Lava-Mātra: A Moment with Jayapatākā Swami by HG Arcanā Bhakti Rādhā Devī Dāsī (Hindi)

Arcanā Bhakti Rādhā Devī Dāsī describes leaving Kriya Yoga practice to join ISKCON, meeting Jayapatākā Swami, and receiving initiation at Mayapur on Gaura Purnima. She shares how the guru guided her through service work across Indian cities and offered direct reassurance during difficult moments.
हरे कृष्ण, मेरा नाम अर्चना भक्ति, राधा देवी, दासी है एंड मैं अभी हाल फिलहाल चेन्नई टेम्पल के साथ हूँ, वैसे मैं यूपी से हूँ उत्तर प्रदेश। तो इससे पहले स्कॉल से जुड़ने से पहले मैं क्रिया योग करती थी जो परम योग नंदा जी का है और क्रियानंद जी उसको करते थे आनंद संघ संघ के साथ ही मैं। तो मैं क्रिया योग प्रैक्टिस करती थी और मैंने उससे पहले भी अनेक मेरी खोज जारी थी कि कहीं न कहीं मुझे कुछ रास्ता मिले पर जाती थी। तो लगता था कि हाँ अच्छा है लेकिन कुछ और भी है, इसके आगे कुछ और भी है, लगता था कि यह सिर्फ सच नहीं है। तो क्रिया योग भी किया, वो भी मेडिटेशन है पूरा और क्रिया करते हैं हम लोग? तो मतलब क्रिया करते थे उस टाइम तो पर फिर भी मन में था कि नहीं कुछ और भी है इसके आगे और भी है। तो मैं उस टाइम उस समय लखनऊ में थी। मेरे हजबैंड की जो जॉब है वो ट्रांसफरेबल जॉब है। तो फिर यह हुआ कि मेरे को ऐसे ही 1 जानकारी मन में आई कि मेरा ये जो ये जो कार्य था लखनऊ में खत्म हो गया है। अब मैं कहीं नई जगह जाउंगी? और वो मेरे लिए 1 नया जरिया खुलेगा, ऐसे मेरे को अंदर से बहुत स्ट्रॉंग ली लग रहा था तो ठीक है। तो उस समय यह हुआ कि मेरा मेरे हसबैंड की पोस्टिंग हो गई, सेलम। तो हम सब लोग फिर सेलम तुरंत आ गए। तो सेलम आने, पर यह हुआ कि मेरे को 1 मौका मिला कि मैं किसी से भगवत गीता सुनू। तो वो लोग डिवोटीज नहीं थे। तो बट फिर भी भगवत गीता सुन रही थी, ये प्रभुपाद की भगवत गीता नहीं थी, वो आई थिंक, इसकी थी, गीता, कोई और गीता थी, बेसिकली कोई और, किसी और की गीता थी। तो गीता पढते पढते जब आता है भगवान भगवान कह रहे हैं। तो मतलब मेरे को बहुत अच्छा लगता था। तो मुझे लगता था कि देखो भगवान कह रहे है मतलब लौट कृष्णा कह रहे हैं। तो आई डोंट मतलब मैं तो भगवान कृष्ण के बारे में कुछ जानती ही नहीं हैं। तो मतलब मुझे कौन बताएगा हू? विल टेल मी। तो मैं ये सोचती रही कि मुझे अगर भगवान कृष्ण के बारे में जानना है तो मैं कहा से जानूंगा? तो मैंने फिर सडनली मेरे दिमाग में आया कि इंटरनेशनल सोसाइटी फॉर क्रिष्ण कांशसनेस? तो मेरी 1 दोस्त थी वहाँ पर, तो मैंने उससे पूछा कि यहाँ पर कोई कौन है? तो कहती हाँ है? तो सेल में उस टाइम कौन था? कौन था मतलब? तो फिर मैंने कहा कि चलो हम लोग 1 बार जाते हैं तो वहाँ फिर भी मेरी मुलाकात हुई गोकुल चंद्र, हेज ग्रेस गोकुल चंद्र प्रभु से। तो उन्होंने बड़े प्यार से कई चीजें समझाई और बताई जो मुझे बहुत अच्छा लगा और जो मैं प्रैक्टिस कर रही थी क्रिया प्रैक्टिस कर रही थी उस समय। तो उन्होंने कहा ठीक है वो तुम करते रहो अच्छी बात है, लेकिन तुम हो सके तो ये जो हरे कृष्णा महामंत्र है इसका भी उच्चारण करके देखो कैसा लगता है तुम्हे तो मैं वो करने लगी, धीरे धीरे धीरे तो करते करते मेरी रुची उस तरफ बढ़ती गई, एंड जो मैं क्रिया करती थी वो फिर मेरा छूटता चला गया। फिर मुझे लगा कि नहीं यही रास्ता जिसको मैं ढूंढ रही थी इतने सालों से बचपन से ही ढूंढ रही थी 1 तरह से तो मुझे जिंदगी के बहुत देर समय के बाद ये मिला पर मुझे बहुत खुशी है कि मुझे कुछ कांक्रीट चीज मिली ऐसा नहीं है कि हर जगह जाती थी, लगता था कि नहीं कुछ और है, कुछ और है, यहाँ लगता है कि नहीं दिस इज दी कंपलीट थिंग इसके आगे कुछ नहीं है। तो वो 1 फीलिंग मेरे को आने लगी एंड फिर धीरे धीरे मैं इसमें और चलती चली गई और वहां पर क्लासेस होती थी श्रीमद भागवत की, वो मैं अटेंड करती थी। मुझे बहुत बहुत अच्छा लगता था और मैं सुनने के लिए बहुत उत्सुक भी रहती थी। तो उस बीच में क्या हुआ कि हमारा ट्रांसफर हो गया तांजपुर तो तंजावुर और सेलम जो है मेरे ख्याल से 3 साढ़े 3 घंटे का अंतर है उन दोनों जगहों में, तो मैं मंडे क्लास अटेंड करने के लिए तंजावुर से सेलम आती थी क्योंकि वहां पर तंजावुर में कोई कांग्रीगेशन नहीं थी जब हम सेल तो इस तरह से मेरी जर्नी चली और उस जब मैं सेलम में थी तो मेरी 1 दोस्त थी तो वो भी मतलब स्कॉन स्कॉन से ही जुड़ी हुई थी। वो बहुत सारी बातें मुझे बताती थी। शी ज वेरी इंटेलिजेंट तो तो हम लोग जब हम सब लोग मिलकर 1 बार मायापुर गए तो मायापुर गए। तब 1 पंडाल प्रोग्राम था और उसमें गुरु महाराज थे। तो उनको देखते मुझे लगा कि अगर गुरु महाराज की दया होगी तो वो मुझे अपना शिष्य मानेंगे। तो मैं मतलब इस चीज के लिए मतलब मैं राह देख रही थी। तो मैंने ऐसी मन में प्रार्थना की और उनको वो जा रहे थे। तो मैंने बस आई पेड में ओबेसेंसेमैंने उनको नमस्कार किया तो इस तरह से हुआ। फिर मतलब इसके बाद ही मतलब कुछ समय के बाद हम तंजावुर गए। फिर तंजावुर से मैंने गुरु महाराज के लिए सोच रही थी। तब उसी समय क्या हुआ कुछ समय के बाद हमारा ट्रांसफर जापुर से चेन्नई हो गया और चेन्नई टेम्पल गुरु महाराज के हिजहोलिनेस जयपताका स्वामी महाराज के अंदर आता है उन्हीं की निगरानी में है तो तो आ व लाइक ए ऐसा लग रहा था कि सब कुछ आपके लिए 1 क्या बोलते है सब कुछ क्रम से आपके लिए चीजें होती चली जा रही है। इट वाज लाइक अपने आप ही चीजें हो रही थीं। मुझे लग नहीं रहा था कि मैं किसी चीज के लिए कोशिश कर ही हूं। बस मन में 1 इच्छा होती थी और वो ऐसा लगता था कि वो बस यू नो इट इज सो ऑफ साक्षात होती चली जा रही है सो मुझे बहुत अच्छा लगा। फिर हमारे जो कॉन्ग्रीगेशन हैं यहां पर उनके साथ जुड़ी में एंड फिर करते करते करते करते फिर 1 समय आया कि उन्होंने पूछा कि आपको इनीसिएशन लेना है गुरु महाराज से तो मैंने कहा बिल्कुल लेना है। तो इसी तरह से मेरी जर्नी यहां शुरू हुई थी। फिर हम लोगों को फिर उसके लिए ट्रेन किया गया। फिर 1 आइ थिंक 2018 की बात है मेरे खयाल से कि हम लोगों को फिर बोला गया कि गुरु महाराज इनीसिएशन देंगे पर मायापुर में देंगे एंड गौर पूर्णिमा के दिन हम लोगों को इनीसिएशन मिला था तो मेरे यहाँ पर क्या है मेरी छोटी बहन है तो हम उसके साथ कुछ मतलब क्या बोले किसी तांत्रिक से उनका वशीकरण वगैरह हुआ तो मेरे घर में उस चीज को लेकर लोग काफी परेशान थे तो अगर मैं भी उसमें घुसती इस तरह से और मेरा नाम बदलता तो उनको बड़ा यह लगता कि यह 1 तो गई और दूसरी भी जा रही है इस तरह से तो मैं मनी मन में गुरु महाराज से प्रार्थना करने लगी नाम के लिए कि मेरा जो पहला नाम है उसको अगर हो सके तो मेरा पहला नाम अर्चना था कर्मी नेम तो अगर उसको समाव रिटेन करके मेरे को स्पीच नेम देंगे तो गुरु महाराज की बड़ी मेहरबानी होगी तो मैं प्रार्थना कर ही थी गुरु मारा से मैंने कहा नहीं बट मैं अंधेरी अंदर प्रार्थना करी तो जब मेरेको इनीशिएशन मिला टू माई सरप्राइज मैं बहुत हैरान रह गई कि मेरा नाम गुरु महाराज ने जो दिया वो था अर्चना भक्ति, राधा देवी दासी र ज वेरी मुझे बहुत 1 आश्चर्य हुआ मन में बहुत उनके लिए इज्जत प्यार एंड ही शो कैरिंग मतलब वो गुरु महाराज कहते भी है कि कभी मेरे से ये ऐसा समझो दूर अगर तहे दिल से कोई भी प्रार्थना करोगे तो मैं हूं तो that was p्रovd और उस चीज में मेरे को बहुत भरोसा है और पूरा फेत है कि गुरु महाराज इज आलवेज देर तो ये बहुत बड़ी चीज है तो इस तरह से मेरे को मैं स्कॉल से जुड़ी और गुरु महाराज से मेरा ये इनिशिएशन हुआ एंड। तो हां गुरु महाराज गुरु महाराज के कुछ अपने इलाज के लिए यहां चेन्नई चेन्नई आते थे गुरु महाराज। तो आई थिंक 2019 की बात है जब अति वर्द यहां पर कांची पर में 1 टेम्पल है तो जो जो भगवान है वो टैंक 1 उनको बड़े टैंक में रखा जाता है तो 40 साल के बाद वो निकालते हैं तो आई थिंक 2019 में वो समय था जब अति वर्द 1 महीने के लिए भारत दर्शन के लिए होते हैं तो सारे लोग मतलब बहुत भीड़ लगती है उनके दर्शन लेने के लिए सोचिए किसी की जिंदगी में शायद 1 बार या 2 बार मौका मिलता होगा बचपन में मिलाए तो 40 साल के बाद मिले अगर जिंदा रहे तो और जो लोग बाद में दर्शन ले रहे है तो उनके लिए शायद पहला ही मौका है तो इस तरह से था तो अतिवर्धन तो मेरे हजबंडकबैकग्राउंड पुलिस का बैकग्राउंड है तो जो बाकी जो गुरु महाराज के सर्वे से अजीत प्रभु थे बाकी लोग थे। तो उन्होंने उन्होंने मेरे पर भरोसा किया और पूछा कि तुम कुछ अरेंज कर सकोगे गुरु महाराज के लिए। तो मेरे को तो खैर ज्यादा पता नहीं था, मेरे भी पहली बार था। तो मैंने कहा बिल्कुल बिल्कुल मेरे लिए तो बहुत अच्छा मौका था, मैं जितना वेस्ट कर सकती हूं, मैं जरूर करूंगी उन्होंने मेरे को मेरे पर भरोसा किया, गुरु महाराज ने मेरे पर भरोसा किया, मैं तो मतलब मैं कुछ जानती नहीं हें, कुछ पता नहीं बट फिर भी उन्होंने मेरे पर भरोसा किया। तो ये मेरे लिए बहुत बड़ी बात थी। तो भरोसा करके फिर सभाओ, हम लोग कांचीपुरम गए, गुरु महाराज आये एक्ली गुरु महाराज की दया है कि सारी चीजें इतनी भीड़ थी, वह सब कुछ था लेकिन बहुत अच्छी तरह से गुरु महाराज के दर्शन हो गए। इट वाज और गुरु महाराज के सारे सर्वेंट्स भी उन्होंने बहुत अच्छी तरह से गुरु महाराज का ख्याल भी रखा। उनके भी अच्छे दर्शन हुए। तो वैसे तो ये गुरु महाराज की दया है, पर गुरु महाराज मेरे को देख के थैंक्यू भी बोलते हैं। तो मुझे बहुत अजीब सा लगता है कि मेरे को थैंक्यू बोल रहे हैं, मुझे बहुत बुरा लगता है मतलब मैंने तो कुछ मतलब, ये तो गुरु महाराज की मर्सी है। सो दिस इस द कंपैशन ऑफ गुरु महाराज बहुत बहुत दयावान है। आप सारी चीजें समझते हैं और मतलब वो चाहते हैं कि आप किसी न किसी तरह से आगे बढ़ो। तो ये गुरु महाराज की बहुत क्या बोले विशेष चीजें हैं। और गुरु महाराज देखिये, जो भी उनकी हालत है और उस हालत में भी वो पूरे टाइम, इतना मतलब हर चीज को, किसी चीज को ये नहीं समझते कि हां इसको ना करे। तो ठीक है, ये छोटी मोटी चीजें नहीं, हर चीज को अपना अटेंशन देते हैं पूरी तरह से मतलब, छोटे से हमें लगता है छोटे से छोटा काम, उनका कभी कोई काम छोटा नहीं लगता, सब चीज को बराबर नजर से देखते हैं और हर चीज को मुझे लगता है कि वो बराबर अटेंशन भी देते हैं, सही समय देते हैं, सब कुछ देते हैं। तो ये गुरु महाराज की बहुत बड़ी खूबी है। वो कभी नहीं सोचते कि अरे ये वाला काम ज्यादा इम्पोर्टेंट है इसको छोड़ 2 हर चीज जो उनके सामने आता है वो उसको पूरी तरह से अपना ध्यान देते हैं और पूरी तरह से ही गिफ्ट कम्प्लीट सेल्फ फॉर दैट, सिचुएशन आफ सीन दैट, इन गुरु महाराज तो ही उस टाइम पे। बहुत सारे लोग थे गुरु महाराज सब लोगों से मिले और इतने प्यार से उन सबसे मुलाकात की, उनको उनको अपना आशीर्वाद दिया, सब कुछ किया, गुरु महाराज। बहुत इट वाज, अ वेरी फैंटास्टिक एक्सपीरियंस मेरे लिए, फिर गुरु महाराज। कभी कभी जब अपने मेडिकल रीजन के लिए आते हैं, साल में 11 दफा तो तब गुरु महाराज से यहां मुलाकात होती है। अभी हाल फिलहाल 22 महीने पहले गुरु महाराज यहीं थे और मेरे हसबैंड स्कॉन से जुड़े नहीं हैं, तो उनके बहुत सारे सवाल थे। तो तो फिर संभाव गुरु महाराज इतने बिजी होने के बावजूद भी उन्होंने हम लोगों को एक्सक्लूसिव आधा घंटा दिया और 1 क्वेश्चन आंसर सेशन किया मेरे हसबैंड के साथ, मतलब हम लोगों के साथ, तो विच इस सिम्पली हिज मर्सी नथिंग ल्स नहीं तो गुरु महाराज के पास इतना समय कहाँ मतलब कितनी सारी मीटिंग्स होती हैं उनके हेल्थ शूज इतने सारे हैं और बहुत सारी चीजें हैं, उसके बावजूद भी मतलब उनके इतने सारे शिष्य हैं, फिर भी वो ये नहीं सोचा, इतने सारे शिष्य हैं मतलब किस किस को मैं इतना समय 2 न अभी भी ये जो कार्य हो रहा है, जो मैं बोल रही हूं यहां पे और हम बैठे हैं। यह भी गुरु महाराज की मतलब उनका ख्याल मतलब, उनका हमारे लिए हमारे प्रति 1 कैर है मतलब गुरु महाराज केर्स फॉर ऑल ऑफ स इसलिए तो ये सारी चीजें हो भी रही हैं। तो गुरु महाराज इस चीज पर बहुत ध्यान देते हैं, उनके जो डिसाइड है उन बड़ा की फिक्र होती है। तो यहाँ पर गुरु महाराज ने। तो मतलब हमारे जो डेटी गौर नेता, हम उनको भी लेकर गए थे। तो गुरु महाराज ने उनके उनके लिए भी मतलब नाम छांटा बोला इनमें से चुनो तुम अपने गौर नेताय के लिए गौर नेताय और हम लोगों को ब्रेस्ट भी किया और यह भी कहा कि देखो तुम रोज अपने डीटीज को स्नान कराओ, ये करो। मैंने कहा गुरु महाराज, मैं अकेली हूं जो ये सब काम करते हैं, कोई है नहीं, मेरी मदद करने के लिए मैं नहीं कर पाऊंगी। तो ने कहा चलो कोई बात नहीं, तुम रोज नहीं कर पा रहे। तो हफ्ते में 12 दफा कर लो। तो मैंने कहा मेरे से नहीं हो पायेगा, गुरु महाराज बहुत समय लगता है। तो कहते हैं कि फिर तो कुछ है नहीं, तो तुम्हें हर एकादशी करना पड़ेगा, मैं हां मैं वो कर लूंगी, यथाशक्ति जो हो सकेगा मेरे से में जरूर करोगे। तो गुरु महाराज इस वेरी वेरी अंडरस्टैंडिंग आपकी सिचुएशन को समझ के आपसे प्यार से करके जो आपके बस के उसको वो फेसिलिटेट कर देते हैं। तो गुरु महाराज की मर्सी अपरम पार है, बहुत कंपैशनेट हैं गुरु महाराज देन। तो ये मेरे बहुत छोटे छोटे एक्सपीरेंसेज रहे गुरु महाराज के साथ एड गुरु महाराज हमेशा कहते हैं कि हेल्प मी टू डिस्ट्रीब्यूट, द भगवत, गीता दैट, शिलाप्रउपदजआस्ट मी टू डिस्ट्रीब्यूट। तो वो बहुत अच्छा लगता है और करते हैं। तो गुरु महाराज डरेसीप्रोकेट्स यू नो बाई, गिविंग कुछ न कुछ, हम लोगों को हमेशा कुछ गिफ्ट देते हैं, विच इज वेरी स्प्रिचुल थिंग एंड अच्छा लगता है कि गुरु महाराज से हमें कुछ मिलता है, तो हमारे लिए मतलब ठीक है, आर्टिकल दैन इट हैज ग्रेट इमोशनल वैल्यू। तो वो हमारे लिए गुरु महाराज, गुरु महाराज और हमारे बीच 1 बॉन्ड है, वो तो इस तरह से चीजें गुरु महाराज करते हैं, बहुत सेंसिटिव लगता है कि ही वेरी वेरी सेंसेटिव अबाउट डिवोटीज एंड नॉट जस्ट हम उनके डिसाइपिल ही नहीं। गुरु महाराज इस तरह से हैं सबके लिए वो मैंने देखा कि उनके अपने डिसाइपिल के लिए नहीं वो सबके लिए ऐसे ही हैं 1 बार हम लोगों को मौका मिला था जब गुरु महाराज यहां पर थे तो उनको डॉक्टर ने बोला था कि आपको न योग खाना है कोल योग खाना है तो मेरी 1 दोस्त थी उनको ये सर्विस मिली थी। तो उन्होंने मेरे से कहा कि विल यू हेल्प मी। तो मैंने कहा हाँ ठीक है। तो हम लोगों ने गुरु महाराज के अलग अलग फ्लेवर के योग बनाए थे। तो और गुरु महाराज की तो सबको ही मालूम है कि उनकी देखिये दिनचर्या कितनी बिजी रहती है मतलब 1 के बाद 1 के बाद 11 काम होता है उनकी हेल्प के लिए भी काम होता है बहुत सारा काम होता है उनको, तो तो ठीक है हम लोगो ने बना बना के गुरु महाराज को भेजा गुरु महाराज हैड एक्सेप्टेड ऑफरिंग न ल to bad में गुरु महाराज ने record करके he center message to my friend, giving his feedback, he how the yogotwaswerthat can be space for improvement and he was he really tanger and that was such a personal tuch would the so many people are doing for him, but he took he took the inici initiative what should i say? he was so caring and sensitive that he sent a personal message saying that the yoga was very nice and you had made so many flavors and i love this a love that this one you can change and my protien content, so much you can put this, you can put that he set like that s the so amazing, i said look at this now, i mean so many people has be doing so much for him, but he he doesnt lose in opportunity to reciprocate with you fantastic, this is what comes to mind? मतलब इससे ज्यादा तो मैं क्या बोलूं? तो ऐसी ऐसी छोटी छोटी कई सारी चीजें हैं गुरु महाराज के बारे में कई लोगों से सुना है और अपने आप भी कुछ डायरेक्ट भी एक्सपीरियंस रहा है तो गुरु महाराज बहुत कम्पासनेट है ये सारी चीजें गुरु महाराज हम लोगों को दर्शाते हैं कि ऐसे रहना चाहिए और सबके लिए उनके मन में हृदय में रेस्पेक्ट है सब कुछ है तो और आप आप मेरे को कभी भी किसी चीज को लेकर जैसे विडंबना हो या लगे कि न हम कहीं गिर न जाएं हमें प्रोटेक्शन चाहिए। तो अगर इस तरह से मतलब गुरु महाराज पे पूरा भरोसा करके प्रार्थना करते हैं तो आपको कभी न कभी किसी न किसी तरीके से 1 संतावना मिलेगी गुरु महाराज से की यू नो यू आर प्रोटेक्टेड मेरे को मिला है तो मुझे भी लगता है कि यस बहुत बड़ी मीटिंग थी और मैं बहुत परेशान थी उस समय और मैं गुरु महाराज को सीधा मतलब मैं साइड में बैठी हुई थी तो गुरु महाराज बहुत पूरा कांग्रीगेशन मतलब कांग्रीगेशन थी पूरा टेम्पल भरा हुआ था तो मैं तो साइड में बैठी थी। तो मुझे उस समय बड़ा मैं किसी बड़ी दुविधा में थी और मुझे लगा था कि कि मेरे से यह छूट न जाए मैं मतलब मेरे को कौन प्रोटेक्ट करेगा अगर मेरे से भक्ति निकल गई तो मेरा क्या होगा? तो मुझे ऐसा लगा, ऐसा लग रहा था तो मैं गुरु महाराज, गुरु महाराज बोल रहे थे, सबको मतलब ही एडरसिंगदीऑडियंस, तो मैं अंधेरी अंदर प्रार्थना कर रही थी, सडनली गुरु महाराज मतलब, वो तो वैसे सीधे देख रहे थे, मैं तो साइड में थी सडनली वो अपना साइड में मेरी तरफ देख कर उन्होंने 1 हाथ से ऐसा साइन किया, वो जो कि हमेशा करता है कि युवा बिंग प्रोटेक्टेड, ऐसे करके हाथ से बताया कि चिंता मत करो, युवा प्रोटेक्टेड तो ये मेरे लिए बहुत बड़ी चीज है, मतलब ये मतलब मत ऐसा कहते हैं न कि ये ये ये रियल रिश्ता है जहाँ पर आपको बोलने की भी जरुरत नहीं है, आपके गुरु जो है आपको पूरी तरह से समझ लेते है पर ये मुझे कई बार लगता है कि यह 1 तरफ है गुरु तो हम मेरे को मतलब, मेरा ये एक्सपीरियंस रहा कि गुरु देखिये हम लोगों को पूरी थ्रू एन, थ्रू समझ लेते हैं, जान लेते हैं और जो हम चाह रहे हैं वो करते हैं। लेकिन पता नहीं क्या मैं कभी अपने गुरु महाराज को इस तरह से समझ पाऊंगी जो उनके मन में है जो वो मेरे से चाहते हैं। क्या मैं कभी कर पाउंगी ये मेरे लिए बहुत बड़ा सवाल है। तो और दूसरी बात मैं देखती हूं कि गुरु महाराज जो कि शिला प्रभुपाद के डिसाइपल हैं, वो अपने गुरु के लिए सब कुछ सब कुछ करते हैं, जो जो हमेशा अपने गुरु को याद रखते हैं और कहते हैं कि देखो प्रभुपाद ने ये बोला था। तो मेरी मदद करो कि मैं ये कर पाऊं तो मतलब औरों से मदद लेनी हो या किसी तरह से वो चीज करनी हो तो उसको कभी छोड़ते नहीं है, गुरु महाराज उस पर डटे रहते हैं इस वेरी करेजिस दैट वेस्ट मतलब उनके लिए कोई भी चीज बाधा नहीं है, किसी चीज को बाधा नहीं समझते वो आइ थिंक वो हर चीज को 1 ओपोर्चुनिटी समझते हैं तभी वो आगे मतलब चलते चले जाते हैं। सच और क्या बोले इससे बड़ा एग्जामपल क्या होगा? तो मैं बहुत ये मेरी सच में मेरा भाग्य है, बहुत अच्छा भाग्य है कि मेरे को गुरु महाराज जैसे महान जन की शरण मिली और साथ में और भी जो गुरु जन है, गुरु भाई बंधु हैं उनको उनका साथ मिला कृपा है भगवान की और मैं इसके लिए बहुत बहुत शुक्र गुजार हूं, मैं पूरी कोशिश करूंगी जितना बन सके मेरे से। i will try to solve others thank you so much harekrishna।
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