His Holiness Jayapataka Swami 75th Vyasa Puja Celebration in ISKCON NOIDA 2024 || #iskconnoida

ISKCON Noida celebrates His Holiness Jayapataka Swami's 75th Vyasa Puja with kirtan, speeches, and personal stories spanning decades of his life. Speakers including Loknath Swami share anecdotes from 1972 onward, while the community honors Maharaj's health challenges and continued spiritual guidance through offerings and prasadam distribution.
Questions this video answers
The 75th Vyasa Puja (appearance) celebration of His Holiness Jayapataka Swami.
ISKCON Noida / Delhi NCR (Vyasa Puja celebrated locally while some programs/livestream tied to Mayapur).
Loknath Swami (reference), Mohan Rupa Prabhu, Shrutakirti Prabhu (speaker/anecdote contributors).
शक्ति बुधीन आमी अती दिन परोगरे आत्मसात कोरो मुरे आत्मशातो जोगता विचारे किछु नहीं पाई तोमारो करुनाशा आर जुगता भीचारे किछु नहीं पाई तोमारो कोरुन शारो पिछु नाही पार तुमार करुणा शाल। तुमार करुणा ना होईले कांदिया कांदिया। गुरुदे।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।। कुरुदेब कुरुणाना हुईले कांधिया कांधिया करुना ना होईले कांदिया कांदिया प्रानो ना राखी बुआरो प्रानो ना राखी बुआरो दोदेद कृपा बिंगो दिया दोरो ये दाशे प्रिनापे कायोती ये प्रीपा बिंदो दिया गुरो ये इदश खिना पे खाती ही ना।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।। गुरुदे गुरुदे जाये जाये गुरुदे जय गुरुदे गुरुदे जय गुरुदे जय जय जय प्रभुपात प्रभुपात प्रभुपात जय प्रभुपात जाय प्रभुपाद प्रभुपाद प्रभुपाद जाय प्रभुपाद।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।। हरी बोल।।।।।।।।।।।।।।।।।।। कृष्णा कृष्णा कृष्णा हरे हरे हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे हरे कृष्ण हारे कृष्णा हारे हारे हारे राम हरे राम हरे हरे हरे कृष्ण हरे कृशिना हरे कृशिना हरे राम Hare Rama Rama Rama Hare Hare Hare Krishna Hare Krishna कृष्णा कृष्णा हरे हरे हरे राम हरे राम राम हारे कृषिना हारे कृषिना कृषिना कृषिना हारे हारे हारे राम Hare Rāma Rāma Rāma Hare Hare Hare Kṛṣṇa हारे कृष्णा हारे हरे राम राम राम हरे हरे हरे कृशेना हरे कृशेना कृष्णा कृष्णा हरे हरे हरे राम हरे राम राम Rāma Hare Hare Hare Kṛṣṇa Hare Kṛṣṇa Kṛṣṇa Kṛṣṇa Hare Hare हरे राम हरे राम राम हरे हरे हारे कृष्णा हारे कृष्णा कृष्णा कृष्णा हारे हारे हारे राम हारे राम राम राम हारे हारे Hare Kṛṣṇa Hare Kṛṣṇa Kṛṣṇa Kṛṣṇa Hare Hare Hare Rāma Hare Rāma Rāma Rāma Hare Hare Hare Kṛṣṇa कृष्का कृष्णा हरे हरे हरे राम हो हरे राम हो राम राम हो हरे हरे हरे कृष्णा مَلِحَوْا مَلِحَوْا مَلِحَوْا مَلِحَوْا مَلِحَوْا مَلِحَوْا مَلِحَوْا مَلِحَوْا खुष्णानारे खुष्णानारे खुष्णानारे खुष्णानारे खुष्णानारे खुष्णानारे خوشنہ خوشنہ خوشنہ خوشنہ අපි ස්තූතියි ස්තූතියි ස්තූතියි ස්තූතියි مولا مولا مولا गोविंद राधा गोविंद राधा गोविंद राधा गोविंद राधा गोविंद राधा जे राधा गोविन्द राधा गोविन्द राधे जे राधा गोविन्द राधा गोविन्द राधे जे राधा गोविन्द राधा गोविन्द राधे जे राधा गोविन्द राधा गोविन्द राधे जय राधा गोविन्द राधा गोविन्द राधा गोविन्द राधा गोविन्द जय राधा गोविन्द राधा गोविन्द राधा गोविन्द राधा राधा गोविंद राधा गोविंद जैराधा माधवराधा माधवराधे जैराधा माधवराधा माधवराधे जैराधा राष्पि हरिराधा राष्पि हरिराधे जैराधा राष्पि हरिराधा राष्पि हरिराधे जय राधिका रामन राधिका रामन राधे जय राधा मदन मोहन राधा जयो राधा पार्थ सर्थी राधा पार्थ सर्थी राधे राधा गुद्रुंदि हरी राधे जयो गोरणिताई जय गोरे निताई जय गोरे निताई जय निमाई निताई निवाई निताई जै, निवाई खाई। जय जगनाथ, जय जगनाथ, जय बालदेवा, जय सुवध्रा। जय जगनाथ, जय जगनाथ, बालदेवा, जय सुवध्रा। जय कृष्ण बलराम, कृष्ण बलराम, कृष्ण बलराम। जाये कृष्ण बलराम जय कृष्ण बलराम जय कृष्ण बलराम जय बृंदावन धाम जय गोरणीताई गोराणीताई मायापुरधाम जय मायापुरधाम हरी बोल हरी बोल हरी बोल गोर हरी बोल हरी बोल हरी बोल काई गोर हरी बोल हरी बोल हरी बोल गोर हरी बोल जय जय जय प्रभुपात प्रभुपात प्रभुपात जय प्रभुपात जय जय प्रभुपात प्रभुपात प्रभुपात जय प्रभुपात जय जय गुरुदे गुरुदेव जाए गुरुदेव जाए जाए गुरुदेव गुरुदेव जाए गुरुदेव जाए जाए गुरुदेव गुरुदेव जाए गुरुदेव जाए जाए गुरुदेव गुरुदेव जाए गुरुदेव जाए जाए गुरुदेव ग� हारी बोल, हारी बोल, हारी बोल, हारी बोल, हारी बोल, हारी बोल, हारी बोल, हारी बोल, हारी बोल, हारी बोल, हारी बोल, हारी बोल, हारी बोल, हारी बोल, हारी बोल, हारी बोल, हारी बोल, हारी बोल, हारी बोल, हारी बोल, हारी बोल, हारी बोल, हारी निताई बोल, गोर शीतनाद प्रेमनन्दे हारी बोल हरी हरी वो निताई निताई निताई निताई निताई गोर शीतनाद प्रेमनन्दे हरी हरी वो आवाज नहीं आ रहा हम माईक से बोल रहे हैं समझ में आता है एलेक्ट्रोनिक्स वोईस जा रहे हैं लेकिन आपका वोईस हम से भी ज मैंने महा मंत्र के टाइम बोला नहीं जाधा जोर से गाईये निताई गोर समझ में आये न गुरु महाराज को अगर प्रसंद करना है तो जोर से है जितना पावर है निताई निताई गोर शितनाद प्रेमनन्दे लेखा एलेक्ट्रोनिक्स फेल टेक्ट्रोनलजी भी डाउन हो निताई निताई गोरशितनाद प्रेमनन्दे जगत गुरुस्तिल प्रभुपाद की एज हुलेनेस जयपतका स्वामी गुरुमहाराज ब्यास पुजा महा महा शौव की हरे नाम संकीर्तन महा जग्य की समागत गोर भक्त ब्रिंद की निताय गोर प्रेम अनन्धी हरी हरी वो इजवेश गुपाल प्रभू की जाय संकीर्तन भक्तों की जाय बहुत-बहुत धन्यवाद प्रभुजी का, सारे भगतों का इतना सुन्दर कीर्टन किया। What an auspicious start of the super auspicious day. विव्यास पूजा महावःत्सव of His Holiness, जेपता का स्वामी महाराज। Jesus! God! इतना ऐसा वाला हरी बोल। एक बाद फिर से। शल जेपता का स्वामी महाराज अचार् बहुत दन्यवाद भक्तों, दन्यवाद संगीतन भक्तों का. So, अभी यहाँ पर ग्लोरिफिकेशन का सेशन चलेगा. As the senior devotees would keep coming, जैसे जैसे वो आते रहेंगे, उनको हम gradually, one by one, यहाँ पर invite करेंगे. और जिनको भी हम बुलाएंगे. हम जानते हैं, सभी भक्तों के हुदय में � आपके प्रिये हैं हम सब को प्रेणा देने हैं जाया उनके को दिख्षा शिष्य हो या शिख्षा शिष्य हो हम सब प्रेणा देने हैं जाया उनके को दिख्षा शिष्य हो या शिख्षा शिष्य हो हम लेकिन सबको सब प्रेणा हम पाँच मिनित ही दे पाएंगे। तो मैं जानता देने हैं जाया उनके हूँ कि तो हम अपराद कर रहे हैं। नहीं, क्या करें? को दिख्षा मेनेज्मनालों को कभी-कभी अपराद करना पड़ता है। ताकि शिष्य हम औरों को भी मौखा देते हैं। तो जितने भी स्पीकर्स यहाँ पर आयेंगे, हो या शिख्ष उनसे तो हमारे बीच में एक बहुत विशेश वक्त है, प्रेज़िदिन्ड विजाग, वाईजाग, साम्बा प्रभुजी। हरी बोल। तो आँसों तयार हैं प्रभुजी से सुनने के लिए महराज़श्री के बारे में? हरी बोल। यह ठीक है, कैंसल। कैंसल। ऐसा भुज़ा हु यहाँ पर गिनिस्बु का वर्ल रेकॉर्ड के लोग आये हुए हैं कि सबसे जादा निरुत्साही शिष्यक आपे रहते हैं। इसको नोईडा के में आपका नाम लिखके जाएंगे वो लोग। सबसे कौन कौन चाहता है हिस ग्रेष सामः प्रभुजी से महराज श्री का ग्ल तो आज एक बहुती विशेष भग का भवान के शुद भग, प्रेमी भग, महा भगवत, श्रुल जैब आविर भाधिवस है। तो इसलिए हमें पूरे उत्साह के साथ आज के दिल गौर, धन, जन आते हैं। आते हैं, आते हैं, आते हैं, आते हैं, आते हैं, आते हैं, आते हैं, आते हैं, आते हैं, आते हैं, आते हैं, आते आते हैं, आते हैं, आते हैं, आते हैं, आते हैं, आते हैं, आते हैं, आते हैं, आते हैं, आते हैं, आते हैं, आते हैं, आते हैं, वह नित्यानन्द प्रभू के विक्ट्री आ फ्लाग का नाम है। एसा फिर्ण्ड रौप सालिस। नित्यानन्द प्रभू के विक्ट्री फ्लाग का नाम है जय पता का। अरे भाई, एसा भुजावा हरी बोल। My God! ऐसे में तो आपके आँखों से आँशों निकलाने चीज़ी हैं अरे ये नित्कानन पुभु के विक्ट्री फ्लाग हमारे बीच में शलित जै पतास्वाई महराज के रूप में हैं अरे हरी भूल देखो आज क्योंकि फास्टिंग है तो ग्लूकॉंडी पिलाना अलाउ� शुरू जय पता का महाराज जी का आविर भाव दिवस हैं हम लोग क्या बुझे बुझे नगराएंगे आज मैं देखा कहा कहीं लोग आज प्लेस पर लगे हूँ, वच्चाप पर लगे हूँ हैं मैं देखा हाँ महाराज जी का ब्यास पूजा है अइसे मनाओगे गुर्दे� तो इसे लिए हमें उत्सःपूर्वक सुनना भी चाहिए और पूरे फेस्टिवल में उत्सःपूर भाग लेना चाहिए ठीक है जी और आखरी तक बने रहा है महाराज का ग्लोरिफिकेशन भी सुनेंगे और साथ साथ में इसके बाद फिर भोगा ओफरिंग भी है आर्थी भ हम वो लगता है हमारे काम फ़से होंगे कहीं किसी काम फ़से होंगे तो अरे नहीं अच्छा नहीं है। आज हम फुल फ्लेज़ेड, मेंटली, फिजिकली हम यहाँ इसकौन नोयडा में रहेंगे और अगर हमें करते हैं, हम इस बहुत बहुत अच्छा नहीं होग हरी वो। So first सबसे पहले मैं इंवाइट करने चाहूँगा His Grace साम्बा प्रभुजी को So प्रभुजी का स्वागत करेंगे बजायते हैं हरी वो। Namo Om Krishna Padaya, Krishna Prasthaya, Bhūtali, Shivati, Jaya, Pratākās, Bhāvini, Dīnāmi नम अचार्य पादाय निताय किपाब लायडि कोरु कथा धवदाय नगरगामतारि पांच्छा कलपतर पुष्च किपासु द्वईपचा पतितानां पावदिर्भवश्ट पेप्रुवारू शिलजै पताय स्वामि गुरुमाराजकी शिलप्रुपादकी इसकान समस्त गुर� चावती जुईदि ग्लोरिफाई गुरु वश्णवर्ण। एजुजिली मैं बेंगाली करता हूँ, पर मैं प्रिवार्ण करता हूँ। मैं इश्कान के लिए करता हूँ, मैयापूल के लिए करता हूँ, समद्धि 72 के लिए। मैयर्पूर। समकर समकर समकर समकर समकर समकर समकर समकर अपने परवाप्पर शिलेप्राव परवाप्पर शिलेप्राव परवाप्पर शिलेप्राव परवाप्पर शिलेप्राव परवाप्पर � समकर अगर करते है, करते करते करते करते करते करते करते करते करते करते करते करते करते करते करते करते करते करते कर बाँगलदेस नहीं करता है। बाँगलदेस बहुत करता है। करता है कि मरता करता है कि मरता करता है कि मरता करता है कि मरता करता है कि मरता कर� तायलन, मनकर अदर पर्स। अपार्ट पर मनकर, गुरुभाष करते हैं, करते हैं, करते हैं, करते हैं, करते हैं, करते हैं, करते हैं, करते हैं, करते हैं, अपने परवपाद परवपाद परवपाद परवपाद परवपाद परवपाद परवपाद परव and we were doing kirtan from the temple to Radha Damodar temple. And Tamar Krishna Maharaj spoke for a few minutes, then he said, now Jayapada Maharaj, he'll speak only Mayapur and Mayapur development. So my Guru Maharaj started doing that. Prabhupada has told that we should build a temple in Mayapur. As Nithyananda Prabhupada Bhakti Mohit Thakur says, एक अद्भूत मंदीर होईबे प्रकाष। तो हमें इसकर करते हैं। अगर मैं करते हैं, इसकर करते हैं, इसकर करते हैं, इसकर करते हैं, इसकर करते हैं, इसकर करते हैं, इसकर क And Srila Prabhupada gave this Mayapur, he told Jayapadaka, I am giving you the, what you call, Samraja, the kingdom of Chaitanya Mahaprabhu, and you expand it. Now, with his, whatever the way, humble ability, with his cooperation, with his patience, with his strategy, things have developed beyond what we thought at the time not possible. Now it's possible, right? और मदर इंडिया में नहीं करता था। करता जाना जाना जाना जाना जाना जाना जाना जाना जाना जाना जाना जाना जाना जाना जाना जाना जाना जाना जाना जाना जाना जाना जाना जा गुरुमहा's लाइफ के लिए क्योंकि उन्हें करते हैं, उन्हें करते हैं, उन्हें करते हैं, उन्हें करते हैं, उन्हें करते हैं, उन्हें करते हैं, उन्हें करते हैं, उन्हें करते हैं, उन्हें कर� अपने गुरुष करते हैं। मैं आपका करते हैं, मोधी नगर मोधी नगर करते हैं, करते करते करते करते करते क� शिलेप्रोभपाद दिशाइपल देखने के लिए कुछ दिशाइपल देखने के लिए कुछ दिशाइपल देखने के लिए कुछ दिशाइपल देखने के लिए कुछ दिशाइपल देखने के लिए कुछ दिशाइपल � If we have faith, then only it is possible. The faith will fetch you. So let us keep faith the way Guru Maharaj did it. Today, you all know the Guru Maharaj's situation, how he has been fragile for the last 14-15 years. And believe me, there is always somebody who is a critic. Even the critic, they call Jayaprakash Maharaj as a miracle man. They call Jayaprakash Maharaj as a miracle person. अपने जनकता अपने जनकता अपने जनकता अपने जनकता अपने जनकता अपने जनकता अपने जनकता अपने � अगर वदक्षियों के लिए करते हैं, अपने लोगों के लिए करते हैं, करते हैं, करते हैं, करते हैं, करते हैं, करते हैं, करते हैं, करते हैं, करते हैं, करते हैं but they want to assist me to preach Chaitanya Mahaprabhu's message. He told quite, apart from my Guru Maharaj, told many devotees like that. Of course, Prabhupada is to inspire, but if you just observe very keenly, the way Guru Maharaj's life, because what is his life? His life is totally dedicated for his Guru. Nothing doing, whatever Prabhupada makes, whatever way Prabhupada will be happy, that's what he wants. Apart from that, he had many projects he did, लुप्त तीतर धार, तो ये चेतर महापुर्वार्ण के प्रास्टाइम के प्रास्टाइम के प्रास्टाइम के प्रास्टाइम के प्रास्टाइम के प्रास्टाइम के प्रास्टाइम के प्रास्टाइम के प्रास्टाइम के प्रास्टाइ आपको चेतन महा पुरुष असोषियेट करते हैं। अपने करते करते करते करते करते करते करते करते करते करते करते करते करते कर� तो जैपिदाग स्वामी करते हैं, करते करते करते करते करते करते करते करते करते करते करते करते कर� जाय हरी वो। बहुत धन्यवाद स्थाम्मा प्रभुजी का। Now we have with us Sumitra Krishna Prabhu ji, who is Regional Secretary GVC from Tamil Nadu. So we request Purni to kindly come on stage. बहुत धन्यवाद स्थाम्मा प्रभुजी का। इतना सुन्दर बताया उन्होंने कि किस तरह से श्लुजयपता का महाराज इतनी ट्रावलिंग करते हैं, इतनी प्र अरे भाई इतने उद्मार आत्माएं किसने दिया आपको मायापुर्धाम हाँजी श्रृपावुपात गुला करते थे जयपता का स्वामी I have given you kingdom of God. Now you develop it. आज मायापुर्धाम किसकी बात है हमारी बीच में It's because of Shri Jayapata Kamara Shri Jayapata Kamara कोलकाता से मायापुर आते थे उसने इटे भ हमारे अच्छों आ चुके हैं। सुमित्र कृष्णा बभुजी हरी वो। हरे कृष्णा। अमोग लेला प्रभु वो अच्छों आ चुके हैं। हमारे अच्छों आ चुके हैं। सुमित्र कृष्णा बभुजी हरी वो। हरे कृष्णा। अमोग लेला प्रभु वो अच हरी किष्णा दिवोटीज मैं देखना हूँ यहाँ कई लोग बाते कर रहे हैं प्रभुजी यहाँ पर आया है हमको महाराज जी के बारे मताने के लिए जितने गपोडी माताँ यहाँ दिखरी हैं मेरे को गप मारते हुई सब पे ग्यारा ग्यारा हजार रुपे का फाईल लग उसका सही समाल करना चीहे। उसलिए निताई सेवनी माता जी शी जी रोल मौडल। उनके बाद बोलने की शक्तिया। वो कृष्ण कथा करती है। वो शक्ति का समाल करती है। तो जितनी माताई नज़र आ रही हैं। हाँ गब मारते वे प्रभू लोग। यहाँ वहाँ। और � तो इसलिए कोई बाते नहीं कर गा रहे हैं। भाई ग्लोरिफिकेशन है ये। ये संटा बंटा जोक से सुना रहे हैं यहाँ पर। यहाँ आपके गुरु महराज जी की महिमा बता रहे हैं। यहाँ तो सुनना चाहिए। सुनते सुनते अश्रू आने चाहिए। और यहाँ हम जब मैं करता हूँ, करता करता करता करता करता करता करता करता करता करता करता करता करता � तो हमें बड़ा सुभागे, आज हम सब यहाँ पर इकत्रित हुए हैं। हालिकि शुधा मायापोर में बहुत ही भवे तरीके से आश्य जैपिता का महराज जी की व्यास पूजा मनाई जा रही हैं। It is Krishna's plan that for past six months itself, the committee members of the JSS, Guru Maharaj team was planning how grandly we can celebrate the 75th platinum year of appearance of Guru Maharaj in Mayapur. तो भी जो श्ये महीने से चर्चाएँ चल रही हैं कि किस प्रकार से श्रृ जैपितका महराज जी का गुरु महराज जी का ये 75th व्यास पूजा मायापूर्ध हमें बहुत भवित तरीके से मनाई जायें। But Krishna had a different plan. लेकिन क्रिष्णा की कुछ आओरी योजना है। He want the devotees in Delhi, in Noida ना ना वहाँ। So, as Sambha Prabhu and others were mentioning that Guru Maharaj is a very very senior disciple of Srila Prabhupada. When Srila Prabhupada came to India in 1971, Guru Maharaj also came here. That time Mayapur was a rice field, nothing was there, only Prabhupada Kutir. He spent so much time, so much austerity, so much difficulty, வாழ்க்கையில் அவருக்கும் பதகத்தத்தில் பதகத்தத்தில் பதகத்தத்தில் பதகத்தத்தல் பதகத்தத்தல் பதகத்தத்தல் பதகத்தத்த� गोवड़ेश करते करते करते करते करते करते करते करते करते करते सो हम सब जानते हैं कि शुरृ जयपता का महराज हलके अमेरिका से लेकिन उन्हें बेंगॉली भाषा सीखी प्रचार पसार करने के लिए 1971 में शुरृ भोगभाजी पहली बार मायापूर आय था और वहाँ पर कुछ भी नहीं था उन्हीं कुटिया बनाएगे थी और वहाँ प वहाँ पर जाएगा करेंगे यह सब प्रचार करेंगे नहीं कर सकते। लेकिन शुरु जैपता का महाराजी ने असंभव कारे किया हम सबकी सेवा में, शुरु ठोपा जी की सेवा में। हम सब जानते हैं कि शुरु महाराज बहुती सुन्दर, बड़े विशेष, लंबे नाम � और उन नामों का समन्द होता है कृष्णीला से, महापुरुगील्या से, रामजीगीलीला से। तो जब कभी भी महाराश्री आते थे, साथ निया में, तो वहाँ के प्रेज़िदन को बोलते थे कि मैं आउंगा दो दिन के लिए और मैकसिमम तीन दिन के लिए। लेकिन भक्तों को इतनी प्रिर्णा मेती थी महाराज जी के संग से, कि भक्त लोग महाराज से निवेधन करते थे, महाराज बस एक दिन और, बस एक दिन और। He said, yes, I will stay for one more day, but next year I will reduce. Instead of saying three days, I will say one year, one day. Next year, I will reduce that one day, because I am staying extra day today. तो महाराज बोलते थे, ठीकिया, इस बार एक एक गुरुमाराज को कहा, गुरुमाराज को कहा, गुरुमाराज को कहा, गुरुमाराज को कहा, गुरुमाराज को कहा, गुरुमाराज को कहा, गुरुमाराज को कहा, गुरुमाराज को कहा, गुरुमाराज को कहा, गुरुमाराज को कहा, गुरुमाराज को कहा, गुरुमाराज तो हम जानते हैं, spiritual hospital tourism, को ये महराज ने वास्ता में इसकी भावना क्रेट की। When Guru Maharaj fell sick, they found out Chennai has some experts in kidney and liver. So when he came there, he had to spend months after months there, in the hospital treatment. जब महराज श्री यहाँ पर आये थे, हमने इलाज चलाने के लिए, तो कई महीने उनको यहाँ पर रहना पड़ा। Then he told me, you told me Natyatra stay for two days, now you have made me stay for many weeks here हरिष्णा, हरिवोल, साउन, सिस्टम, हरिवोल, साउन, साउन, साउन, एको, एको, एको आरहा है। एको थोड़ा कमगरा, एको। मन इपने रत्यात्रा करते पर वन महर दे, म तो जब श्रीर ज्याविता का महाराज जब हस्पदाल में थे, तो उन्हों कई दिनों तक फिर हस्पदाल में रुखना पड़ा, तो तब प्रभुजी ने महाराज से बोला, महाराज श्रीबोटी साहब से पहले रिक्वस्ट करते हैं एक दिन के लिए, लेकिन आप ऐसी दिव तो जब महाराज अस्ताल में थे, तो अक्षण नर्ज को एक एक्सेसाईज करना नहीं पड़ती थी, कि बॉल ले कर कि उसको आगे ऐसे ठेकने का होता था। See, we all carry a bead bag, we put a bead bag and say, chant Hare Krishna, because Guru Maharaj had health problem, he was not able to chant. But he was so particular, he will tell his assistant, when I throw the ball here, I'll be chanting Hare Krishna, Hare Krishna, Krishna Krishna, Hare Hare, Hare Rama, count one in the clicker. तो महराज उस वग भी जब बॉल फैकनी की एक्सरसाईज भी होती थी तो उस वग भी हरे कृष्ण, हरे कृष्ण, कृष्ण, कृष्ण, हरे, हरे, हरे, हरे, राम, हरे, राम, राम, हरे फिर बॉल फैचे थे और यहाँ जो उसका सेकेटरी थो उसको बोलते थे अब तो अपने मुझे महराश्री अगर उनका स्वास भी खराब है तो मेरी सोला माला कंप्रीट होनी ही चाहिए। अगर में आपके बारे में नेम्स करते हैं। आप जानते हैं कि चैन्नाई में मद्रास करना चाहिए। मद्रास। पहले इसका नाम तो मद्रास। तो मदरास के लिए मारे बोले था मैड रश्य। यानि की पागलो के लिए दोड़ना किस के लिए? इंद्रितत्ति के लि रसम मिंज, साम्बा रसम, रसम असम। Then he told me, then I told Maharaj, now government has changed the name of Madras to Chennai. तो महाराजी को बात में पताया है प्रुभुब जी ने की, अब मद्रास का नाम पढ़ गया है चेणई। Then he said, yes, you people are spreading the glories of Mahaprabhu chanting everywhere. People after becoming madrash, now they become तो वो कहा, चेन नई, वो क्या है? चेतन्य निताई देश, चेतन्य निताई देश। तो माराश्री ने बोला, पहले था मैड रस, यानी मादक्ता का रस, लेकिन आप लोग के प्रचार से, अब ये बदल गया है, इसका नाम हो गया है, चेन नई, मतलब चै, मतलब चैतन्या न He spent six years in travelling South India. Four months he stayed in Srirangam. And he made a full-time devotee there. One of the Sri Vaishnavas, Gopal Bhatt Goswami. तो महाश्री ने highlight की इस बातों की किस पकार से महापुरू चे साल South India की यातरा में थे। और विशेशुब से चार महीने जो वो रहे चतुरमास के समय में, उससे उन्होंने महापर भक्त भी बनाए। महराज, आप पूरा शहर है, आपको इसको दिक्षा दे सकते हैं। महराज, आपको पूरा शहर है, आपको इसको दिक्षा दे सकते हैं। महराज, आपको पूरा शहर है, आपको इसको दिक्षा दे सकते हैं। महराज, आपको पूरा शहर है, आपको इसको दिक्षा दे सकते हैं कि गुरु महराज वो इन्हें चाहिए। प्रभुषेव गौर्डन, वो गौर्डन है। He is the wealth of Gaura. The way he speaks Chaitanya Katha, it feels like the entire pastimes of Mahaprabhu, Nithyananda, Advaita, Jalal, they are in front of our eyes. When he speaks, we feel as if all those characters are there in front of us. So, he loves Gauranga, Nithyananda. Once, when he was in a healthy मायापुर बियास पूज्या के लिए। अपने अपने पूज्या के लिए। अपने पूज्या के लिए। अपने पूज्या के लिए। अपने पूज्या के लिए। यह अपने पूज्या मुच्चियल है। आपको के लिए। अपने पूज्या के लिए। अपने पूज्या मुझे के लिए। अपने पूज उठाएगा, मैं आपको उठाएगा। मुझे उठाएगा, प्रावुपाद उठाएगा। अगर प्रावुपाद मेरे लिए प्रावुपाद करने के लिए, हम प्रावुपाद करने के लिए उठाएगा। तुम्ह हमारा जो ये पूरा अंधोलन है, ये तो पुशिंग, यानि एक दुसरे को धखेलने का मुम्मेंट हैं। नहीं पुशिंग डाउन, पुशिंग देना तो है, लेकिन नीचे धखा नहीं देना, गोलो की और धखा देना है। और माराज अच्छा नहीं कि सिर्फ उपने शिष् I have built a big house where everyone can stay, all our family members. Like I remember, I have taken my Siksha Guru as Gopalakrishna Maharaj, Radhaganath Maharaj. And in our own family, we have father's brother, what do you call in Hindi? Yes, Chacha. Chacha, in Tamil Gowachitta. Put them also. So in a family, we all respect each other. And the senior father, महराज जो भाव है, वो बड़ा परिवार ला भाव है। वो ये लेकर चलते हैं, जितने भी मेरे शिष्यें हैं, वो थो है ही हैं। साथ साथ ही मेरे जो गौड़ बदर हैं, मेरे गुरु भाई हैं, उनकी शिष्यें भी वहाँ से मेरे परिवार का इस्थाई हैं। जैसे की ए प्रावृपाग प्रावृपाग प्रावृपाग प्रावृपाग प्रावृपाग प्रावृपाग प्रावृपाग प्रावृपाग प्रावृपाग प्रावृपाग क्योंकि हम जानते हैं, महापुर्बुष करुणा मही, कुरुणा मही कुरुणा प्रावृपाग मही कुरुणा प्रावृपाग मही कुरुणा प्रावृपाग प्रावृपाग मही कुरुणा मही कुरुणा मही कुरुणा मही कुरुणा मही कुरुणा मही मही क तो महराज किस प्रकार से किरपा को बात रहे हैं। और महराज की हालकी 75th ये व्यास पूजा अनिवरस्री है। तो सत्तर हजार दिसाइपल सो अलड़ी महराज एनिषियेट कर चूँगा। अभी गोवर पूर्णिमा में भी अभी एक हजार दिवोर्टीस को एनिषियेट किया मायापुर इंस्टुट्विट्विट्विट्विट्विट्विट्विट्विट्विट्विट्विट्विट्विट्विट्विट्विट्विट्विटविट्विटविटविटवि एवरी देई मैं दिसाइपल, मैं सेकेटरी मैं रीद एवरी देई मैं दिसाइपल, मैं सेकेटरी मैं रीद एवरी देई मैं दिसाइपल, मैं सेकेटरी मैं रीद एवरी देई मैं दिसाइपल, मैं सेकेटरी मैं रीद एवरी देई मैं दिसाइपल, मैं सेकेटरी वह भक्ति विदान्त कोर्स मैं रीद � को प्रेणा देने के लिए चाहिए। हम सबको भी प्रभुपाची के बुक्स को बहुत ही ध्यान से बढ़ना चाहिए। महराज श्री आज भुक्स को बढ़ते हैं। तो राज को महराज एक घंटा सुन्ते थे। उसके बाद पिर जो कॉष्णस अगर मदकतवरों पर प्रशुक्षन के केदर हैं, जहाँ पर हम भक्तियों को सीखते हैं, उनको किस पकार से विभारिक जीवन में अपलाई किया जाये, ये भी सीखते हैं। हम बहुत परकर हैं, मैं बहुत परकर हैं कि मैं उन्ह प्रभुजी जब 22 साल के थे, तो बैंगलोर में रत्यात्र थी प्रभुजी? बैंगलोर रत्यात्र, पस्त रत्यात्र, 1985, नवंबर 28. वाओ, नवंबर 28, 1985 में, उसके रत्यात्रा का दिन था, बैंगलोर में, तो प्रभुजी के उसके उम्ह थी 22 साल, उसके उसके उम्ह थी 22 सा We all know that Bhakti Bhiksha, what is being heard all over, he was one of the pioneers along with Bhanu Maharaj to start the Bhakti Bhiksha preaching, where even people in remote villages and people who don't know about Krishna can sit together, 15-20 members, and talk about Krishna and advance in Krishna Consciousness. तो हम सब जानते हैं कि इस प्रता से भक्ति व्रिक्षन का जो मौडल है, उसको महाराणने कारिय शील किया. आज कितने ही दिवोटीज हैं, जो किसी भी कोने में हों, वह भक्ति व्रिक्षन का जो मौडल है, उसके माध्यम से आज बड़े सिस्टेमाटिकली प्रशिषन डे रह जया पताका, आप करते हैं। केता में सलवका करते हैं। करते करते करते हैं, 18 चाप्टर। करते करते करते करते � यह करतकाल करतकाल करतकाल करतकाल करतकाल करतकाल करतकाल करतकाल करत� तो हम देखते हैं कि इसमाल शुरी जय पता का महराज जी ने इतनी प्रखर्तक साथ प्रचार किया है। वो गौर्थन जन भी है, शुरी नितनान भवो के वो विक्ट्री फ्लाइक भी है। और वैसे जगत के अंदर और लोग भी फ्लाइक भेराते हैं कि ओके इतने साल पूरे अगर मनकर मनकर मनकर मनकर मनकर मनकर मनकर मनकर मनकर मनकर मनकर मनकर मनकर मनक� I just forgot to tell one thing. It's a humorous one. When you get initiated, प्रभूस गेट वाट नेंग लास्ट। कृष्णबक्ता डाश। What do you call? D.A.? डास। डास को उल्टा पढ़िये? Sad. By Guru's mercy, a devotee will never be sad. पीछे से पढ़ना है। तो महराश्री जब दीक्षा देते हैं, तो आखेरे नाम मिलता है दास। तो जब कहना मानते रहेंगे, तो हम रहेंगे दास। लेकिन दास की स्वेलिंग है D-A-S. लेकिन जब कहना नहीं मानते हैं, तो स्वेलिंग उल्टी हो जाती है, S-A-D, यानि सैड। आप दुखी रहे और दन्यवाद सुद्धास कभी उदास नहीं होता। हरी वो। I was inspired by Amol Prabhu who uses his word jugglery. Because I am standing near him, this has come to my mind. प्रभुजी की जाए, विशाका माता जी की जाए। प्रभुजी उद लाई तु कम नाओ। नहीं, नहीं। एक लिए करते हैं। प्रभुजी शुति गिर्दी प्रभुजी के लिए करते हैं। इसलिए करते हैं क्योंकि उन्होंने नेक्टर के लिए करते हैं। प्रभुजी शुति अगले गिर्दी प्रभुजी के लिए करते हैं। जो भक हैं उनको मुलाना चाहूंगा, उनका नाम है हिसरेस पूर्ण चंद्र प्रभुजी. पूर्ण चंद्र गौर प्रभु. पूर्ण चंद्र गौर प्रभु यहाँ पर हैं, उपसित हैं? और उनके बाद फिर हिसरे शुत्रकीर्ती प्रभुजी से हम request करेंगे and then after प्रभुजी we will have हर ग्रेस निताई सेवणी माताजी तो मैं हिंदी में बोलने के लिए कोशीज कर रहा हूँ। तो पतिदों शिलु गुरुमराज की जो बाते हम शास्त्र में सुनते हैं। मुकम् करुति बाचलम् पंगुलंगः यतिगिरिम् जतकृपतमं बन्देश्य गुरुदिनतारिनम् पंगु लंगहे ते गिरी का, मैं एक एक्जाम्पल दूँगा, तो ओडिसा का भधरक में, जो भधरक मंदिर में, जो इसकान का लाख टेंपल है, प्रोपाजने सेवन्टे... विद्यादात्म प्रोपाजी, विद्यादात्म प्रोपाजी, विद्यादात्म वि� पहला उनका जीवन में जब दिख्षा सुरू किये थे राम नवीम के दिन तो गुर्माराज ने 1978 राम नवीमी एप्रिल सत्रा तारीक को पहला दिख्षा अनुस्थन किये थे तो उसके बाद जो भगत लोग बड़े थे एक प्रभुजी ने गुर्माराज का जो फास्ट जिस तो उनके एक office में, irrigation office थे, वो irrigation office में एक clerk था, उन्होंने बहुत तांत्रिक थे, शिभ जी का बहुत तांत्रिक थे, और तांत्रिक कारण से मंत्र के गड़बड हो गया, इसी कारण से उनका कमर से नीचे तक, उनका दो पेयर नहीं चल रहा था, वो चलते फिरते नहीं कर सकते थे इसलिए जो office duty जाते थे कभी कभी उनको महीने में पंधरा दिन में उनको रिक्षा में बेठा देते हैं वो office साइन करके आता है यह सब बहुत दिन चलने के बाद वोई प्रभुजी बोता है कि तुम एक काम करो तुम तो बहुत तंत्रिक के � उनका कृपा हो तो तुम अच्छा हो सकते हो। उनका बात सुनके, उनके साथ उनने भुवनेश्वर आये थे। तो भुवनेश्वर में क्या हुआ, जमने विद्यारत्न प्रभुने गुर्माज साथ मिला यह है। गुर्माज उनको सिर्फ बताये कि तुम क्या चाहते हो। � तुम अच्छा होना चाहते हो तो तुमको अभी से चार माला जब करना पड़ेगा। जब करोगे। औँ बले हाँ गुर्माज करूँगा। गुर्माज बताये के ठीक है तुम सत्ति ग्रहन करना जब से तुम पुरा चार नियम पालोन करेगे, सुलमाला जब करोगे तो तुम अच्छा मत्सूस किया गहर में आया गुर्मा जिन उनको जब माला दिया जब करना करने के लिए बोता है गहर में आखे वो जब दो माला चार माला किया अच्छा लग रहा है दब वो आठ माला किया तो वो क्या करते है उड़ नहीं सकते जैसे पुराजिस का पायर नहीं चलता दिवाल पकड़ के वाल पकड़ के चलना सिखा। उसके बाद जब सोलमाला किया, चार नियम फलो किया, वो साइकल चलाया, साइकल से फिरी उनका अफिस आया, सरे कुछ काम किया। तो इसके बाद वो भुवनेशर गए थे। बहुत खुष हो गए। मैं कितने डक्टर दिखाया, कितने तांत्रिकों को दिखाया, कुछ नहीं हुआ। इनो साधुने मुझे हर्णाम करने बताया, और नियम पलन करने के लिए बताया, तो मैं चल सकता। सब कुछ कर साधु. ज तो आप जो बताएंगे हम करेंगे। तो अब गुरुमाहराज ने बताया, तुम मेरे बात, प्रवपात का जो इसकन का नियम जो है, सारे पालन करोगे, तो सोलामला जब्स हर रोज करोगे, प्रसाद लोगे, भक्त बन जाओगे, तो सिर्फ चलना नहीं, तुमको हम साथ में � यह सच्मुत बात है। इसा हुआ है। वह गुरुनोंने 85 में दिक्षा लिये थे। वही प्रभुजी ने। हम इससे सिखते हैं कि पंगु लंगहे थे गिरी। जो गिरी भी लंगन कर सकता है भक्ति करने से। यह सच्मुत गुरुमहराज का जीवन में हुआ था। तो एक बा तो गुर्माराज आये थे माईपुर से बहुत सारे भक्त लोग पेंडल पोग्राम के साहत आये थे तो एक बहुत बड़ा फिल्ड था वोई फिल्ड में पोग्राम हो रहा था बहुत सारे भक्तों गाउं का लोग देखने आये थे गुर्माराज इतना बड़ा है इतना अच् तो जब उसी समे इतना तो तुफान आया बहुत सारे आकास पूरा माने बादलों में च्छा गया तो अंधकर पूरा हो गया अंधरा इतना जोर से अंधरा आया था सारे लोग चलने लगे पोग्राम छोड के चलने लगे तो गुर्महराज स्टेज पे थे गुर्महराज स्टे उपर में तो स्काय को लख्या करके आकास को देखके गुर्माराज दो हात उठाया आज सब को बोला मेरे साथ मामंत्र करो तो सचमुच गुर्माराज जब दो हात उठाये उठेके हरे क्रिष्णा हरे क्रिष्णा क्रिष्णा क्रिष्णा हरे हरे हरे राम हरे राम राम राम हरे नीचे उतार दिये तो कुछ खन की अंदर सारे बारीश वो बादल कहा चले गए तुफान चले गए सारे लोग बैठे अच्छा से प्रोग्राम हुआ जब रात सोने गे तो दस बजे रात को बर जदाथर बारीश हुआ इतने टाइम रुकने का क्यम्ता उनके पासे बारी तो सारे लोग बोलने लगे ये सच्चमुज कोई लोग नहीं, कोई मानव नहीं है, ये देवता की क्यमता है, उन्डने कोई देवता है, दिखने में तो बहुत लंबा है, उनका फिगर तो बहुत आच्छा है, सारे लोग बोलने लगे ये कोई देवता होगा, कोई मानव होग गुर्महराज ने करके दिखाया कभी कभी भक्तों के साथ इतना फ्रेंडली हो जाते हैं कभी भक्तों के साथ खेलते हैं कभी बहुत सासन भी करते हैं एक बर का बात मुझे आदा आ रहा है बालेस्वर में 2003 में गुर्महराज आये थे हमारा चोवडी सगा तो स्टेट समिलन हो तो भक्त लोग कुछ बोले कि गुर्माज आपके साथ फटो खेचना है। तो गुर्माज बताये ठीक है, एक बहुत उची का जागा था, सारे भक्तों इदार खड़ी हो गए। तो खड़ी होने के बाद गुर्माज फटो खेचने के लिए बताये बोले। तो एक चर पंच ल तो इस बार गुर्माज उनको देख लिये पुछे क्या दिख्षा हुआ क्या तुम्हारा? ना दिख्षा हुए नहीं। तो गुर्माराज पुर्ण चंद्र पहुजीने हमारा दिख्षा नहीं दे रहे हैं। तो गुर्माज मुझे उस सारे के सामने मुझे बोले कि तुम दिख्षा क्यों देते नहीं उनको? कोई प्रोबलेम है उनका? कोई नियम पाल भलो करता नहीं, सुलमाला करता नहीं, गुर्माज ऐसा नहीं है. तो क्यों नहीं देते हो? गुर्माज मुझे उपर से मना किये हैं, तो दिख्षा देने के लिए. तो गुर्माज में उप कौन मना करते हैं दोमको हम सोचते थे कि लड़किया लोग साधी करेंगे कहां जाएंगे साधी के बाद क्या होगा नहीं होगा भक्ती करेंगे नहीं करेंगे बहुत प्रोबलेम है साधी करने के बाद दिक्षा लेंगे वो यह अच्छा होगा हम सोच रहे थे लेकिन हम बोले क तो गुर्माज मेरे पर घुसा होके तो एक थापड लगाया एक थापड जब लगाया तो एक थापड मेरा गाल पर लगा उसी दिन इतना स्टीट किये थे तो उनको बताये कि इन लोग साधिक बताये कि इन लोग साधी करके दिक्षा लेगा तो जोई कोई भगता दिवोटी नहीं मिलेगे तो कोई साधी नहीं करना है उससे आच्छा है यही आच्छा है और उन लोग साधी करने के बाद तुम जो सोच रहे हो एसा गुरु का कृपा होता है एसा कोई दिवोटी नहीं र जो जो अच्छे से कोई एक लड़की रहे गया तो अच्छा रहे गया साधी नहीं किया है उन सारे बहुत अच्छे में हैं तो हम हम कभी अपना मद भी चलाते हैं इसा ठीक नहीं है तो गुर्माराज इतना क्रिपालू होते हैं कि सब को देखने के तो गुर्माराज चाहते ख्यमा मंगें की की जिवन भर हमें तो बहुत कुछ उनके पास में रहे करें, बहुत सेवा कियें तो बहुत अपराद भी कियें। गुर्माराजी सारे अपराद हमें ख्यमा करें। हरे कृष्णा। जय पति बंचलू गुर्माराजी की जय। जय। हरी बहुत धन्यवाद प् अगर कोई हमसे बोलता है कि आपके आँगो प्रभू लोग प्रीचिंग करते हैं, माथा जी प्रीचिंग नहीं करती हैं। So, number one नाम कोई आता है माथा जी? Number one preacher in India at least and all across the globe. Her grace, निताई सेवनी माथा जी. अब देखें महराज जी का कितना preaching spirit है। एक western लड़का था, महराज मारानी जी बुला बुलो नी टाई, नी टाई, गधे नी टाई, हाँ हो गया तुम्हारा, गोरंगा नी टाई हो गया तुम्हारा. अगर कोई नाम नहीं ले पारा, महराज अगर कोई नाम नहीं ले पारा, महराज अगर कोई नाम नहीं ले पारा, महराज अगर कोई नाम नहीं ले पारा, महराज अगर कोई नाम नहीं ले पारा, महराज अगर कोई नाम नहीं ले पारा, महराज अगर फिलोस्पी को संजाती हैं, कथाओं कोई को नाम बताती हैं मैं खुद माताजी के फैन गलब का चोटा सा मेंबर नहीं हूँ � I regularly hear Nitai Sivani Mataji and take so much inspiration from her and it's really an honor to have her today and hear glorification of His Holiness, Jai Bata Ka Maharaj, from her glorious mouth. Thank you, Mataji. Haribo! Hare Krishna Thank you Amogha Leela Prabhu for your kind words. नगर ग्रामतारी ने। शिला गुरु महराज की जई। गुरु परंपरा की जई। शिला प्रभुपाद की जई। हिंदी में बोलें के इंग्लिष में बोलें? कितने लोग चाहते हैं हिंदी में बोलें? Oh, most of them. तो आज के दिन auspicious day, 75th anniversary गुरु महराज के appearance day पे मैंने तो सो� और सुमित्र कृष्ण प्रभुने भी इतनी सारी अच्छी अच्छी हसने वाली कथाई गुरु महाराज से सम्मनियत बताईं। तो मेरी ओफरिंग शुरू करने से पहले मैं एक चोटी सी हुमरस कथा बता के शुरू करूँगी। जब ये लोग बात कर रहे थे तो मुझे या तो भक्त एक नए सेकरेटरी उनके जौन होगे थे तो उन्होंने गुरुमहाराज को जाके उठाया कि गुरुमहाराज आपके प्रशाद का टाइम हो गया है आप उठ जाये तो गुरुमहाराज ने कहा कि प्रशाद के पहले मैं नहाऊंगा जाके मेरा ग्रीन वाला टवल ले तो वो सेक्रेटरी ढूंढने लगा, उससे टवल मिल नहीं रहा था। पन्धरा मिनिट तक ढूंढा, फिर से आके गुरुमाहरच को उठाया, गुरुमाहरच टवल मिल नहीं रहा है। गुरुमाहरचे कहा, दूसरी वाली बाग में देखो। वहाँ पर देखा, फिर पन्धर इसलिए तुम्हें केवल कह रहे हैं कि ग्रीन टावल ढूड़ो। तो बस ये जब बाते कह रहे थे तो मुझे यादा है ऐसी कितनी सारे मर्तब गुर्मार्च ही जब अमीजिंग है। मुझे और एक याद आ रहा है, जब पर्त में गुर्मार्च गए थे, जब गुर्मार्च को एक पर्टिकुलर आंगल में सोना होता है। उस आंगल में नहीं सोईंगे तो उनको सास लेने में मुश्किल होती है। तो सही टाइप और लैंड होने के बाद जब तक वे दिवोर्टी के घर पहुँचे सोनी के सारी अरेंज्मेंट के अल्मोस्ट साड़े बारा एक बज़ गय थे और उसके बाद में वो मैट्रेस उनको सूट नहीं हो रही थी तो अलग अलग जगाओं से मैट्रेस मंगाई जा रही थी और जिन फाइनली मैट्रेस ठीक हुआ, के हाँ ये मैट्रेस गुरुमाराज के लिए ठीक है। तो फिर गुरुमाराज के पास सर्वन्स गए, उनको वील्चेस से उतारेंगे अभी, बेड पर सुलाएंगे। तो गुरुमाराज ने कहा, चेतन चरता मृतम निकालो, वहाँ पर जो बे मैंने इतना घंटा तुम लोगों को टॉलेरेट किया अब तुम लोग चेतन चत्तमृतसम से पढ़ोगे मैं तभी जाके सोंगा। तो ये है गुरुमाराजुन। अभी जो अमूगलिला पता रहे थे निमाई निताय की ये अटलांटा के एक न्यूरोलोजिस्ट ने बताया है तो बोला कैसे हो सकता है, मैं क्रिस्टन लोगों को कैसे प्रीच करूँगा। तो गुर्माज ने कहा क्यों नहीं कर सकते। तुम नीरोलोजिस्ट हो, तुम्हारा काम क्या है? उनके सारे लिम्स ठीक से काम करते है कि नहीं? यही तो तुम्हारा काम है। तो जब वो तुम्हार और फिर कहा गुरुमाराज ने कि जब निताई हो जाये उसके बाद फिर पांच मिनिट उनको कराओ नी माई किसका हुरदाई है माई मेरा हुरदाई है नी माई नी ताई और इस तरह से तुम प्रीचिन करों और फिर गुरुमाराज ने ये भी कहा कि उनके दोनों हाट ठीक है तो गुरुमाहरच ने कह रहे थे कि नरसीम पुरान में कहा है कि जब हम क्लाब करते हैं तो हमारे पुरानी जितनी भी कर्म होते हैं जिस तरह से जब हम क्लाब करते हैं कवा उड़ जाता है उस तरह से हमारे सारे पुराने कर्म उड़ जाते हैं तो उस तरह से गुरुमाहरच � हमेशा वो अपने शेल्टर में हमें रखे उन्होंने हमेरी जीवन को टच किया है उन्होंने हमेरे हमेरे टीच किया है उन्होंने हमेरे टर्न किया है कृष्णा के तरफ मैं जबीभी गुरु महराज को देखती हूँ मुझे ऐसे लगता है कि उनका अप्यरंस तो एक उगनेव और अच्छे अच्छे कमल खिलते हैं। उसे तरह से गुरुमाराज जब हमारे जीवन में आते हैं, तब हमारा जो गन्दा पानी, सारे अनर्थ हैं, वो सूख जाते हैं। और हम में जो अच्छे अच्छे गुन हैं, एक कमल के तरह में खिल जाते हैं। In fact, मैं परसु ही सोच � मनीपूर के एक राजा थे मकर्ध्वज तो वो राजा का समस्या ये थी कि वे मयूर्ध्वज है उनका नाम वे बहुत पावर्फूल थे जब युदिश्चर महाराज ने अश्वमेद यग्य किया तो उनका अश्व जो है इस मयूर्ध्वज राजा ने पकड लिया था तो सार तो कृष्णा ने कहा देखो इस मयूर्ध्वजराजा को तुम अपनी शक्ती से नहीं हरा सकते, बुद्धी से हरा सकते हो, ब्रामन का वेश लो, तो फिर युदिष्चर महारत ने ब्रामन का वेश लिया, भगवान कृष्णे ब्रामन का वेश लिया, और फिर वे मयूर्ध्� और उन्होंने कहा कि हे राजन इस व्यक्ती के बेटे को जंगल में किसी शेर ने पकड़ लिया है और उसने यही कंडिशन दी है कि अगर मयूर्द्वजराजा का आधा बॉड़ी राइट साइड का आधा बॉड़ी का फ्लेश अगर उस सीह को शेर को दिया जाए तब ही उसके तो साथी साथ में उसने अपने बेटे को बुलाया और कहा मेरे सरीर को काटो तो उसके सरीर को काट रहे थे पूरा पूरा आधा और जब आधा शरीर को काट रहे थे तो लेफ्ट साइड की आँख मेंसे आँसु आ रहे थे तिर चलीच निका दो को ऐसा दान नहीं चाहिए। दान तो सत्व मूर्ड में किया जाता है। हस्ते वे किया जाता है। तुम तो रूते रूते दान दे रहे हो। मै उर्द्वजराजा ने कहा तुम मुझे गलत समझ रहे हो। मै इसलिए नहीं रो रहा हूँ। मेरी लेव्स साइड की आँखों से इस जब हम ये कहानी सुनते हमें गुरु महराज की यादाती है। स्ट्रोक के बाद में उनका 75% शरीर जो है निषक्रिय हो गया है। लेकिन वो बाकी बचाओँगा शरीर से सोचते हैं कि मैं कैसे इस शरीर को यूज़ करूँ परोपकार के लिए, लोगों के कल्यान के लिए, जी इसके इस दान के बजे से भगवान कृष्ण इतने खुष हो गये और उन्होंने कहा कि अपसे जभी भी जहाँ भी मेरा मंदिर होगा वहाँ पे पहले ध्वज होगा क्योंकि मयूर ध्वज राजा का नाम जो है और वहाँ पे जो ध्वज होगा उसकी परिकर्मा करने के बाद ह गुरु महाराज जब हमारे जीवन में कोई फिजिकल प्रॉबलम आती है तो वो हमारी प्यूरिफिकेशन के लिए है लेकिन गुरु महाराज के जीवन में यह जूबी फिजिकल प्रॉबलम्स आ रहे है वे उनकी ग्लोरिफिकेशन के लिए है आगे चल के हिस्ट्री में सब उ जिस तरह से आब हम बोलते हैं रामनुजचार्या को किसी ने अटाक किया था मद्वाचार्या को किसी ने पॉइजन दिया था जैदे गोस्वामी की दोनों हाथ काट दिये थे उससे तरह से गुरु महराज के बारे में भी फ्यूचर में हिस्ट्री में बाते होंगी कै कैसे उन I am not out, मैं अभी गेम से निकला नहीं हूँ, मैं सिर्फ थोड़ा सा क्या कहता हूँ विश्राम ले रहा हूँ, पस I am not out. In fact, एक सभा में गुरुमाराज को कोई इंटिड्यूज करते हुए कह रहे थे कि he is sick, ये बीमार है, तो गुरुमाराज ने कहा I am not sick, my body is not cooperating with me, मैं बीमा ये है गुरु महाराज का सुन्दर सा भाव। तो गुरु महाराज की बहुत जरूरत है। In fact, प्रावपाजी के शब्दों में कहे तो, बहुत सालों पहले जब प्रावपाजी इस भूपरपंच में थे, तब एक बार गुरु महाराज ने प्रावपाजी को चिठ्ठी दिखी तो प्रभुपाद जी ने एक सुन्दर बात गुरुमाराज से कही कि आप एक प्यूर सूल हैं और तुम्हारे मुझे जो हरी नाम सुनेगा वो पुरे मुझे जाएगा। तो ये शिला प्रभुपाद के अपने वाक्य है। तो ये शिल्य प्रभुपासु गुरु महाराज को देखना, गुरु महाराज को प्रणाम करना। In fact, रत्यात्रा के बाद में एक बार प्रभुपाज जब रत्र होता है, जो रत्र के चक्के होते हैं, चक्के कहते हैं, रत्र के काट को, वील्स को प्रणाम क जगनात तो नहीं है रत पे तो प्रभुपाद ने कहा तो क्या हुआ ये जो रत चक्र है ये जगनात को कैरी करते हैं तो इमैजिन जो रगनात को एक दिन कैरी करता है वो हमारे लिए पूजणिया है तो गुरु महारच तो राधा माधव को चोबीस घंटा अपने हरदाई में तो उनको तो हम unlimited type obeisances pay करें तो भी कम है। तो बस हमें serious होना है। कभी कभी बहुत बार भक्त मेरे पास आके कहते हैं कि जो गुरु महाराज की सरीर की सेवा करते हैं, वापू सेवा करते हैं, वे कितने लक्की हैं। वे तो सीधा भगवधाम चले जाएंगे। हम भी जा सकते हैं। गुरुमाराज ने जियसस मीटिंग में एक बहुत सुन्दर बात कही। उन्होंने कहा पाँच चीज। अगर कोई ये पाँच चीज करता है, तो मैं ग्यारिंटी देता हूँ, वो भगवधान जा सकता है। गुरुमाराज ने कहा पहली चीज, अपना ज� तीसरा चीज महाप्रभु की जो वानी है उसका प्रचार करो और कहा कि मेरे साथ में connection में रहो यह बहुत ज़रूरी है कि हम गुरु महाराज के साथ connected रहें प्रचार करें महाप्रभु की वानी प्रचार करें और गुरु महाराज की preaching जो mission है उसमें हम भागीदार बनें हम गु वो लिमिटेड टाइम होता है आप इस 15 दिन के अंदर में नहीं खरीदोगे तो पूरा पूरा पैसा पे करेगा उससे तरह से सादु की कुरुपा भी लिमिटेड टाइम होती है पता नहीं ये सादु कब लीला खतम करके चले जाये तो ये गुरुमाराज की करुना का प् हमें इसका फाइदा उठाना है हमें पता नहीं ये सेल कब बंद हो जाएगा तो आज इस पवित्र मौके पे मैं गुरु माराज से प्रात्ना करूँगी के वे शक्ती दे उनके हर वचनों को पालन करने के लिए एक तो शिष्य होता है जो गुरु माराज कहे तो भी बात ना स� इंस्ट्रक्षन देने के बाद फॉलो करें। और एक है बिना इंस्ट्रक्षन दिये ही समझ जाये। तो मैं गुरुमाहरा से रिक्वेस्ट करूँगी कि मुझे वे आशिर्वात दे के उनकी बिना कही हुवी बाते भी मैं समझ पाओ। एक चोटी सी लाइन बोलके खतम करूँगी लास्ट येर मायापूर में गुरुमाराज की व्यास पूजा हुई गुरुमाराज के चरन धो रहे थे चरन अभिशेक हो रहा था और मेरे प्रभुजी चरन अभिशेक कर रहे थे और मैं क्राउड में बैठी थी और जब च तो मुझे लगा क्या हुआ, गुरुमाहाज क्या कर रहा है, समझ में नहीं आया। उसके बाद में जब मैं ऊपर आई पुषपांजली के लिए, गुरुमाहाज की वीलचेर को ले जा रहे थे, बात्रूम, रेस्ट्रूम जाने के लिए. तो गुरुमाहाज ने मेरे पास में � चाहरे थे कि आप उपर आए। क्योंकि जबी भी गुर्माज विशाकप्रत्म आते हैं तो प्रभुजी चरन्ध होते हैं और हम पानी डालते हैं। तो मुझे उस दिन ऐसा लगा कि गुर्माज की अनकही वो भी बाते भी समझना है तभी जाके हम परफेक डिसाइपल बनेंग जो कहते हैं वो तो करते हैं, लेकिन जो मन में सोचते हैं, वो भी हमें समझना हैं। तो आज के इस 75th birth anniversary appearance day पे मैं गुरुमाहा से प्रात्ना करूँगी that he always keeps us, me, my husband, my children and devotees of ISKCON Vishakhapatnam under his warm shelter and care. Thank you so much, Hare Krishna. अच्छा एक खुषखभरी है मेरे पास आप सब के लिए। ठीक है। श्रुल जय पताँगा स्वाही महराज, होस्पिरल से इसको नोईडा की और निकल चुके हैं। एशी महराज को इसलिए भी लेट हो गया। Because today is International Lever Day. और International Lever Day में होस्पिलल में उनको चीफ गस्ट रखा गया। शुले जयपता का महराज जी को। और टौप जितने भी वहाँ पर डौक्टर्स हैं, वो वहाँ पर स्टडी कर रहे हैं किस पकार से शुले जयपता का महराज जी के हम सेवा कर सकें, उनके लीवर और अच्छा हम कर सकें। और मह So Maharaj ne mahabar bhi kripa ki hai aur ab yaha par bhi kripa baatne ke liye aa rahe hain. Shri Jai Bata ka Maharaj ji ki Jai. Now next you would invite His Holiness Bhakti Advait Navdeep Swami Maharaj. Are bhai, are udas aatmaon. हम देखते हैं महराज has empowered so many wonderful disciples अभी maximum number से में in terms of सन्यासी disciples और may be next generation गुरूस में मुझे को लगता है सबसे ज़यपता का महराज के disciples होने वाले हैं चाहिए management हो, चाहिए preaching हो, book distribution हो हर field में महराज के disciples हैं मेरे कासे ऐसा शायद कोई मंदिर होगा जहांपर पुजारी जो है आपका नाम प्रभु? अरुना कान्ती प्रभु विल्ल ट्रांस्टेट उम गेनु तिमिरं धश्य गेनं जन शलकया चष्कुरुन मिली तंग जेन तर्ष्मईशी गुरुभी नम। नमयं विष्ण पादायो कृष्ण प्रिष्ठायो भुतले स्री मति जये पताकार्ष्वामि निति नामिने। नम आचार्ज पादाय निताय कृपा प्रदायिने गो नमों विष्ण बदायो। कृष्ण प्रेष्टाय भुताले स्विमते भक्ति वेदान्त स्वामि नितिनाविने। नमस्ते सरसृति देवे गौरुवानी पचारिने। निर्वी शेष शुन्वादी पार्चात देष्टारिने। बंचा कल्पो तरुभर्ष कृपार्शेन्ध Jai Jai Shri Krishna Chaitanya Prabhu Nithyananda Shri Advaita Gadadhar Shri Vashadi Gauravakta Vrinda Hare Krishna Hare Krishna Krishna Krishna Hare Hare Hare Rama Hare Rama Rama Rama Hare Hare Hare Krishna Actually, सिधाम मायापुरे वेशपुजाहर उद्धेशी रणा दिये चिलाम। ते किंटो गुरु महारोजी इच्छे इति मद्दे बोललें, एक बार चेन्नाइटे होये चिलो, उनर आपरसन आग वही समय में चिलाम। ते इबार गुरुदेवेरी इच्छाते ही एकाने दिल्ली ते की नोधी... नोधीया नोधीया नौधीया नौधीया नौधीया नौधीया नौधीया नौधीया नौधीया नौधीया नौधीया नौधीया नौधीया नौधीया नौधीया नौधीया नौधीया नौधीया न� तेरे गिष्णा, महाराज जी कहरें की मैं गुरु माराज के बियास पुजा के लिए मायापूर में आया था और मैं मायापूर से यहाँ पे आया हूँ मैं पहले चेननाई में भी था एक साल जहाँ पे उस समय गुरु माराज चेननाई में थे और उनका उपरेशन हो रहा था तो इस बार मुझे पता चला कि नोईडा में गुर्माराज का व्यास पुज़ा मनाया जा रहा है और गुर्माराज अभी देलि में हैं। तो मैं जब नोईडा जब नाम सुना तो मुझे कोई दिफरेंस नहीं दिखा कि नोईडा और नदिया में कोई दिफरेंस नहीं दिखा ते गुरुमारादर प्रणाम मंत्री अच्छे, निताई क्रिपा प्रदाईने, गुरो कथा धामो दाये नगरो ग्रामो तारिने। निताई क्रिपा नित्तानदो प्रभु सब्चे क्रिपालो दयलु। अमी ए जन्न आमादेर परमाराद्ध गुरुमाराद्ध से जयव गुरु महराज का जो पनामंत्र हैं उसमें है निताई कृपा परदाईने गोर कथ धाम अदाय लंगर ग्राम तारीने तो निताई कृपा परदाईने नितानन्द पुरु बहुती दयालू हैं जिनोंने बहुती कृपा परदान किये हैं हमरे गुरु महराज भी बहुती दयाल ते जे तो महाब्रूर्ण एक जन, चैतनम्न महाब्रूर्ण एक जन पार्षात, सिलो प्रोभाद वोलेचेन, गौर्धन जन माने, जन गर्धन माने गौर्धन जन. ते सेशाभी हमादेर गुरुवर्गो, सिलो लोक्नास्थाई महाराज वोलेचेन, जैपतागाष्यामी गुरु महाराज होच्चे चीन माई जगतेर। जखन अनी मायापूर धामे जाल, समुस्तो देव दिविराओ से एइ मायापूर धामे बुस्तिधान। समुस्तो गास, पला, परिवे, सुन्दर, प्रकृति सुन्दर होगे उठे। जखन जैपतागाष्य तो शिलो परुपाजी ने गुरुमाराज के वर्मे कहाये कि गौरो धनजन। गुरुमाराज के नाम था जौन गौरण। तो परुपाजी ने कहा था कि गौरो धनजन। जय पतका माराजे। और जब गुरुमाराशिलो लोकनात सामी माराजी ने कहा है कि जब महाराज चैतना महापुर्व के नित्य पार्सा थे और जब महाराज मायापुर में आते हैं तो मायापुर में जितने डेमी गौड्स हैं जितने देवता हैं सब साथ में रहते हैं गुरुमाराज के और माया� शिलो भक्ति चारो शामी प्रयातो गुरु महाराज बोलेचेन, शिलो जयवादार शामी गुरु महाराज, प्रवुबादेर कास्तेके जे समस्त एइ भक्ति शीखा ग्रहन करेचेन, से गुली प्रत्तेक भक्तेर जनन खोबी ज़रुरी बंग दर्कार सेती। शिलो भक्ति चारू साही महाराज ने कहा है कि जैपातेका सामी गुरु महाराज शिलो परुपाय जी से जोभी उन्होंने निर्देस प्राप्त की हैं, सिख्षा प्राप्त की हैं, वो सारे भक्तों के लिए बहुत जड़ोरी हैं। जेति होच्छे एक कोलीर विरुद्धे � तो और इस कलीजुग के साथ लड़ाय करने के लिए बहुत उपयुक्ते हैं और जब तक उर्महाराज, जैपातखसामी महाराज हमारे साथ रहेंगे हम इस कलीजुग के साथ लड़ते हुए आगे बढ़ते रहेंगे ते एक होन आमी बांगलादेश संपर के जिए तो � तो अखन बरतमाने बांगला देशे गुरु महाराजेर शिष्यो शिष्या प्राय 45 ते 40 आजार। तो अभी गुरु महाराज का जो डिसाइपल से बांगला देश में तो 40 आजार डिसाइपल से बांगला देश में कर देखें। किन्तु गुरुमाहराज प्रथम दिगे जे संस्त परिष्यम करेचेन निजे बड़ अक्टा गारी सिलो, से गारी मदे कौनों ठाकार जागा चिलो ना, तकखण गारी निजे ड्राइब करे से अन्द्रतर पचार करते निजे, बड़ अक्टा गारी, हनें गड़ो गारी तो गुर्माराज सुर्वात के समय में बहुत मेहनेद किये हैं उन्होंने और उस समय कुछ नहीं था गुर्माराज के पास एक बड़ा गारी होता था और उसी में गुर्माराज खुद राइविंग करते थे और उस गारी में ही गुर्माराज रहते थे गुर्माराज खाते थ जैहो काई कहन अमार ब्यक्तिकत जीवने जखन। गुरु महराज, अमी तकखन धाका मंदिरेर पुजारी चीवां। एबं किछो रान्नाव करते पारतां। ते आमी गुरु महराज तकखन, देखो ये मोबाल फोन चीलो न, टेली फोन चीलो। जैसे तकोन होट फ़ोर चीलो एक ना, की कुरे खाबार गरोना रखा जाबी, भोग होयेचे, इचकन मादेरे एक टायमली, बारो टार मादे भोग, ये तो पास मिनीर, दुई मिनीर, एक दिक्षे दुखेते माड़े. केंटु गुरुमार्ज आरच्छेन तकोन अगली थान्ड़ हो ही गईसे। एक तो मिष्ट कोरे, मिष्ट कोरे दियेशी। गुरुमारद एशे, स्राण करलें, स्राण, तर पड़े स्राणेर पड़े, अम्रावन स्वाज़े के गायत्री कोरी, सुझो तीन बार कोरी, ता ना, स्राणेर साथे आन्निक करते है, अर्थात गायत्री करते है, जतो बार स्रा ते इभाबे कोडे पड़े खरम गरव देखचेन अगर सेश एकुल की भोग होयेचे ते गुरुमाराद भोगतो भोगमारे भोग होयेचे बारोटाई ते एकखण एकुली ते तुम्ही जानो ना किचेने रान्नाय घड़े जगनात राखते है जगनात के भोग यही भावे, तहाले जदी मिष्ट कोले प्रसाद होयतो, तहाले तम्हारे एक दिरे भोग लागी, आर भगवान के भोग कस्तो करे रान्ना करते हैं बेना, रान्ना कर बे, केंदा भोग दूबेना, भोग दें वागरो, किंटो एइ सिख्खा दिलेन। तो एक बार में महाराज जी जब धखा मंदिर में थे तो महाराज उस मंदिर में एक पुजारी थे और महाराज को कुकिंग भी आता था और उस समय मॉबाईल नहीं होता था तो टेलिफोन होता था तो इसका कनेक्शन इतना अच्छा भी नहीं होता था तो पाता नहीं चलता थ और क्योंकि दुबारा तो भोग लगा नहीं सकते, टेंपल क्लोज हो गया है। तो उन्होंने क्या किये थे, जो अलड़ी परशाद था, तो उसी को ही मिक्स कर लिये थे इसमें। फिर गुर्माहराज आये गुर्माहराज ने नहाए नहाने के बाद जैसे हमें पता है कि हम तीन गायत्री करते हैं लेकिन गुर्माहराज ने दिखाया ये सिख्षा की हम नहाते समय भी गायत्री करें नहाने के बाद तिलक करने के बाद भी गायत्री कियें तो इस परकरसे ग� दो माराज ने कहा की नहीं गुरु माराज लेकिन हम लोग इसको मिक्स कर दिये हैं। तो गुरु माराज ने कहा की आप किचेन में जगर्ना जी को राख सकते हैं। जगर्ना जी एक सेकंड में एकसेप्ट करते हैं भोग। तो इस तरह से गुरु माराज ने वो सिख्षा दिय ते गुरु महाराज विशेष कोड़े सोईतनमाहा ब्रो बल चे जे की भोजने की सहने की बा जागरो ने अहोर निषी चिन्तो क्रिष्ण बलहो बदो ने ते साफ समय भोजनेर समय चलार समय खावार साफ समय गुरु महाराज ये क्रिष्ण भावना धाकेन जैसे चेदना महा पुरु कहा रहे हैं कि हमें हमेशा किर्षन का जिन्दन करना है। तो गुरु महाराज खाते समय, सोते समय, हमेशा कैसे किर्षन का जिन्दन करना है, वो उन्होंने करके दिखाया है। तो गुरु महाराज पुरुषात पेती पेते आमा के जिग्याश करचे बांगला प्रवाद एक तात। करण उन्ही बांगला आपने जानें को भालो दोखो। बांगला देशे बांगला भाष्याई लेक्षार देन। ते शे जननो बोलछे नाई काज खोई बाज। तुमी जानो? जानो नाई काज खोई बाज। है गुरुमारा शामी तो तक� जदी कौनो कास दा थाके। दुई भावे प्याक्षा कुलने। जे कास ना थाके क्योंकि मौन खोई मता, खोई जमन भाजार समाय बिख्षिप्त है जाये। ए दिके दिख्षारे। कौनो कास दा थाके ले ए जबन मौन बिख्षिप्त है जाये। ए जबन साप समाय से क्योंना कौन सेवाय जुक्त थागबी अर्था प्रसाद पावार समय समय आमादे सेख्षा प्रदान कर लें। गुरु माराज ने एक बांगला जो उनने कहा था प्रवार्ब्स कहा था तो नाई कास खुईद गास कि जब माराज ने माराज जी को पुछे थे गुरु माराज � तो गुरुमाराज ने पुछा आरे आप बांगला नहीं जानते हैं, बांगला प्रोभाव रहे हैं। तो फिर गुरुमाराज ने इसको दो तरह से विख्षा किये थे। उन्होंने कहा कि जब मन फ्री रहता है, तो मन जो है आलाग आलाग जैग में विख्षिप्त हो जाता है ते अमी एक टा लिला बलवो जितायशिरीन मातादरी लेक्षार तेके सुनेच्छी। विशेष कोरे गुरु माहराज, अनियो नीजो बोलेच्छें, आमी जे दिन लेक्षार देई, जे जखोन गुरु माहराजेर कुनो कारोरे जदी गुरु माहराजेर प्रणाम मंत्र � तोकेन एक टा काहिणी बोल शिलें, एक जोन गुरुदेव सिष्यों के परिखा कर चिलें, जे तुम्ही भालो करें इन मन्त्रों कोलें सीखो, एक करो, स्याप सीखो, किन्टु स्याप सीखेचे, गुरुमादर परिखे डेचेन, बोलचा की करें परिखे तुम्ही पास कर यही पाता मने तार मन्त्रो ठीक होयेचे। किन्टो शे एकदम तोटस्ट सुन्दर भावे मन्त्रो उच्छारण करेचे। उच्छारण करले हो शाब पाता गुले जोरे गेचे। तो अखन गुरुदेव बोलचेन। गुरुदेव शे शिष्यो भय बयेगेचे। गुरु� बोल से तुम्ही आमा के सरण करे चिले। है ना गुरुदेव। एइ जनना पाता जहरे गेसे। मानें जीरो। तै जन गुरुदेव के चारा समस्त कार्वाज जीरो। एइ जनना एइ बार जे बलो देखे शाब ठीक हो जाएगे। तखन थेके ठीक ठीक भावे प्रथमे गुरु कृपाच्छारा कौनों के सेजन समस्त गुरुशक्ति। जाई होग। ते आमादिर अनेक प्रिचार आरचे, आमरा आरोष सुनवों। ते आमार भुलत दिख्षमा संद्रति दिख्षि देखवें। एबंग आजके परमारद्ध गुरुमाराजेर प आरो अनेक पॉर्णते चिलो गुरुमाहाज अन्तुरजामी, अमार ब्यक्तिक जीवने से ता परिख, अनेक परिखा है चे, ते से जनना गुरुमाहाज जन आजकेर देने क्रिपा करें, उनारे स्ववब्यास पजाए, जे बाकी दिन गुली आपनार दिनदेश म शक्म समस्त वश्णव देर चरण प्रातना करी, बान्च्या कल्पो तरे भर्षो क्रिपा शेन्द वजपति दानांग पावने वश्णव। So, Maharaj was saying that Guru Maharaj had once said that if I give a lecture and I forget to bow down my Gurus, then that day the lecture is not good. तो एक घटना उन्होंने कहा था कि एक बार एक सिजसे जो हैं गुरू के आज्या से सारे संस्कृत के स्लोको को याद कर लिये थे। और गुरू ने उनका टेश लेने के लिए एक बार कहा था कि आप इस पेर के सामने आके सारे संस्कृत के स्लोको को उचर्ण कीजिये। अगर तो फिर उन्होंने मुल लटकर के आए अपने गुरु के पास और उन्होंने कहा कि गुरु माराज मैं तो इतने संस्कीत जानता हूँ और सब कुछ मैंने अच्छे से रिसाइट किया उसके बाद भी क्यों ऐसा हुआ? तो उनके गुरु माराज ने कहा कि क्या आप मुझे या� जितने भी उनके सांश्कृत के सुलोक्स था वो सब रिसाइट किये और वो पत्ते जैसे था पैसे ही बना रहा। तो इस तरह से गुर्महाराज ने हमें सिखाये की गुर्महाराज की कृपा के बिना चाहे हम कितना भी विद्वान हो जाये वो सब अल्टिमेटली जिर्व है। So we welcome Maharaj by chanting Hare Krishna, Hare Krishna, Krishna Krishna, Hare Hare, Hare Rama, Hare Rama, Rama Rama, Hare Hare. गोराँगा गोरण गोरण गोरंग नित्यानन्दा ने त्यानन्दा गोरंगा गोरंगा गोरंगा कृष्ण प्रस्ताय अभूतले श्रीमाते भक्ति वेदान्ता स्वामेने किनामुने धामस्ते सारस्वाते देवे गोरवानी प्रचायने निर्विषेषा शुन्यभादी आस्त्राच्छाधे सतारने जाय शुरु कृष्ण चैतन्य Hare Krishna पहली बाहर महराश्री को श्री जैपतामाराजी का संग मिला था, 1993 में, नवदी मंदल परिक्रमा के समय में। तब से महराश्रीन सीखा श्री जैपतामाराजी से कि किस परकार से गौरंग नाम को उचाण करना चाहिए। और ये निष्य तुम से एक बहुत ही महतू बोन पड़ाव था महराज़ श्री के जीवन में। और महराज़ श्री के जीवन पहले जैसा कभी नहीं रहा फिर। और नदी मंदल परिक्रमा में महराज़ जी की सेवा हो गरती थी, कृष्णशंदरी महराज़ जी की ड्रामास को � अब अमोगालीला प्रभू को प्रभू करते हैं। वह प्रभू करते हैं। हम माराज जी से सीख रहे हैं, हम उन्हें प्रभू करते हैं। और जो ड्रामा जब भतलोग करते हैं नदी मंदल परिक्रमा में, तो इस से श्रिजयापताका माराज जी को बड़ा आनन मिलता है। परंपु जजाई पताक स्वामी महराज कहा, मैं कहा, मैं आपको एक ड्रामा करें। मैं कहा, महराज, मैं यहाँ लीला नहीं चाहता। महराज कहा, मुश्किल नहीं। बैठिये। आपलो बस बैठिये। और जितने नवद्वी मन्दो परिकर्मा जितने भक्त आयो थे मानो सबके सब स्थब्दे रह गए। और महाराज को साई लिला समझाई। जितने नवद्वी मन्दो परिकर्मा जितने भक्त आयो थे मानो सबके सबस्थब्दे रह गए। और महराश्ची ने साई इला बताई। और उसके बाद फेर ड्रामा किया गया भक्तों के द्वारा। और जितने वहाँ पर वरिष्ण वैश्णावगन थे, वो सब के सब बहुत प्रसन हुए। तो महराज हरी भद के साथ बड़ा व्यक्तिकत सम्मन बना के रखते हैं। विश्वा हरी नाम उत्सव के लिए भी श्रीजय पिताँ का महराज जी ने महराश्री को बहुत पिरिणा दी। तो पश्य भारत के जब दिविशन मीटिंग होती है, तो वहाँ पर शुरु जयपता का महाराज जी ने महाराज को आमतरित किया। और वहाँ पर वर्ल्ड होली नेम फैसिवल जो था, उसके उपर प्रेज़ेंटिशन दी महाराज जी ने। तो 17 सेप्टेम्बर से 23 सेप्टेम्बर से हर साल कैसे होती है। और शीला प्राभुपाद जी किस पिकार से हरी नाम के सबसे महानतम प्रवर्तक हैं, इसके बारे में चर्चा होती है। और पूरी प्रेजन्टेशन के बाद, शुरु जयवदागा महराज, महराज जी के पास आ और उन्होंने सर पे चुआया अपने सन्यास जंड़ा को महाराज जी के शीश पर। और फिर महाराज बहुत सशक्ति करने महसूस हुआ। उसके बाद से फिर कीर्टन मिनिस्ट्री उसका शुभारम हुआ। और इस पकार से कई ही भक्तों को, जैसे महराश्री चैदे को, बहुत अधिक पिरेणा मिली। एक भक्त है जगत कीर्तनांद्भू, जो की यूकिय में है, और कीर्तन मिनिस्ट्री के अंदर उनका बहुती महत्तपूरी याऊगदान है, और वो कीर्तन का विश्व व्यापी प्रचार पसार कर रहे हैं। तो श्री जयपता का महाराज जी की सच्चति करें और उनकी कृपा की वाज़ा से ही हम हर पग को भवान श्री कृष्ण की और ले पा रहे हैं। So, I was, before I was Shri Krishna Chaitanya Swami, my name was Eklavya Das Brahmachari. So, महाराज जी का नाम पहले था एकलवय दास ब्रह्मचारी, बाद महाराज जी का नाम पढ� तो सन्यास के लिए सबसे पहले प्रतिनिदी थे In those days, the GBC was very strict about the sanyas candidates और उन दिनों में सन्यास के लिए बहुती जदा GBC सक्ती से चुना करती थी बक्तों को And the sanyas ministry was very strict और सन्यास मिनिस्ट्री उस वग बहुत अधिक स्ट्रिक रहती थी। It's actually easier to become the President of the United States than a Sanyasi in ISKCON. It's easier to become the President आगर किसी कुसी मंदिर का प्रेज़िन्ड मनन हो वो आसान है, लेकिन सन्यास केंडिड मनन बहुत अधिक कथिन कारे हैं। तो वहाँ पर शुरृ जैपतका महराज जी का साहने दे प्राप्त हुआ महराज श्री को। महाराज नी को बुलाया क्या इस साल आपको सन्यास दिया जा रहा है? तो महाराज ने बोला नहीं। तो महाराज ने बोला श्रीजबयदा कमारा ने ऐसा क्यों? तो महाराज ने बोला श्रीजबयदा कमारा को क्योंकि मुझे बताये गया कि अभी मैं इतना विनम्र नहीं हूँ मैं तुम्हारा साथ दूँगा। और तो जी बी सी मीटिंग में महाराज जी का नाम आया तो कुछ भक्तों को उसमें आपत्ती थी और शुरृजय पताँ महाराज जी ने अपना हाद उपर किया तो गरीब आदा घंटा इसपे चर्चा हुई कि सन्यास देना है, नहीं देना है। तो फिर उसमें निशकरशी निकला, ठीक है इस साल नहीं, लेकिन अगले साल तो पक्का सन्यास दिया जाएगा। हरी बोल। सो महराजी बता रहे है, श्रृत जैपताग महराजी कृपा से ही म अपने जीवन के हर भग पर करतकिता विक रहे हैं, महराज श्री, शुरृज्या पतांग महराज जी को। एक समय महराज जी थे, तो उनके पास एक शुष्य आये। वो भगत आखे बोला महराज जी को, शुरृज्या पतांग महराज को, महराज मुझे कृपा करिये और तो गुरुमार्ज कहा, क्योंकि मैं तुम्हेरे कृपा करते हूँ। वह गुरुमार्ज का दूटी है, तुम्हेरे गुरुमार्ज के लिए कृपा करने के लिए कृपा करने के लिए कृपा करने के लिए कृपा करने के लिए कृपा करने के लिए कृपा करने के लिए कृ� तो हमारे बड़ा सुभाग्य है, इतना विशाल हृदे वले, इतने उदार सुभाव के श्रृय जैवता का महराज हमारे जीवन में आये हैं। तो मुझे परंभुज जय पतक स्वामी महाराज's व्यासपुज़ा के लिए, परंभुज जय पतक स्वामी महाराज's व्यासपुज़ा के लिए, मुझे परंभुज जय पतक स्वामी महाराज's व्यासपुज़ा के लिए, मुझे परंभुज जय पतक स्वामी महाराज's व्यास परंभुच जाये पुदाखे स्वाभी महराज की जाए। शुदा प्रामुपाद की जाए। हारे कृष्णा तु यू। हारे कृष्णा तु यू। हारे कृष्णा धीर गुर्हु महराज। हारे कृष्णा तु यू। हारे कृष्णा तु यू। हारे कृष्णा जी गुमाराज हारे कृष्णा तु यू हारे कृष्णो हारे कृष्णा कृष्णा कृष्णा हारे हारे हारे रामा हारे रामा राम रामा हारे हारे हारे कुष्ण, हारे कुष्ण, कुष्ण, कुष्ण, हारे, हारे, हारे राम, हारे राम, राम, राम, हारे, हारे, परंपुज्य जाय प्रतक्य स्वामी महराज की जाय। सुन प्रमुभाई की जाय। सामवेथ बक्त विन्द की जाय। जाय प्रतक्य स्वामी महराज व्यासु पुज्य महा महोच्चव की जाय। को प्रेमणन्दे हरी हरी वो। श्री कृष्ण चेतने स्वामी महराज जी की। तो महराज के लिए महराज के लिए अपने खुशकबूरी करते हैं। महराज के लिए अपने खुशकबूरी करते हैं। महराज के लिए अपने खुशकबूरी करते हैं। महराज के लिए अपने खुशकबूरी करते हैं। महराज के लिए अपने खुशकबूरी कर आश्लीक। और अपने ग्लोरियस दिवोटी का नाम है शुतकिर्ती प्रभुजी। हरी वो। हम सब जानते हैं कि मैंने वाद शुतकिर्ती प्रभुजी, वो श्रील प्रभुपाद के लिए ग्लोरिफा है। हमने लिलाज श्रील प्रभुपाद के लिए देखते हैं। क्य और अगर शुतु कीर्ती प्रभुजी है, अगर शुतु कीर्ती प्रभुजी है, अगर शुतु कीर्ती प्रभुजी है, अगर शुतु कीर्ती प्रभुजी है, अगर शुतु कीर्ती प्रभुजी है, अगर शुतु कीर्ती प्रभुजी है, अगर सो इसलिए ऐसे शुतु शुद्ध भक्तिय मुखार्विन से सुनना निशित रूप से बहुती सुभागी की बात है। सो प्रभुजी का स्वागत करेंगे हम चैन्टिंग हरे कृष्णा, हरे कीर्ती कृष्णा, प्रभुजी कृष्णा, कृष्णा, हरे हरे, हरे राम, हरे राम, राम, राम, हरे हरे। और म Hare Hare Krishna Nama Om Vishnu Padai Krishna Prasadaya Purtale Srimati Bhaktivedanta Swami Nithyanamane Namaste Saraswati Devi Gauravani Prachani Nirvishesha Sanyavari Bhaskacha Desa Dharani Pancha Kaupa Tirubhishcha Kripa Sundubhya Eva Cha Patitnam Bhavane Bhio Vaishnave Bhio Namo Namaha कार्टीक 1972 प्राभौपा वो विन्डावन के लिए कार्टीक के लिए प्राभौपा वो विन्डावन के लिए कार्टीक के लिए प्राभौपा वो विन्डावन के लिए कार्टीक के प्राभौपा वो विन्डावन के लिए कार्टीक के लिए प्राभौपा वो कहा, श्रील प्रावपाद, मैं आपके चलनों में आपके वो विन्डा चलनों में आपके चलनों में आपके चलनों में आपके चलनों में आपके आपके चलनों में आपके चलनों में आपके चलनों में आपके चलनों में आपके चलनों में आपके चलनों में आपके चलनों में शुरृजय पता महराज भी ऐसे ही है, वो हमेशा चलायमान है। पिछले महीने प्रभुजी और शाखा माते जी मायापूर धामे थे। सो महराज जी से मिलने का प्लान था, तो उन्हें कहा बिलको जी बी सी मीटिंग के बाद मैं चुरंद आप दोनों से मिलूंगा। लेकिन � तो अगर एक एक वीडियो के लिए, विडियो के लिए, विडियो के लिए, विडियो लिए, विडियो के लिए, विडियो के लिए, विडियो के लिए, विडियो के लिए, विडियो के लिए, विडियो के लिए, विडियो के लिए, तो जो विडियो बारा बन है, हर बारा बन में महा प्रभुगे चर्ण पादुकाव को स्थापित हिया गया। वहाँ जनानिवास प्रभु भी थे। लेकिन कुछ ऐसा विवसा होई कि वहाँ पर भी प्रभुघी शुरी जैपता का माराजी से नहीं मिल पाए। तो आपके लिए चैसेंगे चैपताको महराज's लोड़स फीद में, मैं आपके लिए चैसेंगे चैपताको महराज's लोड़स फीद में, मैं आपके लिए चैसेंगे चैपताको महराज's लोड़स फीद में, मैं आपके लिए चैसेंगे चैपताको महराज's लोड़स फीद में, उन्निस्तुतिहत्तर में मायापुर्धाम में प्रभुजी का पहली बार जैपटाका महाराजी से मिलना हुआ था। और पहली बार पिर महाराजी का सुभाव देखनी का मौखा मिला। तो आँ उस पक दो भक्ते थे, एक थे भावनान्द पिभु, और दुस्ते थे जैपटाक शुरु जैपिताका महराज वो अपने सेवाव में ब्यास रहा करते थे। प्रावपाद पूछा करते थे कि अधार शिलाब देखा जाये तो भला क्या कारे कर रहा है? प्रावपाद पूछा करते थे कि अधार शिलाब देखा जाये तो भला क्या कारे कर रहा है? प्राव तो प्रभुपाजी जब आये तो प्रभुपाजी से मिलने के लिए लोटिस बिल्डिंग में भक्त लोग गए। श्रियपताका महराज जी हमेशा बड़ी प्रखरता के साथ उत्साह पूर्वक श्रियपताका जी को प्रार्थना आरभित क्या करते थे। प्रभुपाजी मायापूर। तो कुछों को सिंदे होता का मह है कि प्रावापाड़ जी ने बला मायापूर धाम में क्या किया। तो सारी भक्त थे, श्री जयपता कमारा, सब सब मिल करके बहुत प्रिश्णसा कर रहे थे कि श्री जयपता कमारा जगी कि आपने कितना प्रिश्णसने कारे किय लेकिन शुरृ प्रावपाद जी जो है जितने भी प्रशंसा हुआ करती थी उनसे बिल्कुब प्रभावित नहीं होते थे तो जो भी प्रशंसा आएगी उसको आगे बढ़ा दिया करते थे तो हम लोग तो यहां प्रयास कर रहे हैं लेकिन कृष्ण ही है जो सारी विवस्ता क तो हमेशा इस बात के लिए महराश्री चिंदा करते थे कि क्या भगतों के लिए रहने का उच्छे स्थान है, क्या उनको प्रसाद इत्यादी मिल रहा है। तो उन्हें पताया कि किस प्रकार से उन्हें गुरु महराश्री भोगपाद, अचारेगान, जो भगत लगवा है, सब तो तब उस वक्त ये भुष्णवानी हुई थी कि एक बहुती ऐसे विशेश विक्ती आएंगे, जो कि सबको आकर्षित करेंगे, मायापुर धामें उनको इकठा करेंगे। औफिश्णर प्रावपाद जी ने एक ऐसी बात बोली, जो कभी भी पुबलिक में नहीं कहा करते थ वो कहा हो सकता है मैं वो विद्धी हूँ। तो पांच शब्द वो ने कहा है हो सकता है मैं ही हूँ। और ये कहने के बाद वो ने फिर जै पताका माराज के और देखा। आप एक बड़ा विशेश का केला होता है, जो आप यहाँ उत्पादन करते हैं बेंगाल में। और जैपताख प्राभुपाद कहा, हाँ, बिल्कों सही काशल प्राभुपाद। और उसके बाद शुरुपभाद जी ने मौका ही नहीं दिया कि उनको और महिमागान कोई करें। और तो एक बारे में, वो चैपटाका का कहा, तो आपने केले के लिए हैं। तो शुरुपभाद चैपटाका का कहा, सुमामी, क्या आपके बास बड़े विशेश इसम के केले हैं वो हमें अपने लोगों के लिए देखा रहा है। वो हमें अपने लोगों के लिए देखा रहा है। हमें अपने लोगों के लिए देखा रहा है। हमें अपने लोगों के लिए देखा रहा है। हमें अपने लोगों के लिए देखा रहा है। हमें अपने लोगों के लिए दे� तो एक समय गंगा सफारी में, 2004 की बात है, सो महराज श्री के संग में थे, शुरृतकिर्ती प्रभुजी. तो फिर महाराज ने बोला प्रभुजी को कि हम लोग देव प्रयाग की और जा रहे हैं. प्रभुजी ने कहा, आरे ये तो बहुत मेरे लिए बड़ी प्रियाग स्था तो आपको वहाँ पर पहुँचने के लिए क्या बसों की आवश्यता पढ़ेगी? अलखनन्दा और भगरती दोनों जहाँ मिलते हैं, तो वहीं से फिर आगे गंगा आगे बढ़ती हैं. सो महराज जिगेश देव प्रयाग में वहाँ पर पहुँच करें सेवा के लिए तयार ह और हमें अपने लिए देखने के लिए देखने के लिए देखने के लिए देखने के लिए देखने के लिए देखने के लिए देखने के लिए देखने के लिए देखने के लिए देखने � और एक वहाँ पर बहुत भी विशेष क्रिया जो की जो की बहुत प्रिये प्रभुजी को यह है कि सारे भख्त लोग एक साथ घंगा में गए और समने मिल करके वहाँ गायतरी जप किया। He has done so much for so many in our ISKCON society. तो वहाँ से भी दिखा जाया है शुरे जैपताका महराज की उपस तो प्रभु जी बदा रहे हैं, यहाँ पर उनकी मात्सरश्री भी है, उनकी पत्ने भी है, तो उनकी बच्वन की दिनों से श्रिषली जैपतागा महराज जी ने उनकी उपर कृपा की है। He is the ultimate personalist. तो दिखा जाए तो व्यक्तिक आदान प्रदान करने में महारत ही है महाराज प्रभु जी की पतनी और उनका जो परिवार है, 1988 ही थी बात है, तो आर्मेनिया से उनको शिफ्फ होना पड़ा रश्या की और। तो परिश्टिती को देखते हैं, शुरु जैपता का महराज येने विक्तिक रूप से बहुत स्नेह दिया प्रभुजी का प्रदिनी विश्णाका माता जी का उनकी परिवार को। तो अच्छा जब दिल्ली में होते तो महराज प्रभुजी को आमतिल करते थे लंच के लिए। अगर महराज के लिए प्रशादम के लिए बहुत प्रशादम प्रशादम प्रशादम प्रशादम प्रशादम प्रशादम प्रशादम प्रशादम प्रशादम प्रशादम प्रशादम प्रशादम प्रशादम प्रशादम प्रशादम प्रशादम और मायराज आपको देखते हैं और वो भक्तों की प्रशात के लिए आपको देखते हैं कि वो भक्तों की प्रशात के लिए आपको देखते हैं। और उसके लिए हमारे भक्तों की प्रशात के लिए आपको देखते हैं कि वो भक्तों की प्रशात के लिए अपने आपको परवाद, यह एक प्रहुपा देखते जी के लिए प्रहुपा जी के ह लिए प्रहुपा जी के लिए प्रहुपा जी के लिए प्रहुपा जी के लिए प्रहुपा जी के लिए प्रहुपा जी के लिए प्रहुपा जी के लिए प्रहुपा जी के लिए प्रहुपा जी के लि प्रभुपाजी में एक बहुती सुन्दर जो गुण था प्रभुपाजी के अंदर कि एक बच्चे जैसी मासूमे थे श्रील प्रभुपाजी में। तो बच्चे के समान मासूम, बच्चे के समान नटखट नहीं। तो बहुती साद्गी भरा सुभाव था श्रृपुपात जी का, जोकी बहुती अद्भूत था। बिल्कुल वही गुण है, जो किस्तु जैपताका माराज जी में भी है। बहुती अद्भूत है माराज। तो जैसे प्रहुपा जी कारेकलाप है, वैसे ही शुरृ जैबता कमारी जी कारेकलाप है, और अपनी क्रियाओं से वो सबको सिखा रहे हैं। सो महराज जी के साथ, जब व्यक्ति के दूरुप से आदान प्रदान किया जाता है, तो एक बच्चे के समान मासूमियत और साद्ग जब आप सोभी आतुर हैं महाराजी का संग करने के लिए, ऐसी प्रभुजी कहा रहे है, मेरे हुदे में बहुत उत्खंटा है महाराजी का संग प्रात करने की। यह क्यों करता है? एक एलेवन्थ एक सेकिन्द? संस्कृरित? एक एलेवन्थ एक सेकिन्द। लव मात्रा। यह तो लव मात्र, एलेवन तुन सेकिन, शन का भर का इतना संग मिल जाये महाराजी का, तो मारा जीवन सिद्ध हो जाये. तो मारे दिना सुभाग है कि हम कितने समय से महाराजी का संग प्राप्त कर पा रहे हैं। जाय, जाय पताकमहराज की जाय, श्रील प्रावपाद की जाय So, bahut dhanyavaad dena chahenge hum. We are so very grateful to Shrutakirti Prabhu ji, that Prabhu ji came and shared some of his personal exchanges with Shri Jaya Padakaswami Maharaj. Haribo! Okay? He is known as Loknath Maharaj ji, if may kindly agree to come and bless us. He is known as Loknath Swami Maharaj Ji ki Jai! हम जानते हैं पूरे विश्व भर में हरी नाम का प्रचार प्रसार किया हैं महराजी ने कहीं हजारों लाखों किलोमेटर चले हैं महरापद यात्रा में गाउं गाउं जा करके नगर नगर ग्राम ग्राम जा करके हरी नाम का प्रचार प्रसार किया हैं श्र एक समय एक भक्त आया था थोड़ा पॉप सिंगर था तो उसे गुरु पुजा कवाई गई तो उसने वेस्टन स्टाल में कहा है श्री गुरु चराना पद्मा केवाला भकती सद्मा हेः हेः श्री गुरु something like that तो प्रहुपाजु को पसंद नहीं आया प्रहुपाजु ने कह और फिर जब शिलोकनाद महाराज जी ने जब पनी अपनी यूनीक अवाज में श्री गुरू चारान पद्मा जब ये सुना प्रवभाज ने आप प्रवभाज ने बुला that's what I call कीर्तन so महाराज जी हमारे बीच में है महाराज से सुनना हमारा बड़ा सुभाग्य है so let's hear the glory of Sh इसलिए इंग्लीश करना चाहते हैं, हिंदी? यह मायापूर्ट टीवी है। मेरा सर्वप्रताम। जैपता को साही महराज के चल्णों में मेरा प्रणाम। और साथी साथ आपके चल्णों में प्रणाम। वान्शा, गल्बतरु, हिष्य, कृपा, सिंधु, भी, भुजब। वदिदानां भावनें प्यो वैश्णमें प्यो नमा नमा हरी ही I love Jaipur, thank you so much. क्या हुआ? आज जैपदा कासा है महराज का विशेश व्यासपूज्या दिन है। दि सेवन्दी फिथ व्यासपूज्या महोत साव। परिवाव। जिसकी तयारिया मायापुर में धूम धाम के साथ, वैसे कई महिनों से तयारी कर रहे थे या? और महराज को वहाँ जाना था, खुब जाना चाहते भी थे. किन्टु डॉक्टर्स डिड नान अलाव, नो परमिशन तो ट्रैवल तो मायापुर वसारे मायापुर के महराज के millions of followers and friends they are deprived वो वन्शीत हो गये और महराज के संग से आप सभी लाभानवित होने जा रहे हैं लव मात्र सादो संगे उनका loss आपका और फिर NCR में उनके पास और कई choices थी कहा वे celebrate कर सकते हैं तो उन्हांने अस्कौन नोईरा रादा गविन्द मंदीर के उसका चैन किया और इसे के साथ honorable, honorable महराज जो यहां पधारेंगे उनके उपस्थिती से हमें अपने समझेंगे। आप नहीं समझेंगे। आप नहीं समझेंगे। आप नहीं समझेंगे। आप नहीं समझेंगे। आप नहीं समझेंगे। समझेंगे। आप नहीं समझेंगे। आप नहीं समझे प्यास पूजा महसौफ। प्रसनली, फिजिकली वो सेलेबरेशन हो रहा है वहाँ मायापूर। और साइमल्टेनिसली थड़ा फिजिकल प्रेजेंस में होना उसका अधीक विशेज महत्वा है के नहीं। वाह। मैं अभारी हूँ श्रील प्रभुपात का भी जिन्नों ने मुझे पर श्रृत के दी जैसे प्रभु जैसे और कई सारे गुरु ब्राथा मुझे दीये और उसमें जैपता का महराज जैसे भी गुरु ब्राथा गौर्ड बिदर मुझे दीये श्रील प्रभुपात का इसलिए � जय पताका! जय पताका! जय पताका! जय पताका! जय पताका! जय पताका! जय पताका! जय पताका! जय पताका! जय पताका! जय पताका! जय पताका! जय पताका! जय पताका! जय पताका! जय पताका! जय पताका! जय पताका! जय पताका! जय पताका! जय विक्ट्री फ्लाग है इसको आनके जय पता का महराज। � Such a nice name. परम विजययते स्री कृष्ण। परम विजययते विजय। All glories to Sankirtan movement of Chaitanya Mahaprabhu. तो वो भी जै और या जै, जै पता का. Someone help me. जै पता का महाराज, of course. उनका जन्म तो... Was he Canadian or American? Huh? Canadian, okay. क्या हुआ? कम उम्र में ही वे जौन किये हरे कृष्णा मुहुमेंट को. तुरंथ ही उनका हरी हरी बगवान के नामों से इतना प्रेम वे करने लगे वो के नाम से और इस नाम का बड़े जोर जोर के साथ उच्छ स्वर से कीर्तन उर्चारन करने की उनको उनकी आदत थी या उनकी हौबी थी या उनकी पसंद थी मंदीर में नहीं मंदीर के बाहर भी वे जोर जोर से पुकारते चिलाते हरे कृष्णा हरे कृष्णा कहते हुए वहाँ के लोग पडोसी लोग थोड़े परेशान थे तो फिर प्रवुपात ने कहा कि मैं तुम्हे ऐसे स्थान भेजूंगा जहां तुम जितना चाहे जोर से चिलाओ पुकारो भगवान का नाम और कोई शिकायट नहीं करेगा। रो स्थान था। माया पुरधाम थे। इस परकार सिलेक्शन हुआ, महाराज को शिफ्ट किये, from Canada, America to Maya Purudham. और ये बात भी प्रसिद है, मैंसे पहले तो कोलकटा के Temple President थे हैं और धीरे धीरे उनको GBC भी बने चैपदा का हमारा इसे वना अधर फुर्स्ट GBCs to be appointed और इसे गनने भी वना अधर लास वान्स तू कहीं मेरे God Brothers हैं वो रिजाइन भी इस्तिफा भी दे रहे हैं जे पता का महाराज इस अन्स्टापेबाओ। कर्षिलर पहुपद जे पता का महाराज को मायापुर्धाम दिये और कहे कि अभी इसका विकास का डेवलप्मेंद तुम करो। तो तब से महाराज लगे हुए हैं। इसको अनका जो हेड़कॉर्टर मायांपूर है उसी को जैपता का माराज ने अपना स्वयम का हेड़कॉर्टर बनाया। बंगाली भी सीखे माराज। माराज वैसे he is a linguist, कई सारी भाषाय जानते हैं, including Bengali and Spanish and this one and that one. माराज पोयट भी है। यदि प्रभुपाद न होईते तबे की होईते। आप सुनेगा। वर्ल्ड फेमस गीती महराज की रचना है। जिसमें उनने अपने भाव व्यक्त किये है या शिलाप्रभुपाद के प्रती जो स्नेह है। वो बिल्कुल स्पश्ट ही है। जैबेदा का माराज और मैसेल्फ। तूलना तो नहीं कर सकते हैं, पर हमें एक पूर्वार हैं। और हमें एक पूर्वार हैं। अगर आपको परवाद परवाद परवाद परवाद परवाद परवाद परवाद परवाद परवाद परवाद परवाद परवाद परवाद परवाद परवाद परवाद मैं जब मायापरो फेस्टिवल जाया करता था, हर साल। एक तो महराज है, जैपदा का महराज। He did not miss any Mayapur festival. No Mayapur festival he missed. I think maybe he missed one some years ago. वो लोस आजिलिस में थे, बेमारी के कारण. But he attended most of the festivals वही बात मेरी भी है। I also did not miss any festival in Mayapur. तो हम जब मायापुर जाते थे, बंबई से, और कहां कहा, मायापुर festival, तो महाराज हम को, हम एक दुसरों को परणाम करते हैं, वानच्छाकल पतुर्विष्यकरिपा सिंदुबेवजबजदाना भावने मेवैश्णव और दोनों भी जब खड़े हो जाते हैं, माराज भी और मैं भी, तो माराज मुझे आलिंगन देते। And he is a tall. आलिंगन वैसे पकड़ देते। मैं तो ऐसे लटके। छोड़ो, छोड़ो, leave me, leave me. This is a big struggle too. जब जैपता का महराज के अनुभव करते रहे हैं। यह पहली मार मिलते थे। जब हम जब हम जब हम जब हम जब हम जब हम जब हम जब जब हम जब हम जब जब हम जब जब हम जब हम जब हम जब हम जब हम हम जब हम हम जब हम जब जब हम जब हम जब हम जब हम जब हम जब हम ज He was initiating spiritual master. हम नहीं थे, मैं नहीं था तो उन्होंने हमारे निताइका और सुन्दर डीटी का प्राणप्रतिष्ठा संपन्नंगी हाँ, like that हम लोग 18 months के लिए यात्रा कर रहे थे मैं तो सब समय रहा करता था महाराज समय समय प्राया करते थे अने फाइनली हम लोग निताय गर्सुन्दर दीडी के साथ मायापुर पहुंचे। चेतने महापुर्भू का 500th birth anniversary, 5th centennial अब चेतने महापुर्भू सारे सुलसार भरके भक्तों के साथ हमने मनाया। असे पदयात्रा को वहाँ रुखना तो चाहिए था, वही तो प्लैन था कि हम लोग द्वारका से क मायापुर पहुँशेंगे। अच्छा ये यात्रा की अनुमती कहो या resolution in favour of this परिक्रमा उस में भी जैपता का महराज का he was party to that decision governing body commission उस में भी महराज की leadership से ही ये परिक्रमा शुरु वही और संपन भी हुई I am very grateful महराज के इस परीक्रमा पद यात्रा में इंट्रेस के लिए Anyway, इसके पीछे Okay, I will not say it. तो हम लोग जो पदियात्र करते हुए, निताय गर्सुन्दर के साथ मायापुर पहुंचे, तो जब हम तो पदियात्री हम रुखने का नाम नहीं ले रहे थे, हम रुखना नहीं चाहते थे, वह नहीं चाहते थे, वह नहीं चाहते थे, वह नहीं चाहते थे, वह नहीं चाहते और हम चाहते थे कि निताय गुर्संदर को हम ले जाएंगे। There was a big battle, a fight, a friendly fight between myself and Chai Pataka Maharaj, and it went on for quite some time, for days and weeks we were going back and forth. वे निताय गुर्संदर को चाहते थे माया फूर्म रखना, और हम निताय गुर्संदर को ले जाना चाहते थे। तो अगर महराज ने कहा, मैं तुम्हारे लिए और एक डीटी की विवस्था करता हूँ। तो यह डीटी जा रहेगी, और नई डीटी तम साथ में ले जा सकते हो। तो यह करता रहा था। चेविदागा महराज। He is what? People's man? People's person? They say he is people's person. He is people's person. Or maybe he is common man's person also. उनका प्रेम् स्नेह सभी के साथ सभी भक्तों, शिष्यों के साथ जायद यही कारण हुगा प्रोपाद ने कुछ हिंड दिया था तुम पचास हजार शिष्य बनाओ इसे कुछ सकेद बिला था महराईज इसे कुछ सकेद बिला था महराईज कुछ सकेद बिला था महराईज कुछ सकेद सिक्स्टी! और बिला वो पीछे चोड़ था मह गया है। 50 को पीछे चोड़ के अब 60 थाउजन। तो वो पीछे चोड़ के 60 थाउजन। तो वो पीछे चोड़ के 60 थाउजन। तो वो पीछे चोड़ के 60 थाउजन। तो वो पीछे चोड़ के 60 थाउजन। तो वो पीछे चोड़ के 60 था� Chaitanya Mahaprabhu ka movement is a congregational movement of and for the congregation. Maharaj iskaan ke Governing Body Commissioner GBC ke saath, congregational development ke minister hai aur around the world unhe itna saara congregational development का कारिय किया है। नाम हर्ट का प्रचार भक्ति ब्रक्ष का प्रचार जो भक्ति विनो ठाकुर की योजना थी नाम हर्ट का प्रचार सर्वत्र प्रचार उसी के साथ हरे कृष्णा हरे कृष्णा कृष्णा कृष्णा हरे हरे हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे का प्र� इसमें जैपता का महाराज का बहुत बड़ा योगदान है He gets lion's share जहां तक इस movement को congregationally उसको फैलाना और लोगों गेहे गेहे जने जने लोगों तक जन जन में पहुंचाना इस हरे कृष्णा movement को अंदोलन को आप सब जानते हों। दुर्देव सेख। प्रोपा महराज आप सब जानते हों। दुर्देव सेख। प्रोपा महाराज आप सब जानते हों। दुर्देव दुर्देव सेख। प्रोपा महाराज आप सब जानते हों। दुर्� वो अच्छा नहीं है। परवाष्ट करने के लिए, परवाष्ट करने के लिए, परवाष्ट करने के लिए, परवाष्ट करने के लिए, परवाष्ट करने के लिए, परवाष्ट क� आज प्रातकाल को भी मैं कह रहा था. हरी नाम जूम मंदीर में हरी नाम जूम मंदीर में में हरी नाम जूम मंदीर में हरी नाम जूम मंदीर में हरी नाम जूम मंदीर में हरी नाम जूम मंदीर में हरी और टापिक जैपता का स्वाही महाराज ही था। � मैं जैपता का महाराज के लिए कहा था। मैं जैपता का स्वाही महाराज के लिए कहा था। मैं जैपता का स्वाही महाराज के लिए कहा था। मैं जैपता का स्वाही महाराज के लिए कहा था। मैं जैपता का स्वाही नहीं करने के लिए करने के लिए करने के लिए करने के लिए करने महाराज क के लिए करने के लिए करने के लिए करने के लिए करने के लिए करने के लिए � इतने सारे समच्चाओं को फेस करने वाले शायद जैपरता का महाराज यह अकेले हो सकते हैं। आशुद, आशुद, आशुद, आशुद, आशुद, आशुद, आशुद, आशुद, आशुद, आ अगर आप मुझे अपने आपने आपने आपने आपने आपने आपने आपने आपने आपने आप� He attends all the GVC, you know, meetings. He is active on all fronts. Whether it's a Congregational Development Ministry, की सेवाय है, He is initiating disciples and taking care of those disciples. या टीवो वीपी का निर्मान का कार्य है, He has GBCs, he is also Bureau member in India. It is a big list, Maharaj's case. यह सारी जिमयदारिया महराज सुचारो ढंग से लगन के साथ निभा रहे हैं। I think amongst many other legacies, जिसको कहते हैं, this is one legacy that Maharaj is going to... He has already left it behind. और ये उदारण सारे समस्त समसार के समक्ष, अब जो डिफोर्डीज हैं, और बविष्य में भी जो भी आएंगे, रहेंगे, और इन सब के समक्ष जैबता का महराज का उदारण एक जुलन्द उदारण है, एक जुलन्द उदारण है, एक जुलन्द उदारण है, एक जुलन्द उदारण है, एक जुलन्द उदारण है, एक जुलन्द उदारण है, एक जुलन्द उदारण है, एक जुलन्द तो मुझे जैपता उदारण ह का महराज करता है। उनकी 75th birthday anniversary आज है तो मेरी भी है 75th ही, कुछ माहिनों के उपरान। तो वयो व्रद्ध के द्रिश्टी से तो कुछी महिनों का अंतर है, थोड़ा अंतर है, जादा अंतर नहीं, वयो व्रद्ध के द्रिश्टी से. लेकिन एक वयो व्रद्धता होती है, दूसरा ध्नियान व्रद्ध, ध्नियान व्रद्ध, spiritual maturity and responsibility, etc. उस दृष्टी से मैं बहुत पीछे हूं। I respect, I honour Maharaj. I personally take inspiration from him. And on this occasion, we have been praying and just continue to pray for Maharaj's health, I would like to see him. I am sure you would all like to see him. A long life, an active life, not just long life, active life. So he is known for his activities, so for the pleasure of Guru and Gauranga, that is Srila Prabhupada. और गोरांग, अगर वो अपने लिए हैं। यह प्रार्थना करने के लिए अपने प्रार्थना करने के लिए हैं। अपने प्रार्थना करने के लिए हैं। अपने प्रार्थना करने के लिए हैं। अपने प्रार्थना करने के लिए हैं। अपने प्रार्थना करने के लि हरे कृष्ण, हरे कृष्ण, कृष्ण, कृष्ण, हरे, हरे, हरे राम, हरे राम, राम, राम, हरे, हरे, हरे, हरे, हरे, हरे, हरे, हरे, हरे, हरे, हरे, हरे, हरे, हरे, हरे, हरे, हरे, हरे, हरे, हरे, हरे, हरे, हरे, हरे, पर ठीक है वरत है यार इतनी हरे, थंदी थालियां क्या करते हैं वरत लोग अच्छा आपने से कौन कौन है जो शलृ जयपता का महराज जी से प्रेम करता हैं शाबाश बहुत बढ़ी है क्या आभी फोटो खीच की आप लोगों की महराज जी यहाँ पर अभी आ रहे हैं तो जैसी म सो महराज जैसी गाड़ी में आएंगे सब के सब हम जाएंगे और महराजी गाड़ी को घेर लेंगे और महराज को गाड़ी से भार नहीं निकलने देंगे ऐसा करना हैं? ऐसा बिलकूल नहीं करना हैं जिसने भी ऐसा किया उसको क्लोरोफोम सुघा करके किनाले कर देंगे अब � तेके जी यहाँ भी कई दिवोर्टीस हैं जो सीडी बैठे हुआ हैं सीडी पे मत बैठे हैं पीछे DVD पड़ी हुआ है और चेर्स पड़ी हुई हैं उस पे जाके बैठे हैं ताके रस्ता खारी हो सके और भगलोग यहां से आ सके तेके जी दूसरा यह है महाराज है कि आ रहे है कोई भी महराज के पास नहीं आगा। जिस जगाँ पर आप बैठे हुए हैं, उसी जगाँ पर आपको बैठे रहना हैं। आपके पास हो सकता है कुछ उपहार हों। आप महराज के लिए कोई फूल वगारा देख करके आए हों। आप महराज के पास पहुंचें। महराज जी, जितने भी आपके पास गिफ्ट्स हैं जो कि आप मारे को देना चाहते हैं जो दक्षिना आप मारे को देना चाहते हैं पीछे स्टॉल है वहाँ पर आपने गिफ्ट्स दे सकते हैं और वो महराज जी को पहुंचेंगे ऐसा है नहीं कि आपने दिये वहाँ से हमने अपनी जिम म कोई नहीं करेगा, ना प्रभू ना माता जी. सो सब के सब जहांपन हैं, वहीं बैठें और हिर्दे से महराज के चणणों को चुएंगे। हिर्दे मतलब Bluetooth connection. दूर से रह करके. Physical connection जो किया, तो फिर क्या सुखाएंगे हम आपको? क्लोरोफॉर्म येस तो कोई भी महाराज के पास नहीं जाएगा तो महाराज यहाँ पर आएंगे सब के सब यहाँ आगे न पहुँच जाएं कि महाराज अब आगे पहुँची न पाएं फिर हमाराज को हम ड्रोन में बिठा करके यहाँ पर ले करके आएं ऐसा नहीं होना होग अब आप लोग थोड़ा काफे समय से बैठे हुआ हैं ना इसलिए आप थोड़ा सा शरीद थोड़ा स्ट्रेच कर लें सब तेयार तो अगर रादा भाव जी हैं जो की शार्जा से हैं अभी उनसे एक लोरिफिकेशन सुनेंगे लेकिन शरीद आपसका काफे जड़ हो चुगा जब बोलूंगा कृष्णा, तो आपको करना है ऐसे। जब बोलूंगा राम, तो आपको करना है ऐसे। सब तयार। ठीक हैं। हरे। हरे। कृष्णा। कृष्णा। हरे। हरे। कृष्णा। कृष्णा। कृष्णा। हरे। हरे। हरे। हरे। हरे। राम। हरे। हरे। राम राम। राम। हरे। हरे। हरे। दस में से दो नंबर। ताली हो जा आम लोगे लिए। नहीं। ताली नहीं बजानी इसमें। बहुत खराब नंबर आया आम लोगे। दस में से दो कितने खराब नंबर हैं। मताओ। शरीर हिला लो भक्तों। एक बार फिर से। सब तयार। हिलालो शरी हिलालो हिलालो हरे कृष्णा हरे कृष्णा कृष्णा कृष्णा हरे हरे हरे राम हरे राम राम हरे हरे दस में से साले पाँच नंबर बहुत खराब नंबर है ये First Division भी नहीं आए Last time सब तयार? पिछे वाले हरे हरे हरे हरे हरे हरे हरे हरे हरे हरे हरे हरे हरे हरे हरे हरे हरे हरे हरे हरे हरे हरे हरे हरे हरे हरे हरे हरे हरे हरे हरे हरे हरे हरे हर थोड़ा आपका शरीह हिलाना था हमें और कुछ नहीं। लेकिन आपने हिलाया नहीं है लेकिन शरीह। हमें भी हरे। कृष्णा। और ये जो रिबन है, लाल रंका रिबन, इस लाल रिबन के जो आगे नज़र आया, उसको भी हम क्लोरोफर्म सुहाएंगी। इसलिए इस ला अगर आपको प्रभुजी राधा भाव प्रभुजी प्रामशार्जा है। अरे अरे अरे अरे अरे वक्तों। प्रभुजी प्रेज़िदन्ट हैं। हम सब जानते हैं शार्जा का नाम क्या पढ़ गया है आप। शाम देश। तो वहाँ पर च्रुजय पता को महराज़ हरे कृष्णा। हरे कृष्णा। हरे कृष्णा। हरे कृष्णा। हरे कृष्णा। हरे कृष्णा। हरे कृष्णा। हरे कृष्णा। हरे कृष्णा। हरे कृष्णा। हरे कृष्णा। हरे कृष्णा। हरे कृष्णा। कृष्णा। हरे कृष्णा। बड़े हरे कृष्ण बड़े उनके सिश्य हैं उनके बारे में सोड़से जानते होंगे लेकिन हमारे बारे में नहीं जानते हैं एक थोड़ा सा मैं उदारन देना चाहता हूं कि बहुत साल पहले साल 1988 में हम चेनाई में थे सुमिता किष्णा प्रभू के उस मंदिर में जब बर्केड रोड और कोईंबुद्धू से गुरुमाराज आये थे इनिशेशन के बाद और हम लोग सब मैं उस जमाने में सोड़ा काम करते थे एक कंपणी में नेवली लिगनाइट दो सो किलोमेटर थे चेनाई से तो मेरे एक बॉस था जर्मन भोत खटोर था छुटी देने के लिए मना कर रह और दस तारिक मेरी बर्डे भी था। तो मेरी माने कुछ अच्छी गिफ्स दी थी मुझे। और उस थोड़ा चीज़ में एक बैग लेके बर्किट रोड टेंपल पर पोज़ गया गया था। और थोड़ा सा सेवा कर रहे थे वहां पर। और मैंने सुमिदा किषन प्रभ� और गुरुमाराज की जब installation होये दोपाद के disciples कोई नहीं थे और गुरुमाराजी थे और अगले दिन जब मैं निकलने के तयारी की और वो bag दुनते दुनते वहाँ पर गया तो देखा कि वो bag वहाँ पर नहीं था तो मैं गभरा गया कि मेरी एकदम कीम्ती चीज कहाँ चले गय तो बेचे नहीं देखकर उनने मुझे बुच्चा की what happened? So I said, Guru Maharaj, I have lost my bag. तो उनने मुझे बोला की एसे मतलब उनकी जो ब्लुव आईस से एकड़म deep देखकर बोला की everything happened so good. तो मुझे और दुख लगा कि ये मेरे एक अच्छी चीज चले गया और गुरुमाराज तो क चार पचास का कुछ मेरी बस थी वहाँ पर एक दस पंधरा मिलिट का मतलब मेरे गयाल से रस्था था तो बागते बागते जब में वहाँ पर गए तो देखा की वो बस जस्ट इटड लिफ्ट तो बहुत परिशानी हुई और मैं दूसरा एक बस के लिए इंतजार किया और कं� खडे हो गये और चिलाने लगे क्योंकि सामने एक बस था जो पूरी पल्टी हो गये थी तो हम उतर गये देखने के लिए तो मैंने देखा कि ओही बस जो मैं बैटने वाले थे गडलोर का उसमें नाम लिखा था और ओही बस की पल्टी हो गयी थी तब मुझे गुर्माराज की � यह है 1988 की बाद फिर हम स्यामदेश में थे 2001 गुरुमाराज उस जमाने में mostly अकेले जाते थे उनकी एक सेकेटरी हुआ करते थे नन्द परभू जो लोग इस विडिनस अपने या या या या या या या या या य हर बार आने के टाम मतलब तकलिफत नहीं हो इसलिए एक सेट कवज उनका जो कपड़े बड़े के लखते थे तो स्यार्जा में हम रखे थे उसको और गुरुमाजा आये अभुदावी में अवतरे देश में और उनका कुछ बिमारी हुए पीट में काफी दर्द हो रहा था तो और मैं और एक मेरा गौड़ बड़ था शाम प्रभू उनके साथ में चले गए वहाँ पर शाम के वक्त था और साड़े चे वज़े मैं पोचा वहाँ पर और गुरुमराज स्नान करने के लिए अंदर चले गए थे कपड़े के सेट मेरे पास था और मैं कपड़े के सेट वहा� तो मैं फिर से गया था, देखा तो बैग नहीं है वहाँ पर। गुरुमाराज की full set missing थी वहाँ से. मैं एकदम परिशान हो गया। तो दुनते दुनते उस bag को मैं वापस इस side में जब left side में आये, तो गुरुमाराज सामने से आ रहा था, और मुझे पुछा क्या, what happened? तो मैं तो मुझे आपको जानता है कि गुरुमाराज की जो मिमरी इतनी स्ट्रॉंग है 1988 की बात थी और 2001 कम से कम 11-12 साल चलेगा और एक छोड़ी सी चीज़ थी हमारी जिंदगी में कि आईसे हर वेक्ती जो है गौड़ सेसर और गौड़ पदर को मुझे आश्वासन देना मुझे चा और परसुभी में गुर्माराज से मिले तो इमिडियटली उनका जो फ़र्स रेक्षन हुआ आई हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हु� Thank you so much, Prabhu ji. Hare Krishna. So, Maharaj ji bhi bas aane hi wale hain. Humare beech mein His Grace Mohan Rupa Prabhu ji bhi upasit hain. He is called Delhi East of Kailash's Temple President. Source of inspiration for all of us. So, Prabhu ji bhi aap upasit hain. Main Prabhu ji se nivedan karunga. His Grace Mohan Rupa Prabhu ji se to kindly come on stage. His Grace Mohan Rupa Prabhu ji ki adhikshta mein hi Delhi NCR mein bhakto ne karib 15 saath tak duniya mein number one book distribution kiya hai. और Delhi NCR में जितने भी प्रीचर्ज हैं, उनके प्रीचर है, हिस ग्रेस मोहन रुपा प्रभुजी। आज हम जो बता पाते हैं, प्रभुजी से हम सीखते हैं, कौपी पेस्ट करते हैं। So we are still learning from His Grace, मोहन रुपा प्रभुजी। हरी वो। होमा घ्यान तिम्रण धस्य। भार श्रील जय पताता स्वामी महरा श्रील जय पताता स्वामी महरा श्रील जय पताता स्वामी महरा श्रील जय पताता स्वामी महरा श्रील जय पताता स्वामी महरा श्रील जय पताता स्वामी महरा श्रील जय पताता स्वामी महरा श्रील जय पताता स्वामी मोले महरा सब लो श्रील लाउड़ा जय पताता स लाउड़ा बैठ जाये बैठ जाये हारे कृषा हारे कृष्णा हारे कृषा हारे हारे हारे रामा हारे रामा रामा रामा हारे हारे हारे कृष्णा हारे कृष्णा हारे हारे हरे रामा हरे रामा रामा रामा हरे हरे हरे किस्ता हरे किस्ता हरे हरे किस्ता हरे हरे प्रेम से दोला हाँग उठाने प्रेम से हरे हरे रामा रामा रामा हरे हरे हरे किस्ता हरे किस्ता खुष्वन सर्यारे अरे रामा रामा रामारे आरे जय बैशन ठाकूर बैशन ठाकूर बैशन ठाकूर जय बैशन ठाकूर बैशन ठाकूर बैशन ठाकूर बैशन ठाकूर जय बैशन ठाकूर गुरुदे जाया गुरुदे जाया जाया प्रभुपा प्रभुपा जाये प्रभुपा हरिवोर हरिवोर हरिवोर हरिवोर हरिवोर हरिवोर Hare Kṛṣṇa Hare Kṛṣṇa Kṛṣṇa Kṛṣṇa Hare Hare Hare Rāma Hare Rāma Rāma Rāma Hare Hare सभी लोग प्रेम से, दोलों हारे रागे प्रेम से हरी, हरी, हरी हरी, हरी, हरी, हरी, हरी, हरी, हरी, हरी, हरी, हरी, हरी, हरी, हरी, हरी, हरी, हरी, हरी, हरी, हरी, हरी, हरी, हरी, हरी, हरगशा हरे कृष्णा जगशा हरी, हरी, हरी, हरे हरी, हरी, हरी आरे हरे रामा हरे रामा रामा रामा हरे हारे हारे कृष्णा हरे कृष्णा कृष्णा कृष्णा हरे हारे हारे रामा हरे रामा हारे कुछ आहरे कुछ आहरे हारे हरे राम, हरे राम, राम राम, हरे हरे हरे कृष्णा, हरे कृष्णा, कृष्णा, कृष्णा, हरे हरे हरे राम, हरे राम, राम राम, हरे हरे कृष्णा, हरे कृष्णा, कृष्णा कृष्णा अरे अरे अरे रामा अरे रामा रामा रामा अरे अरे अरे कृष्णा कृष्णा अरे अरे अरे रामा अरे रामा रामा रामा हरे कुष्णा हरे कुष्णा कुष्णा कुष्णा हरे हारे हरे राम हारे राम राम राम हरे हरे हरे कुष्णा हरे कुष्णा कुष्णा कुष्णा कुष्णा हरे हारे हरे राम हरे राम گسار گسار گسار گسار हरिराम संकीर्थन की जाय। शुरुचे पता का स्वाही महाराज व्यास पूजा महा महोच समक हे। जाय। So, devotees, jo-jo stage par hai, sabse request karenge, I request all the devotees, all the devotees on the stage, please kindly get down from the stage. So, abhi hum sunengi आशीर वचन श्ल जय पता का स्वाही महराज जी के मुखारविन से हरी हरी बो। So, Maharaj, कि शेरी में बहुत अभी शक्ती नहीं हैं क्योंकि महराज के इलाज अभी भी चल रहा है। तो महराज लंबा प्रवचन तो नहीं देंगे। लेकिन जो भी महराज देंगे वचन, उसको बहुत ध्यान सवभाग है। सो यहाँ पर श्रृ लोकनाद महराज जी विठ्थल जी को ओफर करने जा रहे हैं। श्रृ जय बतागा साही महराज जी को। वितालवितालवितालवितालवितालवितालवो वितालवितालवितालवितालवितालवितालवो वितालवितालवितालवितालवितालवितालवो वितालवितालवितालवितालवितालवितालवितालवो वितालवितालवितालवितालवितालवितालवितालवो वितालवितालविता तिरुपति बाला जी से भी बहुत विशेश शुबहार। जैपतागा महराज जी के लिए हरी वाल। जिनके पास मास्क नहीं है पीछे रहे, जैसे मेरे पास नहीं है, मैं पीछे हूँ न, इसलिए आप लोग मेरे से भी और पीछे पीछे हो जाओ। आप हो गले ले प्रभु और के देवोर्टी जो पीछे खड़े हुए हैं, क्यूटी भाई बाले, अपने पिताजी के साथ, सब नीचे आ जाएं। सब नीचे उतर जाएं। Everyone please, नीचे आ जाएं। महाराज अभी भी हस्पतास आ रहे हैं, महाराज हमें कृपा देने आ या हम उनको इंफेक्शन देंग कृष्णप्रेष्टाया भूताले स्वामे निती नामिने गौरवानी प्रचारिने सन्दावाद अस्यत्याधिषतारिमे। दशस्तनात्यधन्दा राभुनित्यानान्दा। सयादाईकागरास्तिदाधारिमे। गोराभकव्रेंदा। Hare Kṛṣṇa Kṛṣṇa Kṛṣṇa Hare Hare Hare Rāma Hare Rāma Rāma Rāma Hare Hare Hare Rāma Hare Rāma Hare Rāma Rāma Rāma Hare Hare Hare Rāma Hare Rāma Hare Rāma Rāma Hare Hare Hare Rāma Hare Rāma Rāma Hare Hare Hare Rāma Hare Rāma Rāma Rāma Rāma Rāma Hare क्या मायापू टीवी यहाँ पर हैं? इंग्लिश तो सेनियर दिवोर्टीज और मेडिकल टीम करने के लिए, मैयापोर के लिए करते हैं। तो जो senior team हैं, जो medical के supervisor, specialist हैं, वोने कहा, महाराज आप पूरा ठीक हो जाएगे, फिर आप मायापुर्धाम जा सकते हैं। So ma'am, their idea was that I celebrate the Vyasa Puja in Delhi. तो विचार ये था कि द्यास पूजा मनाई जाए तो दिल्ली में मनाई जाए। तो जो मैं कहूँ उसको अनुवाद भी करना है और उसका फिर बाद में औरोगो भी बताना है। I am very glad that all the devotees have become my co-brothers. I am very glad that some of the devotees have become my co-brothers. I have one final request. व्यास पूजा महा मौसल था। एक समय चेननई में व्यास पूजा महा मौसल था। व्यास पूजा महा मौसल था। व्यास पूजा महा मौसल था। तो पहली बार ऐसा मौका है कि दिली में महाराजी की प्यास पिजा मना जा रहे हैं। लोकनाद महाराज इस करक्टिंग नॉइड़ा। नॉइड़ा में। लोकनाद महाराजी ने कहा। नॉइड़ा। अगर महाराजी ने कहा I was given a garland by His Holiness Lokanath Swami, also by Shri Krishna Chaitanya Maharaj. I know that you are waiting for your prasadam. मायापूर महाद्वादशी तो मायापूर धामे महाद्वादशी है आज ये दिन यहाँ देली और नोईडा में पुल द्वादशी है और दिल्ली और नोइडा में भी पूर्ण द्वादशी हैं। पूर्ण द्वादशी हैं। पूर्ण द्वादशी हैं। पूर्ण द्वादशी हैं। पूर्ण द्वादशी हैं। पूर्ण द्वादशी हैं। पूर्ण द्वादशी हैं। तो एकादर्शी फीज के लिए यहाँ पर कुक्स ने पूरी व्यस्ता की है, नहीं की है। महराज जाना चाह रहे हैं। हाँ जी, येस महराज, येस, येस, येस, येस, येस, येस, येस, येस, येस, येस, येस, येस, येस, येस, येस, येस, येस, येस, य कुछ सेम्पल हो प्रसाद का महाराज चाहते देखना, बैट साइट महाराज देखना से सेम्पल है। हरी गोड़ा। अधिन समय थे, पाप आरवाईस, अधिन समय थे, पाप आरवाईस, अधिन समय थे, शिला प्राभुपाद पाप आरवाईस, शिला अधिन समय थे, पाप आरवाईस, अधिन समय थे, पा प्राभुपाद शिला प्राभुपाद शिला प्राभुपाद शिला प्राभुपाद शिला प्राभुपाद शिला प्राभुपाद शिला प्राभुपाद शिला प्राभुपाद शिला प्राभुपाद शिला प्राभुपाद प्राभु� वो परमहमस होगा। वो परमहमस होगा। वो परमहमस होगा। वो परमहमस होगा. वो परमहमस होगा. वो परमहमस होगा. वो परमहमस होगा. वो परमहमस होगा. परमहमस स्थेति करलेंगे। हैसा माना जाता है कि समाने तवार पर जो ब्रह्मचारी हैं, सन्यासी हैं, वो तो परमहमस स्थेति है, उसको प्रात कर लेंगे। वह स्थेताना जाता है कि उसको प्रात कर लेंगे। वह स्थेताना जाता है कि उसको प्रात कर लेंगे। � शान्ति पूरे माता सची ते मिले थे महाप्रभू सन्यास लेने से पहले। He told all the devotees to offer to go home to your families. To go home to your families. Most of Lord Chaitanya's followers were grihastas. चितने महापूगे जो जाथर अन्वियाई थे, वो ग्रिहस्त थे। तो एक ग्रिहस्त होने के नाथे, जो गर्बदान संस्कार है, एक बहुती मुख्य संस्कार है। और तो क्रिष्ण प्रसादों और साथ ही सिर्फ कृष्णप्रसाथ का ही सेवन करना। तुम्हाराज सोच रहे थे कि इस पकार से कृष्ण के साथ समद होना कितना अद्भूत बात है। कितना महतुपूर्ण है निच्चत रूप से कि हमने सारी इंद्रियों को कृष्ण के प्रसंता के लिए नहित करें। देवोर्षनल सर्वस मेंस वे त्राय में कृष्णा सतिस्वाइब। तो मेरे गुरु आचारे थे। तो जितने भी घरहस्तय दिवोर्टीज हैं, उनको चाही है कि ये अपने बच्चों का ऐसा प्रक्षिशन दें, कि वो आचारे बनें आगे जा घर के। प्राफ़ार, अगर मैं तो शिलाप्राभुपाद में एक बहुत आशाई है। तो हमें एक बहुत आशाई है। तो हमें एक बहुत आशाई है। तो हमें एक बहुत आशाई है। तो हमें एक बहुत आशाई है। तो हमें एक बहुत आशाई है। तो हमें एक बहुत आशाई है। तो तो हमें एक � हमको सारी कारेगलाब इस पिकार से करने हैं, जिसे कि कृष्ण पून रुपें हमसे संतुष्ठ हों। Of course, the Hare Krishna Maha Mantra कलियुगा के लिए अपरिश्ट बेनेडिक्षिन है। परवाद परवाद परवाद परवाद आपको क्रिष्णा को दिखाने के लिए देखने के लिए होगा। क्रिष्णा को दिखाने परवाद परवाद परवाद पर के लिए होगा। क्रिष्णा को दिखाने के लिए होगा। क्रिष्णा को दिखाने के लिए होगा। क्रिष्णा को दिखाने के लिए होगा। क्रिष्णा को दिखाने के लिए होगा। यही अंतर है कृष्ण भावना में और सांसारिक भावना में। पोजिशा। महुती चंसार के अंदर हर वेक्ति चाहते हैं कि कृष्णा मेरी इंदर को प्रिप्ट करें। वो मांगते हैं कि हे कृष्णा मुझको अच्छी नोकरी दिला दो। वो मांगते आपके हैं कि हे कृष्णा मुझको अच्छी नोकरी दिला दो। चर्णों की ऐसी कृपा मिले की मेरा एक बहुती सुन्दर घर हो जाएं। आपके चर्णों की He wants to come down and be our friend, our lover. Our son, our master, अगर मैयापो टीवी दिखा जा रहा हैं, तो मैयापो टीवी दिखा जा रहा हैं? क्या मैयापो टीवी यहाँ दिखा जा रहा हैं? हाँ हाँ हाँ हाँ हाँ हाँ हाँ हाँ हाँ हाँ हाँ हाँ हाँ हाँ हाँ हाँ हाँ हाँ हाँ हाँ हाँ हाँ हाँ तो व्यास्पुजा देई ते दिन मौन स्टेर संगाल पगा हाई। गुरुदेविया आवेस्ट पण हाई। व्यास्पुजा दिन अटे विशेश दिन जटा मौन के संकल्प करा हाई जटा गुरुदेविया सेवाई संपुन होगे निजके निजक्त करा। तो यह जो व्यास पूज़ा का दिन है, इसमें हम मन से संकल्प करते हैं कि गुरुदेव की जो भी इच्छाएं हैं उन्हें पूर्ण कर सकें। यह जो दिन यह ता जन्म दिन ना है। यह तित्थी ओनोसारे यह व्यास पूज़ा पालन करा है। तो ये जो दिन है, ये एक जन्म सिर्फ मातर एक जन्म दिन नहीं है। ये तिति के अनसार इसे व्यास पूजा की तरह मनाय जाता है। अच्छस्तवर्द्वाई। पुठेज्ञानमा। स्वामिष्ट्रिय। पमज्वाई सन्याज्जी।।।।।।।।।।।।।।।। हमादे चेष्ट करते हैं ब्रह्मचारी, ग्रह्स्त, सुन्नाशी। सभाई मौन स्थिर करें कृष्णर पति समर्पन करते हैं। अगर तीवी से अन्लाइन कुड़ी हजार लोग से जाया। एकान मायापूर्ट टीवी ते पिराय कुड़ी हजार लोग अन्लाइन ने दर्शन कर चे। तो मायापूर्ट टीवी के माध्यम से अभी लगबग पीस हजार लोग अन्लाइन इस व्यासपूजा प्रोग्राम को देख र तो वो सोच रहे हैं कि ऐसा कैसे संभव हो गया? नौयदा उच्छे दिल्ली ये उत्रपदेश में है यहाँ पर आकर मैं बहुत शुक्ष हूँ। तो यहां पर आकर मैं बहुत शुक्ष हूँ। तो यहां पर आकर मैं बहुत शुक्ष हूँ। तो यहां पर आकर मैं बहुत शुक्ष हूँ। तो यहां पर आकर मैं बहुत शुक्ष हूँ। तो यहां पर आकर मैं बहुत शुक्� तो हम इस प्रकार हम सोचते हैं कि इस तरह आपके जीवन का प्रतेग दिन एक उत्सव का दिन हो। हाँज़वे मायापुर देवोर्टीज्ञाने के लिए, मुझे एक पोशाक की विवस्था की है। मैं सभी भक्तों को धन्यवाद देना चाहता हूँ। कभी कभी भक्त मुझे से पूछते हैं कि मैं क्या कर सकता हूँ? तो प्रावपाद हमारे कुड़ी तीरीष्टा आदेश दिये चें। प्रावपाद ने मुझे लगबग बीस या तीस आदेश दिये हैं। One thing is that you can realize these instructions staying alive or through your assistance. प्रभुपात का एक आदेश जो मुझे था वो ये था कि आप मायापूर में रहिये और अपने असिस्टेंड्स सचीवों के माध्यम से सेवाय करिये तो अच्छा में मेरे सच्चे विया असिस्टन्स थे, वो जादा तर मेरे गुरु भाई थे। तो अच्छा विया असिस्टन्स थे, गुरुभाई, गुरुभेहन। तो इससे मुझे साहिता मिली प्रभुबात के आदेशों का पालन करने के लिए। हरे कृष्णा आज हम व्यासा पूजा बुख करेंगे। पूजा पूजा पूजा पूजा पूजा आप सब भक्तों ने जो भी उद्गार महाराज को प्रसुत के उनकी वियास पुझा के उस्तव पर वो अर्पित की जाएंगे महाराज श्री को और साथ ही दो बुक्स भी लौच हुई है एक बेंगोली में है परी प्रश्नेन और दुसरी अथातु ब्रह्मज्जी क्यासा अथ Here is the Vyasa Puja book offering to His Holiness, Jai Pathaka Swami Maharaj. Jai Guru Maharaj. Sri Lajjai Pathaka Swami Maharaj. Sri Lajjai Pathaka Swami Maharaj. श्रील जय पताका स्वामी महराण श्रील जय पताका स्वामी महराण श्रील जय पताका स्वामी महराण श्रील जय पताका स्वामी महराण श्रील जय पताका स्वामी महराण श्रील जय पताका स्वामी महराण श्रील जय पताका स्वामी महराण श्रील जय पताका स्वामी महराण We also have a Bengali version of this. It's called Pariprashnena. These names were given by Guru Maharaj himself. These are available for sale. वो अच्छा देखने के लिए हैं, नहीं आपके लिए करते हैं। आप आपके लिए करते हैं। शाम रसिक प्रभू के लिए आपके करते हैं। आप आपके लिए करते हैं। अभी आप लिए कर सकते हैं, अभी ये बुक्स अवेलि� कितनी खुशी की बात हैं, किसी के बास नहीं हैं। शाबाश। खरीद लें। भाई और भेणों, बहार स्टॉल लगा वा आए। अवश्य खरीद लें। महाराज जी की बुक्स पढ़ें और महाराज जी के प्रती अपना स्नेह, अपनी भक्ती समर्पन बढ़ाएं। ओक तो महराजी के चरण कमलों का अभिशेक नहीं हो पारा है। लेकिन वैसे महराजी के चरणों के चिन्णों को ले करके अभिशेक यहाँ पर होगा। स्री कृष्ण चैतने स्वाही महराज। महराज महराज चरण कमल। महराज लोटस स्वीद आप हैं। आपको पक्ति चेतने स्वाही माराज। आपको पक्ति चेतने स्वाही माराज। आपको पक्ति चेतने स्वाही माराज। आपको पक्ति चेतने स्वाही माराज। आपको पक्ति चेतने स्वाही माराज। आपको पक्ति चेतने स्वाही माराज। आपको Hare Kṛṣṇa पक्ति चेतने स्व to you Hare Kṛṣṇa dear Guru Mahārāja Hare Kṛṣṇa to you Hare Kṛṣṇa to you Hare Kṛṣṇa to you Kṛṣṇa Kṛṣṇa to you Hare Hare Hare Kṛṣṇa to you, Hare Kṛṣṇa to you, Hare Kṛṣṇa to you, Hare Kṛṣṇa to you, Hare Kṛṣṇa to you, हारे कृष्णा तो यो अरे कुष्णा तो यूँ। अरे कुष्णा तो यूँ। अरे कुष्णा तो यूँ। अरे कुष्णा तो यूँ। अरे कुष्णा तो यूँ। अरे कुष्णा तो यूँ। अरे कुष्णा तो यूँ। अरे कुष्णा तो यूँ। अरे कुष्णा तो यूँ। Hare Hare अरे कु� Hare Krishna Hare Krishna Krishna Krishna Hare Hare Hare Rama Hare Rama Hare Krishna Hare Krishna Krishna Krishna Hare Hare Hare Rama Hare Rama Rama Rama Kṛṣṇa Kṛṣṇa Kṛṣṇa Hare Hare Rāma Hare Rāma Rāma Rāma Hare Hare Hare Kṛṣṇa Hare Kṛṣṇa Kṛṣṇa Kṛṣṇa Hare Hare Hare Rāma Hare Rāma राम राम हारे हारे। हारे जुसा हारे जुसा। जुसा जुसा हारे हारे। हारे राम हारे राम। राम राम हारे हारे। हारे कुछना हारे कुछना। कुछना कुछना हारे। हरे किष्टा हरे किष्टा, किष्टा किष्टा हरे हारे हारे रामा हरे रामा, गामा रामा हरे हारे हारे किष्टा हरे किष्टा, किष्टा किष्टा हरे हारे हारे कृता हारे कृता हारे हारे हारे हारे कृता हारे हरे गुषा हरे गुषा हरे अरे हरे रामा हरे रामो रामा रामा हरे अरे हारे खुष्णा होरे खुष्णा वेश्णा खुष्णा हरे हरे हरे रामा हरे रामा राम रामा हरे हरे हरे गुषा हरे गुष्णा गुषा गुषा हरे अरे हरे रामा हरे रामा हो हमरा महरे हारे होरे कुछना होरे कुछना वेश्ना कुछना होरे हारे हरे रामा हरे रामा रामा रामा हारे हारे हारे कुछना होरे कुछना अर्गिसा अर्गिसा अर्गिसा अर्गिसा अर्गिसा हरे राम हरे राम हरकृष्ट हरकृष्ट हरकृष्ट हरकृष्ट हरे हरे हरे राम हरे राम, राम राम हरे हरे हरे किसा हरे किसा, किसा किसा हरे हरे हरे हरे राम हरे राम, राम राम हरे हरे हो दे किसनों, हो दे किसनों, किसना किसनों हो दे हरे हारे राम हारे राम हारे राम हारे हारे हारे खुष्णा खुष्णा हारे राम हारे राम हारे हारे होरे खुष्णा होरे खुष्णा कुष्णा कुष्णा होरे हारे हरे गुशा हरे गुशमा गुशा गुशा हरे हरे हरे राम हरे रामो राम राम हरे हरे हरे कुछो हरे कुछो कुछा कुछा हरे हरे हारे राम हारे राम राम राम हारे हारे हारे किस्ता हारे किस्ता किस्ता किस्ता हारे हारे हारे राम हारे राम राम राम हारे हारे हारे किस्ता हारे किस्ता किस्ता हारे हारे हरे राम हरे राम राम राम हरे हारे हरे जिसा हरे जिसा जिसा जिसा हरे हरे हरे राम हो राम राम हरे हरे खुष्ण खुष्ण खुष्ण खुष्ण हरे हरे हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे हरे कृष्णा कृष्णा कृष्णा हरे रामा Ram Ram Hare Hare Hare Krishna Hare Krishna Krishna Krishna Hare Hare हरे कुष्णो हरे कुष्णो हरे कृष्णा हरे कृष्णा हरे कृष्णा हरे कृष्णा हरे कृष्णा हरे कृष्णा हरे कृष्णा हरे कृष्णा हरे कृष्णा हरे कृष्णा हरे कृष्णा हरे कृष्णा हरे कृष्णा हरे हरे कृष्णा हरे कृष्णा हरे कृष्णा हरे कृष्णा हरे कृष और देखिये महराज जी का तबित बहुत खनाब है। देखिये सामने मत आपको फूल दिया जा रहा है। अपको फूल दिया जा रहा है। प्लीज़ वेट वेट इंतर जग आपको फूल दिया जा रहा है। और पुष्पांजली होगा। पुष्पांजली का फूल कोई � यहाँ पे थ्रो नहीं करेंगे कोई भुल फेकेंगे नहीं थ्रो नहीं करेंगे हमारे भक्त लोग आएंगे आपसे कलक करने के लिए कपड़ों में आप लीज़ जहाँ पे हैं वही से आप मंत्र बोलकर आप पुष्पा मेंटिल ओफर कीजियेगा हरे कृष्पा कोई भुल � जिसके फाथ फूल पहुँचा नहीं है। आप प्लीज मंत्र बोलती जाये। मेंटली आप फ्लावर को आप मेंटली मांधसीक रूप में आफर किचे। फूल आजाएगा अपके पास। हरे कृष्णा। सभी बैठी हैं। प्लीज बैठी हैं। कृपया अपसा बैतिये सकले बशून ओम ग्यानति मिरंदस्या घानन जनचला कया चाक्शुर्मिली तम्देना तस्मय स्री गुर्वे नमः। स्री चैतन्यमनोवेष्तम् सापितं येन भूतले स्वयं रूप कदामहियम् ददाती स्वपदान्तिकम् वन्देहं स्री गुरो श्री उतपद कमलं श्री गुरून वैश्णवाष्च वन्देहं श्री गुरो श्री उत पद कमलं श्री गुरून वैश्न वाश्च श्री रूपं साग्र जातं सहगण रघुनातान्वितंतं सजीवं साध्वैतं सावधूतं परिजन सहितं कृष्ण चैतन्य देवं Harijana Sahitam Krishna Chaitanya Devam Sri Radha Krishna Padaan Saha Gana Lalita Sri Vishakhaan Vitaascha Namaha Om Vishnu Padaaya Krishna Prishtaya Bhootale krishna prashtaya bhutale, srimathe bhakti vedanta, svame nithinamine, namaste sarasvate deve, gauravani pracharine, nirvishesha shunyavadi, nirvisesha sunyavadi pashchatya desha tarine namao mishnupadaya krishna prishtaya bhutale srimate bhakti siddhanta sarasvati itinamine शेवाशुभानविदेवे दैताये कृपाऽभधये कृष्णसंबंधविज्ञानम् दाईने प्रभवेनमहा माधुर्योज्वल प्रेमाध्या श्री रूपानुग भक्तिदा श्री गौवर करुणाशक्ति विग्रहाय नमस्तुते नमस्ते गौवर वाणी Namaste Gauravani Shri Murthaye Dheenatharine Roopanuga Viruddhapam Siddhanta Dhwanta Harine Namo Gaurakishoraya Sakshat Vairagya Murthaye विप्रलंबरसांबोधे पादां भुजायते नमह नमो भक्ति विनोधाय सच्चिदानन्द नामिने गौरशक्ति स्वरूपाय रूपानुगवरायते गौरविरभाव भुमिस्त्वं Nirdishta Sajjan Priyaha Vaishnava Sarvabhaumaha Sri Jagannathayate Namaha Vanchakalpatarubhyascha Tripasindhubhyaye Vacham Patitanam Pavanibhyo Vaishnavibhyo Namo Namaha Namo Mahabadanyaya, Krishna Prema Pradayate, Krishnaya Krishna Chaitanya, Namne Gauratuse Namaha, Pancha Tattvatmakam Krishnam, Bhaktarupaswarupakam, Bhaktavataram Bhaktakhyam, Namaami Bhakta Shaktikam He Krishna Karuna Sindhu Dheena Bandhu Jagatpate Gopesh Gopika Kanta Radha Kant Namostute Jai Tam Surtao Pangor Mavmanda Matarigate Mat Sarvasva Padam Bhojao Radha Madana Mohanao Divyaan Singhasanastho Shreemad Radha Shreela Govinda Devo Prishthali Bihim Sevya Manusmarami Shreeman Rasara Sarambhi Vamshivata Tatasthita Karshan Venusuner Gopi Gopinatha नमा ओम् विष्णु पाधाय क्रिष्ण प्रेस्थाय भूतले श्रीमते जयपताक स्वामीन इतिनामिने नमां अच्छारे पदाया निताय कृपाब्धे पुदाईने गोवरकता धामदाया नगरग्रामा प्रचारिने तारिने पुष्पाञले समर्प्यामि शिरृज्गुरुमाराज की नमाओं विश्णुदाया कृष्णप्रिस्ताया भूतले श्रीमते जयपताक स्वामिन इतिनामिने नमाम अचार्यपदाय निताय कृपाप्रदायिने गोवरकता घ्राम धामधाय गोवरकता धामधाय नगरग्रामतारिने इति पुष्पाञ्जली समर्पयामी Third time, from the right hand, you have to put it on your left hand. नमो ओम विष्णु पाधाया। कृष्ण प्रेष्ठाय भूतले। श्रीमते जय पताका। स्वामिन निति नामिने। नमो आचार्य पाधाया। निताय कृपा प्रदायिने। गौर कथा धाम दाया नगर ग्राम तारीने इते पुष्पांजली समर्पयामी देर देवोर्टीज एक बार आप देखे आपके राइट हैंड को ऐसा रखे और आपके मन से गुरु महाराज को आप ओफर करें तीन बार ऐसे करें आपने अलड़ी दे दिया है अपने मन से एक बार सब अपने आखे बन करें और गुरु मह आपके हाथ में जो फूल है सामने दिवोटिस कलक करें और बात में हम लोग ओफर कर देंगे आप फेकिये मत ठीके आप पिछे कोई भगत चादर में कलक करते हैं तो हम लोग अभी गुरु माराज का गुरु पुज़ा करेंगे हम लोग साथ में गाएंगे समसदा कोई डबल � सब अभी एक साथ में गाएंगे संसारदाव संसारदाव नलली धनोका धनाय कारुण्या धनात गनादव समसरदावानललिधलोका सभी के साथ सभी के साथ युप्कस्याकाल्याना गुणार्नवास्या वान्दे कुरोश्री चर्णारविंदा माहाप्रभोकि तानन्वित्याघिता वारी द्रमा ध्यान मानसोरा सेना रोमान्स का काम्पा भुकारांगा बाजो बान्दे कुरोच्री चारे नारविंदा श्री विग्रहारा धानने चाना ना Śrīṅgārthānmān dhīra-mārjanādo Yuktāsya bhāgtaṁ śānyuñca-topi Bhande guro śrī cāraṇāravinda Cātur vidhā śrī bhagavat-prasādo स्वाधान त्रिप्तार् अरिभाग्ड सांगार् कृत्वाइव त्रिप्तेर् भाजः नासा देवा बन्देगुरोष्री चाले नारविंदार् श्रीरादि कामाद हवयोरा मादुर्यालिला गुनरुपनाम्नाम् प्रादिक्षनास्वा दानलोलुपास्या वान्देकुरोस्री चारणारविंदाम् निकुञ्जायूनो रादिकेलिसित्ता यायाल बीर योगतीर पेक्षनीया। तास्वाती दास्याद अतिवाल बास्याद। वान्देग रोद्स्री चारणार विन्दा। सक्षादारीद्वे असमास्वचास्वे। उक्ताता ता बाव्यते एवा साथ्वी किन्तु पावोया प्रिया एवा तास्या बान्दे गुरोष्वी कारणारं लिंदा याच्या प्रसादान भगवाद प्रसादो याच्या प्रसादान लागधी कृतोथी කරන්න, කරන්න, කරන්න, කරන්න, देखा देखते हैं। प्राभूर्णि जनान्दा स्वी अध्वेज़ा गोड़ा चाल स्वी बासादी गोड़ा बासादी जाया जायश्रे कृष्णा जेनाया ब्रावुदेश्या लाज़ा स्वियाद्रेशा गर्णार्सीवासारी गोरवासारी जायश्रे कृष्णा जेनाया ब्रावुदेश्या लाज़ा स्वियाद्रेशा गर्णार्सीवासारी गोरवासारी प्राइपे प्रिस्ताने प्राइपे प्राइपे प्राइपे प्राइपे प्राइपे हाले कुष्णा, कुष्णा, कुष्णा, हाले, हाले, हाले, हाले, माहुने मेरे प्रेज़ा प्रेज़ा माहुने मेरे प्रेज़ा प्रेज़ा माहुने मेरे प्रेज़ा माहुने मेरे प्रेज़ा लोगों पर करते हैं, करते हैं, करते हैं, करते हैं, करते हैं, करते हैं, करते हैं, करते हैं, करते हैं, करते हैं, करते हैं, करते हैं, करते हैं, करते हैं, लावाद्धे आदी, क आदी लावाद्धे आदी, लावाद्धे आदी, लावाद्धे आदी, लावाद्धे आदी, लावाद्धे आदी, लावाद्धे आदी, लावाद्धे आदी, लावाद्धे आदी, हाले खुष्टा, हाले खुष्टा, खुष्टा, खुष्टा, हरे हरे हरे व्यावा, हरे व्यावा, व्यावा, व्यावा, हरे हरे हरे कृष्णा तो जान्मी निमाई प्रिया माता जी का जो यूद्ध प्रोग्राम है जो 2000 यूद्ध पारिसिपेटेड उससे जो लक्ष्मी आई है टियो वीपी के लिए महराजी को साड़े तीन लाग रुपे माता जी ओफर कर रही है हरी बों हरे कृष्णा हरे कृष्ण Hare Kṛṣṇa Hare Kṛṣṇa Kṛṣṇa Kṛṣṇa Hare Hare Hare Rāma Hare Rāma Rāma Rāma Hare Hare Hare Kṛṣṇa Hare Kṛṣṇa Kṛṣṇa Kṛṣṇa Hare Hare Hare Rāma Hare Rāma Rāma Rāma Hare Hare होरे किसा होरे किसा किसा किसा होरे होरे महराज साथ अपको नहीं जाना है प्लीज रुख जाये रुख जाये वापिस आ जाये हरे किष्णा डिबोटीज आ जाये आ जाये वापिस आ जाये दुखी मत हो ये महराज के साथ कोई नहीं जायेगा प्लीज होरे फिच्लो हो होरे फिच्लाग लाग लागी लाग होरे होरे होरे होरे होरे होरे होरे होरे होरे होरे होरे होरे होरे होड़े क्रो, होड़े ख्राख्राख्राख्राख्राख्राख्राख्राख्रा होरी क्रोहो होरी क्राक्राडा जीना होरे होरे होरे हारे हारे हरे हारे हारे हारे हारे हारे हारे हारे हारे हारे हारे हारे हारे हारे हारे हारे हारे हारे हारे हारे हारे हारे हारे हारे हारे हारे हारे हारे हारे हारे हारे हारे हारे हारे हारे हारे हार हरे लावधरे लावधरे लावधरे लावधरे लावधरे Hare Kṛṣṇa Hare Kṛṣṇa Kṛṣṇa Kṛṣṇa Hare Hare Hare Rāma Hare Rāma Rāma Rāma Hare Hare Hare Kṛṣṇa Hare Kṛṣṇa Kṛṣṇa Kṛṣṇa Hare Hare Hare Rāma Hare Rāma Rāma Rāma Hare Hare Hare Kṛṣṇa Hare Kṛṣṇa Kṛṣṇa Kṛṣṇa Hare Hare Hare Rāma Hare Rāma Rāma Rāma Hare Hare होने कृष्ण, होने कृष्ण, कृष्ण, कृष्ण, होने, होने, होने राम, होने राम, राम, राम, होने, होने होने कृष्ण, होने कृष्ण, कृष्ण, कृष्ण, कृष्ण, होने, होने, होने, होने राम, होने, राम, राम, होने, होने ḏḏḏḏḏḏḏḏḏḏḏḏḏḏḏḏḏḏḏḏḏḏḏḏḏḏḏḏḏḏḏḏḏḏḏḏḏḏḏḏḏḏḏḏḏḏḏḏḏḏḏḏḏḏḏḏḏḏḏḏḏḏḏḏḏḏḏḏḏḏḏḏḏḏ� हाले कुछे नो हाले कुछा कुछा कुछा हाले हाले हाले रामा रामा रामा रामा रामा हाले हाले.
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Вот русский перевод текста песни «Любовная песня матери Лорри своему сыну Джею»


