा नहीं है तो क्यूँ नहीं देते हो गुर्मा मुझे ऊपर से मना किया है तो दीक्षा देने के लिए तो गुर्माजबो्लुऊपर ऐसी कौन है कौन मना करता है तुमको हम सोचते थे की लड़का लोग शादी करेंगे कहाँ जायेंगे, शादी के बाद क्या होगा होगा भक्ति करेंगे नहीं करेंगे, बहुत अच्छा होगा, हम सोच रहे थे लेकिन हम बोले की ऊपर से भक्ति पुरुष महाराज, राम प्रेम, स्वामी जी महाराज दोनों ही महाराज थे तो तुमको मना किया क्या नहीं गुरु महाराज तो गुरवाज मेरे ऊपर गुस्सा होगे तो 1 थप्पड़ लगाया, 1 थप्पड़ लगाया तो थप्पड़ मेरे गाल पर लगा लगा, उस दिन इतना सीट किए थे तो उनको बताया की लोग शादी बताया, इन लोग शादी करके दीक्षा लेगा तो कोई भक्ता डिवोटी, कोई शादी नहीं करना है, उससे अच्छा है यह अच्छा है और उन लोग शादी करने के बाद तुम जो सोच रहे हो ऐसा गुरु की कृपा होता है, ऐसा कोई ड्यूटी नहीं रहता कि शादी करने के बाद तो उनका भक्ति छोड़ दे, दीक्षा लेने के कोई बुराई होता है ऐसा नहीं होता है भगवान गुरु का कृपा होता है सचमुच उन डिवुटियोंलोग जो जो अच्छे ऐसी कोई 1 लड़की रह गए तो अच्छा रह गया, शादी नहीं किया है सारे बहुत अच्छे में है तो हम भी अपना मत भी चलाते है, तो गर्म होते है की सबको देखने के तो गुर्म चाहते कृपा करने के लिए गुरु महाराज की पूजा में गुर्म कुछ करने के बाद यहाँ आयेंगे तो हम उनका व्यास पूजा तिथि में क्या जीवन भर हम तो बहुत कुछ उनके पास में बहुत सेवा की है तो बहुत अपराध भी की है, सारे अपराध क्षमा करे गुरमार.
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