A recorded Vyāsa-pūjā offering (devotional address) delivered in a South Asian language, centering on guru worship, the importance of guru and guru-parampara, and devotional practices like pranama and parikrama. The speaker praises the guru lineage, emphasizes the transformational power of guru instruction and holy feet, and reassures devotees about devotional service; the clip ends with an English call-to-action to subscribe and share the channel.
भागवतिय कथा प्रारंभे करी मुंगल आचरन गुरु वैश्णा भगवान तिनेर स्वरं।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।। परम्गुरुदेवि नित्तरिलाप्रविष्टंग विष्णुपाग अष्टुर्तरश्वतस्थी सिमध भुक्ति शिद्धं तर सलसति विष्णमि ठाकुर पहुपादे शिपाद पदमे अशंक अशंक भुरुन्थिद्ध दन्डवतन्ते गुरु पराम्परा त निजा के अति धन्न धन्न मने कच्छी। कैनोर, दिख्खा गुरू एक जन, तो शिख्खा गुरू बहुत। एकाने जारा एसेछें, तिदन्दि पादगण, जारा आछें, सोकली आमा शिख्खा गुरू। दाखवा, जे विश्वशात्तम्तरे एक कता देगिलां से इता बलवाई। बलवाई। बलवाई। बलवाई। बलवाई। बलवाई। बलवाई। बलवाई। बलवाई। बलवाई। बलवा� चाई, सेवार जग्गता। से जग्गता प्रदान कर बाइचन ने। विश्वसर्थम् जे एक कता बुलेछे, कता-कता जनम जे अमना हुच्छी ते थी थी नहीं। एक कता ता पार्बति देवी के शिवजी बोलछे। देखो पार् जरा गुरु पाद्बन्म अस्पाय करेछे, तादेरा चिंगता नहीं। उन्न किछ जो जोदी ना पारे, सुदु गुरु देबेरी चरणकमल जोदी परिक्रमा करे, ताइ बिष्चे तारार कौनो धाम, कौनो तिर्त्त परिक्रमा करते बाकी ठाके ना। आराक्ता कता। ज गुर्रू उच्छरित होयेछे तादे चाट्टे बेद अध्धान होये गाछे। सुद्धु गुरू एक सभ्दोटी लिए उच्छर होयेछे। रिक्षायम जोजी अथव्प इजे छतुर बेद समस्त तार अधित होये गाछे। आर कौनु तार बाकी नहीं। अते अमार मतो हने केई हहेतो भूले गयछे आमे जे मन बिश्मिति होये गयछे से ता जाना बार जन्न आजगे आमादे शामने देखते बच्ची सकले हहेतो आजगे इसमे मुणुष्य जिवन छड़ा एइ चांस्त उन्न कुण मुणुष्य जितोर प्राणी के होये ना। कथा ता अलपो। जारा अमरा गुलुपार्द बदमा अस्छाय करेची। सबुत एइ इतुको विशेश, विशेश, विशेश कोरे जाना जे अमार गुरु पात बरवे सब कुछ प्रकाष उनुभव आने भूषते परवे तुझो तारसी पात परदे सुधिलो विश्यास सहोकारी आमार शहबा बुद्धी थाके आच्छेन्ता करता रागना ना। अत अश्टत्रत्र सुतर्स्वि जायपतका महाराज, से इस शिक्काते ही आमवदे देवार जन्न तेनी एइ आयाजन करेछेन, एइ अरुष्थान करेछेन। अकर, तार पाद-पद्धम, आमी आमारे बानी पुष्पन्जली अलपल करी, का जय अकर नदीन देखी रिच्चेन एइ रकम अबस्थाते हो तार अकर नदीन प्रचार की भावे छल छी आरो एक कता बलयचेन तनी अमन जनन सखले एइ � बाइंचाक अल्पतुर्भ्यस्च किपाशिंद भयवचन फुतितारंग पाब्रेम्भुवश्णवे भुणवर्व। Thank you for watching our videos. Be sure to subscribe to our channel. We publish new videos every day. And don't forget to like and share our channel.