20251207 - Śrīmad-Bhāgavatam Class, ISKCON Kharghar, Navi Mumbai

Recording of a Śrīmad-Bhāgavatam class (Hindi) given by Jayapataka Swami at ISKCON Kharghar. The speaker recounts Purāṇic stories (Yayāti–Devayānī episode, Ekadashi story), emphasizes Ekadashi observance and vrata practices, gives practical rules for householders (restrictions during fasts and menstruation), and urges study of Srila Prabhupāda’s books, chanting (japa), and preaching. The chunk also contains personal reminiscences (1968, Montreal, San Francisco), temple-opening anecdotes, deity-lilas and examples of devotees’ faith.
Chapters
हम 2 लगाए.
थ्री.
थ्री टेटर हे री.
तो आज कुछ लोग है जिन भागकर क्लास के लिए ज्यादातर लोगों में कोई तातपर्य कर पाता सिर्फ आखिरी का कुछ लोग है जिसमे छोटा सा तातकरे.
In hindi in.
थर्टी टू.
हो गया, थर्टी टू हो गया, थर्टी, थ्री.
थर्टी, थ्री, थर्टी सेवन.
थर्टी, थ्री सी, थर्टी सेवन.
ट्रांस.
स्लो 35 देविया पूर्व को जन्म दिया। और शर्मिष्ठा ने गुरुवा तथा पुरी को.
अगला जब गर्मी बेलिया, बाहर से जान गयी की सर्मिष्था उसके पति से गर्बवती हुई है। वह क्रोध से पगला थी और वह अपने पिता के घर मायके चले। अगला चूंकि राजा गया, अत्यंत कामी था। अत वह अपनी पत्नी के पीछे पीछे हो लिया। उसने उसे पकड़कर, मीेहीथेपोलकहकर तथा उसके पाँव दबाते हुए उसे प्रसन्न करने का प्रयास किया किन्तु वह अपने किसी भी तरह किन्तु उसे किसी भी तरह मना न पाए। अगला शुक्राचाय को खतरे मे अत्यंत क्रोधित थे। उन्होंने कहा अरे जूली मूर स्त्री काम। तुमने बहुत बड़ी गलती की है। अत मैं साफ देता हूँ कि तुम पर बुढ़ापा तथा असकता का आभार पड़ जाए, जिससे तुम विरोध बन जाओ।
आखिरी शो.
हे विमान। जरा अभी भी मारी। दूसरी के साथ मेरी हमेच्छाएबूरीनही। तब शुक्राचार ने उत्तर दिया, चाहो तो तुम अपने बुरा किसी ऐसे व्यक्ति से बदल लो जब तुम अपनी युवावस्था देने को तैयार हो।
आखिरी श्लोक जिसका तात्पर्य है। जब राजा जया ने कहा कि उसकी विषय भाषाएं शुक्राचारी की पुत्री के साथ भोग करने से पूरी नहीं हुई। और शुक्राचार ने देखा की यह तो पुत्री के हित में है, ययाति वृद्धावस्था में रहने लगे, क्योंकि जब, क्योंकि पर उनकी हामिलीपुत्रीकीभूग पूरी नहीं होगी। अत शुक्राचार ने अपने दामाद को यह वर दिया वह अपने बुढ़ापे को किसी की जवानी से बदल ले। उन्होंने संकेत किया कि यदि ययाति का पुत्र अपनी जवानी देखकर ययाति का बुढ़ापा स्वीकार कर ले तो ययाति देवयानी के साथ संभोग कर सकेगी।
तो हमे यह सब कुछ लोग पढ़ें।
The mahar create.
तो जो भी ययाति महाराज की इच्छाएं दिन के अधर्म नहीं था.
तो उन्होंने जो भी सर्मिष्ठा के साथ फोन की इच्छाएँ पूरी की वो धर्म के धर्म का विलंभ नहीं था।
लेकिन उनकी जो पत्नी की देर में आई वो बहुत ही क्रोधित हो गयी.
क्यूंकी वो क्यूंकी हो सकता है? क्यूंकि वो 1 ब्राह्मण की पुत्री सक्रिय की पुत्री नहीं?
और उन्हें जो क्षत्रिय है, उनकी जो काम है, कार्य हैं, उनके बारे में उन्हें जानकारी नहीं दी.
और ययापीभीसरतिशाके बहुत आ सकते थे।
तो भागता हमें सिखाता है कि कैसे अगर भौतिक चीजों के साथ आ सकते हैं, तो हमें इस बहुत ही जगत में दुबारा जन्म लेना पड़ेगा।
तो आमतौर पर लोग यह सोचते हैं की अगर अगर मेरे पास धन होगा, अच्छी पत्नी होगी, अच्छा पति होगा, ये सारी बहुत ही चीजें होंगी, तो मैं सुखी हो।
और जिसके कारण उन्हें भौतिक जगत में बार बार बार बार बार बार जान लेने। पर.
1973 में से प्रभुता में मे व्यास पूजा के के प्रवचन में ये कहा था कि जो भी रिहर्स उन्हें परामहसुबनना चाहिए.
आम तौर पर ये जो स्तर है ये सन्यासी के लिये जाना जाता है।
टूटी चक बहुत.
परिवाज.
लेकिन शिलपाउपारने गृहस्कों को ये कहा कि आपको परमांश बनना चाहिए।
और शिलापा ने कहा आप हर गृहस् भक्तों को आचार्य जैसे सूत्र संस्थान की उपलब्धि की।
हमे बहुत सारे आचार्यों की आवश्यकता है।
मेरे गुरु जी आचार्य थे.
बस्ती में अपने पुत्रों को, संतानों को उत्तर दिया कि आप सभी भक्त बने।
व.
आचार्य थे.
शीला बदती सिखा ठाकुर प्रभकार वो भी 1 आचार्य के.
शीलभकतीसीशांशभकती के मुख ठाकुर में भक्ति से शांत ठाकुर को यह प्रार्थना की पिछला चेक मा सौ रुपए जो वाणी है इसका प्रचार पर पूरे विश्व भर.
है। तो लास्ट में हाथ में उनकी माता की खिडबिसकंसलेकठाकुर जब वो अपने अंतिम सहायता की.
तो उन्होंने भंतीसहाकसरकसीखातो का हाथ पकड़ा और उनसे भी काटना की दया करके आप सैचनहातुदूरकेनाम पर प्रचार पूरे विश्व गाते कीजिए.
ये अच्छी तिहसकदाकरsातरही.
उन्होंने यह नहीं कहा कि आप जाइए और बड़ी बड़ी दिल से की और से.
तो हम.
यहाँ पर देख सकते हैं कैसे राज देवयानी और महाराज जी यारी बहुत ही कामन थे।
A woman s.
लेकिन ने ससंद में शिजपरपानेसासपर् ने कहा की अगर पुरुष स्त्री शुक्र या कोई भी अगर वो कृष्णभावना मत है तो वो सब बराबर.
लग।
शिवरसातलकोस्वामी में हरी व्यक्ति लाज में यह कहा गया है जिस बीच लोग में जो स्त्रियों के प्रति, यह सूत्रों के प्रति बाधाई दी जाती है.
ये सिर्फ़ उसी पहलू में है मदर के लोग बहुत नहीं है.
Vashon बहुत matuponetceshe.
Rose.
तो हम सुधार देख सकते हैं कि कैसे रस्तों के लिए भी नियम हैं.
बहुत सारे नियम है.
और हमें इनका नुसार करना है.
जिस भी आजकल में आप हैं आप को समाज के नियम पालन करने.
जैसे की संन्यास ाक्समेंयावहाजीश अगर कोई है तो हमें 1 काम.
ना.
लेकिन ग्रिहस्तो के लिए ये नियम नहीं है.
उनके पास 1 लाइसेंस है.
लेकिन कुछ ऐसे दिन हैं जिन्हें ग्रिहस्तो को भी पालन करना चाहिए और उस दिन में योग नहीं होना चाहिए स्वामी स्त्री का सम्बंध नहीं होना चाहिए।
जब औरतों की मासिक जो चलते हैं उस समय.
और वैश्नव जो है वैश्नव समाज में कुछ और दे हैं जिनका पालन करते हैं.
तो जो ग्रहस्थ हैं उन्हें संबंध नहीं बनाना चाहिए। किसी भी उपवास के दिन.
जैसा की kalsjnmastीradsme.
CtुRdsiod.
तो इन दिनों जब हम सभी के उपवास करते है.
तो.
पिछली एकागी में उस मारको मैंने पढ़ा कि जो उसने 1 इतिहास था कि 1 राजा था वह बहुत ही कठोर ट्रिक.
लेकिन नारको ने उसके पास आए और उनसे बात की.
Help और नारदनी ने उस राजा को कहा कि मैं नर्क में गया था और वहाँ मैंने देखा कि आपके पिता नर्क में.
क्योंकि उस राजा ने अपनी पत्नी को मासिक जो स्त्रियों का मासिक जो रेप होता है उस समय राजा अपनी पत्नी के साथ संभोग करना चाहता है.
जिसके फलस्वरूप उसके पिता नर्क में.
तो उस राज्य ने कहा अब मैं क्या करूँ.
तो मैं शांति में नहीं रह सकता यह जान कर कि मेरे पिता नर्ज में.
Erv.
Wale out.
Of.
नारूमी ने कहा कि ये जो एकादशी है अगर आप इसका पालन करेंगे कुछ नहीं खाकर, कुछ नहीं पीकर, पूरी रात जागकर और इसका जो फल है वो अपने पिता को देंगे तो वो वहाँ से हट सकते हैं वहां से चले जाएं।
तो उस राजा ने उसकी पत्नी, उसके बच्चे, उसके मंत्रियों सभी लोगों ने इस एकादशी का पालन किया.
और उसे.
उस एकादशी का फल उस राजा के पिता को उन्होंने rpn.
The.
God.
तो राजा के पिता का उभार हुआ वो नरक से स्वर्ग में गए वहाँ पर उन्हें कुछ सकसम मिला और वहाँ से भगवान के धाम चले.
तो एकादशी से 1 दिन पहले मैं जो भी एकादशी आने वाली ही है उसका महत्व पढ़ता हूँ.
पिछली जो एकादशी थी उसका नाम था मोक्षदा एकादशी.
वो 1 एकादशी है जिसे कालसी में भगवान कृष्ण ने मंगोल गीता का प्रवचन किया.
इसीलिए जो दिसम्बर का महिना है वो 1 विशेष महीना है.
जिसमें हम प्रभुपाद maरtnकरतेहैxpertionl.
परमपुर गोपाल केस्को स्वामी महाराज बहुत ही उछसाहवरदतथे विशेष कर मैरेथन महीन.
तो पूरे विश्व भर में हम ये जो दिसंबर महीना है इसे ्रभुबारमैरेज महिना कह कर बनाते है.
और ये महीना भारत में था इस महीने में लगो गीता कही गई थी.
तो ये बहुत महत्वपूर्ण चीज है।
SurilwoksटवIपान ने कहा कि अगर आप मेरी.
कुसततोका वितरण कर करेंगे तो आप प्रसन्न रहेंगे.
और अगर आप मेरी पुस्तकों का अध्ययन करेंगे तो आप रहेंगे।
तो मैंने जब 1968 में इसको न ज्वाइन किया तो मैंने.
सेनफ्रांसिस् बिफोर सैनफ्रांसिस्को.
सैनफ्रांसिसको.
तो तुम ने रथ यात्रा में रथ यात्रा में ज्वाइन किया था सैनफ्रांसिस्को में फिर मैं गया और मोरी गया.
सौर पृथ्वी में जितने मंदिर थे मैं सब मंदिरों में गया.
क्योंकि उस समय सिर्फ 3 मंदिर थे.
अभी बहुत मुश्किल है कि सारे मंदिरों में जाना.
तो मैं इस मंदिर के उद्घाटन दिवस पर यहाँ पर प्रस्तुत होना चाहता था.
लेकिन उस समय मैं यहाँ पर नहीं आ पाया।
मेरा स्वाद तो अच्छा नहीं था.
लेकिन मैं इसकी खबर इस मंदिर का वीडियो लाइक लाइक वीडियो देख रहा था उस उद्घाटन का.
ये पूरा सवाल था क कैसे प्राण प्रतिष्ठा हो रही की भगवान की सब भक्तों को मैं देख रहा था.
और कैसे आदरणीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी यहाँ पर आए और उन्होंने प्रवचन पी लिया.
और मुझे याद है उनके प्रवचन में वो प्रभुपाल का गुणगान कर रहे थे और कह रहे थे की कैसे प्रभुपाल विश्वभर के कोने कोने में जाकर उन्होंने 4 के.
मैं थोडा भी जानता हूँ.
मैं ज्यादा बंगला जाता हूँ.
तो 1 बहुत ही भव्य 1 समय था.
Now तो मैं बहुत ही प्रसन्न हूँ की कम से कम मैं अब.
आ पाया हूँ.
और मैं सूरदास कब का बहुत ही अभिनन्दन करना चाहता हूँ कि इस मंदिर को बनने में बहुत योगदान.
Have a i.
तो प्रभुपाल जब मैं मोन्टियल मंदिर गया तो मेरी प्रथम भरी नाम दीक्षा के लिए शिला प्रभुपाद ने मुझे कहा कि मुझे कम से कम भरवतदीता 10 बार पढनी.
All.
Have.
उस समय हमारे पास भगवतगीता और कुछ ही किताबें होती थी।
On other haridas to have some liver all that it can hard।
तो 1 पुस्तक मैंने ये पढ़ा था कि हरिदास ठाकुर के मन में जब वह जॉब करते थे तो उनके मन में अगर कुछ और विचार आये जो उनके जग में बाधा दे। तो वो जोर जोर से जप करते थे और वो विचार चले जाते थे।
तो उस समय मैं 1 नया भक्त था और मेरे मन में भी बहुत विचार आते थे।
तो मैं जोर जोर से जप करता था.
Is all a।
तो कुछ भक्तों ने शिला प्रहार के पास जाकर मेरी कम्प्लेन की की ये जो भक्त जे है एतना जोर जोर से जज करता है की हमको डिस्टर्ब हो.
मुझे नहीं लगता की गोपाल कृष्ण महाराज ने मेरी कम्प्लेन की थी.
तो उस समय महाराज गृहस्थ थे और 1 भक्त थे, हम दोनों 1 साथ मॉंट्रियाल मंदिर गए थे.
तो 1968 से हम दोनों 1 साथ थे।
तो मैं देखता था कि कैसे मंदिर में जो भी भगवान की प्रीति छवि थी महाराज हर 1 छवि के सामने जाकर पेंटिंग के सामने जाकर जप करते थे, प्रणाम करते थे और प्रार्थना करते थे। मैं देख पा रहा था की कैसे महाराज के 1 महान भक्त थे जो भक्ति में बहुत रूचि रखते थे.
Got.
The boys.
हार.
तो प्रभुपथ ने मुझे.
बुलाया और कहा सभी भक्तों ने आपकी कम्प्लेन की है कि आप इतना जोर जोर से जब करते हैं तो वो डिस्टर्ब हो जाते हैं। तो आप इतना जोर से क्यों जब करे.
प्रभु का को उत्तर दिया कि मेरा कारण क्या था जोर जोर से जब करती है।
कलवार ने कहा यह तो बहुत खराब नहीं है.
तो हमारे मंदिर के बगल में 1 पार्क है, मान ड्रायल पार्क था.
जिसके नाम पे मॉनटरियालपडा.
माउंट रॉय तो उसके नाम पर मॉनटरी जगह का, स्थान का नाम पड़ा।
तो प्रभुपाद ने कहा गर आप चाहते हैं उस पार्क में जाकर आप जब कर सकते हैं।
तो उस समय.
उस समय लोग वहाँ पर दौड़ने नहीं आते थे सुबह सुबह.
Olyfirdswolds, तो उस समय सिर्फ पक्षी होते थे और गिलहरी होती थी।
तो मैं उनके साथ जब करता था।
तो शिरप्रवुपात से 1 भक्त पूछ रहे थे कि मैं इतना सौभाग्य शादी कैसे हूँ कि मैं भर्ती में आ गया.
और प्रहुपारने कहा मैंने आपका सौभाग्य बनाया।
All you.
Can.
T.
O e von.
She chetan haplogonaiscallyug me। अवतार लिया विशेषकर पतितों का उद्धार करने के लिए.
द्वारका में रुक्मी ने महारानी ने कृष्ण से कहा कि आप सब जानते हैं.
आप जानते हैं कि ब्रह्म क्या कर रहे हैं सत्यलोक में और शिव क्या कर रहे हैं कैलाश में.
No.
और अनंत कोटी ब्रह्माण्ड में क्या हो रहा है हम सब जानते हैं.
लेकिन 1 ऐसी चीज है जो आप भी दी है.
मैं जानती हूँ.
राधा रानी जानती लेकिन आप नहीं जानते।
आश्चर्य चकित हो गए कि ऐसा क्या.
है जो मैं भी नहीं जानता न.
मैं क्या नहीं जानता।
Time।
तो बहुत बार पूछने के बाद रुकमिनी.
ने कहा.
नो नो है.
आप नहीं जानते कि आपके भक्त राज से कितना प्रेत.
और आप नहीं जानते कि किस माध्यम से किस प्रकार से हम आपसे प्रेम करते है।
As a e gov you so you now warsi.
क्योंकि आपके ऊपर कोई नहीं है, तो आपको यह नहीं पता कि आपसे प्रेम करना कैसा.
Is.
Right now you hell home i?
तो उन्होंने कहा, ठीक है, मैं कल युग में उतार लूंगा, अपने ही भक्त के रूप में.
मैं अपने भक्त के.
रूप में हो.
मैं अपने भक्त के.
रूप में उतार लूंगा।
और वो है शीत maha.
चेतन महाप्रभु है, उस भगवान कृष्ण, राधा रानी का भाव रू लेकर आए हैं। जो है गोरा.
As.
उनका जो भाव है, वो राधारानी का भाव है और जो उनके अंदर की कांति है, वो राधा रानी की कांति।
लेकिन वो क्रृष्ण?
तो हम देखेंगे कि सामान्य रूप से लोग ज्यादातर, राधा, कृष्ण और सीता राम के पास जाते हैं। दर्शन.
Isi rog.
लेकिन उन्हें समझना चाहिए.
कि कैसे श्री क्षेत्र में हापने, इस कलयुग में 1 बहुत ही सरल माध्यम दिया है, जिससे हम भगवान के पा.
चेतन महागुरु की कृपा के बिना यह इतना सरल नहीं हो सकता।
चेतन्य महापुर की कृपा से कलयुग में हमारे पास बहुत सारी सुविधाएं हैं।
कोई गृहस्त हो सकता है या विरागी हो सकता है।
छेतनयमहाबलनेकहा गृहित ठाकरों बोले ठाकरों सौदा, हरी बोलेगा.
Long.
Can hard अगर आप ग्रहस्त.
हैं या विरागी है आप हरे कृष्ण महामंत्र का की जब कीजिए.
तो पिछले युगों में जिस युग में जो भी शंकराचार्य, जो और लोग थे, वो सबको उत्साह देते थे कि आप सभी संन्यासी बने।
लेकिन इस कलयुग में यह कोई मायने नहीं रखता। आप ग्रेस है या सन्यासी, आप सभी को हर 1 कृष्ण महामंत्र का जप करना चाहिए।
Sand.
In.
A.
और भगवान के नाम का जप करके, उनकी सेवा करके, नवोवेलनाभर्त का प्रयास करके इसी जीवन में हम सर्वोच्च सफलता प्राप्त कर सक।
Or.
Net bhut he kupal.
महाप्रभु मित्रा.
इनकी बहुत सारी यीलाचैतलमहाबुरू की इच्छा थी.
की सभी कृष्ण भावना भावित हो जाए.
शिरप्रवभानेचेटर हाट कर, जो आंदोलन है पूरे विश्वभर में इसका प्रयास प्रचार करने का प्रयास किया।
उन्होंने शिरप्रवपारने 100 8 मंदिरों की स्थापना की।
I am.
A ten.
शिलप्रपाने 1900 पिचहत्तर में मायापुर में प्रवचन किया और कहा कि मानो हमारे पास अभी 10 हजार.
Car तो मानते हैं, उन सबको आचार्य होने होने की आवश्यकता है।
तो 10 हजार से 1 लाख.
और 1 लाख से 10 लाख.
On.
तो 10 लाख से सौ लाख.
करोड़ 1 करोड़.
तो इसी प्रकार चैतन महाप्रभो ने भविष्यवाणी की की थी कि पूरे विश्व भर में हर 1 नगर, ग्राम, सभी जगह उसके महाप्रभु के नाम का प्रचार होगा।
Low.
जोतो नगर दीग्राम सर्वत प्रचार हो। form.
How more.
Hal.
Can now as fd.
प्रभुपाद की इच्छा थी कि लगभग हमारे 1 करोड आचार्य हो।
सुप्रहुपात कह रहे थे कि सभी विद्यार्थी के रूप में आते हैं.
लेकिन भविष्य में उन सभी को अध्यापक करना चाहिए।
ऐसा नहीं होना चाहिए कि सब विद्यार्थी पूरा जी का विद्यार्थी है।
ये सही है कि अपने गुरु के लिए हमेशा विद्यार्थी रहे, लेकिन बाकी सभी लोगों के लिए हमें अध्यापक टीचर बनना चाहिए.
हा.
प्रभु पार ने कहा हमें ऐसी व्यवस्था करनी चाहिए.
Timagursesor तुम्हें इस.
ये जो व्यवस्था है 1 उत्साह देना चाहता हूँ सभी को.
तो इस प्रकार हम देख सकते हैं कि बहुपा कुछ छोटा नहीं सोचते थे.
रहबर हमेशा बड़ा.
सोचते है है.
There on nerves, तो.
1 चीज जो मैं बताना चाहता हूँ कि प्रत्येक मंदिर में जो विग्रह हैं अलग अलग चमत्कार करते हैं.
तो इस मंदिर में भी ऐसी पुस्तक बनानी चाहिए और उस पुस्तक में भगवान जो विग्रह हैं वो क्या क्या चमत्कार कर रहे हैं उस पुस सच में लिखने चाहिए।
And.
I said and.
Jar ya to all the mera.
तो न्यू द्वारा कहा जो लॉस एंजेलेस में जो मंदिर है वहाँ पर मैंने ये कहा तो जो पुजारी थे वहाँ के वो आकर मुझे बताने लग गए कि भगवान यहाँ पर विकरण क्या क्या चमत्कार करते है.
तो मैं यहाँ पर देख रहा हूँ काफी सारे जो लोग हैं पुरुष और श्री उनके माथे पर तिलक नहीं है.
मैं विजिटर विजिटर्स गुरमा.
Yes.
तो जो भी मंदिर में आज आए हैं भगवान का दर्शन करने महाराज सबसे अनुरोध करते है की जब आप आए तो भगवान के जो तिलक है यह भारत भर सकते हैं.
अपना शरीर 1 मंदिर बना सकते.
हैं.
Question i fifty three.
Question.
Mentioning about how we can.
About the lilas of the duties gormanchyeahin different em.
S.
O।
तो अलग अलग मंदिरों में तो भगवान क्या क्या लीलाएँ करते हैं, चमत्कार करते हैं पुजारी को बताते है कैसे जैसे कभी भगवान को फूल अर्पण करते हैं तो भगवान कैसे उसका आदान प्रदान करते है बहुत सारी लीलाएं है भगवान.
तो राजपुर में जो भगवान जगन्नाथ का मंदिर है वहाँ पर 1 मुसलमान 1 व्यक्ति मंदिर में है.
तो हम अपने मंदिरों में सभी का स्वागत करते हैं जो भी मंदिर आना चाहता है.
तो पुजारी ने उस व्यक्ति को प्रसाद दिया.
तो उस वक्त.
तो इस उस व्यक्ति ने प्रसाद लिया और जमीन पर फेंक दिया.
हो। तो उसने बोला मैं किसी मूर्ति का खाना नहीं लेता का प्रसाद नहीं मूर्ति.
मूर्ति.
अरे हिंदी में क्या पूछता है mूrtigrpotlpotl?
तो पुजारी ने कहा अगर आपको प्रसाद नहीं चाहिए था तो आप यहाँ पर.
आए ही क्यों या तो फिर वो.
चला दे.
अगले दिन वो दोबारा आया.
और लोग पुजारी के पास आकर कहता है मुझे प्रसाद दीजिये.
कैसे पुजारी कहता.
है आप पागल नहीं है क्या है.
कल आपने प्रसाद फेंक दिया और रात को साथ मांग रहे.
तो उस व्यक्ति ने कहा कल रात को मैंने 1.
सपना देखा on the wit fas.
Tell your son it other prsad तो यहाँ.
पर जो मूर्तियाँ हैं उसमें से जो सफेद वाला है उसने मुझसे कहा तुमने मेरे भाई का प्रसाद फेंक दिया.
मैं तुम्हें खत्म कर दूंगा.
और जो पीले कलर की जो औरत हैं उन्होंने कहा हाँ हाँ मार ले से.
लेकिन जो ये काला वाला व्यक्ति है इसने कहा अरे छोड़ 2 इसने बहुत बड़ा खराब नहीं किया.
तो यह 1 पहला अपराध था.
तुम तो काले व्यक्ति ने कहा.
ठीक है छोड़ 2 बolivilivबलिv तो उस.
व्यक्ति ने कहा अब मुझे भरोसा है अब मैं मान चूका हूँ, मैं मानता हूँ.
और मैं मैं प्रसाद दु.
तो ये 1 उdahrण है.
I heard in mining file.
तो आज शाम को 5 बजे मेरी 1 मीटिंग है तो शायद उसके बाद मैं प्रयास करूँगा 1 क्लास का.
अगर किसी का खाना अगर, किसी का कोई प्रश्न है या कोई टिप्पणी है.
जैसे.
भीड़ कम.
भीड़.
में से.
अपने गुरु हमारा.
जैसा कांड होगा की आपको कोई.
ना जा हा था कुछ.
चाहे आपको सुने स्टूडें नई कॉपी 75 साल का हो गया.
पूरी किताब में.
Well.
I.
Can.
तो जब मैं उस समय जोर जोर से जज करता था उसके बाद मेरा 1 साक्षात्कार हुआ की जब करते करते मुझे जोर से जब करने की आवश्यकता नहीं पड़ी मैं धीरे.
धीरे जब कर पाए.
है.
तो आप जोर से जब कर सकते हैं अभी भी.
लेकिन धीरे धीरे आप देखिये आपकी जो आवाज है वह धीरे धीरे कम होती.
तो मैं 1968 से जल कर रहा हूँ और अब मैं जब भी जल्द कर रहा हूँ मेरे मन में और कोई विचार नहीं आता.
और अगर कोई दूसरा व्यक्ति भी अगर उस कमरे में या कहीं भी जब कर रहा है तो मैं उस जब के अलावा और किसी भी विषय पर चिंतन नहीं कर पाता.
आई डोंट नो है.
मुझे नहीं पता कि आप कितने समय से जप्त कर रहे.
है.
तो आप जब करते रहिये और निश्चय ही 1 ऐसा समय आएगा जब हम कृष्ण के प्रति आसक्त होंगे, जो हमारा उद्.
ये हमारी कृष्ण भक्ति का असली जो उद्देश्य है.
तो अगर हम.
ये भौतिक जगत में इसमें ही लगे रहे तो और हमे इससे उधार भी पाले सिर्फ इसीलिए तो ऐसा हो सकता है हमें शाह जो मुक्ति मिल जाए.
लेकिन अगर आप भगवान कृष्ण के या राम के, भगवान के किसी भी अवतार के सी प्रति आसक्त हैं तो वो आपको भगवान के धाम लेते है.
तुम्हें जब ये मंदिर की परिक्रमा कर रहा था तो मैंने देखा कि कैसे बाई हाथ पर कृष्ण लीला के चित्र हैं और दाये हाथ पर रामलीला.
बहुत ही अच्छा.
फोरगोरमाराज.
1 आखिरी प्रश्न.
पर.
Some time pass, sometimes i and conditioning, we do some mistakes.
And.
The faith on ships and divoti, gets revusesohow to again regain that fit in lord and his devotees।
तो प्रभु जी का प्रश्न है कि आपने जो भगवान की लीलाएं बताई, राजापुर में भगवान की लीला बताए। कभी कभी ऐसा होता है कि हमारी गलतियों से भगवान और भक्तों के प्रति जो हमारी श्रद्धा है, विश्वास है, वो कम हो जाता है तो उसे दुबारा कैसे प्राप्त किया जाए?
तो अगर आप शिल्पा की पुस्तकों का अध्ययन करते हैं तो आप कभी भी विचलित नहीं होंगे।
A.
Really hornets.
Wo.
चाहते थे कि सभी लोग उनकी पुस्तकों का अध्ययन करें.
Rs.
विशेषज्ञो ने देखा श्री धाम मायापुर में कैसे प्रभुपाद देर रात को जाग कर लगभग 12 बजे वो उठते थे और अपनी पुस्तकों का.
पुस्तकों का अनुवाद करते थे, पुस्तकें लिखते थे.
कभी कभी.
कभी कभी ऐसा होता था कि सुबह 1 बजे रहुल बाद अपने सचिव को भेजते थे, मुझे बुलाने के लिए.
ला ला.
Say what और मैं फटाफट अपना.
मुंह और पैर धोकर नीचे दौड़कर जाता था की क्या हो सकता है?
तो मैं पूरे हफ्ते 24 घंटे शिलप्रौपाकी सेवा के लिए उपलब्ध रहा।
मैंने देखा की प्रौपर कैसे 1 डिकटापोमकेक के साथ पुस्तकों का अनुवाद कर रहे हैं।
तो मैं देखता था कि गहबार जो भी प्रभार के मन में विचार थे वो डिपटाकोणउपकरण के माध्यम से रिकॉर्ड करते थे। लेकिन मैं देख रहा था कि प्रौपर में हम सब के लिए कितना त्याग किया।
तो प्रपात के इतने त्याग के बदले क्या हम पुस्तकें हमें नहीं पढनी चाहिए?
Hi.
What.
मैंने भक्ति शास्त्री का टेस्ट प्रभुपाद के संरक्षण में किया था.
तो प्र तो फिर मैंने उस टेस्ट को लिया.
तो मेरा जो भरती शास्त्री डिग्री मैंने प्राप्त की प्रभु।
तो उस समय जो मेरे साथ के भक्त थे मैंने उनसे पूछा था कि आपने कौन सी किताबें पढी हैं.
और उस समय मैं देखा काफी भक्तों में भरभर के पुस्तक नहीं पढ़े थे.
तो.
फिर मैंने संकल्प किया कि मैं बहका के पुस्तकों का अध्ययन करूँगा और ये सारी डिग्री.
Da.
तो जो मायापुर इंस्टीट्यूट हैं उन्होंने मेरा सम्मान करते हुए उन्होंने कहा हम आपको ऐसे ही 1 डिग्री भेजेंगे.
तो मैंने कहा नहीं मुझे कोई भी सामान्य डिग्री नहीं चाहिए। मैं पढ़ूंगा और परीक्षा दूंगा.
तो मैंने फिर भर्ती वैबुडिीप्राप्त की उसके बाद भर्ती बेजान था और मैं लगभग भर्ती साल बाद खत्म करने वाला हूँ।
The old.
तो में सभी भक्तों को उत्साह देना चाहता हूँ की सभी को जिलपरोबरकीपुस्तकों का अध्ययन करना चाहिए।
Things.
To not the patio.
तो मुझे नहीं लगता कि अगर आप बहु पारके पुस्तकों का अध्यन करेंगे तो आपकी श्रद्धा कभी भी कम होगी। इसके बावजूद अगर भक्तों ने आपके साथ अच्छा व्यवहार नहीं किया.
तो मेरा भी अनुभव है। कभी कभी भक्तों के साथ मेरा आदान प्रदान अच्छा नहीं हुआ और कभी बहुत अच्छा हुआ।
लेकिन आखिरकार मैं शिल्रहूपाकोचैकर महा प्रभु को पस्त करना चाह.
तो इससे फर्क नहीं पड़ता कि मेरे साथ कोई कैसा व्यवहार करे। मैं अभी वी गुरु द्वारा की प्रसन्नता के लिए सेवा करता हूँ।
ठीक है अभी प्रसाद का समय हो गया है।
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