A Bengali devotional offering delivered by a single speaker honoring a guru and expressing deep reverence for Bhakti tradition figures (including references to Nityananda Prabhu and devotional chanting). The speaker recounts participating in parikrama and meeting the guru, describes feelings of gratitude and joy at the guru’s mercy, and emphasizes the guru’s role and compassionate deeds for devotees.
ओम् अग्यानत्मिरान्दश्य जनन्जणशलकया चक्षूर्णिमिलेधन्जेन तश्मैसि गुरवे नमः पंचाकल्पतरुबश्च कृपाशिन्धुभयेबच पतिदानं पावनेभ्व बैश्णोबिभ्व नमः नमः जयस्युकिष्णचेतन्न प्रभु नित्तानन्द स्री अद्दैत्व गदाधर स्रिवाशाधि गउरभक्तबिन्द हरे कृष्णा हरे कृष्णा कृष्णा कृष्णा हरे हरे हरे रामा हरे रामा रामा रामा हरे हरे आज आमी उत्तन्त धन्य होलाम अनिक दिन परे पुज्जपात जोईपतार सामी शिख्खा गुरु महाराजे दर्शन पे। नवद्धिवधाम परिक्रमा होई।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।� आमी उत्तंतो घर्वितो एबं आनन्दितो ता आज महाराज जे अशीम कर्ज करे चले चेन जे असेम कार्ज होलो जे भक्तिविनो ठाकुर महासायेर जे तार नामहट्रपचार महाराज सरा पृधिवि जुरे जे नामहट्रपचार कोडछेन भक्तिविनो ठाकुर महासाये विशोन अनन्दितो एबंग नित्यनन्द प्रभु तीनियो विशोन अनन्दितो जे एइ नाम बक्तिविनर ठाकूर महाशाय देखिलें जि आउल बाउल नरानेरी अपर संपदाई ये विष्णव जगत के फत्तुन्तो कलुष्टो करे दियेछे। ता बक्तिविनर ठाकूर महाशाय चिन्ता करलें अमाके पचार करते होगे। ता बक्तिविनर ठाकूर तिनी अ� जाके अमी उत्तुन्तु शिख्खा गुरू रूपे ताके पनाम करी, ताके शन्मान करी, तीने आमा शिख्खा गुरू। एबंग आमा के अत्तुन्द स्नेहो करें। तो आमे देखे चिलाम, जखण महाराज नवद्धी मन्डल परिकुमा करतें, भगतगण के संगे निये, तखण बड़ो कर्तालने किर्तन करतेन एबाँ नित्तो करतेन एबाँ धुलेते गरागरी करतेन ता आज अमार हुत्तन्त सवुभागतार पहुदिन परे दर्शन पेजी ता साइं कथा बोलते पेरेछी बन्छा कल्पत रुभश्य क्रिपाशिंदु बेवच पतिताना इताइ गौरो पे मानन्दे।.